
सेंसेक्स में 400 अंकों की गिरावट: शेयर बाजार पर लाल निशान का कब्जा
भारतीय शेयर बाजार में आज अचानक बिकवाली के हावी होने से बीते दिनों की बढ़त गायब हो गई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 400 से अधिक अंक टूटकर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। बैंकिग, आईटी और मेटल शेयरों में भारी नुकसान के कारण निवेशकों को भारी चपत लगी है।
खबर का निचोड़
भारतीय शेयर बाजार में आज अचानक बिकवाली के हावी होने से बीते दिनों की बढ़त गायब हो गई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 400 से अधिक अंक टूटकर बंद हुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के निफ्टी में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। बैंकिग, आईटी और मेटल शेयरों में भारी नुकसान के कारण निवेशकों को भारी चपत लगी है।
बाजार में मची भगदड़ और लाल निशान का कब्जा
सप्ताह के इस कारोबारी दिन की शुरुआत तो सुस्त रही, लेकिन दिन ढलते-ढलते बिकवाली का दबाव इतना बढ़ गया कि पूरे बाजार से हरियाली पूरी तरह गायब हो गई। शुरुआती सत्र में संभलकर कारोबार कर रहे प्रमुख सूचकांक दोपहर के बाद अचानक धड़ाम हो गए।
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 400 से अधिक अंकों का गोता लगाकर दिन के निचले स्तरों के करीब बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी अपनी महत्वपूर्ण सपोर्ट रेंज को बरकरार रखने में नाकाम रहा और लाल निशान में समा गया। बाजार में इस चौतरफा गिरावट ने ट्रेडर्स और रिटेल निवेशकों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
इन सेक्टरों में दिखा सबसे बड़ा नुकसान
आज के कारोबार में सबसे ज्यादा मार बैंकिग, आईटी और ऑटोमोबाइल्स सेक्टर पर पड़ी। हैवीवेट शेयरों में लगातार बिकवाली देखने को मिली, जिससे बाजार को संभलने का मौका ही नहीं मिला। आईटी कंपनियों के कमजोर वैश्विक संकेतों ने इस दबाव को और हवा दी, जबकि बैंकिंग शेयरों में मुनाफावसूली ने सूचकांकों को नीचे खींचने में मुख्य भूमिका निभाई।
मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी बिकवाली के इस तूफान से बच नहीं सके। हालांकि कुछ चुनिंदा रियल्टी और फार्मा शेयरों में हल्की खरीदारी देखी गई, लेकिन वे पूरे बाजार का मूड बदलने में पूरी तरह असमर्थ रहे। सेंसेक्स के अधिकांश प्रमुख शेयर नुकसान के साथ लाल निशान में कारोबार करते हुए बंद हुए।
गिरावट के पीछे की मुख्य वजहें
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, इस अचानक आई गिरावट के पीछे वैश्विक और घरेलू दोनों कारण जिम्मेदार हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की ओर से जारी लगातार बिकवाली ने भारतीय बाजारों पर दबाव बनाए रखा है। इसके साथ ही, वैश्विक स्तर पर बढ़ती ब्याज दरों की आशंका और भू-राजनीतिक तनावों ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है।
वैश्विक बाजारों में मंदी के रुख और क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भी घरेलू बाजार के सेंटिमेंट पर नकारात्मक असर डाला है। निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं और उच्च स्तरों पर मुनाफावसूली (Profit Booking) को प्राथमिकता दे रहे हैं। आने वाले सत्रों में जब तक वैश्विक मोर्चे पर स्थिरता नहीं आती, तब तक बाजार में ऐसा ही उतार-चढ़ाव रहने की उम्मीद है।

UGC NET जून 2026: 84 विषयों की प्रोविज़नल आंसर-की जारी
नैशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने UGC NET जून 2026 परीक्षा की प्रोविज़नल आंसर-की जारी कर दी है। उम्मीदवार आधिकारिक पोर्टल पर प्रश्न-पत्र और अपनी रिस्पॉन्स शीट देख सकते हैं। 84 विषयों के लिए यह उत्तर कुंजी उपलब्ध है, जबकि इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी की आंसर-की अलग से जारी होगी। आपत्ति दर्ज कराने की अंतिम तिथि 18 अगस्त है।
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नैशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने UGC NET जून 2026 परीक्षा की प्रोविज़नल आंसर-की जारी कर दी है। उम्मीदवार आधिकारिक पोर्टल पर प्रश्न-पत्र और अपनी रिस्पॉन्स शीट देख सकते हैं। 84 विषयों के लिए यह उत्तर कुंजी उपलब्ध है, जबकि इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी की आंसर-की अलग से जारी होगी। आपत्ति दर्ज कराने की अंतिम तिथि 18 अगस्त है।
UGC NET जून 2026 आंसर-की का अपडेट
देशभर में असिस्टेंट प्रोफेसर और जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) की पात्रता हासिल करने का सपना देख रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए बड़ा अपडेट आया है। नैशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 84 विषयों के लिए UGC NET जून 2026 परीक्षा की प्रोविज़नल आंसर-की आधिकारिक रूप से जारी कर दी है। परीक्षा में शामिल हुए अभ्यर्थी अब सीधे UGC NET के आधिकारिक पोर्टल ugcnet.nta.nic.in पर जाकर अपने प्रश्न-पत्र और दर्ज किए गए जवाबों को ऑनलाइन देख और जांच सकते हैं।
आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया और अंतिम तिथि
NTA ने आंसर-की जारी करने के साथ ही उम्मीदवारों को अपने जवाबों का मिलान करने और किसी भी तरह की गड़बड़ी दिखने पर आपत्ति दर्ज कराने का भी मौका दिया है। यदि किसी अभ्यर्थी को NTA द्वारा जारी किए गए किसी उत्तर पर संदेह है, तो वह प्रमाण के साथ 18 अगस्त तक अपनी ऑनलाइन चुनौती दर्ज करा सकता है। तय समय सीमा के बाद भेजी गई किसी भी आपत्ति पर विचार नहीं किया जाएगा। प्राप्त आपत्तियों की समीक्षा विषय विशेषज्ञों की टीम करेगी और उसके बाद ही फाइनल आंसर-की और रिजल्ट तैयार किया जाएगा।
मुख्य विषयों के लिए अलग से आएगी आंसर-की
अभ्यर्थियों को ध्यान देना होगा कि NTA ने फिलहाल 84 विषयों के लिए ही प्रोविज़नल आंसर-की उपलब्ध कराई है। इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी जैसे प्रमुख और अधिक संख्या वाले विषयों की आंसर-की अलग से जारी की जाएगी। इन विषयों की परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे अपडेट्स के लिए नियमित रूप से पोर्टल पर नज़र बनाए रखें। जल्द ही इन विषयों के प्रश्न-पत्र और रिस्पॉन्स शीट भी जारी कर दिए जाएंगे।
वेबसाइट पर ऐसे चेक करें अपनी आंसर-की
अपनी रिस्पॉन्स शीट और आंसर-की देखने के लिए अभ्यर्थियों को NTA की आधिकारिक वेबसाइट ugcnet.nta.nic.in पर जाना होगा। होमपेज पर दिए गए 'UGC NET June 2026 Answer Key Challenge' लिंक पर क्लिक करना होगा। इसके बाद उम्मीदवारों को अपना एप्लीकेशन नंबर और जन्म तिथि या पासवर्ड दर्ज करके लॉगिन करना होगा। लॉगिन करते ही स्क्रीन पर प्रश्न-पत्र, ओएमआर रिस्पॉन्स शीट और प्रोविज़नल आंसर-की दिखाई देगी, जिसे डाउनलोड करके अपने उत्तरों का मिलान किया जा सकता है।

रामदेव का बड़ा बयान: 'अधिकारों का आंदोलन बालिग होने पर ही ठीक'
योग गुरु बाबा रामदेव ने बच्चों के राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों में हिस्सा लेने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि देश में कोई धर्म खतरे में नहीं है, बल्कि देश का बचपन खतरे में है। बच्चों को आंदोलनों से दूर रखकर पहले अपनी शिक्षा पूरी करने पर ध्यान देना चाहिए।
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योग गुरु बाबा रामदेव ने बच्चों के राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों में हिस्सा लेने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि देश में कोई धर्म खतरे में नहीं है, बल्कि देश का बचपन खतरे में है। बच्चों को आंदोलनों से दूर रखकर पहले अपनी शिक्षा पूरी करने पर ध्यान देना चाहिए।
आंदोलन में बचपन का इस्तेमाल बंद हो
देश के जाने-माने योग गुरु बाबा रामदेव ने बच्चों के भविष्य और आंदोलनों में उनकी बढ़ती भागीदारी को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस वक्त न तो हिंदू खतरे में हैं, न मुसलमान, न सिख और न ही ईसाई। असल में अगर कोई संकट में है, तो वह इस देश का बचपन है। कुछ लोग अपने स्वार्थ के लिए बच्चों का इस्तेमाल सड़कों पर होने वाले विरोध-प्रदर्शनों और आंदोलनों में कर रहे हैं। यह स्थिति न केवल बच्चों के विकास को बाधित करती है, बल्कि देश के भविष्य के लिए भी चिंताजनक है।
पढ़ाई के उम्र में अधिकारों की लड़ाई कैसी?
बाबा रामदेव ने सवाल उठाया कि अगर कम उम्र के बच्चे रैलियों और आंदोलनों की भीड़ का हिस्सा बनेंगे, तो वे अपनी पढ़ाई कब करेंगे? उन्होंने दुनिया भर का उदाहरण देते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर कहीं भी बच्चों का इस्तेमाल इस तरह के आंदोलनों में नहीं किया जाता। शिक्षा हर बच्चे का पहला और सबसे महत्वपूर्ण अधिकार है। जब बच्चे ही सड़कों पर नारे लगाएंगे, तो वे अपना और देश का बौद्धिक विकास कैसे करेंगे? आंदोलनों में शामिल होने से बच्चों का ध्यान पढ़ाई से भटकता है और उनका भविष्य अंधकारमय हो जाता है।
वयस्क होने पर संघर्ष करना ही समझदारी
अपने वक्तव्य को आगे बढ़ाते हुए योग गुरु ने कहा कि अधिकारों के लिए संघर्ष करने का एक सही समय होता है। जब व्यक्ति वयस्क हो जाए, समाज और कानून की बेहतर समझ हासिल कर ले, तब उसे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए। बचपन केवल सीखने, गढ़ने और ज्ञान अर्जित करने की उम्र है। परिपक्व होने के बाद किया गया संघर्ष अधिक प्रभावी और दिशात्मक होता है।
बचपन की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता
रामदेव के इस बयान ने समाज के बुद्धजीवियों और अभिभावकों का ध्यान एक गंभीर मुद्दे की ओर खींचा है। बच्चों को राजनीतिक एजेंडे से दूर रखना और उन्हें सही समय पर सही मार्गदर्शन देना पूरे समाज की जिम्मेदारी है। बच्चों का समय क्लासरूम में बीतना चाहिए, न कि धरना स्थलों पर। अगर बचपन को सही दिशा नहीं मिली, तो एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव नहीं हो पाएगा।

संदीप पाठक को BJP में बड़ा पद, राघव चड्ढा नज़रअंदाज़
आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए संदीप पाठक को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जगह देते हुए राष्ट्रीय मंत्री बनाया गया है। चौकाने वाली बात यह है कि पाठक के साथ भाजपा में आए दिग्गज नेता राघव चड्ढा को फिलहाल कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई है।
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आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए संदीप पाठक को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जगह देते हुए राष्ट्रीय मंत्री बनाया गया है। चौकाने वाली बात यह है कि पाठक के साथ भाजपा में आए दिग्गज नेता राघव चड्ढा को फिलहाल कोई जिम्मेदारी नहीं दी गई है।
आप से भाजपा तक का सफर और नया पद
राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। कभी अरविंद केजरीवाल के बेहद करीबी और आम आदमी पार्टी के मुख्य रणनीतिकारों में शुमार रहे संदीप पाठक को भारतीय जनता पार्टी ने एक अहम और बड़ी जिम्मेदारी दी है। भाजपा ने अपनी नई राष्ट्रीय कार्यकारिणी की घोषणा करते हुए संदीप पाठक को पार्टी का राष्ट्रीय मंत्री नियुक्त किया है।
हाल ही में आम आदमी पार्टी का दामन छोड़कर भाजपा का हाथ थामने वाले नेताओं में संदीप पाठक इकलौते ऐसे चेहरा हैं, जिन्हें पार्टी ने सीधे संगठन में इतनी महत्वपूर्ण जगह दी है। पाठक को मिली इस बड़ी जिम्मेदारी को भाजपा की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत पार्टी दूसरे दलों से आए मजबूत और रणनीतिक पकड़ रखने वाले नेताओं को संगठन में तरजीह दे रही है।
राघव चड्ढा की अनदेखी पर उठे सवाल
संदीप पाठक को मिली इस तरक्की के साथ ही सबसे ज्यादा चर्चा राघव चड्ढा को लेकर हो रही है। दरअसल, संदीप पाठक उन नेताओं के समूह में शामिल थे, जिन्होंने राघव चड्ढा के साथ एक ही समय पर आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा की सदस्यता ली थी। पार्टी बदलने के बाद यह माना जा रहा था कि राघव चड्ढा के राजनीतिक कद और लोकप्रियता को देखते हुए भाजपा उन्हें कोई बड़ा और अहम पद सौंपेगी।
हालांकि, भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की नई सूची में राघव चड्ढा को फिलहाल कोई पद नहीं मिला है। उन्हें इस सूची में नजरअंदाज़ किए जाने से राजनीतिक विश्लेषक और पार्टी कार्यकर्ता दोनों हैरान हैं। चर्चाएं तेज हैं कि क्या पार्टी चड्ढा के लिए किसी अलग भूमिका की योजना बना रही है या फिर उन्हें अपनी बारी का थोड़ा और इंतजार करना होगा।
आगामी चुनावों के लिए भाजपा का दांव
संदीप पाठक की सांगठनिक क्षमता और चुनावी रणनीतियों पर पकड़ किसी से छिपी नहीं है। आम आदमी पार्टी के विस्तार और पंजाब चुनाव में उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही थी। भाजपा में शामिल होने के बाद उन्हें राष्ट्रीय मंत्री का पद देना यह दर्शाता है कि पार्टी आगामी राज्य विधानसभा चुनावों और सांगठनिक विस्तार में उनके अनुभवों का पूरा फायदा उठाना चाहती है।
दूसरी ओर, एक ही साथ पार्टी में आए दो बड़े चेहरों में से एक को संगठन में बड़ी जिम्मेदारी मिलना और दूसरे को किनारे रखा जाना भाजपा की अंदरूनी राजनीति और भावी प्राथमिकताओं की ओर बड़ा इशारा करता है।
चुनावों और चुनावी नतीजों से जुड़ी लाइव अपडेट्स, आधिकारिक आंकड़ों और अपनी वोटर लिस्ट की जानकारी के लिए भारत निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट ECI Official Portal पर जाएं।

झारखंड में CGL समेत सभी परीक्षाएं रद्द, ED की जांच के बाद बड़ा फैसला
छात्रों के उग्र प्रदर्शन और ED की जांच के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 2014 से अब तक आयोजित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। पेपर लीक और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी परीक्षा एजेंसी TDPL को ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी है, वहीं निष्पक्ष जांच के तरीके पर सरकार और छात्रों के बीच तानतान जारी है।
छात्रों के उग्र प्रदर्शन और ED की जांच के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 2014 से अब तक आयोजित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। पेपर लीक और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी परीक्षा एजेंसी TDPL को ब्लैकलिस्ट करने की तैयारी है, वहीं निष्पक्ष जांच के तरीके पर सरकार और छात्रों के बीच तानतान जारी है।
छात्रों के बढ़ते आक्रोश और भर्ती परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली के गंभीर आरोपों के बीच झारखंड सरकार को आखिरकार झुकना ही पड़ा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने JSSC-CGL समेत TSR डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) द्वारा साल 2014 से अब तक आयोजित की गई सभी प्रतियोगी परीक्षाओं और उनके परिणामों को रद्द करने का एक बड़ा ऐलान किया है। इस अप्रत्याशित फैसले ने राज्य की राजनीति से लेकर लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य के बीच एक नया तूफान खड़ा कर दिया है।
भ्रष्टाचार की परतें और ED की एंट्री
यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब भर्ती प्रक्रिया में धांधली और पेपर लीक के आरोपों को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मोर्चा संभाला। जांच एजेंसी द्वारा अनियमितताओं की परतों को उघाड़ने के बाद एजेंसी TDPL की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे। वर्ष 2014 से अब तक राज्य में जितनी भी मुख्य परीक्षाएं इस एजेंसी के जरिए आयोजित की गई थीं, उन सभी की पारदर्शिता पर ग्रहण लग चुका है। राज्य सरकार ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए परीक्षा प्रक्रिया की शुचिता बहाल करने के उद्देश्य से यह सख्त कदम उठाया है।
सीबीआई जांच की मांग और जांच के तरीके पर तकरार
सरकार के इस फैसले के बावजूद सड़कों पर उतरे युवाओं का गुस्सा पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। परीक्षा रद्द होने के बाद अब मुख्य विवाद जांच के तरीके को लेकर खड़ा हो गया है। विरोध प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों और छात्र संगठनों की एक ही सुर में मांग है कि इस पूरे घोटाले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराई जाए, ताकि पर्दे के पीछे छिपे बड़े तंत्र को बेनकाब किया जा सके।
दूसरी ओर, राज्य सरकार इस मामले की तफ्तीश के लिए एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में जांच समिति गठित करने का प्रस्ताव दे रही है। सरकार का तर्क है कि न्यायिक निगरानी में जांच निष्पक्ष और समयबद्ध होगी। हालांकि, छात्रों को इस प्रस्ताव पर भरोसा नहीं है और वे CBI जांच की अपनी जिद पर अड़े हुए हैं। लाखों युवाओं का भविष्य अब इस बात पर टिका है कि अगली परीक्षा प्रणाली कितनी पारदर्शी होगी।
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