
'ईमानदार होती तो गायब नहीं होती': तनुश्री पर हेतल यादव का हमला
अभिनेत्री हेतल यादव ने तनुश्री दत्ता के व्यवहार को अनप्रोफेशनल बताते हुए उनके साथ काम करने के अनुभव को खराब बताया है। तनुश्री के उस आरोप पर कि बॉलीवुड ने उनके प्रोजेक्ट्स छीनकर करियर बर्बाद किया, हेतल ने पलटवार करते हुए कहा कि यदि तनुश्री अपने काम के प्रति ईमानदार होतीं, तो आज इंडस्ट्री से गायब नहीं होतीं।
हेतल यादव ने बताया अनप्रोफेशनल व्यवहार
एक इंटरव्यू के दौरान अभिनेत्री हेतल यादव ने तनुश्री दत्ता के साथ अपने पुराने दिनों के काम करने के अनुभव को साझा किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि तनुश्री का व्यवहार सेट पर अनप्रोफेशनल रहता था और उनके साथ काम करने का अनुभव बिल्कुल भी अच्छा नहीं रहा था। हेतल का यह बयान उन दाوों के बिल्कुल विपरीत है जिसमें अक्सर कलाकारों को इंडस्ट्री में उत्पीड़न या खराब माहौल का शिकार बताया जाता है।
करियर बर्बादी के आरोपों पर पलटवार
तनुश्री दत्ता ने पूर्व में आरोप लगाया था कि बॉलीवुड के ताकतवर लोगों ने उनके हाथ से प्रोजेक्ट्स छीन लिए और सोची-समझी साजिश के तहत उनके करियर को बर्बाद कर दिया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए हेतल यादव ने कहा कि इन आरोपों में कोई दम नहीं है। हेतल का मानना है कि यदि तनुश्री अपने काम के प्रति सच्ची और ईमानदार होतीं, तो आज वह फिल्म इंडस्ट्री से इस तरह पूरी तरह दूर या गायब नहीं होतीं।
इंडस्ट्री में छिड़ी नई चर्चा
हेतल यादव के इस बेबाक बयान के बाद सोशल मीडिया और फिल्म जगत में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक तरफ जहां कुछ लोग इसे कलाकारों की आपसी खींचतान मान रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ यह मुद्दा एक बार फिर इस बहस को हवा दे रहा है कि इंडस्ट्री में सफलता और विफलता के पीछे निजी व्यवहार की कितनी बड़ी भूमिका होती है।

'लीड रोल मिला तो फिल्म फ्लॉप होगी': राधिका आप्टे का बेबाक बयान
बॉलीवुड अभिनेत्री राधिका आप्टे ने अपनी अभिनय क्षमताओं और भूमिकाओं को लेकर एक बेहद बेबाक बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वह आलिया भट्ट या दीपिका पादुकोण जैसी स्टार नहीं हैं। अगर उन्हें किसी फिल्म में मुख्य अभिनेत्री का रोल दिया गया, तो वह फिल्म फ्लॉप हो सकती है।
'आलिया या दीपिका जैसी स्टार नहीं हूं'
राधिका आप्टे ने कहा कि वह खुद को आलिया भट्ट या दीपिका पादुकोण जैसे बड़े स्तर की स्टार अभिनेत्रियों की कतार में नहीं देखती हैं। उनका मानना है कि इन अभिनेत्रियों का अपना एक अलग स्टारडम और फैन बेस है जो फिल्मों को बॉक्स ऑफिस पर खींचने की क्षमता रखता है। राधिका का कहना है कि अगर उन्हें किसी फिल्म में सोलो लीड या मुख्य अभिनेत्री का किरदार दिया गया, तो काफी संभावना है कि वह फिल्म फ्लॉप हो जाए।
स्टारडम नहीं, कहानी है पहली पसंद
अपने अभिनय करियर और किरदारों के चयन पर बात करते हुए राधिका ने स्पष्ट किया कि वह खुद को पारंपरिक मुख्य अभिनेत्री (लीड एक्ट्रेस) के रूप में नहीं देखतीं। उनके लिए सबसे ज्यादा मायने फिल्म की कहानी और उसमें उनके किरदार की अहमियत रखती है। वह ऐसे प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनना पसंद करती हैं जहाँ उन्हें अपनी अभिनय प्रतिभा को निखारने और विषय आधारित सिनेमा से जुड़ने का मौका मिले।
यथार्थवादी सोच की हो रही तारीफ
अक्सर जहां कलाकार बॉलीवुड में मुख्य भूमिका पाने और स्टारडम हासिल करने की होड़ में लगे रहते हैं, वहीं राधिका आप्टे का यह यथार्थवादी दृष्टिकोण काफी अलग नजर आता है। फिल्म जगत और सोशल मीडिया पर उनके इस बयान की काफी सराहना हो रही है। लोग उनकी इस ईमानदारी और अपनी क्षमताओं के सटीक आकलन की तारीफ कर रहे हैं।

ट्रंप का बड़ा फैसला: रूस के बाद अब कनाडा को दी टैरिफ में राहत
अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा से आने वाले कई उत्पादों पर से टैरिफ हटाने का बड़ा ऐलान किया है। इस सूची में प्लाईवुड, कागज उत्पाद, विशेष मशीनें और रेफ्रिजरेशन उपकरण शामिल हैं। 3 नवंबर के मिडटर्म चुनावों से ठीक पहले लिया गया यह फैसला ट्रंप की आर्थिक प्राथमिकताओं में बदलाव का संकेत देता है।
कनाडा के इन सामानों पर मिली छूट
प्रशासन की ओर से जारी बयान और फैसलों के तहत कनाडा से आयात होने वाले प्लाईवुड, चुनिंदा कागज़ उत्पाद, विशेष औद्योगिक मशीनें और रेफ्रिजरेशन उपकरणों पर टैरिफ हटाया गया है। लंबे समय से इन सामानों पर भारी टैरिफ की वजह से दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों में तनाव देखा जा रहा था। अमरीकी उद्योगों और स्थानीय बाजार में इन सामानों की बढ़ती मांग और आपूर्ति श्रृंखला को सुचारू बनाने के उद्देश्य से यह राहत दी गई है।
चुनावों से ठीक पहले बदला रुख
3 नवंबर को होने वाले अमरीकी मिडटर्म चुनावों से महज करीब दो हफ्ते पहले लिया गया यह फैसला राजनीतिक और रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। चुनावों के ऐन वक्त पर टैरिफ दरों में कटौती करने से अमरीका के भीतर विनिर्माण, निर्माण और तकनीकी क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियों को सीधी राहत मिलेगी। इसका सीधा असर स्थानीय बाजार की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है, जिससे आम उपभोक्ताओं को महंगाई से थोड़ी राहत मिल सकती है।
विदेश नीति और व्यापारिक फैसलों में यू-टर्न
ट्रंप के इस ताजा रुख को उनकी पुरानी कठोर व्यापार नीतियों में बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। हाल ही में उन्होंने रूस के तेल पर लगे कड़े प्रतिबंधों में ढील दी थी और अब कनाडा के साथ व्यापारिक नरमी दिखाई है। अमरीकी व्यापार नीति में आए इस अचानक मोड़ से वैश्विक बाज़ारों को तो राहत मिली है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे चुनाव से पहले वोट बैंक और घरेलू व्यापारिक लॉबी को साधने की एक सोची-समझी रणनीति मान रहे हैं।

लॉरेंस बिश्नोई गैंग के निशाने पर यूपी के गरीब युवा
कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में घाघरा नदी किनारे बसे गांवों के गरीब युवाओं को निशाना बना रहा है। गैंग मुंबई-महाराष्ट्र में मजदूरी करने वाले युवाओं को पैसे और अपराध की दुनिया में नाम कमाने का लालच देकर अपना स्लीपर सेल तैयार कर रहा है।
पैसों और नाम का दिया जा रहा लालच
पुलिस और सुरक्षा तंत्र से जुड़े सूत्रों के अनुसार, लॉरेंस बिश्नोई गैंग मुख्य रूप से उन गरीब युवाओं को अपना शिकार बना रहा है जो काम की तलाश में मुंबई या महाराष्ट्र के अन्य शहरों में मजदूरी करने जाते हैं। गैंग के गुर्गे इन युवाओं को जल्दी पैसे कमाने और जरायम की दुनिया में दबदबा व नाम बनाने का लालच देते हैं। इसी प्रलोभन के जरिए वे युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें अपने स्लीपर सेल के रूप में भर्ती कर रहे हैं।
जांच में जुटी खुफिया एजेंसियां
इस पूरे नेटवर्क का भंडाफोड़ बाबा सिद्दीकी हत्याकांड की जांच के दौरान हुआ, जब बहराइच क्षेत्र से छह आरोपियों की गिरफ्तारी की गई। इन गिरफ्तारियों के बाद से ही खुफिया और सुरक्षा एजेंसियां पूरे क्षेत्र में सक्रिय हो गई हैं और इस गिरोह के बाकी तारों को खंगालने में लगी हुई हैं।

AISA अध्यक्ष नेहा बोरा को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका
दिल्ली हाईकोर्ट ने ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा की याचिका खारिज कर दी है। विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा जारी ₹10,000 के पर्सनल बॉन्ड और एक जमानत्दार वाले नोटिस को उन्होंने चुनौती दी थी। कोर्ट ने नोटिस रद्द करने से इनकार करते हुए केस सामग्री उपलब्ध कराने का आदेश दिया है।
क्या था पूरा मामला
विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) ने नेहा बोरा को ₹10,000 का पर्सनल बॉन्ड भरने और साथ में एक जमानतदार प्रस्तुत करने का निर्देश देते हुए एक नोटिस जारी किया था। इस नोटिस के खिलाफ नेहा बोरा ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था और इसे रद्द करने की गुहार लगाई थी। हालांकि, अदालत ने मामले की समीक्षा करने के बाद नोटिस को रद्द करने से साफ इनकार कर दिया।
हाईकोर्ट का अहम निर्देश
दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए राहत के तौर पर मजिस्ट्रेट को एक निर्देश जरूर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि इस मामले से जुड़ी जितनी भी जरूरी और संबंधित सामग्री या दस्तावेज हैं, वे सभी नेहा बोरा को उपलब्ध कराए जाएं, ताकि वे अपना पक्ष सही तरीके से रख सकें। अदालत के इस रुख से स्पष्ट है कि शांति व्यवस्था बनाए रखने से जुड़ी प्रक्रियात्मक कार्रवाइयों पर किसी भी तरह की रोक नहीं लगाई जाएगी।
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