
आपकी थाली में ज़हर परोस रहे 10 मिनट डिलीवरी वाले ऐप्स
महाराष्ट्र एफडीए (FDA) की राज्यव्यापी छापेमारी में क्विक-कॉमर्स दिग्गज ब्लिंकिट, ज़ेप्टो और इंस्टामार्ट के 86 डार्क स्टोर्स में भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। इन सेंटरों पर एक्सपायर्ड सामान, कॉकरोच और छिपकलियों का जमावड़ा मिला। खाद्य सुरक्षा नियमों के गंभीर उल्लंघन पर कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने 14 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिए हैं।
खबर का निचोड़
महाराष्ट्र एफडीए (FDA) की राज्यव्यापी छापेमारी में क्विक-कॉमर्स दिग्गज ब्लिंकिट, ज़ेप्टो और इंस्टामार्ट के 86 डार्क स्टोर्स में भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। इन सेंटरों पर एक्सपायर्ड सामान, कॉकरोच और छिपकलियों का जमावड़ा मिला। खाद्य सुरक्षा नियमों के गंभीर उल्लंघन पर कार्रवाई करते हुए प्रशासन ने 14 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिए हैं।
10 मिनट की स्पीड के पीछे छिपा गंदगी का खेल
सुपरफास्ट डिलीवरी के वादे के साथ आपके घर तक सामान पहुंचाने वाले 'क्विक-कॉमर्स' ऐप्स की एक बेहद खौफनाक तस्वीर सामने आई है। जिस ग्रॉसरी को आप बिल्कुल ताजा और सुरक्षित मानकर ऑर्डर करते हैं, वह असल में कीड़े-मकोड़ों और गंदगी के बीच रखी जा रही है। महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने पूरे राज्य में चलाए गए एक विशेष अभियान के तहत ब्लिंकिट, ज़ेप्टो और स्विगी इंस्टामार्ट के कुल 86 डार्क स्टोर्स (वेयरहाउस) पर अचानक छापेमारी की। इस जांच में जो सच बाहर आया है, उसने हर उपभोक्ता के होश उड़ा दिए हैं।
डार्क स्टोर्स में मिलीं कॉकरोच, छिपकली और एक्सपायर्ड चीजें
FDA की टीमों ने जांच के दौरान पाया कि इन डार्क स्टोर्स में हाइजीन और खाद्य सुरक्षा के न्यूनतम मानकों को भी ताक पर रख दिया गया था। रैक पर रखे पैक्ड फूड आइटम्स के आसपास कॉकरोच और छिपकलियां रेंगती पाई गईं। कई जगहों पर पेरिसेबल प्रोडक्ट्स और रोजाना इस्तेमाल होने वाला सामान पहले ही अपनी एक्सपायरी डेट पार कर चुका था, लेकिन फिर भी उन्हें ग्राहकों को डिलीवर करने के लिए स्टॉक में रखा गया था। स्टोरेज एरिया में वेंटिलेशन और साफ-सफाई का कोई नामोनिशान नहीं था, जिससे खाद्य पदार्थों के दूषित होने का खतरा कई गुना बढ़ गया था।
14 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस सस्पेंड, प्रशासन सख्त
स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले इन डार्क स्टोर्स पर प्रशासन ने बिना किसी ढिलाई के सख्त कदम उठाए हैं। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम (FSSAI Rules) के गंभीर उल्लंघनों के आधार पर FDA ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 14 डार्क स्टोर्स के लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। इसके अलावा कई अन्य सेंटरों को कारण बताओ नोटिस जारी कर सुधार करने की अंतिम चेतावनी दी गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि लाइसेंस सस्पेंड होने वाले सेंटरों से तब तक कोई डिलीवरी नहीं हो सकेगी, जब तक वे सफाई और सुरक्षा के सभी कड़े मानकों को पूरा नहीं कर लेते।
उपभोक्ताओं की सेहत पर मंडराता बड़ा खतरा
आजकल महानगरों और छोटे शहरों में 10 मिनट के भीतर सामान मंगाने का चलन तेजी से बढ़ा है। जल्दबाजी के इस चक्कर में ये क्विक-कॉमर्स कंपनियां पैकेजिंग और डिलीवरी स्पीड पर तो ध्यान देती हैं, लेकिन जिस जगह यह सामान रखा जाता है, उसकी स्थिति बेहद दयनीय पाई गई। महाराष्ट्र FDA की इस बड़ी कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि तेजी से सामान डिलीवरी करने की इस होड़ में आम जनता के स्वास्थ्य और सुरक्षा को नजरअंदाज किया जा रहा है।

डोमिनोज और पिज्जा हट पर तुकाराम मुंढे का चाबुक
महाराष्ट्र एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की है। पुणे के 34 साल पुराने बर्गर किंग, सतारा के डोमिनोज और पिज्जा हट सहित लोनावला के होटल सैय्याजी, एचडीएफसी बैंक कैंटीन और ब्लिंकिट-जेप्टो के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं।
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महाराष्ट्र एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे ने स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की है। पुणे के 34 साल पुराने बर्गर किंग, सतारा के डोमिनोज और पिज्जा हट सहित लोनावला के होटल सैय्याजी, एचडीएफसी बैंक कैंटीन और ब्लिंकिट-जेप्टो के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं।
अस्वच्छता पर एफडीए का बड़ा प्रहार
महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने कड़े तेवर दिखाते हुए राज्य भर में खाद्य सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने वाले आउटलेट्स के खिलाफ बड़ा अभियान छेड़ा है। एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई ने बड़े-बड़े ब्रांड्स और नामचीन प्रतिष्ठानों की नींद उड़ा दी है। रसोई में अस्वच्छता, घटिया सामग्री का इस्तेमाल और अनिवार्य खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन में लापरवाही बरतने पर कई मशहूर आउटलेट्स के लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए गए हैं।
दिग्गज ब्रांड्स पर गिरी गाज
इस कार्रवाई की सबसे बड़ी गाज सतारा में स्थित अंतरराष्ट्रीय पिज्जा ब्रांड्स 'डोमिनोज पिज्जा' और 'पिज्जा हट' के आउटलेट्स पर गिरी है। नियमित जांच के दौरान इन आउटलेट्स में स्वच्छता के स्तर पर गंभीर खामियां और खाद्य सुरक्षा अधिनियम के उल्लंघन पाए गए। नियमों की अवहेलना सामने आने के तुरंत बाद एफडीए ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोनों आउटलेट्स के संचालन पर रोक लगा दी और उनके लाइसेंस सस्पेंड कर दिए।
पुणे का 34 साल पुराना बर्गर किंग भी लपेटे में
एफडीए की इस मुहिम से पुणे का ऐतिहासिक और बेहद लोकप्रिय 34 साल पुराना 'बर्गर किंग' आउटलेट भी नहीं बच सका। कैंप इलाके में स्थित इस मशहूर बर्गर जॉइंट में चेकिंग के दौरान साफ-सफाई की बेहद खराब स्थिति पाई गई। ग्राहकों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ को बर्दाश्त न करते हुए प्रशासन ने इस प्रतिष्ठित आउटलेट का लाइसेंस भी निलंबित कर दिया है।
क्विक-कॉमर्स और कॉर्पोरेट कैंटीन पर भी नकेल
प्रशासन का यह चाबुक केवल रिटेल रेस्टोरेंट्स तक सीमित नहीं रहा। लोनावला के मशहूर 'होटल सैय्याजी' और पुणे के वानवड़ी स्थित 'एचडीएफसी बैंक' की कॉर्पोरेट कैंटीन में भी अनियमितताएं पाई गईं, जिसके चलते उन पर निलंबन की गाज गिरी। इसके अलावा, त्वरित डिलीवरी सेवा देने वाले क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म 'जेप्टो' (Zepto) और 'ब्लिंकिट' (Blinkit) के डार्क स्टोर्स और सप्लाई आउटलेट्स पर भी नियमों के उल्लंघन के लिए कार्रवाई की गई है।
सख्त कार्रवाई से हड़कंप
तुकाराम मुंढे की इस बेबाक और सख्त कार्यशैली ने पूरे राज्य के खाद्य कारोबारियों में हड़कंप मचा दिया है। एफडीए ने स्पष्ट संकेत दिया है कि ब्रांड चाहे कितना भी बड़ा या पुराना क्यों न हो, आम जनता की सेहत और सुरक्षा के मानकों से समझौता करने पर किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। आगामी दिनों में इस तरह के औचक निरीक्षण और दंडात्मक कार्रवाइयों को और तेज करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

कोई घूस देने की हिम्मत नहीं कर सकता', दबंग IAS तुकाराम मुंढे का बड़ा बयान
महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के प्रमुख और चर्चित IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे ने अनहाइजीनिक और खराब खाने के खिलाफ कड़ा मोर्चा खोला है। एक इंटरव्यू में अपनी निर्भीक कार्यशैली का परिचय देते हुए उन्होंने कहा कि कोई भी उन्हें रिश्वत देने की हिम्मत नहीं कर सकता और ऐसा सोचने वालों को 100 बार सोचना चाहिए।
'कोई घूस देने की हिम्मत नहीं कर सकता', दबंग IAS तुकाराम मुंढे का बड़ा बयान
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महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के प्रमुख और चर्चित IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे ने अनहाइजीनिक और खराब खाने के खिलाफ कड़ा मोर्चा खोला है। एक इंटरव्यू में अपनी निर्भीक कार्यशैली का परिचय देते हुए उन्होंने कहा कि कोई भी उन्हें रिश्वत देने की हिम्मत नहीं कर सकता और ऐसा सोचने वालों को 100 बार सोचना चाहिए।
दबंग छवि और बेबाक अंदाज
महाराष्ट्र कैडर के सबसे चर्चित और कड़क अधिकारियों में शुमार IAS तुकाराम मुंढे एक बार फिर अपने सख्त तेवरों को लेकर सुर्खियों में हैं। वर्तमान में महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के प्रमुख के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे मुंढे ने राज्य में मिलावटखोरी और अनहाइजीनिक खाने के खिलाफ व्यापक अभियान चला रखा है। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में जब उनसे उनकी सख्त कार्यशैली और भ्रष्टाचार के खिलाफ रवैये को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बिना किसी झिझक के अपनी बात रखी।
'रिश्वत देने से पहले 100 बार सोचें'
इंटरव्यू के दौरान तुकाराम मुंढे ने सिस्टम को एक स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा, "कोई मुझे घूस देने की हिम्मत नहीं कर सकता। अगर कोई ऐसा करने की सोच भी रहा है, तो उसे अंजाम भुगतने से पहले 100 बार सोचना चाहिए।" उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और आम जनता के बीच उनके इस आत्मविश्वास की जमकर तारीफ हो रही है। मुंढे ने साफ किया कि वह केवल अपने पद और संवैधानिक जिम्मेदारी के मुताबिक निष्पक्ष होकर काम कर रहे हैं।
मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त अभियान
महाराष्ट्र FDA का पदभार संभालते ही मुंढे ने आम जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले रेस्टोरेंट्स, फूड वेंडर्स और मिलावटखोरों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। राज्यभर में अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों में खाना बनाने और बेचने वाली इकाइयों पर ताबड़तोड़ छापे मारे जा रहे हैं। उनका मानना है कि जनता को शुद्ध और सुरक्षित भोजन मिलना उनका मौलिक अधिकार है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
तबादलों से बेअसर, जनता में साख
अपने 20 से अधिक सालों के करियर में दर्जनों बार हुए तबादलों के बावजूद तुकाराम मुंढे का जज्बा कम नहीं हुआ है। प्रशासनिक हलकों में उन्हें एक ऐसे अधिकारी के रूप में जाना जाता है जो राजनीतिक दबाव के आगे झुकने के बजाय नियमों का सख्ती से पालन करते हैं। यही वजह है कि जिस भी विभाग में उनकी तैनाती होती है, वहां हड़कंप मच जाता है और आम नागरिकों के बीच उनकी एक ईमानदार जनसेवक की छवि और मजबूत हो जाती है।

पापा Dharmendra के डर से अधूरा रह गया Sunny Deol का यह बड़ा सपना!
बॉलीवुड के गदर स्टार सनी देओल ने सालों बाद खुलासा किया है कि वे एक्टर नहीं, बल्कि फॉर्मूला-1 रेसिंग ड्राइवर बनना चाहते थे। हालांकि, अपने पिता धर्मेंद्र के अत्यधिक प्रोटेक्टिव स्वभाव और डर के कारण वे इस क्षेत्र में कदम नहीं रख सके और उनका यह सपना हमेशा के लिए अधूरा रह गया।
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बॉलीवुड के गदर स्टार सनी देओल ने सालों बाद खुलासा किया है कि वे एक्टर नहीं, बल्कि फॉर्मूला-1 रेसिंग ड्राइवर बनना चाहते थे। हालांकि, अपने पिता धर्मेंद्र के अत्यधिक प्रोटेक्टिव स्वभाव और डर के कारण वे इस क्षेत्र में कदम नहीं रख सके और उनका यह सपना हमेशा के लिए अधूरा रह गया।
फॉर्मूला-1 रेसर बनने का था सपना
बॉलीवुड में अपनी दमदार अदाकारी और 'ढाई किलो के हाथ' के लिए मशहूर अभिनेता सनी देओल के जीवन का एक ऐसा पन्ना सामने आया है, जिससे उनके फैंस अब तक अनजान थे। पर्दे पर बड़े-बड़े विलेन के छक्के छुड़ाने वाले सनी देओल कभी देश के टॉप रेसिंग ड्राइवर्स में शामिल होना चाहते थे। उन्हें तेज रफ्तार गाड़ियों और फॉर्मूला-1 रेसिंग का बेहद जुनून था, लेकिन किस्मत और पारिवारिक सुरक्षा के चलते उनका यह रास्ता पूरी तरह बदल गया।
KBC के मंच पर अमिताभ बच्चन के सामने छलका दर्द
इस अनसुने सपने का खुलासा खुद सनी देओल ने चर्चित रियलिटी शो 'कौन बनेगा करोड़पति' (KBC) के मंच पर किया। शो के होस्ट और सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने जब उनसे पूछा कि क्या वे वाकई एक रेसिंग ड्राइवर बनना चाहते थे, तो सनी देओल पुरानी यादों में खो गए। उन्होंने मुस्कुराते हुए इस बात को स्वीकार किया और बताया कि ड्राइविंग को लेकर उनका पैशन किस कदर सिर चढ़कर बोलता था।
पिता धर्मेंद्र का डर बना रुकावट
सनी देओल ने आगे बताया कि उनके इस सपने के पूरा न होने की सबसे बड़ी वजह उनके पिता और हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र थे। धर्मेंद्र अपने बच्चों को लेकर हमेशा से बेहद प्रोटेक्टिव रहे हैं। सनी के मुताबिक, जब भी वे किसी एडवेंचर स्पोर्ट्स या रेसिंग जैसे जोखिम भरे खेल में हिस्सा लेने की बात करते, तो पिता का सुरक्षात्मक स्वभाव आड़े आ जाता था। धर्मेंद्र को डर था कि रफ्तार के इस खेल में कहीं उनके बेटे को कोई चोट न लग जाए। इसी चिंता और प्यार के कारण उन्हें कभी रेसिंग ट्रैक पर उतरने की इजाजत नहीं मिली।
पर्दे पर दिखाई रफ्तार की दीवानगी
भले ही सनी देओल पेशेवर तौर पर फॉर्मूला-1 रेसिंग की दुनिया में कदम न रख सके हों, लेकिन गाड़ियों और रफ्तार के प्रति उनका प्रेम कभी कम नहीं हुआ। वे आज भी अच्छी गाड़ियों के शौकीन हैं। निजी जिंदगी में भले ही पापा के डर से उनका यह सपना अधूरा रह गया हो, लेकिन उन्होंने अपनी फिल्मों के कई एक्शन सीन्स में अपनी बेहतरीन ड्राइविंग स्किल्स का प्रदर्शन करके अपने इस जुनून की झलक दर्शकों को जरूर दिखाई है।

अलख सर ने किया पीएम मोदी की फ्री ऑनलाइन कोचिंग का बिना शर्त समर्थन
फिज़िक्सवाला (PhysicsWallah) के संस्थापक अलख पांडेय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग योजना का खुलकर स्वागत किया है। उन्होंने साफ कहा कि उन्हें इस पहल से कोई निजी मुनाफा नहीं चाहिए। भारत के हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुफ्त पहुंचानी चाहिए और वह इस राष्ट्रीय उद्देश्य में पूर्ण सहयोग देने के लिए तैयार हैं।
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फिज़िक्सवाला (PhysicsWallah) के संस्थापक अलख पांडेय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग योजना का खुलकर स्वागत किया है। उन्होंने साफ कहा कि उन्हें इस पहल से कोई निजी मुनाफा नहीं चाहिए। भारत के हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुफ्त पहुंचानी चाहिए और वह इस राष्ट्रीय उद्देश्य में पूर्ण सहयोग देने के लिए तैयार हैं।
शिक्षा क्षेत्र में एक नया सवेरा
भारत के शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ज़रूरतमंद छात्रों के लिए घोषित मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग पहल को देशभर से समर्थन मिल रहा है। इस कड़ी में सबसे प्रमुख नाम उभरकर आया है देश के जाने-माने एडटेक प्लेटफॉर्म 'फिज़िक्सवाला' के फाउंडर अलख पांडेय सर का। अलख सर ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे भारतीय शिक्षा व्यवस्था के हित में लिया गया एक ऐतिहासिक फैसला करार दिया है।
देश का हर बच्चा पढ़े, यही मेरा सपना
छात्रों के बीच बेहद लोकप्रिय अलख पांडेय ने बिना किसी झिझक के इस योजना को अपना बिना शर्त समर्थन दिया है। उन्होंने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत के हर कोने तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच होनी चाहिए, चाहे छात्र की आर्थिक स्थिति कैसी भी हो। अलख सर का मानना है कि जब बात देश के भविष्य और बच्चों के निर्माण की आती है, तो वहां व्यापारिक लाभ पीछे छूट जाने चाहिए। शिक्षा का व्यवसायीकरण करने के बजाय उसे एक सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में देखा जाना जरूरी है।
मुनाफा नहीं, केवल राष्ट्र निर्माण
अलख सर ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें इस सरकारी पहल से किसी भी प्रकार के व्यावसायिक लाभ या मुनाफे की उम्मीद नहीं है। उनका उद्देश्य हमेशा से यही रहा है कि कम से कम लागत में या पूरी तरह मुफ्त में बेहतरीन शिक्षा हर छात्र तक पहुंचे। प्रधानमंत्री की इस घोषणा ने उनके इस व्यक्तिगत मिशन को एक राष्ट्रीय मंच प्रदान किया है। इस कदम से ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लाखों ऐसे छात्रों को सीधा फायदा मिलेगा जो महंगी कोचिंग की फीस नहीं चुका सकते।
एडटेक जगत के लिए एक बड़ा संदेश
अलख पांडेय का यह समर्थन न केवल छात्रों के लिए उम्मीद की किरण है, बल्कि पूरे एडटेक (EdTech) उद्योग के लिए भी एक बड़ा संदेश है। जहां कोचिंग संस्थान भारी-भरकम फीस वसूलने के लिए जाने जाते हैं, वहीं अलख सर का यह रुख दिखाता है कि राष्ट्रहित को प्राथमिकता देना कितना महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री की मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग योजना और अलख पांडेय जैसे दिग्गजों का समर्थन मिलकर देश के डिजिटल एजुकेशन मॉडल को एक नई दिशा देने के लिए तैयार है।
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