
नकली आईएएस और डोभाल का 'जासूस': खगड़िया में 100 करोड़ की ठगी का पर्दाफाश
बिहार के खगड़िया में पुलिस ने मनीष गुप्ता नामक एक बड़े ठग को गिरफ्तार किया है। खुद को आईएएस और एनएसए अजीत डोभाल का अंडरकवर एजेंट बताकर उसने करीब 100 करोड़ रुपये की संपत्ति जुटाई। उसके पास से ड्राइवरलेस टेस्ला कार, लग्जरी गाड़ियां और बारहसिंगा के सींग बरामद हुए हैं।
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> बिहार के खगड़िया में पुलिस ने मनीष गुप्ता नामक एक बड़े ठग को गिरफ्तार किया है। खुद को आईएएस और एनएसए अजीत डोभाल का अंडरकवर एजेंट बताकर उसने करीब 100 करोड़ रुपये की संपत्ति जुटाई। उसके पास से ड्राइवरलेस टेस्ला कार, लग्जरी गाड़ियां और बारहसिंगा के सींग बरामद हुए हैं।
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शातिर ठग का मायाजाल
बिहार के खगड़िया जिले में पुलिस ने एक ऐसे शातिर ठग को दबोचा है, जिसके कारनामों ने हर किसी को हैरान कर दिया है। मनीष गुप्ता नाम का यह शख्स खुद को भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) का अधिकारी और देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल का बेहद खास 'अंडरकवर एजेंट' बताता था। अपनी इस झूठी और हाई-प्रोफाइल पहचान की आड़ में वह भोले-भाले लोगों को अपने जाल में फंसाता और उनसे करोड़ों रुपये की ठगी करता था। पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद इस शातिर के कई चौंकाने वाले राज खुले हैं।
करोड़ों की संपत्ति और शाही ठाट-बाट
पड़ताल के दौरान पुलिस को मनीष गुप्ता के ठिकाने से अकूत संपत्ति का पता चला है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस फर्जीवाड़े के जरिए उसने करीब 100 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति खड़ी कर ली थी। उसके पास से एक ड्राइवरलेस टेस्ला कार और कई अन्य लग्जरी गाड़ियां बरामद हुई हैं, जो उसके शाही और रसूखदार जीवनशैली की गवाही देती हैं। इसके अलावा, उसके पास से 23 क्रेडिट कार्ड, 8 डेबिट कार्ड, भारी मात्रा में विदेशी शराब और वन्यजीव संरक्षण कानून के दायरे में आने वाले बारहसिंगा के सींग भी मिले हैं।
आर्थिक अपराध इकाई संभालेगी कमान
मामले की गंभीरता को देखते हुए खगड़िया पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। इतने बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा और करोड़ों की अवैध संपत्ति अर्जित करने के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं, इसका पता लगाने के लिए अब आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की विशेष टीम को मैदान में उतारा जाएगा। पुलिस यह खंगालने में जुटी है कि इस ठग ने किन-किन विभागों और बड़े लोगों को अपने झांसे में लिया था। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद से इलाके में हड़कंप मचा हुआ है और ठगी के शिकार अन्य लोग भी अब खुलकर सामने आने लगे हैं।

संसद में संग्राम: FCRA और परिसीमन पर महासंग्राम, विपक्ष के बीच पास हुआ ट्रिब्यूनल बिल
संसद के मानसून सत्र में FCRA और परिसीमन बिल को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। हंगामे के बीच न्यायाधिकरण सुधार विधेयक पारित हो गया है। राहुल गांधी ने NEET पेपर लीक पर गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग की है, जबकि राजनीतिक दलों के बीच तीखी बयानबाजी जारी है।
खबर का निचोड़
संसद के मानसून सत्र में FCRA और परिसीमन बिल को लेकर सरकार और विपक्ष आमने-सामने हैं। हंगामे के बीच न्यायाधिकरण सुधार विधेयक पारित हो गया है। राहुल गांधी ने NEET पेपर लीक पर गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग की है, जबकि राजनीतिक दलों के बीच तीखी बयानबाजी जारी है।
संसद में उबाल और हंगामे के बीच विधेयक पास
संसद के मानसून सत्र में राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर है। FCRA (विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम) और परिसीमन जैसे गंभीर मुद्दों पर गतिरोध लगातार गहराता जा रहा है। विपक्षी दलों के कड़े हंगामे और भारी विरोध के बीच सरकार ने न्यायाधिकरण सुधार विधेयक को संसद से पारित कराने में सफलता हासिल की है। सदन के भीतर और बाहर जिस तरह का माहौल बना हुआ है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह टकराव और अधिक बढ़ने वाला है।
राहुल गांधी का हमला और अमित शाह का पलटवार
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने नीट (NEET) पेपर लीक के मुद्दे को जोर-शोर से उठाते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग कर डाली है। इस तीखे हमले ने राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। दूसरी ओर, सरकार की तरफ से मोर्चा संभालते हुए अमित शाह ने छात्रों के विरोध और विपक्ष के हर सवाल का करारा जवाब देने की बात कही है। सरकार का यह रुख साफ संकेत देता है कि वह विपक्ष के दबाव के आगे झुकने के मूड में बिल्कुल नहीं है।
FCRA और परिसीमन पर सियासी पैंतरेबाजी
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सरकार महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों पर समर्थन जुटाने के लिए FCRA के कुछ प्रावधानों पर नरमी बरतने पर विचार कर रही है। हालांकि, इस रणनीति की राह आसान नहीं है। द्रमुक (DMK) और राकांपा (NCP-SP) जैसी पार्टियां इसका पुरजोर विरोध कर रही हैं, जिससे क्षेत्रीय समीकरण उलझते नजर आ रहे हैं।
संस्थाओं के नियंत्रण पर छिड़ी जुबानी जंग
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए देश की संवैधानिक संस्थाओं पर नियंत्रण स्थापित करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वायत्तता को कमजोर किया जा रहा है। इसके विपरीत, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने FCRA संशोधन का पूरी ताकत से समर्थन किया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए 'राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों' पर लगाम कसना बेहद जरूरी है, जिसके लिए यह कानून आवश्यक कदम है।

मिठाई की दुकान से भी भूखे निकलें तो... अफेयर पर बोले गोविंदा
बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा ने अपनी पत्नी सुनीता आहूजा द्वारा लगाए गए एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर्स के आरोपों पर चुप्पी तोड़ी है। एक इंटरव्यू में उन्होंने चुटीले अंदाज में खुद को शरीफ बताते हुए कहा कि 34 साल की उम्र तक उनका स्वभाव बेहद सीधा था और उन्होंने किसी भी तरह का कोई फायदा नहीं उठाया।
खबर का निचोड़
बॉलीवुड अभिनेता गोविंदा ने अपनी पत्नी सुनीता आहूजा द्वारा लगाए गए एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर्स के आरोपों पर चुप्पी तोड़ी है। एक इंटरव्यू में उन्होंने चुटीले अंदाज में खुद को शरीफ बताते हुए कहा कि 34 साल की उम्र तक उनका स्वभाव बेहद सीधा था और उन्होंने किसी भी तरह का कोई फायदा नहीं उठाया।
गोविंदा का विवादित बयान और अफेयर के आरोप
बॉलीवुड के 'हीरो नंबर वन' गोविंदा अपनी कॉमिक टाइमिंग और दमदार एक्टिंग के लिए जाने जाते हैं। हालांकि, इस बार वे अपने किसी फिल्मी प्रोजेक्ट की वजह से नहीं, बल्कि निजी जिंदगी से जुड़े बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान जब उनसे एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर्स और पत्नी सुनीता आहूजा के पुराने बयानों पर सवाल पूछा गया, तो अभिनेता ने बेहद बेबाक और चुटीले अंदाज में अपना पक्ष रखा।
गोविंदा ने हंसते हुए कहा कि वे 34 साल की उम्र तक इतने शरीफ इंसान थे कि आज पीछे मुड़कर देखने पर उन्हें खुद भी शर्मिंदगी महसूस होती है। अपने ऊपर लगे शादी के बाद अफेयर्स के आरोपों पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा, "अगर आप मिठाई की दुकान से भी भूखे निकलें, तो यह बहुत दुख की बात है।" उनके इस बयान ने सोशल मीडिया और बॉलीवुड गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है।
पत्नी सुनीता के आरोप और गोविंदा का जवाब
गोविंदा और सुनीता आहूजा की शादी को तीन दशक से भी ज्यादा का समय हो चुका है। सुनीता कई मौकों पर मीडिया और रियलिटी शोज में गोविंदा के फ्लर्टिंग नेचर और अफेयर्स को लेकर खुलकर बात कर चुकी हैं। इंटरव्यू में जब गोविंदा से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने अपनी बेदाग छवि और सादगी का जिक्र किया।
अभिनेता का मानना है कि उनके शुरुआती करियर और ढलती जवानी के दिनों में कई मौके आए, लेकिन उन्होंने खुद को संभालकर रखा। अपने मजाकिया अंदाज के जरिए उन्होंने यह जताने की कोशिश की कि उन पर लगे अफेयर के आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं और उनके जीवन में ऐसी किसी घटना की जगह कभी नहीं रही।
90 के दशक का स्टारडम और निजी जिंदगी
90 के दशक में गोविंदा की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री कई मशहूर अभिनेत्रियों के साथ सुपरहिट रही। उस दौर में नीलम कोठारी, करिश्मा कपूर और रवीना टंडन जैसी अभिनेत्रियों के साथ उनका नाम जोड़ा जाता था। हालांकि, गोविंदा हमेशा से यह कहते आए हैं कि ऑन-स्क्रीन बॉन्डिंग केवल प्रोफेशनलिज्म का हिस्सा थी।
गोविंदा का यह बयान उनके फैंस के बीच तेजी से वायरल हो रहा है। जहां कुछ लोग उनके जवाब देने के अंदाज और सेंस ऑफ ह्यूमर की तारीफ कर रहे हैं, वहीं कुछ इसे विवादित मान रहे हैं। एक बात तो तय है कि गोविंदा चाहे ऑन-स्क्रीन हों या ऑफ-स्क्रीन, दर्शकों का ध्यान खींचना उन्हें बखूबी आता है।

केतन हत्याकांड के बाद बदला ट्रेंड: शादी से पहले दूल्हों का बैकग्राउंड चेक करा रहे पेरेंट्स
केतन अग्रवाल की हत्या के बाद मुंबई में शादी से पहले बैकग्राउंड वेरिफिकेशन का चलन तेजी से बढ़ा है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित माता-पिता, खासकर दूल्हे के परिजन, अब प्राइवेट जासूसों की मदद ले रहे हैं। नेता और अमीर परिवारों में भी यह मांग बढ़ी है, जिसका खर्च ₹25,000 से ₹3 लाख तक है।
खबर का निचोड़
केतन अग्रवाल की हत्या के बाद मुंबई में शादी से पहले बैकग्राउंड वेरिफिकेशन का चलन तेजी से बढ़ा है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित माता-पिता, खासकर दूल्हे के परिजन, अब प्राइवेट जासूसों की मदद ले रहे हैं। नेता और अमीर परिवारों में भी यह मांग बढ़ी है, जिसका खर्च ₹25,000 से ₹3 लाख तक है।
शादी के बाजार में जासूसी का नया दौर
मुंबई में केतन अग्रवाल की सनसनीखेज हत्या ने वैवाहिक रिश्तों की नीव और परिवारों के भरोसे पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद से शहर के लोगों की सोच में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। शादी-ब्याह के पारंपरिक रीति-रिवाजों के बीच अब 'बैकग्राउंड चेक' सबसे महत्वपूर्ण कदम बन चुका है। रिश्ते तय करने से पहले केवल कुंडली मिलाना या आपसी जान-पहचान पर भरोसा करना अब गुजरे जमाने की बात होती जा रही है।
पेरेंट्स की बढ़ी चिंता और प्राइवेट डिटेक्टिव्स की मांग
हत्याकांड की खबर के बाद से मुंबई की प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसियों के पास फोन की घंटियां लगातार बज रही हैं। पूछताछ करने वालों में सबसे बड़ी संख्या उन माता-पिता की है जो अपने बेटों के लिए दुल्हन ढूंढ रहे हैं। बच्चों के सुरक्षित भविष्य को लेकर पेरेंट्स किसी भी तरह का जोखिम उठाने को तैयार नहीं हैं। वे होने वाले जीवनसाथी के अतीत, उसके सामाजिक व्यवहार, कार्यस्थल के माहौल और आपराधिक रिकॉर्ड की गहन जांच करवा रहे हैं।
वीआईपी और अमीर परिवारों का भी बदलता रुख
मशहूर प्राइवेट डिटेक्टिव रजनी पंडित के मुताबिक, बैकग्राउंड वेरिफिकेशन की यह मांग केवल आम मध्यमवर्गीय परिवारों तक सीमित नहीं है। बड़े-बड़े राजनेता, उद्योगपति और शहर के नामचीन अमीर परिवार भी अब अपनी संतानों के रिश्ते पक्के करने से पहले डिटेक्टिव एजेंसियों की सेवाएं ले रहे हैं। हाई-प्रोफाइल शादियों में गोपनीयता और सुरक्षा सर्वोपरि हो गई है, ताकि भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना या धोखाधड़ी से बचा जा सके।
कितना आता है जांच का खर्च
मैरिज बैकग्राउंड चेक का यह काम अब एक संगठित उद्योग का रूप ले चुका है। जांच के स्तर और जटिलता के आधार पर इस सर्विस का खर्च ₹25,000 से शुरू होकर ₹3 लाख तक जाता है। बेसिक वेरिफिकेशन में व्यक्ति की नौकरी, पढ़ाई और सामान्य आदतों की पड़ताल की जाती है। वहीं, प्रीमियम पैकेज में सोशल मीडिया एक्टिविटी, पर्सनल लाइफ स्टाइल, वित्तीय स्थिति और गुप्त पुलिस रिकॉर्ड्स तक की विस्तृत जांच शामिल होती है।
बदलती सामाजिक मानसिकता का प्रतीक
केतन हत्याकांड के बाद उभरा यह ट्रेंड साफ दिखाता है कि आज के दौर में रिश्ते सिर्फ भावनाओं पर नहीं, बल्कि ठोस तथ्यों और सुरक्षा के आधार पर तय हो रहे हैं। वैवाहिक संबंधों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लोग पेशेवर मदद लेने में कोई हिचकिचाहट नहीं दिखा रहे हैं। मुंबई से शुरू हुआ यह नया ट्रेंड आने वाले समय में देश के अन्य बड़े शहरों में भी तेजी से पैर पसार सकता है।

NTA के ढुलमुल रवैये से भड़के छात्र, UGC NET की आंसर की ना आने पर 11 अगस्त को बड़े प्रदर्शन की चेतावनी
UGC NET परीक्षा समाप्त हुए एक महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने अब तक प्रोविज़नल आंसर की जारी नहीं की है। इससे नाराज अभ्यर्थियों ने अल्टीमेटम दिया है कि यदि 10 अगस्त तक आंसर की जारी नहीं हुई, तो वे 11 अगस्त को NTA दफ्तर का घेराव करेंगे।
खबर का निचोड़
UGC NET परीक्षा समाप्त हुए एक महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने अब तक प्रोविज़नल आंसर की जारी नहीं की है। इससे नाराज अभ्यर्थियों ने अल्टीमेटम दिया है कि यदि 10 अगस्त तक आंसर की जारी नहीं हुई, तो वे 11 अगस्त को NTA दफ्तर का घेराव करेंगे।
लेट-लतीफी से अभ्यर्थियों का सब्र टूटा
UGC NET-2026 परीक्षा में शामिल लाखों अभ्यर्थियों के इंतजार की सीमा अब पूरी तरह से खत्म हो चुकी है। परीक्षा 22 जून से 5 जुलाई के बीच विभिन्न चरणों में आयोजित की गई थी। आमतौर पर परीक्षा समाप्त होने के कुछ ही दिनों बाद उत्तर कुंजी (आंसर की) जारी कर दी जाती है, लेकिन इस बार एक महीने से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक अपडेट सामने नहीं आया है। इस अप्रत्याशित देरी से नाराज उम्मीदवारों ने अब विरोध का रास्ता चुनने का मन बना लिया है।
10 अगस्त की डेडलाइन और NTA ऑफिस का घेराव
अभ्यर्थियों ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को स्पष्ट शब्दों में अल्टीमेटम दिया है। छात्रों के प्रतिनिधियों का कहना है कि यदि 10 अगस्त तक आधिकारिक वेबसाइट पर आंसर की अपलोड नहीं की जाती है, तो देशभर से आए छात्र 11 अगस्त को दिल्ली स्थित NTA मुख्यालय के बाहर एकत्र होकर जोरदार प्रदर्शन करेंगे। सोशल मीडिया पर भी इस बाबत अभियान चलाया जा रहा है, जहां अभ्यर्थी अपनी निराशा और आक्रोश जाहिर कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि एजेंसी की इस सुस्ती का सीधा असर उनके भविष्य और आगे की शैक्षणिक योजनाओं पर पड़ रहा है।
NTA के पिछले रिकॉर्ड पर उठे सवाल
छात्रों के बढ़ते गुस्से की एक बड़ी वजह NTA का पिछला रिकॉर्ड भी है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछली चार परीक्षाओं में एजेंसी ने परीक्षा खत्म होने के महज 10 दिनों के भीतर आंसर की जारी कर दी थी। ऐसे में इस बार एक महीने से अधिक का विलंब छात्रों की समझ से परे है। समय पर उत्तर कुंजी जारी न होने के कारण न तो अभ्यर्थी अपने अंकों का सही आकलन कर पा रहे हैं और न ही रिजल्ट को लेकर कोई स्पष्टता बन पा रही है।
अधर में लटका लाखों छात्रों का भविष्य
UGC NET की परीक्षा देश के विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर की पात्रता और जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। परीक्षा परिणाम में देरी के कारण अगली प्रक्रियाएं जैसे कि पीएचडी एडमिशन और इंटरव्यू पूरी तरह से ठप्प पड़े हैं। अभ्यर्थियों का तर्क है कि पारदर्शी और समयबद्ध प्रक्रिया किसी भी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा की पहली शर्त होती है। अब सबकी निगाहें 10 अगस्त की तारीख पर टिकी हैं कि NTA कोई कदम उठाता है या 11 अगस्त को बड़ा विरोध-प्रदर्शन देखने को मिलता है।
Delight News
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