Delight News Logo
Latest सामान्य ख़बरें सरकारी नौकरी करेंट अफेयर्स परीक्षा ज्ञान
सोनम वांगचुक का बड़ा खुलासा: इस डर से वापस ली धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग

सोनम वांगचुक का बड़ा खुलासा: इस डर से वापस ली धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग

Delight News
📅 05 Aug2026

पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग वापस लेने के पीछे दो मुख्य कारणों का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि सरकार ने दो प्रमुख मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया था। साथ ही, उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर किसी बड़े विवाद या हिंसा की आशंका का डर भी सता रहा था।

सोनम वांगचुक का बड़ा खुलासा: इस डर से वापस ली धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग
खबर का निचोड़
पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग वापस लेने के पीछे दो मुख्य कारणों का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि सरकार ने दो प्रमुख मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया था। साथ ही, उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर किसी बड़े विवाद या हिंसा की आशंका का डर भी सता रहा था।
सरकार का रुख और राष्ट्रीय सुरक्षा का डर
जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने आखिरकार उस रहस्य से पर्दा उठा दिया है कि उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की अपनी जिद्द आखिर क्यों छोड़ दी। वांगचुक के इस खुलासे के बाद राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में नई चर्चा छिड़ गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला किसी दबाव में नहीं, बल्कि परिस्थितियों की गंभीरता और देश के माहौल को देखते हुए लिया गया था।
वांगचुक के अनुसार, निर्णय बदलने के पीछे दो सबसे महत्वपूर्ण कारक थे—पहला, सरकार की ओर से मिला सकारात्मक संकेत और दूसरा, देश में किसी बड़े अप्रिय घटनाक्रम की आशंका।
मांगों पर लचीलापन और सीजेपी का रुख
सोनम वांगचुक ने बताया कि बातचीत के दौरान सरकार ने आंदोलनकारियों की दो प्रमुख मांगों पर काफी लचीला और सहयोगात्मक रुख अपनाया। हालांकि, सीजेपी (CJP) का पूरा जोर केवल धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर ही टिका हुआ था। वांगचुक का मानना था कि जब सरकार मुख्य मुद्दों और मांगों पर विचार करने के लिए तैयार दिख रही हो, तो केवल एक व्यक्ति के इस्तीफे की बात पर अड़े रहना आंदोलन के व्यापक हित में नहीं होगा।
संवाद के रास्ते खुले रखने और समाधान की तरफ बढ़ने के लिए उन्होंने अपनी इस मांग को पीछे छोड़ना ही बेहतर समझा।
लेह की घटना और राष्ट्रीय स्तर की चिंता
अपनी जिद्द पीछे छोड़ने की दूसरी और सबसे बड़ी वजह बताते हुए सोनम वांगचुक ने एक गहरे डर का जिक्र किया। 23 जुलाई के आसपास के माहौल को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय लोगों के बीच यह चर्चा चरम पर थी कि कुछ बहुत बड़ा और अनहोनी होने वाली है।
उनके दिमाग में पिछले साल लेह में हुई वह घटना ताजा थी, जब सुरक्षाकर्मियों को गोलियां चलानी पड़ी थीं। वांगचुक को इस बात का गहरा खौफ था कि लेह जैसी हिंसक या तनावपूर्ण स्थिति कहीं राष्ट्रीय स्तर पर न दोहराई जाए। किसी भी संभावित हिंसा, जनहानि या देशव्यापी अशांति को रोकने के लिए उन्होंने शांति और समझदारी का रास्ता चुनना सही समझा।
इंदिरा गांधी से सुनेत्रा पवार तक: राजनीतिक गलियारों में फिर क्यों गूंजा 'गूंगी गुड़िया' तंज?

इंदिरा गांधी से सुनेत्रा पवार तक: राजनीतिक गलियारों में फिर क्यों गूंजा 'गूंगी गुड़िया' तंज?

Delight News
📅 05 Aug2026

वर्ष 1966 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के लिए इस्तेमाल हुआ शब्द 'गूंगी गुड़िया' देश के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर गूंज उठा है। महाराष्ट्र की उप-मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार पर कांग्रेस नेता की ओर से की गई इस टिप्पणी के बाद एनसीपी कार्यकर्ताओं ने मुंबई स्थित कांग्रेस कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया।

इंदिरा गांधी से सुनेत्रा पवार तक: राजनीतिक गलियारों में फिर क्यों गूंजा 'गूंगी गुड़िया' तंज?
वर्ष 1966 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के लिए इस्तेमाल हुआ शब्द 'गूंगी गुड़िया' देश के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर गूंज उठा है। महाराष्ट्र की उप-मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार पर कांग्रेस नेता की ओर से की गई इस टिप्पणी के बाद एनसीपी कार्यकर्ताओं ने मुंबई स्थित कांग्रेस कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन किया।
'गूंगी गुड़िया' टिप्पणी से महाराष्ट्र में भड़का सियासी संग्राम
महाराष्ट्र की राजनीति में जुबानी जंग अक्सर तीखे मोड़ लेती रही है, लेकिन इस बार मामला उप-मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार पर की गई एक व्यक्तिगत और अपमानजनक टिप्पणी से गरमा गया है। कांग्रेस नेता द्वारा सुनेत्रा पवार को 'गूंगी गुड़िया' कहे जाने के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) का गुस्सा फूट पड़ा। एनसीपी कार्यकर्ताओं ने मुंबई में कांग्रेस दफ्तर के बाहर जमकर विरोध प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। इस विवाद ने राज्य के सियासी माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया है।
1966 का वो दौर: राममनोहर लोहिया ने गढ़ा था यह शब्द
राजनीतिक बयानों के इतिहास को देखें तो 'गूंगी गुड़िया' शब्द नया नहीं है। इसका पहला प्रयोग वर्ष 1966 में हुआ था, जब देश की कमान पहली बार इंदिरा गांधी के हाथों में आई थी। उस समय प्रख्यात समाजवादी नेता डॉ. राममनोहर लोहिया ने इंदिरा गांधी के शांत स्वभाव, संसद में कम बोलने और संकोच को लेकर उन पर यह तंज कसा था।
लोहिया का यह शब्द विपक्षी राजनीति में इंदिरा गांधी की घेराबंदी का बड़ा हथियार बना था। हालांकि, बाद में इंदिरा गांधी ने अपने दृढ़ फैसलों, 1971 के युद्ध और मजबूत नेतृत्व से इस छवि को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया था।
अतीत के तंज से वर्तमान का बवंडर
दशकों पुराने इस विवादित शब्द का दोबारा इस्तेमाल यह दर्शाता है कि भारतीय राजनीति में महिलाओं के खिलाफ किस तरह पुरानी शब्दावली को नए सिरे से दोहराया जाता है। एनसीपी नेताओं का स्पष्ट कहना है कि एक संवैधानिक पद पर बैठी महिला नेता के लिए इस प्रकार की भाषा का प्रयोग बेहद अमर्यादित और अस्वीकार्य है।
सुनेत्रा पवार को लेकर शुरू हुए इस नए विवाद ने विपक्ष को रक्षात्मक स्थिति में ला खड़ा किया है, जबकि सत्तारूढ़ खेमा इसे महिलाओं के अपमान से जोड़कर आक्रामक रुख अपनाए हुए है।
महिला पहलवान यौन उत्पीड़न मामला: दिल्ली कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह को किया बरी

महिला पहलवान यौन उत्पीड़न मामला: दिल्ली कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह को किया बरी

Delight News
📅 04 Aug2026

दिल्ली के राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को बड़ी राहत देते हुए 6 महिला पहलवानों द्वारा दर्ज कराए गए यौन उत्पीड़न के मामले में बरी कर दिया है। कोर्ट ने सह-आरोपी विनोद तोमर को भी सभी आरोपों से मुक्त कर दिया, जिससे लंबे समय से चला आ रहा यह विवाद एक नए मोड़ पर पहुंच गया है।

महिला पहलवान यौन उत्पीड़न मामला: दिल्ली कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह को किया बरी
खबर का निचोड़
दिल्ली के राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को बड़ी राहत देते हुए 6 महिला पहलवानों द्वारा दर्ज कराए गए यौन उत्पीड़न के मामले में बरी कर दिया है। कोर्ट ने सह-आरोपी विनोद तोमर को भी सभी आरोपों से मुक्त कर दिया, जिससे लंबे समय से चला आ रहा यह विवाद एक नए मोड़ पर पहुंच गया है।
महिला पहलवानों से जुड़े यौन उत्पीड़न मामले में पूर्व WFI अध्यक्ष बरी
भारतीय कुश्ती जगत और देश की राजनीति में लंबे समय तक सुर्खियों में रहे यौन उत्पीड़न मामले में दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने भारतीय कुश्ती संघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को 6 महिला पहलवानों द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के सभी आरोपों से पूरी तरह बरी कर दिया है। इस फैसले के साथ ही देश की राजनीति और खेल जगत में एक बार फिर गर्माहट आ गई है।
सह-आरोपी विनोद तोमर को भी मिली राहत
अदालत ने केवल बृजभूषण शरण सिंह को ही नहीं, बल्कि इस मामले में नामज़द एक अन्य आरोपी और भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को भी दोषमुक्त कर दिया है। दोनों पर महिला पहलवानों के साथ कथित तौर पर यौन उत्पीड़न और डराने-धमकाने के गंभीर आरोप लगाए गए थे। कोर्ट द्वारा साक्ष्यों और तर्कों की गहन समीक्षा के बाद दोनों को राहत देने का फैसला सुनाया गया।
जंतर-मंतर से उठी विरोध की चिंगारी और लंबा कानूनी सफर
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई थी जब देश के शीर्ष पहलवानों ने दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन शुरू किया था। पहलवान विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने वाले एथलीटों ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ मोर्चा खोला था। महीनों चले इस विरोध प्रदर्शन ने न सिर्फ मीडिया का ध्यान खींचा, बल्कि संसद से लेकर सड़कों तक तीखी बहस को जन्म दिया था।
महिला पहलवानों ने महासंघ के अध्यक्ष पर अपने पद का दुरुपयोग करने और महिला खिलाड़ियों का मानसिक व शारीरिक शोषण करने के संगीन आरोप लगाए थे। लंबी खींचतान और सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद दिल्ली पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज की थी और चार्जशीट दाखिल की थी।
फैसले का खेल और राजनीति पर असर
अदालत का यह फैसला भारतीय कुश्ती और राजनीतिक गलियारों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। एक तरफ जहां बृजभूषण शरण सिंह और उनके समर्थकों के लिए यह कानूनी जीत के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ इस फैसले ने आंदोलनकारी पहलवानों की कानूनी लड़ाई पर बड़ा विराम लगा दिया है।
जेल का खौफनाक सच: 70 लोगों पर एक बाथरूम

जेल का खौफनाक सच: 70 लोगों पर एक बाथरूम

Delight News
📅 03 Aug2026

बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान ने एक रियलिटी शो में अपने जेल के दिनों का खौफनाक अनुभव साझा किया है। उन्होंने बताया कि कैसे एक छोटी सी जगह में 50-70 कैदियों के बीच केवल एक इंडियन कमोड वाला बाथरूम हुआ करता था। वहां छिपकलियां थीं और गंदगी का अंबार लगा रहता था।

जेल का खौफनाक सच: 70 लोगों पर एक बाथरूम
सार (Summary):
बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान ने एक रियलिटी शो में अपने जेल के दिनों का खौफनाक अनुभव साझा किया है। उन्होंने बताया कि कैसे एक छोटी सी जगह में 50-70 कैदियों के बीच केवल एक इंडियन कमोड वाला बाथरूम हुआ करता था। वहां छिपकलियां थीं और गंदगी का अंबार लगा रहता था।
रियलिटी शो के मंच पर छलका दर्द
बॉलीवुड के 'दबंग' सलमान खान हमेशा से ही अपने बेबाक और स्पष्टवादी अंदाज के लिए जाने जाते हैं। वह जो भी बोलते हैं, सीधे दिल से बोलते हैं। हाल ही में एक मशहूर रियलिटी शो को होस्ट करने के दौरान उन्होंने अपनी जिंदगी के उस काले और खौफनाक अध्याय के पन्ने पलटे, जिसके बारे में वह अमूमन सार्वजनिक मंचों पर बात करने से बचते रहे हैं। शो के प्रतिभागियों को जीवन की असल कठिनाइयों का अहसास कराने के लिए सलमान ने जेल की उन सलाखों के पीछे के खौफनाक सच को उजागर किया। उनका यह बयान सुनकर वहां मौजूद हर शख्स सन्न रह गया।
बेहद छोटी सी कोठरी और 70 कैदियों की भीड़
जेल की जिंदगी किसी भी इंसान के लिए एक डरावने सपने से कम नहीं होती, फिर चाहे वह कोई आम आदमी हो या देश का सबसे बड़ा सुपरस्टार। सलमान ने शो के प्रतिभागियों का हौसला बढ़ाते हुए और उन्हें संयम का पाठ पढ़ाते हुए अपने उन मुश्किल दिनों को याद किया। उन्होंने बताया कि जिस जेल की बैरक में उन्हें रखा गया था, वह बहुत ही छोटी थी। उस बेहद संकरी जगह में उनके साथ 50, 60 से लेकर 70 कैदी एक साथ ठूंसे हुए थे। इतनी भारी भीड़ और जगह की भयंकर कमी के कारण वहां करवट लेना या ठीक से सांस लेना भी एक बड़ी चुनौती बन जाता था।
सिर्फ एक इंडियन कमोड और बदहाली का आलम
सुविधाओं के नाम पर जेल में क्या हालात होते हैं, इसका जिक्र करते हुए सलमान ने जो खुलासा किया, वह वाकई दिल दहला देने वाला था। 70 लोगों की उस भारी भीड़ की जरूरतों को पूरा करने के लिए उस बैरक में सिर्फ और सिर्फ एक ही बाथरूम उपलब्ध था। यह कोई आधुनिक सुख-सुविधाओं वाला वॉशरूम नहीं था, बल्कि वहां एक साधारण भारतीय शैली (इंडियन स्टाइल) का कमोड लगा हुआ था। आप कल्पना कर सकते हैं कि इतने सारे लोगों के लिए मात्र एक इंडियन कमोड का होना कितना भयावह है। हर दिन उस एक बाथरूम का इतने सारे लोगों द्वारा इस्तेमाल किया जाना किसी भी इंसान के मानसिक और शारीरिक धैर्य की सबसे बड़ी परीक्षा थी।
चारों तरफ मंडराती छिपकलियां और असहनीय गंदगी
जेल की उस खौफनाक कोठरी की मुश्किलें सिर्फ भीड़ और एक बाथरूम तक ही सीमित नहीं थीं। वहां साफ-सफाई और हाइजीन का नामोनिशान तक नहीं था। सलमान ने अपने हाथों से इशारा करते हुए प्रतिभागियों को बताया कि उस जगह पर कितनी ज्यादा गंदगी भरी रहती थी। उन्होंने बताया कि उस बैरक और बाथरूम की दीवारों पर हमेशा छिपकलियां रेंगती रहती थीं। बदबू और गंदगी का स्तर इतना अधिक था कि उसे शब्दों में पूरी तरह बयां करना नामुमकिन है। यह सब देखकर किसी का भी दम घुट सकता है।
सुपरस्टार की जिंदगी का सबसे कड़वा सच
करोड़ों दिलों पर राज करने वाले और महलों जैसी जिंदगी जीने वाले सलमान खान का यह अनुभव इस बात का प्रमाण है कि जेल की चारदीवारी के अंदर का जीवन दुनिया की हर चकाचौंध से कोसों दूर होता है। वहां कोई स्टारडम काम नहीं आता, बल्कि वहां की सच्चाई बेहद कठोर और भयानक होती है। सलमान ने यह किस्सा इसलिए साझा किया ताकि रियलिटी शो के प्रतिभागी सीमित संसाधनों में शिकायत करने के बजाय हर मुश्किल परिस्थिति में खुद को ढालना सीखें।
ग्लासगो 2026: भारत का 24 वर्षों का सबसे कमजोर प्रदर्शन

ग्लासगो 2026: भारत का 24 वर्षों का सबसे कमजोर प्रदर्शन

Delight News
📅 03 Aug2026

ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का समापन भारत के लिए एक कड़वा अनुभव रहा। 39 पदकों के साथ चौथे स्थान पर रहना पिछले 24 वर्षों में भारत का सबसे खराब प्रदर्शन है। निराशाओं के बीच एथलेटिक्स और जूडो ने उम्मीद की किरण दिखाई। अब देश की नजरें अहमदाबाद 2030 की मेजबानी पर टिकी हैं।

ग्लासगो 2026: भारत का 24 वर्षों का सबसे कमजोर प्रदर्शन
खबर का निचोड़:
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का समापन भारत के लिए एक कड़वा अनुभव रहा। 39 पदकों के साथ चौथे स्थान पर रहना पिछले 24 वर्षों में भारत का सबसे खराब प्रदर्शन है। निराशाओं के बीच एथलेटिक्स और जूडो ने उम्मीद की किरण दिखाई। अब देश की नजरें अहमदाबाद 2030 की मेजबानी पर टिकी हैं।
पदकों का गिरता ग्राफ
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के समापन के साथ ही भारतीय खेल जगत के लिए एक कठिन अध्याय का अंत हुआ है। पदकों की तालिका में भारत चौथे स्थान पर सिमट गया, जिसे खेल प्रेमियों और विशेषज्ञों के बीच निराशा के रूप में देखा जा रहा है। 39 पदकों का आंकड़ा पिछले 24 वर्षों में भारत का सबसे कमजोर प्रदर्शन है। यह संख्या न केवल बीते रिकॉर्ड्स से काफी पीछे है, बल्कि भारतीय खेल प्रबंधन और खिलाड़ियों की तैयारी पर भी बड़े सवाल खड़े करती है।
लंबे समय बाद भारत का कॉमनवेल्थ स्तर पर यह 'डाउनफॉल' खेल जगत के लिए एक बड़ा 'वेक-अप कॉल' है। इस प्रदर्शन ने स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक स्तर पर कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच भारत को अपनी रणनीतियों में बदलाव और जमीनी स्तर पर बड़े सुधारों की तत्काल आवश्यकता है।
एथलेटिक्स और जूडो ने बचाई लाज
कुल प्रदर्शन भले ही निराशाजनक रहा हो, लेकिन कुछ खेलों ने भारतीय तिरंगे को गर्व से ऊपर बनाए रखा। एथलेटिक्स और पैरा-एथलेटिक्स का प्रदर्शन इस बार विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा, जहां खिलाड़ियों ने अपना दम दिखाते हुए कुल 16 पदक झोली में डाले। गुलवीर सिंह का प्रदर्शन इस खेल में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय रहा, जिन्होंने अपनी मेहनत से दो पदक जीतकर भारत का मान बढ़ाया।
इसके अलावा, जूडो में भारतीय खिलाड़ियों ने जबरदस्त जुझारूपन दिखाया। अस्मिता डे और हर्ष सिंह ने स्वर्ण पदकों के साथ कुल 4 पदक जीतकर इस खेल में भारत की ताकत का लोहा मनवाया। यह सफलता दर्शाती है कि यदि सही दिशा में प्रशिक्षण और प्रोत्साहन मिले, तो भारतीय खिलाड़ी किसी भी स्तर पर पदक जीतने की क्षमता रखते हैं। ये खिलाड़ी आने वाले समय में भारतीय खेलों की नई उम्मीद बनकर उभरे हैं।
अहमदाबाद 2030: नई चुनौती, नई उम्मीद
ग्लासगो खेलों का पर्दा गिरने के साथ ही अब भारतीय खेल जगत का पूरा ध्यान भविष्य की ओर मुड़ गया है। वर्ष 2030 में होने वाले अगले कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी भारत के कंधों पर है। इन खेलों का आयोजन अहमदाबाद में होना तय है, जो देश के लिए एक बड़ा अवसर और एक बड़ी चुनौती दोनों है।
अपनी धरती पर खेलों का आयोजन करना भारत के लिए केवल एक मेजबानी का मौका नहीं है, बल्कि अपनी खेल संस्कृति को फिर से स्थापित करने का एक बड़ा मंच भी है। ग्लासगो की हार को पीछे छोड़ते हुए, अब अहमदाबाद 2030 के लिए तैयारी अभी से शुरू हो गई है। देश को अपने खेल ढांचे को मजबूत करना होगा ताकि अगले चार वर्षों में एक नई और मजबूत भारतीय टीम तैयार की जा सके, जो अपने घर पर विश्व को अपना जलवा दिखा सके।

Delight News

निष्पक्ष पत्रकारिता, सटीक विश्लेषण

Delight News एक प्रमुख डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म है जिसका मुख्य उद्देश्य समाज में सकारात्मक बदलाव लाना और जनता तक बिल्कुल सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय हिंदी खबरें पहुंचाना है। हम बिना किसी पक्षपात के राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, राजनीति, खेल, शिक्षा, सरकारी नौकरी और करंट अफेयर्स से जुड़ी हर छोटी-बड़ी ताजा खबरें आप तक सबसे पहले पहुंचाते हैं। पत्रकारिता के उच्चतम मानकों को बनाए रखना and अफवाहों से दूर सिर्फ सत्यापित तथ्य परोसना ही हमारा मुख्य संकल्प है।
📬 हमसे संपर्क करें
delightnews.in@gmail.com Official YouTube Channel Official Instagram Profile

Delight News परिवार से जुड़ें

📱 और भी बेहतर अनुभव के लिए!

ताजा खबरों के सबसे तेज नोटिफिकेशन, निर्बाध वीडियो स्ट्रीमिंग और शानदार यूज़र इंटरफेस के साथ देश-दुनिया के लाइव अपडेट्स सीधे अपने mobile पर पाने के लिए हमारा Delight News Android App डाउनलोड करें।

🚀 COMING SOON...

हमारा आधिकारिक एंड्रॉइड एप्लिकेशन Google Play Store पर बहुत जल्द लाइव होने जा रहा है। अपडेट मिलते ही डाउनलोड लिंक यहाँ उपलब्ध करा दी जाएगी।

📍 अपनी लोकेशन Set करें



Privacy Policy & Terms