
14 की उम्र में बुर्ज खलीफा पर राज: जैनम जैन की AI क्रांति...
महज 14 साल की उम्र में जहां बच्चे स्कूल और खेल-कूद में व्यस्त रहते हैं, वहीं भारतीय मूल के जैनम जैन ने तकनीक की दुनिया में इतिहास रच दिया है। जैनम ने अपने अनूठे एआई स्टार्टअप 'Mengo Engine' की शुरुआत की है और इसका हेडक्वार्टर सीधे दुनिया की सबसे ऊंची इमारत, बुर्ज खलीफा की 141वीं मंजिल पर स्थापित किया है।
महज 14 साल की उम्र में जहां बच्चे स्कूल और खेल-कूद में व्यस्त रहते हैं, वहीं भारतीय मूल के जैनम जैन ने तकनीक की दुनिया में इतिहास रच दिया है। जैनम ने अपने अनूठे एआई स्टार्टअप 'Mengo Engine' की शुरुआत की है और इसका हेडक्वार्टर सीधे दुनिया की सबसे ऊंची इमारत, बुर्ज खलीफा की 141वीं मंजिल पर स्थापित किया है।
उम्र सिर्फ एक नंबर: बुर्ज खलीफा से शुरू हुआ सफर
कहते हैं कि हौसलों की उड़ान के लिए उम्र की कोई सीमा नहीं होती, और इस बात को पूरी तरह सच साबित कर दिखाया है जैनम जैन ने। सिर्फ 14 साल की उम्र में, जब अधिकांश किशोर अपने भविष्य की दिशा तय करने में उलझे होते हैं, जैनम ने एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) की दुनिया में अपनी एक मजबूत पहचान बना ली है।
दुबई की मशहूर और दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफा की 141वीं मंजिल से अब एक नया तकनीकी अध्याय लिखा जा रहा है। जैनम जैन के स्टार्टअप 'Mengo Engine' का ऑफिस इतनी ऊंचाई पर खुलना सिर्फ एक भौगोलिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह इस युवा उद्यमी के ऊंचे इरादों को भी दर्शाता है। इतनी कम उम्र में दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित बिजनेस हब में अपनी जगह बनाना वैश्विक स्तर पर एक बड़ी मिसाल बन गया है।
क्या करता है जैनम का 'Mengo Engine'?
जैनम जैन का यह ड्रीम प्रोजेक्ट, Mengo Engine, पूरी तरह से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित है। यह स्टार्टअप आधुनिक युग की तकनीकी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अत्याधुनिक एआई सेवाएं और समाधान प्रदान करता है। आज के समय में जब पूरी दुनिया ऑटोमेशन और मशीन लर्निंग की तरफ तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में Mengo Engine व्यवसायों को स्मार्ट और अधिक कुशल बनाने के लिए डिजिटल टूल्स और एआई-संचालित प्लेटफॉर्म मुहैया करा रहा है।
तकनीकी बाजार के जानकारों का मानना है कि जैनम का यह वेंचर आने वाले समय में एआई के क्षेत्र में नए मानक स्थापित कर सकता है। इस स्टार्टअप का मुख्य उद्देश्य जटिल तकनीकी प्रक्रियाओं को सरल बनाना और उद्योगों को एडवांस एआई का सीधा लाभ पहुंचाना है।
वैश्विक पटल पर युवा भारत का दबदबा
जैनम जैन की यह सफलता दुनिया भर के युवा इनोवेटर्स और उद्यमियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा बनकर उभरी है। बुर्ज खलीफा जैसी जगह से एक टेक स्टार्टअप का संचालन करना यह साबित करता है कि अगर आपके पास सही विजन और कड़ी मेहनत का जज्बा है, तो ग्लोबल मार्केट में जगह बनाना नामुमकिन नहीं है।
इस उपलब्धि ने न केवल तकनीकी नवाचार (Tech Innovation) को एक नई और गतिशील दिशा दी है, बल्कि दुनिया भर के निवेशकों का ध्यान भी अपनी ओर खींचा है। सिलिकॉन वैली से लेकर दुबई के टेक सर्कल्स तक, हर जगह इस 14 वर्षीय भारतीय लड़के के दिमाग और उसके बड़े बिजनेस विजन की चर्चा हो रही है। जैनम ने यह दिखा दिया है कि आने वाला कल एआई का है और इस भविष्य की कमान अब युवा हाथों में सुरक्षित है।

IOCL में 335 पदों पर भर्ती, बिना परीक्षा मिलेगी एंट्री
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) ने वेस्टर्न रीजन में टेक्नीशियन, ट्रेड और ग्रेजुएट अप्रेंटिस के 335 पदों पर आवेदन मंगाए हैं। उम्मीदवारों का चयन बिना किसी परीक्षा के, केवल मेरिट लिस्ट के आधार पर होगा। इसके लिए 5 अक्टूबर से 4 नवंबर तक नि:शुल्क आवेदन किया जा सकता है।
खबर का निचोड़
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) ने वेस्टर्न रीजन में टेक्नीशियन, ट्रेड और ग्रेजुएट अप्रेंटिस के 335 पदों पर आवेदन मंगाए हैं। उम्मीदवारों का चयन बिना किसी परीक्षा के, केवल मेरिट लिस्ट के आधार पर होगा। इसके लिए 5 अक्टूबर से 4 नवंबर तक नि:शुल्क आवेदन किया जा सकता है।
इंडियन ऑयल में करियर बनाने का सुनहरा मौका
सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं और तकनीकी क्षेत्र में ट्रेनिंग की चाह रखने वाले अभ्यर्थियों के लिए एक बेहतरीन अवसर सामने आया है। महारत्न कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) के मार्केटिंग डिवीज़न ने वेस्टर्न रीजन के तहत 335 अप्रेंटिस पदों के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इस भर्ती प्रक्रिया के तहत चुने गए उम्मीदवारों को 12 महीने की अवधि के लिए स्टाइपेंड के साथ अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग दी जाएगी।
पदों का विवरण और श्रेणियां
इस भर्ती अभियान के माध्यम से अलग-अलग योग्यता वाले उम्मीदवारों के लिए अवसर उपलब्ध कराए गए हैं। कुल 335 पदों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है:
टेक्नीशियन अप्रेंटिस
ट्रेड अप्रेंटिस
ग्रेजुएट अप्रेंटिस
अलग-अलग स्ट्रीम्स और ट्रेड्स के लिए पदों की संख्या निर्धारित की गई है, जिससे डिप्लोमा, आईटीआई और डिग्री धारक उम्मीदवार अपनी योग्यता के अनुसार आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।
बिना लिखित परीक्षा के चयन, मेरिट से बनेगी बात
इस भर्ती की सबसे खास बात यह है कि उम्मीदवारों को किसी भी प्रकार की लिखित परीक्षा या कठिन इंटरव्यू दौर से नहीं गुजरना पड़ेगा। चयन प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और मेरिट आधारित रखी गई है। अभ्यर्थियों द्वारा उनकी शैक्षणिक योग्यता (क्वालिफाइंग परीक्षा) में प्राप्त अंकों के आधार पर एक मेरिट सूची तैयार की जाएगी। इसी मेरिट लिस्ट के जरिए योग्य उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करके सीधे ट्रेनिंग के लिए चुना जाएगा।
आवेदन प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तिथियां
इच्छुक और योग्य उम्मीदवार IOCL के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन माध्यम से अपना फॉर्म जमा कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया 5 अक्टूबर से शुरू हो चुकी है और फॉर्म भरने की अंतिम तिथि 4 नवंबर रखी गई है।
आवेदकों के लिए एक राहत की बात यह भी है कि इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के लिए कोई आवेदन शुल्क नहीं रखा गया है। सभी वर्गों के उम्मीदवार बिना किसी शुल्क के इसके लिए आवेदन कर सकते हैं।
12 महीने की ट्रेनिंग से संवरेगा भविष्य
चयनित उम्मीदवारों को 12 महीने की अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग के दौरान कोर इंडस्ट्री का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होगा। देश की सबसे बड़ी तेल कंपनियों में से एक में काम करने का यह अनुभव युवाओं के भविष्य के करियर के लिए बेहद मददगार साबित होगा। आवेदकों को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम तारीख का इंतजार किए बिना समय रहते अपना आवेदन पूरा कर लें।

वैध वीजा और भारत में प्रवेश के अधिकार पर दिल्ली उच्च न्यायालय का निर्णय
दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि वैध वीजा होने मात्र से किसी विदेशी नागरिक को भारत में प्रवेश का कोई अंतर्निहित या कानूनी रूप से लागू करने योग्य अधिकार नहीं मिल जाता। यह निर्णय राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के आधार पर तुर्कमेनिस्तान की नागरिक की याचिका खारिज करते हुए दिया गया।
सारांश (Summary):
दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि वैध वीजा होने मात्र से किसी विदेशी नागरिक को भारत में प्रवेश का कोई अंतर्निहित या कानूनी रूप से लागू करने योग्य अधिकार नहीं मिल जाता। यह निर्णय राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के आधार पर तुर्कमेनिस्तान की नागरिक की याचिका खारिज करते हुए दिया गया।
विस्तृत विश्लेषण (Detailed Analysis):
मामला एवं कानूनी पृष्ठभूमि
यह विवाद तब उत्पन्न हुआ जब तुर्कमेनिस्तान की एक नागरिक को वैध बिजनेस वीजा होने के बावजूद नई दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर प्रवेश से रोक दिया गया और उसे उसी दिन वापस लौटना पड़ा। याचिकाकर्ता ने अपने पति, जो समान श्रेणी के वीजा पर आए थे और जिन्हें प्रवेश की अनुमति दी गई थी, के साथ हुए कथित भेदभाव और बिना कारण बताए प्रवेश अस्वीकार किए जाने को चुनौती देते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया था।
न्यायालय का केंद्रीय तर्क और संप्रभु शक्ति
उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वीजा जारी करना, प्रवेश से इनकार करना और आव्रजन (इमिग्रेशन) मंजूरी देना राज्य के संप्रभु कार्य हैं, जिनमें राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और प्रशासनिक विवेक जैसे गंभीर पहलू शामिल होते हैं। अदालत ने रेखांकित किया कि वीजा की आवश्यकताओं को पूरा करना और देश में वास्तविक प्रवेश पाना दोनों अलग-अलग विषय हैं। वैधानिक ढांचा यह मानता है कि केवल वीजा होने मात्र से भारत में प्रवेश का कोई पूर्ण और अशर्त अधिकार स्वतः सृजित नहीं होता।
समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14) पर निर्णय
न्यायालय ने याचिकाकर्ता के इस तर्क को खारिज कर दिया कि उसके पति को अनुमति मिलना और उसे रोका जाना अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है। अदालत के अनुसार, चूंकि याचिकाकर्ता के संबंध में विशिष्ट 'प्रतिकूल इनपुट्स' (Adverse Inputs) प्राप्त हुए थे, इसलिए दोनों मामलों को एक समान नहीं माना जा सकता। राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के हित में सक्षम प्राधिकारियों द्वारा लिए गए निर्णयों के आधार पर याचिका को खारिज कर दिया गया।

ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर का तीसरा चरण और नवीकरणीय ऊर्जा निकासी की चुनौतियाँ
केंद्र सरकार ने 1.86 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर (GEC) के तीसरे चरण को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य 135 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी को सुगम बनाना है। इसमें पहली बार बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) को शामिल किया गया है।
सारांश (Summary):
केंद्र सरकार ने 1.86 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर (GEC) के तीसरे चरण को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य 135 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी को सुगम बनाना है। इसमें पहली बार बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) को शामिल किया गया है।
विस्तृत विश्लेषण (Detailed Analysis):
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर और उसका महत्व
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर बड़े पैमाने पर सौर और पवन ऊर्जा जैसी नवीकरणीय ऊर्जा को राष्ट्रीय पावर ग्रिड में एकीकृत करने के लिए समर्पित ट्रांसमिशन बुनियादी ढांचा तैयार करने का एक प्रमुख सरकारी कार्यक्रम है। जैसे-जैसे भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता तेजी से विस्तार कर रही है, वैसे-वैसे ग्रिड में बिजली के संप्रेषण और संतुलन की चुनौती भी बढ़ रही है। 'ऊर्जा निकासी' (Evacuation) से तात्पर्य नवीकरणीय स्रोतों से उत्पन्न बिजली को उन स्थानों तक स्थानांतरित करना है जहाँ इसकी वास्तव में खपत होती है।
तीसरे चरण की मुख्य विशेषताएँ और बैटरी स्टोरेज
जीईसी के तीसरे चरण में पहली बार एक समर्पित बैटरी ऊर्जा भंडारण घटक को शामिल किया गया है, जिसमें 50 गीगावाट-घंटे (GWh) के बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) की तैनाती का प्रावधान है। ऊर्जा भंडारण प्रणालियाँ उच्च उत्पादन अवधि के दौरान अतिरिक्त नवीकरणीय बिजली का भंडारण करती हैं और मांग बढ़ने तथा उत्पादन कम होने पर इसे डिस्चार्ज करती हैं। यह प्रणाली नवीकरणीय ऊर्जा को सुरक्षित रखने और ग्रिड की अस्थिरता को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
ट्रांसमिशन बाधाएँ और वित्तीय आवंटन
विशेष रूप से दिन के समय उच्च सौर उत्पादन के दौरान ट्रांसमिशन बाधाएँ और ग्रिड की भीड़भाड़ के कारण नवीकरणीय ऊर्जा की निकासी बाधित होती है। इस समस्या से निपटने के लिए स्वीकृत 1.86 लाख करोड़ रुपये में से 1.36 लाख करोड़ रुपये से अधिक अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन सिस्टम (InSTS) के लिए, 50,000 करोड़ रुपये 50 GWh BESS के लिए और 54,082 करोड़ रुपये केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFS) के रूप में आवंटित किए गए हैं। केंद्रीय वित्तीय सहायता का उद्देश्य अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन शुल्कों को ऑफसेट करना और उपभोक्ताओं के लिए बिजली की लागत को कम रखना है।

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल संवर्ग बनाम आईपीएस प्रतिनियुक्ति विवाद और विधायी टकराव
उच्चतम न्यायालय में अवमानना याचिकाओं की सुनवाई से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के वरिष्ठ कमांड पदों पर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) की प्रतिनियुक्ति को लेकर पुराना संस्थागत विवाद फिर से गहरा गया है। यह विवाद संवर्ग प्रबंधन, पदोन्नति में ठहराव और न्यायिक निर्देशों बनाम विधायी कार्रवाइयों के बीच संतुलन से जुड़ा है।
सारांश (Summary):
उच्चतम न्यायालय में अवमानना याचिकाओं की सुनवाई से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) के वरिष्ठ कमांड पदों पर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) की प्रतिनियुक्ति को लेकर पुराना संस्थागत विवाद फिर से गहरा गया है। यह विवाद संवर्ग प्रबंधन, पदोन्नति में ठहराव और न्यायिक निर्देशों बनाम विधायी कार्रवाइयों के बीच संतुलन से जुड़ा है।
विस्तृत विश्लेषण (Detailed Analysis):
हालिया विवाद और न्यायिक पृष्ठभूमि
शीर्ष अदालत ने 23 मई 2025 के अपने ऐतिहासिक फैसले (संजय प्रकाश बनाम भारत संघ) के अनुपालन न होने पर दायर अवमानना याचिकाओं पर सुनवाई शुरू की है। इस फैसले में न्यायालय ने सीएपीएफ के ग्रुप-ए कार्यपालिका संवर्गों को 'संगठित ग्रुप-ए सेवा' (OGAS) के रूप में मान्यता दी थी और वरिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड (एसएजी) तक आईपीएस प्रतिनियुक्ति को दो साल की समय सीमा के भीतर क्रमिक रूप से कम करने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद सरकार द्वारा 46 आईपीएस अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर लाए जाने के बाद यह कानूनी और प्रशासनिक टकराव उत्पन्न हुआ है।
अंतर्निहित विवाद और संवर्ग ठहराव की समस्या
सीएपीएफ (सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी) के अपने स्वयं के ग्रुप-ए अधिकारी होते हैं जो सहायक कमांडेंट के रूप में शामिल होते हैं। पारंपरिक रूप से डीआईजी के 20% और आईजी के 50% पद आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति के लिए आरक्षित रहे हैं। संवर्ग अधिकारियों का तर्क है कि उच्च पदों पर बाहरी प्रतिनियुक्ति से गंभीर पदोन्नति अवरोध (स्टैग्नेशन) उत्पन्न होता है, जिससे वर्षों की उत्कृष्ट सेवा के बाद भी उन्हें उच्च कमान पद नहीं मिल पाते और उनका मनोबल प्रभावित होता है।
नया सीएपीएफ अधिनियम और संवैधानिक प्रश्न
न्यायालय के 2025 के आदेश के प्रभाव को निष्प्रभावी करने के उद्देश्य से सरकार ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) अधिनियम पारित किया है। नए कानून में 50 प्रतिशत आईजी पद, कम से कम 67 प्रतिशत एडीजी पद और सभी स्पेशल डीजी तथा डीजी पद प्रतिनियुक्ति के माध्यम से भरने का प्रावधान किया गया है। साथ ही, इसमें यह भी प्रावधान है कि इसके तहत बनाए गए नियम न्यायालयों के किसी भी असंगत आदेश या निर्णय के बावजूद प्रभावी होंगे। वर्तमान में यह मामला इस बात पर केंद्रित है कि क्या यह विधायी ढांचा न्यायिक समीक्षा और शक्तियों के पृथक्करण के संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप है।

G7 देशों द्वारा आपातकालीन भंडारों से क्रूड ऑयल और डीजल जारी करने का निर्णय
ग्रुप ऑफ सेवन (G7) देशों ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में आसमान छूती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अपने आपातकालीन भंडारों से 100 मिलियन बैरल क्रूड ऑयल और डीजल को चार महीने के भीतर चरणबद्ध तरीके से जारी करने पर सहमति व्यक्त की है। यह समन्वित कदम अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के माध्यम से उठाया जा रहा है।
सारांश (Summary):
ग्रुप ऑफ सेवन (G7) देशों ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों में आसमान छूती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए अपने आपातकालीन भंडारों से 100 मिलियन बैरल क्रूड ऑयल और डीजल को चार महीने के भीतर चरणबद्ध तरीके से जारी करने पर सहमति व्यक्त की है। यह समन्वित कदम अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के माध्यम से उठाया जा रहा है।
विस्तृत विश्लेषण (Detailed Analysis):
G7 संगठन का परिचय और विकास
जी-7 (Group of Seven) दुनिया की सात उन्नत अर्थव्यवस्थाओं का एक अनौपचारिक समूह है, जिसके सदस्य देशों में कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं। इसकी स्थापना वर्ष 1975 में तेल संकट के दौर में वैश्विक आर्थिक मुद्दों के समाधान के लिए की गई थी। वर्ष 1998 में रूस के जुड़ने से यह समूह कुछ समय के लिए 'जी-8' बन गया था, किंतु 2014 में रूस के निष्कासन के बाद यह पुनः 'जी-7' के स्वरूप में आ गया। वर्तमान में यह समूह वैश्विक अर्थव्यवस्था के अलावा विदेश नीति, सुरक्षा, व्यापार, जलवायु और विकास जैसे व्यापक वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श करता है।
शासन प्रणाली और कार्यप्रणाली
जी-7 समूह का कोई स्थायी सचिवालय, प्रशासनिक ढांचा या निश्चित प्रक्रियात्मक दिशा-निर्देश नहीं होते हैं। इस समूह की अध्यक्षता सदस्य देशों के बीच प्रतिवर्ष कैलेण्डर वर्ष के आधार पर चक्रानुक्रम (रोटेशन) में बदलती रहती है। यूरोपीय संघ (EU) इस समूह का सदस्य तो है, लेकिन वह इसकी घूर्णन अध्यक्षता नहीं संभालता है। अध्यक्षता करने वाला देश ही उस वर्ष के एजेंडे और मुख्य प्राथमिकताओं को तय करता है। इस समूह के तमाम महत्वपूर्ण निर्णय आम सहमति (Consensus) के आधार पर लिए जाते हैं।
हालिया आपातकालीन निर्णय और ऊर्जा संकट
हाल ही में G7 देशों ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के साथ मिलकर भू-राजनीतिक संघर्षों और आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने के कारण रिकॉर्ड स्तर पर पहुँची ईंधन कीमतों को नियंत्रित करने के लिए 100 मिलियन बैरल डीजल और कच्चे तेल को आपातकालीन भंडारों से मुक्त करने की घोषणा की है। इस योजना के तहत शुरुआती 20 दिनों में ही भारी मात्रा में डीजल की आपूर्ति को प्राथमिकता दी जाएगी, ताकि वैश्विक बाजारों पर पड़ रहे दबाव को कम किया जा सके और सदस्य देश एक-दूसरे पर ऊर्जा निर्यात प्रतिबंध न लगाने के लिए प्रतिबद्ध रहें।
Delight News
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