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भारत में रूफटॉप सोलर का विस्तार: प्रगति और क्षेत्रीय चुनौतियां...

भारत में रूफटॉप सोलर का विस्तार: प्रगति और क्षेत्रीय चुनौतियां...

Delight News
📅 25 Jun2026

भारत की रूफटॉप सोलर क्षमता 25.7 गीगावाट तक पहुंच गई है, जिसमें 2026 की पहली तिमाही में 125% की प्रभावशाली वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि, यह प्रगति गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों तक केंद्रित है, जबकि अन्य राज्यों में जागरूकता और नीतिगत बाधाओं के कारण क्षेत्रीय असंतुलन बना हुआ है।

भारत में रूफटॉप सोलर का विस्तार: प्रगति और क्षेत्रीय चुनौतियां
खबर का निचोड़
भारत की रूफटॉप सोलर क्षमता 25.7 गीगावाट तक पहुंच गई है, जिसमें 2026 की पहली तिमाही में 125% की प्रभावशाली वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि, यह प्रगति गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों तक केंद्रित है, जबकि अन्य राज्यों में जागरूकता और नीतिगत बाधाओं के कारण क्षेत्रीय असंतुलन बना हुआ है।
विस्तृत विश्लेषण
रूफटॉप सोलर का वर्तमान परिदृश्य
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) के आंकड़ों के अनुसार, भारत का रूफटॉप सोलर क्षेत्र अभूतपूर्व गति से विकसित हो रहा है। 2026 की प्रथम तिमाही में 2.7 गीगावाट की नई क्षमता जुड़ना ऊर्जा संक्रमण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वर्तमान में कुल 25.7 गीगावाट की स्थापित क्षमता भारत के 'नेट-जीरो' लक्ष्यों और 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आधार स्तंभ बनी हुई है।
क्षेत्रीय असंतुलन के कारक
विकास की यह गति सभी राज्यों में समान नहीं है। गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्य औद्योगिक आधार, बेहतर ग्रिड बुनियादी ढांचे और अनुकूल राज्य-स्तरीय नीतियों के कारण अग्रणी बने हुए हैं। इसके विपरीत, कई राज्यों में डिस्कॉम (वितरण कंपनियों) की वित्तीय स्थिति, नेट मीटरिंग को लेकर जटिल प्रक्रियाएं और जागरूकता का अभाव इस तकनीक को अपनाने में बाधक बना हुआ है। क्षेत्रीय स्तर पर निवेश की असमानता यह दर्शाती है कि केवल केंद्रीय प्रोत्साहन पर्याप्त नहीं है, बल्कि राज्य-स्तरीय कार्यान्वयन में सामंजस्य की आवश्यकता है।
नीतिगत प्रोत्साहन और चुनौतियां
सरकार द्वारा संचालित 'पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' इस उछाल का प्रमुख उत्प्रेरक रही है, जिसका उद्देश्य लाखों घरों को प्रत्यक्ष सब्सिडी के माध्यम से सौर ऊर्जा से जोड़ना है। इसके बावजूद, आवासीय क्षेत्र में सोलर पैनल लगाने के लिए आवश्यक शुरुआती पूंजी की उपलब्धता और घरों की संरचनात्मक उपयुक्तता बड़ी चुनौतियां हैं। साथ ही, डिस्कॉम द्वारा राजस्व हानि के डर से रूफटॉप सोलर कनेक्शनों के प्रति अपनाई जा रही ढुलमुल नीति भी इस क्षेत्र के पूर्ण दोहन में बाधक है।
भविष्य की राह
भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय स्तर पर सौर ऊर्जा के विकेंद्रीकरण को बढ़ावा देना होगा। इसके लिए डिस्कॉम के व्यवसाय मॉडल में सुधार, रूफटॉप सोलर के लिए सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम को प्रभावी बनाना और छोटे शहरों में जागरूकता अभियान चलाना आवश्यक है। राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करना और निजी निवेश को आकर्षित करना इस अंतर को कम करने का एकमात्र स्थायी समाधान है।
परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
लक्ष्य: भारत का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म आधारित ऊर्जा क्षमता हासिल करना है।
प्रमुख योजना: 'पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना' के तहत प्रति माह 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लक्ष्य रखा गया है।
प्रौद्योगिकी: रूफटॉप सोलर के तहत मुख्य रूप से 'फोटोवोल्टिक' (PV) सेल्स का उपयोग किया जाता है, जो सीधे सूर्य के प्रकाश को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करते हैं।
नेट मीटरिंग: यह वह प्रणाली है जिसके माध्यम से उपभोक्ता द्वारा उत्पादित अतिरिक्त सौर ऊर्जा को ग्रिड में वापस भेजा जाता है और उसका समायोजन बिजली बिल में किया जाता है।
महत्व: यह न केवल कार्बन उत्सर्जन में कमी लाता है, बल्कि पारेषण और वितरण (T&D) हानियों को कम करके ग्रिड पर भार को भी कम करता है।
NTPC NGEL Recruitment 2026: इंजीनियर और एक्जीक्यूटिव पदों पर बंपर भर्ती

NTPC NGEL Recruitment 2026: इंजीनियर और एक्जीक्यूटिव पदों पर बंपर भर्ती

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📅 21 Aug2026

NTPC Green Energy Limited (NGEL) ने युवाओं के लिए करियर बनाने का एक शानदार मौका पेश किया है। संस्थान ने इंजीनियर और एक्जीक्यूटिव के कुल 147 पदों पर बंपर भर्ती निकाली है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 18 अगस्त 2026 से 7 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह एनटीपीसी के ग्रीन एनर्जी सेक्टर में जुड़ने का बेहतरीन अवसर है।

NTPC NGEL Recruitment 2026: इंजीनियर और एक्जीक्यूटिव पदों पर बंपर भर्ती
NTPC Green Energy Limited (NGEL) ने युवाओं के लिए करियर बनाने का एक शानदार मौका पेश किया है। संस्थान ने इंजीनियर और एक्जीक्यूटिव के कुल 147 पदों पर बंपर भर्ती निकाली है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 18 अगस्त 2026 से 7 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह एनटीपीसी के ग्रीन एनर्जी सेक्टर में जुड़ने का बेहतरीन अवसर है।
एनटीपीसी एनजीईएल भर्ती 2026: संक्षिप्त विवरण
एनटीपीसी ग्रीन Energy Limited (NGEL) द्वारा निकाली गई इस नई भर्ती प्रक्रिया के तहत कुल 147 रिक्त पदों को भरा जाना है। ऊर्जा और पावर सेक्टर में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले उम्मीदवारों के लिए यह एक सुनहरा मौका साबित हो सकता है। इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 18 अगस्त 2026 से शुरू हो चुकी है, जो 7 सितंबर 2026 तक चलेगी।
महत्वपूर्ण तिथियां और आवेदन प्रक्रिया
अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम तिथि यानी 7 सितंबर 2026 का इंतजार किए बिना समय रहते अपना आवेदन पूरा कर लें। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन होगी। आवेदन करने से पहले उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे आयु सीमा, शैक्षणिक योग्यता और अन्य जरूरी योग्यताओं से जुड़ी पूरी जानकारी के लिए आधिकारिक विज्ञापन को ध्यान से पढ़ लें।
योग्यता और चयन प्रक्रिया
इन पदों के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों के पास संबंधित ट्रेड में निर्धारित इंजीनियरिंग डिग्री या योग्यता होना अनिवार्य है। चयन प्रक्रिया के तहत विभाग द्वारा उम्मीदवारों की योग्यता और पात्रता के आधार पर आगे के चरण तय किए जाएंगे। चयनित होने वाले युवाओं को आकर्षक वेतनमान और बेहतरीन कॉर्पोरेट माहौल में काम करने का अवसर मिलेगा।
वंदे मातरम् पर घमासान: शर्मिला टैगोर और कंगना रनौत आमने-सामने

वंदे मातरम् पर घमासान: शर्मिला टैगोर और कंगना रनौत आमने-सामने

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📅 21 Aug2026

राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के केवल शुरुआती दो छंदों को अपनाने के फैसले पर अभिनेत्री शर्मिला टैगोर के बयान ने एक नया वैचारिक संघर्ष खड़ा कर दिया है। उन्होंने भारत की धार्मिक विविधता का हवाला देते हुए इस फैसले को पूरी तरह सही ठहराया है। उनका मानना है कि देश के बहुसांस्कृतिक ताने-बाने को बनाए रखने के लिए ऐसी समझ जरूरी है।

वंदे मातरम् पर घमासान: शर्मिला टैगोर और कंगना रनौत आमने-सामने
राष्ट्रीय गीत पर नया विवाद
राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के केवल शुरुआती दो छंदों को अपनाने के फैसले पर अभिनेत्री शर्मिला टैगोर के बयान ने एक नया वैचारिक संघर्ष खड़ा कर दिया है। उन्होंने भारत की धार्मिक विविधता का हवाला देते हुए इस फैसले को पूरी तरह सही ठहराया है। उनका मानना है कि देश के बहुसांस्कृतिक ताने-बाने को बनाए रखने के लिए ऐसी समझ जरूरी है।
कंगना रनौत की तीखी प्रतिक्रिया
शर्मिला टैगोर के इस रुख पर अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत ने बेहद आक्रामक प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस सोच को 'हिंदू-मुस्लिम वाली मानसिकता' करार दिया है। कंगना ने दो टूक शब्दों में कहा कि कला या राष्ट्रगीतों को इस तरह की संकुचित सोच से आजाद होना चाहिए। उनके मुताबिक, वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं बल्कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम की वह पवित्र भावना है, जिसने हर क्रांतिकारी में देश के प्रति समर्पण की अलख जगाई थी।
वैचारिक मतभेद और बढ़ती बहस
यह पूरा विवाद इस बात के इर्द-गिर्द घूमता है कि राष्ट्रीय प्रतीकों और गीतों को आज के दौर में किस दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। एक तरफ शर्मिला टैगोर का तर्क धार्मिक संवेदनशीलता और समावेशिता पर आधारित है, तो दूसरी तरफ कंगना रनौत का पक्ष राष्ट्रवाद और ऐतिहासिक एकता को सर्वोपरि रखता है। इन दोनों ही नजरियों ने देश की जनता और बुद्धिजीवियों के बीच एक बार फिर गहरी बहस छेड़ दी है कि राष्ट्रीय पहचान और विविधता के बीच संतुलन कैसे बैठाया जाए।
यूट्यूब को चुनौती देने आया चीन का बिलीबिली, अब ग्लोबल क्रिएटर्स भी करेंगे कमाई

यूट्यूब को चुनौती देने आया चीन का बिलीबिली, अब ग्लोबल क्रिएटर्स भी करेंगे कमाई

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📅 21 Aug2026

चीन के लोकप्रिय वीडियो प्लेटफॉर्म बिलीबिली ने वैश्विक बाजार में पैठ बनाने के लिए अपना इंटरनेशनल ऐप री-लॉन्च कर दिया है। गुलाबी ग्लोब आइकन और अंग्रेजी वेबसाइट के साथ आया यह प्लेटफॉर्म यूट्यूब को सीधी टक्कर देगा। सबसे खास बात यह है कि अब ग्लोबल क्रिएटर्स भी इस पर कंटेंट बनाकर बंपर कमाई कर सकेंगे।

यूट्यूब को चुनौती देने आया चीन का बिलीबिली, अब ग्लोबल क्रिएटर्स भी करेंगे कमाई
खबर का निचोड़
चीन के लोकप्रिय वीडियो प्लेटफॉर्म बिलीबिली ने वैश्विक बाजार में पैठ बनाने के लिए अपना इंटरनेशनल ऐप री-लॉन्च कर दिया है। गुलाबी ग्लोब आइकन और अंग्रेजी वेबसाइट के साथ आया यह प्लेटफॉर्म यूट्यूब को सीधी टक्कर देगा। सबसे खास बात यह है कि अब ग्लोबल क्रिएटर्स भी इस पर कंटेंट बनाकर बंपर कमाई कर सकेंगे।
वैश्विक बाजार में बिलीबिली की धमाकेदार एंट्री
वीडियो स्ट्रीमिंग की दुनिया में अब तक एकतरफा राज करने वाले यूट्यूब के सामने एक नई और बड़ी चुनौती आ खड़ी हुई है। चीन के सबसे चर्चित वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म बिलीबिली ने ग्लोबल यूजर्स के लिए अपना नया इंटरनेशनल ऐप आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया है। लंबे समय से चीनी घरेलू बाजार तक सीमित रहने के बाद, कंपनी का यह कदम डिजिटल कंटेंट इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव लाने का संकेत दे रहा है।
नए रूप-रंग और फीचर्स से लैस प्लेटफॉर्म
बिलीबिली का यह ग्लोबल वर्जन चीनी मूल ऐप से काफी अलग नजर आता है। यूजर्स को एक नया अनुभव देने के लिए इसके लोगो में ऊपर बाईं ओर एक खास गुलाबी ग्लोब आइकन जोड़ा गया है। यह आइकन इसे चीनी वर्जन से अलग पहचान देता है। इसके अलावा, भाषा की बाधा को खत्म करने के लिए कंपनी अपनी एक पूरी तरह समर्पित इंग्लिश वेबसाइट भी तैयार कर रही है, जिससे गैर-चीनी भाषी यूजर्स के लिए इसे नेविगेट करना और भी आसान हो जाएगा।
क्रिएटर्स को मिलेगा कमाई का नया जरिया
इस री-लॉन्च का सबसे आकर्षक पहलू बिलीबिली का मोनेटाइजेशन मॉडल है। कंपनी अब दुनिया भर के क्रिएटर्स को अपने प्लेटफॉर्म से जुड़ने और पैसे कमाने का मौका दे रही है। अब तक यूट्यूब, इंस्टाग्राम और टिकटॉक जैसे प्लेटफॉर्म्स पर निर्भर रहने वाले क्रिएटर्स के लिए बिलीबिली एक नया और फायदेमंद विकल्प बनकर उभरा है। आकर्षक रेवेन्यू शेयरिंग और विशाल यूजर बेस के दम पर कंपनी दिग्गज क्रिएटर्स को अपनी ओर खींचने की पूरी तैयारी में है।
डिजिटल दुनिया में शुरू हुआ नया मुकाबला
चीन में बिलीबिली का एनिमे, गेमिंग और पॉप-कल्चर कंटेंट में दबदबा रहा है। अब वैश्विक स्तर पर कदम रखकर कंपनी पश्चिमी टेक कंपनियों का एकाधिकार खत्म करना चाहती है। इंटरनेशनल मार्केट में बिलीबिली की यह आक्रामक रणनीति आने वाले समय में यूट्यूब और अन्य वीडियो प्लेटफॉर्म्स के बीच एक नया और दिलचस्प मुकाबला देखने को मजबूर करेगी।
इस बड़े सरकारी बैंक ने घटा दी FD की ब्याज दरें, चेक करें नया इंटरेस्ट रेट

इस बड़े सरकारी बैंक ने घटा दी FD की ब्याज दरें, चेक करें नया इंटरेस्ट रेट

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📅 21 Aug2026

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराने वाले ग्राहकों को बड़ा झटका दिया है। बैंक ने ₹3 करोड़ और उससे अधिक की घरेलू बल्क टर्म डिपॉजिट पर ब्याज दरों में कटौती की है। नई दरों के तहत कुछ चुनिंदा अवधियों पर ब्याज दरें 25 बेसिस पॉइंट तक घटा दी गई हैं।

SBI Bulk FD Interest Rate Cut 2026
देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराने वाले ग्राहकों को बड़ा झटका दिया है। बैंक ने ₹3 करोड़ और उससे अधिक की घरेलू बल्क टर्म डिपॉजिट पर ब्याज दरों में कटौती की है। नई दरों के तहत कुछ चुनिंदा अवधियों पर ब्याज दरें 25 बेसिस पॉइंट तक घटा दी गई हैं।
SBI Bulk FD पर ब्याज दरों में कटौती
भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने अपनी बल्क फिक्स्ड डिपॉजिट की ब्याज दरों को संशोधित करने का फैसला किया है। इस नए बदलाव का सीधा असर ₹3 करोड़ या उससे अधिक की राशि एक साथ जमा करने वाले बड़े निवेशकों और संस्थागत ग्राहकों पर पड़ेगा। बैंक द्वारा की गई यह कटौती चुनिंदा मैच्योरिटी अवधि वाली फिक्स्ड डिपॉजिट्स पर लागू की गई है, जिससे निवेशकों को मिलने वाले रिटर्न में कमी आएगी।
जानिए किन अवधियों पर घटा ब्याज
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने 180 दिन से लेकर 210 दिन की अवधि वाली बल्क एफडी पर ब्याज दर में 10 बेसिस पॉइंट (0.10%) की कमी की है। वहीं, कुछ अन्य चुनिंदा अवधियों की बल्क डिपॉजिट्स पर दी जाने वाली ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट (0.25%) तक की कटौती दर्ज की गई है।
बल्क एफडी आमतौर पर बड़ी कंपनियों, ट्रस्टों और उच्च निवल मूल्य वाले व्यक्तियों (HNIs) द्वारा चुनी जाती हैं। यही वजह है कि ब्याज दरों में मामूली कटौती भी लाखों रुपये के रिटर्न को प्रभावित करती है।
खुदरा ग्राहकों पर क्या होगा असर
बैंक का यह नया आदेश केवल ₹3 करोड़ और उससे अधिक की बल्क डिपॉजिट्स पर लागू होता है। आम खुदरा निवेशकों (Retail Depositors) के लिए, जो ₹3 करोड़ से कम की एफडी करवाते हैं, ब्याज दरों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। खुदरा एफडी की दरें पहले की तरह ही बनी रहेंगी, जिससे आम जमाकर्ताओं को राहत मिली है।
SBI समय-समय पर अपनी तरलता (Liquidity) की स्थिति और बाजार की परिस्थितियों की समीक्षा करने के बाद बल्क डिपॉजिट्स की ब्याज दरों में बदलाव करता रहता है। बैंक के इस कदम के बाद अब अन्य बैंक भी अपनी बल्क एफडी दरों में बदलाव कर सकते हैं।
अब सोलर पैनल लगाना होगा 20% तक महंगा, जानें वजह

अब सोलर पैनल लगाना होगा 20% तक महंगा, जानें वजह

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📅 21 Aug2026

सोलर एनर्जी अपनाने की सोच रहे लोगों और डेवलपर्स को जल्द ही बड़ा झटका लग सकता है। रेटिंग एजेंसी ICRA के अनुसार, अगले 6-8 महीनों में बड़े सोलर प्रोजेक्ट्स की लागत 20% तक बढ़ सकती है। इसकी मुख्य वजह महंगे घरेलू सोलर सेल का अनिवार्य इस्तेमाल और कॉपर-एल्यूमीनियम की बढ़ती कीमतें हैं।

अब सोलर पैनल लगाना होगा 20% तक महंगा, जानें वजह
खबर का निचोड़
सोलर एनर्जी अपनाने की सोच रहे लोगों और डेवलपर्स को जल्द ही बड़ा झटका लग सकता है। रेटिंग एजेंसी ICRA के अनुसार, अगले 6-8 महीनों में बड़े सोलर प्रोजेक्ट्स की लागत 20% तक बढ़ सकती है। इसकी मुख्य वजह महंगे घरेलू सोलर सेल का अनिवार्य इस्तेमाल और कॉपर-एल्यूमीनियम की बढ़ती कीमतें हैं।
सोलर प्रोजेक्ट्स पर मंडराया महंगाई का साया
देश में सोलर पावर को बढ़ावा देने की मुहिम के बीच एक चिंताजनक खबर सामने आई है। आने वाले छह से आठ महीनों में बड़े पैमानों के सोलर प्रोजेक्ट्स स्थापित करना काफी महंगा साबित होने वाला है। रेटिंग एजेंसी ICRA की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, सोलर प्रोजेक्ट्स की कुल लागत में 20 प्रतिशत तक का भारी इजाफा देखने को मिल सकता है। जो कंपनियां या डेवलपर्स नए प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू करने जा रहे हैं, उन्हें अब अपने बजट में बड़ा फेरबदल करना होगा।
क्यों बढ़ रही है सोलर पैनलों की लागत?
लागत में इस उछाल के पीछे दो मुख्य कारण जिम्मेदार हैं। पहला कारण सरकार का वह नया नियम है, जो 1 जून से प्रभावी हो चुका है। इसके तहत सोलर प्रोजेक्ट्स में चीन से आयातित सस्ते सोलर सेल्स के बजाय देश में बने महंगे घरेलू सोलर सेल्स का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया गया है। भारत में बने सेल्स की कीमतें विदेशी सेल्स की तुलना में अधिक हैं, जिससे सीधे तौर पर प्रोजेक्ट की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट बढ़ गई है।
दूसरा बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहा तनाव है। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसके चलते कॉपर और एल्यूमीनियम जैसी बुनियादी धातुओं के दाम आसमान छू रहे हैं। सोलर पैनल और उनके स्ट्रक्चर के निर्माण में इन धातुओं का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है, जिससे प्रोजेक्ट्स का ओवरऑल बजट काफी बढ़ गया है।
डोमेस्टिक कंटेंट रिक्वायरमेंट का असर
정부 के डोमेस्टिक कंटेंट रिक्वायरमेंट (DCR) नियम का मकसद देश को सोलर मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। हालांकि, अल्पकालिक रूप से इसका सीधा असर प्रोजेक्ट की लागत पर पड़ रहा है। घरेलू स्तर पर सोलर सेल्स का उत्पादन फिलहाल सीमित है और उनकी लागत आयातित सेल्स से ज्यादा है। जब तक देश के भीतर बड़े पैमाने पर सप्लाई चेन मजबूत नहीं होती और उत्पादन लागत कम नहीं होती, तब तक डेवलपर्स को यह अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाना ही पड़ेगा।
मेटल मार्केट का अतिरिक्त दबाव
सोलर इंडस्ट्री केवल सेल्स पर ही निर्भर नहीं होती, बल्कि इसके ढांचे और वायरिंग के लिए कॉपर तथा एल्यूमीनियम बेहद जरूरी हैं। कमोडिटी मार्केट में इन धातुओं की कीमतों में आई तेजी ने सोलर पावर डेवलपर्स की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। इन संयुक्त कारणों से आने वाले दिनों में सोलर एनर्जी सेक्टर में नई परियोजनाओं की रफ्तार और उनकी दरों पर सीधा असर देखने को मिल सकता है।

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