
चोरी पकड़ी गई तो ले ली जान: नलगोंडा में प्रिंसिपल की हत्या
तेलंगाना के नलगोंडा में 10वीं के दो छात्रों ने प्राइवेट स्कूल की प्रिंसिपल रूपा रेड्डी की 27 बार चाकू घोंपकर हत्या कर दी। चोरी पकड़े जाने के बदले में रची गई इस साजिश का पर्दाफाश 'बाबू' शब्द, खून सने नोटों और पुलिस की सतर्कता से हुआ। आरोपी नाबालिगों को जुवेनाइल होम भेज दिया गया है।
खबर का निचोड़
तेलंगाना के नलगोंडा में 10वीं के दो छात्रों ने प्राइवेट स्कूल की प्रिंसिपल रूपा रेड्डी की 27 बार चाकू घोंपकर हत्या कर दी। चोरी पकड़े जाने के बदले में रची गई इस साजिश का पर्दाफाश 'बाबू' शब्द, खून सने नोटों और पुलिस की सतर्कता से हुआ। आरोपी नाबालिगों को जुवेनाइल होम भेज दिया गया है।
नलगोंडा में सनसनीखेज वारदात
तेलंगाना के नलगोंडा जिले में शिक्षा के मंदिर को शर्मसार कर देने वाली एक खौफनाक घटना सामने आई है। एक प्राइवेट स्कूल की प्रिंसिपल रूपा रेड्डी की उन्हीं के स्कूल में पढ़ने वाले 10वीं कक्षा के दो छात्रों ने बेरहमी से हत्या कर दी। दोनों नाबालिगों ने प्रिंसिपल पर चाकू से एक के बाद एक 27 बार वार किए, जिससे मौके पर ही उनकी मौत हो गई। इस जघन्य हत्याकांड ने पूरे इलाके में दहशत और सनसनी फैला दी है।
चोरी के खुलासे का बदला
मामले की जांच में सामने आया कि इस खौफनाक वारदात के पीछे की वजह महज एक शिकायत और चोरी का खुलासा था। कुछ समय पहले प्रिंसिपल रूपा रेड्डी ने इन दोनों छात्रों को चोरी करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया था। इसके बाद उन्होंने छात्रों के परिजनों को स्कूल बुलाकर उनकी इस हरकत की जानकारी दी थी। घर पर हुई डांट और स्कूल में हुई बेइज्जती से तिलमिलाए छात्रों ने प्रिंसिपल से बदला लेने की साजिश रच डाली।
'बाबू' शब्द ने खोला राज
वारदात को अंजाम देने के बाद पुलिस ने जब मामले की तफ्तीश शुरू की, तो शुरुआत में कोई ठोस सबूत हाथ नहीं लग रहा था। लेकिन जांच के दौरान पुलिस को एक डायरी और कुछ कागजात मिले, जिनमें दर्ज 'बाबू' शब्द ने पूरे केस का रुख मोड़ दिया। यह शब्द एक मृतक के करीबी या जानने वाले की ओर इशारा कर रहा था। इसके साथ ही जब पुलिस ने चोरी गए पैसों और खून सने नोटों का सुराग जुटाया, तो कड़ियां जुड़ती चली गईं। शक के आधार पर जब दोनों नाबालिग छात्रों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, तो उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
सबूत मिटाने की नाकाम कोशिश
पूछताछ में यह भी सामने आया कि हत्या के बाद आरोपियों ने शातिराना अंदाज में सबूत मिटाने की कोशिश की थी। उन्होंने अपने खून से सने कपड़ों को छिपाने के लिए पास के एक नाले में फेंक दिया था ताकि किसी को उन पर शक न हो। हालांकि, पुलिस की मुस्तैदी और वैज्ञानिक जांच के आगे उनकी यह चालाकी ज्यादा देर टिक नहीं सकी। पुलिस ने नाले से खून से सने कपड़े और वारदात में इस्तेमाल चाकू बरामद कर लिया है।
जुवेनाइल होम भेजे गए आरोपी
प्रिंसिपल की हत्या की इस साजिश में शामिल दोनों आरोपी नाबालिग हैं। पुलिस ने कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करते हुए दोनों छात्रों को हिरासत में ले लिया है और उन्हें जुवेनाइल होम भेजने की कार्रवाई की जा रही है। एक मामूली रंजिश में गुरु की हत्या कर देने की इस घटना ने समाज और शिक्षा व्यवस्था पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।

बांकुड़ा कांड: CJP नेता रांका की चेतावनी, 10 दिन में आंदोलन
कोलकाता में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता आशुतोष रांका ने बैंकुरा जिले में बुजुर्ग की हत्या के मामले पर रोष व्यक्त किया है। उन्होंने पुलिस कार्रवाई में देरी और भाजपा सरकार पर आवाज दबाने का आरोप लगाया है। रांका ने चेतावनी दी कि यदि दस दिनों में गिरफ्तारी नहीं हुई, तो व्यापक आंदोलन होगा।
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कोलकाता में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेता आशुतोष रांका ने बैंकुरा जिले में बुजुर्ग की हत्या के मामले पर रोष व्यक्त किया है। उन्होंने पुलिस कार्रवाई में देरी और भाजपा सरकार पर आवाज दबाने का आरोप लगाया है। रांका ने चेतावनी दी कि यदि दस दिनों में गिरफ्तारी नहीं हुई, तो व्यापक आंदोलन होगा।
सीजेपी नेता आशुतोष रांका का सीधा हमला
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख नेता आशुतोष रांका ने एक प्रेस वार्ता के दौरान बैंकुरा जिले में हुई एक वृद्ध व्यक्ति की निर्मम हत्या को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस जघन्य अपराध को अंजाम दिए जाने के बावजूद प्रशासन सुस्ती बरत रहा है और अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
विपक्ष पर आवाज दबाने की साजिश का आरोप
आशुतोष रांका ने अपनी बात रखते हुए कहा कि भाजपा नीत सरकार जानबूझकर विपक्षी आवाजों को दबाने का काम कर रही है। उनका दावा है कि निष्पक्ष जांच प्रक्रिया में बाधा डाली जा रही है ताकि असल गुनहगारों को बचाया जा सके। रांका ने कहा कि जब जनहित और सुरक्षा के मुद्दों पर सवाल पूछे जाते हैं, तब सत्ता पक्ष जवाब देने के बजाय मुद्दों को भटकाने और दबाने की नीति अपनाता है।
10 दिन की अल्टीमेटम और बड़े आंदोलन की चेतावनी
प्रशासनिक ढिलाई पर कड़ा रुख अपनाते हुए CJP नेता ने स्पष्ट चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा कि पुलिस और संबंधित अधिकारियों के पास आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजने के लिए केवल दस दिनों का समय है। यदि दी गई सीमा के भीतर बांकुड़ा घटना के दोषियों को गिरफ्तार नहीं किया गया, तो उनकी पार्टी पूरे राज्य में एक बड़ा जन-आंदोलन खड़ा करेगी। यह आंदोलन केवल बैंकुरा तक सीमित न रहकर पूरे प्रदेश में फैलेगा।
न्याय की मांग और भविष्य की रणनीति
रांका ने जोर देकर कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना उनकी पार्टी की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि न्याय में देरी होना न्याय न मिलने के बराबर है। पुलिस प्रशासन को बिना किसी राजनीतिक दबाव के तत्काल निष्पक्ष जांच पूरी करनी चाहिए। यदि प्रशासन समय रहते ठोस कदम उठाने में विफल रहता है, तो कॉकरोच जनता पार्टी सडकों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन तेज करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

माता-पिता की संपत्ति पर बच्चों का मनमाना हक नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में साफ कर दिया है कि वरिष्ठ नागरिक ट्रिब्यूनल को बुजुर्गों की सुरक्षा और सम्मान के लिए बच्चों को संपत्ति से बेदखल करने का पूरा अधिकार है। शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला पलटते हुए लखनऊ के एक बुजुर्ग के बेटे-बहू को घर खाली करने का आदेश बरकरार रखा।
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सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में साफ कर दिया है कि वरिष्ठ नागरिक ट्रिब्यूनल को बुजुर्गों की सुरक्षा और सम्मान के लिए बच्चों को संपत्ति से बेदखल करने का पूरा अधिकार है। शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का फैसला पलटते हुए लखनऊ के एक बुजुर्ग के बेटे-बहू को घर खाली करने का आदेश बरकरार रखा।
बुजुर्गों के हक में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
माता-पिता की संपत्ति को अपनी बपौती समझने वाले बच्चों के लिए सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला एक करारा झटका है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि बच्चे अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल नहीं करते या उन्हें प्रताड़ित करते हैं, तो उन्हें संपत्ति से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। यह आदेश वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण कानून के तहत बुजुर्गों के अधिकारों को मजबूती प्रदान करता है।
क्या है लखनऊ का यह पूरा मामला?
यह विवाद लखनऊ के निवासी रवि कांत गुप्ता और उनके बेटे-बहू के बीच का है। पीड़ित बुजुर्ग अपने ही घर में बेटे और बहू के दुर्व्यवहार से परेशान थे। राहत पाने के लिए उन्होंने वरिष्ठ नागरिक ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटाया। ट्रिब्यूनल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बेटे और बहू को घर तुरंत खाली करने का आदेश दिया था।
हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द
ट्रिब्यूनल के इस आदेश को बेटे और बहू ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जहां से उन्हें राहत मिल गई थी। हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के बेदखली वाले आदेश को रद्द कर दिया था। इसके बाद यह मामला देश की सबसे बड़ी अदालत पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के रुख को पूरी तरह गलत ठहराया और ट्रिब्यूनल के मूल आदेश को बहाल कर दिया।
ट्रिब्यूनल के अधिकारों पर अदालत की मुहर
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि 'वरिष्ठ नागरिकों और माता-पिता का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007' का मुख्य उद्देश्य बुजुर्गों को सुरक्षा, शांति और सम्मानजनक जीवन देना है। यदि कोई बच्चा अपने माता-पिता के घर में रहकर उन्हें मानसिक या शारीरिक पीड़ा देता है, तो ट्रिब्यूनल के पास उसे बेदखल करने की पूरी कानूनी शक्ति है।
बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए नजीर बना आदेश
शीर्ष अदालत के इस फैसले से देशभर के लाखों बुजुर्गों को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने साफ कर दिया कि बुढ़ापे में माता-पिता की शांति और सुरक्षा से बढ़कर कोई अधिकार नहीं हो सकता। कानून का मकसद बुजुर्गों को उनके अपने ही घर में प्रताड़ना से बचाना है, और इस राह में किसी भी तरह की तकनीकी अड़चन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

दिल्ली जल बोर्ड घोटाला: पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन समेत 4 लोग 14 दिन की न्यायिक हिरासत में
दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन की मुश्किलें फिर बढ़ गई हैं। दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट टेंडर से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में अदालत ने उन्हें और पूर्व सीईओ उदित प्रकाश समेत 4 लोगों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, जबकि एक आरोपी दो दिन की पुलिस रिमांड पर है।
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दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन की मुश्किलें फिर बढ़ गई हैं। दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट टेंडर से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में अदालत ने उन्हें और पूर्व सीईओ उदित प्रकाश समेत 4 लोगों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, जबकि एक आरोपी दो दिन की पुलिस रिमांड पर है।
जैन की बढ़ीं मुश्किलें, कोर्ट से नहीं मिली राहत
आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन की कानूनी अड़चनें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। दिल्ली जल बोर्ड (DJB) से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) टेंडर मामले में अदालत ने बड़ा कदम उठाया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने सत्येंद्र जैन को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश जारी कर दिया है। इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
पूर्व सीईओ समेत 4 अन्य भी भेजे गए जेल
यह कार्रवाई केवल पूर्व मंत्री तक सीमित नहीं है। इस कथित घोटाले की जांच के दायरे में प्रशासनिक अधिकारी भी पूरी तरह आ चुके हैं। दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) उदित प्रकाश समेत चार अन्य आरोपियों को भी अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि टेंडर आवंटन की प्रक्रिया में नियमों को ताक पर रखकर वित्तीय गड़बड़ियां की गईं, जिसमें इन अधिकारियों की भूमिका बेहद संदिग्ध है।
टेंडर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली का आरोप
पूरा मामला दिल्ली जल बोर्ड द्वारा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के उन्नयन और निर्माण के लिए जारी किए गए करोड़ों रुपये के टेंडर से जुड़ा है। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान पसंदीदा कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों में साजिशन बदलाव किए गए। इसके एवज में भारी वित्तीय लेन-देन और रिश्वतखोरी की आशंका जताई गई है। जांच एजेंसियां अब इस बात की तह तक जाने में जुटी हैं कि भ्रष्टाचार के इस तार में और कौन-कौन से बड़े चेहरे शामिल हैं।
एक आरोपी दो दिन की पुलिस रिमांड पर
मामले में त्वरित सुराग जुटाने और अहम दस्तावेजों की बरामदगी के लिए कोर्ट ने एक अन्य आरोपी को दो दिनों की पुलिस हिरासत में सौंप दिया है। पुलिस रिमांड के दौरान आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की जाएगी, ताकि घोटाले की पूरी क्रोनोलॉजी और पैसों के लेनदेन का साफ खाका तैयार किया जा सके।
जांच एजेंसियों का शिकंजा और आने वाले दिन
इस सख्त न्यायिक कार्रवाई के बाद जांच एजेंसियों का रुख और कड़ा होने की उम्मीद है। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट टेंडर मामले की फाइलें अब दोबारा खंगाली जा रही हैं। आने वाले 14 दिन इस मामले के तमाम आरोपियों के लिए बेहद संवेदनशील रहने वाले हैं, क्योंकि पूछताछ और डिजिटल सबूतों के आधार पर जांच का दायरा अन्य विभागों तक भी फैल सकता है।

सोशल मीडिया से कमाई पर टैक्स का पूरा गणित, ऐसे बचें भारी पेनल्टी से
कंटेंट क्रिएशन अब सिर्फ एक शौक नहीं बल्कि लाखों रुपये कमाने वाला फुल-टाइम करियर बन चुका है। इंस्टाग्राम रील्स और यूट्यूब वीडियोज से स्पॉन्सरशिप, एड-रेवेन्यू और एफिलिएट मार्केटिंग के जरिए कमाई करने वाले क्रिएटर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हालांकि, कमाई के इस नए दौर के साथ इनकम टैक्स और जीएसटी से जुड़े नियम भी पूरी सख्ती से लागू होने लगे हैं। क्रिएटर्स के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि टैक्स विभाग उनकी कमाई को किस नजरिए से देखता है।
कंटेंट क्रिएशन अब सिर्फ एक शौक नहीं बल्कि लाखों रुपये कमाने वाला फुल-टाइम करियर बन चुका है। इंस्टाग्राम रील्स और यूट्यूब वीडियोज से स्पॉन्सरशिप, एड-रेवेन्यू और एफिलिएट मार्केटिंग के जरिए कमाई करने वाले क्रिएटर्स की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हालांकि, कमाई के इस नए दौर के साथ इनकम टैक्स और जीएसटी से जुड़े नियम भी पूरी सख्ती से लागू होने लगे हैं। क्रिएटर्स के लिए यह समझना बेहद जरूरी है कि टैक्स विभाग उनकी कमाई को किस नजरिए से देखता है।
सोशल मीडिया इनकम पर टैक्स के नियम
इनकम टैक्स विभाग यूट्यूब और इंस्टाग्राम से होने वाली कमाई को साधारण सैलरी या अन्य स्रोतों से हुई आय नहीं मानता। इसे 'व्यवसाय या पेशे से होने वाले लाभ और आय' (Profit and Gains from Business or Profession) की श्रेणी में रखा जाता है। इसका मतलब है कि क्रिएटर जितनी भी कमाई करता है, उस पर उसकी कुल सालाना आय और लागू होने वाले टैक्स स्लैब के हिसाब से ही टैक्स की गणना की जाती है।
TDS कटौती और व्यावसायिक छूट का फायदा
जब कोई ब्रांड किसी क्रिएटर को स्पॉन्सरशिप या प्रमोशन के लिए भुगतान करता है, तो ₹30,000 से अधिक की राशि पर 10% की दर से TDS (Tax Deductions at Source) काटा जाता है। अच्छी बात यह है कि टैक्स फाइल करते समय क्रिएटर अपने काम से जुड़े जरूरी खर्चों पर छूट का दावा कर सकते हैं। वीडियो एडिटिंग सॉफ्टवेयर का खर्च, इंटरनेट बिल, कैमरा और लाइट जैसे इक्विपमेंट का खर्च, और ऑफिस सेटअप की लागत को कुल आय से घटाकर टैक्सेबल इनकम को कम किया जा सकता है।
GST का रजिस्ट्रेशन और सख्त गाइडलाइंस
यदि किसी सोशल मीडिया क्रिएटर का सालाना कुल टर्नओवर ₹20 लाख (कुछ विशेष राज्यों में ₹10 लाख) से अधिक हो जाता है, तो उसे GST नंबर लेना अनिवार्य हो जाता है। इसके अलावा, फॉरेन क्लाइंट्स से मिलने वाले पेमेंट्स और एफिलिएट इनकम पर भी जीएसटी के नियम लागू होते हैं। ब्रांड्स से मिलने वाले महंगे फ्री गिफ्ट्स, जैसे फोन या गाड़ियां, अगर क्रिएटर अपने पास रख लेता है, तो उनकी वैल्यू को भी आय मानकर उस पर टैक्स चुकाना पड़ता है। सही समय पर टैक्स और आईटीआर दाखिल न करने पर टैक्स विभाग की ओर से भारी पेनल्टी और नोटिस का सामना करना पड़ सकता है।
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