
कॉकरोच जनता पार्टी का आगाज: बेरोजगारी के खिलाफ नया सियासी शंखनाद
अभिजीत दीपके के नेतृत्व में नवगठित 'कॉकरोच जनता पार्टी' ने देशव्यापी अभियान 'क्या बोलती पब्लिक' की शुरुआत कर दी है। यह संगठन फिलहाल राजनीतिक दल के बजाय एक जन दबाव समूह के रूप में बेरोजगारी और परीक्षा घोटालों जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार को घेरेगा।
खबर का निचोड़
अभिजीत दीपके के नेतृत्व में नवगठित 'कॉकरोच जनता पार्टी' ने देशव्यापी अभियान 'क्या बोलती पब्लिक' की शुरुआत कर दी है। यह संगठन फिलहाल राजनीतिक दल के बजाय एक जन दबाव समूह के रूप में बेरोजगारी और परीक्षा घोटालों जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार को घेरेगा।
राजनीति के मैदान में उतरी 'कॉकरोच जनता पार्टी'
भारतीय राजनीतिक पटल पर एक दिलचस्प और नए संगठन का उदय हुआ है। 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) ने अपनी 15 सदस्यीय राष्ट्रीय टीम की घोषणा के साथ ही देश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। अभिजीत दीपके को इस नए संगठन का संस्थापक और संयोजक बनाया गया है। शुरुआत में इस संगठन को लेकर कई तरह की चर्चाएं थीं, लेकिन CJP ने साफ कर दिया है कि वह फिलहाल एक राजनीतिक दल का रूप नहीं लेगी, बल्कि एक मजबूत 'जन दबाव समूह' के तौर पर काम करेगी। यह समूह सीधे तौर पर आम जनता और युवाओं के बीच जाकर उनकी समस्याओं को सुनेगा और सत्ता पर दबाव बनाएगा।
युवाओं की आवाज और 'क्या बोलती पब्लिक' अभियान
देश के युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी एक नासूर बनती जा रही है। इसी समस्या को जड़ से समझने और उसका समाधान ढूंढने के लिए CJP ने 'क्या बोलती पब्लिक' नाम से एक राष्ट्रव्यापी अभियान का आगाज किया है। इस अभियान के तहत पार्टी देश के कोने-कोने में जाकर युवाओं और आम नागरिकों के मन टटोलेगी। इसके साथ ही, झारखंड में हालिया भर्ती परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं के खिलाफ यह संगठन पूरी ताकत से छात्रों के संघर्ष का समर्थन करेगा। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले सिस्टम के खिलाफ यह एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
राजनीतिक बयानबाजी और कानूनी मुश्किलें
संयोजक अभिजीत दीपके ने हाल ही में तीखे राजनीतिक बयान देते हुए एक केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे को जनता के मन से डर के खत्म होने का बड़ा प्रतीक बताया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आगामी 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में पूरी तरह से देश के युवाओं और उनकी आजीविका पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया है। हालांकि, इन तीखे तेवरों के बीच दीपके की मुश्किलें भी बढ़ती दिख रही हैं। देशविरोधी गतिविधियों के समर्थन के गंभीर आरोपों के चलते दिल्ली पुलिस में उनके खिलाफ एक शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है, जिससे यह नया संगठन कानूनी विवादों के घेरे में भी आ गया है।

आरक्षण पर मोहन भागवत का बड़ा बयान और सुप्रीम कोर्ट में केंद्र का स्पष्ट रुख
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने स्पष्ट किया है कि जब तक समाज में भेदभाव मौजूद है, आरक्षण जारी रहना चाहिए। दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर साफ कर दिया है कि एससी-एसटी आरक्षण ऐतिहासिक पिछड़ेपन पर आधारित है, इसलिए इसमें क्रीमी लेयर लागू नहीं हो सकती।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने स्पष्ट किया है कि जब तक समाज में भेदभाव मौजूद है, आरक्षण जारी रहना चाहिए। दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर साफ कर दिया है कि एससी-एसटी आरक्षण ऐतिहासिक पिछड़ेपन पर आधारित है, इसलिए इसमें क्रीमी लेयर लागू नहीं हो सकती।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान: सामाजिक भेदभाव मिटने तक जारी रहेगा आरक्षण
आरक्षण पर क्या बोले मोहन भागवत
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने आरक्षण के मुद्दे पर एक स्पष्ट और दूरदर्शी बयान दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा है कि जब तक देश में सामाजिक भेदभाव और असमानता की जड़ें मजबूत हैं, तब तक आरक्षण की व्यवस्था का जारी रहना बेहद जरूरी है। भागवत के इस बयान ने देश के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
लाभान्वितों की सामाजिक जिम्मेदारी
अपने संबोधन में मोहन भागवत ने सिर्फ आरक्षण के समर्थन की बात नहीं की, बल्कि इसके दायरे से लाभान्वित होने वाले वर्ग को भी एक आईना दिखाया है। उनका मानना है कि जो लोग इस व्यवस्था का लाभ उठाकर आगे बढ़ चुके हैं, उनका यह नैतिक कर्तव्य बनता है कि वे समाज के उन अंतिम पायदान पर खड़े लोगों तक मदद पहुंचाएं जो अब भी जरूरतमंद हैं। यह दृष्टिकोण समाज के भीतर एक सहयोगात्मक और प्रगतिशील संस्कृति को बढ़ावा देने वाला है।
सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार का हलफनामा
एक तरफ जहां सामाजिक संगठनों और विचारकों की ओर से बयान सामने आ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ न्यायिक मोर्चे पर भी स्थिति स्पष्ट हो रही है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर कर अपने रुख से पर्दा उठाया है। सरकार ने अदालत को बताया है कि अनुसूचित जातियों (एससी) और अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के लिए मिलने वाला आरक्षण पूरी तरह से ऐतिहासिक और सामाजिक पिछड़ेपन पर आधारित है, न कि केवल आर्थिक स्थिति पर।
क्रीमी लेयर और नीतिगत बदलाव पर रुख
केंद्र सरकार ने अपने स्पष्टीकरण में यह भी जोड़ा कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की तरह एससी-एसटी वर्ग में क्रीमी लेयर का सिद्धांत लागू नहीं किया जा सकता। सरकार के अनुसार, इस संवेदनशील और महत्वपूर्ण आरक्षण नीति में किसी भी तरह के बदलाव का अधिकार केवल देश की संसद के पास सुरक्षित है। न्यायालयीन प्रक्रिया के जरिए इसमें फेरबदल नहीं किया जा सकता, जिससे यह साफ होता है कि नीतिगत निर्णय विधायिका के दायरे में ही लिए जाएंगे।

'मां होने की खूबसूरत सज़ा': स्मृति ईरानी ने मातृत्व के दर्द और सच्चाई पर कही बड़ी बात
नेत्री और अभिनेत्री स्मृति ईरानी ने मातृत्व को लेकर एक बेहद भावुक और गहरी बात कही है। उन्होंने कहा कि मां की ज़िम्मेदारी तभी पूरी मानी जाती है जब बच्चे को उसकी ज़रूरत न रहे। उन्होंने इसे 'मां होने की खूबसूरत सज़ा' बताया है, जहां आप ऐसे बच्चे को पालते-पोसते हैं जो एक दिन बड़ा होकर आपको भूल जाता है।
> खबर का सार:
> नेत्री और अभिनेत्री स्मृति ईरानी ने मातृत्व को लेकर एक बेहद भावुक और गहरी बात कही है। उन्होंने कहा कि मां की ज़िम्मेदारी तभी पूरी मानी जाती है जब बच्चे को उसकी ज़रूरत न रहे। उन्होंने इसे 'मां होने की खूबसूरत सज़ा' बताया है, जहां आप ऐसे बच्चे को पालते-पोसते हैं जो एक दिन बड़ा होकर आपको भूल जाता है।
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मातृत्व का सबसे कठिन और सच्चा सच
राजनीति और अभिनय की दुनिया में अपनी मजबूत पहचान बनाने वाली स्मृति ईरानी ने हाल ही में मातृत्व के एक ऐसे पहलू पर खुलकर बात की, जिससे हर मां का दिल जुड़ा हुआ है। उन्होंने एक बातचीत के दौरान मां होने के अहसास को शब्दों में पिरोते हुए कहा कि मातृत्व में एक ऐसा पड़ाव आता है जब मां का सबसे बड़ा समर्पण यही साबित होता है कि अब बच्चे को उसकी कोई आवश्यकता नहीं है।
जब बच्चे को नहीं रहती मां की ज़रूरत
स्मृति ईरानी ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए समझाया कि एक मां अपने बच्चे को बेहद लाड़-प्यार से बड़ा करती है, उसे हर मुश्किल से बचाती है और अपने पैरों पर खड़ा करती है। लेकिन जीवन का कड़वा सच यह है कि जब वह बच्चा अपने पैरों पर खड़ा हो जाता है, तो उसे अपनी स्वतंत्र दुनिया में मां की ज़रूरत कम या लगभग खत्म महसूस होने लगती है। उन्होंने इसे एक मां के लिए सबसे दर्दनाक लेकिन अनिवार्य एहसास करार दिया।
'खूबसूरत सज़ा' है बच्चे का स्वतंत्र हो जाना
इस पूरी प्रक्रिया को उन्होंने 'मां होने की खूबसूरत सज़ा' की संज्ञा दी। उनका कहना था कि एक तरफ जहां बच्चे का आत्मनिर्भर होना और अपने जीवन में आगे बढ़ना मां की सबसे बड़ी जीत और सफलता होती है, वहीं दूसरी तरफ उसे अपने बच्चों से मिलने वाली वह दूरी और खालीपन जीवन का सबसे बड़ा दर्द भी देता है। स्मृति ईरानी के इस विचार ने सोशल मीडिया पर मातृत्व के इस अनूठे और मार्मिक पहलू को एक नई बहस और गहराई दे दी है।

राहुल गांधी के बयान पर कैप्टन अमरिंदर सिंह की प्रतिक्रिया, कहा- 'बचपन से जानता हूं उन्हें'
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा कैप्टन अमरिंदर सिंह को अपना पसंदीदा बीजेपी नेता बताए जाने पर पंजाब के पूर्व सीएम ने प्रतिक्रिया दी है। कैप्टन अमरिंदर ने कहा कि वह राहुल और प्रियंका को तब से जानते हैं जब वे छोटे बच्चे थे। उन्होंने राजीव गांधी के साथ अपनी पुरानी दोस्ती और सहपाठी होने के दिनों को भी याद किया।
> खबर का सार:
> कांग्रेस सांसद राहुल गांधी द्वारा कैप्टन अमरिंदर सिंह को अपना पसंदीदा बीजेपी नेता बताए जाने पर पंजाब के पूर्व सीएम ने प्रतिक्रिया दी है। कैप्टन अमरिंदर ने कहा कि वह राहुल और प्रियंका को तब से जानते हैं जब वे छोटे बच्चे थे। उन्होंने राजीव गांधी के साथ अपनी पुरानी दोस्ती और सहपाठी होने के दिनों को भी याद किया।
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राहुल गांधी के बयान पर कैप्टन अमरिंदर का पलटवार
पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की उस टिप्पणी पर अपनी बात रखी है, जिसमें राहुल ने उन्हें अपना पसंदीदा बीजेपी नेता बताया था। इस बयान के सामने आने के बाद सियासी गलियारों में चर्चाएं तेज हो गईं, जिस पर अब खुद कैप्टन अमरिंदर सिंह की प्रतिक्रिया सामने आई है।
गांधी परिवार से पुराने और गहरे रिश्ते
मीडिया से बातचीत के दौरान कैप्टन अमरिंदर सिंह ने गांधी परिवार के साथ अपने दशकों पुराने संबंधों का जिक्र किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को आज से नहीं, बल्कि तब से जानते हैं जब वे बहुत छोटे बच्चे थे। पारिवारिक और पुराने राजनीतिक रिश्तों का हवाला देते हुए उन्होंने इन बंधनों की गहराई को बयां किया।
राजीव गांधी के साथ दोस्ती और स्कूल के दिन
अपने और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के रिश्तों को याद करते हुए कैप्टन अमरिंदर ने बताया कि वे दोनों एक समय में स्कूल के दिनों में सहपाठी (Classmate) और अच्छे दोस्त हुआ करते थे। उन्होंने कहा कि उनके और राजीव गांधी के बीच का रिश्ता काफी पुराना और मजबूत रहा है, जो राजनीति में आने से बहुत पहले का था। कैप्टन के इस बयान से साफ होता है कि वैचारिक मतभेदों और पार्टी बदलने के बावजूद उनके मन में पुराने पारिवारिक और व्यक्तिगत संबंध आज भी जीवंत हैं।

पीएम मोदी की तस्वीर पर चप्पल मारने वाली बच्ची के वीडियो पर भड़कीं रुपाली गांगुली, बोलीं- 'काश वह तानाशाह होते'
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर पर चप्पल मारने वाले एक वायरल वीडियो पर अभिनेत्री रुपाली गांगुली ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर नाराजगी जताते हुए कहा कि देश के प्रधानमंत्री का इस तरह का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए और इसके गंभीर परिणाम होने चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि 'काश वह तानाशाह होते'।
> खबर का सार:
> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर पर चप्पल मारने वाले एक वायरल वीडियो पर अभिनेत्री रुपाली गांगुली ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर नाराजगी जताते हुए कहा कि देश के प्रधानमंत्री का इस तरह का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए और इसके गंभीर परिणाम होने चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि 'काश वह तानाशाह होते'।
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सोशल मीडिया पर वायरल हुआ विवादित वीडियो
टीवी इंडस्ट्री की मशहूर अभिनेत्री और 'अनुपमा' फेम रुपाली गांगुली अपने बेबाक बयानों के लिए जानी जाती हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें एक छोटी बच्ची प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर पर चप्पल मारती हुई नजर आ रही है। इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स में भारी आक्रोश देखने को मिला। कई लोगों ने इस तरह की परवरिश पर सवाल उठाए और बच्ची के माता-पिता के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
रुपाली गांगुली की तीखी प्रतिक्रिया
इस वायरल वीडियो पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए अभिनेत्री रुपाली गांगुली ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा कि देश के प्रधानमंत्री का इस तरह से अपमान करने के बेहद गंभीर परिणाम होने चाहिए। अपने गुस्से को बयां करते हुए उन्होंने आगे लिखा कि 'काश वह तानाशाह होते', जिससे इस प्रकार की ओछी मानसिकता और हरकतों पर लगाम लगाई जा सके। उनका यह बयान इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गया है।
यूजर्स ने की माता-पिता पर कार्रवाई की मांग
इस घटना के बाद से नेटिजन्स लगातार अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। एक अन्य एक्स (X) यूजर ने इस वीडियो पर कड़ा ऐक्शन लेते हुए बच्ची के माता-पिता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि मासूम बच्चों को इस तरह की राजनीतिक नफरत और अपमानजनक कृत्यों में शामिल करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और खतरनाक है, जिस पर तुरंत रोक लगनी चाहिए।
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