
26 दिन का त्याग और फिर 'डील' का तंज: सोनम वांगचुक का दर्दनाक सवाल
लद्दाख की संवैधानिक सुरक्षा के लिए 26 दिनों तक अनशन करने वाले प्रसिद्ध पर्यावरणविद सोनम वांगचुक पर 'डील' करने के आरोप लगे हैं। गृह मंत्रालय से लिखित आश्वासन मिलने के बाद अनशन समाप्त करने वाले वांगचुक ने इन आरोपों पर कड़ा ऐतराज जताते हुए अपनी नीयत और त्याग पर सवाल उठाने वालों को मुंहतोड़ जवाब दिया है।
खबर का निचोड़
लद्दाख की संवैधानिक सुरक्षा के लिए 26 दिनों तक अनशन करने वाले प्रसिद्ध पर्यावरणविद सोनम वांगचुक पर 'डील' करने के आरोप लगे हैं। गृह मंत्रालय से लिखित आश्वासन मिलने के बाद अनशन समाप्त करने वाले वांगचुक ने इन आरोपों पर कड़ा ऐतराज जताते हुए अपनी नीयत और त्याग पर सवाल उठाने वालों को मुंहतोड़ जवाब दिया है।
26 दिनों का कठोर तप और 'डील' के गंभीर आरोप
लद्दाख की आवाज़ बनकर उभरे प्रसिद्ध नवप्रवर्तक और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार वजह उनका कोई नया आविष्कार या आंदोलन नहीं, बल्कि उनका छलका हुआ दर्द है। लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर वे 26 दिनों तक कड़ाके की ठंड में भूखे-प्यासे बैठे रहे। जब सरकार की तरफ से लिखित आश्वासन मिला, तो उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया।
लेकिन अनशन खत्म होते ही आलोचकों और राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तैरने लगी कि वांगचुक ने सरकार के साथ कोई 'डील' कर ली है। त्याग के बदले मिले इन आरोपों ने इस निस्वार्थ योद्धा के दिल को गहराई से ठेस पहुंचाई है।
"क्या 26 दिन भूखा रहने के बाद भी ईमानदारी का सबूत देना होगा?"
आरोपों की बौछार के बीच सोनम वांगचुक ने एक वीडियो संदेश जारी कर आलोचकों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने बेहद भावुक और धारदार लहजे में सवाल उठाया कि जो व्यक्ति माइनस तापमान में देश और अपनी मिट्टी के भविष्य के लिए 26 दिनों तक जिंदगी और मौत से लड़ा, क्या उसे भी अपनी नीयत साबित करने की जरूरत है?
वांगचुक ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कोई समझौता नहीं किया है, बल्कि सरकार ने उनकी मांगों पर विचार करने का लिखित वादा किया है। लोकतंत्र में बातचीत और आश्वासन ही समाधान का रास्ता खोलते हैं, और इसी सिद्धांत के तहत अनशन वापस लिया गया।
लद्दाख के भविष्य की लड़ाई, राजनीति का शिकार?
सोनम वांगचुक का यह आंदोलन केवल एक व्यक्ति का प्रयास नहीं था, बल्कि पूरे लद्दाख के पर्यावरण, संस्कृति और वहां के नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की पुकार थी। इसके बावजूद, आंदोलन के खत्म होते ही इसे राजनीतिक रंग देने की कोशिशें शुरू हो गईं।
वांगचुक ने अपने समर्थकों और देशवासियों से अपील की कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और लद्दाख के पारिस्थितिक तंत्र को बचाने की इस मुहिम का सच समझें। उनका कहना है कि जनहित के मुद्दों पर खड़े होने वालों को जब इस तरह के तंज झेलने पड़ते हैं, तो यह समाज के लिए एक चिंताजनक संकेत है।
लिखित आश्वासन और आगे की राह
गृह मंत्रालय की ओर से मिले लिखित पत्र में वांगचुक और लद्दाख के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत का खाका तैयार किया गया है। वांगचुक ने यह साफ कर दिया है कि अगर वादे पूरे नहीं हुए, तो जनता के अधिकारों के लिए संघर्ष का रास्ता हमेशा खुला रहेगा। फिलहाल, उनके कड़े रुख ने उन सभी आलोचकों की बोलती बंद कर दी है जो 26 दिन के इस ऐतिहासिक अनशन पर सवाल उठा रहे थे।

मैंने कभी ज़िम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ाः इस्तीफा देते हुए धर्मेंद्र प्रधान
NEET पेपर लीक मामले को लेकर चौतरफा घिरे शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। लगातार हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच उन्होंने कहा कि वे पहले दिन से जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटे हैं। उनके मुताबिक, राष्ट्रसेवा सर्वोपरि है और हाल की घटनाओं से वे गहराई से आहत हैं।
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NEET पेपर लीक मामले को लेकर चौतरफा घिरे शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। लगातार हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच उन्होंने कहा कि वे पहले दिन से जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटे हैं। उनके मुताबिक, राष्ट्रसेवा सर्वोपरि है और हाल की घटनाओं से वे गहराई से आहत हैं।
भारी दबाव और विरोध के बीच बड़ा कदम
देशभर में NEET-UG परीक्षा को लेकर उपजे भारी असंतोष और सड़कों पर उतरते छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है। पिछले कई दिनों से जारी राजनीतिक घमासान और छात्रों के आक्रोश के बीच इस फैसले को एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक के आरोपों के बाद से ही लगातार सरकार और शिक्षा मंत्रालय पर सवाल खड़े हो रहे थे। विपक्ष की ओर से भी लगातार इस्तीफे की मांग की जा रही थी, जिसके बाद आखिरकार उन्होंने यह कठोर निर्णय लिया।
"मैंने कभी जिम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ा"
अपने इस्तीफे का ऐलान करते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की नैतिक जिम्मेदारी ली है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "NEET पेपर लीक का मामला सामने आने के पहले ही दिन से मैंने अपनी जिम्मेदारी स्वीकार की है। इस विषम परिस्थिति से मैंने कभी भी मुंह नहीं मोड़ा और न ही जवाबदेही से पीछे हटने की कोशिश की।"
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में देश के युवाओं और छात्रों का भरोसा बहाल करना सबसे महत्वपूर्ण है, और इसके लिए हर जरूरी कदम उठाया जाना आवश्यक है।
"पद नहीं, राष्ट्रसेवा ही सर्वोच्च प्राथमिकता"
इस्तीफे के दौरान अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले 10 दिनों में जिस तरह का घटनाक्रम देखने को मिला है, उससे उनका मन बेहद दुखी और व्यथित है।
उन्होंने कहा, "मेरे लिए यह मुद्दा किसी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा या पद का नहीं है। सार्वजनिक जीवन में मेरे लिए हमेशा राष्ट्रसेवा और देश के छात्रों का हित ही सर्वोच्च प्राथमिकता रहा है।" उनके इस बयान से साफ है कि वे इस पूरे विवाद से व्यक्तिगत रूप से काफी आहत हुए हैं।
छात्रों के भविष्य पर केंद्रित रहे प्रयास
शिक्षा मंत्रालय का प्रभार संभालने के दौरान और हालिया संकट के समय भी, उनका मुख्य जोर पारदर्शिता लाने पर ही रहा। हालांकि, छात्रों और अभिभावकों के बीच बढ़ते अविश्वास और सड़कों पर होते प्रदर्शनों के कारण स्थिति काफी तनावपूर्ण हो चुकी थी।
अब देखना यह होगा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस कदम के बाद शिक्षा मंत्रालय में क्या प्रशासनिक बदलाव होते हैं और NEET परीक्षा को लेकर सरकार आगे क्या ठोस कदम उठाती है, ताकि लाखों परीक्षार्थियों का भविष्य सुरक्षित किया जा सके।

NEET धांधली पर सड़क पर उतरे युवा: दादर में तिरंगा रैली, आदित्य ठाकरे का केंद्र पर तीखा हमला
मुंबई के दादर में शिवसेना (UBT) विधायक आदित्य ठाकरे और MNS नेता अमित ठाकरे ने NEET पेपर लीक मामले को लेकर विशाल 'तिरंगा रैली' निकाली। प्रदर्शन के दौरान आदित्य ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा और आरोप लगाया कि मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए हिंदू-मुस्लिम की राजनीति की जा रही है।
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मुंबई के दादर में शिवसेना (UBT) विधायक आदित्य ठाकरे और MNS नेता अमित ठाकरे ने NEET पेपर लीक मामले को लेकर विशाल 'तिरंगा रैली' निकाली। प्रदर्शन के दौरान आदित्य ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा और आरोप लगाया कि मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए हिंदू-मुस्लिम की राजनीति की जा रही है।
देश के युवाओं का भविष्य दांव पर: दादर की सड़कों पर गरजा आक्रोश
देश भर में NEET-UG परीक्षा में हुई कथित धांधली को लेकर छात्रों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी आक्रोश की गूंज अब मुंबई की सड़कों पर साफ दिखाई दे रही है। दादर के ऐतिहासिक इलाके में शिवसेना (ठाकरे गुट) के विधायक आदित्य ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के नेता अमित ठाकरे की मौजूदगी में एक विशाल 'तिरंगा रैली' का आयोजन किया गया।
हाथों में राष्ट्रीय ध्वज थामे सैकड़ों युवाओं और छात्रों ने परीक्षा प्रणाली में सुधार और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। दादर की सड़कों पर उमड़ी यह भीड़ केवल एक राजनीतिक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि अपने भविष्य को लेकर चिंतित देश के लाखों परीक्षार्थियों की एक बुलंद आवाज़ बनकर उभरी।
"जब-जब वो डरते हैं, हिंदू-मुस्लिम करते हैं": आदित्य ठाकरे का सीधा वार
रैली को संबोधित करते हुए आदित्य ठाकरे ने केंद्र सरकार की नीतियों और नीयत पर तीखे सवाल खड़े किए। पेपर लीक मामले में सरकार के ढुलमुल रवैये की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि जब भी देश के वास्तविक मुद्दों पर सरकार घिरती है, तो ध्यान भटकाने का प्रयास किया जाता है।
आदित्य ने आक्रामक अंदाज़ में कहा, "जब-जब वो डरते हैं, तब-तब वो हिंदू-मुस्लिम करते हैं।" उन्होंने आरोप लगाया कि लाखों छात्रों का करियर अधर में लटका हुआ है, लेकिन सरकार जवाबदेही तय करने के बजाय संवेदनशील मुद्दों के पीछे छिपने की कोशिश कर रही है। देश का युवा अब इस तरह की राजनीति को अच्छी तरह समझ चुका है और अपने अधिकारों के लिए चुप नहीं बैठेगा।
नेताओं से बड़ी आवाज़ है युवाओं की: छात्रों में भरा जोश
छात्रों के मनोबल को बढ़ाते हुए आदित्य ठाकरे ने कहा कि असली ताकत किसी राजनीतिक मंच या नेता में नहीं, बल्कि उन युवाओं में है जो अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने उपस्थित छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा, "हम नेताओं से बड़ी आवाज़ आप लोग हैं।"
इस रैली में अमित ठाकरे की उपस्थिति ने भी सबका ध्यान खींचा, जिससे यह संदेश गया कि युवाओं के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर दलगत राजनीति से परे हटकर एकजुटता दिखाई जा रही है। रैली के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए थे और पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा।

NEET विवाद के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बड़ा फैसला, दिया इस्तीफा
NEET पेपर लीक विवाद को लेकर लगातार गहराते राजनीतिक घमासान के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। विपक्षी दल 'कॉकरोच जनता पार्टी' के उग्र प्रदर्शनों और बढ़ते दबाव के बाद आए इस फैसले के साथ ही उन्होंने देश के युवाओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
खबर का निचोड़:
NEET पेपर लीक विवाद को लेकर लगातार गहराते राजनीतिक घमासान के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। विपक्षी दल 'कॉकरोच जनता पार्टी' के उग्र प्रदर्शनों और बढ़ते दबाव के बाद आए इस फैसले के साथ ही उन्होंने देश के युवाओं के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
सड़क से संसद तक हलचल, शिक्षा मंत्री का इस्तीफा
देश भर में गहराए NEET पेपर लीक विवाद के बीच एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। लगातार हो रहे राजनीतिक विरोध और जनता के बढ़ते आक्रोश के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। पिछले कई दिनों से छात्रों और विपक्षी दलों द्वारा उनके इस्तीफे की मांग की जा रही थी। इस बड़े घटनाक्रम के बाद देश की राजनीति और शिक्षा जगत में हलचल तेज हो गई है।
विपक्षी पार्टी का उग्र प्रदर्शन और दबाव
NEET परीक्षा में हुई कथित धांधली को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' पिछले कई दिनों से लगातार विरोध-प्रदर्शन कर रही थी। सड़कों पर उतरे कार्यकर्ताओं और छात्र संगठनों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था। निष्पक्ष जांच और नैतिक जिम्मेदारी की मांग को लेकर किए जा रहे इन प्रदर्शनों ने सरकार पर चौतरफा दबाव बना दिया था। आखिरकार इस राजनीतिक सरगर्मी का अंत धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के रूप में सामने आया।
'X' पर पोस्ट कर जताई अपनी प्रतिबद्धता
इस्तीफे के तुरंत बाद धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर एक भावुक और कड़ा संदेश साझा किया। उन्होंने देश के युवाओं और छात्रों को संबोधित करते हुए लिखा:
> "भारत की युवाशक्ति ही देश की असली ताकत है। देश की युवाशक्ति को भ्रम के कुचक्र में फंसने नहीं देंगे। यही मेरा संकल्प है।"
>
उनके इस बयान से साफ है कि पद छोड़ने के बाद भी वे युवाओं के भविष्य और देश की शिक्षा व्यवस्था की साख को लेकर अपने रुख पर कायम हैं।
छात्रों के भविष्य और व्यवस्था पर उठे सवाल
NEET जैसी प्रतिष्ठित और महत्वपूर्ण परीक्षा में धांधली के आरोपों ने लाखों परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों को चिंता में डाल दिया था। महीनों की कड़ी मेहनत के बाद परीक्षा देने वाले छात्रों के मन में अपने भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े हो गए थे। शिक्षा मंत्री का यह इस्तीफा केवल एक राजनीतिक घटनाक्रम नहीं है, बल्कि यह इस बात का भी संकेत है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बहाल करना कितना जरूरी हो चुका है। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में इस पूरे मामले पर सरकार का अगला कदम क्या होता है।

राजा रघुवंशी हत्याकांड: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, सोनम को फिर जाना होगा जेल
सोनम रघुवंशी मामले में सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद पीड़िता के परिवार को न्याय की एक नई किरण दिखाई दी है। अदालत के सख्त रुख के कारण आरोपी को दोबारा जेल जाना होगा, जिस पर राजा रघुवंशी के पिता भावुक हो उठे। इस फैसले से मामले में मोड़ आ गया है।
सोनम रघुवंशी मामले में सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद पीड़िता के परिवार को न्याय की एक नई किरण दिखाई दी है। अदालत के सख्त रुख के कारण आरोपी को दोबारा जेल जाना होगा, जिस पर राजा रघुवंशी के पिता भावुक हो उठे। इस फैसले से मामले में मोड़ आ गया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बदला घटनाक्रम
सोनम रघुवंशी मामले में सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश ने कानूनी प्रक्रिया को एक नया मोड़ दे दिया है। अदालत द्वारा जमानत रद्द किए जाने और दोबारा हिरासत में भेजने के निर्देश के बाद यह साफ हो गया है कि कानून के हाथ सबसे लंबे हैं। इस फैसले से साफ संदेश गया है कि गंभीर अपराधों के मामलों में न्याय प्रक्रिया से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
भावुक हुए राजा रघुवंशी के पिता
कोर्ट का फैसला सामने आते ही मृतक राजा रघुवंशी के पिता अपने आंसुओं को रोक नहीं सके। लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे परिवार के लिए यह क्षण केवल एक अदालती आदेश नहीं, बल्कि इंसाफ की दिशा में एक बड़ा कदम है। मीडिया से बातचीत के दौरान उनके आंसू छलक पड़े, जिसमें बरसों का दर्द और बेटे को खोने का गम साफ नजर आ रहा था। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस रुख ने न्याय प्रणाली पर उनका भरोसा और मजबूत कर दिया है।
इंसाफ की उम्मीद और कानूनी शिकंजा
यह पूरा मामला काफी समय से सुर्खियों में रहा है। जांच प्रक्रिया और जमानत याचिकाओं के बीच पीड़ित परिवार लगातार सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा था। सुप्रीम कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब जांच एजेंसियों पर भी मामले की सुनवाई को तेजी से आगे बढ़ाने का दबाव रहेगा। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आदेशों से ऐसे मामलों में साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित करने की आशंका कम हो जाती है।
आगे क्या होगा?
आदेश के लागू होते ही सोनम रघुवंशी को फिर से पुलिस या न्यायिक हिरासत में जाना होगा। पुलिस अब सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन्स के तहत आगे की प्रक्रिया पूरी करेगी। वहीं पीड़ित पक्ष अब इस बात को लेकर आशान्वित है कि अदालत में मामले की सुनवाई जल्द पूरी होगी और दोषियों को कानून के मुताबिक कड़ी सजा मिलेगी।

भारतीय नौसेना में ऑफिसर बनने का मौका, जून 2027 बैच के लिए आवेदन शुरू
भारतीय नौसेना ने एग्जीक्यूटिव, एजुकेशन और टेक्निकल ब्रांच में शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) के लिए जून 2027 कोर्स हेतु आवेदन आमंत्रित किए हैं। योग्य पुरुष और महिला उम्मीदवार इस प्रतिष्ठित भर्ती के लिए 27 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह देश की सेवा करने के इच्छुक युवाओं के लिए सुनहरा अवसर है।
भारतीय नौसेना ने एग्जीक्यूटिव, एजुकेशन और टेक्निकल ब्रांच में शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) के लिए जून 2027 कोर्स हेतु आवेदन आमंत्रित किए हैं। योग्य पुरुष और महिला उम्मीदवार इस प्रतिष्ठित भर्ती के लिए 27 जुलाई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह देश की सेवा करने के इच्छुक युवाओं के लिए सुनहरा अवसर है।
भर्ती का विवरण और महत्वपूर्ण तिथियां
भारतीय नौसेना द्वारा जारी नवीनतम अधिसूचना के अनुसार, SSC ऑफिसर्स की यह भर्ती जून 2027 कोर्स के लिए है। भर्ती प्रक्रिया के लिए ऑनलाइन आवेदन की शुरुआत 25 जून 2026 से हो चुकी है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार भारतीय नौसेना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने की अंतिम तिथि 27 जुलाई 2026 है। निर्धारित समय सीमा के भीतर आवेदन प्रक्रिया पूर्ण करना अनिवार्य है, क्योंकि इसके बाद किसी भी स्थिति में आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
पात्रता और योग्यता के मानक
इस भर्ती के लिए पात्रता का निर्धारण पदों के अनुसार किया गया है। एग्जीक्यूटिव, एजुकेशन और टेक्निकल ब्रांच के अलग-अलग पदों के लिए शैक्षणिक योग्यताएं भिन्न हैं। उम्मीदवार को संबंधित स्ट्रीम में निर्धारित अंकों के साथ डिग्री धारक होना आवश्यक है। विस्तृत योग्यता, आयु सीमा और शारीरिक मानकों की सटीक जानकारी के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन को ध्यान से पढ़ना आवश्यक है। उम्मीदवारों को यह सलाह दी जाती है कि आवेदन करने से पहले अपनी योग्यता की जांच भर्ती के आधिकारिक दिशा-निर्देशों से अवश्य कर लें ताकि बाद में किसी तकनीकी समस्या का सामना न करना पड़े।
आवेदन प्रक्रिया और चयन का आधार
आवेदन पूरी तरह से ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार किए जा रहे हैं। उम्मीदवारों को अपनी सभी शैक्षणिक मार्कशीट्स, पहचान पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेज ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करने होंगे। चयन प्रक्रिया के अंतर्गत उम्मीदवारों का चयन उनकी शैक्षणिक योग्यता और नौसेना द्वारा निर्धारित सिलेक्शन प्रोसीजर के आधार पर किया जाएगा। इसमें साक्षात्कार और अन्य चरण शामिल हो सकते हैं जो सीधे तौर पर उम्मीदवार की क्षमता और कौशल का मूल्यांकन करेंगे। उम्मीदवारों को समय रहते अपनी तैयारी पूर्ण कर लेनी चाहिए।
करियर की नई दिशा
भारतीय नौसेना का हिस्सा बनना न केवल एक सरकारी नौकरी है, बल्कि यह एक गौरवशाली जीवनशैली का भी प्रतीक है। एग्जीक्यूटिव, एजुकेशन और टेक्निकल जैसे महत्वपूर्ण विभागों में कार्य करते हुए उम्मीदवारों को न केवल देश की सुरक्षा में योगदान देने का अवसर मिलता है, बल्कि उन्हें वैश्विक स्तर के प्रशिक्षण और विकास के अवसर भी प्राप्त होते हैं। शॉर्ट सर्विस कमीशन के माध्यम से नौसेना में शामिल होने वाले युवाओं को चुनौतीपूर्ण करियर और नेतृत्व के गुणों को निखारने का मौका मिलता है।
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