
UNSC में भारत की भूमिका का चीन-रूस ने किया समर्थन
ब्रिक्स घोषणापत्र में चीन और रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत और ब्राज़ील की बड़ी भूमिका का पुरजोर समर्थन किया है। ब्रिक्स देशों ने संयुक्त राष्ट्र में सुधारों के ज़रिए ग्लोबल साउथ की आवाज़ को वैश्विक मंच पर मज़बूत करने पर विशेष ज़ोर दिया है।
खबर का निचोड़:
ब्रिक्स घोषणापत्र में चीन और रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत और ब्राज़ील की बड़ी भूमिका का पुरजोर समर्थन किया है। ब्रिक्स देशों ने संयुक्त राष्ट्र में सुधारों के ज़रिए ग्लोबल साउथ की आवाज़ को वैश्विक मंच पर मज़बूत करने पर विशेष ज़ोर दिया है।
ब्रिक्स घोषणापत्र में कूटनीतिक कमान और भारत का कद
हाल ही में सामने आए ब्रिक्स घोषणापत्र ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति के गलियारों में हलचल तेज कर दी है। इस महत्वपूर्ण दस्तावेज में चीन और रूस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के भीतर भारत और ब्राज़ील की बड़ी भूमिका की आकांक्षाओं के लिए अपने समर्थन को खुलकर दोहराया है। यह कूटनीतिक घटनाक्रम वैश्विक पटल पर भारत के लगातार बढ़ते प्रभाव और मजबूत होती स्थिति का स्पष्ट प्रमाण है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के रूप में भारत की दावेदारी अब ग्लोबल मंच पर अधिक मुखर होती जा रही है।
सुरक्षा परिषद जैसी वैश्विक निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था में सुधार आज के समय की सबसे बड़ी मांग बन चुके हैं। ऐसे में दो बड़ी महाशक्तियों द्वारा भारत के पक्ष में आधिकारिक रूप से समर्थन जताना इस बात को साबित करता है कि वैश्विक व्यवस्था में बदलाव की सुई अब भारत के पक्ष में घूम रही है। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जानकारों के अनुसार, यह समर्थन भविष्य में भारत को वैश्विक फैसले लेने की प्रक्रिया में मुख्य केंद्र में लाने का मार्ग प्रशस्त करेगा।
ग्लोबल साउथ की आवाज़ और वैश्विक आर्थिक सुधार
इस सम्मेलन के दौरान ब्रिक्स देशों ने सिर्फ राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक खुद को सीमित नहीं रखा है। घोषणापत्र में यूएन सुधारों के ज़रिए ग्लोबल साउथ की आवाज़ को अधिक ताकतवर और प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। विकासशील और कमजोर अर्थव्यवस्था वाले देशों के हितों को सुरक्षित रखना इस मंच की प्राथमिकताओं में शामिल है। इससे यह साफ झलकता है कि ब्रिक्स केवल कुछ चुनिंदा देशों का समूह नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के दक्षिणी गोलार्ध की नुमाइंदगी करने वाला एक सशक्त संगठन बन चुका है।
इसके अतिरिक्त, वैश्विक आर्थिक शासन को पूरी तरह से मजबूत, पारदर्शी और समावेशी बनाने के लिए ब्रिक्स ने अपनी अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया है। बदलते वक्त के साथ आर्थिक मोर्चे पर आ रही चुनौतियों से निपटने के लिए सदस्य देश आपसी सहयोग को नई ऊंचाइयां देने के लिए तैयार हैं। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में सुधार की यह मांग वैश्विक अर्थव्यवस्था को संतुलित करने में मील का पत्थर साबित होगी।
एकतरफा टैरिफ और व्यापारिक बाधाओं पर चिंता
वैश्विक व्यापार को सुचारू रूप से चलाने के रास्ते में आ रही बाधाओं पर भी ब्रिक्स मंच पर खुलकर बात हुई है। ब्रिक्स देशों ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को नुकसान पहुंचाने वाले एकतरफा टैरिफ और नॉन-टैरिफ उपायों पर अपनी बेहद गंभीर चिंता जताई है। इस तरह की संरक्षणवादी नीतियां वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को कमजोर करती हैं और विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर डालती हैं।
व्यापारिक नियमों को निष्पक्ष बनाए रखने और संरक्षणवाद के खिलाफ एकजुट होने का यह संदेश वैश्विक व्यापारिक समुदाय के लिए एक बड़ा संकेत है। इन तमाम मुद्दों पर ब्रिक्स का यह साझा रुख आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यस्था की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।

शी जिनपिंग के शाही बोइंग-747 विमान के अनसुने राज़
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स समिट के लिए खास बोइंग-747 विमान से भारत पहुंचे हैं। चार इंजन वाले इस चौड़े धड़ के विमान में अत्याधुनिक सुरक्षा और मीटिंग रूम जैसी सुविधाएं हैं। साल 2016-2017 में इसे विशेष रूप से राष्ट्रपति के इस्तेमाल के लिए तैयार किया गया था।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ब्रिक्स समिट के लिए खास बोइंग-747 विमान से भारत पहुंचे हैं। चार इंजन वाले इस चौड़े धड़ के विमान में अत्याधुनिक सुरक्षा और मीटिंग रूम जैसी सुविधाएं हैं। साल 2016-2017 में इसे विशेष रूप से राष्ट्रपति के इस्तेमाल के लिए तैयार किया गया था।
शी जिनपिंग के भारत दौरे ने कूटनीतिक हलकों में काफी सुर्खियां बटोरी हैं, लेकिन उनके सफर का सबसे बड़ा आकर्षण उनका यह शानदार और अत्याधुनिक विमान रहा है। चीनी राष्ट्रपति जिस बोइंग-747 विमान से ब्रिक्स समिट में हिस्सा लेने भारत आए हैं, वह किसी उड़ते हुए कमांड सेंटर से कम नहीं है। इस विमान की बनावट और इसकी तकनीकी खूबियां इसे दुनिया के सबसे सुरक्षित और गोपनीय विमानों की श्रेणी में रखती हैं।
विमान की बनावट और ताकत
यह एक चौड़े धड़ वाला विशाल विमान है जिसमें कुल चार शक्तिशाली इंजन फिट किए गए हैं। लंबी दूरी की उड़ानों को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए इस विमान के ढांचे को विशेष रूप से डिजाइन किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस शानदार बोइंग-747 की क्रूज़ स्पीड लगभग 900 किलोमीटर प्रति घंटे के आसपास है। यह तेज गति इसे बेहद कम समय में एक देश से दूसरे देश तक सुरक्षित पहुंचाने में मददगार साबित होती है।
गोपनीय इंटीरियर और वीआईपी सुविधाएं
इस विमान का पूरा आंतरिक हिस्सा यानी इंटीरियर पूरी तरह सार्वजनिक नहीं किया गया है, जो इसकी सुरक्षा का एक अनिवार्य पहलू है। हालांकि, इसके भीतर राष्ट्राध्यक्ष की जरूरतों के अनुसार सभी आवश्यक और उच्चस्तरीय सुविधाएं मौजूद हैं। विमान के अंदर एक प्राइवेट ऑफिस, एक प्रोफेशनल मीटिंग रूम और एक आरामदायक पर्सनल एरिया बनाया गया है। इन सुविधाओं के चलते राष्ट्रपति हवा में भी अपने सरकारी कामकाज और अहम बैठकों को सुचारू रूप से जारी रख सकते हैं।
अत्याधुनिक सेफ कम्युनिकेशन सिस्टम
दुनिया के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शुमार शी जिनपिंग के इस विमान में सुरक्षा के सर्वोत्कृष्ट इंतजाम किए गए हैं। इस विमान की सबसे बड़ी खूबी इसमें मौजूद सेफ कम्युनिकेशन की व्यवस्था है। इसके माध्यम से राष्ट्रपति दुनिया के किसी भी कोने में बैठे अधिकारियों या राष्ट्राध्यक्षों से सुरक्षित और एनक्रिप्टेड बातचीत कर सकते हैं। हर वक्त संपर्क में रहने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए इसमें हाई-टेक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।
राष्ट्रपति के लिए विशेष बदलाव
इस विमान को रातोंरात तैयार नहीं किया गया था, बल्कि चीन ने साल 2016-2017 के दौरान इसे अपने राष्ट्रपति के आधिकारिक इस्तेमाल के लिए मॉडिफाई करवाया था। एक आम कमर्शियल विमान को आधुनिक जरूरतों और वीआईपी सुरक्षा मानकों के अनुरूप ढालने के लिए इसमें व्यापक तकनीकी बदलाव किए गए थे। आज यह बोइंग-747 विमान चीन की बढ़ती आर्थिक और सामरिक ताकत का एक जीवंत प्रतीक बन चुका है।

मोदी-जिनपिंग मुलाकात: एक-दूसरे की ताकत से आगे बढ़ेंगे देश
ब्रिक्स समिट से इतर शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच अहम द्विपक्षीय बैठक हुई। इस दौरान जिनपिंग ने कहा कि दोनों देश एक-दूसरे की खूबियों का लाभ उठाकर साझा विकास हासिल कर सकते हैं।
ब्रिक्स समिट से इतर शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच अहम द्विपक्षीय बैठक हुई। इस दौरान जिनपिंग ने कहा कि दोनों देश एक-दूसरे की खूबियों का लाभ उठाकर साझा विकास हासिल कर सकते हैं।
ब्रिक्स समिट के इतर द्विपक्षीय बैठक
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कूटनीति के मोर्चे पर शनिवार को एक अहम घटनाक्रम देखने को मिला। ब्रिक्स समिट से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक आयोजित की गई। इस उच्चस्तरीय मुलाकात ने वैश्विक राजनीति में खासी सुर्खियां बटोरी हैं।
साझा विकास के लिए सहयोग जरूरी
इस वार्ता के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और चीन एक-दूसरे की ताकत और खूबियों से सीख सकते हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि दोनों देश एक-दूसरे की क्षमताओं का लाभ उठाकर साझा विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। यह आपसी सहयोग दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिया
शी जिनपिंग ने स्पष्ट किया कि चीन भारत के साथ अपने संबंधों को केवल तात्कालिक हितों के चश्मे से नहीं देखता है। बीजिंग नई दिल्ली के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को एक रणनीतिक और पूरी तरह से दीर्घकालिक नजरिए से परखता है। यह वैचारिक दृष्टिकोण भविष्य में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद को और अधिक प्रगाढ़ बना सकता है।

ब्रिक्स देशों ने डोनाल्ड ट्रम्प के एकतरफा टैरिफ को नकारा
ब्रिक्स समिट के दौरान सदस्य देशों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए एकतरफा टैरिफ पर गहरी आपत्ति जताई है। संयुक्त बयान जारी कर इसे वैश्विक व्यापार नियमों के विपरीत और अवैध करार दिया गया है।
ब्रिक्स समिट के दौरान सदस्य देशों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए एकतरफा टैरिफ पर गहरी आपत्ति जताई है। संयुक्त बयान जारी कर इसे वैश्विक व्यापार नियमों के विपरीत और अवैध करार दिया गया है।
ब्रिक्स समिट में बड़ा हमला
हाल ही में संपन्न हुई ब्रिक्स समिट में वैश्विक व्यापार को लेकर एक कड़ा रुख देखने को मिला है। सदस्य देशों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा उठाए गए कदमों पर खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। सम्मेलन के दौरान जारी किए गए संयुक्त बयान में साफ तौर पर कहा गया है कि किसी भी देश द्वारा थोपे जाने वाले एकतरफा टैरिफ वैश्विक आर्थिक व्यवस्था के लिए नुकसानदेह हैं।
अमेरिकी नीतियों से बढ़ता तनाव
डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन द्वारा भारत समेत दुनिया के कई प्रमुख देशों पर भारी-भरकम टैरिफ लगाए गए हैं। इस तरह के फैसलों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापारिक समीकरणों को बुरी तरह प्रभावित किया है। ब्रिक्स देशों का मानना है कि इस प्रकार के दबाव वाले कदम आपसी व्यापार को कमजोर करते हैं और देशों के बीच असहजता बढ़ाते हैं।
डब्ल्यूटीओ नियमों की अनदेखी
ब्रिक्स मंच से यह बात जोर देकर उठाई गई कि अमेरिका की यह नीतियां विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के बिल्कुल अनुरूप नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय व्यापार के स्थापित कायदों की अनदेखी करते हुए उठाए गए ये कदम वैश्विक बाजार में अनिश्चितता पैदा कर रहे हैं। सदस्य देशों ने इन अवैध उपायों को पूरी तरह से खत्म करने की मांग की है।
सामूहिक विरोध का संदेश
इस समिट के दौरान तमाम देशों ने वैश्विक स्तर पर एकजुटता का कड़ा संदेश दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति के फैसलों के खिलाफ इस तरह का सामूहिक प्रतिरोध अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और व्यापारिक वार्ताओं के भविष्य को तय करने में एक बड़ा मोड़ साबित हो रहा है।

Zomato का नया झटका: कैश ऑन डिलीवरी पर वसूला जा रहा अतिरिक्त चार्ज
ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म ज़ोमैटो ने ग्राहकों को एक और झटका दिया है। कंपनी ने कैश ऑन डिलीवरी (COD) ऑर्डर्स पर 'पे ऑन डिलीवरी फीस' नाम से नया शुल्क लागू कर दिया है। इसके तहत ग्राहकों को ₹5 से ₹20 तक अतिरिक्त भुगतान करना होगा। यह चार्ज प्लेटफॉर्म और पैकेजिंग फीस से अलग है।
खबर का निचोड़
ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म ज़ोमैटो ने ग्राहकों को एक और झटका दिया है। कंपनी ने कैश ऑन डिलीवरी (COD) ऑर्डर्स पर 'पे ऑन डिलीवरी फीस' नाम से नया शुल्क लागू कर दिया है। इसके तहत ग्राहकों को ₹5 से ₹20 तक अतिरिक्त भुगतान करना होगा। यह चार्ज प्लेटफॉर्म और पैकेजिंग फीस से अलग है।
जेब ढीली करने को हो जाइए तैयार
अगर आप भी ज़ोमैटो से खाना मंगाते समय कैश ऑन डिलीवरी विकल्प चुनते हैं, तो अब आपका बिल थोड़ा और भारी होने वाला है। कंपनी ने खामोशी से कैश ऑन डिलीवरी यानी सीओडी ऑर्डर्स पर एक नया सर्विस चार्ज जोड़ना शुरू कर दिया है। इसे 'पे ऑन डिलीवरी फीस' नाम दिया गया है। यानी अब डिलीवरी बॉय को हाथ में कैश थमाने की सुविधा मुफ़्त नहीं रहेगी।
कितना देना होगा अतिरिक्त चार्ज?
ज़ीरो कैश हैंडलिंग के इस दौर में ज़ोमैटो का यह कदम ग्राहकों के लिए सरप्राइज लेकर आया है। कंपनी ऐप पर सीओडी का चयन करने वाले ग्राहकों से प्रति ऑर्डर ₹5 से लेकर ₹20 तक का अतिरिक्त शुल्क वसूल रही है। ऐप यूजर्स की मानें तो अधिकांश ऑर्डर्स पर फिलहाल ₹5 का चार्ज दिखाया जा रहा है, लेकिन कुछ विशिष्ट मामलों और महंगे ऑर्डर्स पर यह फीस ₹7 से ₹20 तक पहुंच जाती है।
पुराने चार्जेस से अलग है यह नई फीस
ध्यान देने वाली बात यह है कि यह नई फीस ज़ोमैटो के मौजूदा प्लेटफ़ॉर्म चार्ज, डिलीवरी चार्ज, पैकेजिंग फीस और GST के अतिरिक्त ली जा रही है। इसका मतलब है कि भोजन की वास्तविक कीमत के ऊपर लगने वाले हिडन चार्जेस की सूची अब और लंबी हो गई है। डिजिटल पेमेंट करने वाले यूजर्स फिलहाल इस नए शुल्क से मुक्त हैं, केवल कैश पेमेंट चुनने वालों पर ही यह फीस लागू की जा रही है।
डिजिटल भुगतान को बढ़ावा या कमाई का नया जरिया?
ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स क्षेत्र में कैश ऑन डिलीवरी ऑर्डर्स को हैंडल करना कंपनियों के लिए महंगा और जोखिम भरा साबित होता है। कैश कलेक्शन, चेंज का झंझट और डिलीवरी फेल्योर जैसी चुनौतियां इसमें शामिल होती हैं। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि ज़ोमैटो का यह कदम ग्राहकों को डिजिटल पेमेंट की तरफ शिफ्ट करने और कंपनी के ऑपरेटिंग कॉस्ट को कम करने की रणनीति का हिस्सा है। हालांकि, बार-बार बढ़ रहे अतिरिक्त शुल्कों से नियमित ग्राहकों के बीच नाराजगी भी देखी जा रही है।
Delight News
निष्पक्ष पत्रकारिता, सटीक विश्लेषण
Delight News परिवार से जुड़ें
ताजा खबरों के सबसे तेज नोटिफिकेशन और शानदार यूज़र इंटरफेस के साथ देश-दुनिया के लाइव अपडेट्स सीधे अपने mobile पर पाने के लिए हमारा Delight News Android App डाउनलोड करें।
📥 Download Android App