
कंगना रनौत और बाबा रामदेव आमने-सामने, बयानों का दौर तेज
अभिनेत्री कंगना रनौत और योग गुरु बाबा रामदेव के बीच बयानों की जंग तीखी हो गई है। रामदेव की कथित अपमानजनक टिप्पणी के बाद कंगना ने उन पर मर्यादा लांघने का गंभीर आरोप लगाया है। यह विवाद उनके हालिया बयानों और सोशल मीडिया पर छिड़ी बहसों के बीच और गहरा गया है।
खबर का निचोड़
अभिनेत्री कंगना रनौत और योग गुरु बाबा रामदेव के बीच बयानों की जंग तीखी हो गई है। रामदेव की कथित अपमानजनक टिप्पणी के बाद कंगना ने उन पर मर्यादा लांघने का गंभीर आरोप लगाया है। यह विवाद उनके हालिया बयानों और सोशल मीडिया पर छिड़ी बहसों के बीच और गहरा गया है।
रामदेव और कंगना में छिड़ी जुबानी जंग
बॉलीवुड की बेबाक अभिनेत्री कंगना रनौत और योग गुरु बाबा रामदेव के बीच तकरार अब खुलकर सामने आ गई है। यह पूरा विवाद तब भड़का जब बाबा रामदेव ने कंगना के खिलाफ कुछ ऐसी टिप्पणियां कर दीं, जिन्हें अभिनेत्री ने अपनी गरिमा के खिलाफ माना। कंगना ने बिना किसी लाग-लपेट के रामदेव पर सार्वजनिक मंचों और बयानों में हर मर्यादा को लांघने का सीधा आरोप लगाया है। दोनों दिग्गजों के बीच यह जुबानी जंग राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन चुकी है।
खुद को '12वीं पास' बताकर छिड़ी नई बहस
विवादों से पुराना नाता रखने वाली कंगना रनौत ने हाल ही में एक नया मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने अभिजीत दीपके की अंग्रेजी का सार्वजनिक रूप से मजाक उड़ाते हुए खुद को गर्व से '12वीं पास' बताया। उनके इस बयान के सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। आलोचकों का मानना है कि एक जिम्मेदार पद और सार्वजनिक छवि वाले व्यक्ति को इस तरह की भाषा से बचना चाहिए, जबकि उनके समर्थकों ने इसे उनकी हमेशा की तरह बेबाक शैली करार दिया है।
जेन जी पर टिप्पणी और खाप पंचायतों का आक्रोश
यह विवादित माहौल केवल बाबा रामदेव तक ही सीमित नहीं है। इससे कुछ समय पहले कंगना ने आज की युवा पीढ़ी यानी जेन जी (Gen Z) को 'गटर जेनरेशन' कहकर संबोधित किया था। उनके इस बयान ने देश भर में भारी आक्रोश पैदा कर दिया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि देश की कई खाप पंचायतों ने उनके इस बयान के खिलाफ कड़े निंदा प्रस्ताव पारित किए। लगातार एक के बाद एक विवादों में घिरती जा रही कंगना रनौत के ये बयान उनकी मुश्किलें बढ़ाते नजर आ रहे हैं।

एक राष्ट्र, एक चुनाव' पर सियासी संग्राम तेज, 2029 पर टिकी नजरें
एक राष्ट्र, एक चुनाव' के प्रस्ताव को लेकर देश की राजनीतिक फिजा में गर्माहट बढ़ गई है। संयुक्त संसदीय समिति की बैठकों से लेकर विपक्षी दलों के तीखे बयानों तक, यह मुद्दा इस समय राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में है। क्या देश एक साथ चुनावों के नए युग में प्रवेश करने जा रहा है, इसे लेकर सरगर्मी अपने चरम पर है।
'एक राष्ट्र, एक चुनाव' के प्रस्ताव को लेकर देश की राजनीतिक फिजा में गर्माहट बढ़ गई है। संयुक्त संसदीय समिति की बैठकों से लेकर विपक्षी दलों के तीखे बयानों तक, यह मुद्दा इस समय राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में है। क्या देश एक साथ चुनावों के नए युग में प्रवेश करने जा रहा है, इसे लेकर सरगर्मी अपने चरम पर है।
सियासी गलियारों में घमासान और दावों का दौर
संसदीय समिति की हालिया बैठकों में इस प्रस्ताव को लेकर बड़े दावे सामने आए हैं। संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के सामने 129वें संविधान संशोधन विधेयक की जांच के दौरान भारी समर्थन का दावा किया गया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो वर्ष 2029 में लोकसभा चुनावों के साथ ही देश के बड़े हिस्से में विधानसभा चुनाव भी कराए जा सकते हैं। इस दिशा में एनडीए शासित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सुगबुगाहट तेज हो गई है।
मंत्रियों की अपील और विपक्ष का तीखा विरोध
इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए केंद्रीय स्तर पर भी प्रयास तेज हो गए हैं। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस महत्वपूर्ण विषय पर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने की पुरजोर अपील की है, ताकि आम जनता तक इसकी रूपरेखा पहुंच सके। दूसरी ओर, इस प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक विरोध भी कम नहीं है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने इस पूरी अवधारणा को 'विकृत' और 'असंवैधानिक' करार देते हुए इसकी कड़ी आलोचना की है। उनका तर्क है कि यह व्यवस्था लोकतांत्रिक ढांचे और संघीय भावना के अनुकूल नहीं है।
राज्यों में प्रयोग और दिग्गजों की बंटी हुई राय
राष्ट्रीय स्तर की बहस के बीच क्षेत्रीय स्तर पर भी इस फार्मूले पर अमल शुरू हो चुका है। उदाहरण के लिए, राजस्थान में स्थानीय निकायों और पंचायतों के चुनाव 'एक राज्य, एक चुनाव' की तर्ज पर कराने का ठोस फैसला लिया गया है, जिसे अन्य क्षेत्रों के लिए एक मॉडल के रूप में देखा जा रहा है। इसके अलावा, समाज के प्रबुद्ध वर्ग और पद्म पुरस्कार से सम्मानित हस्तियों के बीच भी इस प्रस्ताव को लेकर एकराय नहीं बन पा रही है, और उनकी प्रतिक्रियाएं बंटी हुई नजर आ रही हैं।

5 सितंबर को दिल्ली में युवाओं का हल्ला बोल, CJP का विरोध मार्च
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने युवाओं से किए वादे पूरे न करने का आरोप लगाते हुए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 5 सितंबर को नई दिल्ली में एक शांतिपूर्ण विरोध मार्च आयोजित किया जाएगा, जो इंडिया गेट से शुरू होकर पुलिस मुख्यालय तक पहुंचेगा। इसमें देशभर के छात्र-युवा हिस्सा लेंगे।
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कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने युवाओं से किए वादे पूरे न करने का आरोप लगाते हुए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 5 सितंबर को नई दिल्ली में एक शांतिपूर्ण विरोध मार्च आयोजित किया जाएगा, जो इंडिया गेट से शुरू होकर पुलिस मुख्यालय तक पहुंचेगा। इसमें देशभर के छात्र-युवा हिस्सा लेंगे।
वादों की अनदेखी पर भड़का आक्रोश
देश के युवाओं के मुद्दों और उनसे किए गए वादों पर सरकार का रुख सवालों के घेरे में है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आरोप है कि युवाओं के साथ किए गए बड़े-बड़े वादे अब तक सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं। पार्टी नेतृत्व का कहना है कि लंबे समय से इंतजार कर रहे युवाओं के सब्र का बांध अब टूट चुका है, और इसी आक्रोश को अपनी आवाज देने के लिए इस विरोध मार्च की रूपरेखा तैयार की गई है।
इंडिया गेट से पुलिस मुख्यालय तक गूंजेगी आवाज
रणनीति के मुताबिक, 5 सितंबर को आयोजित होने वाला यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन देश की राजधानी में एक बड़ा जमावड़ा बनने जा रहा है। विरोध मार्च इंडिया गेट से शुरू होकर नई दिल्ली स्थित पुलिस मुख्यालय तक जाएगा। CJP ने स्पष्ट किया है कि यह प्रदर्शन पूरी तरह से अनुशासित और शांतिपूर्ण होगा, जिसका मुख्य उद्देश्य सरकार को युवाओं की मांगों की तरफ ध्यान केंद्रित कराना है।
देशभर से जुटेगा युवाओं का सैलाब
इस प्रदर्शन को केवल एक पार्टी तक सीमित न रखकर जन-आंदोलन का रूप देने की तैयारी है। देश के कोने-कोने से विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवा और जागरूक नागरिक इस मार्च में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंच रहे हैं। आयोजकों का दावा है कि युवाओं की यह एकजुटता सरकार को उनके अधिकारों और वादों के प्रति जवाबदेह बनाने में मील का पत्थर साबित होगी।

कंगना रनौत का तीखा हमला: आलोचकों को दिया करारा जवाब
भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने अपने खिलाफ हो रही व्यक्तिगत टिप्पणियों पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने अशुतोष राणा, सोनू सूद और राखी सावंत का नाम लेते हुए आलोचकों को आड़े हाथों लिया और कहा कि वह असफल लोगों की सलाह नहीं लेंगी। कंगना ने उन्हें खुद जैसा बनने की चुनौती दी।
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भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने अपने खिलाफ हो रही व्यक्तिगत टिप्पणियों पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने अशुतोष राणा, सोनू सूद और राखी सावंत का नाम लेते हुए आलोचकों को आड़े हाथों लिया और कहा कि वह असफल लोगों की सलाह नहीं लेंगी। कंगना ने उन्हें खुद जैसा बनने की चुनौती दी।
विवादित बयानों पर भड़कीं कंगना रनौत
बॉलीवुड से राजनीति में कदम रखने वाली भारतीय जनता पार्टी की सांसद कंगना रनौत एक बार फिर अपने बेबाक और सख्त अंदाज को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने फिल्म उद्योग के कुछ जाने-माने चेहरों और अपने आलोचकों पर सीधा और तीखा हमला बोला है। अपने खिलाफ की जा रही बयानबाजी और व्यक्तिगत हमलों पर कड़ा रुख अपनाते हुए कंगना ने साफ कर दिया है कि वह ऐसी टिप्पणियों को बिल्कुल भी बर्दाश्त करने के मूड में नहीं हैं।
निजी हमलों पर जाहिर किया कड़ा ऐतराज
कंगना रनौत ने बातचीत के दौरान बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि लोग उनके खिलाफ लगातार अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोई उन्हें कुत्ता कह रहा है, तो कोई उनके माता-पिता को गालियां दे रहा है। इतना ही नहीं, कुछ लोग उनके चलने और टांग उठाने जैसी बातों पर भी भद्दे कमेंट्स कर रहे हैं। कंगना ने इन आलोचकों को भूखे-नंगे लोग करार देते हुए कहा कि ऐसी अभद्र भाषा और सोच को अब सहना उनके बस से बाहर है।
असफल लोगों से सलाह न लेने का ऐलान
अपने भाषण में कंगना ने आशुतोष राणा, सोनू सूद और राखी सावंत का जिक्र करते हुए यह स्पष्ट किया कि उन्हें अपनी जिंदगी या करियर में किसी असफल व्यक्ति की नसीहत की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि जो लोग अपनी जिंदगी में कुछ बड़ा हासिल नहीं कर पाए, वे आज उन्हें ज्ञान दे रहे हैं। कंगना ने दो टूक शब्दों में कहा कि वह कभी भी ऐसे लोगों की राय को तवज्जो नहीं देंगी जो खुद अपनी पहचान बनाने में नाकाम रहे हैं।
आलोचना करने वालों को दी खुली चुनौती
कंगना ने अपने आलोचकों को आईना दिखाते हुए कहा कि टिप्पणी करना और गालियां देना बहुत आसान काम है, लेकिन सफलता हासिल करना उतना ही कठिन। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जो लोग उन पर उंगलियां उठा रहे हैं, वे पहले कंगना रनौत बनकर दिखाएं। चार बार राष्ट्रीय पुरस्कार जीत चुकीं और सांसद बनीं कंगना ने यह साबित कर दिया है कि वह अपने विरोधियों को उन्हीं की भाषा में जवाब देना बखूबी जानती हैं।

7 साल बाद भारत में शी जिनपिंग: BRICS सम्मेलन के बहाने नई दिल्ली पहुंच रहा 400 अधिकारियों का विशाल दल
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत के आधिकारिक दौरे पर आ रहे हैं। वे अगले महीने नई दिल्ली में आयोजित होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। इस ऐतिहासिक दौरे पर उनके साथ लगभग 400 उच्च अधिकारियों का भारी-भरकम प्रतिनिधिमंडल भारत पहुंचेगा, जो 2019 के मुकाबले दोगुना बड़ा है।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत के आधिकारिक दौरे पर आ रहे हैं। वे अगले महीने नई दिल्ली में आयोजित होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। इस ऐतिहासिक दौरे पर उनके साथ लगभग 400 उच्च अधिकारियों का भारी-भरकम प्रतिनिधिमंडल भारत पहुंचेगा, जो 2019 के मुकाबले दोगुना बड़ा है।
7 साल का लंबा इंतजार और बदला कूटनीतिक माहौल
वर्ष 2019 में तमिलनाडु के महाबलीपुरम में हुई अनौपचारिक शिखर वार्ता के बाद यह शी जिनपिंग की पहली भारत यात्रा है। सीमा पर हुए तनाव के बाद दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की यह सीधी मुलाकात कूटनीतिक लिहाज से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 7 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद हो रही यह यात्रा न केवल BRICS मंच के लिए बल्कि द्विपक्षीय संबंधों की नई दिशा तय करने के लिए भी एक बड़ा मोड़ साबित हो सकती है।
400 अधिकारियों का काफिला: बड़ा प्रतिनिधित्व, बड़ी रणनीति
साल 2019 के दौरे में जिनपिंग के साथ 200 से भी कम अधिकारी आए थे। इस बार 400 अधिकारियों के विशाल डेलिगेशन की मौजूदगी यह साफ दर्शाती है कि बीजिंग इस दौरे को लेकर बेहद गंभीर है। इस प्रतिनिधिमंडल में चीन के विदेश मंत्रालय, व्यापार, सुरक्षा और आर्थिक रणनीतियों से जुड़े शीर्ष नीति-निर्माता शामिल होंगे। विश्लेषकों का मानना है कि अधिकारियों का इतना बड़ा दल व्यापारिक और कूटनीतिक मुद्दों पर गहन चर्चा की तैयारी का संकेत है।
BRICS शिखर सम्मेलन का केंद्र बिंदु बनी नई दिल्ली
वैश्विक स्तर पर आर्थिक और राजनीतिक उथल-पुथल के बीच नई दिल्ली में आयोजित हो रहा यह BRICS सम्मेलन अंतरराष्ट्रीय मीडिया और दुनिया भर के देशों की नजरों में है। भारत की अध्यक्षता में हो रही इस बैठक में शी जिनपिंग की उपस्थिति से एशिया की दो बड़ी महाशक्तियों के बीच आर्थिक सहयोग, सीमा सुरक्षा और वैश्विक चुनौतियों पर संवाद का नया रास्ता खुल सकता है।
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