
अहमदाबाद को पछाड़ेगा हैदराबाद, बनेगा दुनिया का सबसे बड़ा स्टेडियम
तेलंगाना की 'भारत फ्यूचर सिटी' में विश्व का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम आकार लेने जा रहा है। लगभग 100 एकड़ में फैले इस हाइटेक स्टेडियम की दर्शक क्षमता 1.32 लाख से अधिक होगी। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम को पीछे छोड़ने वाले इस ड्रीम प्रोजेक्ट का शिलान्यास दिसंबर 2026 में प्रस्तावित है
खबर का निचोड़
तेलंगाना की 'भारत फ्यूचर सिटी' में विश्व का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम आकार लेने जा रहा है। लगभग 100 एकड़ में फैले इस हाइटेक स्टेडियम की दर्शक क्षमता 1.32 लाख से अधिक होगी। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम को पीछे छोड़ने वाले इस ड्रीम प्रोजेक्ट का शिलान्यास दिसंबर 2026 में प्रस्तावित है।
भारत फ्यूचर सिटी में रचेगा नया इतिहास
भारतीय क्रिकेट के इंफ्रास्ट्रक्चर में जल्द ही एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। तेलंगाना सरकार ने हैदराबाद के पास बन रही आधुनिक 'भारत फ्यूचर सिटी' में एक विश्वस्तरीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम बनाने की भव्य योजना तैयार की है। यह स्टेडियम न केवल भारतीय खेल जगत की शान बढ़ाएगा, बल्कि वैश्विक पटल पर भारत की खेल क्षमता को एक नया आयाम भी देगा।
नरेंद्र मोदी स्टेडियम का टूटेगा रिकॉर्ड
वर्तमान में गुजरात के अहमदाबाद स्थित नरेंद्र मोदी स्टेडियम 1.32 लाख दर्शकों की क्षमता के साथ दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम है। हैदराबाद का यह नया प्रस्तावित स्टेडियम क्षमता के मामले में अहमदाबाद को पीछे छोड़ देगा। 1,32,000 से अधिक सीटिंग कैपेसिटी के साथ यह निर्माणाधीन स्टेडियम दुनिया का सबसे विशाल क्रिकेट ग्राउंड बन जाएगा, जहाँ एक साथ लाखों प्रशंसक मैच का रोमांच महसूस कर सकेंगे।
100 एकड़ में फैलेगा अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए लगभग 100 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है। मैदान की विशालता के साथ-साथ यहाँ दर्शकों की सुविधा, पार्किंग, सुरक्षा और खिलाड़ियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाएगा। इसमें आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम, वर्ल्ड-क्लास पवेलियन और एडवांस ट्रेनिंग सेंटर्स शामिल होंगे, जो इसे 21वीं सदी का सबसे आधुनिक स्पोर्ट्स हब बनाएंगे।
दिसंबर 2026 में शिलान्यास की तैयारी
इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो दिसंबर 2026 में इसका आधिकारिक शिलान्यास (फाउंडेशन स्टोन) रखा जा सकता है। शिलान्यास के बाद निर्माण कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि आने वाले समय में यहाँ अंतरराष्ट्रीय मुकाबले और आईसीसी के बड़े टूर्नामेंट्स आयोजित किए जा सकें।

सहारनपुर में 7.40 करोड़ के जाली नोटों का खेल, तीन बैंक मैनेजर सस्पेंड
सहारनपुर के पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट में करोड़ों के जाली नोटों के खुलासे ने बैंकिंग और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। एसआईटी जांच और ताबड़तोड़ पुलिस दबिश के बीच यह बैंकिंग धोखाधड़ी का एक नया और बड़ा मामला बन चुका है।
सहारनपुर के पंजाब नेशनल बैंक की करेंसी चेस्ट में करोड़ों के जाली नोटों के खुलासे ने बैंकिंग और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। एसआईटी जांच और ताबड़तोड़ पुलिस दबिश के बीच यह बैंकिंग धोखाधड़ी का एक नया और बड़ा मामला बन चुका है।
बैंक के भीतर करोड़ों का काला खेल
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में बैंकिंग व्यवस्था की साख को झकझोर देने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां के पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की सोफिया मार्केट स्थित मुख्य करेंसी चेस्ट से चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। चेस्ट के भीतर से चेकिंग के दौरान 7.40 करोड़ रुपये के जाली नोट बरामद किए गए हैं। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद से बैंकिंग महकमे में भूचाल आ गया है और हर कोई हैरान है कि आखिर सुरक्षा के कड़े पहरे वाले बैंक के भीतर इतने बड़े पैमाने पर जाली नोट पहुंचे कैसे।
गाज गिरी, तीन मैनेजर निलंबित और एसआईटी गठित
मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक उच्चाधिकारियों ने तुरंत कड़ा एक्शन लिया है। गड़बड़ी सामने आने के बाद लापरवाही और मिलीभगत के आरोप में तीन बैंक मैनेजरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा, करेंसी चेस्ट से जुड़े पार्ट टाइम हाउस कीपर विशाल कुमार को भी उसकी सेवाओं से हटा दिया गया है। पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह हरकत में है। डीआईजी अभिषेक सिंह ने इस पूरे मामले की तह तक जाने और असली मास्टरमाइंड तक पहुंचने के लिए एक विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन कर दिया है।
सीमाओं से बाहर दबिश और जलालाबाद का कनेक्शन
कानून का शिकंजा कसता देख आरोपी और संदिग्ध भूमिगत हो गए हैं। पुलिस की कई टीमें नामजद और संलिप्त आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए उत्तर प्रदेश के अलावा पड़ोसी राज्यों हरियाणा, उत्तराखंड और आसपास के तमाम जिलों में लगातार दबिश दे रही हैं। माना जा रहा है कि इस फर्जीवाड़े के तार कई राज्यों में फैले एक बड़े अंतरराज्यीय सिंडिकेट से जुड़े हो सकते हैं। पुलिस तकनीकी सर्विलांस और बैंक के सीसीटीवी फुटेज के जरिए कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
उपभोक्ताओं की सांसें अटकीं, बीस दिन का वक्त
इस वित्तीय घोटाले का असर आम खाताधारकों पर भी सीधा पड़ा है। जलालाबाद शाखा में सामने आए जाली नोटों के प्रकरण और उसके बाद उपजे अविश्वास के माहौल के बीच, बैंक अधिकारियों ने उपभोक्ताओं को राहत देने की कोशिश की है। बैंक प्रबंधन ने ग्राहकों की फंसी हुई रकम को वापस लौटाने और खातों के मिलान के लिए 20 दिन का वक्त मांगा है। पुलिस और प्रशासन की यह संयुक्त कार्रवाई अब किस नए मोड़ पर पहुंचती है, इस पर पूरे प्रदेश की नजर टिकी हुई है।

अयोध्या राम मंदिर के लिए चार करोड़ का दान बना सिरदर्द, बैंक खाते में मिले सिर्फ 3 रुपये
अयोध्या के भव्य राम मंदिर के निर्माण और व्यवस्थाओं में सहयोग के लिए देश-विदेश से लगातार करोड़ों रुपये का गुप्त और खुला दान आ रहा है। इसी कड़ी में चेन्नई की एक महिला श्रद्धालु द्वारा दिए गए चार करोड़ रुपये के भारी-भरकम दान का चेक बाउंस होने का मामला सामने आया है। बैंक में जब इस चेक को भुनाने के लिए लगाया गया, तो खाते की स्थिति देखकर मंदिर प्रशासन भी हैरान रह गया।
अयोध्या के भव्य राम मंदिर के निर्माण और व्यवस्थाओं में सहयोग के लिए देश-विदेश से लगातार करोड़ों रुपये का गुप्त और खुला दान आ रहा है। इसी कड़ी में चेन्नई की एक महिला श्रद्धालु द्वारा दिए गए चार करोड़ रुपये के भारी-भरकम दान का चेक बाउंस होने का मामला सामने आया है। बैंक में जब इस चेक को भुनाने के लिए लगाया गया, तो खाते की स्थिति देखकर मंदिर प्रशासन भी हैरान रह गया।
राम मंदिर ट्रस्ट को लगा बड़ा झटका
चेन्नई की रहने वाली श्रद्धालु एस. नागलक्ष्मी ने अयोध्या राम मंदिर के कर्मचारियों की सुविधाओं के लिए चार करोड़ रुपये का चेक राम मंदिर ट्रस्ट को सौंपा था। ट्रस्ट ने इस दान को बेहद अहम मानते हुए जब राशि को बैंक में समाशोधन (क्लियरेंस) के लिए जमा किया, तो बैंक ने इसे अस्वीकार कर दिया। खाते की तकनीकी जांच करने पर पता चला कि एस. नागलक्ष्मी के उस बैंक खाते में मात्र 3 रुपये शेष बचे थे। इतनी बड़ी राशि के चेक का बाउंस होना और खाते में केवल तीन रुपये होना हर किसी के लिए हैरानी का विषय बन गया है।
लिखित आश्वासन और शर्तों का पेंच
दान देने वाली महिला एस. नागलक्ष्मी ने इस चार करोड़ रुपये के योगदान के एवज में मंदिर ट्रस्ट से एक लिखित आश्वासन की मांग भी की थी। उनकी शर्त थी कि इस धनराशि का उपयोग विशेष रूप से मंदिर परिसर में काम करने वाले कर्मचारियों की सुविधाओं और कल्याण के लिए ही किया जाना चाहिए। ट्रस्ट ने महिला की मंशा का सम्मान करते हुए कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर मामले को सुलझाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, ताकि किसी भी तरह की भ्रांति को दूर किया जा सके।
ट्रस्ट और बैंक की अगली कानूनी कार्रवाई
मामले के तूल पकड़ने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट पूरी तरह से सतर्कता बरत रहा है। ट्रस्ट के जिम्मेदार अधिकारी महिला श्रद्धालु से सीधे संपर्क साधने में जुटे हैं ताकि आपसी बातचीत के जरिए इस अजीबोगरीब स्थिति का कोई सम्मानजनक समाधान निकाला जा सके। दूसरी ओर, बैंकिंग नियमों के तहत संबंधित बैंक भी इस बाउंस हुए चेक को लेकर एस. नागलक्ष्मी को औपचारिक नोटिस जारी करने की तैयारी कर रहा है। शुरुआती उत्साह के बाद अब यह मामला कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बीच उलझता हुआ नजर आ रहा है।

बादशाह और ईशा रिखी का तलाक: शादी के पांच महीने बाद टूटा रिश्ता
शादी के महज पांच महीने बाद ही मशहूर रैपर बादशाह और अभिनेत्री ईशा रिखी ने अपने रास्ते अलग कर लिए हैं। आपसी सहमति से लिए गए इस फैसले ने उनके फैंस को हैरान कर दिया है। सोशल मीडिया पर एक संयुक्त बयान जारी कर दोनों ने अपने तलाक की आधिकारिक पुष्टि कर दी है।
शादी के महज पांच महीने बाद ही मशहूर रैपर बादशाह और अभिनेत्री ईशा रिखी ने अपने रास्ते अलग कर लिए हैं। आपसी सहमति से लिए गए इस फैसले ने उनके फैंस को हैरान कर दिया है। सोशल मीडिया पर एक संयुक्त बयान जारी कर दोनों ने अपने तलाक की आधिकारिक पुष्टि कर दी है।
एक चौंकाने वाला फैसला
चकाचौंध भरी ग्लैमर इंडस्ट्री से एक बार फिर दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। लोकप्रिय रैपर और गायक बादशाह और अभिनेत्री ईशा रिखी ने अपने वैवाहिक जीवन पर हमेशा के लिए विराम लगा दिया है। महज पांच महीने पहले ही दोनों की शादी की खबरों ने गलियारों में सुर्खियां बटोरी थीं, लेकिन अब उनके इस रिश्ते का अंत हो चुका है। दोनों ने सोशल मीडिया के जरिए अपने फैंस को इस बात की जानकारी दी है कि उन्होंने आपसी सहमति से अलग होने का फैसला किया है। इस अचानक आए फैसले से उनके चाहने वाले सदमे में हैं।
मार्च में रचाई थी गुप्त शादी
बादशाह और ईशा रिखी की लव स्टोरी काफी चर्चा में रही थी। इसी साल मार्च 2026 में दोनों के गुप्त रूप से शादी करने की खबरें मीडिया में आई थीं। इस जोड़े ने बेहद निजी समारोह में एक-दूसरे का हाथ थामा था, जिसमें केवल करीबी दोस्त और परिवार के लोग ही शामिल हुए थे। शुरुआत में दोनों ने अपने रिश्ते को मीडिया की लाइमलाइट से दूर रखा था, लेकिन धीरे-धीरे उनके अफेयर और फिर शादी की बातें खुलकर सामने आने लगीं। फैंस को उम्मीद थी कि यह जोड़ी लंबे समय तक साथ निभाएगी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
जुलाई में शुरू हुई थीं अनबन की अटकलें
खट्टी-मीठी यादों के साथ शुरू हुआ यह सफर ज्यादा लंबा नहीं चल सका। जुलाई 2026 में ईशा रिखी के एक भावनात्मक सोशल मीडिया पोस्ट ने इन चर्चाओं को हवा दे दी कि दोनों के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। उनके उस क्रिप्टिक पोस्ट के बाद से ही इंडस्ट्री में उनके रिश्ते में दरार आने की खबरें तैरने लगी थीं। हालांकि, तब दोनों ने इस पर चुप्पी साध रखी थी, लेकिन अंदरखाने की स्थिति उतनी सहज नहीं थी जितनी बाहर से दिखाई दे रही थी। आखिरकार अफवाहें सच साबित हुईं।
31 अगस्त को जारी किया संयुक्त बयान
सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए 31 अगस्त 2026 को बादशाह और ईशा ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक संयुक्त बयान साझा किया। इस बयान में उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने परिपक्वता के साथ अलग होने का मुश्किल निर्णय लिया है। उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि भले ही वे अब पति-पत्नी नहीं हैं, लेकिन एक-दूसरे के प्रति उनके मन में सम्मान बना रहेगा। साथ ही, उन्होंने इस संवेदनशील समय में मीडिया और प्रशंसकों से उनकी निजता का सम्मान करने का विशेष आग्रह किया है ताकि वे अपनी जिंदगी में आगे बढ़ सकें।

बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन की मुख्य बातें
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया है। यह ऐतिहासिक अवसर यूरेशियाई ब्लॉक की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और आतंकवाद के खिलाफ रणनीतिक साझेदारी पर मुख्य रूप से विचार-विमर्श किया जा रहा है।
सारांश (Summary): किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया है। यह ऐतिहासिक अवसर यूरेशियाई ब्लॉक की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और आतंकवाद के खिलाफ रणनीतिक साझेदारी पर मुख्य रूप से विचार-विमर्श किया जा रहा है।
विस्तृत विश्लेषण (Detailed Analysis):
शंघाई सहयोग संगठन की पृष्ठभूमि और विकास
शंघाई सहयोग संगठन एक स्थायी अंतर-सरकारी अंतर्राष्ट्रीय संगठन है, जिसकी स्थापना 15 जून 2001 को शंघाई में की गई थी। इसके संस्थापकों में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान शामिल थे। वर्ष 2017 में अस्ताना शिखर सम्मेलन के दौरान भारत और पाकिस्तान को इसके पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल किया गया था, जिसके बाद इस संगठन का भू-राजनीतिक दायरा और अधिक विस्तृत हो गया। ईरान और बेलारूस जैसे देश भी इसके नवीनतम सदस्य हैं, जो यूरेशियाई क्षेत्र में इसकी बढ़ती प्रासंगिकता को दर्शाते हैं।
बिश्केक शिखर सम्मेलन का सामरिक महत्व
बिश्केक में हो रहा यह 26वां शिखर सम्मेलन संगठन के गठन के रजत जयंती वर्ष (25 वर्ष) के अवसर पर आयोजित हो रहा है। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय सुरक्षा वास्तुकला को मजबूत करना, आपसी व्यापार को बढ़ावा देना और कनेक्टिविटी परियोजनाओं में तेजी लाना है। सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं द्वारा आतंकवाद, अलगाववाद और अतिवाद जैसी साझा सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए संयुक्त रणनीतियों पर विशेष बल दिया जा रहा है। इसके अलावा, सदस्य देशों के बीच आर्थिक एकीकरण और वित्तीय तंत्र को मजबूत करने के उपायों पर भी व्यापक आम सहमति बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
भारत के लिए रणनीतिक और भू-राजनीतिक निहितार्थ
भारत के लिए शंघाई सहयोग संगठन मध्य एशिया के साथ संपर्क स्थापित करने का एक प्रमुख मंच है, जिसे 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति के रूप में भी देखा जाता है। यह मंच भारत को ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने, आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक मंचों पर अपनी बात मजबूती से रखने और क्षेत्रीय स्थिरता में अपनी भूमिका निभाने का अवसर प्रदान करता है। इस सम्मेलन के माध्यम से भारत मध्य एशियाई गणराज्यों के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को प्रगाढ़ करने के साथ-साथ क्षेत्रीय व्यापार गलियारों जैसे अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC) पर अपनी प्राथमिकताओं को रेखांकित करता है।

क्वांटम इलेक्ट्रोडायनामिक्स और वैक्यूम बाइफ्रिंजेंस: यूपीएससी परीक्षा के लिए विश्लेषण
मैग्नेटर 1E 1547.0-5408 के चारों ओर वैक्यूम बाइफ्रिंजेंस के मजबूत साक्ष्य मिले हैं, जहां एक्स-रे ने 80% तक ध्रुवीकरण प्रदर्शित किया है। यह अवलोकन क्वांटम इलेक्ट्रोडायनामिक्स के उस सिद्धांत की पुष्टि करता है जिसके अनुसार निर्वात पूरी तरह से खाली नहीं होता है।
सारांश (Summary):
मैग्नेटर 1E 1547.0-5408 के चारों ओर वैक्यूम बाइफ्रिंजेंस के मजबूत साक्ष्य मिले हैं, जहां एक्स-रे ने 80% तक ध्रुवीकरण प्रदर्शित किया है। यह अवलोकन क्वांटम इलेक्ट्रोडायनामिक्स के उस सिद्धांत की पुष्टि करता है जिसके अनुसार निर्वात पूरी तरह से खाली नहीं होता है।
विस्तृत विश्लेषण:
वैक्यूम बाइफ्रिंजेंस का अर्थ और महत्व
वैक्यूम बाइफ्रिंजेंस क्वांटम इलेक्ट्रोडायनामिक्स (QED) का एक पूर्वानुमानित प्रभाव है। इसके अनुसार, अत्यधिक मजबूत चुंबकीय क्षेत्र की उपस्थिति में निर्वात भी एक ऑप्टिकल माध्यम की तरह व्यवहार करता है। जब प्रकाश या एक्स-रे इस क्षेत्र से गुजरती हैं, तो उनका ध्रुवीकरण (Polarisation) दो अलग-अलग दिशाओं में विभाजित हो जाता है। यह खोज अंतरिक्ष विज्ञान में भौतिकी के मूलभूत नियमों को समझने की दिशा में एक मील का पत्थर है।
क्वांटम इलेक्ट्रोडायनामिक्स (QED) और निर्वात की प्रकृति
क्लासिकल भौतिकी मानती है कि निर्वात पूरी तरह से खाली स्थान है। इसके विपरीत, QED यह स्पष्ट करती है कि क्वांटम स्तर पर निर्वात वर्चुअल कणों (जैसे इलेक्ट्रॉन और पॉजिट्रॉन) के लगातार उत्पन्न और विलुप्त होने का क्षेत्र है। जब किसी अंतरिक्ष क्षेत्र में ब्रह्मांड का सबसे शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है, तो ये वर्चुअल कण सक्रिय हो जाते हैं और प्रकाश की किरणों के मार्ग को प्रभावित करते हैं।
मैग्नेटर 1E 1547.0-5408 की भूमिका
मैग्नेटर न्यूट्रॉन तारों का एक दुर्लभ प्रकार होते हैं, जिनका चुंबकीय क्षेत्र सामान्य ब्रह्मांडीय पिंडों की तुलना में अरबों गुना अधिक शक्तिशाली होता है। मैग्नेटर 1E 1547.0-5408 से आने वाली एक्स-रे किरणों में 80% तक के उच्च स्तर का ध्रुवीकरण देखा गया है। यह डेटा इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण प्रदान करता है कि अत्यधिक मजबूत चुंबकीय क्षेत्र वास्तव में खाली स्थान के भौतिक गुणों को संशोधित कर सकते हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रासंगिकता
सिविल सेवा और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से यह विषय विज्ञान और प्रौद्योगिकी खंड के अंतर्गत अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह अंतरिक्ष अनुसंधान, खगोल भौतिकी, बुनियादी कण भौतिकी और QED सिद्धांतों से जुड़े समसामयिक घटनाक्रमों को समझने में मदद करता है। इस प्रकार के अनुसंधान अंतरिक्ष में प्राकृतिक प्रयोगशालाओं के माध्यम से ब्रह्मांड के सूक्ष्म नियमों को परखने का अवसर प्रदान करते हैं।
Delight News
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