Delight News Logo
Latest सामान्य ख़बरें सरकारी नौकरी करेंट अफेयर्स परीक्षा ज्ञान
राहुल गांधी का NTA पर तीखा हमला, UGC-NET रद्द होने पर उठाए बड़े सवाल

राहुल गांधी का NTA पर तीखा हमला, UGC-NET रद्द होने पर उठाए बड़े सवाल

Delight News
📅 17 Aug2026

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने यूजीसी-नेट परीक्षा रद्द होने पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर आरोप लगाया कि NTA की लचर व्यवस्था और गलत प्रश्नपत्र तैयार करने के कारण देश के लाखों युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है।

राहुल गांधी का NTA पर तीखा हमला, UGC-NET रद्द होने पर उठाए बड़े सवाल
खबर का निचोड़
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने यूजीसी-नेट परीक्षा रद्द होने पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर आरोप लगाया कि NTA की लचर व्यवस्था और गलत प्रश्नपत्र तैयार करने के कारण देश के लाखों युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है।
राहुल गांधी का तीखा प्रहार
परीक्षा प्रणाली पर खड़े किए गंभीर सवाल
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक तीखा पोस्ट शेयर करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे तौर पर घेरा है। अपने बयान में उन्होंने लिखा है कि "मोदी जी, देखिए आपकी NTA ने फिर क्या कर दिया है।" राहुल गांधी का यह हमला देश की प्रमुख राष्ट्रीय परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों और प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है।
UGC-NET परीक्षा रद्द होने की असल वजह
गलत प्रश्नपत्र और पुरानी गलतियों की पुनरावृत्ति
मामले की मुख्य वजह यूजीसी-नेट परीक्षा को अचानक रद्द किया जाना है। राहुल गांधी ने अपने संदेश में स्पष्ट किया है कि NTA ने परीक्षा के लिए गलत प्रश्नपत्र तैयार किए थे और हद तो तब हो गई जब उसमें पुराने सवालों को ही दोबारा पूछ लिया गया। प्रश्नपत्रों में इस तरह की भारी चूक और धांधली के चलते परीक्षा की विश्वसनीयता पर गंभीर सवालिया निशान लग गए हैं। यही वजह है कि ऐन वक्त पर परीक्षा को रद्द करना पड़ा, जिससे इसमें शामिल होने वाले देश भर के लाखों परीक्षार्थियों की मेहनत पर पानी फिर गया है।
युवाओं के भविष्य पर मंडराता संकट
सिस्टम की नाकामी का शिकार हो रहे देश के छात्र
इस ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर देश की रिक्रूटमेंट और टेस्टिंग एजेंसियों की साख को हिलाकर रख दिया है। बार-बार पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने और तकनीकी खामियों के चलते छात्र मानसिक तनाव और अनिश्चितता के दौर से गुजरने को मजबूर हैं। राहुल गांधी ने इसी दर्द को बयां करते हुए सरकार की कार्यशैली पर कड़ा ऐतराज जताया है। छात्रों और युवाओं का कहना है कि बार-बार होने वाली इन प्रशासनिक भूलों का खामियाजा उन्हें अपनी तैयारी और कीमती समय गंवाकर भुगतना पड़ रहा है, जबकि जिम्मेदार तंत्र पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती।
राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला: NTA की लापरवाही पर फूटा गुस्सा

राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला: NTA की लापरवाही पर फूटा गुस्सा

Delight News
📅 17 Aug2026

यूजीसी-नेट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के मामलों को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शिक्षण संस्थाओं की नाकामी का खामियाजा देश के युवाओं और छात्रों को भुगतना पड़ रहा है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला: NTA की लापरवाही पर फूटा गुस्सा
यूजीसी-नेट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के मामलों को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शिक्षण संस्थाओं की नाकामी का खामियाजा देश के युवाओं और छात्रों को भुगतना पड़ रहा है, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
परीक्षा प्रणाली पर राहुल गांधी का तीखा प्रहार
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने हाल ही में आयोजित हुई यूजीसी-नेट परीक्षा रद्द होने के बाद सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश में परीक्षाएं लगातार विवादों के घेरे में आ रही हैं।
उनका कहना था कि NTA की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं, लेकिन इसकी मार सीधे तौर पर उन मेहनती छात्रों पर पड़ रही है जो दिन-रात अपनी तैयारी में जुटे रहते हैं। राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि सिस्टम की गलतियों का खामियाजा छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ के रूप में सामने आ रहा है।
'प्रधान का इस्तीफा पहला कदम है'
अपने तीखे तेवर जारी रखते हुए राहुल गांधी ने मांग की कि इस पूरे प्रकरण की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में मची इस तबाही के लिए जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है और जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों को पद छोड़ना चाहिए।
उन्होंने अपने बयान में कहा कि इस दिशा में बड़ा कदम उठाया जाना चाहिए ताकि भविष्य में युवाओं के सपनों के साथ इस तरह का खिलवाड़ दोबारा न हो सके। विपक्ष लगातार सरकार से यह सवाल पूछ रहा है कि आखिर कब तक देश की युवा पीढ़ी प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ती रहेगी।
छात्रों का भविष्य और बढ़ता आक्रोश
देशभर के विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में परीक्षाओं को लेकर अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। नीट और यूजीसी-नेट जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों ने छात्रों के भीतर गहरा असंतोष पैदा कर दिया है।
छात्र सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और निष्पक्ष तथा पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की मांग कर रहे हैं। विपक्ष के इस आक्रामक रुख के बाद देश की राजनीति में शिक्षा व्यवस्था और रोजगार के मुद्दे पर एक बार फिर से गर्माहट आ गई है। सरकार के समक्ष अब इन व्यवस्थागत कमियों को दूर करने और छात्रों का भरोसा बहाल करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
वंदे मातरम पर घमासान: कांग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन का विवादित बयान

वंदे मातरम पर घमासान: कांग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन का विवादित बयान

Delight News
📅 17 Aug2026

राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक 2026 के संसद से पास होने के बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इसी बीच कांग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन ने एक ऐसा बयान दिया है जिससे देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि गोली मार दी जाए तब भी वे वंदे मातरम नहीं गाएंगे।

वंदे मातरम पर घमासान: कांग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन का विवादित बयान
राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक 2026 के संसद से पास होने के बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इसी बीच कांग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन ने एक ऐसा बयान दिया है जिससे देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि गोली मार दी जाए तब भी वे वंदे मातरम नहीं गाएंगे।
बयान ने बढ़ाई राजनीतिक हलचल
संसद से पारित हुए नए संशोधनों और राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान को लेकर चल रही बहसों के बीच केरल से आने वाले कांग्रेस सांसद राजमोहन उन्नीथन की यह टिप्पणी सामने आई है। उनके इस बयान के बाद विपक्षी दलों और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। राजमोहन उन्नीथन ने अपने संबोधन में राष्ट्रगीत को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए विवादित टिप्पणी की, जिसने मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक हलचल मचा दी है।
बिल पास होने के बाद गरमाया माहौल
यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब संसद के दोनों सदनों में राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक 2026 को मंजूरी मिली। इस विधेयक का उद्देश्य देश के राष्ट्रीय प्रतीकों, गान और संविधान के प्रति सम्मान सुनिश्चित करना और उनके अपमान पर सख्त कार्रवाई करना है। ऐसे समय में एक जनप्रतिनिधि द्वारा इस तरह का बयान देना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में संसद के अंदर और बाहर एक बड़ा राजनीतिक हथियार बन सकता है।
नेताओं और दलों की तीखी प्रतिक्रियाएं
सांसद उन्नीथन के इस बयान के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। आलोचकों का कहना है कि संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को राष्ट्र के प्रतीकों का सम्मान करना चाहिए, जबकि समर्थकों का तर्क अपने-अपने तरीके से दिया जा रहा है। इस बयान ने एक बार फिर देश में राष्ट्रवाद, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राष्ट्रीय प्रतीकों की अनिवार्यता पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। स्थिति पर नजर बनाए रखते हुए विभिन्न राजनीतिक दल इस पर अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं।
क्या है प्रधानमंत्री मोदी का नया सियासी हथियार 'दिमागी नक्सल'?

क्या है प्रधानमंत्री मोदी का नया सियासी हथियार 'दिमागी नक्सल'?

Delight News
📅 17 Aug2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से 'दिमागी नक्सल' का जिक्र कर देश की सियासत में एक नई बहस छेड़ दी है। सशस्त्र हिंसा का दौर भले ही सिमट रहा हो, लेकिन वैचारिक रूप से सक्रिय इस नए खतरे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।

क्या है प्रधानमंत्री मोदी का नया सियासी हथियार 'दिमागी नक्सल'?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से 'दिमागी नक्सल' का जिक्र कर देश की सियासत में एक नई बहस छेड़ दी है। सशस्त्र हिंसा का दौर भले ही सिमट रहा हो, लेकिन वैचारिक रूप से सक्रिय इस नए खतरे को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।
स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से प्रधानमंत्री का बड़ा हमला
इस बार के स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन के दौरान एक ऐसा बयान दिया, जिसने राजनीतिक गलियारों से लेकर बौद्धिक हलकों तक हलचल मचा दी है। उन्होंने देश को आगाह करते हुए कहा कि हथियारों के दम पर चलने वाला नक्सलवाद अब अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है और लगभग समाप्त हो चुका है।
लेकिन इसके साथ ही उन्होंने एक नए और सूक्ष्म खतरे की ओर इशारा किया, जिसे उन्होंने 'दिमागी नक्सल' का नाम दिया। प्रधानमंत्री के अनुसार, यह विचारधारा भले ही प्रत्यक्ष हिंसा के रास्ते पर न हो, लेकिन यह समाज में अराजकता फैलाने और देश की जड़ों को खोखला करने के हरसंभव मौके तलाश रही है।
'दिमागी नक्सल' को पहचान कर अलग-थलग करने की जरूरत
पीएम मोदी ने अपने भाषण में स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस वैचारिक और मानसिक आतंकवाद के पैरोकारों को पहचानना और समाज से उन्हें आइसोलेट करना अब वक्त की सबसे बड़ी मांग बन गया है। सरकार का मानना है कि यह वर्ग शहरी इलाकों में बैठकर, संस्थाओं को प्रभावित कर और विघटनकारी नैरेटिव गढ़कर देश की सुरक्षा और स्थिरता के लिए एक छिपा हुआ संकट पैदा कर रहा है।
इस बयान के आते ही राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया। जहां एक तरफ सत्ता पक्ष इसे वैचारिक राष्ट्रवाद और आंतरिक सुरक्षा की दिशा में एक बेहद जरूरी कदम बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दलों और आलोचकों ने इस पर तीखे सवाल खड़े किए हैं।
विपक्षी दलों और आलोचकों के तीखे सवाल
विपक्ष का आरोप है कि 'दिमागी नक्सल' जैसे अस्पष्ट शब्दों का इस्तेमाल करके सरकार असहमति की हर आवाज और वैचारिक विरोध का गला घोंटना चाहती है। आलोचकों का तर्क है कि इस तरह के व्यापक और बिना स्पष्ट परिभाषा वाले शब्दों के दायरे में सरकार अपने हर आलोचक, मानवाधिकार कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी को खड़ा कर सकती है जो नीतियों पर सवाल उठाता है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक एक बड़ा वैचारिक संघर्ष बनने वाला है। एक तरफ जहां सरकार इसे आंतरिक सुरक्षा का नया मोर्चा मान रही है, वहीं विपक्ष इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर एक और बड़ा प्रहार बता रहा है।
दिमागी नक्सल पर रार चिदंबरम के बयान पर बीजेपी का पलटवार

दिमागी नक्सल पर रार चिदंबरम के बयान पर बीजेपी का पलटवार

Delight News
📅 17 Aug2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 'दिमागी नक्सल' शब्द के इस्तेमाल के बाद देश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के इस पर दिए बयान के जवाब में बीजेपी ने तीखा हमला बोला है। बीजेपी नेताओं का मानना है कि बंदूकों वाला नक्सलवाद अब अंतिम सांसें गिन रहा है, लेकिन विचारों के जरिए पनप रहा यह 'दिमागी नक्सलवाद' समाज और युवाओं के लिए कहीं अधिक खतरनाक साबित हो रहा है।

दिमागी नक्सल पर रार चिदंबरम के बयान पर बीजेपी का पलटवार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 'दिमागी नक्सल' शब्द के इस्तेमाल के बाद देश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के इस पर दिए बयान के जवाब में बीजेपी ने तीखा हमला बोला है। बीजेपी नेताओं का मानना है कि बंदूकों वाला नक्सलवाद अब अंतिम सांसें गिन रहा है, लेकिन विचारों के जरिए पनप रहा यह 'दिमागी नक्सलवाद' समाज और युवाओं के लिए कहीं अधिक खतरनाक साबित हो रहा है।
शब्द युद्ध और बयानों की सियासत
'दिमागी नक्सल' शब्द के सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में बयानों की बाढ़ आ गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने इस शब्दावली पर तंज कसते हुए प्रतिक्रिया दी, जिसे बीजेपी ने तत्काल लपक लिया और कड़ा पलटवार किया। बीजेपी का कहना है कि विपक्ष ऐसे संवेदनशील मुद्दों और शब्दावलियों का बचाव करके अपनी विचारधारात्मक सोच को उजागर कर रहा है।
शिक्षा क्षेत्र और एनजीओ पर निशाने का तर्क
इस विवाद को आगे बढ़ाते हुए बीजेपी सांसद बृजलाल ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कुछ प्रोफेसरों, शिक्षकों और गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, ये वर्ग 'दिमागी नक्सल' के रूप में काम करते हुए शिक्षण संस्थानों और सामाजिक मंचों के माध्यम से युवाओं के मन में हिंसक और राष्ट्र-विरोधी विचारधारा का बीज बो रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि बंदूक उठाने वाले उग्रवादियों से निपटना आसान है, लेकिन वैचारिक रूप से जहर घोलने वाले ये तत्व समाज को अंदर से खोखला करते हैं।
सोशल मीडिया पर व्यंग्य और बढ़ती चर्चा
यह बहस केवल बयानों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी तेजी से ट्रेंड करने लगी है। इंटरनेट पर 'दिमागी नक्सल जनता पार्टी' जैसे व्यंग्यात्मक अकाउंट्स और मीम्स की बाढ़ आ गई है, जो इस मुद्दे पर अलग-अलग दृष्टिकोण से चुटकी ले रहे हैं। आम लोग और विश्लेषक भी इस नए वैचारिक युद्ध पर खुलकर अपनी राय रख रहे हैं, जिससे यह विषय डिजिटल स्पेस में मुख्य चर्चा का केंद्र बन चुका है।
बंदूकों से ज्यादा खतरनाक वैचारिक हमला
भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष और क्षेत्रीय नेताओं का एक सुर में मानना है कि जमीनी स्तर पर बंदूक वाले नक्सलवाद को सुरक्षा बलों ने काफी हद तक ध्वस्त कर दिया है। हालांकि, उनका तर्क है कि अब जंग विचारों के स्तर पर लड़ी जा रही है। बीजेपी का स्पष्ट संदेश है कि जब तक इस 'दिमागी नक्सलवाद' का जड़ से सफाया नहीं होता, तब तक देश की आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक ताने-बाने को लगातार खतरा बना रहेगा।

Delight News

निष्पक्ष पत्रकारिता, सटीक विश्लेषण

Delight News एक प्रमुख डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म है जिसका मुख्य उद्देश्य समाज में सकारात्मक बदलाव लाना और जनता तक बिल्कुल सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय हिंदी खबरें पहुंचाना है। हम बिना किसी पक्षपात के राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राजनीति, खेल, शिक्षा, सरकारी नौकरी और करंट अफेयर्स से जुड़ी हर छोटी-बड़ी ताजा खबरें आप तक सबसे पहले पहुंचाते हैं।
📬 हमसे संपर्क करें
delightnews.in@gmail.com Official YouTube Channel Official Instagram Profile

📍 अपनी लोकेशन Set करें



Privacy Policy & Terms

Delight News परिवार से जुड़ें

📱 और भी बेहतर अनुभव के लिए!

ताजा खबरों के सबसे तेज नोटिफिकेशन और शानदार यूज़र इंटरफेस के साथ देश-दुनिया के लाइव अपडेट्स सीधे अपने mobile पर पाने के लिए हमारा Delight News Android App डाउनलोड करें।

📥 Download Android App