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12वीं में फेल, पर इरादों में पास: सिया ने घर की रसोई से खड़ा किया बेकिंग बिजनेस

12वीं में फेल, पर इरादों में पास: सिया ने घर की रसोई से खड़ा किया बेकिंग बिजनेस

Delight News
📅 30 Jun2026

पढ़ाई में मन न लगने और 12वीं की परीक्षा पास न कर पाने के बावजूद सिया गोयल ने हार नहीं मानी। उन्होंने लीक से हटकर अपनी रुचि को पहचाना और घर से ही केक-बेकिंग का एक सफल कारोबार शुरू कर दिया। सिया की मां पूजा गोयल ने इस सफर और बेटी की लगन को खुलकर साझा किया है।

12वीं में फेल, पर इरादों में पास: सिया ने घर की रसोई से खड़ा किया बेकिंग बिजनेस
खबर का निचोड़:
पढ़ाई में मन न लगने और 12वीं की परीक्षा पास न कर पाने के बावजूद सिया गोयल ने हार नहीं मानी। उन्होंने लीक से हटकर अपनी रुचि को पहचाना और घर से ही केक-बेकिंग का एक सफल कारोबार शुरू कर दिया। सिया की मां पूजा गोयल ने इस सफर और बेटी की लगन को खुलकर साझा किया है।
डिग्री नहीं, हुनर से लिखी कामयाबी की कहानी
पारंपरिक पढ़ाई और डिग्रियों के इस दौर में सिया गोयल ने साबित कर दिया है कि सफलता का रास्ता सिर्फ परीक्षा के नतीजों से होकर नहीं गुजरता। 12वीं कक्षा में असफल होने के बाद जहां अमूमन युवा निराशा के भंवर में डूब जाते हैं, वहीं सिया ने अपनी कमज़ोरी को अपनी ताकत बना लिया। पढ़ाई में कभी रुचि न होने की बात को स्वीकार करते हुए उन्होंने उस रास्ते को चुना, जिसमें उनका दिल बसता था—यानी बेकिंग की कला।
मां का मिला साथ, सच से शुरू हुआ नया सफर
सिया की मां पूजा गोयल ने हाल ही में अपनी बेटी के इस पूरे सफर पर खुलकर बात की है। उन्होंने बताया कि सिया का मन कभी भी किताबी ज्ञान में नहीं रमा, जिसके चलते वह 12वीं की दहलीज भी पार नहीं कर सकी थीं। लेकिन एक मां के तौर पर उन्होंने सिया के भीतर छिपे हुनर को पहचाना। जब सिया की सगाई तय होने की बात आई, तब भी परिवार ने किसी तरह का पर्दा नहीं रखा। पूजा गोयल ने सगाई से पहले ही केतन अग्रवाल के परिवार को सिया की पढ़ाई और उसकी असफलता के बारे में पूरी सच्चाई साफ-साफ बता दी थी। रिश्तों की बुनियाद सच पर टिकी और इसे सामने वाले परिवार ने भी सहर्ष स्वीकार किया।
घर की रसोई बनी बेकिंग का स्टार्टअप
सच्चाई सामने आने और परिवार के मिले भरोसे ने सिया के हौसलों को नई उड़ान दी। उन्होंने घर की चारदीवारी और अपनी रसोई को ही कर्मभूमि बना लिया। सिया ने घर से ही केक और बेकिंग से जुड़े प्रोडक्ट्स का बिजनेस शुरू किया। आज वह अपने हाथ के बने बेहतरीन और स्वादिष्ट केक के दम पर अपनी एक अलग पहचान बना रही हैं। उनका यह बिजनेस न सिर्फ उनके हुनर को मंच दे रहा है, बल्कि समाज के उस नजरिए को भी बदल रहा है जो केवल स्कूली नंबरों के आधार पर किसी के भविष्य का फैसला कर देता है।
केतन अग्रवाल के परिवार के सामने रखी मिसाल
यह मामला केवल एक बिजनेस शुरू करने का नहीं है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने में ईमानदारी की एक बड़ी मिसाल भी है। केतन अग्रवाल के परिवार के सामने शादी से पहले लड़की की शैक्षणिक स्थिति को स्पष्ट करना और फिर उस लड़की का अपने पैरों पर खड़े होकर दिखाना, यह दर्शाता है कि आधुनिक दौर में हुनर और ईमानदारी को सबसे ऊपर रखा जा रहा है। सिया का यह बेकिंग बिजनेस आज तेजी से आगे बढ़ रहा है और वह हर दिन नए ऑर्डर्स के साथ अपने काम को विस्तार दे रही हैं।
पुणे मर्डर मिस्ट्री: 'क्रॉस मैरिज' की साजिश और 238 घंटे की कॉल

पुणे मर्डर मिस्ट्री: 'क्रॉस मैरिज' की साजिश और 238 घंटे की कॉल

Delight News
📅 01 Jul2026

पुणे के केतन अग्रवाल हत्याकांड ने शहर में सनसनी फैला दी है। पुलिस की तफ्तीश में अब 'क्रॉस मैरिज' का चौंकाने वाला एंगल सामने आया है, जिसने पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है। साक्ष्यों के जाल में फंसी मुख्य आरोपी सिया गोयल का पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की तैयारी की जा रही है, जबकि सह-आरोपी चेतन चौधरी का गेट एनालिसिस कर उसकी संदिग्ध हरकतों को डिकोड किया गया है।

पुणे मर्डर मिस्ट्री: 'क्रॉस मैरिज' की साजिश और 238 घंटे की कॉल
पुणे के केतन अग्रवाल हत्याकांड ने शहर में सनसनी फैला दी है। पुलिस की तफ्तीश में अब 'क्रॉस मैरिज' का चौंकाने वाला एंगल सामने आया है, जिसने पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया है। साक्ष्यों के जाल में फंसी मुख्य आरोपी सिया गोयल का पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की तैयारी की जा रही है, जबकि सह-आरोपी चेतन चौधरी का गेट एनालिसिस कर उसकी संदिग्ध हरकतों को डिकोड किया गया है।
साजिश का 'लोहगढ़' कनेक्शन
जांच एजेंसियों के लिए यह केस सामान्य हत्या से कहीं अधिक जटिल साबित हो रहा है। पुलिस ने आरोपी चेतन चौधरी को उसी लोहगढ़ किले पर ले जाकर क्राइम सीन का रीक्रिएशन किया, जहां हत्या की पटकथा लिखी गई थी। माना जा रहा है कि केतन को रास्ते से हटाने के लिए इसी किले की दुर्गम वादियों में पूरी साजिश रची गई थी।
विरोधाभासी बयानों का घेरा
पुलिस अब सिया के भाई साहिल की भूमिका को भी बेहद बारीकी से खंगाल रही है। साहिल के बयानों में लगातार विरोधाभास मिल रहे हैं, जिससे पुलिस को शक है कि इस जघन्य वारदात में वह भी मुख्य भूमिका में शामिल हो सकता है। पुलिस इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही है कि आखिर साहिल सच छिपाने की कोशिश क्यों कर रहा है।
प्यार का दिखावा और डिजिटल सबूत
हत्या से पहले का एक सीसीटीवी वीडियो सामने आया है, जो बेहद हैरान करने वाला है। इसमें केतन अपनी मंगेतर सिया और उसके माता-पिता के साथ बेहद खुश नजर आ रहा है। यह वीडियो उस दिन का है जब केतन को इस बात का आभास तक नहीं था कि जिस मंगेतर पर वह भरोसा कर रहा है, वही उसकी मौत की साज़िश रच रही है।
डिजिटल फोरेंसिक टीम को मिले आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं। सिया और चेतन के बीच पिछले 6 महीनों के दौरान 2004 बार कॉल्स हुई थीं। उनकी बातचीत का कुल समय 238 घंटे तक पहुंचता है। इतनी लंबी और गहन बातचीत इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि सिया और चेतन के बीच केवल पेशेवर नहीं, बल्कि एक गहरी और गहरी आपराधिक जुगलबंदी थी। पुलिस अब इन कॉल रिकॉर्ड्स की सीडीआर (CDR) के आधार पर यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर हत्या से ठीक पहले दोनों के बीच क्या आखिरी बात हुई थी, जिसने केतन की जिंदगी का अंत कर दिया। फिलहाल, पुलिस हर एक कड़ी को जोड़ने में जुटी है ताकि आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जा सके।
भारतीय मानसून: भौगोलिक तंत्र, अद्यतन स्थिति एवं रणनीतिक महत्व

भारतीय मानसून: भौगोलिक तंत्र, अद्यतन स्थिति एवं रणनीतिक महत्व

Delight News
📅 01 Jul2026

भारतीय मानसून केवल एक मौसमी घटना नहीं, बल्कि एक जटिल वायुमंडलीय प्रक्रिया है जो हिंद महासागर और तिब्बती पठार के तापीय विरोधाभासों पर निर्भर है। जलवायु परिवर्तन के कारण इसके पैटर्न में बदलाव आया है, जिससे 'क्लाउडबर्स्ट' और अनिश्चित वर्षा की घटनाएं बढ़ी हैं, जो भारत की खाद्य सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

भारतीय मानसून: भौगोलिक तंत्र, अद्यतन स्थिति एवं रणनीतिक महत्व
खबर का निचोड़
भारतीय मानसून केवल एक मौसमी घटना नहीं, बल्कि एक जटिल वायुमंडलीय प्रक्रिया है जो हिंद महासागर और तिब्बती पठार के तापीय विरोधाभासों पर निर्भर है। जलवायु परिवर्तन के कारण इसके पैटर्न में बदलाव आया है, जिससे 'क्लाउडबर्स्ट' और अनिश्चित वर्षा की घटनाएं बढ़ी हैं, जो भारत की खाद्य सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
विस्तृत विश्लेषण
मानसून की उत्पत्ति का भौगोलिक तंत्र
भारतीय मानसून की उत्पत्ति मुख्य रूप से ग्रीष्मकाल में स्थलीय और जलीय भागों के असमान तापन के कारण होती है। मई-जून के महीनों में, तिब्बती पठार का अत्यधिक गर्म होना और उसके ऊपर एक 'लो प्रेशर सेल' का निर्माण मानसून को आकर्षित करने वाला प्राथमिक कारक है। इसके अतिरिक्त, जेट स्ट्रीम का विस्थापन और 'इंटर-ट्रॉपिकल कन्वर्जेंस जोन' (ITCZ) का उत्तर की ओर खिसकना मानसूनी हवाओं को भारतीय उपमहाद्वीप की ओर मोड़ देता है, जिसे दक्षिण-पश्चिमी मानसून कहा जाता है।
मानसून को प्रभावित करने वाले कारक
हालिया शोधों के अनुसार, 'एल नीनो दक्षिणी दोलन' (ENSO) और 'हिंद महासागर द्विध्रुव' (IOD) मानसून की तीव्रता को निर्धारित करने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। सकारात्मक IOD हिंद महासागर के पश्चिमी भाग को गर्म करता है, जो भारत में सामान्य से अधिक वर्षा का कारण बनता है। इसके विपरीत, नकारात्मक IOD और एल नीनो की स्थिति अक्सर मानसून को कमजोर कर देती है। साथ ही, अरब सागर के तापमान में हो रही असामान्य वृद्धि ने चक्रवातों की आवृत्ति को बढ़ाया है, जिससे तटीय क्षेत्रों में मानसून के दौरान भारी वर्षा की घटनाएं बढ़ी हैं।
जलवायु परिवर्तन का प्रभाव
जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून का 'समय चक्र' और 'वितरण' प्रभावित हुआ है। मानसून की शुरुआत और वापसी की तिथियों में अनिश्चितता देखी जा रही है। वर्तमान में मानसून की लंबी अवधि के बजाय कम समय में अत्यधिक वर्षा होने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। यह स्थिति कृषि उत्पादकता के लिए चुनौतीपूर्ण है क्योंकि यह या तो सूखे की स्थिति पैदा करती है या अचानक आई बाढ़ (Flash Floods) के कारण फसलों को नुकसान पहुँचाती है।
प्रशासनिक एवं रणनीतिक महत्व
भारत की कृषि अर्थव्यवस्था आज भी मानसून पर अत्यधिक निर्भर है। मानसून का पूर्वानुमान न केवल 'खरीफ' फसलों की बुवाई के लिए आवश्यक है, बल्कि जलाशयों में जल स्तर को बनाए रखने और ऊर्जा सुरक्षा (जलविद्युत) के लिए भी अनिवार्य है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा उपयोग किए जाने वाले 'डायनेमिक प्रेडिक्शन मॉडल' अब अधिक सटीक डेटा प्रदान कर रहे हैं, जो आपदा प्रबंधन और नीतिगत निर्णय लेने में प्रशासनिक तंत्र की सहायता करते हैं।
रेलवे में सरकारी नौकरी का सपना: RRB टेक्नीशियन के 6557 पदों पर भर्ती शुरू

रेलवे में सरकारी नौकरी का सपना: RRB टेक्नीशियन के 6557 पदों पर भर्ती शुरू

Delight News
📅 01 Jul2026

भारतीय रेलवे ने युवाओं के लिए रोजगार का एक बड़ा अवसर पेश किया है। रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने टेक्नीशियन ग्रेड-I सिग्नल और ग्रेड-III के विभिन्न पदों पर कुल 6557 वैकेंसी निकाली हैं। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार इन पदों के लिए 30 जून 2026 से आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 29 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है।

रेलवे में सरकारी नौकरी का सपना: RRB टेक्नीशियन के 6557 पदों पर भर्ती शुरू
भारतीय रेलवे ने युवाओं के लिए रोजगार का एक बड़ा अवसर पेश किया है। रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने टेक्नीशियन ग्रेड-I सिग्नल और ग्रेड-III के विभिन्न पदों पर कुल 6557 वैकेंसी निकाली हैं। योग्य और इच्छुक उम्मीदवार इन पदों के लिए 30 जून 2026 से आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 29 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है।
रेलवे में करियर बनाने का सुनहरा मौका
भारतीय रेलवे अपनी तकनीकी टीम को मजबूत करने के लिए तैयार है। आरआरबी की ओर से टेक्नीशियन पदों के लिए जारी इस भर्ती प्रक्रिया में ग्रेड-I सिग्नल और ग्रेड-III के हजारों रिक्त पद शामिल हैं। रेलवे में सरकारी नौकरी का सपना देखने वाले उन लाखों युवाओं के लिए यह एक बेहतरीन अवसर है जो तकनीकी योग्यता रखते हैं। आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और रेलवे भर्ती बोर्ड ने सभी इच्छुक उम्मीदवारों को समय सीमा के भीतर अपना पंजीकरण पूरा करने के लिए प्रोत्साहित किया है।
आवेदन और महत्वपूर्ण तिथियां
इस भर्ती प्रक्रिया के लिए ऑनलाइन आवेदन की खिड़की 30 जून 2026 को खुल गई है। जो उम्मीदवार इन पदों पर अपनी दावेदारी पेश करना चाहते हैं, वे 29 जुलाई 2026 तक अपना आवेदन जमा कर सकते हैं। यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि फॉर्म भरते समय सभी विवरण सटीक हों ताकि बाद में किसी प्रकार की तकनीकी समस्या या उम्मीदवारी रद्द होने का सामना न करना पड़े। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि अंतिम समय में सर्वर पर दबाव बढ़ने की संभावना को देखते हुए अपना फॉर्म समय से पहले भर लें।
योग्यता और चयन प्रक्रिया की बारीकियां
इन पदों पर चयन पूरी तरह से योग्यता पर आधारित होगा। टेक्नीशियन ग्रेड-I और ग्रेड-III के लिए शैक्षणिक योग्यताएं अलग-अलग हैं, जिसके लिए उम्मीदवारों को विस्तृत नोटिफिकेशन को ध्यान से पढ़ना चाहिए। चयन प्रक्रिया में उम्मीदवारों का तकनीकी ज्ञान, शैक्षणिक योग्यता और निर्धारित मानदंडों पर खरा उतरना आवश्यक है। रेलवे के इन पदों पर नियुक्त होने वाले उम्मीदवारों को आकर्षक वेतनमान और सरकारी सेवाओं के तमाम लाभ प्राप्त होंगे।
तैयारी की रणनीति
रेलवे में टेक्नीशियन की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होती है, जिसके लिए उचित तैयारी की आवश्यकता है। जो भी उम्मीदवार इस भर्ती परीक्षा में शामिल हो रहे हैं, उन्हें अपने संबंधित तकनीकी विषयों पर पकड़ बनानी होगी। आरआरबी टेक्नीशियन की इस भर्ती परीक्षा के लिए सिलेबस और परीक्षा पैटर्न को समझना सफलता की पहली सीढ़ी है। सटीक और प्रमाणित अध्ययन सामग्री के माध्यम से की गई तैयारी ही इस प्रतियोगिता में सफलता सुनिश्चित कर सकती है। रेलवे का यह बड़ा अभियान न केवल युवाओं को रोजगार प्रदान करेगा, बल्कि रेलवे के तकनीकी ढांचे को भी नई मजबूती देगा।
अखिलेश यादव के सामने टेबल पर पैर रखकर बैठने वाले इस 'राजा साहब' की कहानी

अखिलेश यादव के सामने टेबल पर पैर रखकर बैठने वाले इस 'राजा साहब' की कहानी

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📅 01 Jul2026

सोशल मीडिया पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की एक तस्वीर चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसमें वे एक वयोवृद्ध नेता के सामने बेहद आदर भाव से बैठे हैं और उन बुजुर्ग नेता के पैर टेबल पर हैं। ये कोई और नहीं, बल्कि प्रयागराज की राजनीति के 'भीष्म पितामह' और पूर्व केंद्रीय मंत्री कुंवर रेवती रमण सिंह हैं, जिन्हें लोग प्यार से 'राजा साहब' भी कहते हैं।

अखिलेश यादव के सामने टेबल पर पैर रखकर बैठने वाले इस 'राजा साहब' की कहानी
खबर का निचोड़:
सोशल मीडिया पर समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की एक तस्वीर चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसमें वे एक वयोवृद्ध नेता के सामने बेहद आदर भाव से बैठे हैं और उन बुजुर्ग नेता के पैर टेबल पर हैं। ये कोई और नहीं, बल्कि प्रयागराज की राजनीति के 'भीष्म पितामह' और पूर्व केंद्रीय मंत्री कुंवर रेवती रमण सिंह हैं, जिन्हें लोग प्यार से 'राजा साहब' भी कहते हैं।
राजनीति की वो तस्वीर जिसने सबका ध्यान खींचा
सियासत में अक्सर तस्वीरों के बड़े गहरे मायने होते हैं। हाल ही में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की एक तस्वीर सामने आई, जिसने हर किसी को रुककर सोचने पर मजबूर कर दिया। इस तस्वीर में अखिलेश यादव बेहद शालीनता और सम्मान के साथ एक बुजुर्ग नेता के सामने बैठे नजर आ रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि उन बुजुर्ग नेता के पैर सामने टेबल पर टिके हुए हैं। आम तौर पर प्रोटोकॉल और राजनीतिक शिष्टाचार को देखने वाले लोग इस पर हैरान हो सकते हैं, लेकिन जब आप इन बुजुर्ग नेता का कद और इतिहास जानेंगे, तो आपको समझ आएगा कि अखिलेश यादव के मन में उनके लिए इतना आदर क्यों है।
कौन हैं प्रयागराज के 'भीष्म पितामह' कुंवर रेवती रमण सिंह?
अखिलेश यादव के सामने इस अंदाज में बैठने वाले ये शख्स कोई साधारण नेता नहीं, बल्कि प्रयागराज (इलाहाबाद) की राजनीति के चाणक्य और भीष्म पितामह कहे जाने वाले कुंवर रेवती रमण सिंह हैं। इलाके के लोग उन्हें बेहद सम्मान से 'राजा साहब' नाम से पुकारते हैं। रेवती रमण सिंह का भारतीय राजनीति, खासकर उत्तर प्रदेश की सियासत में एक ऐसा कद रहा है जिसे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सम्मान मिलता है। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका राजनीतिक रसूख और सम्मान वैसा ही बरकरार है।
8 बार के विधायक और 2 बार के सांसद का शानदार सफर
कुंवर रेवती रमण सिंह की राजनीतिक ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे कोई एकाध बार नहीं, बल्कि पूरे 8 बार विधानसभा के सदस्य यानी विधायक चुने जा चुके हैं। इसके अलावा, उन्होंने देश की संसद में भी प्रयागराज का प्रतिनिधित्व किया है और 2 बार लोकसभा सांसद के रूप में निर्वाचित हुए हैं। केंद्र सरकार में मंत्री के रूप में काम कर चुके सिंह का देश और राज्य की नीतियों को आकार देने में बड़ा योगदान रहा है। यही वजह है कि समाजवादी पार्टी के भीतर और बाहर, हर कोई उनके सामने सिर झुकाता है।
रिश्तों की गर्माहट और राजनीतिक मर्यादा
इस तस्वीर को देखने वाले लोग समझ सकते हैं कि यह केवल दो नेताओं की मुलाकात नहीं है, बल्कि यह दो पीढ़ियों के बीच के अटूट रिश्ते और सम्मान की बानगी है। रेवती रमण सिंह के वयोवृद्ध होने और उनके स्वास्थ्य या सुविधा के लिहाज से उनके बैठने का यह अंदाज बेहद स्वाभाविक है, और अखिलेश यादव का उनके सामने इस तरह बैठना यह दिखाता है कि भारतीय राजनीति में आज भी बुजुर्गों और वरिष्ठ मार्गदर्शकों का स्थान कितना ऊंचा है। राजा साहब का यह अंदाज उनके बेबाक और बेफिक्र व्यक्तित्व को भी झलकाता है, जिसने दशकों तक यूपी की सियासत को प्रभावित किया है।
जब फिल्म के प्रीमियर पर ही सो गई शाहरुख खान की पूरी स्टार कास्ट

जब फिल्म के प्रीमियर पर ही सो गई शाहरुख खान की पूरी स्टार कास्ट

Delight News
📅 01 Jul2026

बॉलीवुड के 'किंग खान' यानी शाहरुख खान की दरियादिली के किस्से अक्सर सामने आते रहते हैं। फिल्ममेकर फराह खान ने हाल ही में खुलासा किया कि फिल्म 'हैप्पी न्यू ईयर' के प्रीमियर के लिए शाहरुख अपनी पूरी टीम के 50 सदस्यों को दुबई ले गए थे। हालांकि, थकावट के कारण फिल्म की पूरी स्टार कास्ट प्रीमियर के दौरान ही सो गई थी।

जब फिल्म के प्रीमियर पर ही सो गई शाहरुख खान की पूरी स्टार कास्ट
खबर का निचोड़:
बॉलीवुड के 'किंग खान' यानी शाहरुख खान की दरियादिली के किस्से अक्सर सामने आते रहते हैं। फिल्ममेकर फराह खान ने हाल ही में खुलासा किया कि फिल्म 'हैप्पी न्यू ईयर' के प्रीमियर के लिए शाहरुख अपनी पूरी टीम के 50 सदस्यों को दुबई ले गए थे। हालांकि, थकावट के कारण फिल्म की पूरी स्टार कास्ट प्रीमियर के दौरान ही सो गई थी।
शाहरुख का बड़ा दिल: क्रू मेंबर्स के लिए दुबई का टिकट
बॉलीवुड में शाहरुख खान को न सिर्फ उनकी बेहतरीन अदाकारी बल्कि उनके बड़े दिल और अपनी टीम के प्रति उनके लगाव के लिए भी जाना जाता है। ऐसा ही एक दिलचस्प वाकया उनकी सुपरहिट फिल्म 'हैप्पी न्यू ईयर' के दौरान का है, जिसका खुलासा खुद फिल्म की निर्देशक और कोरियोग्राफर फराह खान ने किया है।
शाहरुख खान अपनी फिल्मों से जुड़े हर छोटे-बड़े इंसान की मेहनत की कद्र करते हैं। जब 'हैप्पी न्यू ईयर' बनकर तैयार हुई और इसके भव्य प्रीमियर की बात आई, तो शाहरुख ने केवल मुख्य कलाकारों को ही नहीं, बल्कि फिल्म के पीछे काम करने वाले असली नायकों को भी इस जश्न का हिस्सा बनाने का फैसला किया। वे फिल्म के डीओपी (डायरेक्टर ऑफ फोटोग्राफी), संगीत निर्देशकों और सहायक निर्देशकों समेत करीब 50 क्रू मेंबर्स को अपने साथ प्रीमियर के लिए दुबई ले गए।
मेहनत की थकान और वो मजेदार रात
फराह खान ने इस वाकये को याद करते हुए एक बेहद मजेदार वाकया साझा किया। उन्होंने बताया कि फिल्म को समय पर पूरा करने और उसके प्रमोशन के लिए पूरी टीम दिन-रात एक कर रही थी। लगातार काम करने की वजह से स्टार कास्ट और क्रू मेंबर्स बुरी तरह थक चुके थे।
दुबई में प्रीमियर का आयोजन बेहद भव्य था, लेकिन थकान का असर पूरी टीम पर इस कदर हावी था कि उसे संभालना मुश्किल हो गया। फराह के मुताबिक, जैसे ही प्रीमियर शुरू हुआ और थिएटर की लाइटें बंद हुईं, फिल्म की मुख्य स्टार कास्ट और कई क्रू मेंबर्स अपनी सीटों पर ही गहरी नींद में सो गए।
पर्दे के पीछे के नायकों को सम्मान
आमतौर पर फिल्मी प्रीमियरों में सिर्फ बड़े चेहरों और मुख्य सितारों को ही लाइमलाइट मिलती है, लेकिन शाहरुख खान का यह कदम दिखाता है कि वे अपनी टीम को कितना महत्व देते हैं। एक फिल्म को सफल बनाने में जितना योगदान कैमरे के आगे रहने वाले कलाकारों का होता है, उतना ही पसीना कैमरे के पीछे काम करने वाले लोग भी बहाते हैं। शाहरुख का पूरी टीम को दुबई ले जाना उनके इसी सम्मान और कृतज्ञता को दर्शाता है, जिसने इस सफर को थकावट के बावजूद पूरी टीम के लिए हमेशा के लिए यादगार बना दिया।

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