
यूपी चुनाव से पहले डीपफेक वार: अखिलेश के वीडियो ने बढ़ाई सियासत
उत्तर प्रदेश की राजनीति में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल अब एक नए और खतरनाक विवाद का केंद्र बन गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक एआई-जनरेटेड वीडियो सामने आने के बाद सियासी पारा चढ़ गया है, जिससे सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल अब एक नए और खतरनाक विवाद का केंद्र बन गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक एआई-जनरेटेड वीडियो सामने आने के बाद सियासी पारा चढ़ गया है, जिससे सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।
डिजिटल सियासत का नया हथियार बना AI
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का एक एआई-तैयार वीडियो दिखाए जाने के बाद सूबे की राजनीति में भूचाल आ गया है। इस तकनीक के राजनीतिक इस्तेमाल ने न केवल सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि इसे चुनावी वैतरणी पार करने का नया और खतरनाक जरिया भी माना जाने लगा है। जानकारों का मानना है कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, विरोधियों को मात देने के लिए ऐसी तकनीकों का दुरुपयोग और तेजी से बढ़ेगा।
प्रियंका मौर्य का तीखा हमला और बढ़तरी गर्माहट
भारतीय जनता पार्टी की नेता प्रियंका मौर्य ने इस पूरे मामले पर अखिलेश यादव की चुप्पी को लेकर तीखा सवाल उठाया है। भाजपा का आरोप है कि राजनीतिक लाभ के लिए इस तरह के डीपफेक वीडियो का सहारा लेना विपक्ष की बौखलाहट को साफ दिखाता है। पार्टी नेताओं का कहना है कि फर्जी वीडियो के जरिए जनता को गुमराह करने की साजिश रची जा रही है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कानूनी शिकंजा और संतों की कड़ी आपत्ति
विवाद सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसका दायरा कानूनी लड़ाइयों तक पहुंच चुका है। बस्ती सदर विधायक महेंद्र नाथ यादव के विरुद्ध भी एक आपत्तिजनक एआई वीडियो प्रसारित करने के आरोप में तहरीर दी गई है, जिससे कानूनी कार्रवाई का खतरा मंडराने लगा है। इसके साथ ही, संत समाज ने भी इस प्रकार की हरकतों की पुरजोर निंदा की है। संतों का मानना है कि राज्य के मुखिया और प्रतिष्ठित पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ इस तरह के भ्रमित करने वाले वीडियो समाज में गलत संदेश दे रहे हैं।
2027 के महासमर से पहले डिजिटल टकराव
यह पूरा घटनाक्रम आने वाले 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक सरगर्मी को चरम पर पहुंचा रहा है। पारंपरिक रैलियों और भाषणों से आगे बढ़कर अब मुकाबला डिजिटल और वर्चुअल प्लेटफॉर्म्स पर लड़ा जाने लगा है। तकनीक का यह दुरुपयोग राजनीतिक दलों के बीच अविश्वास की खाई को और गहरा कर रहा है, जहां हर दल एक-दूसरे पर वर्चुअल वॉर का आरोप लगा रहा है।

ज़ी एंटरटेनमेंट में भूचाल: सुभाष चंद्रा का शेयर 14% तक धड़ाम
NCLT द्वारा एसेल ग्रुप के फाउंडर सुभाष चंद्रा के ₹22,006 करोड़ के कर्ज को 99.97% माफ कर महज ₹6.5 करोड़ में निपटाने के प्रस्ताव को मंजूरी देने के बाद विवाद गहरा गया है। इस फैसले के खिलाफ कर्जदाता बैंकों ने NCLAT का दरवाजा खटखटाया है, जिसके चलते सोमवार को ज़ी एंटरटेनमेंट के शेयरों में 14.3% की भारी गिरावट आई और भाव ₹87 पर पहुंच गया।
NCLT द्वारा एसेल ग्रुप के फाउंडर सुभाष चंद्रा के ₹22,006 करोड़ के कर्ज को 99.97% माफ कर महज ₹6.5 करोड़ में निपटाने के प्रस्ताव को मंजूरी देने के बाद विवाद गहरा गया है। इस फैसले के खिलाफ कर्जदाता बैंकों ने NCLAT का दरवाजा खटखटाया है, जिसके चलते सोमवार को ज़ी एंटरटेनमेंट के शेयरों में 14.3% की भारी गिरावट आई और भाव ₹87 पर पहुंच गया।
NCLT के फैसले पर बैंकों का विरोध
कर्जमाफी के इस असामान्य फैसले ने बैंकिंग सेक्टर और शेयर बाजार दोनों को झकझोर कर रख दिया है। एसेल ग्रुप पर कुल ₹22,006 करोड़ का भारी-भरकम कर्ज था, जिसे सुलझाने के लिए NCLT ने महज ₹6.5 करोड़ का भुगतान स्वीकार कर लिया। इस तरह 99.97% कर्ज माफ करने के फैसले को बैंकों ने अनुचित माना है। कर्जदाता बैंकों का कहना है कि यह निर्णय वित्तीय नियमों के खिलाफ है और इससे सार्वजनिक धन का बड़ा नुकसान हो रहा है। यही वजह है कि बैंकों ने बिना देर किए NCLAT (नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल) में अपील दायर की है।
शेयर बाजार में मच गई अफरा-तफरी
बैंकों के NCLAT पहुंचते ही निवेशकों का भरोसा बुरी तरह डगमगा गया। सोमवार को बाजार खुलते ही ज़ी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज (ZEEL) के शेयरों में बिकवाली का प्रचंड दबाव देखने को मिला। शेयर ताश के पत्तों की तरह ढह गया और देखते ही देखते 14.3% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। ट्रेडिंग सत्र के दौरान शेयर लुढ़ककर ₹87 के निचले स्तर पर आ गया, जिससे निवेशकों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है।
सुभाष चंद्रा और एसेल ग्रुप की मुश्किलें बढ़ीं
ज़ी ग्रुप और एसेल ग्रुप के प्रमोटर सुभाष चंद्रा लंबे समय से वित्तीय संकट और विधिक कार्रवाइयों से जूझ रहे हैं। NCLT से राहत मिलने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि कर्ज का विवाद सुलझ जाएगा, लेकिन बैंकों के सख्त रुख ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। कानूनी लड़ाई के अपीलीय मंच पर पहुंचने से एसेल ग्रुप की रणनीतिक योजनाओं पर ब्रेक लग गया है।
NCLAT के फैसले पर टिकीं सबकी निगाहें
अब पूरा बाजार NCLAT की सुनवाई और उसके आने वाले आदेश पर नजरें टिकाए बैठा है। यदि अपीलेट ट्रिब्यूनल NCLT के फैसले पर स्टे लगाता है या उसे खारिज करता है, तो सुभाष चंद्रा और उनकी कंपनियों के लिए वित्तीय रास्ते और भी कठिन हो जाएंगे। फिलहाल, कानूनी अनिश्चितता और बैंकों के कड़े रुख की वजह से ज़ी एंटरटेनमेंट के शेयरों में भारी अस्थिरता बनी हुई है।

एनकाउंटर पर सुमित के पिता का हंगामा, दी खुदकुशी की धमकी
अंकित बालियान हत्याकांड के बाद पुलिस एनकाउंटर में मारे गए सुमित के पिता का गुस्सा फूट पड़ा है। उन्होंने यूपी पुलिस पर वादाखिलाफी और एनकाउंटर का झूठा आश्वासन देने का आरोप लगाया है। छोटे बेटे पर हुए थर्ड डिग्री टॉर्चर से व्यथित पिता ने अब प्रशासन को सीधे आत्महत्या करने की चेतावनी दी है।
खबर का निचोड़
अंकित बालियान हत्याकांड के बाद पुलिस एनकाउंटर में मारे गए सुमित के पिता का गुस्सा फूट पड़ा है। उन्होंने यूपी पुलिस पर वादाखिलाफी और एनकाउंटर का झूठा आश्वासन देने का आरोप लगाया है। छोटे बेटे पर हुए थर्ड डिग्री टॉर्चर से व्यथित पिता ने अब प्रशासन को सीधे आत्महत्या करने की चेतावनी दी है।
यूपी पुलिस पर वादाखिलाफी का गंभीर आरोप
अंकित बालियान हत्याकांड से जुड़ी जांच और पुलिसिया कार्रवाई अब एक नया मोड़ ले चुकी है। एनकाउंटर में मारे गए सुमित के पिता ने उत्तर प्रदेश पुलिस की साख और उसकी कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का साफ तौर पर कहना है कि एनकाउंटर से पहले पुलिस प्रशासन ने उन्हें सुमित की सुरक्षा और किसी भी तरह की हिंसक कार्रवाई न करने का भरोसा दिया था। इसके बावजूद पुलिस ने अपने वादे को दरकिनार करते हुए सुमित को एनकाउंटर में ढेर कर दिया। इस घटना के बाद से ही परिजनों में भारी आक्रोश और अविश्वास का माहौल बना हुआ है।
छोटे बेटे पर टॉर्चर से टूटा पिता का धैर्य
सुमित के पिता सिर्फ एनकाउंटर की घटना से ही आहत नहीं हैं, बल्कि उनके आक्रोश की सबसे बड़ी वजह उनका छोटा बेटा बना है। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने जांच और पूछताछ के नाम पर उनके छोटे बेटे को हिरासत में लिया और उसके साथ अमानवीय थर्ड डिग्री टॉर्चर किया। बेगुनाह बेटे की शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना को देखने के बाद पिता का धैर्य पूरी तरह से टूट चुका है। उन्होंने अत्यंत भावुक और आक्रामक रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला तो वे आत्महत्या करने को मजबूर होंगे।
कार्यप्रणाली पर खड़े होते गंभीर सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने उत्तर प्रदेश पुलिस की एनकाउंटर नीति और जांच के तरीकों को कटघरे में ला खड़ा किया है। जहां एक तरफ पुलिस प्रशासन अंकित बालियान हत्याकांड में त्वरित कार्रवाई और बदमाशों पर नकेल कसने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ सुमित के परिवार द्वारा लगाए गए आरोप कहानी का दूसरा पहलू बयां कर रहे हैं। बिना ठोस प्रक्रिया के एनकाउंटर करने और परिजनों को प्रताड़ित करने के इन आरोपों ने स्थानीय प्रशासन और मानवाधिकार के मानकों पर बड़े सवाल दाग दिए हैं।
इलाके में बढ़ता तनाव और सन्नाटा
सुमित के पिता के इस आक्रामक रुख और आत्मघाती चेतावनी के बाद से इलाके में तनाव का माहौल गहरा गया है। परिजनों के साथ-साथ स्थानीय लोग भी पुलिस की इस अचानक हुई कार्रवाई और हिरासत में प्रताड़ना की खबरों से स्तब्ध हैं। पूरे मामले को लेकर जनआक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे पुलिस प्रशासन पर भी निष्पक्ष जांच और पारदर्शी जवाबदेही का दबाव बेहद बढ़ गया है।

गैंगस्टर दावों के बीच 'भरी कोर्ट' गाने ने ली अंकित बालियान की जान
अंकित बालियान हत्याकांड में एक सनसनीखेज पहलू सामने आया है, जहां विवाद की मुख्य वजह 'भरी कोर्ट में गोली मारेंगे मेरी जान' गाना बना। अंकित ने यह गीत 55 हजार रुपये में खरीदा था और बाद में 1.5 लाख रुपये में एक म्यूजिक कंपनी को बेचा। इसी व्यावसायिक सौदेबाजी और आपराधिक गुटों के गुस्से ने उनकी जान ले ली।
अंकित बालियान हत्याकांड में एक सनसनीखेज पहलू सामने आया है, जहां विवाद की मुख्य वजह 'भरी कोर्ट में गोली मारेंगे मेरी जान' गाना बना। अंकित ने यह गीत 55 हजार रुपये में खरीदा था और बाद में 1.5 लाख रुपये में एक म्यूजिक कंपनी को बेचा। इसी व्यावसायिक सौदेबाजी और आपराधिक गुटों के गुस्से ने उनकी जान ले ली।
55 हजार की खरीद और डेढ़ लाख का सौदा
म्यूजिक इंडस्ट्री में कदम रख रहे अंकित बालियान ने 'भरी कोर्ट में गोली मारेंगे मेरी जान' गाने के अधिकार राहुल पुट्ठी से 55,000 रुपये में खरीदे थे। इसके बाद उन्होंने इस ट्रैक का कमर्शियल सौदा करते हुए इसे वत्स कंपनी को 1.5 लाख रुपये में बेच दिया। पहली नजर में यह एक सामान्य और मुनाफे वाला व्यावसायिक सौदा दिखता था, लेकिन अंकित को अंदाजा नहीं था कि यह गाना उनके लिए काल बन जाएगा।
गोगी गैंग की चेतावनी और रंजिश
गाने के बोल और इसकी थीम को लेकर कुख्यात गोगी गैंग में सख्त नाराजगी थी। गैंग के सदस्यों ने इस गीत को जितेंद्र मान उर्फ गोगी की रोहिणी कोर्ट में हुई हत्या से जोड़कर देखा। उन्हें लगा कि यह गाना उनके विरोधी गुट को बढ़ावा देने और गोगी की हत्या का महिमामंडन करने के लिए बनाया गया है। इस बात को लेकर गोगी गैंग ने खुलकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी और इस गाने से जुड़े लोगों को अंजाम भुगतने की चेतावनी भी दी थी।
चेतावनी को नजरअंदाज करना पड़ा भारी
आपराधिक गिरोह की ओर से मिली धमकियों के बावजूद गाने का सौदा और उसका प्रमोशन रुका नहीं। गोगी गैंग की चेतावनी को हल्के में लेना अंकित बालियान के लिए जानलेवा साबित हुआ। गैंग ने इस गाने की बिक्री और पब्लिशिंग को सीधे तौर पर अपने आत्मसम्मान और दुश्मनी से जोड़ लिया। नतीजतन, म्यूजिक डील से शुरू हुआ विवाद जल्द ही खूनी रंजिश में बदल गया और अंकित बालियान को अपनी जान गंवानी पड़ी।
म्यूजिक इंडस्ट्री पर फिर उठे गंभीर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि किस तरह रीजनल म्यूजिक इंडस्ट्री में गैंगस्टर्स का दखल और गन-कल्चर को बढ़ावा देने वाले गाने लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रहे हैं। गानों के बोल से लेकर उनकी खरीद-फरोख्त तक, जब आपराधिक गुटों की नजर पड़ती है तो उसका अंजाम इसी तरह की दुखांत घटनाओं के रूप में सामने आता है। पुलिस अब इस हत्याकांड से जुड़े तमाम कड़ियों और म्यूजिक डील के हर पहलू की गहराई से जांच कर रही है।

प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए ट्रेन में लोअर बर्थ पाने का आसान तरीका
भारतीय रेलवे गर्भवती महिलाओं की सुरक्षित और आरामदायक यात्रा के लिए विशेष सुविधा देता है। रेलवे के नियमों के तहत प्रेग्नेंट महिलाओं को प्राथमिकता के आधार पर लोअर बर्थ आवंटित की जाती है। ऑनलाइन या काउंटर टिकट बुकिंग के दौरान सही विकल्प चुनने और यात्रा के दौरान टीटीई से संपर्क करके भी लोअर बर्थ पाई जा सकती है।
भारतीय रेलवे गर्भवती महिलाओं की सुरक्षित और आरामदायक यात्रा के लिए विशेष सुविधा देता है। रेलवे के नियमों के तहत प्रेग्नेंट महिलाओं को प्राथमिकता के आधार पर लोअर बर्थ आवंटित की जाती है। ऑनलाइन या काउंटर टिकट बुकिंग के दौरान सही विकल्प चुनने और यात्रा के दौरान टीटीई से संपर्क करके भी लोअर बर्थ पाई जा सकती है।
आसान होगी यात्रा: रेलवे के खास नियम
ट्रेन का सफर यूं तो सुहाना होता है, लेकिन गर्भवती महिलाओं के लिए यह थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। खासकर तब, जब ट्रेन में ऊपर की बर्थ मिल जाए। इस समस्या को समझते हुए भारतीय रेलवे ने प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए लोअर बर्थ आवंटन से जुड़े विशेष नियम बनाए हैं। इन नियमों का सही इस्तेमाल करके यात्रा को सुगम और सुरक्षित बनाया जा सकता है।
लोअर बर्थ कोटा: किसे और कैसे मिलता है लाभ
रेलवे कंप्यूटरीकृत आरक्षण प्रणाली में गर्भवती महिलाओं के लिए लोअर बर्थ का विशेष कोटा तय रखता है। स्लीपर, 3AC और 2AC श्रेणियों में प्रति कोच सीमित संख्या में लोअर बर्थ इस कोटे के तहत आरक्षित होती हैं। 45 वर्ष या उससे अधिक उम्र की महिलाओं और गर्भवती महिलाओं को यह प्राथमिकता दी जाती है।
यदि कोई महिला अकेले या किसी एक सह-यात्री के साथ यात्रा कर रही है, तो बुकिंग सिस्टम अपने आप उपलब्ध होने पर लोअर बर्थ अलॉट कर देता है। ऑनलाइन टिकट बुक करते समय 'प्रेग्नेंसी कोटा' का चयन करना अनिवार्य होता है।
ऑफलाइन बुकिंग और आवश्यक दस्तावेज
रेलवे आरक्षण केंद्र (PRS) के काउंटर से टिकट लेते समय प्रेग्नेंट महिला के लिए लोअर बर्थ का अनुरोध आसानी से किया जा सकता है। इसके लिए आरक्षण फॉर्म में संबंधित विकल्प चुनना होता है। काउंटर पर बुकिंग के समय डॉक्टर का प्रमाणित मेडिकल सर्टिफिकेट, प्रेग्नेंसी रिपोर्ट और वैध पहचान-पत्र (जैसे आधार कार्ड या वोटर आईडी) की कॉपी जमा करना आवश्यक है। यह दस्तावेज इस बात की पुष्टि करते हैं कि यात्री को लोअर बर्थ की वास्तविक आवश्यकता है।
सीट न मिलने पर टीटीई से कैसे करें संपर्क
कई बार टिकट बुकिंग के समय लोअर बर्थ उपलब्ध नहीं हो पाती और अपर या मिडिल बर्थ अलॉट हो जाती है। ऐसी स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं है। ट्रेन में चढ़ने के बाद यात्री तुरंत ऑन-ड्यूटी टीटीई (TTE) से संपर्क कर सकती हैं।
यदि ट्रेन में कोई लोअर बर्थ खाली रह जाती है या किसी कारणवश कोई यात्री अपनी यात्रा रद्द कर देता है, तो नियमों के अनुसार टीटीई को वह बर्थ प्राथमिकता के आधार पर गर्भवती महिला को अलॉट करनी होती है। इसके लिए महिला यात्री को टीटीई को अपना मेडिकल सर्टिफिकेट दिखाना होगा।
आपातकालीन स्थिति और जरूरी सावधानियां
यात्रा के दौरान गर्भवती महिलाओं को अपना मेडिकल फाइल, डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन और आवश्यक दवाएं हमेशा अपने पास रखनी चाहिए। स्टेशन पर कुली या व्हीलचेयर की मदद लेना भी समझदारी होती है। रेलवे की इन सुविधाओं की सही जानकारी होने से प्रेग्नेंट महिलाओं का सफर काफी आरामदायक और तनावमुक्त बन जाता है।
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