
8वां वेतन आयोग: ₹55,000 न्यूनतम सैलरी और पेंशनर्स की बड़ी मांगें
8वें वेतन आयोग के गठन के बाद केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों में भारी उत्साह है। कर्मचारी संगठन न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹55,000 करने और एरियर की मांग कर रहे हैं, जबकि पेंशनर्स ने 65 वर्ष की उम्र से ही पेंशन वृद्धि का प्रस्ताव दिया है। सुझावों की अंतिम तिथि 15 जून 2026 तक बढ़ा दी गई है, और 9-10 जुलाई को कोलकाता में एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है।
भारत के इतिहास में जब भी नए वेतन आयोग का गठन होता है, तो देश के करोड़ों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के घरों में उम्मीदों के दीये जलने लगते हैं। इस बार भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है। 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन के बाद से ही सरकारी गलियारों से लेकर कर्मचारी संगठनों के दफ्तरों तक हलचल अभूतपूर्व रूप से तेज हो चुकी है।
कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठन इस मौके को हाथ से नहीं जाने देना चाहते। यही वजह है कि वेतन, भत्तों और पेंशन के नियमों में बड़े बदलावों को लेकर सरकार के सामने मांगों की एक लंबी फेहरिस्त रख दी गई है। बढ़ती महंगाई और जीवन स्तर में आए बदलावों के बीच, यह आयोग तय करेगा कि आने वाले समय में सरकारी कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति कैसी होगी।
न्यूनतम सैलरी ₹55,000 करने की मांग: कर्मचारी संगठनों की हुंकार
इस पूरी हलचल के बीच सबसे बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ जम्मू-कश्मीर कर्मचारी महासंघ की तरफ से आया है। महासंघ ने सीधे तौर पर केंद्र सरकार और वेतन आयोग के सामने यह मांग रखी है कि केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹55,000 तय की जानी चाहिए।
वर्तमान में (7वें वेतन आयोग के तहत) न्यूनतम बेसिक सैलरी ₹18,000 है। अगर कर्मचारी महासंघ की इस मांग को मान लिया जाता है, तो यह अब तक का सबसे बड़ा उछाल होगा। कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि:
पिछले कुछ वर्षों में खुदरा महंगाई (Inflation) और दैनिक जीवन के खर्चों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है।
निचले स्तर के कर्मचारियों का भरण-पोषण वर्तमान वेतन संरचना में चुनौतीपूर्ण हो गया है।
इसके अलावा, संगठन बेसिक सैलरी एरियर (Basic Salary Arrears) को लेकर भी अड़े हुए हैं, ताकि पिछले नुकसान की भरपाई की जा सके।
पेंशनभोगियों का बड़ा दांव: उम्र के साथ बढ़ेगी पेंशन?
केवल सेवारत कर्मचारी ही नहीं, बल्कि देश के बुजुर्ग पेंशनभोगी भी इस बार अपने हक के लिए पूरी ताकत से आवाज उठा रहे हैं। पेंशनर्स संगठनों ने जो प्रस्ताव आयोग के सामने रखा है, वह अगर मंजूर हो जाता है, तो देश के लाखों बुजुर्गों की जिंदगी बदल जाएगी।
आमतौर पर वर्तमान व्यवस्था में 80 वर्ष की उम्र पार करने के बाद अतिरिक्त पेंशन का लाभ मिलता है। लेकिन पेंशनर्स संगठनों ने इस बार एक बेहद तार्किक और मानवीय प्रस्ताव रखा है। उनका कहना है कि बढ़ती उम्र के साथ मेडिकल और स्वास्थ्य संबंधी खर्चे आसमान छूने लगते हैं, इसलिए पेंशन में वृद्धि कम उम्र से ही शुरू होनी चाहिए।
प्रस्तावित पेंशन वृद्धि का ढांचा इस प्रकार है:
| पेंशनभोगी की उम्र | प्रस्तावित अतिरिक्त पेंशन वृद्धि |
|---|---|
| 65 वर्ष | वर्तमान पेंशन का 70% |
| 90 वर्ष | वर्तमान पेंशन का 100% (दोगुनी पेंशन) |
इस प्रस्ताव का सीधा उद्देश्य यह है कि बुजुर्गों को अपनी लाचारी या बीमारी के दिनों में किसी और पर निर्भर न रहना पड़े।
डेडलाइन बढ़ी: 15 जून 2026 तक का मिला मौका
कर्मचारी संगठनों और विभिन्न विभागों की तैयारियों को देखते हुए सरकार ने एक और बड़ा फैसला लिया है। वेतन आयोग के समक्ष अपने सुझाव, आपत्तियां और मांग पत्र जमा करने की अंतिम तिथि को बढ़ाकर 15 जून 2026 कर दिया गया है।
इस समय-सीमा के बढ़ने से कर्मचारी यूनियनों को एक बड़ा फायदा मिला है। अब वे देश भर के अलग-अलग विभागों के कर्मचारियों से फीडबैक लेकर एक अधिक मजबूत और तार्किक ड्राफ्ट तैयार कर सकेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बढ़ी हुई तारीख के कारण सरकार और आयोग के पास देश के कोने-कोने से लाखों की संख्या में सुझाव पहुंचने वाले हैं।
कोलकाता में महामंथन: 9-10 जुलाई को होगी अहम बैठक
8वां वेतन आयोग केवल कागजों पर काम नहीं कर रहा है, बल्कि वह जमीनी हकीकत जानने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों का दौरा भी कर रहा है। इसी सिलसिले में आयोग देश भर के प्रमुख शहरों में बैठकें आयोजित कर रहा है, जहां कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों से सीधा संवाद किया जा रहा है।
इस कड़ी में सबसे महत्वपूर्ण और बड़ी बैठक 9-10 जुलाई को कोलकाता में होने जा रही है। इस बैठक पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि:
1. इस बैठक में पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत के दर्जनों बड़े कर्मचारी संगठन हिस्सा लेंगे।
2. रेलवे, डाक, रक्षा और अन्य बड़े केंद्रीय विभागों के प्रतिनिधि अपनी मांगों को साक्ष्यों के साथ आयोग के सामने प्रस्तुत करेंगे।
3. कोलकाता की इस बैठक से जो निष्कर्ष निकलेंगे, वे आयोग की अंतिम रिपोर्ट का आधार तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
आगे की राह: क्या सरकार मानेगी ये मांगें?
8वें वेतन आयोग के सामने जहां एक तरफ कर्मचारियों की उम्मीदों का पहाड़ है, वहीं दूसरी तरफ सरकार के सामने देश का वित्तीय बजट और आर्थिक संतुलन बनाए रखने की चुनौती है। न्यूनतम सैलरी को ₹55,000 करना और 65 वर्ष की उम्र से ही भारी-भरकम पेंशन वृद्धि लागू करना सरकारी खजाने पर बड़ा बोझ डाल सकता है।
लेकिन, लोकतांत्रिक व्यवस्था में कर्मचारियों के हितों की अनदेखी करना भी किसी सरकार के लिए आसान नहीं होता। अब देखना यह होगा कि 15 जून 2026 तक आने वाले सुझावों और जुलाई में कोलकाता में होने वाले महामंथन के बाद, आयोग बीच का क्या रास्ता निकालता है। देश के करोड़ों परिवारों की आर्थिक तकदीर अब इसी आयोग के फैसलों पर टिकी हुई है।

सत्य निकेतन हादसा: फरार पीजी मालिक की तलाश में जुटी पुलिस
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पीजी की इमारत ढहने से हड़कंप मच गया है। इस दर्दनाक हादसे में तीन लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग घायल हैं। घटना के बाद से मुख्य आरोपी और पीजी मालिक आनंद बंसल फरार है। पुलिस ने मामला दर्ज कर उसकी तलाश में जगह-जगह छापे मारने शुरू कर दिए हैं।
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पीजी की इमारत ढहने से हड़कंप मच गया है। इस दर्दनाक हादसे में तीन लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोग घायल हैं। घटना के बाद से मुख्य आरोपी और पीजी मालिक आनंद बंसल फरार है। पुलिस ने मामला दर्ज कर उसकी तलाश में जगह-जगह छापे मारने शुरू कर दिए हैं।
अचानक ढही इमारत और मातम का माहौल
दिल्ली के व्यस्त और छात्रों के बीच लोकप्रिय इलाके सत्य निकेतन में एक बड़ा हादसा सामने आया है। यहाँ अचानक एक पीजी की इमारत भरभराकर ढह गई, जिससे मौके पर चीख-पुकार मच गई। मलबे के नीचे दबने से तीन बेकसूर लोगों की जान जा चुकी है, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हैं। इस भयानक दुर्घटना ने स्थानीय प्रशासन और भवन निर्माण सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
फरार हुआ पीजी मालिक आनंद बंसल
हादसे की भनक लगते ही पीजी का मालिक आनंद बंसल मौके से फरार हो गया। प्रशासनिक जांच में यह बात सामने आई है कि इस खतरनाक इमारत को सुरक्षा के लिहाज से एक साल पहले ही खाली कराया गया था। इसके बावजूद वहाँ किस तरह की गतिविधियां चल रही थीं और लापरवाही किसकी थी, यह पुलिस जांच का मुख्य विषय बन गया है। मालिक की गिरफ्तारी के बाद ही इस पूरी लापरवाही की परते खुल सकेंगी।
पुलिस की ताबड़तोड़ छापेमारी जारी
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत सख्त कदम उठाए हैं। न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने आरोपी मालिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है और उसकी धरपकड़ के लिए कई टीमों का गठन किया गया है। आरोपी की तलाश में लगातार विभिन्न ठिकानों पर छापे मारे जा रहे हैं।
बचाव अभियान और घायलों का इलाज
घटनास्थल पर युद्धस्तर पर राहत और बचाव कार्य चलाया जा रहा है। प्रशासन और बचाव दल मलबे को हटाने में जुटे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि अंदर कोई और फंसा न हो। हादसे में घायल हुए लोगों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका इलाज चल रहा है।

सत्य निकेतन इमारत हादसा: पीएम मोदी ने जताया गहरा दुख
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक इमारत के गिरने से हुए भीषण हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। इस दुर्घटना में दो लोगों की जान चली गई है, जबकि प्रशासन राहत और बचाव कार्य में पूरी ताकत से जुटा हुआ है।
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में एक इमारत के गिरने से हुए भीषण हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। इस दुर्घटना में दो लोगों की जान चली गई है, जबकि प्रशासन राहत और बचाव कार्य में पूरी ताकत से जुटा हुआ है।
प्रधानमंत्री मोदी की संवेदनाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हृदयविदारक घटना पर अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट की हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा कि अपने प्रियजनों को खोने वाले परिवारों के प्रति उनकी गहरी संवेदनाएं हैं। इसके साथ ही उन्होंने इस दुर्घटना में घायल हुए सभी लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की ईश्वर से कामना की है। देश के शीर्ष नेतृत्व की ओर से इस तरह संबल मिलना इस मुश्किल समय में प्रभावित परिवारों के लिए एक बड़ा संताप कम करने वाला कदम है।
प्रशासनिक अमला और राहत कार्य
हादसे की खबर मिलते ही प्रशासनिक अमला और राहत दल तुरंत हरकत में आ गए। प्रधानमंत्री कार्यालय ने स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखी है। पीएम मोदी ने खुद इस बात की जानकारी दी कि अधिकारी और बचाव दल तुरंत घटनास्थल पर मुस्तैदी से काम कर रहे हैं। मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने और हादसे से प्रभावित हर संभव व्यक्ति तक मदद पहुँचाने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
सुरक्षा और लापरवाही के सवाल
राजधानी दिल्ली के घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इस प्रकार की पुरानी या कमजोर इमारतों का जर्जर हालत में होना एक बहुत बड़ा खतरा बनता जा रहा है। सत्य निकेतन की इस घटना ने एक बार फिर निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय प्रशासन अब इस बात की जांच में जुट गया है कि आखिर इस इमारत के गिरने के पीछे वास्तविक कारण क्या थे और क्या यहाँ किसी प्रकार की प्रशासनिक अनदेखी या नियमों की अवहेलना हुई थी।

दिल्ली बिल्डिंग हादसा: 2 की मौत, सीएम रेखा गुप्ता ने लिया जायजा
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए एक दर्दनाक बिल्डिंग हादसे में दो बेकसूर लोगों की जान चली गई है, जबकि छह अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। इस गंभीर दुर्घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया और शीर्ष नेतृत्व ने तत्काल मौके का रुख किया।
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए एक दर्दनाक बिल्डिंग हादसे में दो बेकसूर लोगों की जान चली गई है, जबकि छह अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। इस गंभीर दुर्घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया और शीर्ष नेतृत्व ने तत्काल मौके का रुख किया।
घटना का दर्दनाक मंजर और प्रशासनिक हलचल
राजधानी दिल्ली के व्यस्त क्षेत्र सत्य निकेतन में इमारत ढहने की इस आकस्मिक दुर्घटना ने सबको झकझोर कर रख दिया है। अचानक हुए इस हादसे की चपेट में आने से दो लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। वहीं, इस भयानक मलबे के नीचे दबने से छह अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हादसे की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया और स्थानीय लोग तुरंत बचाव कार्य में जुट गए।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और सांसद बांसुरी स्वराज का दौरा
दुर्घटना की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और स्थानीय सांसद बांसुरी स्वराज ने तुरंत घटनास्थल का दौरा किया और हालात का जायजा लिया। नेताओं ने दुर्घटना स्थल पर पहुंचकर पूरी स्थिति का बारीकी से निरीक्षण किया और प्रशासनिक अधिकारियों से घटना के कारणों की पूरी रिपोर्ट मांगी। इस दौरान उनके साथ सुरक्षा बलों और राहत कर्मियों का बड़ा अमला भी मौजूद रहा, जो लगातार स्थिति को नियंत्रित करने में जुटा हुआ था।
युद्धस्तर पर बचाव और राहत कार्य
मौके पर पहुंचीं मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राहत और बचाव कार्यों की कमान खुद संभाली और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मलबे में फंसे एक-एक शख्स को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन को और तेज किया जाए। इसके साथ ही, अस्पतालों में भर्ती घायलों को बिना किसी देरी के बेहतर से बेहतर चिकित्सीय सुविधा मुहैया कराने के भी कड़े निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी पीड़ित को इलाज के अभाव में परेशानी न उठानी पड़े। प्रशासन अब यह भी जांच कर रहा है कि यह इमारत किस वजह से ढही और इसमें किन नियमों की अनदेखी की गई थी।

सत्य निकेतन हादसा: राहुल गांधी का कड़ा संदेश, हर छात्र की जान कीमती
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए भीषण बिल्डिंग हादसे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि छात्रों का जीवन पहले से ही संघर्षों से घिरा होता है और अब ऐसे जानलेवा हालात चिंताजनक हैं। प्रशासन और बचाव दलों को युद्धस्तर पर राहत कार्य चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए भीषण बिल्डिंग हादसे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि छात्रों का जीवन पहले से ही संघर्षों से घिरा होता है और अब ऐसे जानलेवा हालात चिंताजनक हैं। प्रशासन और बचाव दलों को युद्धस्तर पर राहत कार्य चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
सत्य निकेतन हादसे पर राहुल गांधी की दो टूक
दिल्ली के सत्य निकेतन में घटी दर्दनाक घटना ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। इस गंभीर दुर्घटना के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही और व्यवस्था की कमियों पर सवाल खड़े किए हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब राजधानी में छात्रों की सुरक्षा को लेकर बड़े दावे किए जाते हैं।
छात्रों का जीवन संघर्षों से भरा और अब हालात जानलेवा
राहुल गांधी ने अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि देश का युवा और छात्र वर्ग पहले से ही अपने भविष्य को लेकर अनगिनत संघर्षों का सामना कर रहा है। ऐसे में पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों से आने वाले इन युवाओं को यदि इस तरह के जानलेवा हालातों का सामना करना पड़े, तो यह व्यवस्था की बड़ी विफलता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षण संस्थानों और कोचिंग hubs के आसपास रहने वाले छात्रों के लिए सुरक्षित माहौल तैयार करना प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
बचाव दलों के लिए तत्काल निर्देश और हर संभव प्रयास
घटना की सूचना मिलते ही राहुल गांधी ने राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने की अपील की। उन्होंने प्रशासन को निर्देशित किया है कि बचाव दल बिना एक भी पल गंवाए मलबे में फंसे प्रत्येक छात्र तक पहुंचे। उनका साफ कहना था कि इस आपदा की घड़ी में हर एक छात्र की जान बेहद कीमती है और उसकी रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास तुरंत किए जाने चाहिए।
मुश्किल घड़ी में पीड़ितों के साथ खड़ी है पार्टी
इस दुखद हादसे के बाद राजनीतिक दलों द्वारा प्रभावित परिवारों को ढांढस बंधाने का सिलसिला जारी है। राहुल गांधी ने व्यक्तिगत रूप से और अपनी पार्टी की ओर से यह विश्वास दिलाया है कि इस विकट और मुश्किल घड़ी में वे सभी पीड़ित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए उन्होंने अधिकारियों से यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

UPSC EPFO APFC Recruitment 2026: 80 पदों पर भर्ती का शानदार मौका
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में असिस्टेंट प्रोविडेंट फंड कमिश्नर (APFC) के 80 पदों पर बंपर भर्ती निकाली है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 11 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह प्रशासनिक क्षेत्र में अपना करियर बनाने वाले युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर है।
खबर का निचोड़
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में असिस्टेंट प्रोविडेंट फंड कमिश्नर (APFC) के 80 पदों पर बंपर भर्ती निकाली है। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार 11 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह प्रशासनिक क्षेत्र में अपना करियर बनाने वाले युवाओं के लिए एक सुनहरा अवसर है।
आवेदन प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तिथियां
यूपीएससी ईपीएफओ एपीएफसी भर्ती 2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 22 अगस्त 2026 को शुरू हो चुकी है। आवेदन करने की अंतिम तिथि 11 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। जो उम्मीदवार देश के प्रतिष्ठित प्रशासनिक पदों पर अपनी जगह बनाना चाहते हैं, उन्हें तय समय सीमा के भीतर आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना आवेदन पत्र जमा करना होगा। अंतिम समय में सर्वर पर लोड बढ़ने की संभावना को ध्यान में रखते हुए समय से पहले आवेदन करना समझदारी होगी।
रिक्तियों का विवरण और योग्यता
इस बार कुल 80 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इन पदों के लिए शैक्षणिक योग्यता और आयु सीमा से जुड़े तमाम नियम यूपीएससी के आधिकारिक विज्ञापन में विस्तार से दिए गए हैं। सामान्यतः इस पद के लिए उम्मीदवारों के पास मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन की डिग्री होना अनिवार्य है। इसके साथ ही तय आयु सीमा के दायरे में आने वाले आवेदक ही इस प्रक्रिया का हिस्सा बन सकते हैं। आरक्षित श्रेणियों के उम्मीदवारों को नियमानुसार आयु सीमा में छूट प्रदान की जाएगी।
चयन प्रक्रिया और वेतनमान
चयन प्रक्रिया बेहद पारदर्शी और सख्त होती है, जिसमें आमतौर पर लिखित परीक्षा और साक्षात्कार (इंटरव्यू) शामिल होते हैं। लिखित परीक्षा में सफल होने वाले उम्मीदवारों को ही अगले चरण के लिए बुलाया जाता है। इस पद पर चयनित होने वाले युवाओं को आकर्षक वेतनमान और सरकारी सेवाओं मिलने वाले तमाम बेहतरीन लाभ व भत्ते दिए जाते हैं। यही वजह है कि हर साल लाखों उम्मीदवार इस प्रतिष्ठित परीक्षा के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं।
कैसे करें आवेदन
आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों को सबसे पहले यूपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। वहां ओटीआर (One Time Registration) प्रक्रिया पूरी करने के बाद ईपीएफओ एपीएफसी भर्ती के लिंक पर क्लिक करना होगा। मांगी गई सभी जरूरी जानकारी सावधानीपूर्वक भरने और निर्धारित शुल्क का भुगतान करने के बाद आवेदन पत्र को सबमिट कर दें। भविष्य के संदर्भ के लिए फाइनल सबमिट किए गए फॉर्म का एक प्रिंटआउट अपने पास जरूर सुरक्षित रख लें।
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