
आईएनएस ब्रह्मपुत्र हादसा: लापरवाही के आरोप में दो नौसेना अधिकारियों पर कोर्ट-मार्शल शुरू
भारतीय नौसेना ने जुलाई 2024 में मुंबई नवल डॉकयार्ड में हुए गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट आईएनएस ब्रह्मपुत्र के आंशिक रूप से पलटने के हादसे में दो अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट-मार्शल कार्यवाही शुरू कर दी है। अधिकारियों पर कर्तव्यों में लापरवाही और जहाज को खतरे में डालने के आरोप लगाए गए हैं।
जुलाई 2024 की घटना और सुरक्षा चूक
जुलाई 2024 में जब आईएनएस ब्रह्मपुत्र मुंबई डॉकयार्ड में मरम्मत और रिफिट के दौर से गुजर रहा था, तब जहाज पर अचानक भीषण आग लग गई थी। अग्निशमन टीमों द्वारा आग बुझाने के लिए उपयोग किए गए भारी मात्रा में पानी के कारण जहाज का संतुलन बिगड़ गया, जिससे वह बाईं ओर झुक गया और अंततः अपनी बर्थ पर पलट गया। इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में मरम्मत कार्य में शामिल सीमैन सितेंद्र सिंह की डूबने से मृत्यु हो गई थी।
अधिकारियों पर लगे आरोप और कानूनी प्रक्रिया
नौसेना द्वारा की गई उच्च स्तरीय जांच (बोर्ड ऑफ इंक्वायरी) के बाद संचालन में गंभीर कमियां और सुरक्षा प्रोटोकॉल की अनदेखी पाई गई। जहाज के कैप्टन पर कर्तव्यों में लापरवाही बरतने और युद्धपोत को खतरे में डालने (Hazarding a ship) जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कोर्ट-मार्शल में दोष सिद्ध होने पर अधिकारियों को वरिष्ठता में कमी से लेकर कारावास तक की सजा हो सकती है।
आईएनएस ब्रह्मपुत्र का सामरिक महत्व
कोलकाता स्थित 'गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स' (GRSE) द्वारा निर्मित आईएनएस ब्रह्मपुत्र स्वदेशी तकनीक से निर्मित ब्रह्मपुत्र-क्लास का पहला गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट है। 14 अप्रैल 2000 को नौसेना में शामिल किया गया यह युद्धपोत मध्यम और कम दूरी की तोपों, सतह से सतह और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और टारपीडो लॉन्चरों से लैस है। यह जहाज 5,300 टन विस्थापन क्षमता और 27 नॉट से अधिक की गति के साथ तटीय गश्त, समुद्री डकैती रोधी अभियानों और समुद्री कूटनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।
हादसे के बाद कई महीनों के कठिन प्रयासों के बाद युद्धपोत को सीधा किया गया और मरम्मत प्रक्रिया शुरू की गई। नौसेना ने इस घटना से सीख लेते हुए मरम्मत के दौरान जहाजों की स्थिरता और सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों को और कड़ा कर दिया है।

विदेशी फंडिंग के आरोपों पर आशुतोष रांका का पलटवार
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह के विदेशी फंडिंग के आरोपों पर सीजीपी के सह-संस्थापक आशुतोष रांका ने कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि उन्हें विदेशी फंड मिल रहा था, तो मंत्री उनसे हाथ क्यों मिला रहे थे और चाय-नाश्ता क्यों कर रहे थे? इस मामले पर टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने भी बीजेपी को आड़े हाथों लिया है।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह की ओर से लगाए गए विदेशी फंडिंग के गंभीर आरोपों पर 'सीजीपी' के सह-संस्थापक आशुतोष रांका ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया में कड़े सवाल पूछते हुए कहा है कि यदि उन्हें या उनके संगठन को किसी भी प्रकार की विदेशी फंडिंग मिल रही थी, तो केंद्रीय मंत्री उनसे मुलाकात क्यों कर रहे थे और उनके साथ हाथ क्यों मिला रहे थे?
चाय-नाश्ते और महुआ मोइत्रा का तंज
आशुतोष रांका ने आगे सवाल किया कि जब उन पर इस तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं, तब उनके साथ बैठकर चाय-नाश्ता क्यों किया जा रहा था? इस पूरे घटनाक्रम और विवाद के बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी कूदते हुए इस मुद्दे पर बीजेपी सरकार को घेरा है और निशाना साधा है।

सूर्यकुमार यादव ने परिवार संग पीएम मोदी से की मुलाकात
दिवाली से पहले भारतीय क्रिकेटर सूर्यकुमार यादव ने अपने परिवार के साथ दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री आवास पर पीएम नरेंद्र मोदी से खास मुलाकात की। इस दौरान एक छोटी बच्ची ने पीएम मोदी के सामने भजन गाया, जिसे सुनकर उन्होंने तालियां बजाते हुए उसकी जमकर तारीफ की।
दिवाली के पावन अवसर से पहले भारत के क्रिकेटर सूर्यकुमार यादव ने अपने परिवार के सदस्यों के साथ दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास पर पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात का एक बेहद खास वीडियो भी सामने आया है। इस दौरान सूर्यकुमार यादव की पत्नी देविशा और उनकी बेटी रिद्धिमा भी उनके साथ मौजूद थीं।
बच्ची के भजन पर पीएम मोदी ने बजाईं तालियां
मुलाकात के दौरान माहौल उस समय बेहद खुशनुमा हो गया जब एक छोटी बच्ची ने प्रधानमंत्री मोदी के सामने एक सुंदर भजन प्रस्तुत किया। बच्ची की सुरीली आवाज और भजन सुनकर पीएम मोदी काफी प्रसन्न नजर आए और उन्होंने तालियां बजाकर बच्ची का उत्साहवर्धन किया और उसकी जमकर तारीफ की।

FSSAI ने Old Monk को रम मानने से किया इनकार
महाराष्ट्र में ओल्ड मॉंक की बिक्री पर फिलहाल रोक लगी हुई है क्योंकि FSSAI ने इस पेय को रम मानने से इनकार करते हुए इसके लेबल पर आपत्ति जताई है। इसके बाद निर्माता कंपनी ने बॉम्बे हाईकोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली है और वह नया लेबल FSSAI को सौंपेगी। इस बिक्री के रुकने से राज्य आबकारी विभाग को करीब 350 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ है।
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने लोकप्रिय पेय 'ओल्ड मॉंक' (Old Monk) को रम मानने से साफ इनकार कर दिया है। प्राधिकरण ने इस पेय के लेबल पर अपनी कड़ी आपत्ति जताई है। इस तकनीकी और प्रशासनिक पेंच के कारण महाराष्ट्र राज्य में ओल्ड मॉंक की बिक्री फिलहाल शुरू नहीं हो पा रही है।
कंपनी का फैसला और वित्तीय नुकसान
इस पूरे मामले के तूल पकड़ने के बाद, निर्माता कंपनी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दाखिल अपनी याचिका वापस ले ली है। अब कंपनी की ओर से एक नया लेबल तैयार करके FSSAI को सौंपा जाएगा, ताकि मंजूरी मिलने के बाद बाजार में उत्पादों की बिक्री दोबारा शुरू हो सके। हालांकि, इस बिक्री के लंबे समय तक रुकने की वजह से राज्य के आबकारी विभाग को लगभग 350 करोड़ रुपये का भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा है।

फलाहारी महाराज ने धीरेंद्र शास्त्री को लिखा पत्र, मांगी माफी
मंदिर-मस्जिद प्रकरण के याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी महाराज ने बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री को पत्र लिखकर मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर में आकर माफी मांगने की हिदायत दी है। यह विवाद कथा के दौरान भगवान राम और कृष्ण की तुलना में दिए गए बयान के बाद उठा है।
मंदिर-मस्जिद प्रकरण के मुख्य याचिकाकर्ता दिनेश फलाहारी महाराज ने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को एक पत्र लिखा है। इस पत्र के जरिए उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री को मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर में आकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की हिदायत दी है।
बयान के बाद बढ़ा विवाद
यह पूरा विवाद धीरेंद्र शास्त्री द्वारा हाल ही में एक कथा के दौरान दिए गए बयान के बाद उपजा है। कथा के दौरान उन्होंने भगवान राम और भगवान कृष्ण के संदर्भ में तुलनात्मक टिप्पणी की थी, जिसके बाद से विभिन्न धार्मिक हलकों में विरोध देखने को मिल रहा है। इसी कड़ी में फलाहारी महाराज ने पत्र जारी कर इस पर अपनी कड़ी आपत्ति व्यक्त की है।

यूपी की पीसीएस अधिकारी अनुपमा सरोज ने दिया इस्तीफा
उत्तर प्रदेश में आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के बाद अब पीसीएस अधिकारी अनुपमा सरोज ने नौकरी से इस्तीफा दे दिया है। वह यूपी सरकार में डिप्टी कमिश्नर (जीएसटी) के पद पर तैनात थीं। अनुपमा पेशे से सिंगर और सपा प्रवक्ता अनुराग भदौरिया की पत्नी हैं, जिनके 2027 में विधानसभा चुनाव लड़ने के कयास लगाए जा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के बाद अब पीसीएस अधिकारी अनुपमा सरोज ने अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया है। अनुपमा सरोज उत्तर प्रदेश सरकार में डिप्टी कमिश्नर (जीएसटी) के महत्वपूर्ण पद पर अपनी सेवाएं दे रही थीं। उनके इस अचानक इस्तीफे के बाद प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा और चुनावी अटकलें
अधिकारी अनुपमा सरोज प्रशासनिक सेवा के साथ-साथ अपनी गायकी के पेशे यानी बतौर सिंगर भी पहचानी जाती हैं। वह समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता अनुराग भदौरिया की पत्नी हैं। उनके इस कदम के बाद राजनीतिक गलियारों में यह अटकलें तेजी से लगाई जा रही हैं कि वह आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव में चुनावी मैदान में उतर सकती हैं।
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