
इंस्टाग्राम का बड़ा बदलाव: प्रोफाइल ग्रिड में चमकेंगी आपकी टैग्ड फोटोज़
इंस्टाग्राम ने यूजर्स के प्रोफाइल अनुभव को बेहतर बनाने के लिए एक नया और खास फीचर पेश किया है। अब यूजर उन फोटो और पोस्ट को भी अपनी मुख्य प्रोफाइल ग्रिड में जोड़ सकेंगे जिनमें उन्हें किसी अन्य यूजर द्वारा टैग किया गया है। इससे आपकी इंस्टाग्राम प्रोफाइल पहले से ज्यादा व्यक्तिगत और आकर्षक बनेगी।
खबर का सार
इंस्टाग्राम ने यूजर्स के प्रोफाइल अनुभव को बेहतर बनाने के लिए एक नया और खास फीचर पेश किया है। अब यूजर उन फोटो और पोस्ट को भी अपनी मुख्य प्रोफाइल ग्रिड में जोड़ सकेंगे जिनमें उन्हें किसी अन्य यूजर द्वारा टैग किया गया है। इससे आपकी इंस्टाग्राम प्रोफाइल पहले से ज्यादा व्यक्तिगत और आकर्षक बनेगी।
नया फीचर: प्रोफाइल ग्रिड में टैग्ड पोस्ट्स की एंट्री
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम लगातार अपने यूजर्स के अनुभव को नया और दिलचस्प बनाने के लिए नए-नए फीचर्स लाता रहता है। इसी कड़ी में कंपनी ने एक नया अपडेट पेश किया है जो यूजर्स को अपनी प्रोफाइल को नए सिरे से सजाने की आजादी देगा। अब तक यूजर्स की मुख्य प्रोफाइल ग्रिड में केवल वही फोटो और वीडियो दिखते थे जो उन्होंने खुद पोस्ट किए होते थे। लेकिन अब इस नए अपडेट के बाद, यूजर्स उन कंटेंट को भी अपने मुख्य प्रोफाइल ग्रिड में जगह दे सकेंगे जिनमें उन्हें किसी दूसरे व्यक्ति ने टैग किया है।
अब तक कैसा था इंस्टाग्राम का टैगिंग सिस्टम
अगर अब तक के सिस्टम की बात करें, तो जब भी कोई यूजर आपको किसी फोटो या वीडियो में टैग करता था, तो वह पोस्ट आपकी मुख्य प्रोफाइल ग्रिड का हिस्सा नहीं बनती थी। वह पोस्ट आपकी प्रोफाइल के एक अलग 'Tagged' सेक्शन में दिखाई देती थी। यदि कोई यूजर आपकी प्रोफाइल पर आता था, तो उसे आपके द्वारा टैग किए गए कंटेंट को देखने के लिए अलग टैब पर क्लिक करना पड़ता था। इस व्यवस्था के कारण कई बेहतरीन फोटोज़ और यादें आपकी मुख्य प्रोफाइल पर नजर नहीं आती थीं।
प्रोफाइल को पर्सनलाइज़ करना हुआ आसान
इस नए अपडेट के आने से यूजर्स अपनी प्रोफाइल को अधिक पर्सनलाइज़ और क्यूरेट कर सकेंगे। अक्सर ऐसा होता है कि दोस्तों या सहकर्मियों द्वारा क्लिक की गई और पोस्ट की गई तस्वीरों में आप ज्यादा बेहतर दिखते हैं या वे यादें आपके लिए बेहद खास होती हैं। अब आप उन सभी खास पलों को बिना दोबारा अपलोड किए सीधे अपनी मुख्य ग्रिड में डिस्प्ले कर सकते हैं। यह फीचर कंटेंट क्रिएटर्स और आम यूजर्स दोनों को अपनी प्रोफाइल की ओवरऑल थीम को मेंटेन करने और उसे नया लुक देने की सुविधा प्रदान करता है।
यूजर्स के पास रहेगा पूरा कंट्रोल
इंस्टाग्राम का यह नया अपडेट यूजर्स की प्राइवेसी और पसंद का पूरा ध्यान रखता है। प्रोफाइल ग्रिड में टैग्ड पोस्ट को जोड़ना पूरी तरह से यूजर की इच्छा पर निर्भर करेगा। इसका मतलब यह है कि टैग की गई हर फोटो अपने आप आपकी मुख्य प्रोफाइल ग्रिड में नहीं जाएगी। यूजर्स खुद यह तय कर सकेंगे कि वे किस फोटो को अपनी मेन ग्रिड में दिखाना चाहते हैं और किसे केवल टैग्ड सेक्शन तक ही सीमित रखना चाहते हैं। इससे आपकी प्रोफाइल का कंट्रोल पूरी तरह से आपके हाथों में रहेगा।

सावधान! आपके फोन से OTP और वॉट्सऐप चैट चुरा रहा यह खतरनाक मैलवेयर
साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं ने 'मैनटैक्स ओटैक्स' नामक एक बेहद खतरनाक नए एंड्रॉयड मैलवेयर की पहचान की है। यह मैलवेयर यूजर्स के फोन से ओटीपी चुराने, वॉट्सऐप और टेलीग्राम मैसेज पढ़ने, स्क्रीन रिकॉर्ड करने और कैमरे पर कब्जा जमाने में सक्षम है। यह मुख्य रूप से पुराने एंड्रॉयड वर्ज़न को निशाना बना रहा है।
खबर का निचोड़
साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं ने 'मैनटैक्स ओटैक्स' नामक एक बेहद खतरनाक नए एंड्रॉयड मैलवेयर की पहचान की है। यह मैलवेयर यूजर्स के फोन से ओटीपी चुराने, वॉट्सऐप और टेलीग्राम मैसेज पढ़ने, स्क्रीन रिकॉर्ड करने और कैमरे पर कब्जा जमाने में सक्षम है। यह मुख्य रूप से पुराने एंड्रॉयड वर्ज़न को निशाना बना रहा है।
मैलवेयर का हमला और जासूसी
डिजिटल दुनिया में सुरक्षा को सेंध लगाने वाला एक नया खतरा सामने आया है। साइबर सिक्योरिटी रिसर्चर्स ने 'मैनटैक्स ओटैक्स' (Mantax Otax) नाम के एक खतरनाक एंड्रॉयड मैलवेयर की चेतावनी जारी की है। यह सिर्फ सामान्य वायरस नहीं है, बल्कि आपके स्मार्टफोन को पूरी तरह से हैकर्स के नियंत्रण में देने वाला एक डिजिटल हथियार है।
यह मैलवेयर यूजर की सहमति के बिना डिवाइस में प्रवेश करता है और बैकग्राउंड में चुपचाप काम करना शुरू कर देता है। एक बार फोन में एक्टिव होने के बाद यह वित्तीय लेनदेन के लिए आने वाले वन-टाइम पासवर्ड (OTP) को तुरंत चुरा लेता है, जिससे हैकर्स आसानी से आपके बैंक खातों तक पहुंच बना सकते हैं।
वॉट्सऐप और टेलीग्राम पर सीधी नजर
मैनटैक्स ओटैक्स मैलवेयर केवल बैंक डेटा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपकी निजी जिंदगी में भी तांक-झांक करता है। यह वॉट्सऐप और टेलीग्राम जैसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स पर होने वाली आपकी निजी बातचीत को आसानी से ट्रैक और रिकॉर्ड कर सकता है।
इसके अलावा, यह मैलवेयर फोन की स्क्रीन को चुपके से रिकॉर्ड कर सकता है और यूजर की जानकारी के बिना फोन के कैमरे को भी एक्सेस कर सकता है। यानी आप फोन पर क्या देख रहे हैं या आपके आसपास क्या चल रहा है, इस पर हैकर्स लगातार नजर रख सकते हैं।
इस तरह फैलता है यह वायरस
हैकर्स इस मैलवेयर को फैलाने के लिए बेहद चालाक तरीके अपना रहे हैं। यह मुख्य रूप से फर्जी और संदेहास्पद थर्ड-पार्टी एपीके (APK) फाइलों, लुभावने फिशिंग लिंक्स और विभिन्न मैसेजिंग ऐप्स के माध्यम से भेजे गए मैसेज के जरिए डिवाइस में जगह बनाता है।
अक्सर यूजर्स किसी अनजान लिंक पर क्लिक कर बैठते हैं या प्ले स्टोर के बाहर से कोई ऐप डाउनलोड कर लेते हैं, जिससे यह मैलवेयर सिस्टम में इंस्टॉल हो जाता है।
कौन से फोन हैं सबसे ज्यादा खतरे में
सुरक्षा विशेषज्ञों के विश्लेषण से पता चला है कि यह मैलवेयर मुख्य रूप से उन स्मार्टफोन्स को निशाना बना रहा है जो एंड्रॉयड 9 या उससे पुराने ऑपरेटिंग सिस्टम पर चल रहे हैं। पुराने सिस्टम में लेटेस्ट सिक्योरिटी पैच न होने के कारण हैकर्स के लिए इन्हें हैक करना बेहद आसान हो जाता है।
हालांकि नए एंड्रॉयड वर्ज़न वाले यूजर्स को भी सतर्क रहने की सख्त जरूरत है, क्योंकि हैकर्स लगातार अपने तरीकों को अपग्रेड कर रहे हैं।

धातु बाज़ार में रौनक: स्टील, कॉपर और एल्युमीनियम की कीमतों में जबरदस्त उछाल
ग्लोबल और घरेलू मांग में आई तेज़ी के कारण अगस्त महीने में मेटल बाज़ार ने शानदार वापसी की है। स्टील, कॉपर, ज़िंक और एल्युमीनियम के दामों में आई इस बढ़त ने मेटल कंपनियों की कमाई और ऑपरेटिंग मार्जिन में सुधार की नई उम्मीदें जगा दी हैं।
खबर का निचोड़
ग्लोबल और घरेलू मांग में आई तेज़ी के कारण अगस्त महीने में मेटल बाज़ार ने शानदार वापसी की है। स्टील, कॉपर, ज़िंक और एल्युमीनियम के दामों में आई इस बढ़त ने मेटल कंपनियों की कमाई और ऑपरेटिंग मार्जिन में सुधार की नई उम्मीदें जगा दी हैं।
बाज़ार में लौटी तेज़ी: मेटल सेक्टर में नई जान
अगस्त का महीना भारतीय और वैश्विक धातु बाज़ार के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ है। लंबे समय से सुस्ती झेल रहे इस सेक्टर में अचानक आई खरीदारी की लहर ने बाज़ार की तस्वीर बदल दी है। बुनियादी ढांचे के विकास, औद्योगिक उत्पादन और मजबूत मांग ने धातुओं की कीमतों को एक नई ऊंचाई पर पहुंचा दिया है।
स्टील की कीमतों में बड़ा उछाल
घरेलू बाज़ार में सबसे ज़्यादा असर स्टील की कीमतों पर देखने को मिला है। निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाले रीबार (Rebar) की कीमतों में करीब 10% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके साथ ही, ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए बेहद अहम माने जाने वाले हॉट-रोल्ड कॉइल (HRC) के दाम भी लगभग 2% तक चढ़ गए हैं। इस बढ़त ने यह साफ कर दिया है कि देश के भीतर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में गति आ रही है।
बेस मेटल्स में भी मजबूत रिकवरी
केवल स्टील ही नहीं, बल्कि गैर-लोह धातुओं (Non-Ferrous Metals) ने भी इस तेज़ी में पूरा साथ दिया है। एल्युमीनियम, कॉपर (तांबा) और ज़िंक जैसी प्रमुख धातुओं के दामों में दर्ज की गई बढ़त ने बाज़ार का मूड पूरी तरह सकारात्मक बना दिया है। वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन की स्थिति और औद्योगिक मांग में आई मजबूती के चलते इन धातुओं के भाव लगातार मजबूत हो रहे हैं।
कंपनियों की कमाई और मार्जिन में सुधार के संकेत
धातुओं की कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी का सीधा फायदा मेटल कंपनियों को मिलता दिख रहा है। पिछले कुछ समय से दबाव झेल रही कंपनियों के लिए यह तेज़ी एक राहत की खबर लेकर आई है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाली तिमाहियों में मेटल कंपनियों की वित्तीय स्थिति और ऑपरेटिंग मार्जिन में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा, जिससे इस पूरे सेक्टर की लाभप्रदता बढ़ेगी।
वैश्विक और घरेलू मांग का दोहरा असर
इस तेज़ी के पीछे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आई मांग का सबसे बड़ा हाथ है। भारत में सरकार द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर पर दिए जा रहे जोर के अलावा अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में भी गतिविधियों ने रफ़्तार पकड़ी है। मांग और आपूर्ति के इस संतुलन ने धातु बाज़ार को एक नई दिशा दी है, जिससे आने वाले समय में भी इस सेक्टर में मजबूती बने रहने के आसार हैं।

स्विगी डिलीवरी पार्टनर्स ने फाइल किया ITR, ₹6.5 करोड़ रिफंड क्लेम
देशभर के 50,000 से अधिक स्विगी डिलीवरी पार्टनर्स ने अपना इनकम टैक्स रिटर्न दर्ज करके वित्तीय जागरूकता की नई मिसाल कायम की है। गुरुवार को स्विगी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इन पार्टनर्स ने कुल ₹6.5 करोड़ के टैक्स रिफंड का दावा किया है। इनमें से एक-तिहाई से ज्यादा लोग पहली बार टैक्स फाइल कर रहे थे।
खबर का निचोड़
देशभर के 50,000 से अधिक स्विगी डिलीवरी पार्टनर्स ने अपना इनकम टैक्स रिटर्न दर्ज करके वित्तीय जागरूकता की नई मिसाल कायम की है। गुरुवार को स्विगी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इन पार्टनर्स ने कुल ₹6.5 करोड़ के टैक्स रिफंड का दावा किया है। इनमें से एक-तिहाई से ज्यादा लोग पहली बार टैक्स फाइल कर रहे थे।
गिग इकोनॉमी में टैक्स रिफंड की बड़ी क्रांति
भारतीय गिग इकोनॉमी और असंगठित क्षेत्र के वर्कफ़ोर्स को लेकर लंबे समय से यह धारणा रही है कि वे मुख्यधारा की वित्तीय प्रणालियों से दूर रहते हैं। हालांकि, स्विगी के डिलीवरी पार्टनर्स ने इस सोच को पूरी तरह बदल दिया है। 50,000 से अधिक डिलीवरी बॉयज़ और राइडर्स का एक साथ इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करना इस क्षेत्र में आ रहे बड़े वित्तीय बदलाव का संकेत है।
कंपनी की ओर से गुरुवार को साझा की गई जानकारी ने सभी को हैरान कर दिया है। डिलीवरी पार्टनर्स ने केवल अपना रिटर्न ही दाखिल नहीं किया, बल्कि सरकारी खजाने में जमा अपने अतिरिक्त टैक्स का कुल ₹6.5 करोड़ का रिफंड भी क्लेम किया है। यह कदम दिखाता है कि भारत का गिग वर्कर अब अपनी मेहनत की कमाई के एक-एक रुपये और अपने वित्तीय अधिकारों को लेकर जागरूक हो रहा है।
पहली बार ITR भरने वालों की बड़ी संख्या
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण और सकारात्मक पहलू यह है कि ITR भरने वालों में से एक-तिहाई से अधिक डिलीवरी पार्टनर्स ऐसे थे, जिन्होंने जिंदगी में पहली बार अपना टैक्स रिटर्न फाइल किया है। यह आंकड़ा इस बात का सीधा प्रमाण है कि औपचारिक अर्थव्यवस्था और टैक्स सिस्टम का दायरा अब तेजी से बढ़ रहा है।
अक्सर देखा जाता है कि टीडीएस (TDS) कटने के बावजूद जानकारी के अभाव में छोटे आय वर्ग के लोग अपना रिफंड क्लेम नहीं कर पाते हैं। स्विगी के इस कदम और डिलीवरी पार्टनर्स की सक्रियता से यह साफ हो गया है कि सही मार्गदर्शन मिलने पर देश का युवा अपनी वित्तीय स्थिति को सुधारने के लिए पूरी तरह तैयार है।
गिग वर्क्स का वित्तीय समावेशन और भविष्य
यह उपलब्धि सिर्फ टैक्स फाइल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश में गिग वर्क्स के बढ़ते वित्तीय समावेशन को भी दर्शाती है। ITR दाखिल करने से इन डिलीवरी पार्टनर्स के लिए भविष्य में बैंक लोन, क्रेडिट कार्ड और अन्य वित्तीय सुविधाएं प्राप्त करना काफी आसान हो जाएगा।
ब्लिंकिट, जोमैटो और स्विगी जैसी कंपनियों के लाखों डिलीवरी पार्टनर्स रोज सड़कों पर पसीना बहाते हैं। ऐसे में इतने बड़े पैमाने पर टैक्स रिटर्न फाइल होना इस पूरे सेक्टर को अधिक संगठित, पारदर्शी और सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।

RBI दे सकता है झटका: अक्टूबर से महंगी हो सकती है EMI
अक्टूबर में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रेपो रेट में बढ़ोतरी का फैसला ले सकता है। SBI रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, RBI महंगाई पर लगाम लगाने के लिए अक्टूबर और दिसंबर में 25-25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर सकता है। इससे फ्लोटिंग रेट वाले होम और ऑटो लोन की EMI बढ़ना तय माना जा रहा है।
अक्टूबर में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) रेपो रेट में बढ़ोतरी का फैसला ले सकता है। SBI रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, RBI महंगाई पर लगाम लगाने के लिए अक्टूबर और दिसंबर में 25-25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर सकता है। इससे फ्लोटिंग रेट वाले होम और ऑटो लोन की EMI बढ़ना तय माना जा रहा है।
त्योहारी सीजन में आम जनता पर बढ़ेगा वित्तीय बोझ
आने वाले त्योहारी सीजन में भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) का एक फैसला आम जनता की जेब पर सीधा असर डाल सकता है। एसबीआई रिसर्च की एक हालिया रिपोर्ट ने संकेत दिया है कि केंद्रीय बैंक रेपो रेट में बढ़ोतरी का सिलसिला फिर से शुरू कर सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, SBI रिसर्च ने RBI को आगामी अक्टूबर की समीक्षा बैठक में रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट (bps) बढ़ाने की सिफारिश की है। इतना ही नहीं, रिपोर्ट में यह अनुमान भी जताया गया है कि दिसंबर की बैठक में भी 25 bps की एक और बढ़ोतरी हो सकती है। अगर यह अनुमान सच साबित होता है, तो साल के अंत तक रेपो रेट में कुल 50 बेसिस पॉइंट यानी 0.50% की वृद्धि दर्ज की जाएगी।
लोन लेने वालों पर क्या होगा सीधा असर?
केंद्रीय बैंक की ओर से रेपो रेट बढ़ाए जाने का सबसे पहला और सीधा असर बैंक लोन की ब्याज दरों पर पड़ता है। देश के लगभग सभी कमर्शियल बैंक रिजर्व बैंक के रेपो रेट से अपने लोन की ब्याज दरों को जोड़कर रखते हैं।
यदि RBI ब्याज दरों में इजाफा करता है, तो बैंक भी अपने फ्लोटिंग रेट वाले कर्जों की ब्याज दरों में तुरंत बढ़ोतरी करेंगे। इसका सीधा मतलब यह है कि जिन लोगों ने होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन ले रखा है, उनकी मासिक किश्त (EMI) बढ़ जाएगी। जो लोग नया लोन लेने की योजना बना रहे हैं, उन्हें भी पहले की तुलना में अधिक ब्याज दर पर कर्ज मिलेगा।
महंगाई पर नियंत्रण पाने के लिए सख्त मौद्रिक नीति
वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि देश में महंगाई की स्थिति और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं को देखते हुए यह कदम उठाया जा सकता है। जब बाजार में नकदी का प्रवाह अधिक होता है, तो महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है। रेपो रेट में बढ़ोतरी के जरिए केंद्रीय बैंक बाजार से अतिरिक्त नकदी को खींचने और मांग को नियंत्रित करने का प्रयास करता है।
एसबीआई रिसर्च की इस रिपोर्ट ने उन करोड़ों कर्जदारों की चिंता बढ़ा दी है जो पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे हैं। अक्टूबर में होने वाली RBI की MPC बैठक पर अब पूरे बैंकिंग सेक्टर और आम जनता की निगाहें टिकी हुई हैं।
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