
आईएनएस विक्रांत पर उड़ान भरेंगे राफेल मरीन: गोवा में परीक्षण शुरू
भारतीय नौसेना ने देश के पहले स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत से राफेल मरीन लड़ाकू विमानों के संचालन को हरी झंडी देने के लिए गोवा के शोर बेस्ड टेस्ट फैसिलिटी में महत्वपूर्ण ट्रायल शुरू कर दिए हैं। 26 लड़ाकू विमानों की खरीद समझौते के बाद यह परीक्षण नौसेना की समुद्री मारक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है।
भारत और फ्रांस के बीच अप्रैल 2025 में हुए लगभग 63,000 करोड़ रुपये के समझौते के तहत 26 राफेल मरीन लड़ाकू विमान खरीदे जा रहे हैं, जिनमें 22 सिंगल-सीटर और 4 ट्विन-सीटर प्रशिक्षण विमान शामिल हैं। गोवा में चल रहे ये परीक्षण विक्रांत के 'एसटीओबीएआर' (STOBAR - शॉट टेक-ऑफ बट अरेस्टेड रिकवरी) सिस्टम के साथ विमान के तालमेल को परखने के लिए बेहद अहम हैं।
स्वदेशी तकनीक और विशालकाय संरचना
आईएनएस विक्रांत भारत का पहला पूरी तरह से स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित विमानवाहक पोत है। इसे नौसेना के 'वारशिप डिजाइन ब्यूरो' द्वारा डिजाइन किया गया है और कोच्चि स्थित 'कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड' द्वारा निर्मित किया गया है। 262.5 मीटर लंबे और 61.6 मीटर चौड़े इस विशाल युद्धपोत का विस्थापन लगभग 45,000 टन है। इसमें 14 डेक और लगभग 2,200 कम्पार्टमेंट हैं, जो लगभग 1,600 नौसैनिकों के रहने और संचालन के लिए उपयुक्त हैं।
इस युद्धपोत की सबसे बड़ी खासियत इसका 76 प्रतिशत स्वदेशी कंटेंट होना है, जिसमें स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) द्वारा निर्मित विशेष ग्रेड का स्टील भी शामिल है। यह 4 गैस टरबाइनों से संचालित होता है जो 88 मेगावाट शक्ति उत्पन्न करती हैं और इसे 28 समुद्री मील (Knots) की अधिकतम गति प्रदान करती हैं।
समुद्री सुरक्षा और सामरिक बढ़त
आईएनएस विक्रांत को लगातार 45 दिनों तक समुद्र में स्वतंत्र रूप से संचालित करने और 8,600 समुद्री मील की दूरी तय करने की क्षमता के साथ तैयार किया गया है। यह पोत 30 विमानों के एयर विंग को संभालने में सक्षम है, जिसमें मिग-29के, कामोव-31, एमएच-60आर हेलीकॉप्टर के साथ-साथ स्वदेशी रूप से बने एलसीए नेवी और एएलएच हेलीकॉप्टर शामिल हैं।
विक्रांत के नौसेना में शामिल होने के साथ ही भारत अमेरिका, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन और चीन जैसे उन चुनिंदा देशों के क्लब में शामिल हो गया है जिनके पास खुद विमानवाहक पोत का निर्माण करने की क्षमता है। राफेल मरीन के शामिल होने से नौसेना की मिसाइल स्ट्राइक क्षमता और हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की संप्रभुता को और अधिक मजबूती मिलेगी।

रश्मिका ने तोड़ी चुप्पी, कहा- पार्टनर को हजार बार प्रपोज़ को तैयार
अभिनेत्री रश्मिका मंदाना ने पति विजय देवरकोंडा द्वारा उन्हें शादी के लिए 100 बार प्रपोज़ करने को कहे जाने के बाद हो रही ट्रोलिंग पर अपनी प्रतिक्रिया दी है。 उन्होंने कहा कि वह अपने पार्टनर को लेकर ऑब्सेस्ड हैं और उन्हें हजार बार भी प्रपोज़ करने के लिए तैयार हैं。
पार्टनर को लेकर खुलकर रखी बात
रश्मिका मंदाना ने इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह अपने पार्टनर को लेकर पूरी तरह ऑब्सेस्ड हैं。 उन्होंने हंसते हुए यह भी कहा कि 100 बार तो बहुत कम है, वह उन्हें हजार बार भी प्रपोज़ करने के लिए तैयार हैं。
बिना किसी टाइमलाइन के लिया गया फैसला
अभिनेत्री ने स्पष्ट किया कि शादी करने का उनका और विजय का यह फैसला किसी बड़े प्रपोज़ल या तय की गई टाइमलाइन का मोहताज नहीं था, बल्कि यह उनके आपसी जुड़ाव का नतीजा था।

21 लाख फॉलोअर्स वाले इन्फ्लुएंसर को मिले मात्र 33 वोट
राजस्थान के जोधपुर जिले की ओसियां तहसील में हुए पंचायत चुनाव में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर ओम प्रकाश बिश्नोई को सरपंच पद के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है। 21 लाख से अधिक फॉलोअर्स होने के बावजूद उन्हें कुल 1600 वोटों में से सिर्फ 33 वोट मिले।
सोशल मीडिया पर भारी फैन फॉलोइंग
ओम प्रकाश बिश्नोई की डिजिटल दुनिया में तगड़ी फैन फॉलोइंग है। उनके इंस्टाग्राम पर 14 लाख से अधिक, फेसबुक पर 2.32 लाख और यूट्यूब चैनल पर करीब 5.5 लाख सब्सक्राइबर्स जुड़े हुए हैं। इसके बावजूद उन्हें चुनावी मैदान में जनता का समर्थन नहीं मिल सका।
वोटों की गिनती और करारी हार
चुनाव के दौरान जब मतों की गिनती हुई, तो कुल 1600 वैध वोटों में से सोशल मीडिया स्टार को मात्र 33 वोट ही प्राप्त हुए। यह परिणाम इंटरनेट की लोकप्रियता और चुनावी राजनीति के फर्क को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

रश्मिका को प्रपोज़ल डिमांड पर ट्रोलिंग पर भड़के विजय देवरकोंडा
अभिनेता विजय देवरकोंडा ने पत्नी और एक्ट्रेस रश्मिका मंदाना से 100 बार शादी के लिए प्रपोज़ करने को कहे जाने के बाद हो रही ट्रोलिंग पर चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने ट्रोल्स को खरी-खोटी सुनाते हुए कहा कि अगर पूरी दुनिया भी उनके खिलाफ हो जाए, तब भी उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।
जीवन का सबसे खूबसूरत हिस्सा और बेपरवाह अंदाज़
अपनी बात रखते हुए विजय देवरकोंडा ने स्पष्ट किया कि उनकी बेस्ट फ्रेंड और पत्नी रश्मिका उनके जीवन का सबसे खूबसूरत हिस्सा हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि भले ही पूरी दुनिया उनके खिलाफ खड़ी हो जाए, लेकिन इससे उन्हें और उनके रिश्ते को कोई फर्क नहीं पड़ता है।
ट्रोल्स को तीखा जवाब
सोशल मीडिया पर हो रही आलोचना और ट्रोलिंग से खफा नजर आए अभिनेता ने ट्रोल्स को आड़े हाथों लिया। उन्होंने बेहद आक्रामक और बेबाक अंदाज में ट्रोल्स को करारा जवाब देते हुए कहा कि वे भाड़ में जाएं।

हमें गद्दी नहीं कुर्सी चाहिए: सीएम योगी पर अखिलेश का पलटवार
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'गद्दी' वाले बयान पर जवाब देते हुए कहा कि वह कोई साधु-संत नहीं हैं और जनता की सेवा के लिए उन्हें गद्दी नहीं बल्कि कुर्सी चाहिए。 इस दौरान बीजेपी के चार पूर्व विधायक सपा में शामिल हो गए。
साधु-संत होने और कुर्सी की सियासत
अखिलेश यादव ने अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा कि वह कोई साधु-संत नहीं हैं。 जनता की भलाई और उनकी सेवा के कार्यों को अंजाम देने के लिए गद्दी की नहीं, बल्कि प्रशासनिक रूप से काम करने के लिए कुर्सी की आवश्यकता होती है。
बीजेपी को बड़ा झटका, कई नेता सपा में शामिल
इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच भारतीय जनता पार्टी को एक बड़ा झटका लगा है。 बीजेपी के चार पूर्व विधायक—सिनोद शाक्य, कुशाग्र सागर, चंद्र कुमार मिश्र और राम बहादुर पासी—ने भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया है。

राहुल गांधी को बरी करने वाले जज शुभम वर्मा कौन हैं
जज शुभम वर्मा सुल्तानपुर की विशेष सांसद-विधायक अदालत में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हैं। उन्होंने वर्ष 2018 में अमित शाह के खिलाफ दिए गए बयान से जुड़े मानहानि मामले में राहुल गांधी को बरी किया है।
जज शुभम वर्मा का परिचय और पद
जज शुभम वर्मा वर्तमान में सुल्तानपुर की विशेष सांसद-विधायक अदालत में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने वर्ष 2018 में अमित शाह पर राहुल गांधी द्वारा दिए गए विवादित बयान से जुड़े मानहानि मामले की सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला दिया है।
शैक्षणिक योग्यता और करियर यात्रा
मूल रूप से देवरिया के रहने वाले शुभम वर्मा फरवरी 2015 में न्यायिक सेवा में नियुक्त हुए थे। शैक्षणिक पृष्ठभूमि की बात करें तो उन्होंने साल 2007 में बीए, 2010 में एलएलबी और 2021 में एलएलएम की डिग्री हासिल की है। उनकी सेवानिवृत्ति 31 जुलाई 2048 को निर्धारित है।
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