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अब सोलर पैनल लगाना होगा 20% तक महंगा, जानें वजह

अब सोलर पैनल लगाना होगा 20% तक महंगा, जानें वजह

Delight News
📅 21 Aug2026

सोलर एनर्जी अपनाने की सोच रहे लोगों और डेवलपर्स को जल्द ही बड़ा झटका लग सकता है। रेटिंग एजेंसी ICRA के अनुसार, अगले 6-8 महीनों में बड़े सोलर प्रोजेक्ट्स की लागत 20% तक बढ़ सकती है। इसकी मुख्य वजह महंगे घरेलू सोलर सेल का अनिवार्य इस्तेमाल और कॉपर-एल्यूमीनियम की बढ़ती कीमतें हैं।

अब सोलर पैनल लगाना होगा 20% तक महंगा, जानें वजह
खबर का निचोड़
सोलर एनर्जी अपनाने की सोच रहे लोगों और डेवलपर्स को जल्द ही बड़ा झटका लग सकता है। रेटिंग एजेंसी ICRA के अनुसार, अगले 6-8 महीनों में बड़े सोलर प्रोजेक्ट्स की लागत 20% तक बढ़ सकती है। इसकी मुख्य वजह महंगे घरेलू सोलर सेल का अनिवार्य इस्तेमाल और कॉपर-एल्यूमीनियम की बढ़ती कीमतें हैं।
सोलर प्रोजेक्ट्स पर मंडराया महंगाई का साया
देश में सोलर पावर को बढ़ावा देने की मुहिम के बीच एक चिंताजनक खबर सामने आई है। आने वाले छह से आठ महीनों में बड़े पैमानों के सोलर प्रोजेक्ट्स स्थापित करना काफी महंगा साबित होने वाला है। रेटिंग एजेंसी ICRA की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, सोलर प्रोजेक्ट्स की कुल लागत में 20 प्रतिशत तक का भारी इजाफा देखने को मिल सकता है। जो कंपनियां या डेवलपर्स नए प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू करने जा रहे हैं, उन्हें अब अपने बजट में बड़ा फेरबदल करना होगा।
क्यों बढ़ रही है सोलर पैनलों की लागत?
लागत में इस उछाल के पीछे दो मुख्य कारण जिम्मेदार हैं। पहला कारण सरकार का वह नया नियम है, जो 1 जून से प्रभावी हो चुका है। इसके तहत सोलर प्रोजेक्ट्स में चीन से आयातित सस्ते सोलर सेल्स के बजाय देश में बने महंगे घरेलू सोलर सेल्स का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया गया है। भारत में बने सेल्स की कीमतें विदेशी सेल्स की तुलना में अधिक हैं, जिससे सीधे तौर पर प्रोजेक्ट की मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट बढ़ गई है।
दूसरा बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहा तनाव है। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। इसके चलते कॉपर और एल्यूमीनियम जैसी बुनियादी धातुओं के दाम आसमान छू रहे हैं। सोलर पैनल और उनके स्ट्रक्चर के निर्माण में इन धातुओं का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है, जिससे प्रोजेक्ट्स का ओवरऑल बजट काफी बढ़ गया है।
डोमेस्टिक कंटेंट रिक्वायरमेंट का असर
정부 के डोमेस्टिक कंटेंट रिक्वायरमेंट (DCR) नियम का मकसद देश को सोलर मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। हालांकि, अल्पकालिक रूप से इसका सीधा असर प्रोजेक्ट की लागत पर पड़ रहा है। घरेलू स्तर पर सोलर सेल्स का उत्पादन फिलहाल सीमित है और उनकी लागत आयातित सेल्स से ज्यादा है। जब तक देश के भीतर बड़े पैमाने पर सप्लाई चेन मजबूत नहीं होती और उत्पादन लागत कम नहीं होती, तब तक डेवलपर्स को यह अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाना ही पड़ेगा।
मेटल मार्केट का अतिरिक्त दबाव
सोलर इंडस्ट्री केवल सेल्स पर ही निर्भर नहीं होती, बल्कि इसके ढांचे और वायरिंग के लिए कॉपर तथा एल्यूमीनियम बेहद जरूरी हैं। कमोडिटी मार्केट में इन धातुओं की कीमतों में आई तेजी ने सोलर पावर डेवलपर्स की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। इन संयुक्त कारणों से आने वाले दिनों में सोलर एनर्जी सेक्टर में नई परियोजनाओं की रफ्तार और उनकी दरों पर सीधा असर देखने को मिल सकता है।
मिल्की मिस्ट के शेयर बने रॉकेट, लगातार दूसरे दिन लगा अपर सर्किट

मिल्की मिस्ट के शेयर बने रॉकेट, लगातार दूसरे दिन लगा अपर सर्किट

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📅 21 Aug2026

मिल्की मिस्ट डेयरी फूड के शेयरों में लिस्टिंग के बाद से ही तूफानी तेजी जारी है। 18 अगस्त को 30% की बंपर बढ़त के साथ लिस्ट होने के बाद, 19 अगस्त को भी शेयर में 10% का अपर सर्किट लग गया। IPO को मिले 56 गुना से अधिक सब्सक्रिप्शन ने निवेशकों के मजबूत भरोसे को साफ जाहिर कर दिया है।

मिल्की मिस्ट के शेयर बने रॉकेट, लगातार दूसरे दिन लगा अपर सर्किट
खबर का निचोड़
मिल्की मिस्ट डेयरी फूड के शेयरों में लिस्टिंग के बाद से ही तूफानी तेजी जारी है। 18 अगस्त को 30% की बंपर बढ़त के साथ लिस्ट होने के बाद, 19 अगस्त को भी शेयर में 10% का अपर सर्किट लग गया। IPO को मिले 56 गुना से अधिक सब्सक्रिप्शन ने निवेशकों के मजबूत भरोसे को साफ जाहिर कर दिया है।
बंपर लिस्टिंग के बाद लगातार दूसरे दिन तेजी
डेयरी प्रोडक्ट्स बनाने वाली प्रमुख कंपनी मिल्की मिस्ट डेयरी फूड लिमिटेड के शेयर भारतीय शेयर बाजार में लिस्ट होते ही छा गए हैं। 18 अगस्त को बाजार में कदम रखते ही कंपनी के शेयरों ने निवेशकों को जोरदार रिटर्न दिया। ₹140 के इश्यू प्राइस के मुकाबले यह शेयर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर लगभग 30% चढ़कर ₹181.50 के स्तर पर बंद हुआ था। लिस्टिंग के पहले ही दिन मिली इस शानदार शुरुआत ने निवेशकों का ध्यान पूरी तरह से अपनी ओर खींच लिया।
तेजी का यह सिलसिला अगले दिन यानी 19 अगस्त को भी बरकरार रहा। कारोबार शुरू होते ही खरीदारों की भारी मांग के चलते शेयर की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखा गया। देखते ही देखते शेयर 10% की बढ़त के साथ अपने अपर सर्किट पर पहुंच गया। लगातार दो दिनों से आ रही इस खरीदारी से यह स्पष्ट है कि दलाल स्ट्रीट पर कंपनी के प्रदर्शन को लेकर काफी उत्साह का माहौल है।
IPO को मिला था निवेशकों का दमदार रिस्पॉन्स
शेयर बाजार में इस धमाकेदार एंट्री की नींव कंपनी के आईपीओ (IPO) के दौरान ही रखी जा चुकी थी। 11 अगस्त से 13 अगस्त के बीच जब यह इश्यू निवेशकों के लिए खुला था, तब इसे मार्केट से बेहद शानदार प्रतिक्रिया मिली थी। प्राइमरी मार्केट में निवेशकों ने मिल्की मिस्ट के बिजनेस मॉडल पर जमकर दांव लगाया, जिसकी वजह से यह इश्यू कुल 56.12 गुना सब्सक्राइब हुआ था।
खुदरा निवेशकों से लेकर संस्थागत खरीदारों (QIB) तक, हर कैटेगरी में बोलियों की होड़ देखने को मिली। ₹140 के इश्यू प्राइस पर निवेशकों ने जिस तरह से भरोसा दिखाया, उसी का नतीजा अब सेकेंडरी मार्केट में शेयर की कीमतों में उछाल के रूप में सामने आ रहा है।
डेयरी सेक्टर में मजबूती से जम रहे कदम
मिल्की मिस्ट देश के डेयरी सेक्टर में एक तेजी से उभरता हुआ नाम है। वैल्यू-एडेड डेयरी प्रोडक्ट्स जैसे पनीर, दही, बटर और चेद्दार चीज़ के सेगमेंट में कंपनी ने अपनी बाजार हिस्सेदारी को काफी मजबूत किया है। मजबूत सप्लाई चेन और आधुनिक प्रोसेसिंग प्लांट्स की बदौलत कंपनी की ब्रांड वैल्यू लगातार बढ़ रही है। आईपीओ के जरिए जुटाए गए फंड से कंपनी अपने कर्ज को कम करने और उत्पादन क्षमता के विस्तार पर ध्यान केंद्रित कर रही है। यही वजह है कि शेयर बाजार में लिस्ट होने के बाद से ही इसमें लगातार खरीदारी का दबाव बना हुआ है।
इमरजेंसी में कहां से सबसे तेजी से मिलेगा आपका पैसा?

इमरजेंसी में कहां से सबसे तेजी से मिलेगा आपका पैसा?

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📅 21 Aug2026

अचानक मेडिकल इमरजेंसी या पैसों की जरूरत पड़ने पर सही जगह से पैसा निकालना बेहद जरूरी है। लिक्विड म्यूचुअल फंड्स सबसे तेज और आसान माध्यम हैं। वहीं एनपीएस टियर-2 से 2 दिन और ईपीएफ से 3 से 5 दिन में फंड मिलता है। पीपीएफ से तुरंत पैसा निकालना सबसे मुश्किल है।

इमरजेंसी में कहां से सबसे तेजी से मिलेगा आपका पैसा?
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अचानक मेडिकल इमरजेंसी या पैसों की जरूरत पड़ने पर सही जगह से पैसा निकालना बेहद जरूरी है। लिक्विड म्यूचुअल फंड्स सबसे तेज और आसान माध्यम हैं। वहीं एनपीएस टियर-2 से 2 दिन और ईपीएफ से 3 से 5 दिन में फंड मिलता है। पीपीएफ से तुरंत पैसा निकालना सबसे मुश्किल है।
आपातकाल में किस निवेश से मिलेगा तुरंत कैश?
जिंदगी में वित्तीय आपातकाल कभी भी बिना बताए आ सकता है। ऐसे समय में यह मायने नहीं रखता कि आपके पास कुल कितना निवेश है, बल्कि यह महत्वपूर्ण होता है कि कौन सा पैसा आपके बैंक खाते में कितनी जल्दी पहुंच सकता है। लिक्विड म्यूचुअल फंड, ईपीएफ, पीपीएफ और एनपीएस टियर-2 जैसे विकल्पों की लिक्विडिटी में काफी अंतर होता है।
लिक्विड म्यूचुअल फंड: सबसे तेज और आसान
आपातकालीन जरूरतों के लिए लिक्विड म्यूचुअल फंड सबसे बेहतरीन विकल्प माना जाता है। इसमें रिडेम्पशन की प्रक्रिया बेहद तेज होती है। अधिकांश फंड हाउस इंस्टेंट रिडेम्पशन की सुविधा देते हैं, जिसके तहत सीमित राशि आपके बैंक खाते में तुरंत यानी कुछ ही मिनटों में ट्रांसफर हो जाती है। यदि रकम बड़ी है, तो भी आमतौर पर 1 से 2 कार्य दिवसों (T+1 या T+2) के भीतर पूरा पैसा खाते में आ जाता है।
ईपीएफ: 3 से 5 दिनों का समय
कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) मुख्य रूप से रिटायरमेंट सेविंग्स के लिए होती है, लेकिन इमरजेंसी के दौरान एडवांस निकालने का नियम है। यदि बीमारी, घर की मरम्मत या शादी जैसे कारणों से पैसा निकालना हो, तो ऑनलाइन क्लेम सेटलमेंट में 3 से 5 दिनों का समय लगता है। हालांकि यह प्रक्रिया पहले से काफी आसान और डिजिटल हो चुकी है, फिर भी इसमें तत्काल नकदी मिलना संभव नहीं है।
एनपीएस टियर-2: 2 वर्किंग डेज में निकासी
नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के टियर-2 अकाउंट को एक ऐच्छिक निवेश खाते की तरह इस्तेमाल किया जाता है। टियर-1 के मुकाबले टियर-2 में लॉक-इन पीरियड की बाध्यता नहीं होती है। यदि आप एनपीएस टियर-2 से पैसा निकालने के लिए विड्रॉल रिक्वेस्ट डालते हैं, तो सभी जरूरी मंजूरियां पूरी होने के बाद पैसा आपके पंजीकृत बैंक खाते में आने में कम से कम 2 कामकाजी दिनों (T+2) का समय लगता है।
पीपीएफ: सबसे धीमी प्रक्रिया और कड़े नियम
पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) को लिक्विडिटी के मामले में सबसे सख्त माना जाता है। पीपीएफ में 15 साल का लॉक-इन पीरियड होता है। खाता खोलने के 5 वित्तीय वर्ष पूरे होने के बाद ही साल में केवल एक बार आंशिक निकासी (Partial Withdrawal) की अनुमति मिलती है। ऐसे में किसी अचानक आई इमरजेंसी के लिए पीपीएफ पर निर्भर रहना समझदारी नहीं है, क्योंकि इससे तुरंत फंड जुटाना काफी कठिन होता है।
ट्रम्प का ईरान पर तीखा हमला

ट्रम्प का ईरान पर तीखा हमला

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📅 21 Aug2026

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को लेकर एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। 7 बजते ही उन्होंने सार्वजनिक मंच से ईरान को चेतावनी देते हुए सख्त परिणाम भुगतने की बात कही। ट्रम्प के इस बयान के बाद वैश्विक राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है और तनाव बढ़ गया है।

ट्रम्प का ईरान पर तीखा हमला
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को लेकर एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। 7 बजते ही उन्होंने सार्वजनिक मंच से ईरान को चेतावनी देते हुए सख्त परिणाम भुगतने की बात कही। ट्रम्प के इस बयान के बाद वैश्विक राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है और तनाव बढ़ गया है।
7 बजते ही गरमाया माहौल
डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने बयानों से एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में तहलका मचा दिया है। शाम के 7 बजते ही जैसे ही ट्रम्प का संबोधन शुरू हुआ, उन्होंने सीधे तौर पर ईरान को अपने निशाने पर ले लिया। ट्रम्प के बयानों में ईरान के खिलाफ भारी गुस्सा और आक्रामकता साफ देखने को मिली। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अमेरिका अपनी सुरक्षा और अपने सहयोगियों के हितों के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। ट्रम्प का यह सख्त लहजा बताता है कि वे ईरान की नीतियों और हालिया गतिविधियों से बेहद नाराज हैं।
ईरान को मिली कड़ी चेतावनी
अपने भाषण के दौरान ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उसने अपनी भड़काऊ गतिविधियों और आक्रामक रुख को तुरंत नहीं रोका, तो उसे इसके गंभीर और विनाशकारी परिणाम भुगतने होंगे। ट्रम्प ने संकेत दिया कि उनके पास ईरान की हर हरकत का माकूल जवाब देने की रणनीति तैयार है। उन्होंने ईरान के नेतृत्व को आगाह किया कि वे अमेरिकी ताकत का गलत अंदाजा न लगाएं। ट्रम्प के इस कड़े रुख ने यह साफ कर दिया है कि वे ईरान पर दबाव बढ़ाने का कोई भी मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहते।
वैश्विक स्तर पर बढ़ा तनाव
ट्रम्प की इस ताजा धमकी के बाद मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकार के बयानों से क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है। ईरान की तरफ से भी इस बयान के बाद तीखी प्रतिक्रिया आने की संभावना जताई जा रही है। दुनिया भर की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि ट्रम्प के इस कड़े रुख के जवाब में ईरान क्या कदम उठाता है। दोनों देशों के बीच बढ़ती इस तल्खी ने वैश्विक कूटनीति में हलचल तेज कर दी है।
चीनी की बढ़ती कीमतों पर सरकार का बड़ा फैसला

चीनी की बढ़ती कीमतों पर सरकार का बड़ा फैसला

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📅 21 Aug2026

देश में चीनी के आसमान छूते दामों पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन चीनी के शुल्क-मुक्त आयात को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से घरेलू बाजार में चीनी की किल्लत दूर होने की उम्मीद है। दूसरी ओर, चीनी संकट के बीच बिहार के मंत्री द्वारा दिया गया एक अजीबोगरीब बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने राजनीतिक और सार्वजनिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।

चीनी की बढ़ती कीमतों पर सरकार का बड़ा फैसला
देश में चीनी के आसमान छूते दामों पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन चीनी के शुल्क-मुक्त आयात को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से घरेलू बाजार में चीनी की किल्लत दूर होने की उम्मीद है। दूसरी ओर, चीनी संकट के बीच बिहार के मंत्री द्वारा दिया गया एक अजीबोगरीब बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने राजनीतिक और सार्वजनिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।
आयात का फैसला और बाजार का रुख
त्योहारी सीजन और घरेलू मांग को देखते हुए चीनी की कीमतें लगातार बढ़ रही थीं। आम जनता की जेब पर पड़ रहे इस अतिरिक्त बोझ को कम करने के लिए सरकार ने त्वरित कदम उठाया। 10 लाख टन ड्यूटी-फ्री चीनी का आयात बाजार में आपूर्ति को सुचारू बनाए रखेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से चीनी के थोक और खुदरा दामों में तुरंत गिरावट देखने को मिल सकती है, जिससे आम उपभोक्ता को राहत मिलेगी।
बिहार मंत्री का अजीबोगरीब बयान
जहाँ एक तरफ केंद्र सरकार कीमतों को नियंत्रित करने में जुटी है, वहीं बिहार के मंत्री के एक बयान ने इस पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। मंत्री जी ने चीनी की बढ़ती कीमतों पर अजीब तर्क देते हुए कहा कि लोगों को सेहत के लिहाज से चीनी का सेवन कम कर देना चाहिए, इससे स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा और महंगाई का असर भी नहीं पड़ेगा। इस बयान के सामने आते ही विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला और इसे जनता की समस्याओं से मुंह मोड़ने वाला रवैया करार दिया।
उद्योग और जनता पर असर
चीनी उद्योग से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार से आने वाली इस खेप से देश के बफर स्टॉक को मजबूती मिलेगी। हालांकि, स्थानीय गन्ना किसानों ने आयात के इस फैसले पर थोड़ी चिंता जताई है। उनका मानना है कि विदेशी चीनी आने से स्थानीय चीनी मिलों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है, जिसका सीधा प्रभाव उनके भुगतान पर पड़ेगा। इसके बावजूद, आम उपभोक्ताओं के लिए यह फैसला किसी बड़ी राहत से कम नहीं है।

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