
फब्तियां कस रहे लोगों पर जमकर बरसीं अक्षरा सिंह
अभिनेत्री अक्षरा सिंह ने एक कार्यक्रम के दौरान फब्तियां कस रहे लोगों को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने खरी-खोटी सुनाते हुए कहा कि थेंथरई मत करो और लड़कियों को इस तरह ज़लील करने पर शर्म आनी चाहिए। साथ ही उन्होंने नई पीढ़ी (जेन जी) की तारीफ करते हुए कहा कि वे महिलाओं के सम्मान और मान-मर्यादा को अच्छी तरह पहचानते हैं।
थेंथरई मत करो और शर्म करो
मंच से जनता को संबोधित करते हुए अक्षरा सिंह ने खुले तौर पर ऐसे असामाजिक तत्वों को लताड़ लगाई जो माहौल खराब कर रहे थे। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि थेंथरई मत करो, यह कोई अच्छी बात नहीं है। उन्होंने जनता से सवाल किया कि अगर ऐसी हरकतें उनके अपने घर की किसी लड़की के साथ हों तो क्या उन्हें अच्छा लगेगा? उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि लड़कियों को इस तरह ज़लील करते हुए किसी को भी शर्म क्यों नहीं आती।
जेन जी और महिलाओं का सम्मान
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अभिनेत्री ने आज की युवा पीढ़ी की सोच की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज के दौर का जेन जी (Gen Z) वर्ग लड़कियों का सच्चा सम्मान करना जानता है। वे लोग हमारे घरों की औरतों और बेटियों की मान-मर्यादा को भली-भांति पहचानते हैं। उन्होंने लोगों को सीख देते हुए कहा कि ऐसे नए जमाने के समझदार युवाओं से प्रेरणा लेनी चाहिए।
सार्वजनिक मंचों पर गरिमा का सवाल
कार्यक्रम के दौरान अक्षरा सिंह के इस कड़े तेवर ने स्पष्ट कर दिया कि वे महिलाओं के खिलाफ होने वाली ऐसी हरकतों को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करती हैं। उनका यह कड़ा संदेश सार्वजनिक मंचों पर महिलाओं की सुरक्षा, उनके आत्मसम्मान और सामाजिक मर्यादा को बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

सौरव-आशुतोष की रिहाई के लिए हाईकोर्ट पहुंची CJP
कॉक्रोच जनता पार्टी (CJP) की लीगल हेड रत्ना सिंह ने सौरव दास और आशुतोष रांका की रिहाई के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं को एक मिनट भी जेल में नहीं रहना चाहिए और राजनीतिक कारणों से उनकी स्वतंत्रता नहीं छीनी जानी चाहिए। रत्ना ने जोर दिया कि न्याय मिलने में किसी प्रकार की देरी नहीं होनी चाहिए।
हाईकोर्ट में दाखिल की गई याचिका
CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह ने अदालत के समक्ष यह स्पष्ट पक्ष रखा है कि सौरव दास और आशुतोष रांका को एक मिनट भी और जेल की सलाखों के पीछे नहीं बिताना चाहिए। पार्टी का मानना है कि दोनों नेताओं को अनुचित तरीके से हिरासत में रखा गया है, जिसके चलते न्याय की गुहार लगाने के लिए उच्च न्यायालय का रुख करना आवश्यक हो गया था।
राजनीतिक कारणों से स्वतंत्रता छीनने का आरोप
रत्ना सिंह ने इस पूरी कार्रवाई पर कड़ा ऐतराज जताते हुए तीखा आरोप लगाया है कि राजनीतिक कारणों के चलते इन नेताओं की स्वतंत्रता को छीना जा रहा है। उनका कहना है कि किसी भी व्यक्ति या राजनीतिक कार्यकर्ता को वैचारिक या राजनीतिक द्वेष के कारण इस तरह से कैद रखना और उसके मौलिक अधिकारों का हनन करना लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रतिकूल है।
न्याय मिलने में देरी न हो
CJP की कानूनी टीम का मुख्य जोर इस बात पर है कि न्याय व्यवस्था के तहत मामलों का निस्तारण त्वरित गति से होना चाहिए। रत्ना सिंह ने अपने बयान में विशेष रूप से यह बात दोहराई है कि न्याय मिलने में किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए। अब सभी की निगाहें दिल्ली हाईकोर्ट में होने वाली आगामी सुनवाई और इस कानूनी कदम के परिणामों पर टिकी हुई हैं।

आरएसएस से लड़ने में मुझे बहुत खुशी मिलती है: राहुल गांधी
विजयादशमी के पावन अवसर पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर तीखा हमला बोलते हुए उसे एक 'असंवैधानिक संगठन' करार दिया है。 उन्होंने कहा कि आरएसएस एक पुरुषवादी सोच वाला संगठन है जो महिलाओं को पुरुषों की संपत्ति मानता है, और इसके खिलाफ लड़ने में उन्हें बेहद खुशी मिलती है。
पुरुषवादी विचारधारा पर कड़ा प्रहार
राहुल गांधी ने आरएसएस की वैचारिक पृष्ठभूमि और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि यह पूरी तरह से एक पुरुषवादी संगठन है。 उनके अनुसार, इस संगठन की मूल सोच और मानसिकता यह मानती है कि महिलाएं और बेटियां किसी स्वतंत्र व्यक्ति के रूप में नहीं बल्कि पुरुषों की निजी संपत्ति होती हैं。 इसी दमनकारी, सामंती और पिछड़ी सोच के विरोध में वे हमेशा मुखर होकर खड़े रहे हैं और आगे भी खड़े रहेंगे。
शिव-शक्ति में अटूट आस्था
अपनी वैचारिक स्थिति और प्रेरणा के स्रोतों को स्पष्ट करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि वे पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ 'शिव-शक्ति' के स्वरूप और उनके सिद्धांतों में विश्वास रखते हैं。 नारी शक्ति, न्याय और समानता के सम्मान की इसी पावन भावना के चलते उन्हें आरएसएस और उसकी रूढ़िवादी विचारधारा के खिलाफ वैचारिक लड़ाई लड़ने में एक अलग ही प्रकार की आंतरिक खुशी और संतोष मिलता है。
वैचारिक लड़ाई में बढ़ता समर्थन
इस तीखे वैचारिक और राजनीतिक हमले के दौरान राहुल गांधी ने एक बेहद दिलचस्प और महत्वपूर्ण बात भी साझा की है。 उन्होंने दावा किया कि इस वैचारिक संघर्ष की सबसे खूबसूरत बात यह है कि तथाकथित रूप से आरएसएस के प्रभाव क्षेत्र से जुड़ी या उनकी अपनी कहलाने वाली कई महिलाएं और बेटियां भी आज वैचारिक रूप से उनके साथ खड़ी हैं。 यह इस बात का प्रमाण है कि समाज अब इस पुरानी और दमनकारी सोच को बदलने के लिए तैयार हो चुका है。

दलेर मेहंदी के समर्थन में उतरे बादशाह, जताई गहरी नाराजगी
उत्तराखंड के मंत्री सुबोध उनियाल द्वारा गायक दलेर मेहंदी पर मंच पर नशे में होने का आरोप लगाने के बाद रैपर बादशाह उनके समर्थन में सामने आए हैं। बादशाह ने कहा कि आप नाराज़गी ज़ाहिर कर सकते हैं, लेकिन संगीत इंडस्ट्री को इतना देने वाले कलाकार का इस तरह सार्वजनिक अपमान करना दुखद है।
बादशाह ने जताया कड़ा विरोध
रैपर बादशाह ने इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हर व्यक्ति को अपनी बात रखने या नाराज़गी ज़ाहिर करने का पूरा अधिकार है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय संगीत इंडस्ट्री को दशकों तक अपना बहुमूल्य योगदान देने वाले वरिष्ठ कलाकारों का इस तरह सार्वजनिक रूप से अपमान करना बेहद दुखद और निराशाजनक है। कलाकारों के साथ इस प्रकार का बर्ताव उचित नहीं कहा जा सकता है।
लेजेंड्स सम्मान के हकदार
बादशाह ने अपने समर्थन में आगे कहा कि दलेर मेहंदी जैसे दिग्गज कलाकार हमेशा सर्वोच्च सम्मान और आदर के हकदार होते हैं। उन्होंने इस बात पर विशेष प्रकाश डाला कि ऐसी संवेदनशीलता और गरिमा का ध्यान रखना तब और अधिक आवश्यक हो जाता है जब कोई कलाकार किसी कमज़ोर या कठिन स्थिति से गुजर रहा हो। किसी की व्यक्तिगत या शारीरिक स्थिति को समझे बिना उस पर इस तरह के आरोप लगाना गलत है।
अन्य गायकों की प्रतिक्रियाएं
इस पूरे विवाद के बीच संगीत जगत के अन्य जाने-माने चेहरे भी अपनी राय रख रहे हैं। मशहूर गायिका हर्षदीप कौर ने इस मामले पर बात करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि उस विशेष दिन दलेर मेहंदी की तबीयत वाकई बहुत खराब थी। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं या विपरीत परिस्थितियों को नजरअंदाज कर सीधे तौर पर गलत आरोप लगाना और मंच पर असहज स्थिति पैदा करना सही नहीं है।
संगीत गलियारों में गरमाई राजनीति
इस घटना के तूल पकड़ने के बाद से सोशल मीडिया पर फैंस और इंडस्ट्री के भीतर तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है। जहां एक तरफ राजनीतिक हलकों में इस बयानबाजी की चर्चा हो रही है, वहीं दूसरी तरफ कला जगत के लोग दलेर मेहंदी के पक्ष में एकजुट होते दिखाई दे रहे हैं। इस पूरी घटना ने सार्वजनिक मंचों पर कलाकारों की प्रतिष्ठा और गरिमा की सुरक्षा को लेकर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

सलमान खान ने रिलीज किया देशभक्ति गीत 'जय हिंद'
अभिनेता सलमान खान ने अपनी आगामी फिल्म 'मातृभूमि' का नया गाना 'जय हिंद' रिलीज कर दिया है। इस गाने के माध्यम से उन्होंने भारतीय सेना के जवानों को नमन किया है। सलमान का कहना है कि देश के प्रति प्रेम दिखाने के लिए साल के केवल दो दिन ही पर्याप्त नहीं होते हैं।
सेना के जवानों को अनूठा सलाम
गाना रिलीज करने के दौरान सलमान खान ने देश के नाम एक बहुत ही गहरा संदेश दिया है। उनका मानना है कि सरहद पर तैनात हमारे सैनिक हर पल देश की रक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं। ऐसे में सेना के जवानों के त्याग और बलिदान को सम्मान देना हर नागरिक का कर्तव्य बनता है। यह गाना उन्हीं के अदम्य साहस को एक सच्ची श्रद्धांजलि है।
देशभक्ति के लिए साल के दो दिन काफी नहीं
सलमान खान ने अपने इस विशेष संदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि देशभक्ति केवल कुछ चुनिंदा राष्ट्रीय पर्वों तक ही सीमित नहीं होनी चाहिए। राष्ट्र के प्रति सम्मान और प्रेम जताने के लिए साल के सिर्फ दो दिन ही काफी नहीं हैं। देशप्रेम एक ऐसी भावना है जिसे हर दिन अपने आचरण और कार्यों में जीना चाहिए। उनका यह विचार युवाओं को काफी प्रेरित कर रहा है।
फिल्म की स्टार कास्ट और रिलीज
फिल्म 'मातृभूमि' को लेकर दर्शकों में अभी से काफी उत्सुकता बनी हुई है। इस फिल्म में सलमान खान के साथ खूबसूरत और प्रतिभाशाली अभिनेत्री चित्रांगदा सिंह समेत कई अन्य दिग्गज कलाकार भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आएंगे। हालांकि, मेकर्स की तरफ से अभी तक इस फिल्म की आधिकारिक रिलीज डेट का ऐलान नहीं किया गया है।
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