
कोचिंग मुक्त होगा IIT का रास्ता: 2030 तक लागू हो सकता है 'एडैप्टिव' JEE एडवांस्ड
IIT में दाखिले की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बड़ा बदलाव होने जा रहा है। 2030 तक JEE एडवांस्ड परीक्षा को 'एडैप्टिव' बनाया जा सकता है। इसमें छात्र के जवाबों के आधार पर प्रश्नों का कठिनाई स्तर तय होगा। लगभग 4,000 छात्रों पर इसका सफल पायलट टेस्ट किया जा चुका है।
IIT में दाखिले की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए बड़ा बदलाव होने जा रहा है। 2030 तक JEE एडवांस्ड परीक्षा को 'एडैप्टिव' बनाया जा सकता है। इसमें छात्र के जवाबों के आधार पर प्रश्नों का कठिनाई स्तर तय होगा। लगभग 4,000 छात्रों पर इसका सफल पायलट टेस्ट किया जा चुका है।
क्या है 'एडैप्टिव' परीक्षा प्रणाली?
एडैप्टिव टेस्ट प्रणाली का सीधा नियम है कि परीक्षा छात्र के ज्ञान और क्षमता के अनुसार खुद को ढालती है। कंप्यूटर स्क्रीन पर दिखने वाला हर अगला सवाल इस बात पर निर्भर करेगा कि उम्मीदवार ने पिछले सवाल का सही जवाब दिया है या गलत।
यदि छात्र किसी प्रश्न का सही उत्तर देता है, तो अगला सवाल थोड़ा अधिक कठिन आएगा। इसके विपरीत, गलत उत्तर देने पर अगला प्रश्न तुलनात्मक रूप से आसान होगा। यह प्रक्रिया पूरी परीक्षा के दौरान चलती रहती है। इससे छात्र की वास्तविक समझ का सटीक मूल्यांकन हो पाता है, न कि केवल रटे-रटाए जवाबों का।
4,000 छात्रों पर हुआ पायलट टेस्ट
इस नई व्यवस्था को जमीन पर उतारने के लिए IITs ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। हाल ही में विभिन्न IITs के लगभग 4,000 छात्रों को शामिल करके एक एप्टीट्यूड टेस्ट कराया गया। यह एक पायलट प्रोजेक्ट था, जिसके जरिए यह समझने की कोशिश की गई कि कंप्यूटर-बेस्ड एडैप्टिव टेस्टिंग भारतीय परीक्षा माहौल में कितनी कारगर साबित हो सकती है।
इस टेस्ट के शुरुआती नतीजे और डेटा IITs के लिए इस दिशा में आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। 2030 तक इस पूरी प्रणाली को JEE एडवांस्ड में पूरी तरह से एकीकृत करने का लक्ष्य रखा गया है।
कोचिंग संस्कृति पर लगेगा अंकुश
वर्तमान समय में इंजीनियरिंग की तैयारी एक विशाल उद्योग बन चुकी है। छात्र वर्षों तक कोचिंग सेंटरों में शॉर्टकट, ट्रिक और पुराने ढर्रे के पैटर्न को रटने में लगे रहते हैं। एडैप्टिव मॉडल लागू होने से कोचिंग संस्थानों के पास पहले से तैयार पेटर्न या सेट फॉर्मूले काम नहीं आएंगे।
जब हर छात्र का परीक्षा पैटर्न उसकी क्षमता के हिसाब से अलग और डायनामिक होगा, तो रटंत विद्या का महत्व खत्म हो जाएगा। इससे उम्मीदवारों की वास्तविक तार्किक क्षमता और विषय की गहरी समझ ही काम आएगी, जिससे कोचिंग पर अत्यधिक निर्भरता में बड़ी कमी आएगी।
तनावमुक्त होगा परीक्षा का माहौल
JEE एडवांस्ड को देश की सबसे कठिन और तनावपूर्ण परीक्षाओं में गिना जाता है। कट-ऑफ और एक जैसे कठिन प्रश्नों का दबाव छात्रों पर मानसिक बोझ बढ़ाता है। एडैप्टिव प्रणाली में हर छात्र को उसकी योग्यता के अनुसार सवाल मिलते हैं, जिससे लगातार कठिन सवालों के कारण होने वाला मानसिक दबाव कम होता है। यह व्यवस्था छात्रों को अपनी क्षमता प्रदर्शन का बेहतर और निष्पक्ष अवसर प्रदान करेगी।

'मेरी पत्नी ज्योति मौर्य जैसी नहीं', नई-वेवेल SDM के पति का बयान वायरल
हाल ही में सोशल मीडिया पर एक नए नवेली SDM के पति का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। उन्होंने अपनी पत्नी की सफलता पर खुलकर बात की और चर्चित ज्योति मौर्य प्रकरण से तुलना करते हुए अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि हर रिश्ता एक जैसा नहीं होता और पत्नी का समर्थन करना बेहद जरूरी है।
हाल ही में सोशल मीडिया पर एक नए नवेली SDM के पति का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। उन्होंने अपनी पत्नी की सफलता पर खुलकर बात की और चर्चित ज्योति मौर्य प्रकरण से तुलना करते हुए अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि हर रिश्ता एक जैसा नहीं होता और पत्नी का समर्थन करना बेहद जरूरी है।
वायरल वीडियो और चर्चा की शुरुआत
सोशल मीडिया के इस दौर में आए दिन कोई न कोई मामला चर्चा का विषय बन जाता है। इन दिनों एक नए नवेली SDM बने महिला के पति का इंटरव्यू इंटरनेट पर तहलका मचा रहा है। इस वीडियो में वह शख्स अपनी पत्नी की कामयाबी और उसके संघर्ष के सफर के बारे में खुलकर बोलता नजर आ रहा है। लोगों के बीच यह वीडियो इसलिए भी खास बन गया है क्योंकि इसमें चर्चित ज्योति मौर्य और उनके पति के विवाद का जिक्र छिड़ गया है।
ज्योति मौर्य मामले पर पति की बेबाक राय
वायरल हो रहे इस वीडियो में उस शख्स ने साफ तौर पर कहा कि उनकी पत्नी की तुलना ज्योति मौर्य से करना बिल्कुल गलत है। उन्होंने आत्मविश्वास के साथ यह बात कही कि वह अपनी पत्नी को बहुत अच्छे से जानते हैं और उनके रिश्ते में ऐसा कभी कुछ नहीं हो सकता। उनका यह बयान ऐसे समय पर आया है जब समाज में अक्सर महिलाओं के प्रशासनिक पदों पर पहुंचने के बाद पारिवारिक रिश्तों में खटास आने की चर्चाएं आम हो जाती हैं।
पारिवारिक पृष्ठभूमि और आपसी विश्वास का महत्व
बातचीत के दौरान उस शख्स ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी रिश्ते में पारिवारिक पृष्ठभूमि और आपसी समझ बहुत ज्यादा मायने रखती है। उन्होंने यह भी कहा कि एक-दो घटनाओं की वजह से हर रिश्ते या हर महिला को नकारात्मक नजर से देखना पूरी तरह गलत है। उन्होंने माना कि उन्होंने अपनी पत्नी का हर कदम पर साथ दिया है और उनका मानना है कि हर पति को अपनी पत्नी को आगे बढ़ाने और पढ़ाने का पूरा मौका देना चाहिए।
हर मामले को एक तराजू में तौलना सही नहीं
यह पूरा मामला समाज की उस मानसिकता पर सवाल खड़े करता है जहां एक घटना के आधार पर पूरे सिस्टम या रिश्तों पर शक किया जाने लगता है। इस नए नवेली SDM के पति का यह सकारात्मक रुख उन लोगों के लिए एक बड़ा संदेश है जो महिलाओं की शिक्षा और उनकी सफलता को लेकर नकारात्मक धारणा रखते हैं। उनका यह वीडियो इंटरनेट पर खूब सराहा जा रहा है और लोग इस पति-पत्नी की जोड़ी की मिसाल दे रहे हैं।

NRI ग्राहकों को झटका: HDFC, ICICI और SBI ने घटाईं FCNR जमा दरें
आरबीआई द्वारा डॉलर-रुपया स्वैप विंडो को समय से पहले बंद करने के फैसले के बाद देश के बड़े बैंकों ने FCNR जमा दरों में भारी कटौती की है। एचडीएफसी, आईसीआईसीआई और एसबीआई द्वारा ब्याज दरें लगभग आधी करने से एनआरआई निवेशकों को मिलने वाले रिटर्न में बड़ा नुकसान तय माना जा रहा है।
खबर का निचोड़
आरबीआई द्वारा डॉलर-रुपया स्वैप विंडो को समय से पहले बंद करने के फैसले के बाद देश के बड़े बैंकों ने FCNR जमा दरों में भारी कटौती की है। एचडीएफसी, आईसीआईसीआई और एसबीआई द्वारा ब्याज दरें लगभग आधी करने से एनआरआई निवेशकों को मिलने वाले रिटर्न में बड़ा नुकसान तय माना जा रहा है।
FCNR दरों में भारी कटौती से NRI निवेशकों को झटका
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा विशेष डॉलर-रुपया स्वैप विंडो को समय से पहले बंद करने का असर अब बैंकिंग क्षेत्र पर स्पष्ट रूप से दिखने लगा है। देश के प्रमुख निजी और सरकारी बैंकों ने विदेशी मुद्रा गैर-निवासी (FCNR-B) जमा योजनाओं पर मिलने वाले ब्याज में सीधी और बड़ी कटौती कर दी है। इस फैसले का सीधा असर गैर-निवासी भारतीयों (NRIs) की कमाई पर पड़ेगा, जो सुरक्षित और बेहतर रिटर्न के लिए भारतीय बैंकों की FCNR योजनाओं में भारी निवेश करते हैं।
किस बैंक ने कितनी घटाई ब्याज दर
कटौती के इस आंकड़े ने बैंकिंग सेक्टर और निवेशकों, दोनों को चौंकाया है। देश के सबसे बड़े निजी बैंक एचडीएफसी (HDFC) बैंक ने अपनी 5-साल की FCNR (B) जमा दर को 6.25% से सीधे घटाकर 3.15% कर दिया है। वहीं आईसीआईसीआई (ICICI) बैंक ने भी इसी अवधि की दरों को 6.00% से घटाकर 2.90% पर ला दिया है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) में भी 5-वर्षीय रेगुलर FCNR (B) दर अब घटकर 3.05% रह गई है। ब्याज दरों में लगभग 50% तक की यह गिरावट एनआरआई जमाकर्ताओं के लिए एक बड़ा झटका मानी जा रही है।
RBI के फैसले का बैंकों पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि बैंकों द्वारा उठाया गया यह कदम सीधे तौर पर आरबीआई की मौद्रिक नीतियों से जुड़ा हुआ है। जब रिज़र्व बैंक ने अपनी विशेष स्वैप सुविधा को तय समय से पहले समाप्त किया, तो बैंकों के पास विदेशी मुद्रा तरलता प्रबंधन के विकल्प सीमित हो गए। इस खिड़की के बंद होने से बैंकों के लिए FCNR जमा पर ऊंची ब्याज दरें देना अब वित्तीय रूप से व्यवहार्य नहीं रह गया था। यही वजह है कि बैंकों ने अपनी लागत को संतुलित करने के लिए FCNR दरों में त्वरित संशोधन किया।
विदेशी मुद्रा प्रवाह और एनआरआई पोर्टफोलियो
FCNR खातों की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि इसमें एनआरआई ग्राहकों को करेंसी जोखिम (Exchange Rate Risk) नहीं उठाना पड़ता। डॉलर या अन्य प्रमुख विदेशी मुद्राओं में जमा किए गए पैसे पर मिलने वाला निश्चित रिटर्न हमेशा से एनआरआई निवेशकों को आकर्षित करता रहा है। हालांकि, दरों में इतनी बड़ी कटौती के बाद अब भारतीय बैंकों में विदेशी मुद्रा का प्रवाह धीमा होने की आशंका जताई जा रही है। कई निवेशक अब उच्च रिटर्न वाले अन्य वैश्विक विकल्पों या डेट इंस्ट्रूमेंट्स की तरफ रुख कर सकते हैं।

SaaS जगत को बड़ा झटका: Whatfix के सह-संस्थापक खादिम बट्टी का निधन
भारतीय एंटरप्राइज़ सॉफ्टवेयर और SaaS उद्योग ने अपना एक दिग्गज चेहरा खो दिया है। Whatfix के सह-संस्थापक और सीईओ खादिम बट्टी का अचानक निधन हो गया। 2014 में स्थापित उनकी कंपनी ने वैश्विक स्तर पर डिजिटल एडॉप्शन प्लैटफॉर्म क्षेत्र में क्रांति ला दी थी। भारतीय टेक कम्युनिटी उनके विजनरी नेतृत्व को याद कर शोक व्यक्त कर रही है।
खबर का निचोड़
भारतीय एंटरप्राइज़ सॉफ्टवेयर और SaaS उद्योग ने अपना एक दिग्गज चेहरा खो दिया है। Whatfix के सह-संस्थापक और सीईओ खादिम बट्टी का अचानक निधन हो गया। 2014 में स्थापित उनकी कंपनी ने वैश्विक स्तर पर डिजिटल एडॉप्शन प्लैटफॉर्म क्षेत्र में क्रांति ला दी थी। भारतीय टेक कम्युनिटी उनके विजनरी नेतृत्व को याद कर शोक व्यक्त कर रही है।
टेक जगत में शोक की लहर: एक विजनरी लीडर को खोया
भारतीय स्टार्टअप और टेक्नोलॉजी जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। एंटरप्राइज़ सॉफ्टवेयर क्षेत्र की जानी-मानी कंपनी Whatfix के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) खादिम बट्टी का निधन हो गया है। उनके असमय चले जाने से संपूर्ण भारतीय SaaS (सॉफ्टवेयर-ऐज-अ-सर्विस) और AI फाउंडर कम्युनिटी में शोक की लहर दौड़ गई है। उन्होंने न केवल एक सफल टेक कंपनी खड़ी की, बल्कि भारत से वैश्विक स्तर के सॉफ्टवेयर उत्पाद बनाने का रास्ता भी दिखाया।
शून्य से शिखर तक: Whatfix की सफलता का सफर
खादिम बट्टी ने साल 2014 में अपने साथी वाड़ा कुमार नांबुरु के साथ मिलकर Whatfix की नींव रखी थी। उस समय कंपनियों को अपने कर्मचारियों और ग्राहकों को नए सॉफ्टवेयर अपनाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। खादिम ने इस समस्या को समझा और एक ऐसा 'डिजिटल एडॉप्शन प्लैटफॉर्म' तैयार किया, जिसने एंटरप्राइज़ सॉफ्टवेयर के उपयोग को बेहद सरल और सुलभ बना दिया। देखते ही देखते Whatfix दुनिया भर की दिग्गज कंपनियों की पहली पसंद बन गया और इसने वैश्विक टेक मानचित्र पर अपनी मजबूत जगह बना ली।
मजबूत तकनीकी पृष्ठभूमि और दूरदर्शी सोच
Whatfix की शुरुआत करने से पहले खादिम बट्टी का करियर बेहद शानदार और उपलब्धियों से भरा रहा। उन्होंने हुआवेई टेक्नोलॉजीज़ (Huawei Technologies) में डिलीवरी हेड के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं, जहां उन्होंने बड़े पैमाने पर तकनीकी प्रोजेक्ट्स को संभाला। इसके अलावा वह 'SearchEnabler' के सह-संस्थापक और सीईओ भी रहे। उनके पास एंटरप्राइज़ टेक्नोलॉजी, उत्पाद विकास और बाजार की ज़रूरतों को समझने की अद्भुत क्षमता थी। उनकी यही दूरदर्शी सोच उनके हर कदम में साफ झलकती थी।
स्टार्टअप इकोसिस्टम के मार्गदर्शक
खादिम सिर्फ एक सफल उद्यमी ही नहीं थे, बल्कि भारतीय टेक और AI इकोसिस्टम के एक बेहद सक्रिय और मददगार सदस्य थे। वह नए संस्थापकों और उभरते हुए युवाओं को मेंटर करने के लिए हमेशा तत्पर रहते थे। भारतीय SaaS कम्युनिटी को वैश्विक पहचान दिलाने में उनका योगदान हमेशा अविस्मरणीय रहेगा। टेक जगत उन्हें एक शांत, विनम्र और बेहद तेजतर्रार लीडर के रूप में हमेशा याद रखेगा, जिन्होंने भारतीय स्टार्टअप्स को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।

बैंक खाते से कटे गलत पैसे? परेशान न हों, RBI के इस नियम से तुरंत वापस मिलेगा फंड
डिजिटल बैंकिंग के दौर में गलत ट्रांजैक्शन या खाते से अतिरिक्त पैसे कट जाना आम बात हो गई है। अगर बैंक आपकी शिकायत के बाद भी रकम वापस करने में आनाकानी करता है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) का बैंकिंग ओंबुड्समैन नियम आपको पूरा पैसा वापस दिलाने की कानूनी गारंटी देता है।
खबर का निचोड़
डिजिटल बैंकिंग के दौर में गलत ट्रांजैक्शन या खाते से अतिरिक्त पैसे कट जाना आम बात हो गई है। अगर बैंक आपकी शिकायत के बाद भी रकम वापस करने में आनाकानी करता है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) का बैंकिंग ओंबुड्समैन नियम आपको पूरा पैसा वापस दिलाने की कानूनी गारंटी देता है।
डिजिटल दौर में खाते से सेंध या सिस्टम की चूक
आजकल ज्यादातर लोग यूपीआई, नेट बैंकिंग या डेबिट कार्ड से लेनदेन करते हैं। अक्सर सर्वर डाउन होने या किसी तकनीकी गड़बड़ी के कारण खाते से पैसे तो कट जाते हैं, लेकिन सामने वाले व्यक्ति तक नहीं पहुंचते। कई बार बैंक बिना किसी पूर्व सूचना या गलती के एक्स्ट्रा चार्ज भी काट लेते हैं। ऐसी स्थिति में ग्राहक खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं, जबकि RBI के स्पष्ट निर्देश हैं कि ऐसी चूकों पर ग्राहकों के अधिकारों की रक्षा हर हाल में की जाएगी।
शिकायत की पहली सीढ़ी: सबूत के साथ दर्ज कराएं आपत्ति
खाते से गलत पैसे कटते ही सबसे पहला कदम बैंक को सूचित करने का होना चाहिए। अपने बैंक के कस्टमर केयर पर कॉल करें और घटना की तुरंत जानकारी दें। इसके बाद बैंक के ऑफिशियल ऐप, वेबसाइट या ब्रांच में जाकर लिखित शिकायत दर्ज कराएं। ट्रांजैक्शन का मैसेज, बैंक स्टेटमेंट और रेफरेंस नंबर जैसी तमाम जानकारियों को संभालकर रखें। शिकायत दर्ज होते ही बैंक से एक यूनीक कंप्लेंट नंबर जरूर लें, क्योंकि आगे की पूरी कार्रवाई इसी नंबर पर आधारित होगी।
30 दिनों की समय सीमा और RBI का दखल
नियमानुसार बैंक को आपकी शिकायत पर 30 दिनों के भीतर समाधान निकालना अनिवार्य है। यदि बैंक एक महीने के भीतर आपकी समस्या का हल नहीं निकालता या बैंक का जवाब संतोषजनक नहीं होता, तो मामला रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया के पाले में चला जाता है। RBI का 'बैंकिंग ओंबुड्समैन' (बैंकिंग लोकपाल) ग्राहकों के अधिकारों की रक्षा के लिए ही बनाया गया है। यहां शिकायत करना बेहद आसान और पूरी तरह से मुफ्त है।
बैंकिंग ओंबुड्समैन के पास ऐसे करें शिकायत
RBI के पोर्टल (cms.rbi.org.in) पर जाकर कोई भी व्यक्ति ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकता है। इसके अलावा toll-free नंबर 14448 पर कॉल करके या लिखित रूप में RBI के लोकपाल कार्यालय को आवेदन भेजा जा सकता है। शिकायत दर्ज करते समय अपनी पुरानी बैंक कंप्लेंट का ब्योरा और ट्रांजैक्शन के सबूत अपलोड करने होते हैं। रिज़र्व बैंक मामले की निष्पक्ष जांच करता है और बैंक की लापरवाही साबित होने पर न केवल पूरा पैसा वापस दिलाता है, बल्कि मानसिक प्रताड़ना के लिए हर्जाना लगाने का भी प्रावधान रखता है।
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