
UPI चार्ज पर छिड़ा महासंग्राम: कांग्रेस का हमला, बीजेपी का पलटवार
यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन पर लगने वाले 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर देश में नया सियासी घमासान छिड़ गया है। कांग्रेस ने इसे 'द ग्रेट यूपीआई लूट' करार देते हुए केंद्र सरकार को घेरा है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कांग्रेस पर भ्रामक खबरें फैलाने का आरोप लगाया है।
खबर का निचोड़
यूपीआई (UPI) ट्रांजैक्शन पर लगने वाले 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर देश में नया सियासी घमासान छिड़ गया है। कांग्रेस ने इसे 'द ग्रेट यूपीआई लूट' करार देते हुए केंद्र सरकार को घेरा है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कांग्रेस पर भ्रामक खबरें फैलाने का आरोप लगाया है।
यूपीआई चार्ज पर सियासत तेज, विपक्ष के तीखे बाण
डिजिटल भुगतान के सबसे लोकप्रिय माध्यम यूपीआई पर शुल्कों को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी ने ₹2,000 से अधिक के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) लेनदेन पर 0.4% एमडीआर (MDR) लागू करने के फैसले की कड़े शब्दों में आलोचना की है। कांग्रेस ने इस नीति को 'द ग्रेट यूपीआई लूट' और 'नरेंद्र मोदी की जेब काटो योजना' का नाम दिया है। विपक्ष का तर्क है कि सरकार डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने का दावा करती है, लेकिन आम जनता और छोटे कारोबारियों पर परोक्ष रूप से आर्थिक बोझ डाल रही है।
आंकड़ों का खेल और कांग्रेस का दावा
कांग्रेस ने अपने दावों को मजबूत करने के लिए आंकड़ों का हवाला दिया है। पार्टी के अनुसार, ₹2,000 से अधिक राशि वाले लेनदेन कुल यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या का भले ही केवल 4% हों, लेकिन कुल लेनदेन की वैल्यू में इनकी हिस्सेदारी 66% के करीब है। कांग्रेस का कहना है कि इतने बड़े वर्ग को चार्ज के दायरे में लाकर सरकार डिजिटल अर्थव्यवस्था के मूल उद्देश्य को चोट पहुँचा रही है। पार्टी ने सवाल उठाया कि जब डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा दिया जा रहा है, तब ऐसे चार्ज आम लोगों और व्यापारियों दोनों की जेब पर भारी पड़ रहे हैं।
बीजेपी का करारा जवाब, आरोपों को बताया भ्रामक
कांग्रेस के तीखे हमलों पर भारतीय जनता पार्टी ने तुरंत और सख्त प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी ने विपक्ष के दावों को पूरी तरह से नकारते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस जनता के बीच भ्रम और झूठी खबरें फैलाने का काम कर रही है। बीजेपी प्रवक्ताओं का कहना है कि सरकार का उद्देश्य आम नागरिकों पर अतिरिक्त बोझ डालना बिल्कुल नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में होने वाले 96% पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) यूपीआई लेनदेन पूरी तरह से शुल्क-मुक्त हैं।
मर्चेंट डिस्काउंट रेट पर बढ़ता विवाद
बीजेपी ने यह भी रेखांकित किया कि बहुत कम और विशेष मर्चेंट श्रेणी के बड़े लेनदेन पर ही नियम लागू होते हैं, जिससे सामान्य उपभोक्ता या छोटे दुकानदार प्रभावित नहीं होते। इस पलटवार के बावजूद, एमडीआर को लेकर शुरू हुआ यह राजनीतिक विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ जहां विपक्ष इसे आम जनता की जेब पर डाका बता रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इसे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिरता और सुरक्षा के लिए उठाया गया कदम बता रहा है।

MDR का खेल: जानिए UPI और क्रेडिट-डेबिट कार्ड चार्ज का बड़ा अंतर
डिजिटल भुगतान के दौर में मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) कार्ड और UPI के बीच लागत का बड़ा अंतर तय करता है। जहां क्रेडिट और डेबिट कार्ड पर व्यापारियों को 2.5% तक MDR चुकाना पड़ता है, वहीं UPI पर यह दर बेहद सीमित और सस्ती है, जिससे छोटे-बड़े मर्चेंट्स को बड़ी राहत मिलती है।
खबर का निचोड़
डिजिटल भुगतान के दौर में मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) कार्ड और UPI के बीच लागत का बड़ा अंतर तय करता है। जहां क्रेडिट और डेबिट कार्ड पर व्यापारियों को 2.5% तक MDR चुकाना पड़ता है, वहीं UPI पर यह दर बेहद सीमित और सस्ती है, जिससे छोटे-बड़े मर्चेंट्स को बड़ी राहत मिलती है।
UPI बनाम कार्ड: MDR चार्ज की पूरी इनसाइट
डिजिटल लेनदेन की दुनिया में हर भुगतान के पीछे एक छिपी हुई लागत होती है जिसे मर्चेंट डिस्काउंट रेट या MDR कहा जाता है। जब भी आप किसी दुकान पर कार्ड स्वाइप करते हैं या स्कैनर पर क्यूआर कोड स्कैन करके भुगतान करते हैं, तो व्यापारी को उस लेनदेन को प्रोसेस करने के लिए एक तय शुल्क देना पड़ता है। क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और UPI के बीच यही MDR शुल्क सबसे बड़ा अंतर पैदा करता है और व्यापारियों की पहली पसंद तय करता है।
क्रेडिट कार्ड से पेमेंट स्वीकार करना मर्चेंट्स के लिए सबसे महंगा सौदा साबित होता है। आमतौर पर क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर 1.5% से लेकर 2.5% तक का MDR चार्ज लिया जाता है। इसका मतलब है कि यदि कोई ग्राहक क्रेडिट कार्ड से ₹10,000 का सामान खरीदता है, तो व्यापारी को बैंक और भुगतान नेटवर्क को ₹250 तक का शुल्क देना पड़ सकता है।
डेबिट कार्ड के मामले में यह लागत थोड़ी कम हो जाती है। रिजर्व बैंक के नियमों और नेटवर्क शुल्क के आधार पर डेबिट कार्ड पर MDR आमतौर पर अधिकतम 0.90% तक सीमित रहता है। हालांकि यह क्रेडिट कार्ड की तुलना में सस्ता है, फिर भी बड़ी संख्या में होने वाले दैनिक लेनदेन पर यह लागत व्यापारियों के मुनाफे को प्रभावित करती है।
UPI क्यों बना मर्चेंट्स के लिए पहली पसंद
UPI ने भुगतान की पूरी प्रणाली को बदलकर रख दिया है। UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर MDR का ढांचा बेहद पारदर्शी और कम रखा गया है। सामान्य UPI लेनदेन पर शुल्क न के बराबर होता है, और ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर केवल 0.4% MDR लागू होता है।
उच्च मूल्य (High-Value) वाले लेनदेन में तो UPI की बचत और भी स्पष्ट हो जाती है। बड़े लेनदेन पर लगने वाले MDR शुल्क की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति ट्रांजैक्शन तय की गई है। उदाहरण के लिए, यदि कोई ग्राहक UPI से ₹2 लाख की खरीदारी करता है, तो प्रतिशत के हिसाब से शुल्क चाहे जितना भी बने, मर्चेंट को अधिकतम ₹300 ही चुकाने होंगे। यही गणित UPI को देश भर के छोटे-बड़े व्यापारियों के लिए सबसे किफायती और पसंदीदा डिजिटल भुगतान विकल्प बनाता है।

दिल्ली सरकार बनाएगी 10,000 छात्रों के लिए सुरक्षित हॉस्टल
सत्य निकेतन में हुए एक भीषण पीजी हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 10,000 नए हॉस्टल बेड बनाने का बड़ा फैसला किया है। ये हॉस्टल लड़के और लड़कियों दोनों के लिए होंगे और दिल्ली के किसी भी कॉलेज या यूनिवर्सिटी के छात्र इनका लाभ उठा सकेंगे।
सत्य निकेतन में हुए एक भीषण पीजी हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 10,000 नए हॉस्टल बेड बनाने का बड़ा फैसला किया है। ये हॉस्टल लड़के और लड़कियों दोनों के लिए होंगे और दिल्ली के किसी भी कॉलेज या यूनिवर्सिटी के छात्र इनका लाभ उठा सकेंगे।
सत्य निकेतन हादसे के बाद बड़ा कदम
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में बीते दिनों एक पीजी की इमारत गिरने से 7 बेकसूर लोगों की मौत हो गई थी। इस दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना ने राजधानी में छात्रों के रहने के लिए बने अवैध और असुरक्षित पीजी संस्थानों की पोल खोल कर रख दी थी। इस भयावह हादसे के बाद से ही लगातार यह मांग उठ रही थी कि छात्रों को सुरक्षित और किफायती आवास उपलब्ध कराया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की किसी भी अनहोनी को टाला जा सके।
मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान और योजना
इस गंभीर स्थिति का संज्ञान लेते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजधानी के छात्रों के लिए एक राहत भरा और कड़ा कदम उठाया है। सरकार ने तुरंत प्रभाव से 10,000 छात्रों के लिए आधुनिक और सुरक्षित हॉस्टल की सुविधा शुरू करने का ऐलान कर दिया है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन छात्र-छात्राओं को बेहतर आवास देना है जो दूर-दराज के इलाकों से आकर दिल्ली के शिक्षण संस्थानों में अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं।
सभी यूनिवर्सिटी और कॉलेजों के छात्रों को मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री ने इस योजना की रूपरेखा स्पष्ट करते हुए बताया है कि ये नए हॉस्टल लड़के और लड़कियों दोनों के लिए बनाए जाएंगे। इसके साथ ही, इस सुविधा का दायरा बेहद व्यापक रखा गया है, जिसके तहत दिल्ली के किसी भी यूनिवर्सिटी या कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र इन नई हॉस्टल सुविधाओं का पूरा लाभ उठा सकेंगे। इस पहल से छात्रों को महंगे और असुरक्षित निजी पीजी के चंगुल से राहत मिलने की पूरी उम्मीद है।
अवैध इमारतों पर सख्त कार्रवाई
सत्य निकेतन की घटना के तुरंत बाद प्रशासन ने शहर भर में अभियान तेज कर दिया है। हादसे के बाद कई अवैध और खतरनाक रूप से संचालित हो रही इमारतों को प्रशासन द्वारा सील कर दिया गया है। सरकार की इस सख्त कार्रवाई और नई हॉस्टल योजना से छात्रों की सुरक्षा को एक मजबूत कवच मिलने की उम्मीद है।

दिल्ली के पीजी बने मौत के साए का घर
दिल्ली नगर निगम के हालिया सर्वे में एक डरावनी सच्चाई सामने आई है, जिसके मुताबिक राजधानी के 99 प्रतिशत पीजी बिना फायर एनओसी के चल रहे हैं और केवल 30 प्रतिशत का ही बिल्डिंग प्लान स्वीकृत है। यह लापरवाही कभी भी किसी बड़े हादसे को दावत दे सकती है।
दिल्ली नगर निगम के हालिया सर्वे में एक डरावनी सच्चाई सामने आई है, जिसके मुताबिक राजधानी के 99 प्रतिशत पीजी बिना फायर एनओसी के चल रहे हैं और केवल 30 प्रतिशत का ही बिल्डिंग प्लान स्वीकृत है। यह लापरवाही कभी भी किसी बड़े हादसे को दावत दे सकती है।
सर्वे के चौंकाने वाले आंकड़े
दिल्ली नगर निगम द्वारा राजधानी में कुल 2,453 पीजी भवनों का एक व्यापक सर्वे किया गया था। इस जांच में जो तथ्य सामने आए, वे सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी हैं। पूरे सर्वे में सिर्फ 31 यानी महज 1.2 प्रतिशत पीजी के पास ही वैध फायर एनओसी मौजूद पाई गई। इसका मतलब साफ है कि लगभग शत-प्रतिशत पीजी बिना अग्निशमन सुरक्षा प्रमाणपत्र के धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं।
बिल्डिंग प्लान और स्थिरता की स्थिति
फायर एनओसी के अलावा निर्माण और मजबूती के मोर्चे पर भी स्थिति बेहद चिंताजनक है। सर्वे किए गए कुल भवनों में से केवल 726 पीजी यानी 30 प्रतिशत से भी कम का बिल्डिंग प्लान स्वीकृत पाया गया। इसके अतिरिक्त, स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केवल 8 पीजी भवनों के पास ही स्थिरता प्रमाण पत्र मौजूद है। नियमों को ताक पर रखकर चल रहे ये संस्थान छात्रों और कामकाजी युवाओं की जिंदगी के साथ सीधा खिलवाड़ कर रहे हैं।
हादसों से भी नहीं लिया सबक
राजधानी में सुरक्षा नियमों की अनदेखी का यह आलम तब है जब हाल ही में बड़े हादसे हो चुके हैं। बीते दिनों सत्य निकेतन इलाके में एक पीजी की जर्जर इमारत ढह जाने से सात बेकसूर लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। इसके बावजूद शहर के विभिन्न इलाकों में चल रहे इन पीजी संचालकों और प्रशासनिक सुस्ती के कारण नियमों का पालन नहीं कराया जा रहा है, जिससे हर समय किसी अनहोनी का खतरा मंडराता रहता है।

बाइकर को टक्कर मारने वाला बैंसला कार के आगे घुटनों पर बैठा
गुरुग्राम में महिला बाइकर शिवानी चौहान उर्फ सिया को कार से टक्कर मारने वाले कल्याण बैंसला को पुलिस ने गिरफ्तार करने के बाद उसकी कार के आगे घुटनों के बल बैठाया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
गुरुग्राम में महिला बाइकर शिवानी चौहान उर्फ सिया को कार से टक्कर मारने वाले कल्याण बैंसला को पुलिस ने गिरफ्तार करने के बाद उसकी कार के आगे घुटनों के बल बैठाया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
वायरल वीडियो और पुलिस कार्रवाई
गुरुग्राम की सड़कों पर हाल ही में हुई एक हैरान करने वाली घटना ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। महिला बाइकर शिवानी चौहान, जिन्हें सिया के नाम से भी जाना जाता है, उनकी बाइक को एक कार ने जोरदार टक्कर मार दी थी। इस मामले में मुख्य आरोपी कल्याण बैंसला को पुलिस ने धर दबोचा है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी को सबक सिखाते हुए उसी की कार के आगे घुटनों के बल बैठने पर मजबूर कर दिया। इस पूरी घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।
आरोपी कल्याण बैंसला की सफाई
इस पूरी कंट्रोवर्सी के बीच आरोपी कल्याण बैंसला ने अपनी सफाई में अजीबोगरीब बयान दिया है। उसने मीडिया और पुलिस के सामने दावा किया कि उसने महिला बाइकर शिवानी को जानबूझकर टक्कर नहीं मारी थी। बैंसला का कहना है कि यह हादसा था, किसी सोची-समझी साजिश या दुर्भावना के तहत नहीं किया गया था। हालांकि, पुलिस वायरल वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की गहराई से जांच कर रही है ताकि यह साफ हो सके कि असल सच्चाई क्या है।
सड़क सुरक्षा और कानून का शिकंजा
इस घटना ने एक बार फिर गुरुग्राम की सड़कों पर महिला सुरक्षा और ड्राइविंग सेंस पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार बढ़ते सड़क हादसों और रफ ड्राइविंग के मामलों के बीच पुलिस की यह सख्त कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है। वीडियो सामने आने के बाद आम जनता सड़क पर अनुशासन बनाए रखने और नियमों का पालन करने की मांग कर रही है। प्रशासन भी ऐसे मामलों में किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं दिखाई दे रहा है।
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