
अगले एक महीने में बैंक निफ्टी 5,000 अंक उछलने को तैयार, IT इंडेक्स होगा डबल: सुशील केडिया
शेयर बाजार के दिग्गज निवेशक सुशील केडिया ने भारतीय शेयर बाजार को लेकर बेहद तेजी का अनुमान जताया है। उनके अनुसार, आगामी एक से सवा महीने में बैंक निफ्टी में 5,000 अंकों की धमाकेदार तेजी देखने को मिल सकती है। इसके अलावा, अगले 12 महीनों में निफ्टी IT इंडेक्स के दोगुना होने की पूरी संभावना है।
खबर का निचोड़:
शेयर बाजार के दिग्गज निवेशक सुशील केडिया ने भारतीय शेयर बाजार को लेकर बेहद तेजी का अनुमान जताया है। उनके अनुसार, आगामी एक से सवा महीने में बैंक निफ्टी में 5,000 अंकों की धमाकेदार तेजी देखने को मिल सकती है। इसके अलावा, अगले 12 महीनों में निफ्टी IT इंडेक्स के दोगुना होने की पूरी संभावना है।
बाजार में आ रहा है कमाई का बड़ा मौका
भारतीय शेयर बाजार में हलचल तेज हो गई है और निवेशकों के लिए एक बड़ा अवसर दस्तक दे रहा है। केडियानॉमिक्स के फाउंडर और दिग्गज बाजार विश्लेषक सुशील केडिया का मानना है कि दलाल स्ट्रीट पर अब वह दौर शुरू हो रहा है, जहां से निवेशकों की संपत्ति में जबरदस्त इजाफा हो सकता है। बाजार के मौजूदा रुझानों और तकनीकी संकेतों का विश्लेषण करते हुए उन्होंने एक बेहद सकारात्मक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है। उनके मुताबिक, बाजार में अब तक की अनिश्चितता पीछे छूट रही है और एक मजबूत रिकवरी की जमीन तैयार हो चुकी है।
बैंक निफ्टी में 5,000 अंकों की तूफानी तेजी के संकेत
बैंकिंग शेयरों पर दांव लगाने वाले निवेशकों के लिए बेहद अच्छी खबर है। सुशील केडिया का अनुमान है कि अगले 30 से 45 दिनों के भीतर बैंक निफ्टी इंडेक्स में 5,000 अंकों की जबरदस्त बढ़त देखने को मिल सकती है। बैंकिंग सेक्टर में आ रही यह तेजी पूरे बाजार के सेंटिमेंट को बदलने में सक्षम होगी। प्राइवेट और पीएसयू दोनों ही वर्ग के बैंक इस रैली की अगुवाई कर सकते हैं। क्रेडिट ग्रोथ, मजबूत बैलेंस शीट और स्थिर ब्याज दरों के माहौल के बीच बैंकिंग इंडेक्स में यह उछाल भारतीय अर्थव्यवस्था के प्रति निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।
निफ्टी IT इंडेक्स 12 महीनों में होगा दोगुना
पिछले कुछ समय से दबाव झेल रहे आईटी सेक्टर को लेकर सुशील केडिया ने सबसे बड़ा और साहसिक दावा किया है। उनका मानना है कि अगले 12 महीनों में निफ्टी-IT इंडेक्स (CNX-IT) का स्तर दोगुना हो सकता है। वैश्विक अनिश्चितताओं और मंदी की आहट के कारण आईटी कंपनियों के शेयरों में जो सुस्ती देखी जा रही थी, वह अब खत्म होने की कगार पर है। अमेरिकी बाजारों में स्थिरता और टेक कंपनियों की डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की नई लहर के चलते भारतीय आईटी कंपनियों के रेवेन्यू और ऑर्डर बुक में तेज सुधार की उम्मीद है।
निवेशकों के लिए संपत्ति निर्माण का सुनहरा अवसर
बाजार में सही समय पर सही जगह पैसा लगाना ही समझदारी होती है। केडिया के अनुसार, मौजूदा स्तरों पर रिस्क-रिवॉर्ड रेश्यो पूरी तरह से खरीदारों के पक्ष में है। बैंकिंग और आईटी जैसे बड़े सेक्टर्स में आने वाली यह तेजी व्यापक बाजार को भी ऊपर खींचने का काम करेगी। जो निवेशक पिछले कुछ समय से बाजार की गिरावट या सुस्ती से घबराए हुए थे, उनके लिए अपनी पोर्टफोलियो रणनीति को फिर से परखने और मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों में पोजीशन बनाने का यह सबसे उपयुक्त समय साबित हो सकता है।

NTA की परीक्षाओं में अब जनता तय करेगी सुधार, 13 सितंबर तक भेजें राय
नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने अपनी परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और छात्र-अनुकूल बनाने के लिए हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का गठन किया है। अब देश के छात्र, अभिभावक, शिक्षक और आम नागरिक 13 सितंबर तक ईमेल, व्हाट्सएप और टोल-फ्री नंबर के जरिए अपने महत्वपूर्ण सुझाव सरकार तक सीधे पहुंचा सकते हैं।
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नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने अपनी परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और छात्र-अनुकूल बनाने के लिए हाई-पावर्ड टास्क फोर्स का गठन किया है। अब देश के छात्र, अभिभावक, शिक्षक और आम नागरिक 13 सितंबर तक ईमेल, व्हाट्सएप और टोल-फ्री नंबर के जरिए अपने महत्वपूर्ण सुझाव सरकार तक सीधे पहुंचा सकते हैं।
मुख्य आर्टिकल
NTA की परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की तैयारी
देश की सबसे बड़ी परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) अब अपनी पूरी प्रणाली को नए सिरे से पारदर्शी और मजबूत बनाने की दिशा में कदम बढ़ा चुकी है। हाल के दिनों में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर उठे सवालों के बीच गठित हाई-पावर्ड टास्क फोर्स ने अब सीधे जनता का रुख किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य परीक्षा संचालन में तकनीकी व प्रशासनिक कमियों को दूर करना और छात्रों के मन में विश्वास बहाल करना है।
आम जनता और छात्र सीधे दे सकते हैं सुझाव
इस पूरी कवायद की सबसे खास बात यह है कि सुधार की इस प्रक्रिया में केवल विशेषज्ञों की नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर समस्याओं का सामना करने वाले छात्रों, उनके अभिभावकों और शिक्षकों की राय को भी प्राथमिकता दी जा रही है। अगर आपके पास परीक्षा केंद्रों के चयन, सुरक्षा प्रोटोकॉल, प्रश्नपत्रों के लीक रोधी तंत्र या ऑनलाइन परीक्षा व्यवस्था से जुड़ा कोई भी इनोवेटिव सुझाव है, तो आप उसे सरकार के समक्ष रख सकते हैं।
राय भेजने के उपलब्ध माध्यम और अंतिम तिथि
टास्क फोर्स तक अपनी बात पहुंचाने के लिए सरकार ने तीन बेहद आसान और सुलभ माध्यम प्रदान किए हैं। नागरिक अपना सुझाव आधिकारिक ईमेल आईडी ExamReforms.Taskforce@dopt.gov.in पर मेल कर सकते हैं। इसके अलावा, त्वरित फीडबैक के लिए व्हाट्सएप नंबर 91 7827042830 भी जारी किया गया है। जो लोग फोन के जरिए अपनी बात रखना चाहते हैं, वे टोल-फ्री नंबर 1800-180-4747 पर संपर्क कर सकते हैं। इन सभी माध्यमों पर सुझाव भेजने की अंतिम तिथि 13 सितंबर तय की गई है।
निष्पक्ष और सुरक्षित परीक्षा संरचना पर फोकस
टास्क फोर्स इन सभी प्राप्त सुझावों का गहन विश्लेषण करेगी और इसके आधार पर एक व्यापक सुधार ढांचा तैयार किया जाएगा। मुख्य ध्यान प्रश्नपत्र निर्माण की गोपनीयता, परीक्षा केंद्रों की डिजिटल निगरानी, बायोमेट्रिक सत्यापन और त्वरित शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने पर रहेगा। इस जन-भागीदारी से तैयार होने वाली नई नीति न केवल धांधली की गुंजाइश को पूरी तरह खत्म करेगी, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य को अधिक सुरक्षित और तनावमुक्त भी बनाएगी।

CJP में बगावत: मनीष के आरोपों के बाद टूटी पार्टी, बनी CJP-D
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) में अंदरूनी कलह के बाद बड़ी फूट पड़ गई है। मनीष ब्रह्मभट्ट द्वारा अभिजीत दीपके पर गंभीर आरोप लगाने के बाद नया गुट CJP-D वजूद में आ चुका है। इस बीच दीपके ने IPS सचिन शर्मा पर निशाना साधा है, वहीं समाजवादी पार्टी से गठबंधन की चर्चाएं तेज हैं।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) में अंदरूनी कलह के बाद बड़ी फूट पड़ गई है। मनीष ब्रह्मभट्ट द्वारा अभिजीत दीपके पर गंभीर आरोप लगाने के बाद नया गुट CJP-D वजूद में आ चुका है। इस बीच दीपके ने IPS सचिन शर्मा पर निशाना साधा है, वहीं समाजवादी पार्टी से गठबंधन की चर्चाएं तेज हैं।
अंदरूनी कलह से बिखरी कॉकरोच जनता पार्टी
राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) में एक बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष ब्रह्मभट्ट द्वारा सह-नेता अभिजीत दीपके पर धोखेबाज़ी के गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद पार्टी दो फाड़ हो चुकी है। ब्रह्मभट्ट का सीधा आरोप है कि दीपके ने मुख्य जन-आंदोलन और पार्टी के बुनियादी उद्देश्यों से पूरी तरह दूरी बना ली है, जिससे कार्यकर्ताओं के विश्वास को गहरी ठेस पहुंची है। विचारों और कार्यशैली के इस टकराव ने पार्टी के भीतर लंबे समय से पनप रहे असंतोष को सतह पर ला दिया है।
CJP-D के रूप में नए गुट का हुआ जन्म
ब्रह्मभट्ट और उनके समर्थकों ने आधिकारिक तौर पर अपनी राहें अलग करते हुए CJP-D नाम से एक नए राजनीतिक गुट का गठन कर लिया है। इस नए धड़े के अस्तित्व में आते ही पार्टी का कैडर और जमीनी कार्यकर्ता दो हिस्सों में बंट गए हैं। नए गुट का दावा है कि वे पार्टी के मूल सिद्धांतों और जनांदोलन की भावना को आगे ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिसे मौजूदा नेतृत्व ने नजरअंदाज कर दिया था। इस विभाजन के बाद से दोनों ही गुटों के बीच खींचतान चरम पर पहुंच गई है।
IPS सचिन शर्मा पर भी लगे गंभीर आरोप
एक तरफ जहां CJP आंतरिक मोर्चे पर बिखराव झेल रही है, वहीं दूसरी ओर CJP नेता अभिजीत दीपके ने बाहरी मोर्चे पर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। दीपके ने IPS अधिकारी सचिन शर्मा पर कई संगीन आरोप जड़कर प्रशासनिक महकमे में भी खलबली मचा दी है। दीपके का दावा है कि प्रशासनिक तंत्र का इस्तेमाल पार्टी को कमजोर करने के लिए किया जा रहा है। इस बयानबाज़ी के बाद राजनीति के साथ-साथ प्रशासनिक हलकों में भी हड़कंप मचा हुआ है।
समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की सुगबुगाहट
तमाम राजनीतिक उठापटक और बिखराव के बीच उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावों को लेकर एक नई चर्चा ने जोर पकड़ लिया है। सूत्रों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन सब परिस्थितियों के बीच CJP के समाजवादी पार्टी (SP) के साथ हाथ मिलाने की अटकलें तेज हो गई हैं। यदि यह संभावित गठबंधन अमलीजामा पहनता है, तो यूपी के चुनावी समीकरणों में एक नया मोड़ देखने को मिल सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में यह सियासी ड्रामा क्या रूप लेता है।

तेज प्रताप यादव और मोनिका मणि विवाद: बिहार की राजनीति में 'चप्पल कांड' पर भूचाल
बिहार की सियासत में एक बार फिर पारिवारिक और राजनीतिक उठापटक का दौर तेज हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव एक नए और सनसनीखेज विवाद के केंद्र में आ गए हैं। दिल्ली के एक पॉश होटल में घटी कथित घटना ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, जिसे अब 'चप्पल कांड' के नाम से जाना जा रहा है। इस विवाद ने न केवल व्यक्तिगत दूरियां बढ़ाई हैं, बल्कि कानूनी लड़ाइयां भी शुरू कर दी हैं।
बिहार की सियासत में एक बार फिर पारिवारिक और राजनीतिक उठापटक का दौर तेज हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव एक नए और सनसनीखेज विवाद के केंद्र में आ गए हैं। दिल्ली के एक पॉश होटल में घटी कथित घटना ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, जिसे अब 'चप्पल कांड' के नाम से जाना जा रहा है। इस विवाद ने न केवल व्यक्तिगत दूरियां बढ़ाई हैं, बल्कि कानूनी लड़ाइयां भी शुरू कर दी हैं।
विवाद की शुरुआत और तेज प्रताप का बयान
इस पूरे घटनाक्रम की सुगबुगाहट तब शुरू हुई जब तेज प्रताप यादव ने सार्वजनिक रूप से दिल्ली के एक होटल में मंत्री और मोनिका मणि के बीच हुई एक कथित घटना का जिक्र किया। उनके इस बयान के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में अटकलों और कयासों का बाजार गर्म हो गया। लोग यह जानने के लिए उत्सुक हो गए कि आखिर बंद कमरे में ऐसा क्या हुआ था जिसका जिक्र खुले मंच पर किया जा रहा है।
मोनिका मणि का पलटवार और गंभीर आरोप
मामले ने तूल तब पकड़ा जब मोनिका मणि खुद मीडिया के सामने आईं और उन्होंने तेज प्रताप यादव पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि वह राजनीति में सक्रिय रूप से काम करने के उद्देश्य से तेज प्रताप की पार्टी से जुड़ी थीं। लेकिन दिल्ली के उस होटल के कमरे में तेज प्रताप ने उनके साथ अभद्रता और मारपीट की। इस अप्रत्याशित और चौंकाने वाली घटना के बाद उन्होंने तुरंत खुद को तेज प्रताप और उनकी पार्टी से पूरी तरह अलग कर लिया।
कानूनी शिकंजा और मानहानि का नोटिस
यह विवाद अब केवल जुबानी जंग तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि कानूनी दायरे में प्रवेश कर चुका है। घटना में घसीटे गए मंत्री संजय सिंह ने इस मानहानिपूर्ण और बेबुनियाद जिक्र पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने तेज प्रताप यादव को आधिकारिक तौर पर मानहानि का नोटिस भेज दिया है, जिससे इस मामले में कानूनी कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
बिहार के राजनीतिक पटल पर यह नया विवाद राजद की अंदरूनी कलह और नेताओं के निजी आचरण को एक बार फिर से जनता के कटघरे में खड़ा कर रहा है। जैसे-जैसे इस मामले में नए पन्ने पलट रहे हैं, आगामी दिनों में राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ने के पूरे आसार हैं।

सैम ऑल्टमैन का दावा: 1 बादाम के बराबर पानी में चैटजीपीटी देगा 38 हजार जवाब
ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने चैटजीपीटी के पानी की खपत से जुड़ी चिंताओं को खारिज करते हुए एक दिलचस्प दावा किया है। उन्होंने बताया कि कैलिफोर्निया में एक अकेला बादाम उगाने में जितना पानी खर्च होता है, उतने में चैटजीपीटी 38,000 सवालों के जवाब आसानी से जनरेट कर सकता है।
खबर का निचोड़
ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने चैटजीपीटी के पानी की खपत से जुड़ी चिंताओं को खारिज करते हुए एक दिलचस्प दावा किया है। उन्होंने बताया कि कैलिफोर्निया में एक अकेला बादाम उगाने में जितना पानी खर्च होता है, उतने में चैटजीपीटी 38,000 सवालों के जवाब आसानी से जनरेट कर सकता है।
एआई और पर्यावरण विवाद पर ऑल्टमैन का पलटवार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती लोकप्रियता के साथ ही इसके डेटा सेंटर्स द्वारा की जाने वाली बिजली और पानी की भारी खपत को लेकर दुनियाभर में चर्चा गर्म है। पर्यावरणविदों का तर्क रहा है कि एआई मॉडल्स को प्रोसेस करने में लाखों लीटर पानी बर्बाद होता है। हालांकि, ओपनएआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सैम ऑल्टमैन ने इन दावों और चिंताओं को सिरे से नकारते हुए एआई की पानी की खपत की तुलना रोजमर्रा की खेती से कर दी है।
एक बादाम बनाम 38 हजार चैटजीपीटी जवाब
सैम ऑल्टमैन ने एक तुलनात्मक तर्क पेश करते हुए कहा कि अमेरिका के कैलिफोर्निया में महज एक बादाम उगाने में जितना पानी लगता है, उतने पानी का इस्तेमाल करके चैटजीपीटी यूजर के 38,000 सवालों का जवाब तैयार कर देता है। वर्ष 2019 में आई एक रिसर्च रिपोर्ट के आंकड़े भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि कैलिफोर्निया में एक बादाम की खेती में औसतन 3.56 लीटर (लगभग 3.2 से 4 लीटर) पानी की खपत होती है। इस लिहाज से देखा जाए तो एआई मॉडल की प्रति क्वेरी पानी की खपत बेहद सूक्ष्म स्तर पर पहुंच जाती है।
डेटा सेंटर कूलिंग पर बहस
चैटजीपीटी जैसे विशाल एआई लैंग्वेज मॉडल्स को चलाने के लिए बड़े-बड़े डेटा सेंटर्स और शक्तिशाली सर्वरों की जरूरत होती है। इन सर्वरों को लगातार चालू रखने के दौरान पैदा होने वाली अत्यधिक गर्मी को नियंत्रित करने के लिए कूलिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें पानी की खपत होती है। आलोचकों का मानना था कि डिजिटल तकनीक का यह भौतिक प्रभाव पर्यावरण संतुलन को बिगाड़ रहा है। ऑल्टमैन का यह बयान इसी धारणा को बदलने और यह दर्शाने का प्रयास है कि तकनीक की वास्तविक खपत कृषि या अन्य उद्योगों की तुलना में कहीं अधिक दक्ष है।
टेक जगत में संसाधनों के कुशल उपयोग की दिशा
टेक कंपनियां अब अपने डेटा सेंटर्स को अधिक सस्टेनेबल और ऊर्जा-कुशल बनाने पर लगातार काम कर रही हैं। ऑल्टमैन का यह बयान न केवल डेटा सेंटर्स की कार्यप्रणाली का बचाव करता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि कंप्यूटिंग पावर के बढ़ने के बावजूद प्रति क्वेरी संसाधनों की खपत को अभूतपूर्व रूप से कम किया जा चुका है।
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