
स्मृति ईरानी की कॉल, उदय शंकर का हाथ: हार के बाद ऐसे मिला काम
2024 लोकसभा चुनाव में अमेठी से हार के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने काम की तलाश में टीवी इंडस्ट्री का रुख किया। एक समय जिनकी वजह से उनका शो छूटा था, उन्हीं जियो-हॉटस्टार के वाइस चेयरमैन उदय शंकर ने स्मृति ईरानी को दोबारा काम दिया।
खबर का निचोड़
2024 लोकसभा चुनाव में अमेठी से हार के बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने काम की तलाश में टीवी इंडस्ट्री का रुख किया। एक समय जिनकी वजह से उनका शो छूटा था, उन्हीं जियो-हॉटस्टार के वाइस चेयरमैन उदय शंकर ने स्मृति ईरानी को दोबारा काम दिया।
राजनीति से फिर अभिनय का रुख
साल 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजे आते ही पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की राजनीतिक पारी में एक बड़ा मोड़ आ गया। अमेठी से हार का सामना करने के बाद उन्होंने राजनीति की चकाचौंध से इतर एक सामान्य नागरिक की तरह अपने करियर के अगले कदम के बारे में सोचना शुरू किया। वर्षों तक सत्ता और राजनीति के केंद्र में रहने के बाद भी स्मृति ईरानी ने बिना किसी झिझक के अपनी पुरानी कर्मभूमि, यानी एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री का दरवाजा खटखटाया।
एक कॉल, जिसने बदल दी बात
हाल ही में दिए एक पॉडकास्ट में स्मृति ईरानी ने अपनी इस संघर्षपूर्ण यात्रा का खुद खुलासा किया। उन्होंने बताया कि चुनाव हारने के बाद उन्होंने टीवी जगत के कई पुराने साथियों को फोन किया। बिना किसी औपचारिकता के उन्होंने सीधे तौर पर कहा, "मैं अब बेरोजगार हूं और मुझे काम चाहिए।" इस एक बयान ने साबित कर दिया कि वह जमीनी हकीकत को स्वीकार करने में कभी पीछे नहीं हटतीं।
पुरानी कड़वाहट से नए अवसर तक
स्मृति ईरानी के इस फोन कॉल का सबसे दिलचस्प दौर तब आया जब उन्होंने जियो-हॉटस्टार के वाइस चेयरमैन उदय शंकर से संपर्क किया। एक समय ऐसा था जब उदय शंकर स्टार नेटवर्क के प्रमुख थे और उन्हीं के कार्यकाल में स्मृति ईरानी को मशहूर शो 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' से बाहर का रास्ता दिखाया गया था। परिस्थितियां बदलीं और वही उदय शंकर इस बार उनके संकटमोचक बनकर सामने आए। जब स्मृति ने उनसे काम मांगा, तो उदय शंकर ने न केवल उनकी बात गंभीरता से सुनी बल्कि उन्हें तुरंत एक नए प्रोजेक्ट की जिम्मेदारी भी सौंप दी।
कला और अभिनय के प्रति अडिग समर्पण
सत्ता के शीर्ष पर रहने के बाद दोबारा शुरुआत करना आसान नहीं होता, लेकिन स्मृति ईरानी के लिए अभिनय हमेशा से उनके दिल के करीब रहा है। राजनीति के लंबे सफर के बाद भी उनका कला के प्रति समर्पण रत्ती भर कम नहीं हुआ। उदय शंकर द्वारा मिले इस नए मौके के साथ स्मृति ईरानी एक बार फिर कैमरे के सामने अपनी अमिट छाप छोड़ने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

सागर में जहरीली शराब का कहर: 14 मौतें और यूपी तक फैले अवैध नेटवर्क के तार
मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब का सेवन करने से 14 लोगों की दर्दनाक मौत ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को झकझोर कर रख दिया है। इस भयानक त्रासदी में कई अन्य लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है, जिनका इलाज जारी है। घटना के बाद से अवैध शराब के कारोबार और प्रशासनिक लापरवाही पर तीखे सवाल खड़े हो गए हैं, जिससे सरकार और आबकारी विभाग कटघरे में आ खड़े हुए हैं।
मध्य प्रदेश के सागर जिले में जहरीली शराब का सेवन करने से 14 लोगों की दर्दनाक मौत ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को झकझोर कर रख दिया है। इस भयानक त्रासदी में कई अन्य लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है, जिनका इलाज जारी है। घटना के बाद से अवैध शराब के कारोबार और प्रशासनिक लापरवाही पर तीखे सवाल खड़े हो गए हैं, जिससे सरकार और आबकारी विभाग कटघरे में आ खड़े हुए हैं।
प्रशासन की सख्त कार्रवाई और मुआवजे का ऐलान
घटना की गंभीरता को देखते हुए राज्य प्रशासन ने तुरंत कड़े कदम उठाए हैं। लापरवाही के आरोप में संबंधित आबकारी अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही, राज्य सरकार ने हादसे में जान गंवाने वाले मृतकों के परिजनों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की है, हालांकि अपूरणीय क्षति को किसी भी मुआवजे से पूरा नहीं किया जा सकता।
अस्पताल पहुंचे उप मुख्यमंत्री और एयरलिफ्ट की गई जान
हालात की नजाकत को भांपते हुए उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने तुरंत सागर का रुख किया। उन्होंने अस्पताल पहुंचकर भर्ती मरीजों का हालचाल जाना और डॉक्टरों को बेहतरीन चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराने के निर्देश दिए। एक अत्यंत गंभीर मरीज की नाजुक स्थिति को देखते हुए उसे तुरंत भोपाल एयरलिफ्ट किया गया, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में उसका इलाज चल रहा है।
उत्तर प्रदेश से जुड़े तार और सिंडिकेट पर सवाल
इस जहरीली त्रासदी की जांच के दौरान जो तथ्य सामने आ रहे हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। शुरुआती पड़ताल में इस अवैध शराब के नेटवर्क के तार पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश से जुड़े हुए पाए गए हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य की सीमाओं के पार एक संगठित अवैध शराब सिंडिकेट सक्रिय है, जो बेखौफ होकर जहरीले पेय पदार्थों की तस्करी कर रहा है। सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा और सतर्कता पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
अवैध शराब के खिलाफ युद्धस्तर पर अभियान
इस खौफनाक हादसे ने एक बार फिर मध्य प्रदेश में अवैध शराब के कारोबार की जड़ों को उजागर कर दिया है। पुलिस और आबकारी विभाग अब नींद से जागे हैं और पूरे क्षेत्र में अवैध शराब के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापे मारे जा रहे हैं। स्थानीय नागरिकों और विपक्षी दलों की मांग है कि सिर्फ निचले स्तर के अधिकारियों को निलंबित करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि इस पूरे सिंडिकेट के सरगनाओं को बेनकाब कर उनके खिलाफ सबसे कठोर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी किसी अमानवीय घटना की पुनरावृत्ति न हो सके।

सत्य निकेतन पीजी हादसा: 50 साल पुरानी इमारत ढहने से छह की मौत, एमसीडी पर उठे सवाल
दक्षिणी दिल्ली के सत्य निकेतन में एक अर्ध-शताब्दी पुरानी पीजी इमारत के ढह जाने से छह लोगों की जान चली गई, जबकि बारह को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस दर्दनाक हादसे ने राजधानी में अवैध निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोल दी है, जिस पर राजनीति और विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं।
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दक्षिणी दिल्ली के सत्य निकेतन में एक अर्ध-शताब्दी पुरानी पीजी इमारत के ढह जाने से छह लोगों की जान चली गई, जबकि बारह को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस दर्दनाक हादसे ने राजधानी में अवैध निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोल दी है, जिस पर राजनीति और विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं।
हादसों का मलबे में तब्दील होता सत्य निकेतन
दिल्ली के पॉश और छात्रों के बीच लोकप्रिय माने जाने वाले सत्य निकेतन इलाके में सोमवार को उस वक्त कोहराम मच गया, जब पचास साल पुरानी एक जर्जर पीजी इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह गई। इस भयानक हादसे में अब तक छह लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है, जबकि मलबे से बारह जिंदगियों को बचा लिया गया है। चीख-पुकार और धूल के गुबार के बीच स्थानीय लोगों ने राहत कार्यों में अपनी जान की बाजी लगा दी। प्रशासन की सुस्त रफ्तार के खिलाफ लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है।
लापरवाही पर प्रशासन का एक्शन और सियासत
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस पूरी घटना को बेहद गंभीरता से लेते हुए तत्काल मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं। पुलिस ने बिल्डिंग के मालिक हरिराम और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या और लापरवाही की गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है। हादसे के तुरंत बाद नगर निगम यानी एमसीडी की नींद टूटी है और उसने पास ही स्थित एक अन्य खतरनाक और जर्जर इमारत को खाली कराने का नोटिस चस्पा कर दिया है। सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार करता है?
सड़कों पर उतरा गुस्सा और विरोध की आग
इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद राजधानी का सियासी पारा भी चढ़ गया है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कार्यकर्ताओं ने एमसीडी मुख्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया और निगम कमिश्नर के इस्तीफे की मांग की। हालात को काबू में करने के लिए पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे पंद्रह छात्रों को हिरासत में ले लिया। छात्रों और स्थानीय नागरिकों का साफ कहना है कि दिल्ली के कई इलाकों में अनधिकृत रूप से चल रहे पीजी और हॉस्टल मौत का कुआं बन चुके हैं, जिन पर लगाम कसने में प्रशासन पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है।

मोहम्मद शमी की टीम इंडिया में वापसी पर भरत अरुण का बड़ा बयान
भारत के पूर्व गेंदबाजी कोच भरत अरुण ने मोहम्मद शमी की राष्ट्रीय टीम में वापसी की पुरजोर वकालत की है। अरुण का मानना है कि शमी जैसे मैच जिताऊ गेंदबाज के लिए टीम इंडिया के दरवाजे कभी बंद नहीं होने चाहिए। अगर खिलाड़ी में प्रदर्शन करने की क्षमता है, तो उम्र उसके आड़े नहीं आनी चाहिए।
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भारत के पूर्व गेंदबाजी कोच भरत अरुण ने मोहम्मद शमी की राष्ट्रीय टीम में वापसी की पुरजोर वकालत की है। अरुण का मानना है कि शमी जैसे मैच जिताऊ गेंदबाज के लिए टीम इंडिया के दरवाजे कभी बंद नहीं होने चाहिए। अगर खिलाड़ी में प्रदर्शन करने की क्षमता है, तो उम्र उसके आड़े नहीं आनी चाहिए।
शमी की वापसी पर भरत अरुण का बड़ा रुख
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व गेंदबाजी कोच भरत अरुण ने तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी के भविष्य को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच बड़ा बयान दिया है। चयनकर्ताओं के रवैये और टीम प्रबंधन की रणनीतियों पर विचार रखते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि शमी जैसे विश्वस्तरीय गेंदबाज को नजरअंदाज करना भारतीय क्रिकेट के हित में नहीं होगा।
भरत अरुण ने कहा कि मोहम्मद शमी की क्षमता और उनका अनुभव भारतीय टीम के लिए हमेशा एक बड़ा एसेट रहा है। ऐसे में केवल उम्र या हालिया बदलावों के आधार पर उनके अंतरराष्ट्रीय करियर पर विराम लगाना या उनके लिए दरवाजे बंद करना पूरी तरह से अनुचित है।
उम्र नहीं, फॉर्म और फिटनेस होनी चाहिए पैमाना
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेज गेंदबाजी के मापदंडों को रेखांकित करते हुए पूर्व गेंदबाजी कोच ने कहा कि खेल में सबसे महत्वपूर्ण कारक प्रदर्शन होता है। जब कोई खिलाड़ी मैदान पर गेंद से प्रभाव छोड़ रहा हो और टीम की जीत में अहम योगदान दे रहा हो, तो उसकी जन्मतिथि मायने नहीं रखनी चाहिए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि शमी के पास अभी भी बहुत क्रिकेट बाकी है। उनकी स्विंग, गति और दबाव के क्षणों में विकेट निकालने की कला आज भी भारतीय क्रिकेट के किसी भी युवा गेंदबाज के बराबर या उससे बेहतर है। शमी ने अतीत में बार-बार साबित किया है कि वे परिस्थितियों के अनुसार ढलने में सक्षम हैं।
भारतीय गेंदबाजी आक्रमण के लिए अनुभव क्यों जरूरी
भारतीय टीम इस समय बदलाव के दौर से गुजर रही है, जहां नए और युवा तेज गेंदबाजों को लगातार मौके दिए जा रहे हैं। हालांकि, भरत अरुण का मानना है कि केवल युवाओं के भरोसे लंबा सफर तय नहीं किया जा सकता। किसी भी मजबूत गेंदबाजी आक्रमण के संतुलन के लिए अनुभवी गेंदबाजों की मौजूदगी बेहद आवश्यक होती है।
शमी जैसे गेंदबाज ना केवल गेंदबाजी आक्रमण की कमान संभालते हैं, बल्कि मैदान पर युवा गेंदबाजों का मार्गदर्शन भी करते हैं। बड़े दौरों और महत्वपूर्ण टूर्नामेंटों में शमी का अनुभव टीम के काम आ सकता है।
चयनकर्ताओं के लिए स्पष्ट संदेश
भरत अरुण के इस बयान को चयनकर्ताओं और भारतीय टीम प्रबंधन के लिए एक सीधे संदेश के रूप में देखा जा रहा है। खेल प्रेमियों और क्रिकेट विशेषज्ञों का भी यही मानना है कि शमी की क्षमता का सही उपयोग टीम इंडिया के तेज गेंदबाजी विभाग को और अधिक घातक बना सकता है। आगामी विदेशी दौरों और बड़ी सीरीज को देखते हुए शमी की टीम में मौजूदगी भारत की संभावनाओं को काफी मजबूती प्रदान करेगी।

कंगना पर कुणाल कामरा का तीखा तंज, कहा- कम पढ़ी-लिखी बहरूपिया
बॉलीवुड अभिनेत्री और मंडी से भाजपा सांसद कंगना रनौत द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों को फटकार लगाने का वीडियो वायरल होने के बाद विवाद बढ़ गया है। स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने इस पर तीखा तंज कसते हुए कंगना को "कम पढ़ी-लिखी बहरूपिया" कह दिया। कामरा के इस बयान ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है।
खबर का निचोड़
बॉलीवुड अभिनेत्री और मंडी से भाजपा सांसद कंगना रनौत द्वारा प्रशासनिक अधिकारियों को फटकार लगाने का वीडियो वायरल होने के बाद विवाद बढ़ गया है। स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा ने इस पर तीखा तंज कसते हुए कंगना को "कम पढ़ी-लिखी बहरूपिया" कह दिया। कामरा के इस बयान ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है।
कामरा का सीधा वार
स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा अपने बेबाक अंदाज और राजनीतिक बयानों के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें वे सरकारी अधिकारियों को सख्त लहजे में फटकार लगाती नजर आ रही थीं। इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कुणाल कामरा ने बिना किसी लाग-लपेट के सीधा हमला बोला। उन्होंने कंगना के प्रशासनिक रवैये और जन प्रतिनिधि के तौर पर उनकी शैली पर गंभीर सवाल खड़े किए।
असफलता से जुनून पर तंज
कंगना के बयान का वीडियो साझा करते हुए कुणाल कामरा ने लिखा कि उन्होंने आज तक किसी भी व्यक्ति को अपनी असफलता को लेकर इतना जुनूनी नहीं देखा। कामरा ने तीखे अंदाज में कहा कि कुछ भी ठोस परिणाम न दे पाने के बावजूद कंगना का यह आत्ममुग्ध रवैया और दृढ़ संकल्प सचमुच हैरान करने वाला है। उनके इस तंज ने इंटरनेट पर तुरंत ध्यान खींचा और लोग इसे कंगना के संसदीय प्रदर्शन से जोड़कर देखने लगे।
शब्दों की सीमा लांघती बयानबाजी
अपने बयान को और तीखा बनाते हुए कामरा ने कंगना के लिए 'कम पढ़ी-लिखी बहरूपिया' जैसे कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि एक जनप्रतिनिधि के रूप में अधिकारियों के साथ इस तरह का व्यवहार उनकी अपरिपक्वता को दर्शाता है। कामरा के इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया दो धड़ों में बंट गया। जहां एक तरफ कंगना के आलोचक कामरा के बयान का समर्थन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कंगना के प्रशंसक कामरा पर एक महिला सांसद का अपमान करने का आरोप लगा रहे हैं।
सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग
कंगना रनौत और विवादों का चोली-दामन का साथ रहा है, लेकिन राजनीति में कदम रखने के बाद उनके हर कदम और बयान पर सूक्ष्मता से नजर रखी जा रही है। अधिकारियों पर उनके गुस्से को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब निजी और राजनीतिक खींचतान में बदल चुका है। कुणाल कामरा के इस ट्वीट के बाद एक्स (ट्विटर) पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है, जहां दोनों हस्तियों के समर्थक आमने-सामने आ गए हैं।
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