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अहमदाबाद को पछाड़ेगा हैदराबाद, बनेगा दुनिया का सबसे बड़ा स्टेडियम

अहमदाबाद को पछाड़ेगा हैदराबाद, बनेगा दुनिया का सबसे बड़ा स्टेडियम

Delight News
📅 01 Sep2026

तेलंगाना की 'भारत फ्यूचर सिटी' में विश्व का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम आकार लेने जा रहा है। लगभग 100 एकड़ में फैले इस हाइटेक स्टेडियम की दर्शक क्षमता 1.32 लाख से अधिक होगी। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम को पीछे छोड़ने वाले इस ड्रीम प्रोजेक्ट का शिलान्यास दिसंबर 2026 में प्रस्तावित है

अहमदाबाद को पछाड़ेगा हैदराबाद, बनेगा दुनिया का सबसे बड़ा स्टेडियम
खबर का निचोड़
तेलंगाना की 'भारत फ्यूचर सिटी' में विश्व का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम आकार लेने जा रहा है। लगभग 100 एकड़ में फैले इस हाइटेक स्टेडियम की दर्शक क्षमता 1.32 लाख से अधिक होगी। अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम को पीछे छोड़ने वाले इस ड्रीम प्रोजेक्ट का शिलान्यास दिसंबर 2026 में प्रस्तावित है।
भारत फ्यूचर सिटी में रचेगा नया इतिहास
भारतीय क्रिकेट के इंफ्रास्ट्रक्चर में जल्द ही एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। तेलंगाना सरकार ने हैदराबाद के पास बन रही आधुनिक 'भारत फ्यूचर सिटी' में एक विश्वस्तरीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम बनाने की भव्य योजना तैयार की है। यह स्टेडियम न केवल भारतीय खेल जगत की शान बढ़ाएगा, बल्कि वैश्विक पटल पर भारत की खेल क्षमता को एक नया आयाम भी देगा।
नरेंद्र मोदी स्टेडियम का टूटेगा रिकॉर्ड
वर्तमान में गुजरात के अहमदाबाद स्थित नरेंद्र मोदी स्टेडियम 1.32 लाख दर्शकों की क्षमता के साथ दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम है। हैदराबाद का यह नया प्रस्तावित स्टेडियम क्षमता के मामले में अहमदाबाद को पीछे छोड़ देगा। 1,32,000 से अधिक सीटिंग कैपेसिटी के साथ यह निर्माणाधीन स्टेडियम दुनिया का सबसे विशाल क्रिकेट ग्राउंड बन जाएगा, जहाँ एक साथ लाखों प्रशंसक मैच का रोमांच महसूस कर सकेंगे।
100 एकड़ में फैलेगा अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए लगभग 100 एकड़ जमीन चिह्नित की गई है। मैदान की विशालता के साथ-साथ यहाँ दर्शकों की सुविधा, पार्किंग, सुरक्षा और खिलाड़ियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाएगा। इसमें आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम, वर्ल्ड-क्लास पवेलियन और एडवांस ट्रेनिंग सेंटर्स शामिल होंगे, जो इसे 21वीं सदी का सबसे आधुनिक स्पोर्ट्स हब बनाएंगे।
दिसंबर 2026 में शिलान्यास की तैयारी
इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो दिसंबर 2026 में इसका आधिकारिक शिलान्यास (फाउंडेशन स्टोन) रखा जा सकता है। शिलान्यास के बाद निर्माण कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि आने वाले समय में यहाँ अंतरराष्ट्रीय मुकाबले और आईसीसी के बड़े टूर्नामेंट्स आयोजित किए जा सकें।
1 सितंबर से बदल रहे हैं ये नियम, आपकी जेब पर पड़ेगा सीधा असर

1 सितंबर से बदल रहे हैं ये नियम, आपकी जेब पर पड़ेगा सीधा असर

Delight News
📅 01 Sep2026

1 सितंबर से देश में कई बड़े बदलाव लागू हो रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रियों के लिए इमिग्रेशन प्रक्रिया आसान हो जाएगी, जहां अब बोर्डिंग पास पर स्टैम्प की जरूरत नहीं होगी। इसके अलावा एलपीजी, एटीएफ, एटीएम शुल्क और एफडी ब्याज दरों में बदलाव सीधे आपकी जेब और दिनचर्या को प्रभावित करेंगे।

1 सितंबर से बदल रहे हैं ये नियम, आपकी जेब पर पड़ेगा सीधा असर
खबर का निचोड़
1 सितंबर से देश में कई बड़े बदलाव लागू हो रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रियों के लिए इमिग्रेशन प्रक्रिया आसान हो जाएगी, जहां अब बोर्डिंग पास पर स्टैम्प की जरूरत नहीं होगी। इसके अलावा एलपीजी, एटीएफ, एटीएम शुल्क और एफडी ब्याज दरों में बदलाव सीधे आपकी जेब और दिनचर्या को प्रभावित करेंगे।
इमिग्रेशन प्रक्रिया में बड़ी राहत
अंतरराष्ट्रीय यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए 1 सितंबर का दिन एक बड़ी राहत लेकर आया है। अब हवाई अड्डों पर इमिग्रेशन काउंटर पर बोर्डिंग पास पर शारीरिक रूप से स्टैम्प लगवाने की बाध्यता खत्म कर दी गई है। यात्री अब अपने मोबाइल फोन में मौजूद डिजिटल बोर्डिंग पास या उसकी प्रिंटेड कॉपी दिखाकर आसानी से इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। इस कदम से हवाई अड्डों पर लगने वाली लंबी लाइनों से मुक्ति मिलेगी और यात्रियों का कीमती समय बचेगा।
एलपीजी और एटीएफ की दरों में बदलाव
हर महीने की पहली तारीख की तरह इस बार भी तेल और गैस कंपनियां एलपीजी सिलेंडरों और एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमतों की समीक्षा करेंगी। कमर्शियल और घरेलू गैस सिलेंडरों के दामों में होने वाला संशोधन आम जनता के बजट को प्रभावित कर सकता है। अगर दरों में कटौती होती है तो यह राहत की बात होगी, लेकिन बढ़ोतरी से रसोई का बजट और बाहर खाना महंगा हो सकता है। वहीं एटीएफ की दरों में बदलाव का सीधा असर हवाई किराए पर पड़ेगा।
बैंक एफडी और एटीएम शुल्क पर नई दरें
बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े कुछ अहम नियम भी 1 सितंबर से बदलने जा रहे हैं। कई प्रमुख बैंक अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की ब्याज दरों में संशोधन कर सकते हैं, जिससे निवेशकों के रिटर्न पर असर पड़ेगा। इसके साथ ही, विभिन्न बैंकों द्वारा फ्री एटीएम ट्रांजैक्शन की सीमा समाप्त होने के बाद लगने वाले अतिरिक्त शुल्क में भी बदलाव की संभावना है। खाताधारकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने संबंधित बैंकों के नए नियमों की जांच कर लें।
एलपीजी ई-केवाईसी कराने की समय सीमा समाप्त
गैस उपभोक्ताओं के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण अपडेट यह है कि एलपीजी कनेक्शन की ई-केवाईसी (e-KYC) कराने की सुविधा 1 सितंबर से बंद हो रही है। जिन उपभोक्ताओं ने दी गई समय सीमा के भीतर अपनी ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी नहीं की है, उन्हें सिलेंडर बुकिंग और सब्सिडी प्राप्त करने में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। सरकार और तेल कंपनियों ने इस प्रक्रिया को अनिवार्य बनाया था ताकि फर्जी कनेक्शनों की पहचान की जा सके।
बॉम्बे हाईकोर्ट की फटकार के बाद झुका महाराष्ट्र FDA, सिप्ला का लाइसेंस बहाल

बॉम्बे हाईकोर्ट की फटकार के बाद झुका महाराष्ट्र FDA, सिप्ला का लाइसेंस बहाल

Delight News
📅 01 Sep2026

बॉम्बे हाईकोर्ट से कड़ी फटकार मिलने के बाद महाराष्ट्र FDA ने दिग्गज फार्मा कंपनी सिप्ला की पुणे यूनिट का दवा बिक्री लाइसेंस रद्द करने वाला अपना आदेश वापस ले लिया है। अदालत ने FDA की इस कार्रवाई को मनमाना और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन करार दिया था।

बॉम्बे हाईकोर्ट की फटकार के बाद झुका महाराष्ट्र FDA, सिप्ला का लाइसेंस बहाल
खबर का निचोड़
बॉम्बे हाईकोर्ट से कड़ी फटकार मिलने के बाद महाराष्ट्र FDA ने दिग्गज फार्मा कंपनी सिप्ला की पुणे यूनिट का दवा बिक्री लाइसेंस रद्द करने वाला अपना आदेश वापस ले लिया है। अदालत ने FDA की इस कार्रवाई को मनमाना और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन करार दिया था।
बिना सुनवाई के कार्रवाई पर हाईकोर्ट का सख्त रुख
महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) को बॉम्बे हाईकोर्ट के कड़े रुख के सामने अंततः कदम पीछे खींचने पड़े हैं। FDA ने देश की प्रमुख फार्मास्युटिकल कंपनी सिप्ला (Cipla) की पुणे स्थित यूनिट का दवा बिक्री लाइसेंस रद्द करने का अपना पुराना आदेश औपचारिक रूप से वापस ले लिया है। इस फैसले से सिप्ला को बड़ी राहत मिली है, वहीं प्रशासनिक जल्दबाजी में लिए गए फैसलों पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
यह पूरा मामला प्रशासनिक शक्तियों के दुरुपयोग और प्रक्रियाओं की अनदेखी से जुड़ा है। FDA ने सिप्ला की पुणे यूनिट पर नियम उल्लंघन का आरोप लगाते हुए उसका लाइसेंस रद्द कर दिया था। हालांकि, इस कठोर कदम को उठाने से पहले कंपनी का पक्ष सुनने की बुनियादी प्रक्रिया को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया। सिप्ला ने FDA के इस एकतरफा फैसले को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन
मामले की सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने FDA के रवैये पर सख्त नाराजगी जताई। अदालत ने टिप्पणी की कि किसी भी संस्थान या संस्था के खिलाफ इतनी बड़ी कार्रवाई करने से पहले उसे अपनी सफाई देने का अवसर देना अनिवार्य है। बिना सुनवाई का मौका दिए लाइसेंस रद्द करना प्राकृतिक न्याय (Natural Justice) के मूल सिद्धांतों का स्पष्ट हनन है।
अदालत ने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि नियामक संस्था ने अपनी सीमाओं से बाहर जाकर और पूरी तरह मनमाने ढंग से यह कदम उठाया है। कानून के दायरे में रहकर काम करने के बजाय अधिकारियों ने प्रक्रियाओं को ताक पर रख दिया। कोर्ट के इस कड़े रुख और संभावित कानूनी नतीजों को देखते हुए FDA के पास अपना आदेश वापस लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।
फार्मा उद्योग और प्रशासनिक जवाबदेही पर असर
सिप्ला जैसी प्रतिष्ठित फार्मा कंपनी के मामले में आया यह मोड़ भारतीय उद्योग जगत और नियामक संस्थाओं के बीच के संतुलन को रेखांकित करता है। यह घटना दर्शाती है कि नियमों का पालन कराने के नाम पर प्रशासनिक एजेंसियां मनमानी नहीं कर सकतीं।
लाइसेंस बहाली के बाद अब सिप्ला की पुणे यूनिट में दवा बिक्री और वितरण से जुड़ी गतिविधियां सुचारू रूप से जारी रह सकेंगी। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि बॉम्बे हाईकोर्ट की यह टिप्पणी भविष्य में अन्य नियामक संस्थाओं के लिए भी एक नजीर बनेगी, ताकि वे किसी भी कंपनी या व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले तय कानूनी प्रक्रियाओं और निष्पक्षता का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करें।
कौन सी सरकारी योजना दोगुनी करेगी आपका पैसा सबसे तेज?

कौन सी सरकारी योजना दोगुनी करेगी आपका पैसा सबसे तेज?

Delight News
📅 31 Aug2026

अपनी गाढ़ी कमाई को बिना जोखिम दोगुना करना चाहते हैं? भारत सरकार की स्मॉल सेविंग स्कीम्स आपके लिए बेहतरीन विकल्प हैं। ब्याज दरों के गणित को समझें तो सुकन्या समृद्धि योजना और सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम सबसे कम समय में पैसे को दोगुना करती हैं। आइए जानते हैं किस योजना में कितना समय लगता है।

कौन सी सरकारी योजना दोगुनी करेगी आपका पैसा सबसे तेज?
खबर का निचोड़:
अपनी गाढ़ी कमाई को बिना जोखिम दोगुना करना चाहते हैं? भारत सरकार की स्मॉल सेविंग स्कीम्स आपके लिए बेहतरीन विकल्प हैं। ब्याज दरों के गणित को समझें तो सुकन्या समृद्धि योजना और सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम सबसे कम समय में पैसे को दोगुना करती हैं। आइए जानते हैं किस योजना में कितना समय लगता है।
गारंटीड रिटर्न और सही योजना का चुनाव
हर निवेशक की चाहत होती है कि उसका पैसा सुरक्षित भी रहे और तेजी से बढ़े। शेयर बाजार की अनिश्चितता के बीच केंद्र सरकार की छोटी बचत योजनाएं (Small Saving Schemes) सुरक्षा और बेहतर रिटर्न का सबसे मजबूत भरोसा देती हैं। ₹50,000 को ₹1 लाख बनाने के गणितीय अनुमान और मौजूदा ब्याज दरों का विश्लेषण करें, तो अलग-अलग सरकारी स्कीमों में लगने वाला समय स्पष्ट दिखाई देता है।
सुकन्या समृद्धि और SCSS में सबसे तेज बढ़ोतरी
अगर आप सबसे कम समय में अपना पैसा दोगुना करना चाहते हैं, तो सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) और सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) सबसे आगे हैं। 8.2% की वार्षिक ब्याज दर के साथ ये दोनों योजनाएं निवेशकों को सबसे ज्यादा रिटर्न देती हैं। इस ब्याज दर के हिसाब से आपका ₹50,000 का निवेश महज 8 साल और 10 महीने में दोगुना होकर ₹1 लाख बन जाता है। जहां SSY बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने का बेहतरीन माध्यम है, वहीं SCSS वरिष्ठ नागरिकों के लिए वित्तीय मजबूती का आधार है।
नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट का बेहतर प्रदर्शन
जो लोग सुकन्या समृद्धि या सीनियर सिटीजन स्कीम के दायरे में नहीं आते, उनके लिए नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) एक शानदार विकल्प है। NSC पर 7.7% की वार्षिक ब्याज दर मिलती है। इस ब्याज दर के साथ आपका पैसा दोगुना होने में 9 साल और 5 महीने का समय लगता है। यह फिक्स्ड इनकम कैटेगरी में मध्यम और लंबी अवधि के लिए सुरक्षित निवेश का बेहतरीन जरिया है।
किसान विकास पत्र और PPF की रफ्तार
किसान विकास पत्र (KVP) में पैसा दोगुना करने की प्रक्रिया काफी पारदर्शी है। वर्तमान में 7.5% ब्याज दर के साथ KVP में आपकी राशि 9 साल और 7 महीने में दोगुनी हो जाती है।
दूसरी ओर, टैक्स छूट और सरकारी गारंटी के कारण लोकप्रिय रहने वाली पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) योजना में थोड़ा अधिक धैर्य रखना पड़ता है। PPF में 7.1% की वार्षिक ब्याज दर मिलती है। इस दर के हिसाब से आपकी रकम को दोगुना होने में करीब 10 साल और 2 महीने का समय लगता है। हालांकि, PPF का मुख्य आकर्षण इसका पूरी तरह से टैक्स-फ्री (EEE श्रेणी) होना है, जो इसे लंबी अवधि के लिए एक टिकाऊ विकल्प बनाता है।
ब्याज दरों का गणित और आपका निवेश
निवेश करने से पहले अपनी जरूरत, समय सीमा और पात्रता को समझना जरूरी है। अगर लक्ष्य सिर्फ तेजी से पैसे दोगुना करना है, तो उच्च ब्याज दर वाली योजनाएं आपकी पहली पसंद होनी चाहिए।
सरकारी स्कूलों के मिड-डे मील में एक्सपायर्ड मसाले, वीडियो वायरल

सरकारी स्कूलों के मिड-डे मील में एक्सपायर्ड मसाले, वीडियो वायरल

Delight News
📅 31 Aug2026

हिंगोली के एक सरकारी स्कूल में मिड-डे मील तैयार करने के लिए एक्सपायर्ड सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा था। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर किया। उन्होंने प्रशासन की लापरवाही पर कड़ा एतराज जताते हुए सवाल उठाया कि क्या जिम्मेदार लोग अपने बच्चों को ऐसा खाना खिलाएंगे।

सरकारी स्कूलों के मिड-डे मील में एक्सपायर्ड मसाले, वीडियो वायरल
हिंगोली के एक सरकारी स्कूल में मिड-डे मील तैयार करने के लिए एक्सपायर्ड सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा था। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर किया। उन्होंने प्रशासन की लापरवाही पर कड़ा एतराज जताते हुए सवाल उठाया कि क्या जिम्मेदार लोग अपने बच्चों को ऐसा खाना खिलाएंगे।
मासूमों की सेहत से सरेआम खिलवाड़
महाराष्ट्र के हिंगोली जिले से एक झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां एक सरकारी स्कूल में बच्चों के लिए बनने वाले मिड-डे मील में एक्सपायर्ड मसालों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा था। इस पूरी घटना का पर्दाफाश तब हुआ जब सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने स्कूल का दौरा किया और रसोई में मौजूद एक्सपायर्ड पैकेट का वीडियो बना लिया।
वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि जिस मसाले से बच्चों का भोजन तैयार हो रहा था, उसकी इस्तेमाल करने की तारीख (Expiry Date) काफी पहले ही निकल चुकी थी। इस लापरवाही ने एक बार फिर स्कूली बच्चों के पोषण और सुरक्षा को लेकर राज्य की पूरी प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अभिजीत दीपके का तीखा हमला
वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर करते हुए अभिजीत दीपके ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा, "ग्रामीण भारत के बच्चों को एक्सपायर्ड खाना खिलाया जा रहा है। यह बेहद शर्मनाक और खतरनाक है। क्या सत्ता में बैठे लोग या अधिकारी अपने बच्चों को भी ऐसा ही खाना खिलाएंगे?"
दीपके का यह वीडियो देखते ही देखते सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। आम नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता और अभिभावक इस वीडियो को देखकर आक्रोशित हैं और लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
मिड-डे मील की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
भारत सरकार की मिड-डे मील (पीएम पोषण) योजना का मुख्य उद्देश्य गरीब और ग्रामीण बच्चों को पौष्टिक भोजन देना है, ताकि वे कुपोषण का शिकार न हों और स्कूल में उनकी उपस्थिति बनी रहे। हालांकि, हिंगोली जैसी घटनाएं यह दर्शाती हैं कि धरातल पर निगरानी प्रणाली कितनी कमजोर हो चुकी है।
मसालों और खाद्य सामग्रियों की जांच किए बिना बच्चों के लिए भोजन पकाया जाना सीधे तौर पर उनके जीवन को खतरे में डालने जैसा है। एक्सपायर्ड और खराब गुणवत्ता वाले भोजन से फूड पॉइजनिंग और गंभीर बीमारियां होने का खतरा हमेशा बना रहता है।
प्रशासन की चुप्पी और जनता का आक्रोश
घटना के सामने आने के बाद से ही स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को बेहतर भविष्य और पोषण की उम्मीद में स्कूल भेजते हैं, लेकिन इस तरह की हरकतें बच्चों के स्वास्थ्य के साथ सीधा सौदा हैं।
इस पूरे मामले ने मिड-डे मील के लिए मिलने वाले बजट, सप्लाई चेन और नियमित निरीक्षण पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। देखना यह होगा कि इस वीडियो के सामने आने के बाद संबंधित विभाग दोषी ठेकेदारों और स्कूल अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करता है।

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