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अमेरिकी दबाव को भारत का दोटूक जवाब: 'तेल हमारा, फैसला भी हमारा'

अमेरिकी दबाव को भारत का दोटूक जवाब: 'तेल हमारा, फैसला भी हमारा'

Delight News
📅 03 Jun2026

भारत ने रूसी तेल खरीद पर अमेरिकी निर्देशों को खारिज करते हुए अपनी संप्रभुता और स्वतंत्र विदेश नीति को सर्वोपरि रखा है। देश के राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए भारत ने स्पष्ट किया कि वह अपनी जरूरतों के अनुसार फैसला लेगा। मई 2026 में भी रूस भारत का शीर्ष तेल आपूर्तिकर्ता बना रहा, जिससे भारत-अमेरिका संबंधों और वैश्विक भू-राजनीति में एक नया मोड़ आ गया है।

नई दिल्ली:
वैश्विक भू-राजनीति के बिसात पर भारत ने एक बार फिर दुनिया को अपनी कूटनीतिक ताकत और संप्रभुता का अहसास कराया है। रूसी तेल आयात को लेकर अमेरिका द्वारा दिए गए परोक्ष निर्देशों और दबावों का कड़ा जवाब देते हुए भारत ने साफ कर दिया है कि उसकी विदेश नीति किसी महाशक्ति के इशारों पर नहीं, बल्कि देश के 140 करोड़ नागरिकों के हितों से तय होती है। नई दिल्ली ने वैश्विक मंच पर अपनी स्वतंत्र कूटनीति का परचम लहराते हुए संकल्प दोहराया है कि वह एक संप्रभु राष्ट्र है और अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कहां से, कितना और किस कीमत पर तेल खरीदना है, यह फैसला पूरी तरह से भारत का ही होगा।
मई 2026 के ताजा व्यापारिक आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि तमाम पश्चिमी प्रतिबंधों और अमेरिकी चेतावनियों के बावजूद रूस लगातार भारत का सबसे बड़ा कच्चे तेल का आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। वहीं दूसरी ओर, भारतीय बाजारों ने अमेरिकी एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) के आयात को भी बढ़ाया है, जो यह दर्शाता है कि भारत अपनी ऊर्जा टोकरी (Energy Basket) को संतुलित रखने की कला बखूबी जानता है। इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक कूटनीति के गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है, विशेषकर तब जब चीन के प्रति अमेरिका के ढुलमुल रवैये पर भारतीय रणनीतिकारों ने तीखे सवाल खड़े किए हैं।
ऊर्जा सुरक्षा बनाम वैश्विक दबाव: भारत की मजबूरी या मजबूती?
किसी भी विकासशील और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए 'ऊर्जा' उसकी रीढ़ की हड्डी होती है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता देश है, जो अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में मामूली उतार-चढ़ाव भी देश की घरेलू अर्थव्यवस्था, महंगाई दर और राजकोषीय घाटे पर गहरा असर डालता है।
जब साल 2022 में यूक्रेन संकट के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए और रूसी तेल पर 'प्राइस कैप' (मूल्य सीमा) लागू की, तब भारत के सामने एक बड़ा संकट था। एक तरफ पश्चिमी देशों के साथ मजबूत होते रणनीतिक संबंध थे, तो दूसरी तरफ घरेलू बाजार में महंगाई को काबू में रखने की चुनौती। भारत ने कूटनीतिक परिपक्वता दिखाते हुए राष्ट्रीय हित को चुना। रूस द्वारा दिए गए भारी डिस्काउंट वाले कच्चे तेल को खरीदकर भारत ने न केवल अपने विदेशी मुद्रा भंडार को बचाया, बल्कि देश के भीतर पेट्रोल और डीजल की कीमतों को भी स्थिर रखा।
अमेरिकी प्रशासन की ओर से समय-समय पर आने वाले बयानों और निर्देशों पर भारतीय विदेश मंत्रालय का रुख हमेशा से बेहद स्पष्ट और आक्रामक रहा है। भारतीय नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि सस्ती और भरोसेमंद ऊर्जा तक पहुंच देश के गरीब और मध्यम वर्ग के जीवन स्तर को बनाए रखने के लिए अनिवार्य है। यह कोई राजनीतिक विकल्प नहीं, बल्कि एक नैतिक और राष्ट्रीय जिम्मेदारी है।
मई 2026 के आंकड़े: आंकड़ों की जुबानी, भारत की कहानी
मई 2026 की व्यापारिक रिपोर्टों पर नजर डालें तो भारत की ऊर्जा रणनीति की सफलता साफ दिखाई देती है। पश्चिमी देशों की तमाम कोशिशों के बाद भी रूस से भारत का कच्चे तेल का आयात रिकॉर्ड स्तर पर बना हुआ है। रूसी तेल कंपनियां भारतीय रिफाइनरियों को लगातार अपनी सेवाएं दे रही हैं, जिससे भारतीय रिफाइनिंग उद्योग दुनिया में एक बड़े हब के रूप में उभरा है। भारत इस सस्ते कच्चे तेल को रिफाइन करके यूरोपीय देशों को भी पेट्रोलियम उत्पादों के रूप में निर्यात कर रहा है, जो कि एक दिलचस्प विरोधाभास है।
लेकिन भारतीय कूटनीति की असली खूबसूरती इसके संतुलन में है। जहां एक तरफ रूस से कच्चा तेल आ रहा है, वहीं दूसरी तरफ मई 2026 में अमेरिका से लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) के आयात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह कदम दो महत्वपूर्ण रणनीतिक लक्ष्यों को पूरा करता है:
विविधता (Diversification): भारत किसी भी एक देश पर अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहता। अमेरिका से एलपीजी का बढ़ता आयात भारत की स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ती जरूरतों को पूरा करता है।
व्यापारिक संतुलन: अमेरिका के साथ अपने व्यापारिक घाटे को संतुलित करने और वाशिंगटन के साथ अपने रणनीतिक रिश्तों को गर्माहट देने के लिए यह एक बेहतरीन कूटनीतिक टूल है।
अमेरिका का दोहरा मापदंड और भारतीय विश्लेषकों के तीखे सवाल
इस पूरे विवाद में जो बात सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाली है, वह है भारतीय रणनीतिक और भू-राजनीतिक विश्लेषकों का आक्रामक रुख। भारतीय विशेषज्ञों ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अमेरिका और पश्चिमी देशों के दोहरे मापदंडों की धज्जियां उड़ा दी हैं।
एक तरफ अमेरिका भारत को रूसी तेल कम करने की हिदायत देता है, तो दूसरी तरफ चीन पर उसका रवैया काफी नरम या यूं कहें कि 'सावधानी' भरा दिखाई देता है। आंकड़े गवाह हैं कि चीन इस समय रूस से सबसे ज्यादा ऊर्जा (तेल और गैस दोनों) खरीदने वाला दुनिया का सबसे बड़ा देश बना हुआ है। चीनी कंपनियां लगातार रूसी ऊर्जा बुनियादी ढांचे में निवेश कर रही हैं और प्रतिबंधों को धता बताते हुए युआन में व्यापार कर रही हैं।
भारतीय विश्लेषकों का सीधा सवाल है:
जब चीन खुलेआम बड़े पैमाने पर रूसी तेल और गैस खरीद रहा है, तो अमेरिका उसके खिलाफ उस तरह की कड़े तेवर क्यों नहीं दिखाता, जैसे वह अन्य देशों को दिखाने की कोशिश करता है?
क्या अमेरिका की यह 'सावधानी' चीन की आर्थिक और सैन्य शक्ति के डर से है?
यदि यूरोपीय देश अपनी जरूरत के अनुसार अभी भी अप्रत्यक्ष रूप से रूसी गैस का उपभोग कर रहे हैं, तो विकासशील भारत पर उंगली उठाना किस हद तक न्यायसंगत है?
इन सवालों ने वाशिंगटन को कूटनीतिक रूप से बैकफुट पर ला दिया है। भारत ने यह साफ कर दिया है कि नियमों की व्याख्या दुनिया के हर देश के लिए एक समान होनी चाहिए।
एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में भारत का उदय
यह घटनाक्रम सिर्फ तेल की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है; यह 21वीं सदी के बदलते वैश्विक परिदृश्य में 'नए भारत' की बदलती कूटनीतिक भाषा का प्रतीक है। वह दौर बीत चुका है जब शीतयुद्ध के समय भारत को किसी एक गुट में शामिल होने के लिए मजबूर किया जा सकता था या प्रतिबंधों की धमकी देकर झुकाया जा सकता था।
आज का भारत 'मल्टी-अलाइनमेंट' (बहु-संरेखण) की नीति पर चलता है। इसका मतलब है कि भारत के संबंध रूस के साथ भी मजबूत रहेंगे और अमेरिका के साथ भी। भारत 'क्वाड' (QUAD) सुरक्षा गठबंधन में अमेरिका का एक अहम साझेदार है, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की विस्तारवादी नीतियों के खिलाफ खड़ा है, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि भारत अपनी आर्थिक नीतियों की चाबी वाशिंगटन को सौंप देगा।
भारतीय नेतृत्व ने वैश्विक मंचों पर यह पूरी शालीनता लेकिन दृढ़ता के साथ स्पष्ट कर दिया है कि भारत एक महान सभ्यता और संप्रभु राष्ट्र है। हमारी विदेश नीति का निर्धारण दिल्ली से होता है, किसी विदेशी राजधानी से नहीं।
वैश्विक तेल बाजार पर प्रभाव
भारत के इस कड़े रुख का वैश्विक तेल बाजार पर भी गहरा असर पड़ा है। भारत और चीन जैसे बड़े खरीदारों की वजह से रूसी तेल बाजार से बाहर नहीं हो पाया, जिससे वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में वह ऐतिहासिक उछाल नहीं आया जिसकी आशंका जताई जा रही थी। अगर भारत रूसी तेल नहीं खरीदता, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $150 प्रति बैरल के पार जा सकती थीं, जिससे दुनिया भर में हाहाकार मच जाता। एक तरह से भारत ने रूसी तेल खरीदकर वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक बड़े मंदी के झटके से बचाया है।
मई 2026 के ये घटनाक्रम बताते हैं कि आने वाले समय में ऊर्जा कूटनीति ही वैश्विक राजनीति की दिशा तय करेगी। भारत ने अपने हितों की रक्षा करके दुनिया के अन्य विकासशील देशों के सामने भी एक मिसाल पेश की है कि कैसे बिना किसी महाशक्ति के दबाव में आए अपनी संप्रभुता की रक्षा की जाती है।
सत्य निकेतन हादसा: फरार पीजी मालिक की तलाश में जुटी पुलिस

सत्य निकेतन हादसा: फरार पीजी मालिक की तलाश में जुटी पुलिस

Delight News
📅 06 Sep2026

​दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पीजी की इमारत ढहने से हड़कंप मच गया है। इस दर्दनाक हादसे में तीन लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग घायल हैं। घटना के बाद से मुख्य आरोपी और पीजी मालिक आनंद बंसल फरार है। पुलिस ने मामला दर्ज कर उसकी तलाश में जगह-जगह छापे मारने शुरू कर दिए हैं।

सत्य निकेतन हादसा: फरार पीजी मालिक की तलाश में जुटी पुलिस
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पीजी की इमारत ढहने से हड़कंप मच गया है। इस दर्दनाक हादसे में तीन लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग घायल हैं। घटना के बाद से मुख्य आरोपी और पीजी मालिक आनंद बंसल फरार है। पुलिस ने मामला दर्ज कर उसकी तलाश में जगह-जगह छापे मारने शुरू कर दिए हैं।
अचानक ढही इमारत और मातम का माहौल
दिल्ली के व्यस्त और छात्रों के बीच लोकप्रिय इलाके सत्य निकेतन में एक बड़ा हादसा सामने आया है। यहाँ अचानक एक पीजी की इमारत भरभराकर ढह गई, जिससे मौके पर चीख-पुकार मच गई। मलबे के नीचे दबने से तीन बेकसूर लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हैं। इस भयानक दुर्घटना ने स्थानीय प्रशासन और भवन निर्माण सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फरार हुआ पीजी मालिक आनंद बंसल
हादसे की भनक लगते ही पीजी का मालिक आनंद बंसल मौके से फरार हो गया। प्रशासनिक जांच में यह बात सामने आई है कि इस खतरनाक इमारत को सुरक्षा के लिहाज से एक साल पहले ही खाली कराया गया था। इसके बावजूद वहाँ किस तरह की गतिविधियां चल रही थीं और लापरवाही किसकी थी, यह पुलिस जांच का मुख्य विषय बन गया है। मालिक की गिरफ्तारी के बाद ही इस पूरी लापरवाही की परते खुल सकेंगी।
पुलिस की ताबड़तोड़ छापेमारी जारी
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत सख्त कदम उठाए हैं। न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने आरोपी मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है और उसकी धरपकड़ के लिए कई टीमों का गठन किया गया है। आरोपी की तलाश में लगातार विभिन्न ठिकानों पर छापे मारे जा रहे हैं।
बचाव अभियान और घायलों का इलाज
घटनास्थल पर युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य चलाया जा रहा है। प्रशासन और बचाव दल मलबे को हटाने में जुटे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अंदर कोई और फंसा न हो। हादसे में घायल हुए लोगों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका इलाज चल रहा है।
सत्य निकेतन इमारत हादसा: पीएम मोदी ने जताया गहरा दुख

सत्य निकेतन इमारत हादसा: पीएम मोदी ने जताया गहरा दुख

Delight News
📅 06 Sep2026

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक इमारत के गिरने से हुए भीषण हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। इस दुर्घटना में दो लोगों की जान चली गई है, जबकि प्रशासन राहत और बचाव कार्य में पूरी ताकत से जुटा हुआ है।

सत्य निकेतन इमारत हादसा: पीएम मोदी ने जताया गहरा दुख
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक इमारत के गिरने से हुए भीषण हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। इस दुर्घटना में दो लोगों की जान चली गई है, जबकि प्रशासन राहत और बचाव कार्य में पूरी ताकत से जुटा हुआ है।
प्रधानमंत्री मोदी की संवेदनाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हृदयविदारक घटना पर अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट की हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति उनकी गहरी संवेदनाएं हैं। इसके साथ ही उन्होंने इस दुर्घटना में घायल हुए सभी लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की ईश्वर से कामना की है। देश के शीर्ष नेतृत्व की ओर से इस तरह संबल मिलना इस मुश्किल समय में प्रभावित परिवारों के लिए एक बड़ा संताप कम करने वाला कदम है।
प्रशासनिक अमला और राहत कार्य
हादसे की खबर मिलते ही प्रशासनिक अमला और राहत दल तुरंत हरकत में आ गए। प्रधानमंत्री कार्यालय ने स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखी है। पीएम मोदी ने खुद इस बात की जानकारी दी कि अधिकारी और बचाव दल तुरंत घटनास्थल पर मुस्तैदी से काम कर रहे हैं। मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने और हादसे से प्रभावित हर संभव व्यक्ति तक मदद पहुँचाने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
सुरक्षा और लापरवाही के सवाल
राजधानी दिल्ली के घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इस प्रकार की पुरानी या कमजोर इमारतों का जर्जर हालत में होना एक बहुत बड़ा खतरा बनता जा रहा है। सत्य निकेतन की इस घटना ने एक बार फिर निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय प्रशासन अब इस बात की जांच में जुट गया है कि आखिर इस इमारत के गिरने के पीछे वास्तविक कारण क्या थे और क्या यहाँ किसी प्रकार की प्रशासनिक अनदेखी या नियमों की अवहेलना हुई थी।
दिल्ली बिल्डिंग हादसा: 2 की मौत, सीएम रेखा गुप्ता ने लिया जायजा

दिल्ली बिल्डिंग हादसा: 2 की मौत, सीएम रेखा गुप्ता ने लिया जायजा

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📅 06 Sep2026

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए एक दर्दनाक बिल्डिंग हादसे में दो बेकसूर लोगों की जान चली गई है, जबकि छह अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। इस गंभीर दुर्घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया और शीर्ष नेतृत्व ने तत्काल मौके का रुख किया।

दिल्ली बिल्डिंग हादसा: 2 की मौत, सीएम रेखा गुप्ता ने लिया जायजा
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए एक दर्दनाक बिल्डिंग हादसे में दो बेकसूर लोगों की जान चली गई है, जबकि छह अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। इस गंभीर दुर्घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया और शीर्ष नेतृत्व ने तत्काल मौके का रुख किया।
घटना का दर्दनाक मंजर और प्रशासनिक हलचल
राजधानी दिल्ली के व्यस्त क्षेत्र सत्य निकेतन में इमारत ढहने की इस आकस्मिक दुर्घटना ने सबको झकझोर कर रख दिया है। अचानक हुए इस हादसे की चपेट में आने से दो लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। वहीं, इस भयानक मलबे के नीचे दबने से छह अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हादसे की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया और स्थानीय लोग तुरंत बचाव कार्य में जुट गए।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और सांसद बांसुरी स्वराज का दौरा
दुर्घटना की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और स्थानीय सांसद बांसुरी स्वराज ने तुरंत घटनास्थल का दौरा किया और हालात का जायजा लिया। नेताओं ने दुर्घटना स्थल पर पहुंचकर पूरी स्थिति का बारीकी से निरीक्षण किया और प्रशासनिक अधिकारियों से घटना के कारणों की पूरी रिपोर्ट मांगी। इस दौरान उनके साथ सुरक्षा बलों और राहत कर्मियों का बड़ा अमला भी मौजूद रहा, जो लगातार स्थिति को नियंत्रित करने में जुटा हुआ था।
युद्धस्तर पर बचाव और राहत कार्य
मौके पर पहुंचीं मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राहत और बचाव कार्यों की कमान खुद संभाली और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मलबे में फंसे एक-एक शख्स को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन को और तेज किया जाए। इसके साथ ही, अस्पतालों में भर्ती घायलों को बिना किसी देरी के बेहतर से बेहतर चिकित्सीय सुविधा मुहैया कराने के भी कड़े निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी पीड़ित को इलाज के अभाव में परेशानी न उठानी पड़े। प्रशासन अब यह भी जांच कर रहा है कि यह इमारत किस वजह से ढही और इसमें किन नियमों की अनदेखी की गई थी।
सत्य निकेतन हादसा: राहुल गांधी का कड़ा संदेश, हर छात्र की जान कीमती

सत्य निकेतन हादसा: राहुल गांधी का कड़ा संदेश, हर छात्र की जान कीमती

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📅 06 Sep2026

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए भीषण बिल्डिंग हादसे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि छात्रों का जीवन पहले से ही संघर्षों से घिरा होता है और अब ऐसे जानलेवा हालात चिंताजनक हैं। प्रशासन और बचाव दलों को युद्धस्तर पर राहत कार्य चलाने के निर्देश दिए गए हैं।

सत्य निकेतन हादसा: राहुल गांधी का कड़ा संदेश, हर छात्र की जान कीमती
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए भीषण बिल्डिंग हादसे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि छात्रों का जीवन पहले से ही संघर्षों से घिरा होता है और अब ऐसे जानलेवा हालात चिंताजनक हैं। प्रशासन और बचाव दलों को युद्धस्तर पर राहत कार्य चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
सत्य निकेतन हादसे पर राहुल गांधी की दो टूक
दिल्ली के सत्य निकेतन में घटी दर्दनाक घटना ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। इस गंभीर दुर्घटना के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही और व्यवस्था की कमियों पर सवाल खड़े किए हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब राजधानी में छात्रों की सुरक्षा को लेकर बड़े दावे किए जाते हैं।
छात्रों का जीवन संघर्षों से भरा और अब हालात जानलेवा
राहुल गांधी ने अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि देश का युवा और छात्र वर्ग पहले से ही अपने भविष्य को लेकर अनगिनत संघर्षों का सामना कर रहा है। ऐसे में पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों से आने वाले इन युवाओं को यदि इस तरह के जानलेवा हालातों का सामना करना पड़े, तो यह व्यवस्था की बड़ी विफलता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षण संस्थानों और कोचिंग hubs के आसपास रहने वाले छात्रों के लिए सुरक्षित माहौल तैयार करना प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
बचाव दलों के लिए तत्काल निर्देश और हर संभव प्रयास
घटना की सूचना मिलते ही राहुल गांधी ने राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने की अपील की। उन्होंने प्रशासन को निर्देशित किया है कि बचाव दल बिना एक भी पल गंवाए मलबे में फंसे प्रत्येक छात्र तक पहुंचे। उनका साफ कहना था कि इस आपदा की घड़ी में हर एक छात्र की जान बेहद कीमती है और उसकी रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास तुरंत किए जाने चाहिए।
मुश्किल घड़ी में पीड़ितों के साथ खड़ी है पार्टी
इस दुखद हादसे के बाद राजनीतिक दलों द्वारा प्रभावित परिवारों को ढांढस बंधाने का सिलसिला जारी है। राहुल गांधी ने व्यक्तिगत रूप से और अपनी पार्टी की ओर से यह विश्वास दिलाया है कि इस विकट और मुश्किल घड़ी में वे सभी पीड़ित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए उन्होंने अधिकारियों से यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
UPSC EPFO APFC Recruitment 2026: 80 पदों पर भर्ती का शानदार मौका

UPSC EPFO APFC Recruitment 2026: 80 पदों पर भर्ती का शानदार मौका

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📅 06 Sep2026

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में असिस्टेंट प्रोविडेंट फंड कमिश्नर (APFC) के 80 पदों पर बंपर भर्ती निकाली है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 11 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह प्रशासनिक क्षेत्र में अपना करियर बनाने वाले युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर है।

UPSC EPFO APFC Recruitment 2026: 80 पदों पर भर्ती का शानदार मौका
खबर का निचोड़
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में असिस्टेंट प्रोविडेंट फंड कमिश्नर (APFC) के 80 पदों पर बंपर भर्ती निकाली है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 11 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह प्रशासनिक क्षेत्र में अपना करियर बनाने वाले युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर है।
आवेदन प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तिथियां
यूपीएससी ईपीएफओ एपीएफसी भर्ती 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 22 अगस्त 2026 को शुरू हो चुकी है। आवेदन करने की अंतिम तिथि 11 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। जो उम्मीदवार देश के प्रतिष्ठित प्रशासनिक पदों पर अपनी जगह बनाना चाहते हैं, उन्हें तय समय सीमा के भीतर आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना आवेदन पत्र जमा करना होगा। अंतिम समय में सर्वर पर लोड बढ़ने की संभावना को ध्यान में रखते हुए समय से पहले आवेदन करना समझदारी होगी।
रिक्तियों का विवरण और योग्यता
इस बार कुल 80 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इन पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा से जुड़े तमाम नियम यूपीएससी के आधिकारिक विज्ञापन में विस्तार से दिए गए हैं। सामान्यतः इस पद के लिए उम्मीदवारों के पास मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन की डिग्री होना अनिवार्य है। इसके साथ ही तय आयु सीमा के दायरे में आने वाले आवेदक ही इस प्रक्रिया का हिस्सा बन सकते हैं। आरक्षित श्रेणियों के उम्मीदवारों को नियमानुसार आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी।
चयन प्रक्रिया और वेतनमान
चयन प्रक्रिया बेहद पारदर्शी और सख्त होती है, जिसमें आमतौर पर लिखित परीक्षा और साक्षात्कार (इंटरव्यू) शामिल होते हैं। लिखित परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवारों को ही अगले चरण के लिए बुलाया जाता है। इस पद पर चयनित होने वाले युवाओं को आकर्षक वेतनमान और सरकारी सेवाओं मिलने वाले तमाम बेहतरीन लाभ व भत्ते दिए जाते हैं। यही वजह है कि हर साल लाखों उम्मीदवार इस प्रतिष्ठित परीक्षा के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं।
कैसे करें आवेदन
आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को सबसे पहले यूपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। वहां ओटीआर (One Time Registration) प्रक्रिया पूरी करने के बाद ईपीएफओ एपीएफसी भर्ती के लिंक पर क्लिक करना होगा। मांगी गई सभी जरूरी जानकारी सावधानीपूर्वक भरने और निर्धारित शुल्क का भुगतान करने के बाद आवेदन पत्र को सबमिट कर दें। भविष्य के संदर्भ के लिए फाइनल सबमिट किए गए फॉर्म का एक प्रिंटआउट अपने पास जरूर सुरक्षित रख लें।

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