
टॉक्सिक जॉब को ना, मानसिक शांति को हाँ: 'Her_journey' ने छोड़ी हाई-स्ट्रेस नौकरी
सोशल मीडिया पर वायरल रील 'part-1 everyone has to go through this' के साथ 'Her_journey' नाम की यूजर ने अपनी तनावपूर्ण नौकरी को अलविदा कह दिया है। सात साल की कड़ी मेहनत और पढ़ाई के बाद, उन्होंने स्वास्थ्य और परिवार को प्राथमिकता देते हुए एक बड़ा और साहसी निर्णय लिया है।
सोशल मीडिया पर वायरल रील 'part-1 everyone has to go through this' के साथ 'Her_journey' नाम की यूजर ने अपनी तनावपूर्ण नौकरी को अलविदा कह दिया है। सात साल की कड़ी मेहनत और पढ़ाई के बाद, उन्होंने स्वास्थ्य और परिवार को प्राथमिकता देते हुए एक बड़ा और साहसी निर्णय लिया है।
टॉक्सिक माहौल से मुक्ति का संकल्प
सात साल... यह एक लंबा समय होता है। इतनी पढ़ाई, अनगिनत ट्रेनिंग और करियर बनाने का सपना। इसी सपने के साथ उन्होंने एक ऐसी नौकरी चुनी, जिसे वे अब "स्ट्रेसफुल" और "टॉक्सिक" बता रही हैं। लेकिन 'Her_journey' के लिए यह कोई आसान फैसला नहीं था। उन्होंने सालों तक इस उम्मीद में खुद को झोंका कि चीजें ठीक हो जाएंगी। पर जब तनाव ने उनके स्वास्थ्य और परिवार को प्रभावित करना शुरू कर दिया, तब उन्होंने खुद से एक सवाल पूछा: "तो फिर मैं क्यों करूँ ऐसी जॉब?" यह सवाल एक टर्निंग पॉइंट बन गया।
पैसों से बढ़कर है मानसिक शांति
आज के दौर में जब हर कोई सफलता की दौड़ में शामिल है, 'Her_journey' का यह कदम एक नजीर पेश करता है। उनका कहना है, "थोड़ा कम कमा लूँगी, थोड़ा ठीक है। एकाउंट पर पैसे कम आएंगे, थोड़ी अपने शौक कम कर लूँगी, लेकिन शांती से रहूँगी।" यह एक साधारण सा वाक्य, बहुत गहरी बात कह जाता है। यह स्वीकारोक्ति है कि आर्थिक समृद्धि मानसिक स्वास्थ्य की कीमत पर नहीं खरीदी जा सकती। उनकी रील में दिख रही थकान और फिर आया यह फैसला, आधुनिक कार्य-संस्कृति में बैलेंस की महत्ता को दर्शाता है।
सेहत है असली दौलत
उन्होंने खुलकर बताया कि इस तरह की नौकरी उनके स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुँचा रही थी। "इतने health issues तो नहीं होंगे, stress तो नहीं होगा," यह शब्द न केवल उनकी चिंता को व्यक्त करते हैं, बल्कि कॉर्पोरेट दुनिया में छिपे हुए स्वास्थ्य संकट को भी उजागर करते हैं। तनाव और हेल्थ इश्यूज को दरकिनार कर उन्होंने अपने जीवन की गुणवत्ता को चुना है। उनका यह कदम लाखों लोगों के लिए एक प्रेरणा है, जो अपनी सेहत और खुशियों की कीमत पर अपनी नौकरी में जकड़े हुए महसूस करते हैं।
एक नए अध्याय की शुरुआत
'Her_journey' की यह रील, जिसमें उन्होंने अपनी पहचान चेहरे को ढंककर छिपाई है, असल में उनकी असली पहचान को दुनिया के सामने लाती है - वह पहचान जो अपनी शर्तों पर जीना जानती है। यह सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक साधारण रील नहीं, बल्कि एक आत्मनिर्भर और आत्मविश्वास भरी घोषणा है कि जीवन में और भी बहुत कुछ है। उनका यह कदम एक नए अध्याय की शुरुआत है, जहाँ वे अपनी शांति और अपने लोगों के साथ को चुन रही हैं।

विराट कोहली को ₹5 करोड़ खर्च कर बुलाया गया; प्रेमानंद महाराज के आश्रम पर बड़ा आरोप
श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश शर्मा फलाहारी ने आरोप लगाया है कि प्रेमानंद महाराज के आश्रम में भू-माफिया और बिल्डर लॉबी गुट सक्रिय है। उन्होंने दावा किया है कि माफिया ने निजी हित और पीआर के लिए ₹5 करोड़ खर्च कर विराट कोहली को पहली बार आश्रम बुलाया था।
खबर का निचोड़ (Summary)
श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश शर्मा फलाहारी ने आरोप लगाया है कि प्रेमानंद महाराज के आश्रम में भू-माफिया और बिल्डर लॉबी गुट सक्रिय है। उन्होंने दावा किया है कि माफिया ने निजी हित और पीआर के लिए ₹5 करोड़ खर्च कर विराट कोहली को पहली बार आश्रम बुलाया था।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष का सनसनीखेज दावा
वृंदावन स्थित संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम को लेकर एक नया और बड़ा विवाद सामने आया है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश शर्मा फलाहारी ने आश्रम की आंतरिक व्यवस्थाओं और प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कई बड़े दावे किए हैं।
आश्रम में भू-माफिया और बिल्डर लॉबी के सक्रिय होने का आरोप
फलाहारी महाराज ने आरोप लगाया है कि वर्तमान में प्रेमानंद महाराज के आश्रम के भीतर भू-माफिया और बिल्डर लॉबी का गुट पूरी तरह से सक्रिय हो चुका है। उनके मुताबिक ये लोग आश्रम की आड़ में अपने निजी हितों को साधने का काम कर रहे हैं।
विराट कोहली के दौरे पर ₹5 करोड़ खर्च करने का दावा
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा दावा यह किया गया है कि माफिया ने अपने निजी स्वार्थ और पीआर (PR) के तहत भारी-भरकम रकम खर्च की है। आरोप के अनुसार, विराट कोहली को पहली बार आश्रम बुलाने के लिए करीब ₹5 करोड़ खर्च किए गए थे, जबकि कोहली और अनुष्का शर्मा पहले भी कई बार आश्रम जा चुके हैं।

हवाई सफर फिर होगा महंगा, इंडिगो ने बढ़ाया फ्यूल चार्ज
इंडिगो एयरलाइंस ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए अपनी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर फ्यूल चार्ज बढ़ा दिया है। नए नियम 6 अक्टूबर को रात 12:01 बजे से लागू होंगे। इसके बाद एयरलाइन टिकट बुकिंग के दौरान यात्रियों को ₹375 से लेकर ₹10,000 तक अतिरिक्त शुल्क देना होगा।
इंडिगो एयरलाइंस ने एविएशन टर्बाइन फ्यूल की बढ़ती कीमतों को देखते हुए अपनी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर फ्यूल चार्ज बढ़ा दिया है। नए नियम 6 अक्टूबर को रात 12:01 बजे से लागू होंगे। इसके बाद एयरलाइन टिकट बुकिंग के दौरान यात्रियों को ₹375 से लेकर ₹10,000 तक अतिरिक्त शुल्क देना होगा।
एटीएफ की कीमतों का सीधा असर
एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी जेट ईंधन की आसमान छूती कीमतों ने एयरलाइंस कंपनियों का बजट बिगाड़ दिया है। किसी भी एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च में लगभग 40% हिस्सा ईंधन का होता है। इंडिगो ने स्पष्ट किया है कि जेट ईंधन की वैश्विक और घरेलू दरों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के कारण कंपनी पर वित्तीय दबाव बढ़ रहा था। इसी लागत की भरपाई करने के लिए फ्यूल चार्ज में बढ़ोतरी का फैसला लिया गया है।
जानिए किस रूट पर कितना बढ़ेगा किराया
इस फैसले का सीधा असर हर वर्ग के हवाई यात्रियों की जेब पर पड़ने वाला है। नई दरों के तहत घरेलू रूटों पर यात्रा करने वाले यात्रियों को प्रति टिकट ₹375 से लेकर ₹1,300 तक का अतिरिक्त फ्यूल चार्ज देना होगा। यह शुल्क दूरी और रूट के आधार पर तय किया जाएगा।
वहीं, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर यह बढ़ोतरी और भी भारी पड़ने वाली है। विदेश यात्रा करने वाले यात्रियों को प्रति टिकट ₹1,000 से लेकर ₹10,000 तक अतिरिक्त भुगतान करना होगा। लंबी दूरी के अंतरराष्ट्रीय रूटों पर यात्रा करने वालों के लिए यह एक बड़ा झटका है।
6 अक्टूबर से लागू होंगी नई दरें
कंपनी ने स्पष्ट किया है कि ये नए और संशोधित फ्यूल चार्ज 6 अक्टूबर को रात 12:01 बजे के बाद की जाने वाली सभी नई बुकिंग पर प्रभावी होंगे। इसका मतलब है कि जिन यात्रियों ने 6 अक्टूबर से पहले अपनी टिकट बुक करा ली है, उन पर इस बढ़ी हुई दर का कोई असर नहीं पड़ेगा और उन्हें पुराने किराए पर ही यात्रा करने की सुविधा मिलेगी।
त्योहारी सीजन में यात्रियों की जेब पर बढ़ा बोझ
देश में भारत के सबसे बड़े एयरलाइन ऑपरेटर इंडिगो के इस कदम के बाद एविएशन सेक्टर में हलचल तेज हो गई है। आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए लोग पहले से ही अपनी छुट्टियों और यात्राओं की योजना बना रहे हैं। ऐसे समय में किराए में हुई इस बढ़ोतरी से उन परिवारों और यात्रियों का बजट बिगड़ सकता है जो आने वाले दिनों में हवाई सफर की तैयारी में थे।

मुंबई के शिवाजी पार्क विवाद में क्यों घिरे अभिजीत दीपके?
मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में 2 अक्टूबर को आयोजित एक प्रदर्शन के दौरान 75 वर्षीय गोपालकृष्ण सुब्बैया पिल्लई की अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। इस दुखद घटना के बाद 'शिवाजी पार्क सिटीज़न्स फोरम' ने प्रदर्शन के आयोजक और CJP फाउंडर अभिजीत दीपके के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की जोरदार मांग उठाई है।
खबर का निचोड़
मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में 2 अक्टूबर को आयोजित एक प्रदर्शन के दौरान 75 वर्षीय गोपालकृष्ण सुब्बैया पिल्लई की अचानक तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई। इस दुखद घटना के बाद 'शिवाजी पार्क सिटीज़न्स फोरम' ने प्रदर्शन के आयोजक और CJP फाउंडर अभिजीत दीपके के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने की जोरदार मांग उठाई है।
शिवाजी पार्क में प्रदर्शन और एक बुजुर्ग की मौत
गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इस भीड़भाड़ वाले आयोजन में 75 वर्षीय गोपालकृष्ण सुब्बैया पिल्लई भी शामिल हुए थे। कार्यक्रम के दौरान अचानक उनके सीने में तेज दर्द उठा और वे बेहोश होकर गिर पड़े। वहां मौजूद लोगों और आयोजकों की मदद से उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद इलाज के दौरान उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
हत्या का केस दर्ज करने की मांग क्यों उठी?
पिल्लई के निधन की खबर फैलते ही स्थानीय निवासियों और 'शिवाजी पार्क सिटीज़न्स फोरम' का गुस्सा भड़क उठा। फोरम का आरोप है कि इतने बड़े पैमाने पर भीड़ जुटाने से पहले जरूरी सुरक्षा मापदंडों, आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं और एम्बुलेंस का पुख्ता इंतजाम नहीं किया गया था। नागरिकों का कहना है कि आयोजकों की लापरवाही और कुप्रबंधन के कारण ही पिल्लई को समय पर सही डॉक्टरी इलाज मिलने में देरी हुई। इसी आधार पर फोरम ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि इस घटना को महज एक प्राकृतिक मौत न मानकर अभिजीत दीपके पर हत्या का केस दर्ज किया जाए।
आयोजकों की सफाई और प्रशासनिक रुख
दूसरी तरफ, अभिजीत दीपके और उनके समर्थकों का दावा है कि पिल्लई की मौत एक बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण मेडिकल इमरजेंसी थी, जिसे आयोजन की व्यवस्था से जोड़कर देखना गलत है। आयोजकों का कहना है कि तबीयत बिगड़ते ही मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाने की हर संभव कोशिश की गई थी। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रही है। पार्क में लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं, गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है ताकि मौत की वास्तविक वजह और आयोजकों की वैधानिक जवाबदेही स्पष्ट हो सके।

वैभव सूर्यवंशी को क्यों नहीं मिल रहा मौका? गंभीर ने तोड़ी चुप्पी
टीम इंडिया के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में शामिल न करने की वजह साफ कर दी है। गंभीर के मुताबिक, किसी भी खिलाड़ी का चयन सोशल मीडिया के दबाव में नहीं, बल्कि टीम की जरूरतों और खिलाड़ियों के मौजूदा प्रदर्शन के आधार पर तय होता है।
टीम इंडिया के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में शामिल न करने की वजह साफ कर दी है। गंभीर के मुताबिक, किसी भी खिलाड़ी का चयन सोशल मीडिया के दबाव में नहीं, बल्कि टीम की जरूरतों और खिलाड़ियों के मौजूदा प्रदर्शन के आधार पर तय होता है।
सोशल मीडिया नहीं, टीम की जरूरत तय करेगी प्लेइंग XI
भारतीय क्रिकेट टीम में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन जब बात देश के लिए खेलने की आती है तो अनुभव और टीम संतुलन सबसे ऊपर रखे जाते हैं। युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर क्रिकेट प्रशंसकों के बीच काफी उत्सुकता है, लेकिन हेड कोच गौतम गंभीर ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी खिलाड़ी की एंट्री सिर्फ सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के आधार पर नहीं हो सकती।
गंभीर ने साफ तौर पर कहा कि वैभव सूर्यवंशी में असाधारण प्रतिभा है और वे भारतीय क्रिकेट के उज्ज्वल भविष्य का हिस्सा हैं, लेकिन उन्हें सही समय पर ही मौका दिया जाएगा। इस समय टीम प्रबंधन का पूरा ध्यान अनुभवी और फॉर्म में चल रहे खिलाड़ियों को बैक करने पर है।
अभिषेक और संजू के अनुभव पर भरोसा
मुख्य कोच ने अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन जैसे खिलाड़ियों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित किया है। किसी भी नए खिलाड़ी को जगह देने के लिए अचानक इन स्थापित खिलाड़ियों को बाहर नहीं किया जा सकता।
गंभीर के अनुसार, "अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन जैसे खिलाड़ियों के पास लंबा अनुभव है और वे टीम की योजनाओं का अहम हिस्सा हैं। जब आपके पास टॉप ऑर्डर में प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी मौजूद हों, तो नए खिलाड़ियों को थोड़ा इंतजार करना पड़ता है। हर खिलाड़ी को अपनी बारी का इंतजार करना होता है और वैभव को भी अपनी प्रतिभा साबित करने के पर्याप्त मौके सही समय पर मिलेंगे।"
ड्रेसिंग रूम का माहौल और लंबा सफर
भारतीय टीम प्रबंधन का मानना है कि किसी भी युवा खिलाड़ी को सीधे बड़े मुकाबलों में उतारने के बजाय उसे ड्रेसिंग रूम का हिस्सा बनाकर अंतरराष्ट्रीय माहौल में ढलने का मौका देना ज्यादा बेहतर होता है। वैभव सूर्यवंशी को टीम के साथ रखने का मुख्य मकसद उन्हें वरिष्ठ खिलाड़ियों से सीखने और दबाव से निपटने की कला सिखाना है।
गंभीर का यह बयान उन प्रशंसकों के लिए एक स्पष्ट संदेश है जो हर मैच के बाद प्लेइंग इलेवन में बड़े बदलावों की मांग करते हैं। कोच ने यह संदेश दिया है कि टीम का चयन एक व्यवस्थित प्रक्रिया के तहत होता है, न कि किसी ट्रेंड के आधार पर।
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