
दिल्ली बिल्डिंग हादसा: 2 की मौत, सीएम रेखा गुप्ता ने लिया जायजा
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए एक दर्दनाक बिल्डिंग हादसे में दो बेकसूर लोगों की जान चली गई है, जबकि छह अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। इस गंभीर दुर्घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया और शीर्ष नेतृत्व ने तत्काल मौके का रुख किया।
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए एक दर्दनाक बिल्डिंग हादसे में दो बेकसूर लोगों की जान चली गई है, जबकि छह अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। इस गंभीर दुर्घटना की सूचना मिलते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया और शीर्ष नेतृत्व ने तत्काल मौके का रुख किया।
घटना का दर्दनाक मंजर और प्रशासनिक हलचल
राजधानी दिल्ली के व्यस्त क्षेत्र सत्य निकेतन में इमारत ढहने की इस आकस्मिक दुर्घटना ने सबको झकझोर कर रख दिया है। अचानक हुए इस हादसे की चपेट में आने से दो लोगों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। वहीं, इस भयानक मलबे के नीचे दबने से छह अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। हादसे की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया और स्थानीय लोग तुरंत बचाव कार्य में जुट गए।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और सांसद बांसुरी स्वराज का दौरा
दुर्घटना की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और स्थानीय सांसद बांसुरी स्वराज ने तुरंत घटनास्थल का दौरा किया और हालात का जायजा लिया। नेताओं ने दुर्घटना स्थल पर पहुंचकर पूरी स्थिति का बारीकी से निरीक्षण किया और प्रशासनिक अधिकारियों से घटना के कारणों की पूरी रिपोर्ट मांगी। इस दौरान उनके साथ सुरक्षा बलों और राहत कर्मियों का बड़ा अमला भी मौजूद रहा, जो लगातार स्थिति को नियंत्रित करने में जुटा हुआ था।
युद्धस्तर पर बचाव और राहत कार्य
मौके पर पहुंचीं मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राहत और बचाव कार्यों की कमान खुद संभाली और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मलबे में फंसे एक-एक शख्स को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन को और तेज किया जाए। इसके साथ ही, अस्पतालों में भर्ती घायलों को बिना किसी देरी के बेहतर से बेहतर चिकित्सीय सुविधा मुहैया कराने के भी कड़े निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी पीड़ित को इलाज के अभाव में परेशानी न उठानी पड़े। प्रशासन अब यह भी जांच कर रहा है कि यह इमारत किस वजह से ढही और इसमें किन नियमों की अनदेखी की गई थी।

सत्य निकेतन हादसा: राहुल गांधी का कड़ा संदेश, हर छात्र की जान कीमती
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए भीषण बिल्डिंग हादसे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि छात्रों का जीवन पहले से ही संघर्षों से घिरा होता है और अब ऐसे जानलेवा हालात चिंताजनक हैं। प्रशासन और बचाव दलों को युद्धस्तर पर राहत कार्य चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए भीषण बिल्डिंग हादसे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि छात्रों का जीवन पहले से ही संघर्षों से घिरा होता है और अब ऐसे जानलेवा हालात चिंताजनक हैं। प्रशासन और बचाव दलों को युद्धस्तर पर राहत कार्य चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
सत्य निकेतन हादसे पर राहुल गांधी की दो टूक
दिल्ली के सत्य निकेतन में घटी दर्दनाक घटना ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। इस गंभीर दुर्घटना के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सीधे तौर पर प्रशासनिक लापरवाही और व्यवस्था की कमियों पर सवाल खड़े किए हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब राजधानी में छात्रों की सुरक्षा को लेकर बड़े दावे किए जाते हैं।
छात्रों का जीवन संघर्षों से भरा और अब हालात जानलेवा
राहुल गांधी ने अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि देश का युवा और छात्र वर्ग पहले से ही अपने भविष्य को लेकर अनगिनत संघर्षों का सामना कर रहा है। ऐसे में पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों से आने वाले इन युवाओं को यदि इस तरह के जानलेवा हालातों का सामना करना पड़े, तो यह व्यवस्था की बड़ी विफलता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षण संस्थानों और कोचिंग hubs के आसपास रहने वाले छात्रों के लिए सुरक्षित माहौल तैयार करना प्रशासन की पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।
बचाव दलों के लिए तत्काल निर्देश और हर संभव प्रयास
घटना की सूचना मिलते ही राहुल गांधी ने राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने की अपील की। उन्होंने प्रशासन को निर्देशित किया है कि बचाव दल बिना एक भी पल गंवाए मलबे में फंसे प्रत्येक छात्र तक पहुंचे। उनका साफ कहना था कि इस आपदा की घड़ी में हर एक छात्र की जान बेहद कीमती है और उसकी रक्षा के लिए हरसंभव प्रयास तुरंत किए जाने चाहिए।
मुश्किल घड़ी में पीड़ितों के साथ खड़ी है पार्टी
इस दुखद हादसे के बाद राजनीतिक दलों द्वारा प्रभावित परिवारों को ढांढस बंधाने का सिलसिला जारी है। राहुल गांधी ने व्यक्तिगत रूप से और अपनी पार्टी की ओर से यह विश्वास दिलाया है कि इस विकट और मुश्किल घड़ी में वे सभी पीड़ित परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करते हुए उन्होंने अधिकारियों से यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

महंगे तेल और AI सुस्ती से कंपनियों का मुनाफा खतरे में
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर हो रहे खर्च में सुस्ती ने भारतीय कॉर्पोरेट जगत की चिंता बढ़ा दी है। नुवामा रिसर्च के अनुसार, सप्लाई झटकों और इन्वेंटरी गेन खत्म होने से दूसरी तिमाही (Q2FY27) में खासकर स्मॉल-कैप, मिड-कैप और साइक्लिकल कंपनियों के मार्जिन पर गहरा असर पड़ सकता है।
खबर का निचोड़:
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर हो रहे खर्च में सुस्ती ने भारतीय कॉर्पोरेट जगत की चिंता बढ़ा दी है। नुवामा रिसर्च के अनुसार, सप्लाई झटकों और इन्वेंटरी गेन खत्म होने से दूसरी तिमाही (Q2FY27) में खासकर स्मॉल-कैप, मिड-कैप और साइक्लिकल कंपनियों के मार्जिन पर गहरा असर पड़ सकता है।
ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल के अचानक महंगे होने और AI से जुड़े खर्चों में आई सुस्ती ने भारतीय कंपनियों की कमाई पर अनिश्चितता के बादल मंडरा दिए हैं। सितंबर में समाप्त होने वाली चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (Q2FY27) के नतीजे कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इन दोहरे झटकों का सबसे बड़ा असर कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर देखने को मिलेगा।
कच्चे तेल का झटका और मार्जिन पर दबाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की सप्लाई में रुकावट के कारण कीमतों में तेजी दर्ज की गई है। नुवामा रिसर्च का अनुमान है कि इस मूल्य वृद्धि का सीधा असर भारतीय कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर पड़ेगा। जो कंपनियां कच्चे तेल या उसके उप-उत्पादों (Derivatives) को कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल करती हैं, उनकी लागत अचानक बढ़ गई है। इसके अलावा, परिवहन लागत बढ़ने से सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियां भी गहरा गई हैं, जिससे कंपनियों के मुनाफे पर दोहरी मार पड़ रही है।
खत्म हुआ पहली तिमाही का 'इन्वेंटरी गेन'
पहली तिमाही (Q1) के दौरान कई कंपनियों को कम कीमत पर खरीदे गए कच्चे माल (इन्वेंटरी गेन) का फायदा मिला था, जिसने उनके वित्तीय नतीजों को मजबूती दी थी। हालांकि, सितंबर तिमाही में यह फायदा पूरी तरह समाप्त हो चुका है। अब कंपनियों को महंगे कच्चे माल के साथ उत्पादन करना पड़ रहा है। पुरानी सस्ती इन्वेंटरी का सहारा न मिलने की वजह से इस तिमाही में शुद्ध लाभ के आंकड़ों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है।
स्मॉल और मिड-कैप कंपनियों पर सबसे ज्यादा खतरा
महंगे तेल और बढ़ती परिचालन लागत का असर पूरी बाजार पूंजीकरण पर एक समान नहीं होगा। नुवामा की रिपोर्ट के मुताबिक, स्मॉल-कैप, मिड-कैप और साइक्लिकल (चक्रीय) क्षेत्र की कंपनियां इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी। बड़ी लार्ज-कैप कंपनियों के पास लागत वृद्धि को झेलने या ग्राहकों पर पास-ऑन करने की क्षमता होती है, जबकि छोटी और मझोली कंपनियों के लिए सीमित बैलेंस शीट और कड़े प्रतिस्पर्धी बाजार के कारण मार्जिन को बचा पाना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है।
AI खर्च में सुस्ती का आईटी सेक्टर पर असर
एक तरफ जहां मैन्युफैक्चरिंग और साइक्लिकल कंपनियां तेल की मार झेल रही हैं, वहीं आईटी और टेक सेक्टर को AI खर्च में आई सुस्ती से बड़ा झटका लगा है। वैश्विक स्तर पर बड़ी टेक कंपनियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रोजेक्ट्स पर अपने पूंजीगत व्यय (Capex) की समीक्षा शुरू कर दी है। इसके चलते भारतीय आईटी कंपनियों को मिलने वाले नए ऑर्डर और कॉन्ट्रैक्ट्स में सुस्ती देखी जा रही है, जो इस तिमाही में उनके राजस्व वृद्धि को सीमित कर सकती है।

केतन केस में नया खुलासा, सिया-चेतन के तीसरे साथी को पुलिस ने किया गिरफ्तार
लोहगढ़ किले से कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। मंगेतर सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी की गिरफ्तारी के बाद अब तीसरे आरोपी रितेश हिंगे को दबोच लिया गया है। रितेश पर हत्या की इस खौफनाक साजिश में शामिल होने का गंभीर आरोप है।
खबर का निचोड़:
लोहगढ़ किले से कारोबारी केतन अग्रवाल की हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। मंगेतर सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी की गिरफ्तारी के बाद अब तीसरे आरोपी रितेश हिंगे को दबोच लिया गया है। रितेश पर हत्या की इस खौफनाक साजिश में शामिल होने का गंभीर आरोप है।
लोहगढ़ किले की ऊंचाई से बुना गया खूनी जाल
पुणे के मशहूर लोहगढ़ किले की वादियों में घूमी इस खौफनाक वारदात ने हर किसी को सन्न कर दिया है। युवा कारोबारी केतन अग्रवाल की मौत को शुरुआत में एक हादसा माना जा रहा था, लेकिन पुलिस की तफ्तीश जैसे-जैसे आगे बढ़ी, परत-दर-परत साजिश की कड़ियां खुलती चली गईं। केतन की हत्या किसी और ने नहीं, बल्कि उसकी अपनी मंगेतर सिया गोयल ने अपने प्रेमी चेतन चौधरी के साथ मिलकर रची थी। अब इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस में पुलिस के हाथ एक और बड़ी कामयाबी लगी है।
तीसरे किरदार की एंट्री और साजिश का पर्दाफाश
मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चेतन चौधरी के करीबी दोस्त रितेश हिंगे को गिरफ्तार किया है। जांच अधिकारियों का कहना है कि रितेश केवल एक मूकदर्शक नहीं था, बल्कि वह केतन को रास्ते से हटाने की इस पूरी प्लानिंग का अहम हिस्सा था। वारदात वाले दिन किले की पहाड़ियों पर केतन को अकेला पाकर उसे नीचे धक्का देने की योजना में रितेश ने आरोपियों की सीधी मदद की थी। टेक्निकल सर्विलांस और कॉल डिटेल्स के आधार पर रितेश की लोकेशन और भूमिका संदिग्ध पाई गई, जिसके बाद पुलिस ने उसे शिकंजे में ले लिया।
प्यार, धोखा और खौफनाक अंत
केतन अग्रवाल और सिया गोयल की सगाई हो चुकी थी और जल्द ही दोनों शादी के बंधन में बंधने वाले थे। लेकिन सिया के दिल में अपने पुराने साथी चेतन चौधरी के लिए जगह बनी हुई थी। केतन को अपनी जिंदगी और शादी से हमेशा के लिए हटाने के लिए सिया और चेतन ने खौफनाक रास्ता चुना। लोहगढ़ किले का ट्रिप महज एक बहाना था, असली मकसद केतन की जान लेना था। ऊंचाई से धक्का देकर हत्या करने के बाद इसे एक दर्दनाक हादसा साबित करने की पूरी कोशिश की गई थी, लेकिन सच ज्यादा देर तक छुप न सका।
सलाखों के पीछे पहुंचे तीनों गुनहगार
रितेश हिंगे की गिरफ्तारी के बाद अब इस मामले के तीनों मुख्य आरोपी पुलिस की गिरफ्त में हैं। पुलिस टीम अब तीनों को एक साथ आमने-सामने बिठाकर पूछताछ करने की तैयारी में है ताकि हत्या में इस्तेमाल किए गए सबूतों और घटनाक्रम के हर मिनट का सही ब्योरा जुटाया जा सके। फॉरेंसिक टीम और पुलिस आरोपियों को घटनास्थल पर ले जाकर सीन री-क्रिएट करने की योजना भी बना रही है, जिससे अदालत में इस संगीन जुर्म के खिलाफ मजबूत केस पेश किया जा सके।

महिला एशिया कप 2026: हरमनप्रीत ने फातिमा से नहीं मिलाया हाथ
दुबई में आयोजित महिला एशिया कप 2026 के भारत-पाकिस्तान मुकाबले में एक बार फिर राजनीतिक तनाव का असर खेल के मैदान पर दिखा। टॉस के दौरान भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर ने पाकिस्तानी कप्तान फातिमा सना से न तो हाथ मिलाया और न ही नज़रें मिलाईं। भारत अपनी नो-हैंडशेक नीति पर कायम रहा।
खबर का निचोड़
दुबई में आयोजित महिला एशिया कप 2026 के भारत-पाकिस्तान मुकाबले में एक बार फिर राजनीतिक तनाव का असर खेल के मैदान पर दिखा। टॉस के दौरान भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर ने पाकिस्तानी कप्तान फातिमा सना से न तो हाथ मिलाया और न ही नज़रें मिलाईं। भारत अपनी नो-हैंडशेक नीति पर कायम रहा।
मैदान पर फिर दिखा तनाव: टॉस का वो लम्हा
दुबई के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में जब महिला एशिया कप 2026 के सबसे हाई-वोल्टेज मुकाबले के लिए भारत और पाकिस्तान की टीमें आमने-सामने आईं, तो फैंस को सिर्फ रन और विकेट का ही रोमांच देखने को नहीं मिला। टॉस के वक्त मैदान पर एक ऐसा पल आया जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। पाकिस्तान की कप्तान फातिमा सना ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया, लेकिन इस प्रक्रिया के दौरान माहौल में एक अलग ही तल्खी महसूस की गई।
टॉस जीतने के बाद पारंपरिक तौर पर दोनों टीमों के कप्तान एक-दूसरे से हाथ मिलाते हैं, लेकिन भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर ने इस परंपरा से साफ दूरी बनाए रखी। उन्होंने न केवल पाकिस्तानी कप्तान से हाथ मिलाने से परहेज किया, बल्कि उनसे नजरें तक नहीं मिलाईं।
भारत की 'नो-हैंडशेक' नीति पर कड़ा रुख
भारतीय टीम का यह रुख कोई पहला मौका नहीं है, बल्कि यह उस सख्त नीति का हिस्सा है जिसे भारत लंबे समय से लागू करता आ रहा है। सीमा पार से जारी तनाव और कूटनीतिक संबंधों में आई खटास के चलते भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) और भारतीय खिलाड़ियों ने पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबलों में 'नो-हैंडशेक' यानी हाथ न मिलाने की नीति अपना रखी है।
यह सिलसिला केवल महिला क्रिकेट तक सीमित नहीं है। पुरुष एशिया कप 2025 के दौरान भी भारत और पाकिस्तान के बीच हुए मैचों में भारतीय टीम ने इसी नीति का पालन किया था। भारतीय महिला टीम ने दुबई में उसी रुख को दोहराते हुए यह साफ संदेश दे दिया कि खेल के मैदान पर प्रतिद्वंद्विता अपनी जगह है, लेकिन देश की नीति और भावनाएं सर्वोपरि हैं।
खेल के साथ-साथ कूटनीतिक संदेश
भारत और पाकिस्तान के बीच का मुकाबला हमेशा से ही सिर्फ बैट और बॉल की जंग नहीं रहा है। इस हाई-प्रोफाइल मैच में हरमनप्रीत कौर का यह व्यवहार सोशल मीडिया पर तुरंत चर्चा का विषय बन गया। एक तरफ जहां भारतीय फैंस कप्तान के इस निडर और सख्त रवैये का समर्थन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ खेल जगत में इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
तनावपूर्ण माहौल के बीच शुरू हुए इस मुकाबले में पाकिस्तान ने पहले बल्लेबाजी का फैसला किया, लेकिन टॉस के इस एक वाकये ने पूरे मैच की सुर्खियों को अपनी तरफ मोड़ लिया। मैदान का यह कड़ा रवैया यह साबित करता है कि जब तक दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रिश्तों में सुधार नहीं होता, तब तक क्रिकेट के मैदान पर भी यह दूरी साफ दिखाई देती रहेगी।
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