
भोरमदेव वन्यजीव अभयारण्य: नवीनतम तकनीकी पहल एवं भौगोलिक विशेषताएँ
छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में स्थित भोरमदेव वन्यजीव अभयारण्य अपनी जैव विविधता और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। हाल ही में यहाँ वन्यजीवों की निगरानी के लिए "बर्ड हियरिंग" तकनीक शुरू की गई है। यह अभयारण्य कान्हा-अचानकमार कॉरिडोर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में स्थित भोरमदेव वन्यजीव अभयारण्य अपनी जैव विविधता और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। हाल ही में यहाँ वन्यजीवों की निगरानी के लिए "बर्ड हियरिंग" तकनीक शुरू की गई है। यह अभयारण्य कान्हा-अचानकमार कॉरिडोर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
नवीनतम तकनीकी पहल एवं निगरानी
छत्तीसगढ़ वन विभाग द्वारा भोरमदेव वन्यजीव अभयारण्य में वन्यजीवों और पक्षियों की गतिविधियों पर सटीक नजर रखने के लिए आधुनिक "बर्ड हियरिंग" तकनीक को लागू किया जा रहा है। इस तकनीकी प्रणाली के माध्यम से अभयारण्य क्षेत्र में पक्षियों की आवाज़ों और वन्यजीवों की उपस्थिति का वैज्ञानिक और डिजिटल विश्लेषण किया जाएगा। इससे अवैध शिकार रोकने, वन्यजीवों के आवागमन की मॉनिटरिंग करने और संरक्षण रणनीतियों को अधिक प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी।
भौगोलिक स्थिति एवं पारिस्थितिक महत्व
यह अभयारण्य छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में सतपुड़ा पहाड़ियों की मैकल श्रेणी के अंतर्गत अवस्थित है। यह रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कान्हा-अचानकमार कॉरिडोर का हिस्सा है, जो मध्य प्रदेश के कान्हा राष्ट्रीय उद्यान को छत्तीसगढ़ के अचानकमार वन्यजीव अभयारण्य से जोड़ता है। लगभग 352 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला यह अभयारण्य अपनी उबड़-खाबड़ पहाड़ियों, घने जंगलों और जलधाराओं के लिए जाना जाता है। यहाँ उष्णकटिबंधीय नम और शुष्क पर्णपाती वन पाए जाते हैं, जिनमें साज, साल, तेंदू और यूकेलिप्टस के वृक्ष प्रमुख हैं। सकरी नदी इस क्षेत्र से प्रवाहित होती है जो यहाँ के वन्यजीवों के लिए जल का मुख्य स्रोत है।
जैव विविधता एवं सांस्कृतिक विरासत
इस अभयारण्य की समृद्ध पारिस्थितिकी में बंगाल टाइगर, तेंदुआ, सुस्त भालू, सांभर, गौर, जंगली सुअर और मॉनिटर लिज़ार्ड जैसे वन्यजीव निवास करते हैं। इसके अतिरिक्त, यहाँ पक्षियों की सौ से अधिक प्रजातियाँ पाई जाती हैं। इस भौगोलिक क्षेत्र के आसपास बैगा, गोंड और कँवर जैसी जनजातियाँ निवास करती हैं जिनकी संस्कृति वनों से जुड़ी है। अभयारण्य का नामकरण इसके समीप स्थित ऐतिहासिक भोरमदेव मंदिर के नाम पर हुआ है। नागवंशी राजवंश द्वारा सातवीं से ग्यारहवीं शताब्दी के मध्य निर्मित यह भगवान शिव को समर्पित मंदिर अपनी वास्तुकला के कारण "छत्तीसगढ़ का खजुराहो" के रूप में ख्यात है।

'वोटर लिस्ट में समान नाम फर्जी नहीं', अखिलेश पर EC का जवाब
सपा प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोपों पर यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि केवल नाम और परिजन के नाम समान होने से प्रविष्टि डुप्लीकेट नहीं मानी जा सकती। चुनाव आयोग वास्तविक दोहरी प्रविष्टियों की पहचान और सत्यापन के लिए विधिसम्मत काम कर रहा है।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव द्वारा मतदाता सूची में गड़बड़ी को लेकर लगाए गए गंभीर आरोपों पर चुनाव आयोग की ओर से जवाब सामने आया है। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने इन दावों को खारिज करते हुए स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आयोग पूरी मुस्तैदी से काम कर रहा है।
समान नाम होने का मतलब फर्जीवाड़ा नहीं
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने स्पष्ट करते हुए कहा कि केवल किसी व्यक्ति का नाम और उसके परिजन का नाम एक समान होने मात्र से किसी प्रविष्टि को डुप्लीकेट या फर्जी नहीं माना जा सकता। कई बार एक ही क्षेत्र या परिवार में समान नाम होने की संभावनाएं रहती हैं, इसलिए बिना पूरी जांच-पड़ताल के इसे गड़बड़ी करार देना उचित नहीं है।
दोहरी प्रविष्टियों पर विधिसम्मत कार्रवाई जारी
निर्वाचन आयोग ने यह भी आश्वासन दिया है कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) वास्तविक दोहरी प्रविष्टियों की पहचान करने में लगा हुआ है। ऐसी प्रविष्टियों के सही सत्यापन और उन्हें वोटर लिस्ट से हटाने के लिए पूरी तरह से विधिसम्मत प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है। आयोग का लक्ष्य एक स्वच्छ और त्रुटिरहित मतदाता सूची तैयार करना है।

अनंत अंबानी ने डिलीवरी बॉय को दिया स्कूटर का सरप्राइज
रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के एक्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर अनंत अंबानी ने साइकिल से डिलीवरी करने वाले एक राइडर सुजीत सिंह को नया स्कूटर गिफ्ट किया है। अनंत अंबानी के फाउंडेशन की इस मानवीय पहल और स्कूटर का सरप्राइज पाकर सुजीत सिंह भावुक हो गए और उनकी आंखों में आंसू आ गए।
रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के एक्ज़ीक्यूटिव डायरेक्टर अनंत अंबानी ने एक बार फिर अपने दरियादिली से लोगों का दिल जीत लिया है। उन्होंने साइकिल के जरिए डिलीवरी का काम करने वाले एक मेहनतकश राइडर सुजीत सिंह को एक नया स्कूटर गिफ्ट में दिया है। इस खबर के सामने आने के बाद से ही सोशल मीडिया पर अनंत अंबानी की खूब तारीफ हो रही है।
अनपेक्षित सरप्राइज और राइडर की भावुकता
यह तोहफा अनंत अंबानी के फाउंडेशन द्वारा चलाई जा रही एक विशेष मानवीय पहल का हिस्सा था। जब सुजीत सिंह को यह अचानक सरप्राइज मिला तो वह अपने जज्बातों पर काबू नहीं रख सके और उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। इस बेहद भावुक पल का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
सोशल मीडिया पर वीडियो हुआ वायरल
स्कूटर मिलने के बाद डिलीवरी राइडर सुजीत सिंह के चेहरे की खुशी और उनकी आंखों के आंसू लोगों के दिलों को छू रहे हैं। इस घटना का वीडियो इंटरनेट पर ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग अनंत अंबानी और उनके फाउंडेशन की इस पहल की जमकर सराहना कर रहे हैं।

माफिया अतीक अहमद की 30 करोड़ की बेनामी संपत्तियां कुर्क
प्रयागराज पुलिस और राजस्व विभाग ने गैंगस्टर एक्ट के तहत माफिया अतीक अहमद की 30 करोड़ रुपये की 14 बेनामी संपत्तियों को कुर्क कर लिया है। यह जमीन भीटी इलाके में 11 बीघा क्षेत्र में फैली हुई है, जिस पर उसकी फरार पत्नी शाइस्ता परवीन के लिए आलीशान फार्महाउस बनाने की योजना थी। अतीक अहमद की हत्या वर्ष 2023 में कर दी गई थी।
उत्तर प्रदेश में माफियाओं के खिलाफ प्रशासन की सख्त कार्रवाई लगातार जारी है। इसी कड़ी में प्रयागराज पुलिस और राजस्व विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए गैंगस्टर एक्ट के तहत कुख्यात माफिया अतीक अहमद की बेनामी संपत्तियों को जब्त कर लिया है। कुर्क की गई इन 14 संपत्तियों की कुल कीमत लगभग 30 करोड़ रुपये आंकी गई है।
भीटी इलाके में फैली थी 11 बीघा जमीन
प्रशासन द्वारा की गई यह कार्रवाई भीटी इलाके में की गई है। यहाँ 11 बीघा ज़मीन पर कुल 14 भूखंड फैले हुए थे, जिन्हें प्रशासन ने अपने कब्जे में ले लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस जमीन का इस्तेमाल एक बड़े मकसद के लिए किया जाने वाला था।
शाइस्ता परवीन के लिए बनना था फार्महाउस
सामने आई जानकारी के मुताबिक, इस जमीन पर अतीक अहमद की फरार चल रही पत्नी शाइस्ता परवीन के लिए एक आलीशान फार्महाउस तैयार करने की पूरी योजना बनाई गई थी। गौरतलब है कि अतीक अहमद की साल 2023 में हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद से उसके साम्राज्य और संपत्तियों पर लगातार कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है।

साबरमती जेल: दाऊद इब्राहिम और लॉरेन्स बिश्नोई का कनेक्शन
लॉरेन्स बिश्नोई को अहमदाबाद की साबरमती जेल के हाई-सिक्योरिटी ब्लॉक 'दो सौ खोली' में शिफ्ट किया गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 1983 में तस्करी के मामले में हिरासत में लेने के बाद दाऊद इब्राहिम को भी इसी जेल में रखा गया था। उस समय प्रतिद्वंद्वी गैंग के हमले के बाद उसे हिरासत में लिया गया और बाद में रिहा कर दिया गया था।
कुख्यात गैंगस्टर लॉरेन्स बिश्नोई को अहमदाबाद की हाई-सिक्योरिटी वाली साबरमती जेल के विशेष ब्लॉक 'दो सौ खोली' में शिफ्ट कर दिया गया है। इस जेल की सुरक्षा व्यवस्था हमेशा से चर्चा का विषय रही है। इस नए कदम के बाद यह जेल एक बार फिर अपराधियों की दुनिया और इतिहास के पन्नों के कारण सुर्खियों में आ गई है।
दाऊद इब्राहिम से साबरमती जेल का पुराना इतिहास
इस जेल का अंडरवर्ल्ड से पुराना और दिलचस्प नाता रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कुख्यात गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम को भी साल 1983 में तस्करी से जुड़े एक मामले में हिरासत में लेने के बाद इसी जेल के भीतर रखा गया था।
अतीत की घटनाएं और सुरक्षा के पहलू
ऐतिहासिक तौर पर उस दौर में प्रतिद्वंद्वी गैंग के एक हमले के बाद दाऊद इब्राहिम को हिरासत में लिया गया था। हालांकि, उस समय की कानूनी प्रक्रियाओं के तहत उसे बाद में रिहा कर दिया गया था। समय के साथ इस जेल में कई बड़े और खतरनाक अपराधियों को रखा जा चुका है।

टविशा सुसाइड मामला: HC में पूर्व जज गिरिबाला सिंह के वकील का दावा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में पूर्व-जज गिरिबाला सिंह के वकील ने कहा है कि उन्होंने गर्भपात को लेकर गुस्से में अपनी दिवंगत बहू टविशा शर्मा को 'हत्यारिन' कहा था, लेकिन उसे आत्महत्या के लिए नहीं उकसाया था। वकील के अनुसार, टविशा की मौत में उसके पति समर्थ सिंह के व्यवहार की भूमिका हो सकती है। फिलहाल गिरिबाला और समर्थ दोनों न्यायिक हिरासत में हैं।
टविशा शर्मा आत्महत्या मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान पूर्व जज गिरिबाला सिंह के वकील ने पक्ष रखा है। वकील ने अदालत को बताया कि गर्भपात के मामले को लेकर गिरिबाला सिंह काफी गुस्से में थीं और इसी आवेश में उन्होंने अपनी दिवंगत बहू टविशा शर्मा को 'हत्यारिन' कहकर संबोधित किया था। हालांकि, उनका ऐसा कोई इरादा नहीं था और उन्होंने टविशा को कभी भी आत्महत्या के लिए नहीं उकसाया था।
पति समर्थ सिंह के व्यवहार पर सवाल
बचाव पक्ष के वकील की दलील के मुताबिक, टविशा शर्मा की दुर्भाग्यपूर्ण मौत के पीछे उनके पति समर्थ सिंह के व्यवहार की भूमिका हो सकती है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत विभिन्न पहलुओं पर गौर कर रही है ताकि यह साफ हो सके कि इसके लिए असल में कौन जिम्मेदार है।
न्यायिक हिरासत में आरोपी
इस चर्चित और संवेदनशील मामले में कानूनी कार्रवाई तेजी से चल रही है। वर्तमान स्थिति के अनुसार, पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह दोनों ही न्यायिक हिरासत के तहत जेल में बंद हैं। पुलिस और अदालत इस मामले की तह तक जाने के लिए लगातार छानबीन कर रहे हैं।
Delight News
निष्पक्ष पत्रकारिता, सटीक विश्लेषण
Delight News परिवार से जुड़ें
ताजा खबरों के सबसे तेज नोटिफिकेशन और शानदार यूज़र इंटरफेस के साथ देश-दुनिया के लाइव अपडेट्स सीधे अपने mobile पर पाने के लिए हमारा Delight News Android App डाउनलोड करें।
📥 Download Android App