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जंतर-मंतर पर भारी बवाल: अभिजीत दीपके पर क्यों फेंकी गई स्याही?

जंतर-मंतर पर भारी बवाल: अभिजीत दीपके पर क्यों फेंकी गई स्याही?

Delight News
📅 20 Jul2026

दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक ड्रामा देखने को मिला, जहां CJP संस्थापक अभिजीत दीपके पर बरखा त्रेहान नाम की महिला ने स्याही फेंक दी। हिरासत में लिए जाने के बाद बरखा ने दावा किया कि मंच से भगवान राम का अपमान किया जा रहा था और दीपके उस पर हंस रहे थे, जिसने उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई।

जंतर-मंतर पर भारी बवाल: अभिजीत दीपके पर क्यों फेंकी गई स्याही?
खबर का निचोड़:
दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक ड्रामा देखने को मिला, जहां CJP संस्थापक अभिजीत दीपके पर बरखा त्रेहान नाम की महिला ने स्याही फेंक दी। हिरासत में लिए जाने के बाद बरखा ने दावा किया कि मंच से भगवान राम का अपमान किया जा रहा था और दीपके उस पर हंस रहे थे, जिसने उनकी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई।
जंतर-मंतर पर हाई-वोल्टेज ड्रामा
देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर बड़े सियासी और सामाजिक ड्रामे का गवाह बना है। इस बार विवाद का केंद्र बने हैं 'सिटिजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस' (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके। एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान अचानक उन पर स्याही फेंक दी गई। इस घटना के बाद वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने तुरंत मुस्तैदी दिखाते हुए स्याही फेंकने वाली महिला को मौके पर ही हिरासत में ले लिया। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
'मैं कट्टर हिंदू हूं, भगवान का अपमान बर्दाश्त नहीं'
अभिजीत दीपके पर स्याही फेंकने वाली महिला की पहचान बरखा त्रेहान के रूप में हुई है। पुलिस हिरासत में लिए जाने के बाद बरखा के तेवर बेहद आक्रामक नजर आए। उन्होंने अपने इस कदम को सही ठहराते हुए खुलकर अपनी बात रखी। बरखा ने दावा किया कि CJP के मंच से खुलेआम भगवान राम का अपमान किया जा रहा था। सबसे ज्यादा आपत्तिजनक बात यह थी कि इस अपमानजनक टिप्पणी पर अभिजीत दीपके गंभीर होने के बजाय मंच पर खड़े होकर हंस रहे थे।
बरखा त्रेहान ने साफ शब्दों में कहा, "मैं एक कट्टर हिंदू हूं। मंच से जिस तरह हमारे आराध्य का उपहास उड़ाया जा रहा था, उससे मेरी धार्मिक भावनाएं बेहद आहत हुईं। यह स्याही फेंकना कोई अपराध नहीं, बल्कि उस अपमान के खिलाफ मेरा व्यक्तिगत और वैचारिक विरोध था। मुझे अपने इस कदम पर कोई पछतावा नहीं है, बल्कि मुझे इस पर गर्व है।"
वैचारिक टकराव या कानून का उल्लंघन?
इस घटना ने एक बार फिर अभिव्यक्ति की आजादी और धार्मिक भावनाओं के सम्मान के बीच चल रही बहस को हवा दे दी है। एक तरफ जहां बरखा त्रेहान इसे धर्म की रक्षा और अपने आराध्य के सम्मान के लिए उठाया गया कदम बता रही हैं, वहीं दूसरी तरफ सार्वजनिक मंच पर इस तरह के हिंसक या अमर्यादित विरोध को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। कानून हाथ में लेने और किसी व्यक्ति पर इस तरह हमला करने को लेकर पुलिस अब आगे की कानूनी कार्रवाई में जुट गई है। जंतर-मंतर पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने स्थिति को बिगड़ने से पहले ही संभाल लिया।
पुलिसिया कार्रवाई और आगे की जांच
घटना के तुरंत बाद मौके पर तैनात दिल्ली पुलिस के जवानों ने बरखा त्रेहान को काबू में किया और उन्हें हिरासत में लेकर थाने ले आई। पुलिस इस मामले में कार्यक्रम के आयोजकों और प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ कर रही है। कार्यक्रम की वीडियो फुटेज को भी खंगाला जा रहा है ताकि बरखा त्रेहान के दावों और घटना की कड़ियों की निष्पक्ष जांच की जा सके। इस हाई-प्रोफाइल मामले के बाद जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा कर दिया गया है। वैचारिक मतभेदों के चलते सार्वजनिक मंचों पर बढ़ती इस तरह की घटनाएं आने वाले दिनों में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए एक नई चुनौती बन सकती हैं।
सोनम वांगचुक को हाई कोर्ट से झटका, मेदांता शिफ्ट करने की याचिका खारिज

सोनम वांगचुक को हाई कोर्ट से झटका, मेदांता शिफ्ट करने की याचिका खारिज

Delight News
📅 19 Jul2026

दिल्ली हाई कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से मेदांता जैसे किसी निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वांगचुक की बिगड़ती सेहत को ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा उन्हें सरकारी अस्पताल में भर्ती कराने का निर्णय पूरी तरह तार्किक और सही था।

सोनम वांगचुक को हाई कोर्ट से झटका, मेदांता शिफ्ट करने की याचिका खारिज
दिल्ली हाई कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से मेदांता जैसे किसी निजी अस्पताल में शिफ्ट करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वांगचुक की बिगड़ती सेहत को ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा उन्हें सरकारी अस्पताल में भर्ती कराने का निर्णय पूरी तरह तार्किक और सही था।
हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: याचिका में नहीं दिखा दम
लद्दाख की पर्यावरण और प्रशासनिक मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट से एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है। अदालत ने वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल से हटाकर गुरुग्राम के मेदांता या किसी अन्य निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। यह याचिका वांगचुक की पत्नी द्वारा दायर की गई थी, जिसमें सरकारी अस्पताल की व्यवस्थाओं पर चिंता जताते हुए बेहतर निजी इलाज की मांग की गई थी।
सरकार का कदम मनमाना नहीं: अदालत की दो टूक
मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने सरकार के रुख को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि सोनम वांगचुक की तात्कालिक स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए प्रशासन द्वारा लिया गया फैसला कहीं से भी मनमाना या भेदभावपूर्ण नहीं प्रतीत होता। एक नागरिक और प्रमुख आंदोलनकारी के स्वास्थ्य की रक्षा करना राज्य की जिम्मेदारी है, और सफदरजंग जैसे शीर्ष स्तरीय सरकारी अस्पताल में उन्हें रखना चिकित्सा के दृष्टिकोण से एक सही और विवेकपूर्ण कदम था।
सफदरजंग अस्पताल में मुस्तैद हैं डॉक्टर
अदालत ने इस बात पर भी संतोष जताया कि सफदरजंग अस्पताल में वांगचुक की सेहत पर लगातार नजर रखी जा रही है। वहां के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उनकी स्थिति की निगरानी कर रही है। अदालत का मानना है कि वर्तमान चिकित्सा व्यवस्थाएं वांगचुक की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए पूरी तरह सक्षम हैं, इसलिए इस मोड़ पर उन्हें किसी निजी संस्थान में रेफर करने की कोई वैधानिक या चिकित्सकीय आवश्यकता नहीं दिखाई देती।
क्या है पूरा मामला?
लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और केंद्र शासित प्रदेश को राज्य का दर्जा देने जैसी मांगों को लेकर सोनम वांगचुक पिछले कुछ समय से दिल्ली में सक्रिय हैं। इस आंदोलन के दौरान उनके स्वास्थ्य में गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद प्रशासन ने एहतियातन कदम उठाते हुए उन्हें सफदरजंग अस्पताल में दाखिल कराया था। इसके बाद से ही उनके समर्थक और परिवार वाले उनकी सुरक्षा और इलाज की गुणवत्ता को लेकर कानूनी रास्ते तलाश रहे थे, जिस पर अब हाई कोर्ट ने अपनी स्थिति साफ कर दी है।
सोनम वांगचुक पर बरसीं लाठियां, केजरीवाल बोले— ऐसा तो अंग्रेज भी नहीं करते थे

सोनम वांगचुक पर बरसीं लाठियां, केजरीवाल बोले— ऐसा तो अंग्रेज भी नहीं करते थे

Delight News
📅 18 Jul2026

दिल्ली के जंतर-मंतर पर लद्दाख की मांगों को लेकर पिछले 20 दिनों से अनशन पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने जबरन वहां से हटा दिया है। इस कार्रवाई पर दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सरकार की तुलना ब्रिटिश हुकूमत से करते हुए इस कदम को बेहद शर्मनाक बताया है।

सोनम वांगचुक पर बरसीं लाठियां, केजरीवाल बोले— ऐसा तो अंग्रेज भी नहीं करते थे
खबर का निचोड़:
दिल्ली के जंतर-मंतर पर लद्दाख की मांगों को लेकर पिछले 20 दिनों से अनशन पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने जबरन वहां से हटा दिया है। इस कार्रवाई पर दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सरकार की तुलना ब्रिटिश हुकूमत से करते हुए इस कदम को बेहद शर्मनाक बताया है।
आधी रात को एक्शन और जंतर-मंतर पर सन्नाटा
देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर देश के सबसे बड़े लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन का गवाह बना, लेकिन इस बार का अंत बेहद नाटकीय और आक्रोश से भरा रहा। पिछले 20 दिनों से कड़ाके की ठंड और खुले आसमान के नीचे लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर अनशन पर बैठे मशहूर इनोवेटर और एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को दिल्ली पुलिस ने जबरन धरना स्थल से हटा दिया।
सोनम वांगचुक और उनके साथियों का आरोप है कि उन्हें बिना किसी ठोस वजह के और बिना उनकी सहमति के वहां से खदेड़ा गया। इस घटना के बाद से ही जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है, लेकिन इस कार्रवाई ने देश के राजनीतिक गलियारों में एक नया तूफान खड़ा कर दिया है।
अरविंद केजरीवाल का तीखा हमला: 'अंग्रेज भी बेहतर थे'
सोनम वांगचुक के खिलाफ हुई इस पुलिसिया कार्रवाई पर दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को आड़े हाथों लिया। केजरीवाल ने इस घटना को लोकतंत्र की हत्या करार देते हुए सीधे तौर पर इसकी तुलना औपनिवेशिक काल से कर दी।
अरविंद केजरीवाल ने इतिहास का हवाला देते हुए कहा, "राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी ने अपने जीवन में देश की आजादी और हक के लिए कितने ही अनशन किए। इतिहास गवाह है कि तब की दमनकारी ब्रिटिश सरकार ने भी उनके साथ ऐसा बर्ताव नहीं किया था जैसा आज किया जा रहा है। ऐसा तो अंग्रेज भी नहीं करते थे।" केजरीवाल के इस बयान ने सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा की मीडिया तक में बहस छेड़ दी है।
'ये हमारे अपने बच्चे हैं, इनके साथ ऐसी बदसलूकी क्यों?'
केजरीवाल ने सोनम वांगचुक और लद्दाख से आए उनके समर्थकों का पक्ष लेते हुए कहा कि ये लोग कोई अपराधी या बाहरी तत्व नहीं हैं। उन्होंने बेहद भावुक और तल्ख लहजे में सवाल उठाया, "ये हमारे अपने देश के बच्चे हैं। लद्दाख के लोग देश की सीमाओं की रक्षा में हमेशा खड़े रहते हैं। अपनी जायज मांगों को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से बैठना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है। फिर उनके साथ इतनी बदसलूकी क्यों की जा रही है?"
केजरीवाल ने साफ किया कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना हर भारतीय का संवैधानिक अधिकार है और सरकार को लाठियों तथा पुलिस के दम पर जनता की आवाज को दबाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
लद्दाख की लड़ाई और अनसुलझे सवाल
सोनम वांगचुक की अगुवाई में लद्दाख के सैकड़ों लोग महीनों से आंदोलनरत हैं। उनकी मुख्य मांगों में लद्दाख को राज्य का दर्जा देना और पर्यावरण को बचाने के लिए इसे संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करना है। जंतर-मंतर पर चल रहा 20 दिनों का अनशन इसी कड़ी का हिस्सा था।
पुलिस द्वारा उन्हें हटाए जाने के बाद अब आंदोलन की दिशा क्या होगी, यह तो आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन इस घटना ने लद्दाख की मांगों और देश में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकारों पर एक बड़ी बहस को दोबारा जिंदा कर दिया है।
वांगचुक को अस्पताल भेजने पर भड़के दीपके, अब सीधे पीएम मोदी से मांगा इस्तीफा

वांगचुक को अस्पताल भेजने पर भड़के दीपके, अब सीधे पीएम मोदी से मांगा इस्तीफा

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📅 18 Jul2026

सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से जबरन उठाकर अस्पताल ले जाए जाने के बाद आंदोलन ने एक नया और आक्रामक मोड़ ले लिया है। 'सिटीजंस फॉर जस्टिस एंड पीस' (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने सरकार के इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बजाय सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग करेंगे।

वांगचुक को अस्पताल भेजने पर भड़के दीपके, अब सीधे पीएम मोदी से मांगा इस्तीफा
सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से जबरन उठाकर अस्पताल ले जाए जाने के बाद आंदोलन ने एक नया और आक्रामक मोड़ ले लिया है। 'सिटीजंस फॉर जस्टिस एंड पीस' (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने सरकार के इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बजाय सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग करेंगे।
आधी रात का एक्शन और गहराता आक्रोश
दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अचानक वहां से उठाकर अस्पताल पहुंचा दिया गया। प्रशासन के इस कदम ने प्रदर्शनकारियों और उनके समर्थकों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। सरकार को लग रहा था कि इस कार्रवाई से आंदोलन की धार कमजोर पड़ जाएगी, लेकिन जमीन पर इसका बिल्कुल उलट असर देखने को मिल रहा है। इस घटना के बाद आंदोलनकारियों के तेवर और ज्यादा तल्ख हो गए हैं।
धर्मेंद्र प्रधान से बढ़ा मामला, निशाने पर आए पीएम मोदी
इस पूरे घटनाक्रम पर 'सिटीजंस फॉर जस्टिस एंड पीस' (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। सरकार की इस कार्रवाई को उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करार दिया। दीपके ने दो टूक शब्दों में कहा कि अगर सरकार को लगता है कि वांगचुक को प्रदर्शन स्थल से हटाने से यह आंदोलन खत्म हो जाएगा, तो वह बहुत बड़ी गलतफहमी में जी रही है।
उन्होंने आंदोलन की रणनीति में एक बड़े बदलाव का ऐलान करते हुए कहा कि अब तक यह लड़ाई और इस्तीफे की मांग सिर्फ केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तक सीमित थी। लेकिन प्रशासन की इस 'घिनौनी और नीच' हरकत ने सारी हदें पार कर दी हैं। दीपके ने साफ कर दिया कि अब सीधे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इस्तीफा मांगा जाएगा और यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है।
क्यों सुलग रही है आंदोलन की यह चिंगारी?
सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और पर्यावरण की रक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों को लेकर दिल्ली में डटे हुए हैं। उनके इस मार्च और अनशन को देशभर से युवाओं और सामाजिक संगठनों का भारी समर्थन मिल रहा है। आंदोलनकारियों का मानना है कि वांगचुक को अस्पताल में भर्ती कराना उनकी सेहत की फिक्र नहीं, बल्कि उनकी आवाज को दबाने की एक सोची-समझी कोशिश है।
प्रशासन के इस एक्शन के बाद से ही जंतर-मंतर से लेकर सोशल मीडिया तक, सरकार के खिलाफ माहौल गरमा गया है। अभिजीत दीपके के इस ताजा बयान ने आग में घी डालने का काम किया है, जिससे आने वाले दिनों में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव और बढ़ने के आसार नजर आ रहे हैं।
तमन्ना भाटिया पर बयान: विवाद बढ़ा तो अन्नू कपूर ने मांगी माफी

तमन्ना भाटिया पर बयान: विवाद बढ़ा तो अन्नू कपूर ने मांगी माफी

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📅 18 Jul2026

अभिनेता अन्नू कपूर ने अभिनेत्री तमन्ना भाटिया के रंग-रूप को लेकर दिए गए अपने एक हालिया बयान पर सोशल मीडिया पर मचे बवाल के बाद अपनी चुप्पी तोड़ी है। चौतरफा आलोचना झेलने के बाद वरिष्ठ अभिनेता ने इस पूरे मामले पर खेद जताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी का अपमान नहीं करना चाहते थे और अगर उनकी बात से ठेस पहुंची है तो वे माफी मांगते हैं।

तमन्ना भाटिया पर बयान: विवाद बढ़ा तो अन्नू कपूर ने मांगी माफी
अभिनेता अन्नू कपूर ने अभिनेत्री तमन्ना भाटिया के रंग-रूप को लेकर दिए गए अपने एक हालिया बयान पर सोशल मीडिया पर मचे बवाल के बाद अपनी चुप्पी तोड़ी है। चौतरफा आलोचना झेलने के बाद वरिष्ठ अभिनेता ने इस पूरे मामले पर खेद जताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी का अपमान नहीं करना चाहते थे और अगर उनकी बात से ठेस पहुंची है तो वे माफी मांगते हैं।
विवाद की शुरुआत: आखिर अन्नू कपूर ने क्या कहा था?
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब एक सार्वजनिक मंच पर वरिष्ठ अभिनेता अन्नू कपूर ने अभिनेत्री तमन्ना भाटिया के लुक और अभिनय पर चर्चा करते हुए 'माशाअल्लाह! क्या दूधिया बदन है' जैसी टिप्पणी कर दी। मनोरंजन जगत और सोशल मीडिया पर इस बयान को बेहद असंवेदनशील और महिलाओं को वस्तु की तरह पेश करने वाला (ऑब्जेक्टिफिकेशन) माना गया। देखते ही देखते इस टिप्पणी के खिलाफ लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्हें जमकर ट्रोल किया जाने लगा। यूजर्स का कहना था कि एक वरिष्ठ कलाकार से इस तरह की भाषा की उम्मीद नहीं की जाती।
आलोचना पर अन्नू कपूर का पलटवार और सफाई
बढ़ते विवाद और तीखी आलोचनाओं के बीच अन्नू कपूर ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने खुद का बचाव करते हुए कहा कि उनके मन में किसी के लिए भी कोई दुर्भावना नहीं थी। उन्होंने अपने बयान में कहा, "मैं किसी भी महिला या पुरुष का अपमान करने वाला आखिरी व्यक्ति हो सकता हूं।" उनके इस बयान से साफ है कि वे अपनी छवि को लेकर बेहद सतर्क हैं और खुद पर लग रहे महिला विरोधी होने के आरोपों को सिरे से खारिज करना चाहते हैं।
"जो हो गया सो हो गया" - खेद जताकर खत्म करना चाहा विवाद
बात जब ज्यादा बढ़ गई, तो अन्नू कपूर ने इस विवाद पर पूर्णविराम लगाने की कोशिश की। उन्होंने बेहद नपे-तुले शब्दों में खेद जताते हुए कहा, "अगर उन्हें मेरी बात से ठेस पहुंची है तो मुझे खेद है। जो हो गया सो हो गया।" फिल्म इंडस्ट्री में अक्सर देखा गया है कि सितारे अपने बयानों पर घिरने के बाद इसी तरह की संक्षिप्त प्रतिक्रिया देकर विवाद को शांत करने का प्रयास करते हैं। अन्नू कपूर का यह रुख भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है ताकि बात और ज्यादा न बढ़े।
सोशल मीडिया पर बहस जारी
अन्नू कपूर की इस सफाई और माफीनामे के बाद भी सोशल मीडिया पर बहस थमी नहीं है। जहां कुछ लोग इसे उनका बड़प्पन मान रहे हैं कि उन्होंने अपनी गलती स्वीकार कर ली, वहीं एक बड़ा तबका ऐसा भी है जिसका मानना है कि 'जो हो गया सो हो गया' कहकर इस तरह की टिप्पणियों को हल्के में नहीं छोड़ा जा सकता। फिलहाल इस पूरे मामले पर तमन्ना भाटिया की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन मनोरंजन जगत में इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।

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