
ChatGPT में चैट डिलीट, आर्काइव और एक्सपोर्ट कैसे करें: जानें आसान तरीका
ChatGPT यूज़र्स अपनी चैट हिस्ट्री को आसानी से प्रबंधित कर सकते हैं। तीन डॉट्स पर क्लिक करके चैट को डिलीट या आर्काइव किया जा सकता है। डिलीट की गई चैट 30 दिनों में हमेशा के लिए हट जाती है, जबकि आर्काइव और एक्सपोर्ट विकल्प डेटा को सुरक्षित रखने में मदद करते हैं।
खबर का निचोड़: ChatGPT यूज़र्स अपनी चैट हिस्ट्री को आसानी से प्रबंधित कर सकते हैं। तीन डॉट्स पर क्लिक करके चैट को डिलीट या आर्काइव किया जा सकता है। डिलीट की गई चैट 30 दिनों में हमेशा के लिए हट जाती है, जबकि आर्काइव और एक्सपोर्ट विकल्प डेटा को सुरक्षित रखने में मदद करते हैं।
ChatGPT डेटा मैनेजमेंट: अपनी चैट पर रखें पूरा कंट्रोल
ChatGPT का इस्तेमाल करते समय कई बार डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी को लेकर सवाल उठते हैं। यूज़र्स अक्सर यह जानना चाहते हैं कि वे अपनी पुरानी बातचीत को कैसे सुरक्षित रखें या गैर-ज़रूरी चैट को कैसे हटाएं। OpenAI ने यूज़र्स को चैट मैनेज करने के लिए आसान और असरदार टूल दिए हैं। इनकी मदद से चैट को डिलीट, आर्काइव और एक्सपोर्ट करना बेहद सरल हो जाता है।
चैट डिलीट करने का तरीका और 30 दिनों का नियम
किसी भी गैर-ज़रूरी चैट को हटाने के लिए यूज़र्स को चैट हिस्ट्री में संबंधित चैट के पास दिख रहे तीन डॉट्स पर क्लिक करना होता है। यहां डिलीट का विकल्प चुनते ही चैट आपकी मुख्य लिस्ट से हट जाती है। ध्यान रखने योग्य बात यह है कि डिलीट की गई चैट तुरंत पूरी तरह से गायब नहीं होती। OpenAI के सुरक्षा नियमों के तहत, यह डेटा सिस्टम से 30 दिनों के भीतर स्थायी रूप से हटा दिया जाता है। एक बार स्थायी रूप से डिलीट होने के बाद इसे दोबारा रिकवर करना संभव नहीं होता।
आर्काइव फीचर: ज़रूरी बातचीत को रखें सुरक्षित
यदि कोई चैट भविष्य में काम आ सकती है लेकिन उसे मुख्य स्क्रीन पर नहीं रखना चाहते, तो आर्काइव फीचर सबसे बेहतरीन विकल्प है। चैट के तीन डॉट्स वाले मेन्यू से ही 'आर्काइव' का चुनाव किया जा सकता है। यह चैट आपकी मुख्य स्क्रीन से छिप जाती है लेकिन डिलीट नहीं होती। सेटिंग्स के अंतर्गत 'डेटा कंट्रोल्स' (Data Controls) में जाकर आर्काइव की गई चैट को कभी भी देखा या वापस अन-आर्काइव किया जा सकता है।
डेटा एक्सपोर्ट: एक क्लिक में डाउनलोड करें पूरी चैट हिस्ट्री
यदि पूरे ChatGPT डेटा का बैकअप अपने डिवाइस में सुरक्षित रखना हो, तो एक्सपोर्ट फीचर का इस्तेमाल किया जाता है। इसके लिए सेटिंग्स में जाकर 'डेटा कंट्रोल्स' सेक्शन पर जाना होता है। वहां 'एक्सपोर्ट डेटा' पर क्लिक करने पर एक कन्फर्मेशन ईमेल प्राप्त होता है। ईमेल में दिए गए लिंक से पूरी चैट हिस्ट्री और डेटा को फाइल के रूप में डाउनलोड किया जा सकता है। यह तरीका उन यूज़र्स के लिए बेहद उपयोगी है जो अपने महत्वपूर्ण नोट्स या डेटा का ऑफलाइन रिकॉर्ड रखना चाहते हैं।

BHIM-UPI और RuPay कार्ड पर बंद हो सकता है इंसेंटिव!
सरकार BHIM-UPI और RuPay डेबिट कार्ड के लिए ₹2,000 करोड़ की इंसेंटिव स्कीम खत्म करने पर विचार कर रही है। नई योजना के तहत MDR से मिलने वाले राजस्व का 5% हिस्सा एक अलग फंड में जमा किया जा सकता है, जिसका उपयोग छोटे डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने में होगा।
खबर का निचोड़
सरकार BHIM-UPI और RuPay डेबिट कार्ड के लिए ₹2,000 करोड़ की इंसेंटिव स्कीम खत्म करने पर विचार कर रही है। नई योजना के तहत MDR से मिलने वाले राजस्व का 5% हिस्सा एक अलग फंड में जमा किया जा सकता है, जिसका उपयोग छोटे डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने में होगा।
UPI और RuPay इंसेंटिव पर बड़ा फैसला
डिजिटल भुगतान को आम जनता तक पहुंचाने और छोटे लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई ₹2,000 करोड़ की सरकारी इंसेंटिव योजना जल्द ही इतिहास बन सकती है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार BHIM-UPI और RuPay डेबिट कार्ड के इस्तेमाल पर मिलने वाले वित्तीय प्रोत्साहन (Incentive) को समाप्त करने की तैयारी में है। इस कदम से डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम में एक नया मोड़ आने की संभावना जताई जा रही है।
क्या है नया 5% फंड फॉर्मूला?
प्रोत्साहन योजना को सीधे तौर पर बंद करने के बजाय सरकार एक वैकल्पिक मॉडल पर काम कर रही है। नई रणनीति के तहत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के जरिए जनरेट होने वाली कुल रकम का 5 प्रतिशत हिस्सा एक विशेष फंड में ट्रांसफर किया जाएगा। इस अलग से बनाए गए फंड का इस्तेमाल केवल कम राशि वाले UPI लेनदेन को प्रोत्साहित करने और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए किया जाएगा।
डिजिटल इकोसिस्टम और फिनटेक पर प्रभाव
इस फैसले का सीधा असर फिनटेक कंपनियों, बैंकों और छोटे व्यापारियों पर देखने को मिल सकता है। अब तक सरकारी प्रोत्साहन के सहारे बैंकों और पेमेंट एग्रीगेटर कंपनियों को मर्चेंट से शुल्क न लेने के बावजूद वित्तीय राहत मिलती रही है। नए फ्रेमवर्क के लागू होने से भुगतान क्षेत्र में राजस्व मॉडल को फिर से पुनर्गठित करना पड़ सकता है, जिससे वित्तीय स्वावलंबन को बढ़ावा मिलेगा।
छोटे लेनदेन का भविष्य और चुनौतियाँ
भारत में रोजाना करोड़ों की संख्या में कम मूल्य वाले डिजिटल ट्रांजैक्शन होते हैं। चाय की दुकान से लेकर राशन के सामान तक, UPI अब हर आम नागरिक की दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। इंसेंटिव स्ट्रक्चर में बदलाव के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बैंक और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स बिना किसी प्रत्यक्ष सरकारी सहायता के किस तरह छोटे लेनदेन की निरंतरता और निर्बाध सेवाओं को बनाए रखते हैं।

युवराज सिंह ने थपथपाई अभिषेक शर्मा की पीठ, 30 गेंदों में ठोका शतक
भारतीय क्रिकेट के नए सितारे अभिषेक शर्मा ने अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरे टी20 मुकाबले में महज 30 गेंदों में तूफानी शतक जड़कर इतिहास रच दिया। वह टी20 अंतरराष्ट्रीय में भारत के लिए सबसे तेज शतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। इस ऐतिहासिक पारी पर उनके मेंटर युवराज सिंह ने भी गर्व जताया है।
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भारतीय क्रिकेट के नए सितारे अभिषेक शर्मा ने अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरे टी20 मुकाबले में महज 30 गेंदों में तूफानी शतक जड़कर इतिहास रच दिया। वह टी20 अंतरराष्ट्रीय में भारत के लिए सबसे तेज शतक लगाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। इस ऐतिहासिक पारी पर उनके मेंटर युवराज सिंह ने भी गर्व जताया है।
अभिषेक शर्मा का ऐतिहासिक तूफान और युवराज का संदेश
भारतीय टी20 क्रिकेट में एक नया अध्याय जुड़ गया है। युवा बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने अपनी ताबड़तोड़ बल्लेबाजी से क्रिकेट फैंस को मंत्रमुग्ध कर दिया है। अफगानिस्तान के खिलाफ खेले गए तीसरे टी20 मैच में अभिषेक ने विरोधी गेंदबाजों की बखिया उधेड़ते हुए महज 30 गेंदों पर शतक ठोक दिया। उनकी इस आतिशी पारी ने स्टेडियम में मौजूद हर दर्शक को झूमने पर मजबूर कर दिया। शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्हें मैच के बाद 'प्लेयर ऑफ द मैच' के खिताब से नवाजा गया।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद मैदान के बाहर से भी बधाइयों का तांता लग गया। अभिषेक शर्मा को निखारने में अहम भूमिका निभाने वाले भारत के दिग्गज ऑलराउंडर युवराज सिंह का रिएक्शन सबसे ज्यादा चर्चा में है। युवराज ने सोशल मीडिया पर खुशी जाहिर करते हुए लिखा, "तुम पर गर्व है, विनम्र रहो।" यह संदेश साफ तौर पर दिखाता है कि युवराज अपने शिष्य की इस बड़ी कामयाबी से कितने खुश हैं, साथ ही वे उन्हें जमीन पर जुड़े रहने की सलाह भी दे रहे हैं।
रिकॉर्ड तोड़ पारी और मेंटरशिप का कमाल
अभिषेक शर्मा की यह पारी सिर्फ एक शतक भर नहीं है, बल्कि यह टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट इतिहास में किसी भी भारतीय द्वारा जमाया गया सबसे तेज शतक है। अपनी इस पारी के दौरान उन्होंने मैदान के चारों ओर चौके और छक्कों की बरसात कर दी। अफगानिस्तान के गेंदबाज उनके सामने बेबस नजर आए और किसी के पास भी इस युवा बल्लेबाज को रोकने का कोई तोड़ नहीं था।
अभिषेक के इस आक्रामक अंदाज के पीछे युवराज सिंह का बड़ा मार्गदर्शन माना जाता है। युवराज ने कई मौकों पर अभिषेक के साथ नेट्स में समय बिताया है और उनकी बल्लेबाजी की तकनीक तथा मानसिक मजबूती पर काम किया है। यही वजह है कि जब अभिषेक ने अपना शतक पूरा किया, तो पूरे देश के साथ-साथ उनके गुरु युवराज सिंह का सीना भी गर्व से चौड़ा हो गया।
इस मुकाबले में मिली धमाकेदार जीत के बाद अभिषेक शर्मा का यह फॉर्म भारतीय टीम के लिए एक बेहद सकारात्मक संकेत है। एक युवा खिलाड़ी के तौर पर उन्होंने यह साबित कर दिया है कि वह बड़े मंच पर बिना किसी दबाव के निर्भीक क्रिकेट खेलने का माद्दा रखते हैं।

मंत्री पद से थोड़ी मानूंगी': मैथिली ठाकुर का बड़ा बयान
लोक गायिका से राजनेता बनीं मैथिली ठाकुर ने अपने भावी राजनीतिक इरादों को लेकर बड़ा बयान दिया है। एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में जब उनसे मंत्री बनने की इच्छा पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वह बहुत महत्वाकांक्षी हैं और सिर्फ मंत्री पद से संतुष्ट नहीं होंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी, वह उसे पूरी निष्ठा से निभाएंगी।
लोक गायिका से राजनेता बनीं मैथिली ठाकुर ने अपने भावी राजनीतिक इरादों को लेकर बड़ा बयान दिया है। एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में जब उनसे मंत्री बनने की इच्छा पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वह बहुत महत्वाकांक्षी हैं और सिर्फ मंत्री पद से संतुष्ट नहीं होंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी, वह उसे पूरी निष्ठा से निभाएंगी।
लोक गायकी से विधानसभा तक का सफर
26 वर्षीय मैथिली ठाकुर अपनी सुरीली आवाज और पारंपरिक लोकगीतों के जरिए देश-विदेश के करोड़ों दिलों पर राज करती रही हैं। संगीत की दुनिया में सफलता के झंडे गाड़ने के बाद उन्होंने राजनीति की राह चुनी और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के टिकट पर विधायक बनीं। बेहद कम उम्र में राजनीति की मुख्यधारा में शामिल होकर उन्होंने साबित कर दिया कि वह केवल मंच पर सुर सजाने तक सीमित नहीं रहने वाली हैं, बल्कि जनसेवा और नीति-निर्माण के क्षेत्र में भी एक लंबी पारी खेलने के इरादे से आई हैं।
'सिर्फ मंत्री पद से थोड़ी मानूंगी'
हाल ही में 'आजतक' के एक विशेष कार्यक्रम के दौरान जब पत्रकार ने मैथिली से सीधे तौर पर पूछा कि "क्या आपकी मंत्री बनने की इच्छा है?", तो उन्होंने बेहद सहज लेकिन तीखे अंदाज में उत्तर दिया। मैथिली ने कहा, "मेरे मन में तो विधायक बनने की इच्छा भी नहीं थी। पार्टी मुझे जो भी काम या जिम्मेदारी देगी, मैं उसे पूरी निष्ठा और मेहनत से पूरा करूंगी।" इसके बाद अपनी बात में थोड़ा ट्विस्ट लाते हुए उन्होंने हंसते हुए मुस्कुराते अंदाज में कहा, "एंबिशियस तो मैं बहुत हूं, सिर्फ मंत्री पद से थोड़ी मानूंगी।" उनका यह बयान अब सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का विषय बन चुका है।
महत्वाकांक्षा और पार्टी अनुशासन का संतुलन
मैथिली ठाकुर का यह बयान उनके आत्मविश्वासी व्यक्तित्व और भविष्य की बड़ी सोच को दर्शाता है। एक तरफ जहां उन्होंने खुद को पार्टी का एक अनुशासित कार्यकर्ता बताया जो शीर्ष नेतृत्व के हर आदेश का पालन करने के लिए तैयार है, वहीं दूसरी तरफ अपनी निजी महत्वाकांक्षाओं को भी बिना किसी झिझक के सामने रखा। राजनीति में नए चेहरों का इस तरह मुखर होकर बोलना यह संकेत देता है कि युवा नेता अब लकीर के फकीर बनने के बजाय अपने लक्ष्यों को लेकर पूरी तरह स्पष्ट हैं।
राजनीतिक गलियारों में शुरू हुई चर्चा
मैथिली के इस बयान के बाद सियासी हलकों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। कुछ लोग इसे उनके मजाकिया और बेबाक अंदाज से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ विश्लेषकों का मानना है कि मैथिली ने इशारों-इशारों में यह साफ कर दिया है कि वह राजनीति में किसी छोटे पद या सीमित भूमिका से संतुष्ट होने वाली नहीं हैं। युवा वर्ग के बीच उनकी लोकप्रियता को देखते हुए पार्टी में भी उनके भविष्य के कद को लेकर नई बहस छिड़ गई है।

क्रिकेटर अभिषेक पोरेल को रेप केस में मिली जमानत, हुगली कोर्ट का फैसला
रेप और ब्लैकमेलिंग के गंभीर आरोपों में घिरे बंगाल और दिल्ली कैपिटल्स के युवा क्रिकेटर अभिषेक पोरेल को हुगली कोर्ट से जमानत मिल गई है। एक महीने से अधिक समय जेल में बिताने के बाद आई यह राहत इसलिए भी अहम है क्योंकि शिकायतकर्ता मेडिकल छात्रा ने खुद हलफनामा देकर जमानत पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई।
खबर का निचोड़
रेप और ब्लैकमेलिंग के गंभीर आरोपों में घिरे बंगाल और दिल्ली कैपिटल्स के युवा क्रिकेटर अभिषेक पोरेल को हुगली कोर्ट से जमानत मिल गई है। एक महीने से अधिक समय जेल में बिताने के बाद आई यह राहत इसलिए भी अहम है क्योंकि शिकायतकर्ता मेडिकल छात्रा ने खुद हलफनामा देकर जमानत पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई।
हुगली कोर्ट से क्रिकेटर अभिषेक पोरेल को बड़ी राहत
भारतीय क्रिकेट जगत के उभरते सितारे और दिल्ली कैपिटल्स के खिलाड़ी अभिषेक पोरेल के लिए आखिरकार राहत की खबर आई है। पिछले एक महीने से भी अधिक समय से जेल की सलाखों के पीछे दिन काट रहे इस युवा क्रिकेटर को हुगली कोर्ट ने जमानत दे दी है। अभिषेक पोरेल पर एक मेडिकल छात्रा ने दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग जैसे संगीन आरोप लगाए थे, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया था। इस फैसले के साथ ही कानूनी मोर्चे पर उनके लिए एक नई उम्मीद जगी है।
शिकायतकर्ता का रुख और अदालत का फैसला
अदालत में सुनवाई के दौरान इस मामले ने एक नया मोड़ लिया। पुलिस और बचाव पक्ष की दलीलों के बीच सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब शिकायतकर्ता मेडिकल छात्रा ने खुद अदालत के सामने एक हलफनामा पेश किया। इस हलफनामे में छात्रा ने स्पष्ट रूप से कहा कि उसे अभिषेक पोरेल की जमानत याचिका मंजूर किए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है। शिकायतकर्ता के इस बदले रुख और मामले के तमाम पहलुओं को ध्यान में रखते हुए हुगली कोर्ट ने क्रिकेटर को जमानत पर रिहा करने का आदेश जारी कर दिया।
शुरुआत से ही बेकसूर होने का दावा
मामला सामने आने के बाद से ही अभिषेक पोरेल और उनका कानूनी पक्ष इन आरोपों को सिरे से खारिज करता रहा है। पोरेल का कहना था कि उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया है और उन्होंने किसी भी तरह के अपराध को अंजाम नहीं दिया है। पूरे घटनाक्रम के दौरान उन्होंने जांच में सहयोग करने और अदालत के समक्ष अपनी सच्चाई रखने की बात कही थी। जमानत मिलने के बाद अब उनके कानूनी सलाहकारों की नजर मामले की आगे की कार्यवाही पर टिकी है।
क्रिकेट करियर पर पड़ा गहरा असर
बंगाल के इस प्रतिभावान विकेटकीपर-बल्लेबाज ने इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में दिल्ली कैपिटल्स की ओर से खेलते हुए अपने प्रदर्शन से काफी प्रभावित किया था। मैदान पर उनके शानदार प्रदर्शन को देखते हुए उन्हें भारतीय क्रिकेट का भविष्य माना जा रहा था। हालांकि, इस विवाद और अचानक हुई गिरफ्तारी ने उनके बेहतरीन ढर्रे पर चल रहे क्रिकेट करियर पर कुछ समय के लिए ब्रेक लगा दिया। खेल प्रेमियों और उनके प्रशंसकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि कानूनी औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद वे कितनी जल्दी दोबारा मैदान पर वापसी कर पाते हैं।
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