
UPI ट्रांजैक्शन लिमिट: जानें आपके काम की हर कैटेगरी की सीमा
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने डिजिटल भुगतान को बेहद आसान बना दिया है। आमतौर पर UPI के जरिए रोजाना ₹1 लाख तक का लेनदेन किया जा सकता है। हालांकि, अस्पताल, शिक्षा, टैक्स और IPO जैसे जरूरी कामों के लिए यह सीमा ₹5 लाख तक है। अलग-अलग कैटेगरी के हिसाब से UPI लिमिट के नियम जानना बेहद जरूरी है।
खबर का निचोड़
यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) ने डिजिटल भुगतान को बेहद आसान बना दिया है। आमतौर पर UPI के जरिए रोजाना ₹1 लाख तक का लेनदेन किया जा सकता है। हालांकि, अस्पताल, शिक्षा, टैक्स और IPO जैसे जरूरी कामों के लिए यह सीमा ₹5 लाख तक है। अलग-अलग कैटेगरी के हिसाब से UPI लिमिट के नियम जानना बेहद जरूरी है।
UPI लिमिट का पूरा गणित
आज के समय में चाय की दुकान से लेकर बड़े मॉल तक, हर जगह UPI से पेमेंट करना हमारी आदत बन चुका है। लेकिन कई बार बड़ा पेमेंट करते वक्त ट्रांजैक्शन फेल हो जाता है और स्क्रीन पर 'लिमिट एक्सीडेड' का मैसेज दिखता है। इसका कारण यह है कि नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग कैटेगरी के लिए अलग-अलग यूपीआई लिमिट तय की है।
सामान्य ट्रांजैक्शन की सीमा
एक आम यूजर के लिए व्यक्तिगत लेन-देन (P2P) यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को पैसे ट्रांसफर करने की मानक सीमा ₹1 लाख प्रति दिन है। आप 24 घंटे के भीतर कुल 10 बार ही UPI ट्रांजैक्शन कर सकते हैं। इसके अलावा, नए यूजर के लिए नियम थोड़ा अलग हैं। जब आप पहली बार किसी UPI ऐप पर अपना अकाउंट सेट करते हैं या नया UPI पिन बनाते हैं, तो शुरुआती 24 घंटों में आप अधिकतम ₹5,000 ही ट्रांसफर कर सकते हैं।
इन मामलों में मिलती है ₹5 लाख तक की छूट
कुछ खास और जरूरी सेवाओं के लिए NPCI ने UPI ट्रांजैक्शन की सीमा को बढ़ाकर ₹5 लाख कर दिया है। अगर आप किसी अस्पताल में मेडिकल बिल भर रहे हैं या किसी स्कूल, कॉलेज या यूनिवर्सिटी में फीस जमा कर रहे हैं, तो आप एक बार में ₹5 लाख तक का पेमेंट कर सकते हैं। इसके अलावा, सरकार को टैक्स का भुगतान करने, शेयर बाजार में IPO के लिए आवेदन करने और आरबीआई की रिटेल डायरेक्ट स्कीम के तहत निवेश करने पर भी ₹5 लाख प्रति ट्रांजैक्शन की छूट मिलती है।
बैंक और ऐप्स के अपने नियम
NPCI द्वारा तय की गई गाइडलाइंस के अलावा, विभिन्न बैंक और थर्ड-पार्टी ऐप्स (जैसे Google Pay, PhonePe, Paytm) भी अपनी सुरक्षा नीतियों के आधार पर daily limit तय करते हैं। उदाहरण के लिए, भले ही NPCI की सीमा ₹1 लाख हो, लेकिन कुछ बैंक एक दिन में अधिकतम ₹25,000 या ₹50,000 तक ट्रांसफर करने की ही अनुमति देते हैं। वहीं, क्रेडिट कार्ड के जरिए UPI पेमेंट या मर्चेंट पेमेंट्स (P2M) के लिए भी सीमाएं बैंक के अनुसार तय होती हैं।

एकतरफा प्यार में मॉडल की नृशंस हत्या, आरोपी जिम ट्रेनर एनकाउंटर में गिरफ्तार
दिल्ली में 21 वर्षीया मॉडल मुस्कान शर्मा की गला घोंटकर और चाकू से गोदकर हत्या करने वाले आरोपी जिम ट्रेनर मोहम्मद इमरान को पुलिस ने एनकाउंटर के बाद गिरफ्तार कर लिया है। इमरान की ओर से फायरिंग किए जाने पर पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए उसके पैरों में गोलियां मारीं। पुलिस के मुताबिक रिलेशनशिप से इनकार करने पर आरोपी मॉडल को जुलाई से लगातार प्रताड़ित कर रहा था।
दिल्ली में 21 वर्षीया मॉडल मुस्कान शर्मा की गला घोंटकर और चाकू से गोदकर हत्या करने वाले आरोपी जिम ट्रेनर मोहम्मद इमरान को पुलिस ने एनकाउंटर के बाद गिरफ्तार कर लिया है। इमरान की ओर से फायरिंग किए जाने पर पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए उसके पैरों में गोलियां मारीं। पुलिस के मुताबिक रिलेशनशिप से इनकार करने पर आरोपी मॉडल को जुलाई से लगातार प्रताड़ित कर रहा था।
दिल्ली में सनसनीखेज वारदात: मॉडल की चाकू से गोदकर हत्या
राजधानी दिल्ली में एक बार फिर सिरफिरे आशिक की खौफनाक करतूत ने सभी को दहला दिया है। 21 वर्षीय उभरती मॉडल मुस्कान शर्मा की नृशंस हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। हत्या के मुख्य आरोपी 26 वर्षीय जिम ट्रेनर मोहम्मद इमरान को पुलिस ने एक नाटकीय मुठभेड़ के बाद दबोच लिया। आरोपी ने पुलिस टीम को देखते ही गोलियां चला दी थीं, जिसके जवाब में पुलिस ने आत्मरक्षार्थ कार्रवाई करते हुए उसके दोनों पैरों में तीन गोलियां मारीं और उसे गिरफ्तार कर लिया।
रिलेशनशिप से इनकार पड़ा भारी, जुलाई से कर रहा था प्रताड़ित
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह पूरा मामला एकतरफा प्यार और सनक का है। आरोपी इमरान पिछले कुछ समय से मुस्कान पर रिलेशनशिप में आने का दबाव बना रहा था। जब मुस्कान ने उसके प्रस्ताव को साफ तौर पर ठुकरा दिया, तो इमरान आपा खो बैठा। जुलाई महीने से ही वह मुस्कान का पीछा कर रहा था और उसे मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था। पीड़िता के बार-बार मना करने के बावजूद आरोपी की हरकतों में कोई सुधार नहीं आया।
पहले दबाया गला, फिर चाकू से किए दनादन वार
घटना वाले दिन इमरान की सनक अपने चरम पर पहुंच गई। उसने पहले मुस्कान का गला घोंटकर उसे बेबस कर दिया और फिर दरिंदगी की सारी हदें पार करते हुए उस पर चाकू से ताबड़तोड़ वार कर दिए। इस हमले में गंभीर रूप से घायल मुस्कान की मौके पर ही मौत हो गई। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी फरार हो गया, जिसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश में कई टीमों का गठन किया।
मुठभेड़ के बाद आरोपी गिरफ्तार, पुलिस की सख्त कार्रवाई
आरोपी की लोकेशन ट्रेस करने के बाद जब पुलिस टीम ने उसे घेरने की कोशिश की, तो उसने खुद को बचाने के लिए पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए जवाबी कार्रवाई की और इमरान के दोनों पैरों में गोलियां मारकर उसे वहीं ढेर कर दिया। घायल हालत में आरोपी को हिरासत में लेकर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस अब मामले के हर पहलू की गहराई से जांच कर रही है ताकि कोर्ट में मजबूत सबूत पेश कर आरोपी को सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके।

HDFC बैंक में बड़े बदलाव की आहट: CEO शशिधर जगदीशन का बड़ा फैसला
HDFC बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO शशिधर जगदीशन ने अपना कार्यकाल न बढ़ाने का फैसला किया है। 26 अक्टूबर को उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है। बैंक बोर्ड की अपीलों के बावजूद जगदीशन अपने निर्णय पर कायम हैं। बैंक अब नए नेतृत्व की तलाश के लिए चयन प्रक्रिया शुरू कर रहा है।
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HDFC बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO शशिधर जगदीशन ने अपना कार्यकाल न बढ़ाने का फैसला किया है। 26 अक्टूबर को उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है। बैंक बोर्ड की अपीलों के बावजूद जगदीशन अपने निर्णय पर कायम हैं। बैंक अब नए नेतृत्व की तलाश के लिए चयन प्रक्रिया शुरू कर रहा है।
HDFC बैंक में एक युग का अंत
भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित संस्थानों में से एक, HDFC बैंक, एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) शशिधर जगदीशन ने अपने वर्तमान कार्यकाल के समाप्त होने के बाद पद पर न बने रहने का बड़ा फैसला लिया है। उनका कार्यकाल इसी साल 26 अक्टूबर को पूरा हो रहा है।
जगदीशन का यह कदम बैंकिंग जगत के लिए बेहद चौंकाने वाला माना जा रहा है। उनके नेतृत्व में बैंक ने न केवल अपनी बाजार स्थिति को मजबूत किया, बल्कि कई प्रमुख रणनीतिक मील के पत्थर भी हासिल किए।
बोर्ड के मनाने पर भी नहीं बदले इरादे
मिली जानकारी के मुताबिक, बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने शशिधर जगदीशन को अपने फैसले पर पुनर्विचार करने और पद पर बने रहने के लिए काफी मनाने की कोशिश की। बोर्ड का मानना था कि उनकी अगुवाई में बैंक जिस रफ्तार से आगे बढ़ रहा है, उसे देखते हुए उनका निरंतर मार्गदर्शन बेहद आवश्यक था।
हालांकि, जगदीशन ने अपने फैसले पर अडिग रहते हुए दोबारा जिम्मेदारी संभालने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने अपने इस व्यक्तिगत और रणनीतिक निर्णय के पीछे की वजहों को स्पष्ट करते हुए पद से सम्मानपूर्वक हटने की इच्छा जताई है।
नए नेतृत्व की तलाश में जुटा बैंक
CEO के इस अचानक लिए गए फैसले के बाद HDFC बैंक के प्रबंधन ने नए उत्तराधिकारी की खोज तेज कर दी है। बैंक ने आधिकारिक बयान जारी कर आश्वस्त किया है कि नए CEO के चयन की प्रक्रिया बहुत जल्द और पारदर्शी तरीके से पूरी कर ली जाएगी।
इंडस्ट्री के विशेषज्ञों का मानना है कि देश के सबसे बड़े निजी बैंक की कमान संभालना किसी भी नए लीडर के लिए एक बड़ी चुनौती और जिम्मेदारी होगी। बैंक की साख, शेयरधारकों के भरोसे और निरंतर विकास की गति को बनाए रखना नए नेतृत्व की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रहेगा।
निवेशकों और बाजार की टिकीं निगाहें
शशिधर जगदीशन के इस फैसले के बाद वित्तीय बाजारों और निवेशकों की नजरें अब पूरी तरह से HDFC बैंक के अगले कदम पर टिक गई हैं। आगामी दिनों में बैंक द्वारा घोषित किए जाने वाले नए लीडरशिप मॉडल से यह तय होगा कि आने वाले समय में HDFC बैंक अपनी विकास यात्रा को किस दिशा में आगे ले जाता है।

दशहरा पर केंद्रीय कर्मचारियों की लगेगी लॉटरी, बोनस 3 गुना बढ़ने के आसार
दशहरा से पहले केंद्रीय कर्मचारियों को बड़ा तोहफा मिल सकता है। पुरानी ₹7,000 की सीलिंग लिमिट को बढ़ाकर ₹21,000 करने की मांग को लेकर NC-JCM ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा है। श्रम मंत्रालय की 25 अगस्त की अधिसूचना के बाद कर्मचारी यूनियनों में बोनस में तीन गुना बढ़ोतरी की उम्मीद जाग गई है।
दशहरा से पहले केंद्रीय कर्मचारियों को बड़ा तोहफा मिल सकता है। पुरानी ₹7,000 की सीलिंग लिमिट को बढ़ाकर ₹21,000 करने की मांग को लेकर NC-JCM ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा है। श्रम मंत्रालय की 25 अगस्त की अधिसूचना के बाद कर्मचारी यूनियनों में बोनस में तीन गुना बढ़ोतरी की उम्मीद जाग गई है।
त्योहार से पहले बड़ी खुशखबरी की तैयारी
दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहारों से ठीक पहले केंद्र सरकार के कर्मचारियों के चेहरे पर बड़ी मुस्कान आने वाली है। सरकारी कर्मचारियों के बोनस की राशि में बंपर इजाफा हो सकता है। नेशनल काउंसिल ऑफ जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने कर्मचारियों के संशोधित बोनस को लेकर सरकार के सामने मजबूती से अपनी बात रखी है।
7 हजार की पुरानी सीमा हटने की उम्मीद
मौजूदा व्यवस्था के तहत कर्मचारियों के बोनस की गणना ₹7,000 की अधिकतम सीमा (सीलिंग लिमिट) के आधार पर की जाती है। NC-JCM ने कैबिनेट सचिव को सीधे पत्र लिखकर मांग की है कि इस पुरानी सीलिंग को तुरंत खत्म किया जाए या इसे बढ़ाकर ₹21,000 किया जाए। अगर सरकार इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लेती है, तो कर्मचारियों को मिलने वाला बोनस तीन गुना तक बढ़ जाएगा।
25 अगस्त की अधिसूचना से जागी उम्मीदें
कर्मचारी यूनियनों के इस कदम के पीछे श्रम मंत्रालय की 25 अगस्त की नई अधिसूचना को मुख्य वजह माना जा रहा है। न्यूनतम वेतन और श्रम मानकों में हुए बदलावों के बाद बोनस की गणना के आधार को बदलना बेहद जरूरी हो गया था। इसी अधिसूचना का हवाला देते हुए यूनियनों ने सरकार से अपील की है कि त्योहारी सीजन में कर्मचारियों को उनके हक की पूरी राशि दी जाए।
कर्मचारियों की जेब में सीधे पहुंचेगा फायदा
बोनस सीलिंग में संशोधन का सीधा असर निचले और मध्यम स्तर के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों पर पड़ेगा। लंबे समय से महंगाई के बीच कर्मचारी बोनस की गणना में बदलाव की राह तक रहे थे। त्योहारी खरीदारी के समय अगर यह संशोधन लागू होता है, तो कर्मचारियों की क्रय शक्ति बढ़ेगी, जिससे बाजार में भी नई रोनक देखने को मिलेगी।
कैबिनेट के फैसले पर टिकी निगाहें
यूनियनों की ओर से कैबिनेट सचिव को पत्र सौंपे जाने के बाद अब अंतिम गेंद सरकार के पाले में है। कर्मचारी संगठनों को पूरा भरोसा है कि सरकार त्योहार से ठीक पहले इस संशोधन पर अपनी मुहर लगा सकती है। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो इस बार दशहरा पर सरकारी कर्मियों के खाते में रिवाइज्ड बोनस की मोटी रकम जमा होगी।

रेपो रेट घटा, फिर भी क्यों नहीं घटती आपकी EMI?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट घटाए जाने के बावजूद कई ग्राहकों की EMI तुरंत कम नहीं होती। MCLR-लिंक्ड लोन की दरें रीसेट डेट आने पर ही बदलती हैं। अब RBI ने नए ड्राफ्ट नियमों के तहत floating लोन के लिए हर तीन महीने में रीसेट अनिवार्य करने का प्रस्ताव दिया है, जिससे ग्राहकों को तुरंत राहत मिलेगी।
खबर का निचोड़:
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट घटाए जाने के बावजूद कई ग्राहकों की EMI तुरंत कम नहीं होती। MCLR-लिंक्ड लोन की दरें रीसेट डेट आने पर ही बदलती हैं। अब RBI ने नए ड्राफ्ट नियमों के तहत floating लोन के लिए हर तीन महीने में रीसेट अनिवार्य करने का प्रस्ताव दिया है, जिससे ग्राहकों को तुरंत राहत मिलेगी।
लोन की EMI में देरी का गणित
जब भारतीय रिजर्व बैंक रेपो रेट में कटौती करता है, तो आम तौर पर होम लोन या अन्य लोन लेने वाले ग्राहक अपनी EMI घटने की उम्मीद लगाने लगते हैं। हालांकि, असलियत में बैंक तुरंत इस कटौती का फायदा ग्राहकों तक नहीं पहुंचाते। इसकी सबसे बड़ी वजह बैंक लोन का मैकेनिज्म है, जिसे मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लैंडिंग रेट (MCLR) कहा जाता है।
MCLR से जुड़े लोन में ब्याज दरें रोजाना या हर महीने नहीं बदलतीं। इसके बजाय, बैंक एक तय अवधि के आधार पर लोन रीसेट करते हैं। ज्यादातर बैंक MCLR-लिंक्ड लोन में एक साल या 6 महीने का रीसेट क्लॉज रखते हैं। इसका मतलब यह है कि अगर RBI आज रेपो रेट घटा देता है, तो आपकी EMI में बदलाव आपकी अगली लोन रीसेट डेट पर ही दिखेगा। यदि आपकी रीसेट डेट 8 महीने बाद है, तो रेपो रेट में कटौती का लाभ पाने के लिए आपको 8 महीने का लंबा इंतजार करना पड़ेगा।
RBI का नया ड्राफ्ट और राहत का रास्ता
ग्राहकों की इसी परेशानी को दूर करने और मॉनेटरी पॉलिसी के बदलावों का फायदा तेजी से आम जनता तक पहुंचाने के लिए RBI ने सख्त कदम उठाने की तैयारी की है। केंद्रीय बैंक ने एक नया ड्राफ्ट जारी किया है, जिसके तहत बैंकों के लोन रीसेट नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है।
इस नए ड्राफ्ट प्रस्ताव के अनुसार, MCLR से जुड़े सभी फ्लोटिंग रेट लोन के लिए रीसेट की अवधि को अधिकतम तीन महीने करने की योजना है। यदि यह नियम लागू हो जाता है, तो बैंकों को हर तीन महीने में कम से कम एक बार ब्याज दरों की समीक्षा करके नया रेट लागू करना होगा। इससे रेपो रेट में कटौती का फायदा ग्राहकों को साल भर इंतजार करने के बजाय अधिकतम 90 दिनों के भीतर मिलने लगेगा।
क्या होगा आम कर्जदारों पर असर
RBI का यह नया फ्रेमवर्क लागू होने के बाद बैंक लंबे समय तक रेपो रेट कटौती का फायदा अपने पास रोककर नहीं रख सकेंगे। हालांकि, इस व्यवस्था का एक पहलू यह भी है कि जब RBI रेपो रेट बढ़ाएगा, तब ब्याज दरें भी हर तीन महीने में तेजी से बढ़ेंगी। इसके बावजूद, पारदर्शिता और त्वरित बदलाव के लिहाज से यह कदम ग्राहकों को अनिश्चितता से बचाएगा और उनके बजट प्रबंधन को बेहतर बनाएगा।
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