
पीएम मोदी संग फोटो के लिए मची होड़, ब्रिक्स में दिखा क्रेज
दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए महिला प्रतिनिधियों में जबरदस्त होड़ मच गई। एक महिला डेलीगेट के अनुरोध पर शुरू हुआ यह सिलसिला देखते ही देखते भीड़ में बदल गया, जहां सभी खुद को बेहद लकी मान रहे थे।
दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ तस्वीर खिंचवाने के लिए महिला प्रतिनिधियों में जबरदस्त होड़ मच गई। एक महिला डेलीगेट के अनुरोध पर शुरू हुआ यह सिलसिला देखते ही देखते भीड़ में बदल गया, जहां सभी खुद को बेहद लकी मान रहे थे।
ब्रिक्स फोरम में पीएम मोदी की लोकप्रियता
राजधानी दिल्ली में शुक्रवार को आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम का माहौल उस वक्त पूरी तरह बदल गया जब मुख्य संबोधन के बाद एक अनूठा नज़रा देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता किसी से छिपी नहीं है, लेकिन इस बार इसका सीधा असर बिजनेस फोरम के भीतर मौजूद महिला डेलीगेट्स के उत्साह में साफ तौर पर देखा गया। उनके संबोधन के तुरंत बाद वहां मौजूद एक महिला प्रतिनिधि ने खुद आगे बढ़कर उनके साथ तस्वीर खिंचवाने की इच्छा जताई।
फोटो खिंचवाने की मची होड़
जैसे ही प्रधानमंत्री मोदी ने मुस्कुराते हुए उस महिला डेलीगेट के साथ फोटो खिंचवाई, वैसे ही वहां मौजूद अन्य महिला प्रतिनिधियों में भी उनके साथ तस्वीर लेने की होड़ सी मच गई। एक के बाद एक कई डेलिगेट्स प्रधानमंत्री के पास पहुंच गईं और हर कोई इस पल को अपने कैमरे में कैद करने के लिए उत्सुक दिखाई दिया। इस दौरान पूरा माहौल बेहद उत्साहपूर्ण और खुशनुमा हो गया, जहां वैश्विक स्तर के नेता के प्रति निवेशकों और प्रतिनिधियों का सहज लगाव स्पष्ट झलक रहा था।
हम बहुत लकी हैं - डेलीगेट्स
प्रधानमंत्री के साथ तस्वीर मिलने के बाद महिला प्रतिनिधियों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। इस खास पल का आनंद लेते हुए एक डेलीगेट ने बेहद उत्साहित होकर कहा कि वे सब खुद को बहुत लकी मानती हैं कि उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ यह यादगार लम्हा साझा करने का अवसर मिला। यह वाकया एक बार फिर साबित कर गया कि कूटनीतिक और व्यावसायिक बैठकों से इतर वैश्विक मंचों पर पीएम मोदी का व्यक्तिगत करिश्मा लोगों के दिलों पर किस कदर असर छोड़ता है।

फोल्डेबल आईफोन से पहले ही कैसे जीत गई सैमसंग?
एप्पल के पहले फोल्डेबल आईफोन के बाजार में आने से पहले ही सैमसंग ने एक बड़ी व्यावसायिक बाजी मार ली है। आईफोन के हर फोल्डेबल डिस्प्ले पैनल के लिए एप्पल को सैमसंग को भारी रकम चुकानी होगी, जिससे दक्षिण कोरियाई दिग्गज को तगड़ा मुनाफा होना तय है।
एप्पल के पहले फोल्डेबल आईफोन के बाजार में आने से पहले ही सैमसंग ने एक बड़ी व्यावसायिक बाजी मार ली है। आईफोन के हर फोल्डेबल डिस्प्ले पैनल के लिए एप्पल को सैमसंग को भारी रकम चुकानी होगी, जिससे दक्षिण कोरियाई दिग्गज को तगड़ा मुनाफा होना तय है।
फोल्डेबल बाजार में सैमसंग की बड़ी बढ़त
स्मार्टफोन बाजार की बादशाहत की जंग में हर कोई आगे रहना चाहता है, लेकिन तकनीकी साझेदारी कई बार खेल को पूरी तरह बदल देती है। एप्पल अपने पहले फोल्डेबल आईफोन को उतारने की तैयारी में जुटा है, लेकिन इस डिवाइस के सबसे अहम और महंगे हिस्से के लिए उसे अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी सैमसंग पर पूरी तरह निर्भर रहना पड़ेगा। यह स्थिति दिखाती है कि कैसे हार्डवेयर निर्माण के मामले में सैमसंग अभी भी बाजार में सबसे मजबूत स्थिति पर काबिज है।
तीन साल का एक्सक्लूसिव सप्लाई समझौता
न्यूज़ 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, एप्पल अपने आगामी 'आईफोन डुओ' में इस्तेमाल होने वाले प्रत्येक फोल्डेबल डिस्प्ले पैनल के एवज में सैमसंग को करीब 250 डॉलर यानी लगभग 24,000 रुपये का भुगतान करेगा। यह डिस्प्ले पैनल इस प्रीमियम फोन के सबसे महंगे घटकों में से एक है। इस बड़े व्यावसायिक सौदे को सुनिश्चित करने के लिए दोनों कंपनियों के बीच तीन साल का एक एक्सक्लूसिव सप्लाई समझौता हुआ है।
एप्पल की मजबूरी और सैमसंग का मुनाफा
नवाचार और डिजाइन के मामले में एप्पल भले ही अपनी अलग पहचान रखता हो, लेकिन फोल्डेबल स्क्रीन जैसी अत्याधुनिक डिस्प्ले तकनीक के उत्पादन में सैमसंग की महारत का मुकाबला करना फिलहाल आसान नहीं है। यही वजह है कि आईफोन की हर यूनिट बिकने पर भी उसका एक बड़ा हिस्सा मुनाफे के रूप में सैमसंग की झोली में जाएगा। एप्पल की इस मजबूरी ने सैमसंग को बिना फोन बेचे ही पहले से ही इस तकनीकी मुकाबले का विजेता बना दिया है।

दलित बेटी निशु आजाद के परिवार पर संकट, पड़ोसी दे रहे धमकी
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान दलित लड़की निशु आजाद के पिता के साथ मारपीट का मामला तूल पकड़ चुका है. अब पीड़ित परिवार को पड़ोसियों द्वारा लगातार परेशान किए जाने और 20 दिन के भीतर घर खाली करने की धमकी मिलने की बात सामने आई है, जिसके बाद परिवार ने धर्म परिवर्तन की चेतावनी दी है.
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान दलित लड़की निशु आजाद के पिता के साथ मारपीट का मामला तूल पकड़ चुका है. अब पीड़ित परिवार को पड़ोसियों द्वारा लगातार परेशान किए जाने और 20 दिन के भीतर घर खाली करने की धमकी मिलने की बात सामने आई है, जिसके बाद परिवार ने धर्म परिवर्तन की चेतावनी दी है.
मारपीट और प्रताड़ना का सिलसिला
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब जंतर-मंतर पर एक प्रदर्शन के दौरान दलित लड़की निशु आजाद के पिता के साथ स्वतंत्र भारद्वाज ने मारपीट की थी. इस घटना के बाद से पीड़ित परिवार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. परिवार का आरोप है कि अब उनके पड़ोसी भी उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं और लगातार दबाव बना रहे हैं.
घर छोड़ने का दबाव और धमकी
मामले में नया मोड़ तब आया जब पीड़ित परिवार को पड़ोसियों की तरफ से महज 20 दिन के भीतर अपना घर छोड़कर जाने का फरमान सुनाया गया. लगातार मिल रही इन धमकियों और सामाजिक दबाव के कारण परिवार मानसिक रूप से बेहद आहत है. स्थानीय स्तर पर उपजे इस तनाव ने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.
धर्म परिवर्तन की चेतावनी से सनसनी
न्याय न मिलने और लगातार मिल रही प्रताड़ना से त्रस्त आकर पीड़ित परिवार की ओर से एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान सामने आया है. परिवार ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें सुरक्षा और न्याय नहीं मिला, तो वे मजबूर होकर अपना धर्म बदल लेंगे. इस गंभीर चेतावनी के बाद इलाके में हलचल तेज हो गई है और मामले पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं.

राष्ट्र के लिए सब कुछ कुर्बान: मेजर ऋषभ सिंह संब्याल की अनोखी दास्तान
राष्ट्रपति मुर्मू के पूर्व एडीसी मेजर ऋषभ सिंह संब्याल ने अपने अविवाहित रहने के फैसले पर खुलकर बात की है. उन्होंने देशसेवा को ही अपना सबसे बड़ा बलिदान और प्राथमिकता बताया है, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है.
राष्ट्रपति मुर्मू के पूर्व एडीसी मेजर ऋषभ सिंह संब्याल ने अपने अविवाहित रहने के फैसले पर खुलकर बात की है. उन्होंने देशसेवा को ही अपना सबसे बड़ा बलिदान और प्राथमिकता बताया है, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है.
देशसेवा के रंग में रंगे मेजर ऋषभ सिंह संब्याल
भारतीय सेना में 12 साल का लंबा और गौरवशाली कार्यकाल पूरा करने वाले मेजर ऋषभ सिंह संब्याल इन दिनों देश भर में चर्चा का विषय बने हुए हैं. उन्होंने देश की सर्वोच्च संवैधानिक हस्ती और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के एड-डि-कैंप यानी एडीसी के रूप में पूरे तीन साल तक अत्यंत निष्ठा के साथ अपनी सेवाएं दी हैं. राष्ट्रपति भवन जैसे प्रतिष्ठित स्थान पर जिम्मेदारी संभालना किसी भी सैन्य अधिकारी के लिए गर्व का विषय होता है, और मेजर संब्याल ने इस भूमिका को पूरी ईमानदारी से निभाया है.
शादी न करने के सवाल पर दिया यह जवाब
जब उनसे यह पूछा गया कि उन्होंने अभी तक शादी क्यों नहीं की, तो उनका जवाब बेहद प्रेरणादायक और गहरा था. मेजर संब्याल का मानना है कि जब आप पूरी तरह से भारतीय सेना और देश की रक्षा के लिए समर्पित हो जाते हैं, तो व्यक्तिगत जीवन पीछे छूट जाता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के प्रति उनका कर्तव्य ही उनका परिवार है और यही उनका सबसे बड़ा बलिदान है. उनके इस विचार ने युवाओं के दिलों में सेना के प्रति सम्मान को और अधिक बढ़ा दिया है.
फौजियों का जीवन और राष्ट्र के प्रति समर्पण
एक सैनिक का जीवन आम इंसान से बिल्कुल अलग होता है, जहां हर पल देश की सुरक्षा सर्वोपरि होती है. मेजर ऋषभ सिंह संब्याल का यह सफर इस बात की मिसाल है कि किस तरह हमारे वीर जवान अपने निजी सुख-चैन और पारिवारिक जीवन को ताक पर रखकर सरहद से लेकर देश के सर्वोच्च पदों की सुरक्षा तक मुस्तैद रहते हैं. उनका यह बयान सोशल मीडिया पर भी काफी पसंद किया जा रहा है, जहां लोग उनकी देशभक्ति को सलाम कर रहे हैं.

सत्य निकेतन पीजी हादसा: मुख्य आरोपी शुभम त्यागी ने किया सरेंडर
दिल्ली के चर्चित सत्य निकेतन पीजी इमारत ढहाने के मामले में फरार चल रहे मुख्य संचालक शुभम त्यागी ने पटियाला हाउस कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया है। अदालत ने मुख्य आरोपी और उसके सहयोगी सुधांशु को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। इस भयानक हादसे ने राजधानी में नियमों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे अवैध निर्माणों की पोल खोलकर रख दी है।
दिल्ली के चर्चित सत्य निकेतन पीजी इमारत ढहाने के मामले में फरार चल रहे मुख्य संचालक शुभम त्यागी ने पटियाला हाउस कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया है। अदालत ने मुख्य आरोपी और उसके सहयोगी सुधांशु को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। इस भयानक हादसे ने राजधानी में नियमों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे अवैध निर्माणों की पोल खोलकर रख दी है।
कानून के शिकंजे में आरोपी
सत्य निकेतन के बहुचर्चित पीजी हादसे के बाद से पुलिस की टीमें लगातार आरोपियों की तलाश में जुटी थीं। घटना के बाद से ही फरार चल रहे पीजी संचालक शुभम त्यागी ने आखिरकार कानून के आगे घुटने टेकते हुए पटियाला हाउस कोर्ट में सरेंडर कर दिया। अदालत ने सुनवाई के बाद शुभम त्यागी और सह-आरोपी सुधांशु को दो दिनों की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है ताकि हादसे से जुड़े अन्य पहलुओं और मिलीभगत की गहराई से जांच की जा सके। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी सख्त रुख अपनाते हुए इस केस को दिल्ली हाईकोर्ट से ट्रांसफर करने की मांग को खारिज कर दिया है, जिससे कानूनी शिकंजा और कस गया है।
अवैध निर्माण और सुरक्षा की अनदेखी
यह त्रासदी महज़ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि नियमों की घोर अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा है। आवासीय क्षेत्रों में बिना वैध अनुमति के तान दिए गए अवैध निर्माण किस तरह इंसानी जिंदगियों के लिए मौत का जाल बन जाते हैं, यह हादसा इसका सबसे वीभत्स उदाहरण है। सात बेकसूर लोगों की जान जाने के बाद भी क्या प्रशासन जागेगा, यह बड़ा सवाल है। मुनाफाखोरी के चक्कर में छात्रों और युवाओं की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाले ऐसे संचालकों पर अब हत्या और लापरवाही के गंभीर आरोप तय हो चुके हैं।
मौत के मुंह से लौटे नितिश की दास्तान
इस भीषण हादसे में सात लोगों की जान चली गई, लेकिन कुछ खुशनसीब ऐसे भी रहे जो मौत को चकमा देकर बाहर निकलने में कामयाब रहे। इस खौफनाक हादसे में बाल-बाल बचे नितिश चिब ने उस भयानक मंजर को याद करते हुए इसे अपना दूसरा जन्म बताया है। नितिश की आंखें आज भी उस पल को याद करके सिहर जाती हैं जब ताश के पत्तों की तरह इमारत भरभराकर ढह गई थी। अपनों को खोने वाले परिवारों के आंसू और मलबे में दबी उम्मीदें इस बात की गवाही दे रही हैं कि सुरक्षा मानकों से समझौता करने का अंजाम कितना भयानक होता है।
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