
चंडीगढ़ की सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मनजीत कौर की संदिग्ध मौत, पुलिस कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
सोशल मीडिया पर अपनी पहचान बनाने वाली मनजीत कौर की जिंदगी एक खौफनाक साजिश का शिकार हो गई। पीजीआई चंडीगढ़ में इलाज के दौरान उनकी मौत ने सिस्टम की संवेदनशीलता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवार का आरोप है कि उन्हें जिंदा जलाने की कोशिश की गई थी, लेकिन पुलिस ने महीनों तक न्याय की दिशा में सुस्त रवैया अपनाया।
सोशल मीडिया पर अपनी पहचान बनाने वाली मनजीत कौर की जिंदगी एक खौफनाक साजिश का शिकार हो गई। पीजीआई चंडीगढ़ में इलाज के दौरान उनकी मौत ने सिस्टम की संवेदनशीलता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवार का आरोप है कि उन्हें जिंदा जलाने की कोशिश की गई थी, लेकिन पुलिस ने महीनों तक न्याय की दिशा में सुस्त रवैया अपनाया।
न्याय की जंग हार गईं सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मनजीत कौर
चंडीगढ़ की जानी-मानी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर मनजीत कौर ने 26 अगस्त 2026 को पीजीआई चंडीगढ़ में दम तोड़ दिया। उनकी मौत के साथ ही उस खौफनाक सच से पर्दा उठने लगा है, जिसे दबाने की लगातार कोशिश की जा रही थी। परिवार के मुताबिक, 3 जुलाई को मनजीत का अपहरण किया गया था। आरोप है कि उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई और फिर उन्हें आग के हवाले कर दिया गया, जिससे उनका शरीर बुरी तरह झुलस गया था।
पुलिस की लापरवाही और दर्ज न होने वाले बयान
इस पूरी घटना का सबसे काला पहलू यह है कि जब मनजीत अस्पताल में होश में थीं और बोलने की स्थिति में थीं, तब भी स्थानीय पुलिस ने उनके बयान दर्ज करने की जहमत नहीं उठाई। गंभीर रूप से झुलसने के बाद भी न्याय की गुहार लगा रही एक बेटी के बयानों को नजरअंदाज करना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरा दाग लगाता है। परिवार का यह भी आरोप है कि घटना के इतने दिनों बाद भी एफआईआर दर्ज करने में जानबूझकर देरी की गई, जिससे आरोपियों को बचने का पूरा मौका मिल गया।
मां की शिकायत पर हत्या का मामला दर्ज
पीड़िता की मां की जिद और लगातार विरोध के बाद आखिरकार पुलिस नींद से जागी। मां की शिकायत के आधार पर पुलिस ने दो लोगों के खिलाफ अपहरण, हत्या और अन्य गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। हालांकि, घटना के इतने दिन बीत जाने के बाद भी मुख्य आरोपी पुलिस की पकड़ से दूर हैं। पुलिस महकमा अब आरोपियों की धरपकड़ के लिए ताबड़तोड़ दबिश दे रहा है, लेकिन परिवार और समाज के मन में यह सवाल अब भी कायम है कि अगर पुलिस ने समय रहते कदम उठाया होता, तो शायद मनजीत आज जिंदा होतीं।

यूपी युवाओं के लिए बड़ा ऐलान: 2 करोड़ टैबलेट और 1 लाख नौकरियां
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देवरिया में 305 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात देते हुए बड़ा ऐलान किया है। राज्य सरकार 2 करोड़ युवाओं को मुफ्त टैबलेट बांटेगी। इसके साथ ही पुलिस, होमगार्ड और अन्य विभागों में 1 लाख से अधिक खाली पदों पर नई नियुक्तियां की जाएंगी।
खबर का निचोड़
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देवरिया में 305 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की सौगात देते हुए बड़ा ऐलान किया है। राज्य सरकार 2 करोड़ युवाओं को मुफ्त टैबलेट बांटेगी। इसके साथ ही पुलिस, होमगार्ड और अन्य विभागों में 1 लाख से अधिक खाली पदों पर नई नियुक्तियां की जाएंगी।
यूपी के युवाओं के लिए बड़ा तोहफा
उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में युवाओं के सशक्तिकरण को लेकर एक नया अध्याय जुड़ गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के नौजवानों के भविष्य को संवारने के लिए दो बेहद अहम घोषणाएं की हैं। राज्य सरकार आने वाले दिनों में 2 करोड़ युवाओं को मुफ्त टैबलेट का वितरण करने जा रही है। इसका सीधा मकसद प्रदेश के विद्यार्थियों और युवाओं को डिजिटल रूप से साक्षर और सक्षम बनाना है, ताकि वे आज के आधुनिक दौर में किसी भी प्रतियोगिता से पीछे न छूटें।
1 लाख से अधिक पदों पर होंगी बंपर भर्तियां
डिजिटल क्रांति के साथ-साथ राज्य सरकार ने रोजगार के मोर्चे पर भी बड़ा दांव खेला है। सीएम योगी ने स्पष्ट किया कि प्रदेश के अलग-अलग विभागों में खाली पड़े 1 लाख से अधिक पदों पर जल्द ही पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए नियुक्तियां दी जाएंगी। इस प्रक्रिया के तहत अभ्यर्थियों को सीधे नियुक्ति पत्र सौंपे जाएंगे। सरकार का यह कदम रोजगार की तलाश कर रहे लाखों युवाओं के लिए एक बड़ी राहत बनकर आया है, जिससे राज्य में बड़े पैमाने पर अवसर पैदा होंगे।
पुलिस और होमगार्ड विभाग में सबसे ज्यादा मौके
इस मेगा भर्ती अभियान में सुरक्षा बल और प्रशासनिक सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, अकेले पुलिस महकमे में 36,000 पुलिसकर्मियों की सीधी भर्ती की जाएगी। इसके अलावा होमगार्ड विभाग में भी 45,000 पदों पर बहाली होनी है। वहीं, राज्य के अन्य सरकारी विभागों में 30,000 से अधिक खाली पदों को भरा जाएगा। इन नियुक्तियों से न केवल युवाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक ढांचा भी अधिक मजबूत होगा।
देवरिया को मिली 305 करोड़ की विकास सौगात
इन ऐतिहासिक एलानों की पृष्ठभूमि देवरिया का एक विशेष कार्यक्रम बना, जहां मुख्यमंत्री शनिवार को पहुंचे थे। सीएम योगी आदित्यनाथ ने देवरिया को कुल 305 करोड़ रुपये की लागत वाली 80 विभिन्न विकास परियोजनाओं का उपहार दिया। इन योजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण करते हुए उन्होंने साफ संदेश दिया कि राज्य सरकार का ध्यान बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ जन-जन के कल्याण पर केंद्रित है। शिक्षा, सुरक्षा और रोजगार के क्षेत्र में उठाए गए ये कदम उत्तर प्रदेश के विकास को एक नई दिशा देने का काम करेंगे।

Tata Sons को ROC से मिली बड़ी राहत, 3 महीने टली AGM
कोरम पूरा न होने के कारण टाटा संस की 18 अगस्त को होने वाली वार्षिक आम बैठक (AGM) स्थगित हो गई थी। अब रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज़ (ROC) ने कंपनी को बैठक आयोजित करने के लिए 3 महीने की मोहलत दे दी है। महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर की पाबंदियों के चलते सर रतन टाटा ट्रस्ट के प्रतिनिधि बैठक में शामिल नहीं हो सके थे, जिससे यह स्थिति पैदा हुई।
संक्षेप (Summary):
कोरम पूरा न होने के कारण टाटा संस की 18 अगस्त को होने वाली वार्षिक आम बैठक (AGM) स्थगित हो गई थी। अब रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज़ (ROC) ने कंपनी को बैठक आयोजित करने के लिए 3 महीने की मोहलत दे दी है। महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर की पाबंदियों के चलते सर रतन टाटा ट्रस्ट के प्रतिनिधि बैठक में शामिल नहीं हो सके थे, जिससे यह स्थिति पैदा हुई।
ROC का फैसला और Tata Sons को मिली मोहलत
देश के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित कारोबारी समूहों में शामिल टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी 'टाटा संस' को रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज़ (ROC) से एक बड़ी प्रशासनिक राहत मिली है। ROC ने टाटा संस को अपनी वार्षिक आम बैठक (AGM) आयोजित करने के लिए 3 महीने का अतिरिक्त समय देने का फैसला किया है। इस फैसले के बाद कंपनी को अपनी वित्तीय और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने का पर्याप्त अवसर मिल गया है।
18 अगस्त की बैठक और कोरम का संकट
दरअसल, यह पूरा मामला 18 अगस्त को प्रस्तावित टाटा संस की AGM से जुड़ा हुआ है। उस दिन निर्धारित समय पर बैठक आयोजित की जानी थी, लेकिन आवश्यक कोरम (न्यूनतम सदस्यों की उपस्थिति) पूरा नहीं हो सका। कंपनी नियमों के मुताबिक किसी भी बैठक को वैध मानने के लिए एक निश्चित संख्या में शेयरधारकों या उनके प्रतिनिधियों की मौजूदगी अनिवार्य होती है। कोरम के अभाव में बैठक को बिना किसी फैसले के स्थगित करना पड़ा था।
सर रतन टाटा ट्रस्ट और चैरिटी कमिश्नर की पाबंदियां
बैठक में कोरम पूरा न होने की मुख्य वजह सर रतन टाटा ट्रस्ट से जुड़े कानूनी घटनाक्रम रहे। महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर द्वारा सर रतन टाटा ट्रस्ट पर लगाई गई कुछ पाबंदियों के कारण ट्रस्ट द्वारा नामित प्रतिनिधि इस अहम बैठक में हिस्सा नहीं ले सके। चूंकि टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की बड़ी हिस्सेदारी है, इसलिए इन प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति ने बैठक के संचालन को सीधे तौर पर प्रभावित किया और कोरम अधूरा रह गया।
आगे की राह और प्रशासनिक महत्व
ROC से मिले इस 3 महीने के विस्तार के बाद टाटा संस प्रबंधन को कानूनी और प्रशासनिक अड़चनों को सुलझाने का समय मिल गया है। अब कंपनी सर रतन टाटा ट्रस्ट से जुड़े मुद्दों पर स्पष्टता प्राप्त करने और चैरिटी कमिश्नर के निर्देशों के अनुरूप आगे की रणनीति तय करने में जुट गई है। यह समय सीमा समाप्त होने से पहले कंपनी को नई तारीख का ऐलान कर AGM की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

रिश्वतखोर FDA अधिकारी को भीड़ ने घेरा, कैमरे पर जबरन खिलाए एक्सपायर्ड बिस्कुट
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) अधिकारी पर रिश्वत लेकर एक्सपायर्ड सामान बेचने की छूट देने का आरोप लगा है। गुस्साई भीड़ ने अधिकारी को मौके पर ही घेर लिया और कैमरे के सामने जबरन एक्सपायर्ड बिस्कुट खिलाए। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
खबर का निचोड़
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) अधिकारी पर रिश्वत लेकर एक्सपायर्ड सामान बेचने की छूट देने का आरोप लगा है। गुस्साई भीड़ ने अधिकारी को मौके पर ही घेर लिया और कैमरे के सामने जबरन एक्सपायर्ड बिस्कुट खिलाए। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
जनता का फूटा गुस्सा, कानून के रक्षक ही बने भक्षक
खाद्य सुरक्षा और लोगों की सेहत की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी जब खुद भ्रष्टाचार के दलदल में उतर जाएं, तो जनता का सब्र टूटना लाजमी है। छत्रपति संभाजीनगर से सामने आई यह घटना प्रशासनिक ढिलाई और भ्रष्टाचार पर एक सीधा तमाचा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, एफडीए का यह अधिकारी लंबे समय से इलाके के दुकानदारों से सांठगांठ बनाए हुए था।
अधिकारी पर आरोप है कि उसने एक दुकानदार को बेझिझक मियाद पूरी कर चुके खाद्य पदार्थ बेचने की हरी झंडी दे रखी थी। इसके बदले में वह मोटी रिश्वत ऐंठ रहा था। लोगों को जब इस बात की भनक लगी और उन्होंने दुकान पर बिक रहे सामान की जांच की, तो पूरा मामला शीशे की तरह साफ हो गया।
ऑन-कैमरा इंसाफ, वायरल वीडियो ने मचाया हड़कंप
मामले का खुलासा होते ही स्थानीय नागरिकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। लोगों ने अधिकारी को रंगे हाथों पकड़ने के लिए जाल बिछाया और जैसे ही वह मौके पर पहुंचा, दर्जनों लोगों ने उसे चारों तरफ से घेर लिया। जनता ने सिर्फ अपनी नाराजगी जाहिर नहीं की, बल्कि उसे एक अनोखा सबक सिखाने का फैसला किया।
भीड़ ने अधिकारी के हाथ में वही एक्सपायर्ड बिस्कुट थमा दिए, जिन्हें बेचने के लिए उसने पैसे लिए थे। कैमरे चालू किए गए और जनता के दबाव के आगे बेबस अधिकारी को वे बिस्कुट खाने के लिए मजबूर होना पड़ा। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि अधिकारी हाथ जोड़कर माफी मांग रहा है, लेकिन गुस्साई भीड़ उसे अपनी हरकत का फल चखने पर मजबूर कर रही है।
विभागीय जांच के आदेश, व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
यह वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल गया है। आम नागरिक इस तरह के अधिकारियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि जो सामान बच्चों और बुजुर्गों की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है, उसे बाजार में बिकवाने वाले अधिकारी किसी भी रियायत के हकदार नहीं हैं।
घटना का वीडियो उच्च अधिकारियों तक पहुंचते ही हड़कंप मच गया है। पुलिस और एफडीए के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है। हालांकि, इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जब जिम्मेदार महकमे अपनी ड्यूटी भूल जाते हैं, तो जनता खुद इंसाफ करने पर आमादा हो जाती है।

हरियाणा में मिलावटी 'पूजा घी' पर बड़ा प्रहार, 1 साल का प्रतिबंध
पनीर के बाद हरियाणा सरकार ने मिलावटखोरों पर नकेल कसते हुए राज्य में किसी भी उत्पाद को 'पूजा घी' या 'हवन घी' के नाम से बेचने पर एक साल का प्रतिबंध लगा दिया है। खाद्य सुरक्षा विभाग का यह कदम धर्म के नाम पर बेचे जा रहे घटिया और सेहत के लिए खतरनाक घी की बिक्री पर रोक लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
खबर का निचोड़
पनीर के बाद हरियाणा सरकार ने मिलावटखोरों पर नकेल कसते हुए राज्य में किसी भी उत्पाद को 'पूजा घी' या 'हवन घी' के नाम से बेचने पर एक साल का प्रतिबंध लगा दिया है। खाद्य सुरक्षा विभाग का यह कदम धर्म के नाम पर बेचे जा रहे घटिया और सेहत के लिए खतरनाक घी की बिक्री पर रोक लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
धर्म के नाम पर मिलावट का खेल खत्म
त्योहारों और पूजा-पाठ के दौरान बाजारों में 'पूजा घी' या 'हवन घी' के नाम से बिकने वाले डिब्बों की भरमार रहती है। ये उत्पाद शुद्ध देसी घी की तुलना में काफी सस्ते होते हैं, लेकिन इनके अंदर का सच बेहद डरावना है। शुद्ध घी के नाम पर वनस्पति, पाम ऑयल और नुकसानदेह रसायनों का मिश्रण बेचा जा रहा था। हरियाणा सरकार ने इस चालाकी को भांपते हुए सख्त कदम उठाया है और स्पष्ट कर दिया है कि अब राज्य में केवल वही उत्पाद 'घी' कहलाएगा जो डेयरी मानकों पर शत-प्रतिशत खरा उतरेगा।
खाद्य सुरक्षा विभाग का कड़ा रुख
खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के नियमों का हवाला देते हुए राज्य सरकार ने यह आदेश जारी किया है। अधिकारियों का मानना है कि 'पूजा' या 'हवन' शब्द का इस्तेमाल करके कंपनियां सुरक्षा जांच से बच निकलती थीं। वे दावा करती थीं कि यह उत्पाद खाने के लिए नहीं है, जिससे वे खाद्य सुरक्षा मानकों के दायरे से बाहर हो जाती थीं। लेकिन इस एक साल के बैन के बाद अब कोई भी ब्रांड या व्यापारी इस तरह का फर्जीवाड़ा नहीं कर पाएगा। अगर किसी को 'घी' बेचना है, तो उसे खाद्य सुरक्षा के सभी कड़े मानकों को पूरा करना ही होगा।
सेहत और आस्था दोनों की सुरक्षा
पूजा और हवन में इस्तेमाल होने वाला घी जब जलता है, तो उसका धुआं पूरे घर में फैलता है। मिलावटी और केमिकल युक्त घी जलने पर जहरीली गैसें छोड़ता है, जिससे सांस की बीमारियां, आंखों में जलन और फेफड़ों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। सरकार के इस फैसले से न केवल आम जनता की आस्था का सम्मान सुनिश्चित होगा, बल्कि उनके स्वास्थ्य की भी रक्षा होगी। राज्यभर में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे बाजारों में लगातार छापेमारी करें और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करें।
मिलावटखोरों पर चौतरफा वार
हरियाणा में पनीर और दूध उत्पादों के बाद अब घी पर हुई यह कार्रवाई साफ संदेश देती है कि राज्य में मिलावटखोरी के लिए कोई जगह नहीं है। सरकार का यह कदम बाकी राज्यों के लिए भी एक नजीर पेश करता है। आने वाले दिनों में इस फैसले के असर से बाजारों में सिर्फ वही घी उपलब्ध होगा जो इंसानों के इस्तेमाल के लिए पूरी तरह सुरक्षित और मानक के अनुरूप हो।
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