
लोकतंत्र के लिए विरोध-प्रदर्शन जरूरी, पीएम मोदी का बयान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि सरकार की कमियों को उजागर करने वाले विरोध-प्रदर्शन लोकतंत्र के लिए जरूरी हैं। हालांकि, उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी इन आंदोलनों को खत्म कर देती है और इसे 'पैरासाइट' बताया।
लोकतंत्र में विरोध की अहमियत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरकार की कमियों को उजागर करने और व्यवस्था में सुधार की मांग करने वाले विरोध-प्रदर्शन लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार के प्रयास देश की व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और जिम्मेदार बनाने में मदद करते हैं।
कांग्रेस पार्टी पर कड़ा हमला
विपक्ष पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पार्टी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस इन आंदोलनों को खत्म कर देती है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस को 'पैरासाइट' करार देते हुए कहा कि यह पार्टी दूसरों को आगे नहीं बढ़ने देना चाहती है।

'लद्दाख में विधानसभा से कम कुछ भी मंज़ूर नहीं', सरकार पर भड़के सोनम वांगचुक
लद्दाख के प्रसिद्ध एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार पर मई में बनी सहमति से पीछे हटने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि 22 अक्टूबर की बैठक न होने से लद्दाख की उम्मीदों को झटका लगा है। वांगचुक ने साफ कर दिया है कि लद्दाख को विधानसभा और संवैधानिक सुरक्षा उपायों से कम कुछ स्वीकार नहीं होगा।
सहमति से पीछे हटने का आरोप
सोनम वांगचुक ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मई के महीने में बनी सहमति से अब पीछे हट रही है। उनका कहना है कि सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच जिन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी थी, उन्हें लागू करने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। सरकार के इस रवैये से स्थानीय लोगों में गहरी नाराजगी और असंतोष देखने को मिल रहा है।
बैठक न होने से लगा बड़ा झटका
वांगचुक ने बताया कि 22 अक्टूबर को प्रस्तावित बैठक नहीं हो सकी, जिससे लद्दाख के लोगों की उम्मीदों को एक बार फिर से भारी झटका लगा है। इस टली हुई बैठक के कारण क्षेत्र के भविष्य और स्वायत्तता को लेकर अनिश्चितता का माहौल बन गया है। लद्दाख के लोग लंबे समय से अपनी मांगों पर सरकार के साथ एक सार्थक और ठोस बातचीत का इंतजार कर रहे हैं।
विधानसभा और संवैधानिक सुरक्षा की मांग
अपनी बात को बेहद मजबूती से रखते हुए वांगचुक ने स्पष्ट कर दिया है कि लद्दाख को पूर्ण विधानसभा और मजबूत संवैधानिक सुरक्षा उपायों से कम कुछ भी स्वीकार नहीं होगा। उनका मानना है कि लद्दाख की विशिष्ट संस्कृति, नाजुक पर्यावरण और स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा केवल संविधान के छठे अनुच्छेद और अपनी विधानसभा के माध्यम से ही संभव है।

दिलजीत दोसांझ के कॉन्सर्ट पर रोक के बाद बदले अभिजीत दीपके के सुर
दिलजीत दोसांझ के 30 अक्टूबर को दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में होने वाले कॉन्सर्ट को दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों से अनुमति नहीं दी है। इस फैसले पर सीजीपी के प्रमुख अभिजीत दीपके ने तंज कसते हुए लिखा कि क्या वे कॉन्सर्ट्स से भी डर गए हैं। पहले वह दिलजीत पर तंज कसते थे, लेकिन अब उनके समर्थन में नजर आए हैं।
कॉन्सर्ट पर दिल्ली पुलिस की रोक
लोकप्रिय गायक दिलजीत दोसांझ का 30 अक्टूबर को दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में एक भव्य कॉन्सर्ट आयोजित होने वाला था। लेकिन सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए दिल्ली पुलिस ने इस कॉन्सर्ट को आयोजित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। इस प्रशासनिक फैसले के बाद से ही फैंस और संगीत प्रेमियों के बीच निराशा का माहौल है, साथ ही इस पर तीखी बयानबाजी भी शुरू हो गई है।
अभिजीत दीपके का बदला हुआ रुख
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान सीजीपी के प्रमुख अभिजीत दीपके की प्रतिक्रिया ने सबका ध्यान खींचा है। दिल्ली पुलिस द्वारा कॉन्सर्ट रोके जाने के इस फैसले पर तंज कसते हुए उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि क्या वे अब कॉन्सर्ट्स से भी डर गए हैं। यह बयान इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि इससे पहले वह लगातार दिलजीत दोसांझ पर तीखे तंज कसते रहे हैं।
आलोचना से समर्थन तक का सफर
विभिन्न मुद्दों पर दिलजीत दोसांझ की आलोचना करने वाले अभिजीत दीपके का इस बार उनके समर्थन में उतरना लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। पुलिस आदेश के बाद जिस तरह से उन्होंने कॉन्सर्ट रोके जाने पर सवाल उठाया है, उससे साफ है कि इस मामले में अब कई तरह के नए समीकरण और विचार सामने आने लगे हैं।

दलेर मेहंदी के समर्थन में उतरे मीका सिंह, दांव पर लगाया करियर
सिंगर दलेर मेहंदी के लिए अपना करियर दांव पर लगाने वाले मशहूर गायक मीका सिंह उनके सगे भाई हैं। उत्तराखंड में दलेर मेहंदी की परफॉर्मेंस को लेकर उपजे विवाद के बीच मीका सिंह ने उनका जोरदार बचाव किया है। मीका सिंह का असली नाम अमरीक सिंह है।
करियर दांव पर लगाने का बड़ा ऐलान
विवाद के बीच मीका सिंह ने अपने भाई के बचाव में एक बड़ा बयान देकर सबको हैरान कर दिया। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि अगर यह साबित हो जाए कि दलेर मेहंदी शराब पीते हैं, तो वे अपनी गायकी छोड़ देंगे। मीका सिंह का यह बयान उनके अपने भाई के प्रति अटूट विश्वास और सम्मान को दर्शाता है, जिसके लिए उन्होंने अपना पूरा सिंगिंग करियर दांव पर लगा दिया है।
दोनों कलाकारों का क्या है रिश्ता?
इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाने वाले ये दोनों मशहूर कलाकार असल जिंदगी में सगे भाई हैं। बहुत से प्रशंसक इस बात से अनजान हैं कि मीका सिंह का वास्तविक नाम अमरीक सिंह है। दोनों भाइयों ने भारतीय संगीत जगत में अपनी खास जगह बनाई है और एक-दूसरे के प्रति हमेशा गहरा लगाव जताया है।
नाम के पीछे छुपा रोचक किस्सा
दलेर मेहंदी के नाम से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प किस्सा भी है। उनका असल सरनेम सिंह है। हालांकि, उन्होंने प्रसिद्ध गज़ल गायक परवेज़ मेहंदी के प्रति अपना आदर और सम्मान व्यक्त करने के लिए अपने नाम के साथ 'मेहंदी' सरनेम जोड़ा था। संगीत के प्रति उनका यह समर्पण और भाइयों का आपस में यह मजबूत रिश्ता आज भी प्रशंसकों का दिल जीत रहा है।

राखी सावंत को बड़ी राहत, आत्महत्या उकसाने मामले में वारंट रद्द
बॉलीवुड अभिनेत्री राखी सावंत को 2010 के आत्महत्या के लिए उकसाने के कथित मामले में यूपी की झांसी कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उनके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट को रद्द कर दिया है। यह कार्रवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा स्टे दिए जाने के बाद की गई है।
क्या था पूरा मामला
साल 2010 में राखी सावंत के एक टीवी शो से जुड़ा यह मामला सामने आया था। आरोप था कि शो के दौरान कही गई बातों और टिप्पणियों से आहत होकर झांसी के रहने वाले एक युवक ने आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद मृतक के परिजनों की शिकायत पर राखी सावंत के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। तब से यह मामला अदालत में विचाराधीन था।
गैर-जमानती वारंट जारी होने की वजह
झांसी कोर्ट में इस मामले की लगातार सुनवाई चल रही थी। पिछली कुछ सुनवाईयों के दौरान जब राखी सावंत व्यक्तिगत रूप से या अपने कानूनी प्रतिनिधि के जरिए अदालत के समक्ष पेश नहीं हुईं, तो कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। अदालत में उपस्थिति दर्ज न कराने के कारण उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर दिया गया था।
हाईकोर्ट के आदेश ने दी राहत
गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद राखी सावंत के वकील ने मामले को लेकर तत्परता दिखाई। उनके कानूनी सलाहकार ने झांसी कोर्ट के समक्ष इलाहाबाद हाईकोर्ट के हालिया आदेश की प्रति प्रस्तुत की। हाईकोर्ट ने इस मामले की आगे की कानूनी कार्यवाही और सुनवाई पर रोक (स्टे) लगा दी है।
झांसी की अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस स्टे ऑर्डर को ध्यान में रखते हुए और वकील की दलीलों को स्वीकार करते हुए राखी सावंत के खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट को रद्द कर दिया। अदालत के इस निर्णय से फिलहाल राखी सावंत को गिरफ्तारी के खतरे से मुक्ति मिल गई है।
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