
राहुल गांधी से शादी करना चाहती है दिल्ली की यह लड़की, इंदौर में कही दिल की बात
इंदौर में आयोजित कांग्रेस के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में दिल्ली से आई देवोश्री मुखर्जी ने एक अनोखा दावा करके सबका ध्यान खींच लिया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से राहुल गांधी से शादी करने की इच्छा जताई। देवोश्री ने बॉलीवुड अभिनेत्री करीना कपूर के पुराने बयान का हवाला देते हुए अपने इस फैसले को जायज ठहराया।
खबर का निचोड़
इंदौर में आयोजित कांग्रेस के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में दिल्ली से आई देवोश्री मुखर्जी ने एक अनोखा दावा करके सबका ध्यान खींच लिया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से राहुल गांधी से शादी करने की इच्छा जताई। देवोश्री ने बॉलीवुड अभिनेत्री करीना कपूर के पुराने बयान का हवाला देते हुए अपने इस फैसले को जायज ठहराया।
इंदौर के मंच से दिल्ली की युवती का बड़ा बयान
मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में शनिवार को कांग्रेस पार्टी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम का आयोजन हुआ था। इस राजनीतिक मंच पर उस वक्त माहौल बिल्कुल बदल गया, जब दिल्ली से आई देवोश्री मुखर्जी नाम की एक युवती ने माइक संभाला। उन्होंने राजनीतिक मुद्दों से अलग हटकर सीधे राहुल गांधी से शादी करने का प्रस्ताव सामने रख दिया। यह सुनते ही कार्यक्रम में मौजूद लोग हैरान रह गए और देखते ही देखते यह खबर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई।
करीना कपूर के बयान का दिया हवाला
देवोश्री मुखर्जी ने राहुल गांधी के प्रति अपने आकर्षण और शादी की इच्छा को सही ठहराने के लिए फिल्म जगत का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि जब बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री करीना कपूर सार्वजनिक रूप से राहुल गांधी को डेट करने की इच्छा जता सकती हैं, तो फिर एक आम लड़की उनसे शादी का सपना क्यों नहीं देख सकती? देवोश्री का मानना है कि राहुल गांधी देश के एक सक्षम नेता हैं और एक आम नागरिक के तौर पर उन्हें अपनी भावनाएं व्यक्त करने का पूरा अधिकार है।
राहुल गांधी की छवि और युवाओं में क्रेज
राहुल गांधी भारतीय राजनीति का एक ऐसा नाम हैं, जिनकी निजी जिंदगी को लेकर अक्सर चर्चाएं होती रहती हैं। देश के सबसे पसंदीदा कुंवारों में शुमार राहुल गांधी को लेकर कई बार इस तरह के बयान सामने आते रहे हैं। इंदौर के इस छात्र सम्मेलन में युवाओं के मुद्दों पर चर्चा होनी थी, लेकिन देवोश्री के इस बयान ने पूरी लाइमलाइट चुरा ली। वहां मौजूद कार्यकर्ताओं और छात्रों के बीच यह चर्चा का सबसे बड़ा विषय बन गया।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज
इस घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुछ लोग इसे युवती का पब्लिसिटी स्टंट मान रहे हैं, तो कुछ इसे एक प्रशंसक की सादगी भरी अभिव्यक्ति बता रहे हैं। कार्यक्रम में मौजूद कांग्रेस नेताओं ने भी इस स्थिति को बेहद सहजता से संभाला। इंदौर से उठी शादी की यह इच्छा अब देशभर के राजनीतिक और मीडिया हलकों में चटकारे लेकर सुनी जा रही है।

भारतीय क्रिकेट में बड़े बदलाव की आहट: चीफ सिलेक्टर अजीत अगरकर छोड़ सकते हैं पद
अजीत अगरकर भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के मुख्य चयनकर्ता का पद छोड़ सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगरकर ने बीसीसीआई (BCCI) को पत्र लिखकर 4 अक्टूबर को कार्यकाल समाप्त होने के बाद जिम्मेदारी आगे न संभालने की मंशा जताई है। बोर्ड ने फिलहाल इस विषय पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
अजीत अगरकर भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के मुख्य चयनकर्ता का पद छोड़ सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगरकर ने बीसीसीआई (BCCI) को पत्र लिखकर 4 अक्टूबर को कार्यकाल समाप्त होने के बाद जिम्मेदारी आगे न संभालने की मंशा जताई है। बोर्ड ने फिलहाल इस विषय पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
चयन समिति में फेरबदल की तैयारी
भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर के पद छोड़ने की खबरों ने क्रिकेट के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। जानकारी सामने आ रही है कि अगरकर ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को पत्र भेजकर स्पष्ट कर दिया है कि वह 4 अक्टूबर को अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद पद पर बने रहने के इच्छुक नहीं हैं।
बताया जा रहा है कि यह फैसला अचानक नहीं लिया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अगरकर ने इस साल फरवरी में ही बीसीसीआई के अधिकारियों को सूचित कर दिया था कि बोर्ड को उनके कार्यकाल की समाप्ति के बाद नए विकल्प की तलाश शुरू कर देनी चाहिए।
अगरकर का कार्यकाल और उपलब्धियां
अजीत अगरकर ने जुलाई 2023 में चेतन शर्मा की जगह भारतीय चयन समिति के अध्यक्ष के रूप में पदभार संभाला था। उनके इस कार्यकाल के दौरान भारतीय टीम ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।
अगरकर की अगुआई वाली चयन समिति के कार्यकाल में ही भारत ने टी20 विश्व कप का खिताब अपने नाम किया, एशिया कप जीता और वनडे विश्व कप के फाइनल तक का सफर तय किया। इसके अलावा टीम इंडिया ने तीनों फॉर्मेट में अपनी बादशाहत कायम रखी और नए खिलाड़ियों को सही समय पर मौके देकर एक मजबूत बेंच स्ट्रेंथ तैयार की।
बीसीसीआई का रुख और भविष्य की रणनीति
हालांकि इस पूरे मामले पर बीसीसीआई की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। बोर्ड ने न तो अगरकर के इस्तीफे या फैसले की पुष्टि की है और न ही नए चीफ सिलेक्टर के लिए आवेदन मांगने की कोई घोषणा की है।
यदि 4 अक्टूबर को अगरकर अपने पद से हटते हैं, तो बीसीसीआई को जल्द ही एक नया मुख्य चयनकर्ता चुनना होगा। आगामी महत्वपूर्ण श्रृंखलाओं और आईसीसी टूर्नामेंट्स को ध्यान में रखते हुए बोर्ड को एक ऐसे अनुभवी चेहरे की तलाश होगी जो भारतीय टीम की लय को बरकरार रख सके। अब सभी की निगाहें बीसीसीआई के अगले कदम पर टिकी हैं।

भारतीय क्रिकेट में बड़े बदलाव की आहट: चीफ सिलेक्टर अजीत अगरकर छोड़ सकते हैं पद
अजीत अगरकर भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के मुख्य चयनकर्ता का पद छोड़ सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगरकर ने बीसीसीआई (BCCI) को पत्र लिखकर 4 अक्टूबर को कार्यकाल समाप्त होने के बाद जिम्मेदारी आगे न संभालने की मंशा जताई है। बोर्ड ने फिलहाल इस विषय पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
अजीत अगरकर भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के मुख्य चयनकर्ता का पद छोड़ सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगरकर ने बीसीसीआई (BCCI) को पत्र लिखकर 4 अक्टूबर को कार्यकाल समाप्त होने के बाद जिम्मेदारी आगे न संभालने की मंशा जताई है। बोर्ड ने फिलहाल इस विषय पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
चयन समिति में फेरबदल की तैयारी
भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर के पद छोड़ने की खबरों ने क्रिकेट के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। जानकारी सामने आ रही है कि अगरकर ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को पत्र भेजकर स्पष्ट कर दिया है कि वह 4 अक्टूबर को अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद पद पर बने रहने के इच्छुक नहीं हैं।
बताया जा रहा है कि यह फैसला अचानक नहीं लिया गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अगरकर ने इस साल फरवरी में ही बीसीसीआई के अधिकारियों को सूचित कर दिया था कि बोर्ड को उनके कार्यकाल की समाप्ति के बाद नए विकल्प की तलाश शुरू कर देनी चाहिए।
अगरकर का कार्यकाल और उपलब्धियां
अजीत अगरकर ने जुलाई 2023 में चेतन शर्मा की जगह भारतीय चयन समिति के अध्यक्ष के रूप में पदभार संभाला था। उनके इस कार्यकाल के दौरान भारतीय टीम ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं।
अगरकर की अगुआई वाली चयन समिति के कार्यकाल में ही भारत ने टी20 विश्व कप का खिताब अपने नाम किया, एशिया कप जीता और वनडे विश्व कप के फाइनल तक का सफर तय किया। इसके अलावा टीम इंडिया ने तीनों फॉर्मेट में अपनी बादशाहत कायम रखी और नए खिलाड़ियों को सही समय पर मौके देकर एक मजबूत बेंच स्ट्रेंथ तैयार की।
बीसीसीआई का रुख और भविष्य की रणनीति
हालांकि इस पूरे मामले पर बीसीसीआई की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। बोर्ड ने न तो अगरकर के इस्तीफे या फैसले की पुष्टि की है और न ही नए चीफ सिलेक्टर के लिए आवेदन मांगने की कोई घोषणा की है।
यदि 4 अक्टूबर को अगरकर अपने पद से हटते हैं, तो बीसीसीआई को जल्द ही एक नया मुख्य चयनकर्ता चुनना होगा। आगामी महत्वपूर्ण श्रृंखलाओं और आईसीसी टूर्नामेंट्स को ध्यान में रखते हुए बोर्ड को एक ऐसे अनुभवी चेहरे की तलाश होगी जो भारतीय टीम की लय को बरकरार रख सके। अब सभी की निगाहें बीसीसीआई के अगले कदम पर टिकी हैं।

तमिलनाडु में नवजात बच्चों को मिलेगी 1 ग्राम सोने की अंगूठी
तमिलनाडु सरकार ने राज्य के सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले नवजात बच्चों के लिए एक नई योजना का ऐलान किया है। इसके तहत 28 सितंबर से हर नवजात को 1 ग्राम सोने की अंगूठी दी जाएगी। पहले चरण के लिए 1.28 लाख सोने की अंगूठियां खरीद ली गई हैं।
खबर का निचोड़
तमिलनाडु सरकार ने राज्य के सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले नवजात बच्चों के लिए एक नई योजना का ऐलान किया है। इसके तहत 28 सितंबर से हर नवजात को 1 ग्राम सोने की अंगूठी दी जाएगी। पहले चरण के लिए 1.28 लाख सोने की अंगूठियां खरीद ली गई हैं।
योजना की बड़ी शुरुआत
तमिलनाडु सरकार ने समाज कल्याण की दिशा में एक अनोखा और बड़ा कदम उठाया है। राज्य के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने 28 सितंबर से नवजात शिशुओं के लिए 1 ग्राम सोने की अंगूठी देने की योजना शुरू करने की घोषणा की है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य नवजात बच्चों के आगमन का जश्न मनाना और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर जनता के भरोसे को और मजबूत करना है।
सरकारी अस्पतालों के बच्चों को मिलेगा लाभ
इस जनकल्याणकारी योजना का सीधा फायदा उन सभी परिवारों को मिलेगा जिनके बच्चों का जन्म राज्य के सरकारी अस्पतालों में होगा। सरकार के इस कदम से गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों में खुशी की लहर है। कई परिवारों के लिए बच्चे के जन्म के समय सोने का उपहार पाना एक सपना सच होने जैसा है। यह पहल सरकारी अस्पतालों में संस्थागत प्रसव (Institutional Delivery) को बढ़ावा देने में भी बेहद मददगार साबित होगी।
पहले चरण की तैयारी पूरी
योजना को जमीनी स्तर पर बिना किसी बाधा के लागू करने के लिए प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है। पहले चरण के वितरण के लिए सरकार ने 1.28 लाख सोने की अंगूठियां खरीद ली हैं। 28 सितंबर को योजना के आधिकारिक शुभारंभ के साथ ही अस्पतालों में नवजात शिशुओं के परिजनों को ये अंगूठियां भेंट की जाने लगेंगी। पारदर्शी व्यवस्था के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि हर पात्र नवजात तक यह उपहार बिना किसी देरी के पहुंचे।
जनता के बीच योजना की चर्चा
राज्य भर में इस फैसले का स्वागत हो रहा है। तमिलनाडु हमेशा से अपनी अनूठी सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए जाना जाता रहा है, और यह नई पहल उसी परंपरा को आगे बढ़ाती दिखती है। नवजात बच्चों के स्वागत में सोने की अंगूठी देने का यह फैसला स्वास्थ्य विभाग की साख बढ़ाने के साथ-साथ आम जनता को सरकारी सुविधाओं से जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम बनेगा।

दिशा सालियान केस: उद्धव ठाकरे पर वकील का सनसनीखेज दावा
दिशा सालियान मौत मामले में सतीश सालियान के वकील नीलेश ओझा ने पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि उद्धव ठाकरे इस मामले के मुख्य आरोपी हैं। उन्होंने अपने बेटे आदित्य ठाकरे का बचाव करने के लिए मुंबई पुलिस अधिकारी सचिन वाझे की बहाली कराई थी।
खबर का निचोड़
दिशा सालियान मौत मामले में सतीश सालियान के वकील नीलेश ओझा ने पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि उद्धव ठाकरे इस मामले के मुख्य आरोपी हैं। उन्होंने अपने बेटे आदित्य ठाकरे का बचाव करने के लिए मुंबई पुलिस अधिकारी सचिन वाझे की बहाली कराई थी।
मुख्य आरोपी उद्धव ठाकरे: वकील का बड़ा दावा
दिशा सालियान केस में एक नया और बेहद चौंकाने वाला मोड़ आ गया है। दिशा के पिता सतीश सालियान के वकील नीलेश ओझा ने महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर सीधे हमले बोलते हुए उन्हें इस पूरे मामले का 'मुख्य आरोपी' करार दिया है। इस सनसनीखेज दावे ने राज्य की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। ओझा का कहना है कि इस केस के तार सीधे तौर पर ठाकरे परिवार से जुड़े हुए हैं।
आदित्य ठाकरे को बचाने के लिए सचिन वाझे की बहाली?
वकील नीलेश ओझा ने आरोप लगाया है कि उद्धव ठाकरे ने अपने पद का दुरुपयोग किया। उन्होंने अपने बेटे आदित्य ठाकरे के कथित गलत कामों और नाम को इस केस से बाहर रखने के लिए रणनीतिक कदम उठाए। इसी कड़ी में तत्कालीन मुंबई पुलिस अधिकारी सचिन वाझे को दोबारा सेवा में बहाल किया गया था। ओझा के अनुसार, वाझे की बहाली का मुख्य मकसद जांच की दिशा को मोड़ना और अहम सबूतों के साथ छेड़छाड़ करना था।
जांच एजेंसी और पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल
ओझा ने इस बात पर भी जोर दिया कि घटना के बाद से ही पुलिस प्रशासन और जांच एजेंसियों पर राजनीतिक दबाव बनाया गया था। मामले को एक साधारण हादसे का रूप देने की कोशिश की गई, जबकि इसके पीछे गहरी साजिश छिपी थी। उनका कहना है कि वाझे जैसे अधिकारियों का इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक संरक्षण देने और मामले की असली सच्चाई को दबाने के लिए किया गया।
महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ा सियासी पारा
इस खुलासे के बाद महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। विपक्षी दल जहां इस मामले में उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग को दोहरा रहे हैं, वहीं ठाकरे गुट इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित और छवि खराब करने की साजिश बता रहा है। सतीश सालियान के वकील द्वारा किए गए इस दावे ने एक बार फिर दिशा सालियान मौत प्रकरण को चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है।
Delight News
निष्पक्ष पत्रकारिता, सटीक विश्लेषण
Delight News परिवार से जुड़ें
ताजा खबरों के सबसे तेज नोटिफिकेशन और शानदार यूज़र इंटरफेस के साथ देश-दुनिया के लाइव अपडेट्स सीधे अपने mobile पर पाने के लिए हमारा Delight News Android App डाउनलोड करें।
📥 Download Android App