
सोशल मीडिया पर 2.5 घंटे से ज़्यादा समय? स्टडी में डिप्रेशन का बड़ा खुलासा
सिनसिनाटी और नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स की 11 साल लंबी स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रोजाना 2.5 घंटे से अधिक समय सोशल मीडिया पर बिताने और डिप्रेशन के बीच सीधा संबंध पाया गया है। मानसिक स्वास्थ्य पर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते नकारात्मक असर को यह शोध प्रमुखता से रेखांकित करता है।
खबर का निचोड़
सिनसिनाटी और नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स की 11 साल लंबी स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रोजाना 2.5 घंटे से अधिक समय सोशल मीडिया पर बिताने और डिप्रेशन के बीच सीधा संबंध पाया गया है। मानसिक स्वास्थ्य पर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते नकारात्मक असर को यह शोध प्रमुखता से रेखांकित करता है।
स्क्रीन टाइम और डिप्रेशन का सीधा कनेक्शन
डिजिटल दुनिया में हमारा ज़्यादातर समय स्मार्टफोन की स्क्रीन पर स्क्रॉल करते हुए बीतता है। लेकिन यह आदत केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी गहराई से प्रभावित कर रही है। हाल ही में सिनसिनाटी यूनिवर्सिटी और नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स द्वारा किए गए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि जो लोग रोजाना 2.5 घंटे से अधिक समय सोशल मीडिया पर बिताते हैं, उनमें डिप्रेशन के लक्षण विकसित होने का जोखिम काफी अधिक होता है।
11 वर्षों के आंकड़ों का गहन विश्लेषण
यह अध्ययन केवल कुछ महीनों या कुछ लोगों तक सीमित नहीं था, बल्कि रिसर्चर्स ने इसके लिए पूरे 11 वर्षों के विस्तृत डेटा का गहराई से विश्लेषण किया है। इतने लंबे समय तक लोगों की डिजिटल आदतों और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर नज़र रखने के बाद वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि अत्यधिक सोशल मीडिया इस्तेमाल और डिप्रेशन के बीच एक मजबूत और सीधा संबंध मौजूद है।
मानसिक सेहत पर डिजिटल दुनिया का प्रभाव
शोधकर्ताओं का मानना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगातार दूसरों की ज़िंदगी से तुलना करना, साइबर बुलिंग, नींद की कमी और वास्तविक सामाजिक संपर्कों में कमी जैसे कारक मानसिक तनाव को बढ़ाते हैं। जब कोई व्यक्ति हर दिन ढाई घंटे से ज़्यादा समय वर्चुअल दुनिया में बिताता है, तो उसका मस्तिष्क लगातार सूचनाओं के अतिप्रवाह का सामना करता है। यह स्थिति धीरे-धीरे व्यक्ति को अकेलापन और अवसाद की ओर धकेलने लगती है।
जीवनशैली और आदतों को समझने की ज़रूरत
यह रिसर्च इस बात की ओर भी इशारा करती है कि कैसे हमारी रोज़मर्रा की आदतें अनजाने में ही हमारे दिमाग पर भारी पड़ रही हैं। 11 साल का यह डेटा स्पष्ट रूप से दिखाता है कि जो लोग सीमित समय के लिए इन प्लेटफॉर्म्स का उपयोग करते हैं, उनकी तुलना में अत्यधिक इस्तेमाल करने वालों में अवसाद के मामले काफी अधिक देखे गए। यह अध्ययन तकनीक और इंसान के मानसिक स्वास्थ्य के बीच के संतुलन को समझने की दिशा में एक बेहद अहम मोड़ साबित हो रहा है।

लगातार दो दिनों की गिरावट थमी, 1000 अंक उछला निफ्टी IT
भारतीय शेयर बाजार में दो दिनों की सुस्ती के बाद शुक्रवार को जोरदार रिकवरी दर्ज की गई। निफ्टी IT इंडेक्स में 1000 से अधिक अंकों की तूफानी तेजी ने बाजार का मूड बदल दिया। सेंसेक्स 330 अंक और निफ्टी 84 अंक की बढ़त के साथ बंद हुए, जिससे निवेशकों को बड़ी राहत मिली है।
खबर का निचोड़
भारतीय शेयर बाजार में दो दिनों की सुस्ती के बाद शुक्रवार को जोरदार रिकवरी दर्ज की गई। निफ्टी IT इंडेक्स में 1000 से अधिक अंकों की तूफानी तेजी ने बाजार का मूड बदल दिया। सेंसेक्स 330 अंक और निफ्टी 84 अंक की बढ़त के साथ बंद हुए, जिससे निवेशकों को बड़ी राहत मिली है।
आईटी शेयरों के दम पर शेयर बाजार में लौटी हरियाली
भारतीय शेयर बाजार में पिछले दो कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट का सिलसिला आखिरकार थम गया है। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को दलाल स्ट्रीट पर खरीदारों ने जोरदार वापसी की। लाल निशान में कारोबार करने वाले प्रमुख सूचकांक हरे निशान में बंद होने में कामयाब रहे। बाजार में आई इस तेजी का मुख्य केंद्र आईटी सेक्टर रहा, जिसने पूरे इंडेक्स को ऊपर खींचने में सबसे अहम भूमिका निभाई।
कारोबार के अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स 330 अंकों की मजबूती के साथ 77,264 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं दूसरी ओर, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 इंडेक्स 84 अंकों की बढ़त दर्ज करते हुए 24,175 के स्तर पर सफलतापूर्वक बंद होने में कामयाब रहा। बाजार में अचानक आई इस रिकवरी ने निवेशकों के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी है।
निफ्टी IT इंडेक्स में आई तूफानी तेजी
शुक्रवार के कारोबार में सबसे ज्यादा चमक निफ्टी IT इंडेक्स में देखने को मिली। आईटी सेक्टर के दिग्गजों में चौतरफा खरीदारी के चलते निफ्टी IT इंडेक्स 1,060 अंक उछलकर 31,281 के स्तर पर पहुंच गया। वैश्विक स्तर पर तकनीक क्षेत्र को लेकर सुधरती धारणा और निचले स्तरों पर हुई वैल्यू बाइंग (Value Buying) के कारण टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो और टेक महिंद्रा जैसे दिग्गज शेयरों में निवेशकों ने जमकर पैसा लगाया।
दिग्गज आईटी कंपनियों के नतीजों और भविष्य के अनुमानों को लेकर बाजार में बना सकारात्मक माहौल इस तेजी का मुख्य कारण रहा। कारोबारियों के मुताबिक आईटी शेयरों में लंबे समय से बना दबाव अब खत्म होता दिख रहा है, जिससे सेक्टर में शॉर्ट कवरिंग की भी बड़ी भूमिका रही।
18 कंपनियों के शेयर हरे निशान में बंद
सेंसेक्स की 30 में से 18 कंपनियों के शेयर तेजी के साथ बंद हुए, जो बाजार में आई व्यापक खरीदारी को दर्शाता है। सेंसेक्स के घटकों में आईटी कंपनियों के साथ-साथ चुनिंदा बैंकिंग और एफएमसीजी शेयरों में भी अच्छी लिवाली देखने को मिली। वहीं दूसरी तरफ, ऊर्जा और मेटल से जुड़े कुछ शेयरों में हल्का दबाव बना रहा, लेकिन आईटी सेक्टर की जोरदार बढ़त ने किसी भी बड़े नुकसान को होने से रोक लिया।
हफ्ते के आखिरी दिन हुई इस तेजी से बाजार को तकनीकी तौर पर एक मजबूत सहारा मिला है। दो दिनों की गिरावट के बाद आई यह बढ़त यह संकेत देती है कि निचले स्तरों पर खरीदार सक्रिय हैं और बाजार का रुझान अभी भी सकारात्मक बना हुआ है।

कंगना रनौत को रामदेव का शगुन: मिठाई भेजकर खत्म करना चाहा विवाद
बाबा रामदेव और अभिनेत्री कंगना रनौत के बीच चल रही जुबानी तनातनी ने एक नया मोड़ ले लिया है। रामदेव ने रक्षाबंधन के मौके पर कंगना को मिठाई और शगुन भेजकर पुराने गिले-शिकवे मिटाने की पहल की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मन में किसी भी प्रकार का बैर भाव नहीं रखना चाहिए और हर विवाद का समाधान सिर्फ संवाद से ही संभव है।
बाबा रामदेव और अभिनेत्री कंगना रनौत के बीच चल रही जुबानी तनातनी ने एक नया मोड़ ले लिया है। रामदेव ने रक्षाबंधन के मौके पर कंगना को मिठाई और शगुन भेजकर पुराने गिले-शिकवे मिटाने की पहल की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मन में किसी भी प्रकार का बैर भाव नहीं रखना चाहिए और हर विवाद का समाधान सिर्फ संवाद से ही संभव है।
जुबानी जंग से राखी के शगुन तक
योग गुरु बाबा रामदेव और बेबाक बयानों के लिए मशहूर अभिनेत्री कंगना रनौत के बीच का यह वाकया सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। एक समय तीखे बयानों और वैचारिक टकराव के चलते दोनों के रिश्तों में खटास की खबरें सुर्खियों में थीं। कंगना ने रामदेव के एक पुराने बयान पर तंज कसते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी थी और सार्वजनिक रूप से कहा था कि "मेरी जवानी के सपने न देखो।" इस बयान ने राजनीतिक और फिल्मी गलियारों में काफी सुर्खियां बटोरी थीं।
बाबा रामदेव की सुलह की पहल
तमाम कटुता को पीछे छोड़ते हुए बाबा रामदेव ने रक्षाबंधन के पावन पर्व पर एक बड़ा कदम उठाया। उन्होंने अभिनेत्री कंगना रनौत को अपने योगग्राम से मिठाई और शगुन का उपहार भेजा। रामदेव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि आपसी मतभेदों को भुलाकर आगे बढ़ना चाहिए और भाई-बहन के इस पवित्र त्योहार पर किसी भी तरह का द्वेष नहीं रहना चाहिए। उन्होंने यह भी ऐलान किया कि वह जल्द ही कंगना से फोन पर बात करके इस पूरे विवाद को हमेशा के लिए खत्म करेंगे।
रिश्तों की नई शुरुआत की उम्मीद
बाबा रामदेव के इस कदम को एक बड़े दिल वाला और परिपक्व फैसला माना जा रहा है। सार्वजनिक मंचों पर एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी करने वाली इन दोनों बड़ी हस्तियों के बीच यह पहल रिश्तों में मिठास घोल सकती है। हालांकि, कंगना रनौत की ओर से इस मिठाई और फोन कॉल के प्रस्ताव पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन इस अप्रत्याशित पहल ने यह साबित कर दिया है कि बड़े मतभेद भी आपसी संवाद और सद्भावना से सुलझाए जा सकते हैं।

दिल्ली के तिलक नगर में मॉडल मुस्कान की हत्या: जिम ट्रेनर प्रेमी ने उतारा मौत के घाट
दिल्ली के तिलक नगर में शादी के दबाव के चलते 21 वर्षीय मॉडल मुस्कान की उसके जिम ट्रेनर प्रेमी आकिब उर्फ इमरान ने चाकू से गोदकर बेरहमी से हत्या कर दी। घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है। पुलिस ने एनकाउंटर के बाद आरोपी को राजौरी गार्डन से गिरफ्तार कर लिया है।
दिल्ली के तिलक नगर में शादी के दबाव के चलते 21 वर्षीय मॉडल मुस्कान की उसके जिम ट्रेनर प्रेमी आकिब उर्फ इमरान ने चाकू से गोदकर बेरहमी से हत्या कर दी। घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है। पुलिस ने एनकाउंटर के बाद आरोपी को राजौरी गार्डन से गिरफ्तार कर लिया है।
खौफनाक वारदात और सीसीटीवी का सच
राजधानी दिल्ली एक बार फिर सनसनीखेज वारदात से दहल उठी है। पश्चिमी दिल्ली के तिलक नगर इलाके में दिनदहाड़े हुई एक हत्या ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। 21 वर्षीय उभरती हुई मॉडल मुस्कान अपने सपनों को जी रही थी, लेकिन उसे नहीं पता था कि उसका जिम ट्रेनर प्रेमी आकिब उर्फ इमरान उसके जीवन का अंत लिख रहा है। दोनों के बीच लंबे समय से संबंध थे, जो धीरे-धीरे विवादों में घिरते चले गए। मुस्कान द्वारा शादी का दबाव बनाने पर आकिब का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। उसने सरेआम सड़क पर मुस्कान पर ताबड़तोड़ चाकू से कई वार किए, जिससे मौके पर ही उसकी दर्दनाक मौत हो गई। यह पूरी घृणित घटना पास लगे एक सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसके फुटेज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।
सोशल मीडिया पोस्ट और आत्महत्या की धमकी
यह खूनी खेल अचानक नहीं शुरू हुआ था। इस जघन्य हत्याकांड से महज कुछ घंटे पहले दोनों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर पोस्ट साझा किए थे। आरोपी आकिब ने अपनी पोस्ट में आत्महत्या करने की धमकी दी थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि दोनों के रिश्तों में भारी तनाव और मानसिक उथल-पुथल चल रही थी। मुस्कान अपने भविष्य को लेकर गंभीर थी और वह आकिब के साथ रिश्ते को एक मुकाम पर पहुंचाना चाहती थी, जबकि आरोपी इस दबाव को झेल नहीं पा रहा था या किसी अन्य मंशा को अंजाम देना चाहता था। इन सोशल मीडिया पोस्ट्स ने इस पूरी घटना को और अधिक रहस्यमय और गंभीर बना दिया है, जिसकी गहराई से जांच साइबर सेल द्वारा की जा रही है।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई और एनकाउंटर
वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी आकिब मौके से फरार हो गया था, लेकिन दिल्ली पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए उसकी तलाश के लिए जाल बिछाया। खुफिया तंत्र और सर्विलांस की मदद से पुलिस को उसकी लोकेशन राजौरी गार्डन इलाके में मिली। जब पुलिस टीम ने उसे घेरकर आत्मसमर्पण करने को कहा, तो उसने पुलिस दल पर फायरिंग शुरू कर दी। आत्मरक्षार्थ पुलिस की जवाबी कार्रवाई में आकिब पैर में गोली लगने से घायल हो गया। पुलिस ने बिना देर किए उसे दबोच लिया और अस्पताल में भर्ती कराया। इस एनकाउंटर और गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब इस पूरे मामले के हर एक पहलू को खंगालने में जुटी है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस कत्ल के पीछे कोई गहरी साजिश तो नहीं थी।

मूड ऑफ द नेशन सर्वे: पीएम पद की रेस में मोदी-राहुल के साथ नए चेहरों की चर्चा और चुनावी हलचल
इंडिया टुडे और सी-वोटर के 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे ने देश की राजनीतिक सरगर्मी को अचानक एक नए मुकाम पर पहुंचा दिया है। इस बार के सर्वे में प्रधानमंत्री पद की दावेदारी को लेकर पारंपरिक राजनीतिक चेहरों के साथ-साथ कुछ दिलचस्प और नए नाम भी सामने आए हैं, जिसने राजनीतिक गलियारों में बहस छेड़ दी है।
इंडिया टुडे और सी-वोटर के 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे ने देश की राजनीतिक सरगर्मी को अचानक एक नए मुकाम पर पहुंचा दिया है। इस बार के सर्वे में प्रधानमंत्री पद की दावेदारी को लेकर पारंपरिक राजनीतिक चेहरों के साथ-साथ कुछ दिलचस्प और नए नाम भी सामने आए हैं, जिसने राजनीतिक गलियारों में बहस छेड़ दी है।
सर्वे के नए समीकरण और सियासी चर्चा
देश के सबसे बड़े राजनीतिक सर्वेक्षणों में शुमार 'मूड ऑफ द नेशन' (MOTN) ने एक बार फिर चुनावी पंडितों को माथापच्ची करने पर मजबूर कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की परंपरागत टक्कर के बीच, इस बार सर्वे में कॉकरोच जनता पार्टी के अभिजीत दीपके का नाम भी चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि मुख्य मुकाबला एनडीए औरI.INDIA गठबंधन के इर्द-गिर्द ही घूम रहा है, लेकिन ऐसे नए और अनोखे नाम राजनीतिक चर्चाओं को अधिक रोचक और अप्रत्याशित बना देते हैं।
2027 के आगामी विधानसभा चुनावों की बिसात
आने वाले समय में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव देश की राजनीति की अगली दिशा तय करेंगे। इन सभी राज्यों में बेहद कड़े और कांटे के मुकाबले की उम्मीद जताई जा रही है। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में जहां सत्ता बनाए रखने और विपक्ष के हमलों से निपटने की चुनौती है, वहीं पंजाब का सियासी अखाड़ा हमेशा की तरह बहुकोणीय संघर्ष और स्थानीय मुद्दों से घिरा हुआ है। क्षेत्रीय दल इन चुनावों में अपनी पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में हैं।
सरकार की स्थिरता और राष्ट्रीय मुद्दे
एक अन्य हालिया सर्वे के आंकड़ों पर नजर डालें तो भाजपा और एनडीए गठबंधन को बढ़त मिलने का अनुमान जताया गया है, जो केंद्र की मोदी सरकार की राजनीतिक स्थिति को मजबूत और स्थिर दर्शाता है। देश की जनता के बीच नीतियों और नेतृत्व को लेकर जो राय बन रही है, वह सत्ता पक्ष के लिए राहत की खबर है। हालांकि, दूसरी तरफ युवाओं से जुड़े गंभीर मुद्दे जैसे पेपर लीक और बेरोजगारी लगातार राजनीतिक विश्लेषकों और विपक्ष के निशाने पर बने हुए हैं। ये मुद्दे आने वाले चुनावों में गेमचेंजर साबित हो सकते हैं और पार्टियों को अपनी रणनीतियों पर नए सिरे से विचार करने के लिए मजबूर कर रहे हैं।
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