
कोई घूस देने की हिम्मत नहीं कर सकता', दबंग IAS तुकाराम मुंढे का बड़ा बयान
महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के प्रमुख और चर्चित IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे ने अनहाइजीनिक और खराब खाने के खिलाफ कड़ा मोर्चा खोला है। एक इंटरव्यू में अपनी निर्भीक कार्यशैली का परिचय देते हुए उन्होंने कहा कि कोई भी उन्हें रिश्वत देने की हिम्मत नहीं कर सकता और ऐसा सोचने वालों को 100 बार सोचना चाहिए।
'कोई घूस देने की हिम्मत नहीं कर सकता', दबंग IAS तुकाराम मुंढे का बड़ा बयान
खबर का निचोड़
महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के प्रमुख और चर्चित IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे ने अनहाइजीनिक और खराब खाने के खिलाफ कड़ा मोर्चा खोला है। एक इंटरव्यू में अपनी निर्भीक कार्यशैली का परिचय देते हुए उन्होंने कहा कि कोई भी उन्हें रिश्वत देने की हिम्मत नहीं कर सकता और ऐसा सोचने वालों को 100 बार सोचना चाहिए।
दबंग छवि और बेबाक अंदाज
महाराष्ट्र कैडर के सबसे चर्चित और कड़क अधिकारियों में शुमार IAS तुकाराम मुंढे एक बार फिर अपने सख्त तेवरों को लेकर सुर्खियों में हैं। वर्तमान में महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के प्रमुख के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे मुंढे ने राज्य में मिलावटखोरी और अनहाइजीनिक खाने के खिलाफ व्यापक अभियान चला रखा है। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में जब उनसे उनकी सख्त कार्यशैली और भ्रष्टाचार के खिलाफ रवैये को लेकर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बिना किसी झिझक के अपनी बात रखी।
'रिश्वत देने से पहले 100 बार सोचें'
इंटरव्यू के दौरान तुकाराम मुंढे ने सिस्टम को एक स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा, "कोई मुझे घूस देने की हिम्मत नहीं कर सकता। अगर कोई ऐसा करने की सोच भी रहा है, तो उसे अंजाम भुगतने से पहले 100 बार सोचना चाहिए।" उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और आम जनता के बीच उनके इस आत्मविश्वास की जमकर तारीफ हो रही है। मुंढे ने साफ किया कि वह केवल अपने पद और संवैधानिक जिम्मेदारी के मुताबिक निष्पक्ष होकर काम कर रहे हैं।
मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त अभियान
महाराष्ट्र FDA का पदभार संभालते ही मुंढे ने आम जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले रेस्टोरेंट्स, फूड वेंडर्स और मिलावटखोरों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। राज्यभर में अस्वास्थ्यकर परिस्थितियों में खाना बनाने और बेचने वाली इकाइयों पर ताबड़तोड़ छापे मारे जा रहे हैं। उनका मानना है कि जनता को शुद्ध और सुरक्षित भोजन मिलना उनका मौलिक अधिकार है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही या भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
तबादलों से बेअसर, जनता में साख
अपने 20 से अधिक सालों के करियर में दर्जनों बार हुए तबादलों के बावजूद तुकाराम मुंढे का जज्बा कम नहीं हुआ है। प्रशासनिक हलकों में उन्हें एक ऐसे अधिकारी के रूप में जाना जाता है जो राजनीतिक दबाव के आगे झुकने के बजाय नियमों का सख्ती से पालन करते हैं। यही वजह है कि जिस भी विभाग में उनकी तैनाती होती है, वहां हड़कंप मच जाता है और आम नागरिकों के बीच उनकी एक ईमानदार जनसेवक की छवि और मजबूत हो जाती है।

पापा Dharmendra के डर से अधूरा रह गया Sunny Deol का यह बड़ा सपना!
बॉलीवुड के गदर स्टार सनी देओल ने सालों बाद खुलासा किया है कि वे एक्टर नहीं, बल्कि फॉर्मूला-1 रेसिंग ड्राइवर बनना चाहते थे। हालांकि, अपने पिता धर्मेंद्र के अत्यधिक प्रोटेक्टिव स्वभाव और डर के कारण वे इस क्षेत्र में कदम नहीं रख सके और उनका यह सपना हमेशा के लिए अधूरा रह गया।
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बॉलीवुड के गदर स्टार सनी देओल ने सालों बाद खुलासा किया है कि वे एक्टर नहीं, बल्कि फॉर्मूला-1 रेसिंग ड्राइवर बनना चाहते थे। हालांकि, अपने पिता धर्मेंद्र के अत्यधिक प्रोटेक्टिव स्वभाव और डर के कारण वे इस क्षेत्र में कदम नहीं रख सके और उनका यह सपना हमेशा के लिए अधूरा रह गया।
फॉर्मूला-1 रेसर बनने का था सपना
बॉलीवुड में अपनी दमदार अदाकारी और 'ढाई किलो के हाथ' के लिए मशहूर अभिनेता सनी देओल के जीवन का एक ऐसा पन्ना सामने आया है, जिससे उनके फैंस अब तक अनजान थे। पर्दे पर बड़े-बड़े विलेन के छक्के छुड़ाने वाले सनी देओल कभी देश के टॉप रेसिंग ड्राइवर्स में शामिल होना चाहते थे। उन्हें तेज रफ्तार गाड़ियों और फॉर्मूला-1 रेसिंग का बेहद जुनून था, लेकिन किस्मत और पारिवारिक सुरक्षा के चलते उनका यह रास्ता पूरी तरह बदल गया।
KBC के मंच पर अमिताभ बच्चन के सामने छलका दर्द
इस अनसुने सपने का खुलासा खुद सनी देओल ने चर्चित रियलिटी शो 'कौन बनेगा करोड़पति' (KBC) के मंच पर किया। शो के होस्ट और सदी के महानायक अमिताभ बच्चन ने जब उनसे पूछा कि क्या वे वाकई एक रेसिंग ड्राइवर बनना चाहते थे, तो सनी देओल पुरानी यादों में खो गए। उन्होंने मुस्कुराते हुए इस बात को स्वीकार किया और बताया कि ड्राइविंग को लेकर उनका पैशन किस कदर सिर चढ़कर बोलता था।
पिता धर्मेंद्र का डर बना रुकावट
सनी देओल ने आगे बताया कि उनके इस सपने के पूरा न होने की सबसे बड़ी वजह उनके पिता और हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र थे। धर्मेंद्र अपने बच्चों को लेकर हमेशा से बेहद प्रोटेक्टिव रहे हैं। सनी के मुताबिक, जब भी वे किसी एडवेंचर स्पोर्ट्स या रेसिंग जैसे जोखिम भरे खेल में हिस्सा लेने की बात करते, तो पिता का सुरक्षात्मक स्वभाव आड़े आ जाता था। धर्मेंद्र को डर था कि रफ्तार के इस खेल में कहीं उनके बेटे को कोई चोट न लग जाए। इसी चिंता और प्यार के कारण उन्हें कभी रेसिंग ट्रैक पर उतरने की इजाजत नहीं मिली।
पर्दे पर दिखाई रफ्तार की दीवानगी
भले ही सनी देओल पेशेवर तौर पर फॉर्मूला-1 रेसिंग की दुनिया में कदम न रख सके हों, लेकिन गाड़ियों और रफ्तार के प्रति उनका प्रेम कभी कम नहीं हुआ। वे आज भी अच्छी गाड़ियों के शौकीन हैं। निजी जिंदगी में भले ही पापा के डर से उनका यह सपना अधूरा रह गया हो, लेकिन उन्होंने अपनी फिल्मों के कई एक्शन सीन्स में अपनी बेहतरीन ड्राइविंग स्किल्स का प्रदर्शन करके अपने इस जुनून की झलक दर्शकों को जरूर दिखाई है।

अलख सर ने किया पीएम मोदी की फ्री ऑनलाइन कोचिंग का बिना शर्त समर्थन
फिज़िक्सवाला (PhysicsWallah) के संस्थापक अलख पांडेय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग योजना का खुलकर स्वागत किया है। उन्होंने साफ कहा कि उन्हें इस पहल से कोई निजी मुनाफा नहीं चाहिए। भारत के हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुफ्त पहुंचानी चाहिए और वह इस राष्ट्रीय उद्देश्य में पूर्ण सहयोग देने के लिए तैयार हैं।
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फिज़िक्सवाला (PhysicsWallah) के संस्थापक अलख पांडेय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग योजना का खुलकर स्वागत किया है। उन्होंने साफ कहा कि उन्हें इस पहल से कोई निजी मुनाफा नहीं चाहिए। भारत के हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मुफ्त पहुंचानी चाहिए और वह इस राष्ट्रीय उद्देश्य में पूर्ण सहयोग देने के लिए तैयार हैं।
शिक्षा क्षेत्र में एक नया सवेरा
भारत के शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ज़रूरतमंद छात्रों के लिए घोषित मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग पहल को देशभर से समर्थन मिल रहा है। इस कड़ी में सबसे प्रमुख नाम उभरकर आया है देश के जाने-माने एडटेक प्लेटफॉर्म 'फिज़िक्सवाला' के फाउंडर अलख पांडेय सर का। अलख सर ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे भारतीय शिक्षा व्यवस्था के हित में लिया गया एक ऐतिहासिक फैसला करार दिया है।
देश का हर बच्चा पढ़े, यही मेरा सपना
छात्रों के बीच बेहद लोकप्रिय अलख पांडेय ने बिना किसी झिझक के इस योजना को अपना बिना शर्त समर्थन दिया है। उन्होंने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत के हर कोने तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच होनी चाहिए, चाहे छात्र की आर्थिक स्थिति कैसी भी हो। अलख सर का मानना है कि जब बात देश के भविष्य और बच्चों के निर्माण की आती है, तो वहां व्यापारिक लाभ पीछे छूट जाने चाहिए। शिक्षा का व्यवसायीकरण करने के बजाय उसे एक सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में देखा जाना जरूरी है।
मुनाफा नहीं, केवल राष्ट्र निर्माण
अलख सर ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें इस सरकारी पहल से किसी भी प्रकार के व्यावसायिक लाभ या मुनाफे की उम्मीद नहीं है। उनका उद्देश्य हमेशा से यही रहा है कि कम से कम लागत में या पूरी तरह मुफ्त में बेहतरीन शिक्षा हर छात्र तक पहुंचे। प्रधानमंत्री की इस घोषणा ने उनके इस व्यक्तिगत मिशन को एक राष्ट्रीय मंच प्रदान किया है। इस कदम से ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लाखों ऐसे छात्रों को सीधा फायदा मिलेगा जो महंगी कोचिंग की फीस नहीं चुका सकते।
एडटेक जगत के लिए एक बड़ा संदेश
अलख पांडेय का यह समर्थन न केवल छात्रों के लिए उम्मीद की किरण है, बल्कि पूरे एडटेक (EdTech) उद्योग के लिए भी एक बड़ा संदेश है। जहां कोचिंग संस्थान भारी-भरकम फीस वसूलने के लिए जाने जाते हैं, वहीं अलख सर का यह रुख दिखाता है कि राष्ट्रहित को प्राथमिकता देना कितना महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री की मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग योजना और अलख पांडेय जैसे दिग्गजों का समर्थन मिलकर देश के डिजिटल एजुकेशन मॉडल को एक नई दिशा देने के लिए तैयार है।

पावरस्टार पवन सिंह का धमाकेदार पुश-अप्स वीडियो इंटरनेट पर वायरल
रिएलिटी शो 'भोजपुरी बवाल' के मंच पर पवन सिंह ने कॉमेडियन भारती सिंह को अपनी पीठ पर बैठाकर पुश-अप्स लगाकर हर किसी को हैरान कर दिया। इस मजेदार और पावर-पैक मोमेंट का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से ट्रेंड कर रहा है। भारती के चिर-परिचित मजाकिया अंदाज ने इस पल को और भी यादगार बना दिया।
रिएलिटी शो 'भोजपुरी बवाल' के मंच पर पवन सिंह ने कॉमेडियन भारती सिंह को अपनी पीठ पर बैठाकर पुश-अप्स लगाकर हर किसी को हैरान कर दिया। इस मजेदार और पावर-पैक मोमेंट का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से ट्रेंड कर रहा है। भारती के चिर-परिचित मजाकिया अंदाज ने इस पल को और भी यादगार बना दिया।
'भोजपुरी बवाल' के मंच पर हुआ असली 'पावर' शो
भोजपुरी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता और गायक पवन सिंह अपने दमदार अभिनय और गायकी के साथ-साथ अपनी फिटनेस के लिए भी जाने जाते हैं। हाल ही में रिएलिटी शो 'भोजपुरी बवाल' के सेट पर एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने दर्शकों को दांतों तले उंगलियां दबाने पर मजबूर कर दिया। शो में बतौर खास मेहमान शामिल हुईं देश की मशहूर कॉमेडियन भारती सिंह ने जब पवन सिंह की फिटनेस को चुनौती दी, तो पावरस्टार ने इसे बड़े ही अनोखे अंदाज में स्वीकार किया।
जब 'पावर' पर बैठा 'जनरेटर'
वायरल हो रहे प्रोमो वीडियो में देखा जा सकता है कि पवन सिंह पुश-अप्स लगाने की स्थिति में आते हैं और भारती सिंह बिना झिझक उनकी पीठ पर बैठ जाती हैं। भारती के वजन के बावजूद पवन सिंह बिना रुके और बेहद आसानी से पुश-अप्स मारना शुरू कर देते हैं। पवन सिंह की इस बेमिसाल ताकत और स्टेमिना को देखकर सेट पर मौजूद सभी लोग ताली बजाने पर मजबूर हो गए। इस दौरान भारती सिंह का सेंस ऑफ ह्यूमर भी चरम पर था। उन्होंने हंसते हुए कहा कि जब 'पावर' के ऊपर 'जनरेटर' बैठेगा, तो सोचिए कितनी शानदार और डबल पावर देखने को मिलेगी। भारती की इस बात पर सेट पर ठहाके गूंज उठे।
सोशल मीडिया पर छा गया वीडियो
इस मजेदार और हैरत अंगेज वीडियो के सामने आते ही यह इंटरनेट पर जंगल की आग की तरह फैल गया। पवन सिंह के फैंस उनके इस अंदाज की जमकर तारीफ कर रहे हैं। कई यूजर्स का कहना है कि पवन सिंह ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उन्हें भोजपुरी इंडस्ट्री का 'पावरस्टार' क्यों कहा जाता है। वहीं दूसरी तरफ, भारती सिंह और पवन सिंह की यह जुगलबंदी लोगों को खूब पसंद आ रही है। कमेंट सेक्शन में फैंस दिल और फायर वाले इमोजी की बारिश कर रहे हैं।
पावरस्टार का जलवा और दर्शकों का प्यार
पवन सिंह अक्सर अपने गानों और फिल्मों को लेकर चर्चा में रहते हैं, लेकिन टीवी शो के दौरान उनकी यह ऑन-स्क्रीन एनर्जी दर्शकों को खूब भा रही है। 'भोजपुरी बवाल' का यह एपिसोड इस समय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ट्रेंडिंग लिस्ट में शामिल हो चुका है। पवन सिंह की फिटनेस और भारती सिंह के कॉमिक टाइमिंग ने मिलकर इस प्रोमो को बेहद खास बना दिया है।

सुधर जाओ वरना...' स्वतंत्रता दिवस पर बाबा रामदेव का सरकार को कड़ा अल्टीमेटम
सरकारी नौकरियों में कथित धांधली और भ्रष्टाचार के खिलाफ योगगुरु रामदेव ने मोर्चा खोल दिया है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर तंत्र में सुधार नहीं हुआ, तो उन्हें एक बार फिर देशव्यापी आंदोलन के रास्ते पर उतरना पड़ेगा।
सरकारी नौकरियों में कथित धांधली और भ्रष्टाचार के खिलाफ योगगुरु रामदेव ने मोर्चा खोल दिया है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर तंत्र में सुधार नहीं हुआ, तो उन्हें एक बार फिर देशव्यापी आंदोलन के रास्ते पर उतरना पड़ेगा।
रामदेव का अल्टीमेटम: नौकरियों में धांधली पर फूटा गुस्सा
देश के 78वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जहां पूरा राष्ट्र जश्न में डूबा था, वहीं योगगुरु रामदेव के एक बयान ने राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में हलचल मचा दी है। रामदेव ने सरकारी नौकरियों में हो रही कथित गड़बड़ियों और रिश्वतखोरी के दीमक पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ और व्यवस्था में फैला भ्रष्टाचार बर्दाश्त से बाहर होता जा रहा है। अगर समय रहते प्रशासनिक कमियों को दुरुस्त नहीं किया गया, तो देश में असंतोष की ज्वाला भड़क सकती है।
'रामदेव को फिर न उतरना पड़े मैदान में': आंदोलन की चेतावनी
वर्ष 2011 के काले धन विरोधी आंदोलन की याद ताजा करते हुए बाबा रामदेव ने कहा, "देश में चारों तरफ हंगामा मचा है। ऐसे में अगर बार-बार आंदोलन करने पड़े तो देश की प्रगति की रफ्तार कैसे बनी रहेगी? इसीलिए सुधर जाओ, नहीं तो देश में और बड़े आंदोलन देखने को मिल सकते हैं।"
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि व्यवस्था को ऐसी नौबत नहीं आने देनी चाहिए कि रामदेव को दोबारा सड़क पर उतरकर आंदोलन की कमान संभालनी पड़े। उनका इशारा साफ था कि देश का युवा आज हताश है और पारदर्शी व्यवस्था की मांग कर रहा है।
प्रशासनिक पारदर्शिता और युवाओं का भविष्य
रामदेव ने जोर देकर कहा कि स्वतंत्रता का असली मतलब तब तक अधूरा है, जब तक आम नागरिक को बिना रिश्वत और सिफारिश के उसका हक न मिले। भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, फर्जीवाड़े और रिश्वतखोरी जैसी घटनाओं ने योग्य अभ्यर्थियों के मनोबल को तोड़ा है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि पूरी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए और दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि युवाओं का व्यवस्था पर भरोसा कायम रह सके।
सियासी गलियारों में गर्माहट
स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर योगगुरु का यह सख्त रुख कई मायनों में अहम माना जा रहा है। रामदेव के इस अल्टीमेटम के बाद प्रशासनिक महकमे और सियासी हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार इस चेतावनी को किस तरह लेती है और पारदर्शी व्यवस्था बनाने के लिए क्या कदम उठाती है।
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