
आरएसएस से जुड़े लोग 44,000 कारतूस संग गिरफ्तार: तेजस्वी
राजद नेता तेजस्वी यादव ने तस्वीर साझा कर दावा किया है कि बिहार में आरएसएस से जुड़े चार लोगों से 44,000 जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं। उन्होंने बताया कि इससे पहले एसटीएफ ने भोजपुर में 19,000 गोलियों के साथ 3 लोगों को पकड़ा था। तेजस्वी ने आरएसएस को आतंकवादी संगठन घोषित करने की मांग उठाई है।
राष्ट्रीय जनता दल (आरजडी) के नेता तेजस्वी यादव ने बिहार की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर साझा करते हुए दावा किया है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े लोगों के पास से भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया गया है। इस खुलासे के बाद से राज्य के राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है।
44 हजार जिंदा कारतूस बरामदगी का आरोप
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि बिहार में आरएसएस से जुड़े चंदन तिवारी, अभिषेक तिवारी, लालटू कुमार और सारस कुमार के पास से 44,000 जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि इससे पहले भी एसटीएफ (STF) ने भोजपुर में तीन लोगों को 19,000 गोलियों के साथ गिरफ्तार किया था। इतनी बड़ी संख्या में कारतूसों की बरामदगी को उन्होंने बेहद गंभीर मामला बताया है।
आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की मांग
इस पूरी घटना के संदर्भ में हमला तेज करते हुए तेजस्वी यादव ने एक कदम और आगे बढ़ते हुए मांग की है कि आरएसएस को आतंकवादी संगठन घोषित किया जाए। उनके इस बयान और मांग के बाद से ही भारतीय जनता पार्टी और विपक्षी खेमे के बीच जुबानी जंग बेहद तेज हो गई है।

कांग्रेस के दिल में तब भी बाबर, आज भी बाबर: त्रिवेदी
सोनिया गांधी के बाबरी विध्वंस वाले बयान पर बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने पलटवार किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि 1992 में दूरदर्शन लाइव प्रसारण नहीं करता था, तो सोनिया ने वह कब देखा। त्रिवेदी ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस के दिल में तब भी बाबर था और आज भी बाबर है।
सोनिया गांधी के उस बयान पर जिसमें उन्होंने टीवी पर बाबरी मस्जिद गिराए जाने की तस्वीरें देखकर रोने की बात कही थी, भारतीय जनता पार्टी ने आक्रामक रुख अपना लिया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने इस दावे पर सवाल खड़े करते हुए कांग्रेस पार्टी पर तीखा सियासी हमला बोला है।
दूरदर्शन के प्रसारण पर उठाया सवाल
सुधांशु त्रिवेदी ने तंज कसते हुए कहा कि वर्ष 1992 में दूरदर्शन पर इस घटना का कोई लाइव प्रसारण नहीं किया जाता था। ऐसे में यह सवाल उठता है कि सोनिया गांधी ने टेलीविजन पर उस विध्वंस की तस्वीरें आखिर कब और कैसे देख लीं।
कांग्रेस की वैचारिक सोच पर निशाना
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भाजपा प्रवक्ता ने कड़े शब्दों में कहा कि कांग्रेस पार्टी की मानसिकता और वैचारिक झुकाव हमेशा से एक खास दिशा में रहे हैं। उन्होंने अपनी बात को स्पष्ट करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस के दिल में तब भी बाबर था और आज भी बाबर ही बसा हुआ है।

बिस्कुट बाजार में रिलायंस की धमाकेदार एंट्री, दिग्गजों को चुनौती
मुकेश अंबानी की आरसीपीएल ने 'इंडिपेंडेंस' ब्रांड के तहत ₹5 से ₹125 तक की कीमत में 9 वेरिएंट के साथ बिस्कुट बाजार में कदम रखा है। ₹55,000 करोड़ के इस बाजार में अभी ब्रिटानिया और पार्ले का दबदबा है। रिलायंस अपने मजबूत रिटेल नेटवर्क के जरिए इन्हें कड़ी टक्कर देने की तैयारी में है।
भारतीय एफएमसीजी सेक्टर में कारोबार का दायरा बढ़ाते हुए मुकेश अंबानी की कंपनी ने एक नया और बड़ा कदम उठाया है। आरसीपीएल (RCPL) ने 'इंडिपेंडेंस' ब्रांड के बैनर तले बिस्कुट बाजार में आधिकारिक तौर पर प्रवेश कर लिया है। कंपनी की इस नई पहल से बाजार में मुकाबला बेहद रोमांचक होने की पूरी उम्मीद है।
किफायती कीमतों और कई वेरिएंट्स के साथ शुरुआत
ग्राहकों को लुभाने के लिए कंपनी ने बाजार में ₹5 से लेकर ₹125 तक की कीमत वाले 9 अलग-अलग वेरिएंट उतारे हैं। हर वर्ग के उपभोक्ताओं को ध्यान में रखते हुए उत्पादों की यह श्रृंखला तैयार की गई है, जिससे कम बजट से लेकर प्रीमियम सेगमेंट तक के ग्राहकों को साधा जा सके।
दिग्गजों के सामने कड़ी चुनौती
देश का बिस्कुट बाजार लगभग ₹55,000 करोड़ का है, जिस पर फिलहाल ब्रिटानिया (32%) और पार्ले (29%) जैसी बड़ी कंपनियों का कब्जा है। इन स्थापित दिग्गजों को टक्कर देना आसान नहीं होगा, लेकिन रिलायंस के पास अपना बेहद मजबूत रिटेल और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क मौजूद है, जिसके दम पर वह बाजार में एक नई हलचल पैदा करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने के फैसले से डर गई थीं सोनिया
सोनिया गांधी ने अपनी ऑटोबायोग्राफी में खुलासा किया है कि इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने के फैसले से वह काफी डर गई थीं。 उन्होंने बच्चों की खातिर राजीव से पद न स्वीकारने की विनती की थी, जिस पर राजीव गांधी ने जवाब दिया था कि वे उन्हें वैसे भी मार डालेंगे。
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने अपनी आत्मकथा में कई अनछुए पहलुओं पर खुलकर बात की है。 उन्होंने उस दौर का जिक्र किया है जब देश में राजनीतिक उथल-पुथल मची हुई थी और परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था。 इस दौरान राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने के निर्णय ने सोनिया गांधी को डरा दिया था。
बच्चों की सुरक्षा को लेकर थीं चिंतित
इंदिरा गांधी की हत्या के बाद जब राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री पद संभालने का फैसला किया, तो सोनिया गांधी बुरी तरह घबरा गई थीं。 उन्होंने राजीव गांधी से विनती की थी कि वे बच्चों की खातिर इस पद को स्वीकार न करें। सोनिया ने उनसे कहा था कि वे प्रधानमंत्री पद ठुकरा दें क्योंकि ऐसा करने पर वे लोग उन्हें भी मार डालेंगे。
राजीव गांधी का निर्भीक जवाब
सोनिया गांधी की इस चिंता और डर के जवाब में राजीव गांधी ने जो कहा, वह इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुका है। राजीव गांधी ने स्पष्ट रूप से कहा था कि वे लोग उन्हें वैसे भी मार डालेंगे। इस संस्मरण ने देश के राजनीतिक इतिहास के एक संवेदनशील और तनावपूर्ण समय को दोबारा सामने ला दिया है。

हम आज भी अंग्रेजी भाषा के गुलाम क्यों हैं: जस्टिस चौधरी
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस गौतम चौधरी ने अपने विदाई समारोह के दौरान तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों से आजाद हुए 80 साल होने को हैं, लेकिन हम अब तक अंग्रेजी से खुद को आजाद नहीं कर पाए हैं। उन्होंने भारतीय भाषा का अपमान होने पर गहरा आघात जताते हुए अंग्रेजी को 'विलायत वाली मौसी' बताया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस गौतम चौधरी ने अपने विदाई समारोह के अवसर पर देश में अंग्रेजी भाषा के वर्चस्व को लेकर तीखा सवाल उठाया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भले ही हम अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त हो चुके हैं, लेकिन मानसिक रूप से आज भी अंग्रेजी भाषा के मोह से बाहर नहीं निकल पाए हैं।
अंग्रेजी हमारी मौसी हो सकती है, गुलाम नहीं
अपने संबोधन के दौरान जस्टिस चौधरी ने कहा कि अंग्रेजी हमारी 'विलायत वाली मौसी' हो सकती है और मौसियों का पूरा सम्मान होना चाहिए, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम अपनी मातृभाषा और भारतीय भाषाओं का अपमान होते देखें। उन्होंने इस बात पर गहरी पीड़ा व्यक्त की कि भारतीय भाषाओं की उपेक्षा देखकर उन्हें भारी आघात पहुंचता है।
गुलामी के 300 साल और वर्तमान स्थिति
उन्होंने याद दिलाया कि अंग्रेजों ने हम पर लगभग 300 साल तक शासन किया था। देश को आजाद हुए 80 साल पूरे होने जा रहे हैं, फिर भी व्यवस्था और समाज के स्तर पर हम अंग्रेजी की बैसाखियों पर निर्भर बने हुए हैं। इस विचारोत्तेजक बयान ने एक बार फिर देश में भाषा और संस्कृति को लेकर बड़ी बहस छेड़ दी है।
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