
हरियाणा में मिलावटी 'पूजा घी' पर बड़ा प्रहार, 1 साल का प्रतिबंध
पनीर के बाद हरियाणा सरकार ने मिलावटखोरों पर नकेल कसते हुए राज्य में किसी भी उत्पाद को 'पूजा घी' या 'हवन घी' के नाम से बेचने पर एक साल का प्रतिबंध लगा दिया है। खाद्य सुरक्षा विभाग का यह कदम धर्म के नाम पर बेचे जा रहे घटिया और सेहत के लिए खतरनाक घी की बिक्री पर रोक लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
खबर का निचोड़
पनीर के बाद हरियाणा सरकार ने मिलावटखोरों पर नकेल कसते हुए राज्य में किसी भी उत्पाद को 'पूजा घी' या 'हवन घी' के नाम से बेचने पर एक साल का प्रतिबंध लगा दिया है। खाद्य सुरक्षा विभाग का यह कदम धर्म के नाम पर बेचे जा रहे घटिया और सेहत के लिए खतरनाक घी की बिक्री पर रोक लगाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
धर्म के नाम पर मिलावट का खेल खत्म
त्योहारों और पूजा-पाठ के दौरान बाजारों में 'पूजा घी' या 'हवन घी' के नाम से बिकने वाले डिब्बों की भरमार रहती है। ये उत्पाद शुद्ध देसी घी की तुलना में काफी सस्ते होते हैं, लेकिन इनके अंदर का सच बेहद डरावना है। शुद्ध घी के नाम पर वनस्पति, पाम ऑयल और नुकसानदेह रसायनों का मिश्रण बेचा जा रहा था। हरियाणा सरकार ने इस चालाकी को भांपते हुए सख्त कदम उठाया है और स्पष्ट कर दिया है कि अब राज्य में केवल वही उत्पाद 'घी' कहलाएगा जो डेयरी मानकों पर शत-प्रतिशत खरा उतरेगा।
खाद्य सुरक्षा विभाग का कड़ा रुख
खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के नियमों का हवाला देते हुए राज्य सरकार ने यह आदेश जारी किया है। अधिकारियों का मानना है कि 'पूजा' या 'हवन' शब्द का इस्तेमाल करके कंपनियां सुरक्षा जांच से बच निकलती थीं। वे दावा करती थीं कि यह उत्पाद खाने के लिए नहीं है, जिससे वे खाद्य सुरक्षा मानकों के दायरे से बाहर हो जाती थीं। लेकिन इस एक साल के बैन के बाद अब कोई भी ब्रांड या व्यापारी इस तरह का फर्जीवाड़ा नहीं कर पाएगा। अगर किसी को 'घी' बेचना है, तो उसे खाद्य सुरक्षा के सभी कड़े मानकों को पूरा करना ही होगा।
सेहत और आस्था दोनों की सुरक्षा
पूजा और हवन में इस्तेमाल होने वाला घी जब जलता है, तो उसका धुआं पूरे घर में फैलता है। मिलावटी और केमिकल युक्त घी जलने पर जहरीली गैसें छोड़ता है, जिससे सांस की बीमारियां, आंखों में जलन और फेफड़ों से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। सरकार के इस फैसले से न केवल आम जनता की आस्था का सम्मान सुनिश्चित होगा, बल्कि उनके स्वास्थ्य की भी रक्षा होगी। राज्यभर में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे बाजारों में लगातार छापेमारी करें और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करें।
मिलावटखोरों पर चौतरफा वार
हरियाणा में पनीर और दूध उत्पादों के बाद अब घी पर हुई यह कार्रवाई साफ संदेश देती है कि राज्य में मिलावटखोरी के लिए कोई जगह नहीं है। सरकार का यह कदम बाकी राज्यों के लिए भी एक नजीर पेश करता है। आने वाले दिनों में इस फैसले के असर से बाजारों में सिर्फ वही घी उपलब्ध होगा जो इंसानों के इस्तेमाल के लिए पूरी तरह सुरक्षित और मानक के अनुरूप हो।

स्पेसएक्स-ओपनएआई जंग: कर्सर से हटे एआई मॉडल्स
एलन मस्क की स्पेसएक्स द्वारा एआई कोडिंग टूल 'कर्सर' के अधिग्रहण के बाद ओपनएआई ने एक बड़ा कदम उठाया है। ओपनएआई अपने मॉडल्स को कर्सर प्लेटफॉर्म से हटा रही है। इस फैसले ने सैम ऑल्टमैन और एलन मस्क के बीच जारी कारोबारी तनातनी को एक नया और तीखा मोड़ दे दिया है।
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एलन मस्क की स्पेसएक्स द्वारा एआई कोडिंग टूल 'कर्सर' के अधिग्रहण के बाद ओपनएआई ने एक बड़ा कदम उठाया है। ओपनएआई अपने मॉडल्स को कर्सर प्लेटफॉर्म से हटा रही है। इस फैसले ने सैम ऑल्टमैन और एलन मस्क के बीच जारी कारोबारी तनातनी को एक नया और तीखा मोड़ दे दिया है।
टेक जगत में नया भूचाल
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में दो दिग्गजों के बीच की जंग अब एक नए मुकाम पर पहुंच गई है। ओपनएआई ने एआई-पावर्ड कोडिंग प्लेटफॉर्म 'कर्सर' से अपने सभी मॉडल्स को हटाने की औपचारिक घोषणा कर दी है। यह फैसला कोई अचानक लिया गया कदम नहीं है, बल्कि इसके तार एलन मस्क की एयरोस्पेस कंपनी स्पेसएक्स द्वारा हाल ही में कर्सर के किए गए अधिग्रहण से जुड़े हैं।
डेटा सुरक्षा और नियमों का उल्लंघन
ओपनएआई की ओर से उठाए गए इस सख्त कदम की मुख्य वजह सुरक्षा और नीतिगत चिंताएं हैं। कंपनी को अंदेशा है कि स्पेसएक्स के नियंत्रण में आने के बाद कर्सर प्लेटफॉर्म पर ओपनएआई की तकनीकों और डेटा का इस्तेमाल मस्क के अपने हितों के लिए किया जा सकता है। ओपनएआई के मुताबिक, प्रतिद्वंद्वी संस्था के तहत काम कर रहे प्लेटफॉर्म पर अपने एआई मॉडल्स की सेवा जारी रखना उनके सेवा नियमों और डेटा गोपनीयता नीतियों के खिलाफ जा सकता है।
मस्क बनाम ऑल्टमैन: पुरानी रंजिश का नया अध्याय
एलन मस्क और सैम ऑल्टमैन के बीच का विवाद कोई नया नहीं है। मस्क, जो कभी ओपनएआई के सह-संस्थापकों में से एक थे, पिछले काफी समय से कंपनी के वाणिज्यिक रुख और इसके कामकाज के तरीकों की आलोचना करते रहे हैं। xAI और Grok जैसे प्रोजेक्ट्स के जरिए मस्क पहले ही ओपनएआई को सीधी चुनौती दे रहे हैं। ऐसे में स्पेसएक्स द्वारा कर्सर को अपने पाले में लाना एआई कोडिंग सेक्टर में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति माना जा रहा था। ओपनएआई के इस फैसले ने मस्क के उस प्लान को सीधे तौर पर प्रभावित किया है।
डेवलपर्स पर क्या पड़ेगा असर
कर्सर प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल दुनिया भर के लाखों सॉफ्टवेयर डेवलपर्स कोडिंग को तेज और आसान बनाने के लिए करते हैं। अब तक यह प्लेटफॉर्म ओपनएआई के शक्तिशाली मॉडल्स पर काफी हद तक निर्भर था। ओपनएआई के हटने से कर्सर का इस्तेमाल करने वाले डेवलपर्स के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। हालांकि, स्पेसएक्स अब इस प्लेटफॉर्म को अपने खुद के इन-हाउस एआई मॉडल्स या अन्य अल्टरनेटिव्स से लैस करने की तैयारी में है।
एआई इंडस्ट्री में बढ़ता एकाधिकार का खेल
यह घटनाक्रम साफ दिखाता है कि टेक कंपनियां अब अपने एआई इकोसिस्टम को लेकर कितनी आक्रामक हो चुकी हैं। अपनी तकनीक और मॉडल्स पर एकाधिकार बनाए रखने की इस होड़ में एआई सर्विसेज़ के कॉन्ट्रैक्ट्स का टूटना अब आम बात होती जा रही है। सिलिकॉन वैली के दो सबसे बड़े दिग्गजों का यह मुकाबला आने वाले दिनों में एआई टेक्नोलॉजी की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगा।

2029 पीएम रेस: केजरीवाल को पछाड़कर अभिजीत दीपके ने चौंकाया
इंडिया टुडे के हालिया 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे ने 2029 लोकसभा चुनाव की आहट के साथ ही राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया है। प्रधानमंत्री पद की पसंद के मामले में सीजेपी संस्थापक और पूर्व आप कार्यकर्ता अभिजीत दीपके (1.3%) ने अरविंद केजरीवाल (1.2%) को पीछे छोड़ दिया है। वहीं पीएम मोदी शीर्ष पर बरकरार हैं।
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इंडिया टुडे के हालिया 'मूड ऑफ द नेशन' सर्वे ने 2029 लोकसभा चुनाव की आहट के साथ ही राजनीतिक पंडितों को हैरान कर दिया है। प्रधानमंत्री पद की पसंद के मामले में सीजेपी संस्थापक और पूर्व आप कार्यकर्ता अभिजीत दीपके (1.3%) ने अरविंद केजरीवाल (1.2%) को पीछे छोड़ दिया है। वहीं पीएम मोदी शीर्ष पर बरकरार हैं।
राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा उलटफेर
भारतीय राजनीति में जनमत के मिजाज को भांपने वाले इंडिया टुडे के 'मूड ऑफ द नेशन' (MOTN) सर्वे ने इस बार सभी को चौंका दिया है। आगामी 2029 के लोकसभा चुनावों को लेकर जनता की पसंद का जो आंकड़ा सामने आया है, उसने राजनीतिक गलियारों में बहस छेड़ दी है। इस सर्वे की सबसे बड़ी और अप्रत्याशित बात यह है कि आम आदमी पार्टी से अलग होकर अपनी राह बनाने वाले पूर्व आप कार्यकर्ता और सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपनी पुरानी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल को पीछे छोड़ दिया है।
आंकड़े जो कहानी बयां करते हैं
प्रधानमंत्री पद के लिए देश की जनता की पहली पसंद कौन है, इस सवाल पर जनता का फैसला बेहद दिलचस्प रहा। सर्वे के नतीजों के मुताबिक, देश के 1.3 प्रतिशत लोगों ने अभिजीत दीपके को भविष्य के प्रधानमंत्री के रूप में अपनी पसंद बताया है। वहीं, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल 1.2 प्रतिशत समर्थन के साथ उनके ठीक पीछे खिसक गए हैं। यह अंतर भले ही आंकड़ों में मामूली दिखे, लेकिन इसके राजनीतिक मायने बहुत गहरे हैं। एक स्थापित राष्ट्रीय पार्टी के नेता को पछाड़कर एक उभरते हुए चेहरे का आगे निकलना बड़ा बदलाव दर्शाता है।
शीर्ष पर अब भी पीएम मोदी का दबदबा
देश की मुख्य राजनीतिक लड़ाई के शीर्ष पायदान पर स्थिति स्पष्ट बनी हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 48.7 प्रतिशत जनता की पहली पसंद के साथ सबसे आगे बने हुए हैं। उनके बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी 27.1 प्रतिशत समर्थन हासिल करके दूसरे स्थान पर मजबूती से खड़े हैं। सर्वे साफ दिखाता है कि जहां राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष नेताओं के बीच मुख्य मुकाबला जारी है, वहीं क्षेत्रीय और उभरते विकल्पों को लेकर भी जनता अपनी राय बदल रही है।
केजरीवाल के लिए बड़ा झटका
अरविंद केजरीवाल के लिए यह सर्वे आंकड़े से ज्यादा एक बड़ा राजनीतिक संदेश लेकर आया है। राष्ट्रीय राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाने की कोशिशों में जुटी आम आदमी पार्टी के लिए यह नतीजा किसी झटके से कम नहीं है। कभी 'आप' के मंच से अपनी पहचान बनाने वाले अभिजीत दीपके का केजरीवाल से आगे निकल जाना यह दर्शाता है कि जनता अब नए विकल्पों को भी गंभीरता से ले रही है। 2029 की राजनीतिक बिसात पर यह बदलाव आने वाले समय में नए समीकरणों को जन्म दे सकता है।

रक्षाबंधन पर सोने-चांदी में भारी गिरावट, जानें नया रेट
त्योहारी सीजन में सोने और चांदी के दामों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। रक्षाबंधन के मौके पर दिल्ली सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना ₹3,300 सस्ता होकर ₹1,62,400 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं चांदी भी ₹5,000 गिरकर ₹2,45,500 प्रति किलो पर आ गई है।
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त्योहारी सीजन में सोने और चांदी के दामों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। रक्षाबंधन के मौके पर दिल्ली सर्राफा बाजार में 24 कैरेट सोना ₹3,300 सस्ता होकर ₹1,62,400 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं चांदी भी ₹5,000 गिरकर ₹2,45,500 प्रति किलो पर आ गई है।
त्योहारी सीजन में खरीदारों की बल्ले-बल्ले
रक्षाबंधन के पावन पर्व पर आभूषणों की खरीदारी करने वालों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। सर्राफा बाजार में शुक्रवार को सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार गिरावट दर्ज की गई। त्योहारी उमंग के बीच कीमतों में आई इस कमी से बाजार में ग्राहकों की चहल-पहल बढ़ने की पूरी उम्मीद है। जो लोग रक्षाबंधन के मौके पर कीमती धातुओं में निवेश या उपहार खरीदने की योजना बना रहे थे, उनके लिए यह एक बेहतरीन मौका साबित हो सकता है।
सोने की कीमतों में हैट्रिक गिरावट
दिल्ली सर्राफा असोसिएशन की तरफ से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 24 कैरेट सोने के भाव में ₹3,300 प्रति 10 ग्राम की बड़ी कटौती देखी गई। इस गिरावट के बाद अब बाजार में सोने की कीमत ₹1,62,400 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गई है। गौर करने वाली बात यह है कि सोने के दामों में यह लगातार तीसरे दिन की गिरावट है। पिछले तीन कारोबारी दिनों के आंकड़ों को देखें तो सोना कुल मिलाकर ₹4,700 तक सस्ता हो चुका है। लगातार हो रही इस नरमी ने सर्राफा व्यापारियों और खरीदारों दोनों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
चांदी के भाव में भी भारी सेंध
केवल सोना ही नहीं, बल्कि चांदी की चमक भी इस रक्षाबंधन पर थोड़ी फीकी पड़ती नजर आई। चांदी के भाव में एक ही दिन में ₹5,000 प्रति किलोग्राम की बड़ी टूट दर्ज की गई है। इस भारी गिरावट के साथ दिल्ली में चांदी का भाव घटकर ₹2,45,500 प्रति किलोग्राम पर आ पहुंचा है। एक ही दिन में पांच हजार रुपये की यह बड़ी गिरावट औद्योगिक मांग और स्थानीय सर्राफा बाजार के रुझानों में आए बदलाव की ओर इशारा करती है।
सर्राफा बाजार की बदलती चाल
त्योहारों के ऐन वक्त पर धातुओं के दामों में आई इस गिरावट को बाजार विश्लेषक काफी अहम मान रहे हैं। आमतौर पर त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने से कीमतें ऊपर चढ़ती हैं, लेकिन इस बार सर्राफा बाजार का रुख पूरी तरह विपरीत नजर आ रहा है। लगातार तीन दिनों से सोने के गिरते दाम और चांदी में आई अचानक गिरावट से स्थानीय बाजार में हलचल तेज हो गई है। आने वाले दिनों में सराफा बाजार किस दिशा में जाएगा, इस पर व्यापारियों की नजर बनी हुई है।

महाराष्ट्र FDA की बड़ी कार्रवाई: सिप्ला की पुणे यूनिट का लाइसेंस रद्द
महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने नियमों के उल्लंघन पर कड़ा रुख अपनाते हुए दिग्गज फार्मा कंपनी सिप्ला की पुणे स्थित यूनिट का दवा बिक्री लाइसेंस रद्द कर दिया है। जांच के दौरान भंडारण, पैकेजिंग और रिकॉर्ड-कीपिंग में कई गंभीर खामियां पाई गईं, जिसके बाद यह प्रशासनिक कार्रवाई की गई है।
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महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने नियमों के उल्लंघन पर कड़ा रुख अपनाते हुए दिग्गज फार्मा कंपनी सिप्ला की पुणे स्थित यूनिट का दवा बिक्री लाइसेंस रद्द कर दिया है। जांच के दौरान भंडारण, पैकेजिंग और रिकॉर्ड-कीपिंग में कई गंभीर खामियां पाई गईं, जिसके बाद यह प्रशासनिक कार्रवाई की गई है।
FDA की जांच में उजागर हुईं गंभीर खामियां
पुणे के वाडकी क्षेत्र में संचालित सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज की कैरी एंड फॉरवर्डिंग (C&F) यूनिट पर महाराष्ट्र FDA की टीम ने औचक निरीक्षण किया। इस जांच का मुख्य उद्देश्य जीवनरक्षक दवाओं के रखरखाव और गुणवत्ता मानकों की पड़ताल करना था। हालांकि, निरीक्षण के दौरान वहां का नजारा गुणवत्ता मानकों के बिल्कुल विपरीत मिला।
जांच अधिकारियों को यूनिट में दवाओं के भंडारण से लेकर उनके वितरण तक के स्तर पर लापरवाही देखने को मिली। सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर दवाइयों का रखरखाव किया जा रहा था, जो कि औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम का सीधा उल्लंघन है।
फर्श पर रखी मिलीं दवाएं और पैकेजिंग में गड़बड़ी
निरीक्षण रिपोर्ट के मुताबिक, वाडकी स्थित इस गोदाम में दवाएं सीधे फर्श पर रखी पाई गईं। नियमानुसार दवाओं को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त पैलेट और रैक की व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन वहां इनका अभाव दिखा। नमी और गंदगी के संपर्क में आने से दवाओं की गुणवत्ता प्रभावित होने का सीधा जोखिम बना हुआ था।
इसके अलावा, 'रेक्टिन प्लस' (Rectin Plus) टैबलेट्स की पैकेजिंग और बैच रिकॉर्ड में भारी अनियमतियां दर्ज की गईं। किसी भी गड़बड़ी के मामले में बाजार से दवा को वापस मंगाने (रिकॉल) की जो स्थापित प्रक्रिया होती है, उससे जुड़े रिकॉर्ड भी अधूरे और अस्पष्ट पाए गए।
कड़े एक्शन से दवा उद्योग में हड़कंप
इन तमाम अनियमितताओं को बेहद गंभीर मानते हुए महाराष्ट्र FDA ने सिप्ला की इस पुणे यूनिट का दवा बिक्री लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द करने का आदेश जारी कर दिया। नियामक निकाय के इस सख्त फैसले से भारतीय फार्मा क्षेत्र और वितरण नेटवर्क में हलचल तेज हो गई है।
FDA अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि मरीजों की सेहत और दवाओं की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। मानक नियमों का पालन न करने वाली कंपनियों पर आगे भी इसी तरह की कठोर कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई जारी रहेगी।
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