Delight News Logo
Latest सामान्य ख़बरें सरकारी नौकरी करेंट अफेयर्स परीक्षा ज्ञान
भारत-फ्रांस का त्रृष्णा मिशन: उच्च-रिजॉल्यूशन पृथ्वी निगरानी प्रणाली

भारत-फ्रांस का त्रृष्णा मिशन: उच्च-रिजॉल्यूशन पृथ्वी निगरानी प्रणाली

Delight News
📅 10 Sep2026

इसरो और फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी (CNES) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित 'त्रृष्णा' मिशन पृथ्वी की सतह के तापमान, जल बजट और जलवायु संकेतकों की उच्च-रिजॉल्यूशन निगरानी करेगा। पीएसएलवी द्वारा प्रक्षेपित यह उपग्रह वैश्विक कृषि, आपदा प्रबंधन और पर्यावरण संतुलन में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

भारत-फ्रांस का त्रृष्णा मिशन: उच्च-रिजॉल्यूशन पृथ्वी निगरानी प्रणाली
इसरो और फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी (CNES) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित 'त्रृष्णा' मिशन पृथ्वी की सतह के तापमान, जल बजट और जलवायु संकेतकों की उच्च-रिजॉल्यूशन निगरानी करेगा। पीएसएलवी द्वारा प्रक्षेपित यह उपग्रह वैश्विक कृषि, आपदा प्रबंधन और पर्यावरण संतुलन में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
परिचय एवं संरचना
त्रृष्णा (TRISHNA - Thermal Infra-Red Imaging Satellite for High-resolution Natural Resource Assessment) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और फ्रांसीसी अंतरिक्ष एजेंसी (CNES) का एक संयुक्त और अत्यंत महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मिशन है। इस महत्वाकांक्षी उपग्रह को आगामी वर्ष में ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV) के माध्यम से अंतरिक्ष में स्थापित किया जाएगा। यह मिशन क्षेत्रीय से लेकर वैश्विक स्तर पर पृथ्वी की सतह के तापमान, उत्सर्जन, जैव-भौतिकीय और विकिरण चरों की उच्च स्थानिक और कालिक (temporal) रिजॉल्यूशन पर निगरानी रखने के लिए विशेष रूप से इंजीनियर किया गया है।
प्रमुख पेलोड और तकनीकी विशेषताएं
यह उपग्रह दो अत्याधुनिक प्राथमिक पेलोड से सुसज्जित है। पहला, थर्मल इंफ्रा-रेड (TIR) पेलोड फ्रांस की स्पेस एजेंसी CNES द्वारा प्रदान किया गया है, जिसमें उच्च-रिजॉल्यूशन सतह के तापमान और उत्सर्जन मानचित्रण के लिए एक चार-चैनल लॉन्ग-वेव इन्फ्रारेड इमेजिंग सेंसर मौजूद है। दूसरा, विजिबल-नियर इन्फ्रारेड-शॉर्टवेव इन्फ्रारेड (VNIR-SWIR) पेलोड ISRO द्वारा विकसित किया गया है, जिसमें सतह के परावर्तन के विस्तृत मानचित्रण के लिए सात स्पेक्ट्रल बैंड शामिल हैं। यह उपग्रह 761 किलोमीटर की ऊंचाई पर सूर्य-समकालिक कक्षा में संचालित होगा, जो भूमि और तटीय क्षेत्रों के लिए 57 मीटर तथा महासागरीय और ध्रुवीय क्षेत्रों के लिए 1 किलोमीटर का स्थानिक रिजॉल्यूशन प्रदान करेगा। इसकी नियोजित परिचालन आयु 5 वर्ष है।
सामरिक और पर्यावरणीय उद्देश्य
इस मिशन के उद्देश्यों में महाद्वीपीय बायोस्फेयर के ऊर्जा और जल बजट की विस्तृत निगरानी शामिल है, जिससे स्थलीय जल तनाव का सटीक परिमाणीकरण किया जा सकेगा। यह तटीय और अंतर्देशीय जल की गतिशीलता, शहरी ताप द्वीपों, ज्वालामुखी गतिविधियों से जुड़ी थर्मल विसंगतियों, और ग्लेशियरों की गतिशीलता की उच्च-रिजॉल्यूशन पर निगरानी करेगा। इसके अलावा, यह एरोसोल ऑप्टिकल गहराई और वायुमंडलीय जल वाष्प पर मूल्यवान डेटा प्रदान करता है। इसके परिणाम जीओग्लाम (GEOGLAM), संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों और ग्लोबल वॉटर वॉच जैसी वैश्विक पहलों में आवश्यक कृषि और जलवायु चर के रूप में उपयोग किए जाएंगे।
UKPSC PCS 2026: 67 पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू

UKPSC PCS 2026: 67 पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू

Delight News
📅 10 Sep2026

उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने सम्मिलित राज्य सिविल अपर अधीनस्थ सेवा परीक्षा 2026 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इसके तहत कुल 67 पदों पर भर्ती की जाएगी। योग्य अभ्यर्थी 9 सितंबर 2026 से 29 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

UKPSC PCS 2026: 67 पदों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने सम्मिलित राज्य सिविल अपर अधीनस्थ सेवा परीक्षा 2026 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इसके तहत कुल 67 पदों पर भर्ती की जाएगी। योग्य अभ्यर्थी 9 सितंबर 2026 से 29 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग ने राज्य के प्रशासनिक ढांचे में अपनी सेवा देने के इच्छुक युवाओं के लिए बड़ा अवसर प्रदान किया है। आयोग ने आधिकारिक रूप से सम्मिलित राज्य सिविल अपर अधीनस्थ सेवा परीक्षा 2026 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है, जिसके जरिए राज्य के विभिन्न प्रमुख विभागों में अहम प्रशासनिक पदों को भरा जाएगा। प्रशासनिक सेवा की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए यह एक बेहद महत्वपूर्ण अवसर है।
महत्वपूर्ण तिथियां और ऑनलाइन आवेदन
इस भर्ती प्रक्रिया के तहत ऑनलाइन आवेदन विंडो 9 सितंबर 2026 से लाइव हो चुकी है। जो उम्मीदवार इस प्रतिष्ठित परीक्षा में शामिल होने के इच्छुक हैं, वे उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से अपना पंजीकरण करा सकते हैं। आवेदन करने की अंतिम तिथि 29 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। उम्मीदवारों को यह ध्यान रखना चाहिए कि वे अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय से पहले अपना फॉर्म भर लें ताकि सर्वर से जुड़ी तकनीकी समस्याओं से बचा जा सके।
रिक्त पदों का विवरण और दायरा
उत्तराखंड लोक सेवा आयोग द्वारा जारी इस अधिसूचना के अंतर्गत कुल 67 पदों पर योग्य उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। विभिन्न विभागों के अंतर्गत इन पदों का वर्गीकरण किया गया है, जिसकी विस्तृत जानकारी आयोग के विज्ञापन में दी गई है। राज्य सिविल सेवा के अंतर्गत आने वाले इन पदों पर चयनित होने वाले युवाओं को उत्कृष्ट वेतनमान और शानदार करियर ग्रोथ का अवसर मिलता है।
पात्रता मानदंड और योग्यता की शर्तें
इस परीक्षा में बैठने के लिए उम्मीदवारों को आयोग द्वारा निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा के सभी मानदंडों को अनिवार्य रूप से पूरा करना होगा। अलग-अलग प्रशासनिक पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा के प्रावधान भिन्न हो सकते हैं। उम्मीदवारों को आवेदन फॉर्म सबमिट करने से पहले अपनी पात्रता की पूरी जांच आधिकारिक विज्ञापन से अवश्य कर लेनी चाहिए, ताकि किसी भी स्तर पर उम्मीदवारी रद्द होने की संभावना न रहे।
चयन प्रक्रिया का चरणबद्ध प्रारूप
संयुक्त राज्य सिविल सेवा परीक्षा एक त्रि-स्तरीय चयन प्रक्रिया पर आधारित होती है, जिसमें प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार शामिल हैं। इस बार की परीक्षा का पूरा पाठ्यक्रम और चयन प्रक्रिया से जुड़े सभी नियम विज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेखित हैं। प्रारंभिक परीक्षा में सफल होने वाले अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा में बैठने का अवसर मिलेगा। परीक्षा के पैटर्न और सिलेबस को ध्यान में रखकर की गई सटीक तैयारी ही सफलता की राह तय करती है।
दिशा बैठक में राहुल और दिनेश प्रताप में तीखी तकरार

दिशा बैठक में राहुल और दिनेश प्रताप में तीखी तकरार

Delight News
📅 10 Sep2026

रायबरेली में 'दिशा' की बैठक के दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह के बीच 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' योजना के बजट और बदहाल सड़कों को लेकर तीखी नोकझोंक हुई। मंत्री ने राहुल को 'डरपोक गांधी' कहा, जबकि राहुल ने भुएमऊ गेस्ट हाउस में कई विकास योजनाओं का शिलान्यास किया।

दिशा बैठक में राहुल और दिनेश प्रताप में तीखी तकरार
खबर का निचोड़:
रायबरेली में 'दिशा' की बैठक के दौरान कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह के बीच 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' योजना के बजट और बदहाल सड़कों को लेकर तीखी नोकझोंक हुई। मंत्री ने राहुल को 'डरपोक गांधी' कहा, जबकि राहुल ने भुएमऊ गेस्ट हाउस में कई विकास योजनाओं का शिलान्यास किया।
दिशा की बैठक बना सियासी अखाड़ा
उत्तर प्रदेश के रायबरेली में आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति यानी 'दिशा' की बैठक इस बार प्रशासनिक चर्चा से कोसों दूर एक बड़े राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गई। इस हाई-प्रोफाइल बैठक में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह के बीच विकास कार्यों और बजट को लेकर ऐसी तीखी नोकझोंक हुई कि वहां मौजूद हर कोई हैरान रह गया। बैठक में राजनीतिक तापमान उस वक्त तेजी से बढ़ गया जब चर्चा का रुख स्थानीय विकास योजनाओं की वास्तविक जमीनी हकीकत और प्रशासनिक दावों की पोल खोलने की तरफ मुड़ गया।
बदहाल सड़कों और बजट पर तीखा सवाल-जवाब
बैठक के दौरान राहुल गांधी ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए अधिकारियों के सामने अपने क्षेत्र की जर्जर और बदहाल सड़कों की वास्तविक तस्वीरें पेश कीं। उन्होंने इन सबूतों के आधार पर सीधे तौर पर अधिकारियों से जवाब तलब किया। इसी बीच, देश भर में चर्चित 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' योजना के बजट और उसके वित्तीय आवंटन को लेकर राहुल गांधी और मंत्री दिनेश प्रताप सिंह के बीच शब्दों के तीर चलने लगे। दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस ने बैठक में मौजूद अन्य प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी गहरी असहजता में डाल दिया।
व्यक्तिगत बयानों से गरमाया सियासी पारा और आरोप-प्रत्यारोप
यह बहस केवल विकास के मुद्दों तक सीमित नहीं रही, बल्कि जल्द ही यह व्यक्तिगत स्तर पर उतर आई। तल्ख तेवरों के बीच राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने राहुल गांधी पर सीधा हमला बोला और उन्हें 'डरपोक गांधी' करार दिया। इस आक्रामक टिप्पणी ने राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया है और उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने आ गए हैं। इस तरह की तीखी बयानबाजी ने इस आम प्रशासनिक बैठक को एक बड़े राजनीतिक टकराव में बदल दिया, जिसके बाद से दोनों दलों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
भुएमऊ गेस्ट हाउस में विकास योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण
इस पूरे राजनीतिक घमासान और हंगामे के बीच राहुल गांधी ने अपने रायबरेली दौरे के पूर्वनिर्धारित कार्यक्रमों को जारी रखा। उन्होंने भुएमऊ गेस्ट हाउस में पहुंचकर कई महत्वपूर्ण विकास योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनता से मुलाकात कर क्षेत्र की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की। प्रशासनिक मंच पर हुई तीखी झड़पों के बीच राहुल गांधी का यह दौरा और विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन यह स्पष्ट करता है कि वे अपने राजनीतिक गढ़ में पूरी तरह से सक्रिय और आक्रामक मुद्रा में डटे हुए हैं।
तमिल राजनीति में भूचाल: विजय की TVK ने बनाया नया गठबंधन

तमिल राजनीति में भूचाल: विजय की TVK ने बनाया नया गठबंधन

Delight News
📅 10 Sep2026

तमिल सिनेमा के सुपरस्टार विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने कांग्रेस समेत चार दलों के साथ मिलकर 'सेक्युलर सोशल जस्टिस विक्ट्री अलायंस' का गठन किया है। यह नया राजनीतिक गठबंधन आगामी चुनावों में तमिलनाडु और पुडुचेरी की राजनीति का समीकरण पूरी तरह बदलने के लिए तैयार है।

तमिल राजनीति में भूचाल: विजय की TVK ने बनाया नया गठबंधन
तमिल सिनेमा के सुपरस्टार विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने कांग्रेस समेत चार दलों के साथ मिलकर 'सेक्युलर सोशल जस्टिस विक्ट्री अलायंस' का गठन किया है। यह नया राजनीतिक गठबंधन आगामी चुनावों में तमिलनाडु और पुडुचेरी की राजनीति का समीकरण पूरी तरह बदलने के लिए तैयार है।
तमिल राजनीति में नया समीकरण
तमिलनाडु की राजनीति में एक नया और शक्तिशाली राजनीतिक अध्याय शुरू हो चुका है। अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम ने एक बड़ा कदम उठाते हुए 'सेक्युलर सोशल जस्टिस विक्ट्री अलायंस' नाम से नए गठबंधन का ऐलान किया है। इस गठबंधन में कांग्रेस सहित कुल चार दल शामिल हैं, जो राज्य के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गए हैं। इस नई राजनीतिक ताकत के आने से राज्य की पारंपरिक पार्टियों के समीकरण हिल गए हैं और जनता के सामने एक नया विकल्प उभरकर सामने आया है।
2029 के पीएम चेहरे पर स्थिति स्पष्ट
गठबंधन के गठन के साथ ही राष्ट्रीय राजनीति को लेकर भी सुगबुगाहट तेज हो गई है। कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर ने स्पष्ट कर दिया है कि विजय का नेतृत्व मुख्य रूप से इस राज्य-स्तरीय गठबंधन के लिए है। वहीं, साल 2029 के लोकसभा चुनावों में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का फैसला 'इंडिया' गठबंधन मिलकर करेगा, जिसमें कांग्रेस पार्टी राहुल गांधी को अपना प्रमुख चेहरा मानती है। यह बयान राजनीतिक हलकों में कांग्रेस और टीवीके के बीच वैचारिक स्पष्टता और भविष्य की चुनावी रणनीतियों की एक सटीक तस्वीर पेश करता है।
सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता पर जोर
इस नए मोर्चे की वैचारिक नींव धर्मनिरपेक्षता और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर टिकी हुई है। गठबंधन का दावा है कि वे समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलेंगे और क्षेत्रीय मुद्दों के साथ-साथ राष्ट्रीय बहसों को भी मजबूती देंगे। अपनी इसी वैचारिक सोच के साथ यह गठबंधन आगामी उपचुनावों के जरिए चुनावी मैदान में अपनी पहली औपचारिक शुरुआत करने जा रहा है। उपचुनावों के चुनावी नतीजे यह तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे कि जनता इस नए राजनीतिक प्रयोग को कितना स्वीकार करती है।
आगामी चुनावों पर गहरा असर
तमिलनाडु और पुडुचेरी में होने वाले आगामी चुनावों के लिहाज से इस गठबंधन का वजूद बहुत अहम माना जा रहा है। विजय की भारी जनप्रियता और कांग्रेस के मजबूत कैडर बेस का यह मेल चुनावी परिणामों को बड़े पैमाने पर प्रभावित करने की पूरी क्षमता रखता है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो यह नया मोर्चा पारंपरिक द्रविड़ राजनीति और अन्य दलों के बीच के समीकरणों को कड़ा मुकाबला देने की पूरी ताकत रखता है, जिससे आने वाले चुनाव बेहद रोमांचक होने वाले हैं।
लाल किला ब्लास्ट: शू-बम और AI से रची गई साजिश

लाल किला ब्लास्ट: शू-बम और AI से रची गई साजिश

Delight News
📅 10 Sep2026

राष्ट्रीय जांच एजेंसी की चार्जशीट से लाल किला ब्लास्ट का खौफनाक सच सामने आया है। आतंकी उमर नबी ने शू-बम से आत्मघाती हमला किया था। चांदनी चौक का लाल मंदिर उनका पहला निशाना था, लेकिन ट्रैफिक के कारण योजना बदलनी पड़ी। इस साजिश में 13 आरोपी नामजद हैं और तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ।

लाल किला ब्लास्ट: शू-बम और AI से रची गई साजिश
राष्ट्रीय जांच एजेंसी की चार्जशीट से लाल किला ब्लास्ट का खौफनाक सच सामने आया है। आतंकी उमर नबी ने शू-बम से आत्मघाती हमला किया था। चांदनी चौक का लाल मंदिर उनका पहला निशाना था, लेकिन ट्रैफिक के कारण योजना बदलनी पड़ी। इस साजिश में 13 आरोपी नामजद हैं और तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ।
लाल किला ब्लास्ट की खौफनाक साजिश
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की हालिया चार्जशीट ने देश को दहलाने वाली साजिश की परतें खोल दी हैं। लाल किले के पास हुआ यह हमला कोई सामान्य आतंकी घटना नहीं, बल्कि एक सोची-समझी आत्मघाती साजिश थी। इस खौफनाक खेल को अंजाम देने वाला आतंकी उमर नबी था, जिसने अपनी ही जान की बाजी लगाते हुए इस नापाक हरकत को अंजाम दिया। जांच में यह बात सामने आई है कि इस हमले के पीछे एक बड़ा और खतरनाक नेटवर्क काम कर रहा था, जिसकी जड़ों तक पहुंचने के लिए एजेंसी लगातार जुटी हुई है।
शू-बम और ट्रैफिक ने बदला आतंकियों का प्लान
NIA की चार्जशीट के अनुसार, उमर नबी ने हमले के लिए एक बेहद शातिर तकनीक का इस्तेमाल किया। उसने अपने जूतों में बम छिपाया था, जिसे शू-बम कहा जा रहा है। आतंकियों ने शुरुआत में चांदनी चौक स्थित ऐतिहासिक लाल मंदिर को अपना निशाना बनाने की योजना बनाई थी। हालांकि, घटना के वक्त भारी ट्रैफिक होने के कारण वे अपनी इस योजना को तुरंत अंजाम नहीं दे सके। मजबूरन उन्हें अपना प्लान बदलना पड़ा, जिससे एक बड़ा हादसा टलते-टालते बचा और अंततः हमला लाल किले के पास किया गया।
AI का इस्तेमाल और 'लोन मुजाहिद पॉकेट बुक'
इस आतंकी मॉड्यूल की कार्यप्रणाली बेहद आधुनिक और तकनीकी रूप से उन्नत थी। चार्जशीट में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने सुरक्षित बातचीत के लिए सिग्नल ऐप का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया ताकि खुफिया एजेंसियों की नजरों से बचा जा सके। इसके अलावा, कट्टरपंथ और आतंकी गतिविधियों के प्रशिक्षण के लिए 'लोन मुजाहिद पॉकेट बुक' जैसे मैनुअल की मदद ली गई। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जसीर बिलाल वानी नामक आरोपी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से आईईडी (IED) बनाना सीखा था, जो आधुनिक आतंकवाद के बदलते और खतरनाक स्वरूप को रेखांकित करता है।
13 आरोपियों के नाम और पहली बार सामने आईं तस्वीरें
इस हाई-प्रोफाइल मामले में एनआईए ने कुल 13 आरोपियों को नामजद किया है। जांच एजेंसी द्वारा दायर की गई इस चार्जशीट का सबसे अहम पहलू यह है कि इसमें पहली बार सभी आतंकियों की वास्तविक तस्वीरें सार्वजनिक की गई हैं। इससे सुरक्षा एजेंसियों को इस नेटवर्क से जुड़े अन्य स्लीपर सेल्स और फरार आरोपियों की पहचान करने में आसानी होगी। देश की सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर मामले में एजेंसी की यह सख्त कार्रवाई आतंकवाद के खिलाफ कड़े संदेश का काम करती है।
मिस्र के सक्‍कारा में शाही डिक्रियों के संरक्षक की कब्र

मिस्र के सक्‍कारा में शाही डिक्रियों के संरक्षक की कब्र

Delight News
📅 10 Sep2026

मिस्र के यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल सक्‍कारा में पुरातत्वविदों ने 'शाही डिक्रियों के रहस्यों के संरक्षक' की एक प्राचीन कब्र की खोज की है। यह क्षेत्र प्राचीन मिस्र की राजधानी मेम्फिस के नेक्रोपॉलिस का हिस्सा है, जो अपने ऐतिहासिक पिरामिडों और पुरातात्विक महत्व के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है।

मिस्र के सक्‍कारा में शाही डिक्रियों के संरक्षक की कब्र
मिस्र के यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल सक्‍कारा में पुरातत्वविदों ने 'शाही डिक्रियों के रहस्यों के संरक्षक' की एक प्राचीन कब्र की खोज की है। यह क्षेत्र प्राचीन मिस्र की राजधानी मेम्फिस के नेक्रोपॉलिस का हिस्सा है, जो अपने ऐतिहासिक पिरामिडों और पुरातात्विक महत्व के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है।
सक्‍कारा पुरातात्विक स्थल की अवस्थिति और महत्व
सक्कारा प्राचीन मिस्र की राजधानी मेम्फिस का प्रमुख नेक्रोपॉलिस है, जो काहिरा से 24 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। यह रेगिस्तानी पठार के किनारे लगभग 8 किलोमीटर तक फैला हुआ है। वर्ष 1979 में इस क्षेत्र को गीज़ा के पिरामिडों और अन्य स्मारकों के साथ यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया था। यहाँ मिस्र के शुरुआती राजवंशों के काल से लेकर विभिन्न ऐतिहासिक युगों की संरचनाएं मौजूद हैं।
'शाही डिक्रियों के संरक्षक' की नवीनतम खोज
हालिया उत्खनन के दौरान पुरातत्वविदों को सक्कारा में एक महत्वपूर्ण प्राचीन कब्र मिली है जो 'शाही डिक्रियों के रहस्यों के संरक्षक' को समर्पित है। प्राचीन मिस्र की शासन प्रणाली में इस पद पर आसीन व्यक्ति शाही आदेशों और गोपनीय दस्तावेजों के संचालन के लिए उत्तरदायी था। इस खोज से प्राचीन मिस्र के प्रशासनिक ढांचे, राजशाही के आंतरिक कामकाज और उच्चाधिकारियों के सामाजिक स्तर की नई ऐतिहासिक जानकारी मिलती है।
पिरामिड वास्तुकला का उद्भव और जोसेर का स्टेप पिरामिड
सक्कारा वह ऐतिहासिक स्थल है जहाँ पारंपरिक मस्ताबा (आयताकार सपाट छत और ढलाने किनारों वाली प्राचीन कब्र) से पिरामिड वास्तुकला की ओर संक्रमण हुआ। यहाँ प्रसिद्ध वास्तुकार इमहोतेप द्वारा अभिकल्पित जोसेर का स्टेप पिरामिड स्थित है, जो दुनिया का सबसे पुराना जीवित पिरामिड है। इसकी छह-स्तरीय वास्तुकला ने प्राचीन मिस्र के पिरामिड निर्माण इतिहास में एक नए युग की शुरुआत की थी और बाद के महान पिरामिडों का मार्ग प्रशस्त किया।
सेरापेउम और अन्य ऐतिहासिक स्मारक
यहाँ पाँचवें और छठे राजवंश के राजाओं के पिरामिड भी स्थित हैं, जिनमें उनस का पिरामिड प्रमुख है जिसके दफन कक्ष में सबसे पुराने पिरामिड पाठ अंकित हैं। इसके अतिरिक्त, इस स्थल पर सेरापेउम स्थित है जो भूमिगत दीर्घाओं की एक श्रृंखला है। यहाँ मेम्फिस के सर्वोच्च देवताओं में शामिल Ptah के जीवित अवतार माने जाने वाले पवित्र अपिस सांडों को अठारहवें राजवंश से लेकर टॉलेमी काल तक दफनाया जाता था।

Delight News

निष्पक्ष पत्रकारिता, सटीक विश्लेषण

Delight News एक प्रमुख डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म है जिसका मुख्य उद्देश्य समाज में सकारात्मक बदलाव लाना और जनता तक बिल्कुल सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय हिंदी खबरें पहुंचाना है। हम बिना किसी पक्षपात के राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राजनीति, खेल, शिक्षा, सरकारी नौकरी और करंट अफेयर्स से जुड़ी हर छोटी-बड़ी ताजा खबरें आप तक सबसे पहले पहुंचाते हैं।
📬 हमसे संपर्क करें
delightnews.in@gmail.com Official YouTube Channel Official Instagram Profile

📍 अपनी लोकेशन Set करें



Privacy Policy & Terms

Delight News परिवार से जुड़ें

📱 और भी बेहतर अनुभव के लिए!

ताजा खबरों के सबसे तेज नोटिफिकेशन और शानदार यूज़र इंटरफेस के साथ देश-दुनिया के लाइव अपडेट्स सीधे अपने mobile पर पाने के लिए हमारा Delight News Android App डाउनलोड करें।

📥 Download Android App