
रेपिस्ट' कहने से बेहतर था गोली मार देते: बरी होकर बोले बृजभूषण
यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से बरी होने के बाद बीजेपी नेता बृजभूषण शरण सिंह का बड़ा बयान सामने आया है। 'दैनिक भास्कर' से बातचीत में उन्होंने अपना दर्द जाहिर करते हुए कहा कि चरित्र हनन से बेहतर था कि उन्हें गोली मार दी जाती। उन्होंने साफ-सुथरी छवि के साथ संसद लौटने की इच्छा भी जताई।
खबर का निचोड़
यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से बरी होने के बाद बीजेपी नेता बृजभूषण शरण सिंह का बड़ा बयान सामने आया है। 'दैनिक भास्कर' से बातचीत में उन्होंने अपना दर्द जाहिर करते हुए कहा कि चरित्र हनन से बेहतर था कि उन्हें गोली मार दी जाती। उन्होंने साफ-सुथरी छवि के साथ संसद लौटने की इच्छा भी जताई।
दर्द, बेइज्जती और वापसी की तड़प
कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष और बीजेपी के कद्दावर नेता बृजभूषण शरण सिंह यौन उत्पीड़न के आरोपों से मुक्त होने के बाद एक बार फिर आक्रामक और भावुक नजर आ रहे हैं। मीडिया संस्थान 'दैनिक भास्कर' को दिए एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने अपने दिल का गुबार निकाला। आरोपों के दौर को अपने जीवन का सबसे कठिन समय बताते हुए उन्होंने कहा कि 'रेपिस्ट' जैसा शब्द सुनना उनके लिए मौत से भी ज्यादा दर्दनाक था। अगर कोई उन्हें सीधा गोली मार देता, तो शायद इतना कष्ट नहीं होता जितना इस टैग ने दिया है।
चरित्र हनन के दर्द से संसद की दहलीज तक
बृजभूषण शरण सिंह पर लगे आरोपों ने न केवल देश की राजनीति में भूचाल ला दिया था, बल्कि भारतीय कुश्ती जगत को भी हिलाकर रख दिया था। लंबे समय तक चले कानूनी ड्रामे, पहलवानों के प्रदर्शन और राजनीतिक बयानों के बीच उन्हें अपनी कुर्सी तक गंवानी पड़ी थी। हालांकि, अब जब अदालत से उन्हें राहत मिल चुकी है, तो उनके तेवर बदले हुए नजर आ रहे हैं। उनका मानना है कि उन पर लगाए गए आरोप पूरी तरह से प्रायोजित थे, जिसका मकसद सिर्फ और सिर्फ उनकी राजनीतिक और सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना था।
राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं
साक्षात्कार के दौरान बृजभूषण ने भविष्य के राजनीतिक संकेतों को भी पूरी तरह से स्पष्ट कर दिया। संसद वापसी के सवाल पर उन्होंने बेहद सधे हुए अंदाज में कहा कि जिस सदन से वे बेइज्जत होकर बाहर आए थे, अब वहां पूरी तरह से साफ-सुथरी छवि के साथ वापस लौटना चाहते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीति अनिश्चितताओं का खेल है और इसमें कुछ भी असंभव नहीं होता। उनका यह बयान इस बात का साफ इशारा है कि वे आने वाले समय में एक बार फिर राजनीतिक पटल पर मजबूती से सक्रिय होने की तैयारी कर रहे हैं।
समर्थकों में नया उत्साह, विरोधियों के लिए चुनौती
अदालत के इस फैसले और बृजभूषण के तल्ख तेवरों के बाद उनके संसदीय क्षेत्र और समर्थकों के बीच एक नया उत्साह देखने को मिल रहा है। समर्थकों का मानना है कि सत्य की जीत हुई है और जो दाग लगाने की कोशिश की गई थी, वह अब धुल चुका है। वहीं दूसरी तरफ, बृजभूषण का यह बेबाक अंदाज और संसद लौटने की सार्वजनिक इच्छा उनके राजनीतिक विरोधियों के लिए एक नया सिरदर्द बन सकती है। अब देखना दिलचस्प होगा कि इस कानूनी राहत को वे अपनी राजनीतिक पुनर्जागरण में कैसे बदलते हैं।

दिल्ली में सीजेपी की बैठक पर बवाल, बीजेपी से मिली 'उल्टा लटकाने' की धमकी: दीपके
राजधानी दिल्ली में सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) की बैठक को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। संस्थापक अभिजीत दीपके का आरोप है कि हॉल मालिकों को बीजेपी की तरफ से धमकी मिली, जिसके बाद बुकिंग रद्द कर दी गई। दीपके का दावा है कि कार्यकर्ताओं को उल्टा लटकाने की चेतावनी दी गई है।
खबर का निचोड़:
राजधानी दिल्ली में सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) की बैठक को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। संस्थापक अभिजीत दीपके का आरोप है कि हॉल मालिकों को बीजेपी की तरफ से धमकी मिली, जिसके बाद बुकिंग रद्द कर दी गई। दीपके का दावा है कि कार्यकर्ताओं को उल्टा लटकाने की चेतावनी दी गई है।
बीजेपी पर लगा धमकी देने का गंभीर आरोप
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में राजनीतिक और सामाजिक गलियारों का माहौल एक बार फिर गरमा गया है। सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भारतीय जनता पार्टी पर बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। दीपके का दावा है कि दिल्ली में उनकी संस्था की एक महत्वपूर्ण बैठक होने वाली थी, लेकिन सत्ताधारी दल के दबाव और धमकियों के कारण उन्हें कोई हॉल तक नसीब नहीं हुआ।
सुबह-सुबह आया फोन और रद्द हुई बुकिंग
अभिजीत दीपके ने पूरे मामले की जानकारी साझा करते हुए बताया कि वह अपने वॉलेंटियर्स और कार्यकर्ताओं के साथ एक संवाद कार्यक्रम आयोजित करने जा रहे थे। इसके लिए काफी मशक्कत के बाद एक हॉल की बुकिंग पक्की हुई थी। हालांकि, कार्यक्रम वाले दिन की सुबह ही हॉल के मालिकों के पास धमकियों भरे फोन आने शुरू हो गए। हॉल प्रबंधन को साफ शब्दों में कहा गया कि अगर सीजेपी की बैठक उनके परिसर में आयोजित हुई, तो अंजाम बुरा होगा।
'उल्टा लटका देंगे' - दीपके का बड़ा दावा
दीपके के मुताबिक, बीजेपी के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हॉल मालिकों को डराते हुए कहा कि यदि यह बैठक रद्द नहीं की गई तो आयोजन करने वालों और जगह देने वालों को 'उल्टा लटका दिया जाएगा'। इस तरह की सीधी धमकी मिलने के बाद हॉल मालिक बुरी तरह डर गए और उन्होंने आनन-फानन में बुकिंग रद्द कर दी। इसके चलते सीजेपी को अपना पूर्व-निर्धारित कार्यक्रम स्थगित करने पर मजबूर होना पड़ा।
लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला
इस पूरी घटना के बाद से दिल्ली के सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी खेमे में भारी नाराजगी देखी जा रही है। संस्था के प्रतिनिधियों का कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और बैठक करने का अधिकार हर नागरिक को है। लेकिन जिस तरह से डर का माहौल बनाकर एक गैर-सरकारी संस्था के कार्यक्रम को रोका गया है, वह सीधे तौर पर अभिव्यक्ति की आजादी पर प्रहार है।
बीजेपी की तरफ से प्रतिक्रिया का इंतजार
मामले के तूल पकड़ने के बाद अब हर किसी की नजरें बीजेपी के आधिकारिक बयान पर टिकी हैं। सत्ताधारी दल की ओर से इन आरोपों पर क्या सफाई आती है, यह देखना अहम होगा। फिलहाल, दीपके के इस खुलासे ने दिल्ली की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।

जंतर-मंतर सीजन 2: सरकारी स्कूलों के ऑडिट का नया आंदोलन
सिटीजन फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) ने देशव्यापी आंदोलन के नए चरण 'जंतर-मंतर सीजन 2' का शंखनाद कर दिया है। इस बार मुख्य फोकस शिक्षा व्यवस्था पर है। स्वतंत्रता दिवस से CJP नागरिकों और अभिभावकों को सरकारी स्कूलों के 'सोशल ऑडिट' के लिए मैदान में उतारने जा रही है।
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सिटीजन फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) ने देशव्यापी आंदोलन के नए चरण 'जंतर-मंतर सीजन 2' का शंखनाद कर दिया है। इस बार मुख्य फोकस शिक्षा व्यवस्था पर है। स्वतंत्रता दिवस से CJP नागरिकों और अभिभावकों को सरकारी स्कूलों के 'सोशल ऑडिट' के लिए मैदान में उतारने जा रही है।
जन-आंदोलन का नया अध्याय
देशभर में बदहाल व्यवस्थाओं और प्रशासनिक सुस्ती के खिलाफ जनता का गुस्सा अब एक संगठित रूप ले रहा है। इसी कड़ी में सिटीजन फॉर जस्टिस एंड पीस (CJP) ने अपने नए अभियान 'जंतर-मंतर सीजन 2' का ऐलान कर दिया है। CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने इस अभियान की मंशा साफ करते हुए कहा कि देश में निकम्मी सरकारों और लापरवाह अफसरों के खिलाफ आंदोलनों की एक नई लहर शुरू हो चुकी है, और यही वास्तव में 'सीजन 2' है।
इस बार आंदोलन का सबसे मुख्य स्तंभ देश की बुनियादी शिक्षा प्रणाली को बनाया गया है। संगठन का मानना है कि जब तक सरकारी स्कूलों की स्थिति में धरातल पर सुधार नहीं होगा, तब तक देश के भविष्य को सही दिशा नहीं दी जा सकती।
स्वतंत्रता दिवस से 'सोशल ऑडिट' की शुरुआत
इस स्वतंत्रता दिवस से CJP एक विशेष राष्ट्रव्यापी पहल शुरू करने जा रहा है। इसके तहत देश भर के अभिभावकों, युवाओं और जागरूक नागरिकों को अपने-अपने इलाकों के सरकारी स्कूलों का रुख करने का आह्वान किया जाएगा।
नागरिक सीधे स्कूलों में जाकर वहां का 'सोशल ऑडिट' करेंगे। इस ऑडिट में देखा जाएगा कि कक्षाओं की स्थिति कैसी है, शिक्षकों की उपस्थिति का स्तर क्या है, पीने का साफ पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं।
बदहाली से बदलाव तक की रणनीति
सौरव दास के अनुसार, केवल कमियां निकालना इस अभियान का मकसद नहीं है। इस सोशल ऑडिट के जरिए जुटाए गए आंकड़ों और तस्वीरों को सार्वजनिक मंचों पर लाया जाएगा। स्कूलों की वास्तविक स्थिति को उजागर करके संबंधित विभागों और अधिकारियों पर प्रशासनिक कार्रवाई का दबाव बनाया जाएगा।
CJP का मानना है कि जब आम नागरिक सीधे तौर पर सरकारी संस्थाओं की निगरानी करेगा, तभी जवाबदेही तय हो सकेगी। यह अभियान केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि व्यवस्था को अंदर से सुधारने की एक सीधी और व्यावहारिक कोशिश है।
आम जनता की भागीदारी बनेगी ताकत
'जंतर-मंतर सीजन 2' की सबसे बड़ी ताकत आम नागरिकों की सीधी भागीदारी है। यह अभियान जंतर-मंतर की सीमाओं से निकलकर अब देश के कोने-कोने में स्थित सरकारी स्कूलों तक पहुंचेगा। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता का यह 'सोशल ऑडिट' देश की शिक्षा व्यवस्था में कितना बड़ा और असरदार बदलाव लेकर आता है।

गटर से कॉकरोच ही निकलेंगे, बुरा क्यों मानना: कंगना रनौत
अभिनेत्री कंगना रनौत ने अपने बेबाक बयान से एक बार फिर विवाद खड़ा कर दिया है। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर लोग खुद को कॉकरोच मानते हैं, तो उनका गटर में रहना स्वाभाविक है। इस बयान के बाद बॉलीवुड और सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है।
खबर का निचोड़
अभिनेत्री कंगना रनौत ने अपने बेबाक बयान से एक बार फिर विवाद खड़ा कर दिया है। एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर लोग खुद को कॉकरोच मानते हैं, तो उनका गटर में रहना स्वाभाविक है। इस बयान के बाद बॉलीवुड और सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है।
कंगना का तीखा हमला और नया विवाद
बॉलीवुड की बेबाक अभिनेत्री कंगना रनौत अपने बयानों के चलते अक्सर सुर्खियों में रहती हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने फिर से ऐसा बयान दिया है, जिसने बॉलीवुड गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक हलचल मचा दी है। कंगना ने तीखा तंज कसते हुए साफ कहा कि अगर कोई खुद की तुलना कॉकरोच से करता है, तो उसे यह बात समझनी होगी कि कॉकरोच का ठिकाना गटर ही होता है।
कंगना ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए तर्क दिया कि जो लोग खुद को कॉकरोच होने का दावा करते हैं, वे आखिर और कहां रहेंगे? जाहिर है कि वे गटर में ही दिखाई देंगे। उन्होंने कहा कि जब इंसान खुद ही अपनी तुलना ऐसे जीव से कर रहा है, तो फिर इस बात पर बुरा मानने या नाराज होने की कोई वजह नजर नहीं आती।
'मैं खुद को कॉकरोच नहीं मानती'
इंटरव्यू में जब उनसे इस तरह की टिप्पणियों पर सवाल पूछा गया, तो कंगना ने बिना किसी झिझक के अपना पक्ष रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह खुद को कभी भी किसी कॉकरोच की तरह नहीं देखतीं। उनका मानना है कि इंसान को अपना स्वाभिमान और पहचान खुद तय करनी होती है। जो लोग अपनी तुलना ऐसे कीट-पतंगों से करते हैं, उन्हें मिलने वाले जवाबों के लिए भी तैयार रहना चाहिए।
कंगना का यह बयान अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इंटरनेट यूजर्स इस पर दो धड़ों में बंट गए हैं। एक तरफ जहां कंगना के फैंस उनके इस निडर और बेबाक अंदाज की तारीफ कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके आलोचक इस बयान को बेहद विवादास्पद और अमर्यादित बता रहे हैं।
पहले भी बयानों से गरमा चुकी है राजनीति
यह पहली बार नहीं है जब कंगना रनौत ने अपनी बातों से राजनीतिक या सामाजिक गलियारों में नई बहस छेड़ी हो। इससे पहले भी वह फिल्म इंडस्ट्री, नेपोटिज्म और साथी कलाकारों पर खुलकर निशाना साधती रही हैं। कंगना अक्सर मानती हैं कि वह अपनी बात सीधे शब्दों में कहती हैं और उन्हें किसी की परवाह नहीं होती।
इस ताज़ा बयान के बाद एक बार फिर सिनेमा जगत और राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। आने वाले दिनों में इस पर अन्य हस्तियों की ओर से भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।

कप्तानी की मांग पड़ी भारी, GT में हार्दिक की वापसी बंद
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई इंडियंस के कप्तान हार्दिक पंड्या की गुजरात टाइटंस में वापसी के दरवाजे पूरी तरह बंद हो गए हैं। वापसी के लिए हार्दिक द्वारा रखी गई कप्तानी की शर्त को फ्रैंचाइज़ी ने सिरे से खारिज कर दिया। इस फैसले ने आईपीएल के अगले सीजन के समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं।
खबर का निचोड़
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई इंडियंस के कप्तान हार्दिक पंड्या की गुजरात टाइटंस में वापसी के दरवाजे पूरी तरह बंद हो गए हैं। वापसी के लिए हार्दिक द्वारा रखी गई कप्तानी की शर्त को फ्रैंचाइज़ी ने सिरे से खारिज कर दिया। इस फैसले ने आईपीएल के अगले सीजन के समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं।
कप्तानी की शर्त पर अड़े हार्दिक
हार्दिक पंड्या की गुजरात टाइटंस (जीटी) में दोबारा एंट्री को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर अब विराम लग गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, हार्दिक ने अपनी पुरानी फ्रैंचाइज़ी जीटी में लौटने की इच्छा तो जताई थी, लेकिन इसके साथ ही एक बड़ी शर्त भी रख दी थी। उन्होंने साफ तौर पर कहा था कि वे टीम में केवल तभी वापस आएंगे जब उन्हें कप्तानी की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
हालांकि, गुजरात टाइटंस के मैनेजमेंट को हार्दिक की यह शर्त बिल्कुल पसंद नहीं आई और उन्होंने इसे तुरंत ठुकरा दिया।
फ्रैंचाइज़ी ने दिखाया सख्त रुख
गुजरात टाइटंस के इस फैसले से साफ है कि फ्रैंचाइज़ी अपने मौजूदा नेतृत्व और टीम के ताने-बाने के साथ कोई समझौता करने के मूड में नहीं है। टीम प्रबंधन ने यह संदेश दे दिया है कि किसी भी खिलाड़ी की व्यक्तिगत मांगें टीम के दीर्घकालिक हितों से बढ़कर नहीं हो सकतीं।
हार्दिक की मांग खारिज होने के साथ ही उनकी गुजरात टाइटंस में वापसी की बची-कुची उम्मीदें भी समाप्त हो गई हैं।
मुंबई इंडियंस के लिए बदला माहौल
मुंबई इंडियंस (एमआई) में पिछले सीजन के दौरान हार्दिक पंड्या का अनुभव मिला-जुला ही रहा था। रोहित शर्मा की जगह कप्तानी संभालने के बाद उन्हें फैंस के भारी विरोध और दबाव का सामना करना पड़ा था। जीटी में वापसी के दरवाजे बंद होने के बाद अब हार्दिक के लिए मुंबई इंडियंस में ही अपनी जगह मजबूत करना एकमात्र विकल्प नजर आ रहा है।
क्रिकेट गलियारों में नई हलचल
इस नए घटनाक्रम ने आगामी आईपीएल रिटेंशन और नीलामी से पहले क्रिकेट के गलियारों में चर्चाएं तेज कर दी हैं। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि मुंबई इंडियंस का थिंक-टैंक हार्दिक पंड्या की भूमिका और कप्तानी को लेकर क्या अंतिम फैसला लेता है।
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