
5 जुलाई 2026: परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण दैनिक करंट अफेयर्स
आज की प्रमुख घटनाक्रमों का विवरण निम्नलिखित है:
* दिल्ली ईवी नीति 2026 का कार्यान्वयन।
* पशुपति युध अभ्यास (PYA) का रणनीतिक महत्व।
* न्याय प्रणाली में पॉलीग्राफ टेस्ट की प्रासंगिकता।
* मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र पहल।
* I-2SEA सबमरीन केबल सिस्टम का विस्तार।
* बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) में तकनीकी प्रगति।
* भारत-माली आर्थिक संबंधों में नया अध्याय।
संक्षिप्त सारांश
आज की प्रमुख घटनाक्रमों का विवरण निम्नलिखित है:
दिल्ली ईवी नीति 2026 का कार्यान्वयन।
पशुपति युध अभ्यास (PYA) का रणनीतिक महत्व।
न्याय प्रणाली में पॉलीग्राफ टेस्ट की प्रासंगिकता।
मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र पहल।
I-2SEA सबमरीन केबल सिस्टम का विस्तार।
बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) में तकनीकी प्रगति।
भारत-माली आर्थिक संबंधों में नया अध्याय।
विस्तृत विश्लेषण
1. दिल्ली ईवी नीति 2026
न्यूज में क्यों: दिल्ली सरकार ने सतत परिवहन को बढ़ावा देने के लिए अपनी नई इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2026 को आधिकारिक रूप से अधिसूचित किया है।
विश्लेषण: यह नीति दिल्ली को भारत की ईवी राजधानी बनाने के उद्देश्य से लाई गई है। इसमें न केवल निजी वाहनों बल्कि सार्वजनिक परिवहन और लॉजिस्टिक्स बेड़े के विद्युतीकरण पर जोर दिया गया है।
प्रमुख फैक्ट्स:
2026 तक दिल्ली के कुल नए वाहनों का 35% हिस्सा ईवी होना अनिवार्य है।
ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सिंगल विंडो क्लीयरेंस पोर्टल।
पुराने पेट्रोल/डीजल वाहनों को ईवी में बदलने (Retrofitting) के लिए प्रोत्साहन।
बैटरी स्वैपिंग स्टेशनों के लिए रियायती दरों पर भूमि आवंटन।
वाणिज्यिक ईवी के लिए परमिट शुल्क में पूर्ण छूट।
2. पशुपति युध अभ्यास (PYA)
न्यूज में क्यों: हाल ही में संपन्न हुआ पशुपति युध अभ्यास सुरक्षा परिदृश्य में एक नए सुरक्षा मानक के रूप में उभरा है।
विश्लेषण: यह अभ्यास मुख्य रूप से विषम युद्ध स्थितियों (asymmetric warfare) और सीमावर्ती क्षेत्रों में समन्वय को बेहतर बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
प्रमुख फैक्ट्स:
इसका प्राथमिक उद्देश्य बहु-डोमेन युद्ध कौशल में निपुणता प्राप्त करना है।
अभ्यास में ड्रोन आधारित निगरानी और प्रतिक्रिया प्रणालियों का सफल परीक्षण किया गया।
साइबर सुरक्षा और संचार एन्क्रिप्शन पर विशेष जोर दिया गया।
विभिन्न सैन्य शाखाओं के बीच इंटर-ऑपरेबिलिटी को बढ़ावा देना।
अभ्यास का रणनीतिक फोकस हिमालयी सीमाओं की कठिन परिस्थितियों पर रहा।
3. पॉलीग्राफ टेस्ट: विधिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण
न्यूज में क्यों: देश की सर्वोच्च अदालत ने हाल ही में जांच प्रक्रियाओं में पॉलीग्राफ टेस्ट की स्वीकार्यता और सीमाओं पर दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
विश्लेषण: पॉलीग्राफ या 'लाई डिटेक्टर' परीक्षण का उपयोग जांच एजेंसियों द्वारा सत्यता जानने के लिए किया जाता है, लेकिन इसके मानवाधिकार पहलुओं को लेकर लगातार बहस जारी है।
प्रमुख फैक्ट्स:
पॉलीग्राफ टेस्ट को 'सेल्वी बनाम कर्नाटक राज्य' मामले के तहत स्वैच्छिक बनाया गया है।
यह किसी व्यक्ति के शारीरिक परिवर्तनों (हृदय गति, पसीना, रक्तचाप) को मापता है।
वैज्ञानिक समुदाय इसे 100% सटीक नहीं मानता है।
बिना सहमति के पॉलीग्राफ टेस्ट कराना अनुच्छेद 20(3) का उल्लंघन है।
इसके परिणामों का उपयोग केवल जांच में मार्गदर्शन के रूप में किया जा सकता है, न कि साक्ष्य के रूप में।
4. मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र पहल
न्यूज में क्यों: स्वास्थ्य और नवाचार को गति देने हेतु 'मेडिकल इनोवेशन पेटेंट मित्र' पहल का शुभारंभ किया गया है।
विश्लेषण: यह पहल उन वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य सेवा उद्यमियों के लिए है जो नई चिकित्सा तकनीक विकसित कर रहे हैं। यह उनके पेटेंट फाइलिंग के बोझ को कम करती है।
प्रमुख फैक्ट्स:
इसका लक्ष्य चिकित्सा उपकरणों के स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देना है।
यह पहल पेटेंट आवेदन की प्रक्रिया में कानूनी और तकनीकी सलाह प्रदान करती है।
अकादमिक संस्थानों और स्टार्ट-अप्स के बीच सहयोग को बढ़ावा देना।
बौद्धिक संपदा (IP) सुरक्षा को सशक्त बनाना।
चिकित्सा नवाचार के लिए वित्तीय सहायता और मार्गदर्शन का एकीकरण।
5. I-2SEA सबमरीन केबल सिस्टम
न्यूज में क्यों: डिजिटल कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने के लिए I-2SEA सबमरीन केबल सिस्टम के नए चरणों का उद्घाटन किया गया है।
विश्लेषण: यह केबल सिस्टम भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के बीच डेटा ट्रांसफर क्षमता को कई गुना बढ़ाने की क्षमता रखता है।
प्रमुख फैक्ट्स:
यह उच्च बैंडविड्थ और कम विलंबता (low latency) सुनिश्चित करता है।
इसका उपयोग भविष्य में 6G नेटवर्क के बुनियादी ढांचे के लिए किया जाएगा।
क्षेत्रीय डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए रणनीतिक संपत्ति।
समुद्र के नीचे केबल सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक निगरानी।
दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ भारत की डिजिटल संप्रभुता को बढ़ावा।
6. बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS)
न्यूज में क्यों: बैटरी सुरक्षा और दक्षता के लिए BMS तकनीक को मानक अनिवार्यताओं के रूप में लागू किया गया है।
विश्लेषण: ईवी और नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण के लिए BMS एक 'मस्तिष्क' के रूप में कार्य करता है, जो बैटरी के तापमान और वोल्टेज को नियंत्रित करता है।
प्रमुख फैक्ट्स:
थर्मल रनवे (आग लगने की घटनाओं) को रोकने में सक्षम।
बैटरी की लाइफ साइकल को 20% तक बढ़ाने की क्षमता।
रीयल-टाइम डेटा मॉनिटरिंग के लिए IoT एकीकरण।
चार्जिंग के दौरान सेल बैलेंसिंग तकनीक का उपयोग।
भारत सरकार द्वारा अब सभी ईवी में स्मार्ट बीएमएस का उपयोग अनिवार्य।
7. भारत-माली आर्थिक भागीदारी
न्यूज में क्यों: बामाको में आयोजित पहला 'भारत-माली निर्यात संवर्धन मंच' दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों के नए युग का संकेत है।
विश्लेषण: यह मंच न केवल द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के लिए है, बल्कि तकनीकी हस्तांतरण और कृषि विकास में साझेदारी के लिए भी एक आधार है।
प्रमुख फैक्ट्स:
व्यापार के प्रमुख क्षेत्रों में कृषि, खनन और नवीकरणीय ऊर्जा शामिल हैं।
भारत के 'मेक इन इंडिया' उत्पादों के लिए माली एक उभरता हुआ बाजार।
दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय निवेश सुरक्षा समझौते पर जोर।
खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कृषि-प्रसंस्करण में सहयोग।
अफ्रीकी महाद्वीप के साथ भारत की 'ग्लोबल साउथ' कूटनीति का हिस्सा।

जंतर-मंतर पुलिस कार्रवाई: सुप्रीम कोर्ट ने बनाई 5 सदस्यीय कमेटी
जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर पुलिस के कथित अत्यधिक बल प्रयोग के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय हाई-पावर्ड जांच कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी पेलेट गन्स और इलेक्ट्रिक बैटन्स के इस्तेमाल समेत सभी गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच करेगी।
खबर का निचोड़
जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों पर पुलिस के कथित अत्यधिक बल प्रयोग के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय हाई-पावर्ड जांच कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी पेलेट गन्स और इलेक्ट्रिक बैटन्स के इस्तेमाल समेत सभी गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच करेगी।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए हालिया प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा किए गए बल प्रयोग का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत की चौखट तक पहुंच गया है। प्रदर्शनकारियों पर पुलिस के ज़रिए आवश्यकता से अधिक ताकत इस्तेमाल करने के गंभीर आरोपों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ी जांच का आदेश दिया है। इस पूरे प्रकरण की तह तक जाने के लिए 5 सदस्यों वाली एक विशेष हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी का गठन किया गया है।
अदालत का यह कदम लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के अधिकार और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत के समक्ष पुलिसिया कार्रवाई पर कई सवाल उठाए थे, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने हस्तक्षेप करते हुए यह स्वतंत्र जांच बिठाने का निर्देश दिया।
जांच कमेटी की कमान और मुख्य मुद्दे
इस हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी की अगुवाई सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर सुभाष रेड्डी करेंगे। उनके नेतृत्व में 5 सदस्यों की यह टीम पुलिसिया कार्रवाई के हर पहलू की बारीकी से पड़ताल करेगी। इस जांच का मुख्य दायरा यह तय करना होगा कि क्या मौके पर तैनात पुलिस बल ने हालात को संभालने के लिए तय मानकों का उल्लंघन किया या फिर वाकई सुरक्षा एजेंसियों ने जरूरत से ज्यादा सख्त कदम उठाए।
कमेटी मुख्य रूप से भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पेलेट गन्स (Pellet Guns) और इलेक्ट्रिक बैटन्स (Electric Batons) जैसे हथियारों के इस्तेमाल की जांच करेगी। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने अत्यधिक हिंसक और गैर-जरूरी तरीकों का सहारा लिया, जिससे कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए। कमेटी इन सभी डिजिटल सबूतों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों और पुलिस रिकॉर्ड्स की जांच करके अपनी रिपोर्ट तैयार करेगी।
क्या थे आरोप और क्यों हुआ विवाद?
जंतर-मंतर हमेशा से ही देश में शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराने का प्रमुख केंद्र रहा है। हालांकि, हाल ही में हुए प्रदर्शन के दौरान हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि वे अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से जमा हुए थे, लेकिन पुलिस ने बिना किसी ठोस उकसावे के उन पर हमला बोल दिया।
दूसरी ओर, पुलिस अधिकारियों का रुख यह रहा है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य था। अब जस्टिस आर सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता वाली यह 5 सदस्यीय कमेटी दोनों पक्षों के तर्कों को सुनेगी और अपनी निष्पक्ष रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगी।

क्रिप्टो बाजार में तहलका: $72,000 पार पहुंचा बिटकॉइन
बिटकॉइन में 24 घंटे के भीतर 11% का जोरदार उछाल देखने को मिला है। राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के क्रिप्टो-अनुकूल बयानों के बाद बिटकॉइन $72,000 के पार पहुंचकर दो महीने के उच्चतम स्तर पर दर्ज किया गया। इस तेजी से कुल क्रिप्टो मार्केट कैप में अचानक $190 अरब का बड़ा इजाफा हुआ है।
खबर का निचोड़
बिटकॉइन में 24 घंटे के भीतर 11% का जोरदार उछाल देखने को मिला है। राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के क्रिप्टो-अनुकूल बयानों के बाद बिटकॉइन $72,000 के पार पहुंचकर दो महीने के उच्चतम स्तर पर दर्ज किया गया। इस तेजी से कुल क्रिप्टो मार्केट कैप में अचानक $190 अरब का बड़ा इजाफा हुआ है।
क्रिप्टो बाजार में जबरदस्त तेजी
वैश्विक डिजिटल संपत्ति बाजार में एक बार फिर अभूतपूर्व हलचल देखने को मिल रही है। दुनिया की सबसे बड़ी और लोकप्रिय क्रिप्टोकरेंसी, बिटकॉइन ने पिछले 24 घंटों में 11 प्रतिशत की तूफानी बढ़त दर्ज की है। इस जबरदस्त उछाल के साथ बिटकॉइन का भाव $72,000 के पार निकल गया, जो पिछले दो महीनों का सबसे उच्च स्तर है। इस अचानक आई तेजी ने क्रिप्टो निवेशकों के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी है और पूरे बाजार में सकारात्मक माहौल बना दिया है।
मार्केट कैप में $190 अरब की भारी बढ़त
बिटकॉइन के इस दमदार प्रदर्शन का सीधा असर पूरे डिजिटल एसेट इकोसिस्टम पर पड़ा है। महज एक दिन के भीतर क्रिप्टो मार्केट कैप में लगभग $190 अरब का भारी-भरकम मुनाफा जुड़ा है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि बिटकॉइन में आया यह उछाल केवल एक सीमित रैली नहीं है, बल्कि यह अन्य प्रमुख ऑल्टकॉइन्स को भी ऊपर खींचने का काम कर रहा है। ट्रेडिंग वॉल्यूम में हुई इस अचानक वृद्धि से स्पष्ट है कि बड़े संस्थागत निवेशक भी अब इस तेजी का हिस्सा बनने के लिए बाजार में उतर चुके हैं।
डॉनल्ड ट्रंप के बयान से बदला माहौल
इस अचानक आई तेजी के पीछे की मुख्य वजह अमेरिका से आई एक बड़ी राजनीतिक खबर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने क्रिप्टो इंडस्ट्री के लिए स्पष्ट, पारदर्शी और अनुकूल नियम बनाने वाले कानून को जल्द से जल्द मंजूरी देने की अपील की है। ट्रंप के इस रुख ने उद्योग में अनिश्चितता के बादलों को छांट दिया है। निवेशक लंबे समय से अमेरिका में स्पष्ट नियामक ढांचे का इंतजार कर रहे थे, और राष्ट्रपति के इस सकारात्मक बयान ने बाजार में नई ऊर्जा फूंक दी है।
निवेशकों का बढ़ा भरोसा
वैश्विक स्तर पर क्रिप्टो संपत्तियों पर सख्त नियमों की आशंका बनी हुई थी, लेकिन अमेरिका से मिले इस समर्थन ने निवेशकों के जोखिम लेने की क्षमता को दोगुना कर दिया है। बाजार विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यदि ट्रंप प्रशासन क्रिप्टो उद्योग के लिए स्पष्ट कानून लाने में सफल रहता है, तो आने वाले दिनों में डिजिटल एसेट मार्केट में यह स्थिरता और तेजी आगे भी जारी रह सकती है।

9 से ज़्यादा SIM लीं तो फोटो से पकड़े जाएंगे, सरकार सख्त
साइबर अपराधों और फर्जी सिम के जाल पर शिकंजा कसने के लिए सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। 23 अगस्त से 9 से अधिक एक्टिव सिम रखने वाले यूज़र्स की फोटो डिजिटल-इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म पर टेलीकॉम कंपनियों को उपलब्ध कराई जाएंगी। नियम तोड़ने वालों को नया नंबर नहीं मिलेगा।
खबर का निचोड़
साइबर अपराधों और फर्जी सिम के जाल पर शिकंजा कसने के लिए सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। 23 अगस्त से 9 से अधिक एक्टिव सिम रखने वाले यूज़र्स की फोटो डिजिटल-इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म पर टेलीकॉम कंपनियों को उपलब्ध कराई जाएंगी। नियम तोड़ने वालों को नया नंबर नहीं मिलेगा।
9 से ज़्यादा SIM लीं तो फोटो से पकड़े जाएंगे, सरकार सख्त
देश में फर्जी सिम कार्ड के जरिए हो रहे ऑनलाइन फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए दूरसंचार विभाग ने नया पैंतरा आजमाया है। अब 9 से अधिक एक्टिव सिम कार्ड रखने वाले ग्राहकों की पहचान चेहरे से की जाएगी। सरकार 23 अगस्त से ऐसे सभी उपभोक्ताओं की तस्वीरें अपने डिजिटल-इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) के जरिए सीधे टेलीकॉम कंपनियों के साथ साझा करेगी।
नियमों के मुताबिक, एक सामान्य नागरिक अपने नाम पर अधिकतम 9 मोबाइल सिम कार्ड ही चालू रख सकता है। वहीं सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील माने जाने वाले जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर (नॉर्थ-ईस्ट) के राज्यों के लिए यह सीमा केवल 6 सिम कार्ड तय की गई है। यदि कोई ग्राहक इस निर्धारित सीमा को पार कर चुका है, तो देश की कोई भी टेलीकॉम कंपनी उसे नया कनेक्शन जारी नहीं करेगी।
डिजिटल-इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म से होगी सीधी निगरानी
सरकार द्वारा तैयार किया गया यह डिजिटल प्लेटफॉर्म फर्जीवाड़े पर तुरंत प्रहार करेगा। जब भी कोई ग्राहक नया सिम कार्ड लेने पहुंचेगा, कंपनियां इस केंद्रीय डेटाबेस से उसकी फोटो का मिलान करेंगी। अगर उस व्यक्ति के नाम पर पहले से ही 9 या उससे अधिक नंबर एक्टिव पाए जाते हैं, तो नया कनेक्शन देने की प्रक्रिया को सिस्टम वहीं रोक देगा। इससे पहचान छिपाकर फर्जी दस्तावेज या दूसरों के नाम पर सिम खरीदने वाले गिरोहों पर सीधी नकेल कसेगी।
साइबर अपराधियों और फर्जी सिम नेटवर्क पर बड़ा प्रहार
अक्सर देखने में आया है कि साइबर ठग एक ही नाम और फोटो का इस्तेमाल करके दर्जनों फर्जी सिम उठा लेते हैं और फिर लोगों को चपत लगाकर वे नंबर बंद कर देते हैं। केंद्रीय स्तर पर फोटो ट्रैकिंग शुरू होने से ऐसे फर्जी सिम सिंडिकेट पूरी तरह बेनकाब हो जाएंगे। टेलीकॉम कंपनियों के पास अब ऐसे ग्राहकों को दूसरा सिम बेचने का कोई रास्ता नहीं बचेगा।
यह कदम सीधे तौर पर देश की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और आम नागरिकों को वित्तीय धोखाधड़ी से बचाने की दिशा में उठाया गया है। दूरसंचार विभाग का स्पष्ट संदेश है कि नियमों की अनदेखी करने वालों और टेलीकॉम नेटवर्क का गलत फायदा उठाने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा।

इंस्टामार्ट के रेड बुल में निकला कॉकरोच, भड़कीं श्वेता तिवारी
मशहूर अभिनेत्री श्वेता तिवारी को स्विगी इंस्टामार्ट से रेड बुल ऑर्डर करना भारी पड़ गया। कैन के साथ एक जिंदा कॉकरोच घर पहुंचते ही वह बिफर पड़ीं। उन्होंने सोफे पर रेंगते कॉकरोच का वीडियो साझा कर महाराष्ट्र एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे से खाद्य सुरक्षा पर कड़े कदम उठाने की मांग की है।
खबर का निचोड़
मशहूर अभिनेत्री श्वेता तिवारी को स्विगी इंस्टामार्ट से रेड बुल ऑर्डर करना भारी पड़ गया। कैन के साथ एक जिंदा कॉकरोच घर पहुंचते ही वह बिफर पड़ीं। उन्होंने सोफे पर रेंगते कॉकरोच का वीडियो साझा कर महाराष्ट्र एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे से खाद्य सुरक्षा पर कड़े कदम उठाने की मांग की है।
इंस्टामार्ट का ऑर्डर और सोफे पर रेंगता कॉकरोच
टीवी और ओटीटी जगत की जानी-मानी अभिनेत्री श्वेता तिवारी ने त्वरित डिलीवरी सेवा स्विगी इंस्टामार्ट की लापरवाही को उजागर किया है। श्वेता ने इंस्टामार्ट से एनर्जी ड्रिंक 'रेड बुल' का ऑर्डर दिया था, लेकिन डिलीवरी पैकेट के साथ एक अवांछित मेहमान भी उनके घर पहुंच गया। पैकेट खोलते ही कैन के साथ एक कॉकरोच बाहर निकला और सीधा उनके सोफे पर रेंगने लगा। इस घटना से हैरान श्वेता ने तुरंत अपने स्मार्टफोन से इसका वीडियो बना लिया।
इंस्टाग्राम पर वायरल हुआ वीडियो
श्वेता तिवारी ने इस पूरी घटना का वीडियो अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट की स्टोरी पर शेयर किया। वीडियो में साफ तौर पर एक कॉकरोच उनके सोफे पर चलता हुआ दिखाई दे रहा है। त्वरित डिलीवरी की आड़ में साफ-सफाई और खाद्य सुरक्षा से खिलवाड़ देखकर श्वेता बेहद नाराज नजर आईं। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए सीधे इस बात पर आपत्ति जताई कि क्विक-कॉमर्स कंपनियां पैकेजिंग और हाइजीन का बिल्कुल ध्यान नहीं रख रही हैं।
एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे को पुकारा
सिर्फ शिकायत करने के बजाय श्वेता ने इस मुद्दे को सीधे प्रशासन के संज्ञान में लाने का फैसला किया। उन्होंने महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के कमिश्नर तुकाराम मुंढे को टैग करते हुए तीखे अंदाज में पूछा, "आप कहां हैं? कृपया इस ओर ध्यान दीजिए।" श्वेता का यह सवाल सीधे तौर पर ऑनलाइन किराना डिलीवरी करने वाले प्लेटफॉर्म्स की कार्यशैली और प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़ा करता है।
सुरक्षा मानकों पर उठे गंभीर सवाल
क्विक कॉमर्स ऐप्स इन दिनों कुछ ही मिनटों में सामान डिलीवर करने का दावा करते हैं, लेकिन इस होड़ में सामान के रखरखाव और वेयरहाउस की स्वच्छता पर सवाल उठने लगे हैं। श्वेता तिवारी द्वारा उजागर किए गए इस वाकये के बाद सोशल मीडिया पर उपभोक्ता सुरक्षा और खाद्य मानकों को लेकर बहस तेज हो गई है। लोग लगातार मांग कर रहे हैं कि ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर कड़े हाइजीन ऑडिट लागू किए जाएं ताकि आम जनता की सेहत से खिलवाड़ न हो।

सेंसेक्स 600 अंक उचला, निवेशकों ने एक ही दिन में कमाए ₹1.4 लाख करोड़
शेयर बाज़ार में लगातार जारी गिरावट पर ब्रेक लगाते हुए गुरुवार को तूफानी तेज़ी दर्ज की गई। सेंसेक्स 628 अंकों की छलांग के साथ 77,537 और निफ्टी 153 अंक चढ़कर 24,231 के स्तर पर बंद हुआ। इस शानदार बढ़त से निवेशकों की संपत्ति में करीब ₹1.4 लाख करोड़ का इजाफा हुआ।
खबर का निचोड़
शेयर बाज़ार में लगातार जारी गिरावट पर ब्रेक लगाते हुए गुरुवार को तूफानी तेज़ी दर्ज की गई। सेंसेक्स 628 अंकों की छलांग के साथ 77,537 और निफ्टी 153 अंक चढ़कर 24,231 के स्तर पर बंद हुआ। इस शानदार बढ़त से निवेशकों की संपत्ति में करीब ₹1.4 लाख करोड़ का इजाफा हुआ।
बाज़ार में रौनक, लाल निशान से हरे निशान में वापसी
दलाली स्ट्रीट पर पिछले कुछ सत्रों से बना निराशा का माहौल गुरुवार को पूरी तरह बदल गया। लगातार बिकवाली झेल रहे भारतीय शेयर बाज़ार में एक बार फिर से चौतरफा खरीदारी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार से ही निवेशकों ने आक्रामक रुख अपनाया, जिससे घरेलू बाज़ार के प्रमुख सूचकांक हरे निशान में लौट आए। दिन का कारोबार खत्म होने तक बाज़ार बढ़त को बरकरार रखने में पूरी तरह कामयाब रहा।
आंकड़ों में दिखी बढ़त, बीएसई की बल्ले-बल्ले
कारोबार के अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 628 अंकों की दमदार बढ़त के साथ 77,537 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 50 भी 153 अंकों का उछाल दर्ज करते हुए 24,231 के मजबूत स्तर पर मजबूती से टिका। बीएसई पर कुल 4,549 शेयरों में ट्रेडिंग हुई, जिनमें से 2,448 शेयर तेज़ी के साथ बंद हुए। यह आंकड़ा साफ दर्शाता है कि बाज़ार का दायरा काफी व्यापक और सकारात्मक रहा।
निवेशकों की झोली में आए ₹1.4 लाख करोड़
बाज़ार की इस शानदार वापसी से सबसे बड़ा फायदा खुद निवेशकों को मिला है। पिछले कुछ दिनों की गिरावट से सहमे निवेशकों को इस तेज़ी से बड़ा सहारा मिला। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप बढ़कर नए स्तर पर पहुंचा, जिससे निवेशकों की संपत्ति में एक ही दिन के भीतर लगभग ₹1.4 लाख करोड़ की बढ़ोतरी दर्ज की गई। आईटी, बैंकिंग और ऑटो सेक्टर के बड़े शेयरों में हुई खरीदारी ने इस तेज़ी को मुख्य रूप से रफ्तार दी।
क्या रहा तेज़ी का मुख्य कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक संकेतों में सुधार और निचले स्तरों पर मिले मजबूत वैल्यूएशन के कारण बाज़ार में यह रिकवरी देखने को मिली है। संस्थागत निवेशकों ने निचले स्तरों पर गुणवत्तापूर्ण शेयरों में जमकर खरीदारी की। घरेलू अर्थव्यवस्था के मजबूत आंकड़ों और लगातार जारी कॉर्पोरेट गतिविधियों ने भी बाज़ार के सेंटिमेंट को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई, जिससे बिकवाली का दबाव खत्म हुआ और खरीदारी का दौर शुरू हुआ।
Delight News
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