
हिरासत से रिहा होकर पैतृक गांव पहुंचे अभिजीत दीपके, दादी के अंतिम संस्कार स्थल पर फफककर रोए
सुप्रीम कोर्ट के वकील और CJP (Citizens for Justice and Peace) के फाउंडर अभिजीत दीपके दिल्ली पुलिस की हिरासत से रिहा होने के बाद अपने पैतृक गांव संतुक पिंपरी (महाराष्ट्र) पहुंच गए हैं। हिरासत में होने के कारण वह अपनी दादी के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाए थे। गांव पहुंचते ही उन्होंने सीधे दादी के अंतिम संस्कार स्थल का रुख किया। वहां पहुंचकर उन्होंने नम आंखों से अपनी दादी की अस्थियों पर फूल चढ़ाए और श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान वह खुद को रोक नहीं पाए और फफककर फूट-फूटकर रो पड़े, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
सुप्रीम कोर्ट के वकील और CJP (Citizens for Justice and Peace) के फाउंडर अभिजीत दीपके दिल्ली पुलिस की हिरासत से रिहा होने के बाद अपने पैतृक गांव संतुक पिंपरी (महाराष्ट्र) पहुंच गए हैं। हिरासत में होने के कारण वह अपनी दादी के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाए थे। गांव पहुंचते ही उन्होंने सीधे दादी के अंतिम संस्कार स्थल का रुख किया। वहां पहुंचकर उन्होंने नम आंखों से अपनी दादी की अस्थियों पर फूल चढ़ाए और श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान वह खुद को रोक नहीं पाए और फफककर फूट-फूटकर रो पड़े, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
दिल्ली पुलिस की हिरासत और गांव वापसी
अभिजीत दीपके को कुछ दिन पहले दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था, जिसके चलते वे अपने परिवार के इस सबसे दुखद और कठिन समय में अपने घर पर मौजूद नहीं रह सके। दादी के निधन की खबर मिलने के बावजूद कानूनी बंदिशों और हिरासत के कारण उनका गांव पहुंचना संभव नहीं हो पाया था। रिहाई मिलते ही वे बिना एक पल गंवाए सीधे महाराष्ट्र के संतुक पिंपरी स्थित अपने पैतृक गांव के लिए रवाना हुए।
अंतिम संस्कार स्थल पर छलका दर्द
रविवार देर रात गांव पहुंचने के बाद अभिजीत सीधे उस स्थान पर पहुंचे जहां उनकी दादी का अंतिम संस्कार किया गया था। चिता की राख और अस्थियों के पास पहुंचते ही उनका सब्र टूट गया। उन्होंने विधि-विधान से अस्थियों पर फूल अर्पित किए और दादी को अंतिम विदाई दी। इस भावुक पल का वीडियो सामने आने के बाद उनके समर्थकों और चाहने वालों के बीच भी शोक की लहर दौड़ गई है। परिवार के इस मुश्किल वक्त में अभिजीत का इस तरह अकेले पहुंचकर अपनी दादी को श्रद्धांजलि देना अत्यंत मर्मस्पर्शी दृश्य था।

दिल्ली पुलिस को CJP नेताओं का अल्टीमेटम: 24 घंटे में तय करें प्रदर्शन की तारीख
गिरफ्तारी के बाद आक्रामक तेवर दिखाते हुए CJP नेताओं ने दिल्ली पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। चेतावनी दी गई है कि यदि पुलिस ने प्रदर्शन की तारीख तय नहीं की, तो संगठन खुद ही तारीख का ऐलान कर सड़कों पर उतरेगा।
गिरफ्तारी के बाद आक्रामक तेवर दिखाते हुए CJP नेताओं ने दिल्ली पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। चेतावनी दी गई है कि यदि पुलिस ने प्रदर्शन की तारीख तय नहीं की, तो संगठन खुद ही तारीख का ऐलान कर सड़कों पर उतरेगा।
दिल्ली पुलिस को अल्टीमेटम
राजधानी दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों का दौर एक बार फिर तेज होता नजर आ रहा है। हाल ही में हिरासत से छूटने के बाद सिटीजंस फॉर पीस (CJP) के नेताओं ने आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। संगठन ने दिल्ली पुलिस प्रशासन को दो टूक चेतावनी देते हुए एक दिन का अल्टीमेटम सौंपा है। CJP नेताओं का साफ कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने के उनके अधिकारों में बाधा नहीं डाली जानी चाहिए।
संसद मार्च की तैयारी
रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आधिकारिक बयान जारी करते हुए CJP ने अपनी अगली रणनीति का खुलासा किया। संगठन के तय कार्यक्रम के अनुसार, सोमवार सुबह 10 बजे CJP के तमाम प्रमुख नेता संसद मार्ग पुलिस स्टेशन जाएंगे। इस दौरान पुलिस अधिकारियों के साथ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के लिए विधिवत रूप से तारीख और अनुमति की मांग की जाएगी। नेताओं का यह प्रतिनिधिमंडल पूरी मजबूती के साथ अपनी मांगों को प्रशासन के सामने रखेगा।
खुद आंदोलन का ऐलान
मामले की गंभीरता को देखते हुए CJP ने प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है। संगठन ने दो टूक शब्दों में कहा है कि दिल्ली पुलिस के पास अपने स्तर पर तारीख तय करने के लिए सिर्फ चौबीस घंटे का समय है। यदि इस तय सीमा के भीतर पुलिस की ओर से कोई संतोषजनक जवाब या अनुमति नहीं मिलती है, तो CJP खुद ही विरोध प्रदर्शन की तारीख का ऐलान कर देगा। नेताओं के इस तीखे रुख से साफ है कि वे किसी भी सूरत में पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

ध्रुव राठी ने सुनाई हिरासत की कहानी, बोले- पुलिस ने मांगी माफी
यूट्यूबर ध्रुव राठी ने अपनी पुलिस हिरासत का सनसनीखेज अनुभव साझा किया है। उन्होंने बताया कि कैसे सुबह-सुबह घर में घुसकर उन्हें ले जाया गया। पुलिस ने उनसे माफी मांगते हुए कहा कि उन्हें ऊपर से आदेश मिले थे, जिसके कारण उन्हें कैद में रहना पड़ा।
खबर का निचोड़
यूट्यूबर ध्रुव राठी ने अपनी पुलिस हिरासत का सनसनीखेज अनुभव साझा किया है। उन्होंने बताया कि कैसे सुबह-सुबह घर में घुसकर उन्हें ले जाया गया। पुलिस ने उनसे माफी मांगते हुए कहा कि उन्हें ऊपर से आदेश मिले थे, जिसके कारण उन्हें कैद में रहना पड़ा।
सुबह-सुबह घर में हुई कार्रवाई
प्रसिद्ध यूट्यूबर ध्रुव राठी ने हाल ही में अपनी पुलिस हिरासत से जुड़ी चौंकाने वाली घटनाओं का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि रविवार को सुबह-सुबह लगभग बीस लोग उनके घर के अंदर जबरन घुस आए। स्थिति इतनी अचानक और आक्रामक थी कि उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के सीधा खींचकर बाहर ले जाया गया। इस दौरान उन्हें काफी चोटें भी आईं।
एक थाने से दूसरे थाने ले जाने का सफर
घर से जबरन उठाए जाने के बाद ध्रुव राठी को एक पुलिस स्टेशन से दूसरे पुलिस स्टेशन घुमाया गया। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान प्रशासनिक अमले का रवैया बेहद सख्त और हैरान करने वाला था। हिरासत के इन शुरुआती घंटों में उन्हें भारी मानसिक और शारीरिक तनाव का सामना करना पड़ा, जिससे पूरे मामले ने एक गंभीर मोड़ ले लिया।
पुलिस अधिकारियों का अजीब बर्ताव
ध्रुव राठी ने इस पूरी घटना का जिक्र करते हुए एक दिलचस्प बात भी साझा की। उन्होंने बताया कि जब वे पुलिस स्टेशन पहुंचे, तो अधिकारियों ने उनसे नरमी से पेश आते हुए 'सॉरी सर' कहा। पुलिसकर्मियों ने स्पष्ट किया कि उन्हें उच्च स्तर से सख्त आदेश मिले थे, जिसके चलते उन्हें हर हाल में कैद में रखना पड़ा।
सुख-सुविधाओं का दिया गया भरोसा
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए यूट्यूबर ने बताया कि अधिकारियों ने उन्हें यह भी आश्वस्त किया था कि उन्हें जो कुछ भी चाहिए, वह मुहैया कराया जाएगा। हालांकि, इन तमाम आश्वासनों के बावजूद उन्हें कैद की पाबंदियों के बीच ही रहना पड़ा। इस पूरे वाकये ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

MPSC सुधार कमिटी: तुकाराम मुंढे बने सचिव
महाराष्ट्र सरकार ने MPSC की भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक मामलों की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय कमिटी गठित की है। पूर्व जज दिलीप भोसले की अध्यक्षता वाली इस कमिटी में कड़क कार्यशैली के लिए मशहूर आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे को सचिव बनाया गया है।
खबर का निचोड़
महाराष्ट्र सरकार ने MPSC की भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक मामलों की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय कमिटी गठित की है। पूर्व जज दिलीप भोसले की अध्यक्षता वाली इस कमिटी में कड़क कार्यशैली के लिए मशहूर आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे को सचिव बनाया गया है।
महाराष्ट्र में प्रशासनिक हलचल
महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) में सुधार और पारदर्शिता लाने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। हाल के दिनों में सामने आए पेपर लीक और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े विवादों के बाद अभ्यर्थियों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही थी। युवाओं के गिरते भरोसे को बहाल करने और पूरी प्रणाली को दुरुस्त करने के लिए सरकार ने एक विशेष कमिटी का गठन किया है।
कड़क अधिकारी तुकाराम मुंढे को बड़ी ज़िम्मेदारी
इस पूरी कवायद में सबसे ज्यादा चर्चा आईएएस अधिकारी तुकाराम मुंढे की नियुक्ति को लेकर हो रही है। अपनी सख्त कार्यशैली, नियमों का कड़ाई से पालन कराने और ईमानदारी के लिए जाने जाने वाले तुकाराम मुंढे वर्तमान में महाराष्ट्र एफडीए (FDA) के प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं। अब सरकार ने उन्हें इस अहम कमिटी के सचिव पद का प्रभार सौंपा है। प्रशासनिक हलकों में यह माना जा रहा है कि मुंढे की मौजूदगी से इस कमिटी के कामकाज में तेजी और निष्पक्षता आएगी।
दिग्गज हस्तियों की अगुवाई में जांच कमिटी
इस उच्चस्तरीय कमिटी की कमान बॉम्बे हाई कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस दिलीप भोसले को सौंपी गई है। उनकी अध्यक्षता में यह कमिटी MPSC की मौजूदा व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण करेगी। कमिटी को काफी संतुलित और मजबूत बनाया गया है, जिसमें वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी लक्ष्मी गौतम और पूर्व आईएएस अधिकारी गणेश पाटिल को बतौर सदस्य शामिल किया गया है।
प्रणाली में पारदर्शी सुधार की उम्मीद
यह कमिटी मुख्य रूप से MPSC द्वारा आयोजित की जाने वाली परीक्षाओं में सुरक्षा के कड़े इंतजाम सुनिश्चित करने, पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने और पूरी भर्ती प्रणाली को आधुनिक एवं पारदर्शी बनाने के लिए सुझाव तैयार करेगी। लाखों प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का स्पष्ट संकेत है कि प्रणाली में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट से उठा भरोसा: कपिल सिब्बल का बड़ा बयान
सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने बयान दिया है कि उनका सुप्रीम कोर्ट से भरोसा उठ गया है और वहां बार-बार जाने का कोई फायदा नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि इस मुश्किल दौर में संविधान को बचाने की असली ताकत देश के सुप्रीम कोर्ट के पास ही है।
खबर का निचोड़
सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने बयान दिया है कि उनका सुप्रीम कोर्ट से भरोसा उठ गया है और वहां बार-बार जाने का कोई फायदा नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि इस मुश्किल दौर में संविधान को बचाने की असली ताकत देश के सुप्रीम कोर्ट के पास ही है।
सुप्रीम कोर्ट से भरोसा उठने का दावा
देश के जाने-माने और अनुभवी सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने न्यायपालिका और मौजूदा हालातों को लेकर एक बहुत ही तीखा व स्पष्ट बयान दिया है। उन्होंने खुलकर कहा है कि अब उनका देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट से भरोसा पूरी तरह उठ चुका है। सिब्बल के इस तरह के तीखे बयानों से कानूनी और राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर से भारी बहस छिड़ गई है।
बार-बार अदालत जाने से निराशा
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कपिल सिब्बल ने कहा कि वह बार-बार सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे पर जाकर अब पूरी तरह थक चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह अपनी व्यक्तिगत राय रख रहे हैं और उन्हें अब ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि वहां जाने से किसी को कोई फायदा मिलने वाला है। अदालत की कार्यप्रणाली और वर्तमान परिस्थितियों पर उनका यह अविश्वास काफी चर्चा का विषय बन गया है।
उम्मीदों पर विराम और कड़वी सच्चाई
वरिष्ठ वकील ने अपनी निराशा जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें अब सुप्रीम कोर्ट से किसी भी तरह की बड़ी उम्मीद नहीं बची है। उन्होंने अपनी बात रखते हुए यह भी जोड़ा कि अब जो कुछ भी देश में होना है, वह होकर रहेगा। उनके इस रुख से साफ झलकता है कि व्यवस्था की मौजूदा स्थिति से उनकी अपेक्षाएं किस हद तक धूमिल हो चुकी हैं।
संविधान बचाने की आखिरी उम्मीद
एक तरफ जहां उन्होंने अदालत से भरोसा उठने की बात कही, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने यह भी माना कि मौजूदा दौर में अगर कोई एकमात्र संस्था इस देश के संविधान को बचा सकती है, तो वह भारत का सुप्रीम कोर्ट ही है। विरोधाभासी लगने वाले इन बयानों के जरिए उन्होंने एक तरफ जहां न्याय प्रणाली की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, वहीं दूसरी तरफ संवैधानिक संस्था की मूल जिम्मेदारी की ओर भी बड़ा इशारा किया है।
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