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केतन हत्याकांड: आरोपी सिया गोयल के पिता बोले– 'मुझे सज़ा दी जा रही है'

केतन हत्याकांड: आरोपी सिया गोयल के पिता बोले– 'मुझे सज़ा दी जा रही है'

Delight News
📅 17 Jul2026

पुणे के चर्चित केतन हत्याकांड की आरोपी सिया गोयल के पिता प्रवीण गोयल ने अपनी मसाला और सूखे मेवों की दुकान बंद करने के महाराष्ट्र सरकार के नोटिस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे एकतरफा सज़ा बताते हुए स्पष्ट किया कि दुकान सील नहीं हुई है, बल्कि लाइसेंस आने तक केवल बंद रखने का निर्देश मिला है।

केतन हत्याकांड: आरोपी सिया गोयल के पिता बोले– 'मुझे सज़ा दी जा रही है'
खबर का निचोड़
पुणे के चर्चित केतन हत्याकांड की आरोपी सिया गोयल के पिता प्रवीण गोयल ने अपनी मसाला और सूखे मेवों की दुकान बंद करने के महाराष्ट्र सरकार के नोटिस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे एकतरफा सज़ा बताते हुए स्पष्ट किया कि दुकान सील नहीं हुई है, बल्कि लाइसेंस आने तक केवल बंद रखने का निर्देश मिला है।
प्रशासनिक कार्रवाई और पिता का दर्द
पुणे का केतन हत्याकांड इन दिनों सुर्खियों में है, लेकिन इस मामले ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। इस केस की मुख्य आरोपी सिया गोयल के परिवार पर अब प्रशासनिक गाज गिरी है। महाराष्ट्र सरकार ने परिवार की मसाला और सूखे मेवों की दुकान को बंद करने का नोटिस जारी किया है। इस कार्रवाई पर सिया के पिता प्रवीण गोयल ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। उनका कहना है कि बेटी के किए की सज़ा पूरे परिवार और उनके व्यापार को दी जा रही है, जो कि न्यायसंगत नहीं है।
सील नहीं हुई दुकान, लाइसेंस का है इंतज़ार
इस कार्रवाई को लेकर बाजार और सोशल मीडिया पर कई तरह की अफवाहें उड़ रही थीं, जिस पर प्रवीण गोयल ने स्थिति साफ की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रशासन ने उनकी दुकान को सील नहीं किया है। यह केवल एक अस्थायी रोक है। प्रवीण गोयल के मुताबिक, दुकान के जरूरी लाइसेंस के लिए उन्होंने पहले ही आवेदन कर दिया है और अगले 8 से 10 दिनों के भीतर यह लाइसेंस उन्हें मिल जाएगा। प्रशासन ने उन्हें सख्त हिदायत दी है कि जब तक वैध लाइसेंस हाथ में नहीं आ जाता, तब तक दुकान में किसी भी तरह का कामकाज नहीं किया जाएगा।
'बेटी के आरोप की सज़ा मुझे क्यों?'
प्रवीण गोयल ने सरकार के इस फैसले पर गहरी निराशा व्यक्त की है। उनका मानना है कि इस नोटिस का सीधा संबंध केतन हत्याकांड से जोड़कर देखा जा रहा है, जिससे उनके व्यवसाय और सामाजिक छवि को भारी नुकसान पहुँच रहा है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, "मुझे सज़ा दी जा रही है।" उनका इशारा साफ था कि कानूनी प्रक्रिया आरोपी के खिलाफ होनी चाहिए, न कि उस परिवार के खिलाफ जो अपनी आजीविका के लिए संघर्ष कर रहा है।
पुणे में बढ़ता जा रहा है तनाव
केतन हत्याकांड के बाद से ही पुणे में माहौल काफी गरमाया हुआ है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस की तफ्तीश जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, आरोपी के करीबियों पर भी शिकंजा कसता जा रहा है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) और स्थानीय प्रशासन की इस मुस्तैदी को लोग सीधे तौर पर मुख्य मामले से जोड़कर देख रहे हैं। फिलहाल, गोयल परिवार को अगले एक हफ्ते तक अपनी दुकान के शटर गिराकर रखने होंगे, जब तक कि कागजी कार्रवाई पूरी नहीं हो जाती। इस दौरान पुलिस और प्रशासन पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।
सोनम वांगचुक की सेहत पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, निगरानी के आदेश

सोनम वांगचुक की सेहत पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, निगरानी के आदेश

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📅 17 Jul2026

दिल्ली हाई कोर्ट ने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के मद्देनजर उनकी सेहत को लेकर गंभीर रुख अपनाया है। कोर्ट ने प्रशासन को वांगचुक की रोजाना मेडिकल जांच करने और सरकारी डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें तत्काल चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराने के कड़े निर्देश दिए हैं, ताकि उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

सोनम वांगचुक की सेहत पर दिल्ली हाई कोर्ट सख्त, निगरानी के आदेश
खबर का सार
दिल्ली हाई कोर्ट ने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के मद्देनजर उनकी सेहत को लेकर गंभीर रुख अपनाया है। कोर्ट ने प्रशासन को वांगचुक की रोजाना मेडिकल जांच करने और सरकारी डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें तत्काल चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराने के कड़े निर्देश दिए हैं, ताकि उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
सोनम वांगचुक की सुरक्षा पर कोर्ट की पैनी नजर
पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक अपनी मांगों को लेकर लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। इस दौरान उनकी भूख हड़ताल और स्वास्थ्य को लेकर उपजी चिंताओं को देखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने हस्तक्षेप किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि प्रदर्शन के दौरान किसी भी व्यक्ति का स्वास्थ्य सर्वोपरि है और प्रशासन को उनकी सेहत की निरंतर निगरानी करनी होगी।
रोजाना क्लिनिकल मॉनिटरिंग के निर्देश
कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा है कि सोनम वांगचुक की मेडिकल स्थिति की हर दिन क्लिनिकल निगरानी की जाए। यह जिम्मेदारी सरकारी डॉक्टरों की टीम को सौंपी गई है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि किसी भी प्रकार की आपातकालीन स्थिति उत्पन्न होने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। कोर्ट ने यह सुनिश्चित करने को कहा है कि वांगचुक को किसी भी समय मेडिकल हेल्प की जरूरत पड़ती है, तो उसमें रत्ती भर भी देरी नहीं होनी चाहिए।
प्रशासन की जिम्मेदारी और मेडिकल प्रोटोकॉल
हाई कोर्ट का यह निर्देश प्रशासन के लिए एक कड़ा संदेश है। कोर्ट ने सरकारी डॉक्टरों से यह अपेक्षा की है कि वे अपनी निष्पक्ष राय दें और वांगचुक की स्वास्थ्य स्थितियों का सही आकलन करें। यदि डॉक्टरों की टीम को लगता है कि प्रदर्शनकारी की स्थिति बिगड़ रही है या उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाने की आवश्यकता है, तो प्रशासन को बिना किसी हील-हवाला के तुरंत मेडिकल सहायता मुहैया करानी होगी।
आंदोलन और स्वास्थ्य का संतुलन
सोनम वांगचुक का आंदोलन लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। हाई कोर्ट का यह कदम लोकतांत्रिक अधिकारों और व्यक्ति के जीवन के अधिकार के बीच संतुलन बनाने की एक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। एक तरफ वांगचुक अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ कोर्ट ने यह सुनिश्चित किया है कि इस प्रक्रिया में किसी का जीवन जोखिम में न पड़े। अब पूरी जिम्मेदारी संबंधित मेडिकल टीम और स्थानीय प्रशासन पर है कि वे कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए वांगचुक की हर स्वास्थ्य गतिविधि पर नजर रखें और समय रहते प्रभावी कदम उठाएं।
जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक का सत्याग्रह: स्वास्थ्य बिगड़ा, समर्थन बढ़ा

जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक का सत्याग्रह: स्वास्थ्य बिगड़ा, समर्थन बढ़ा

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📅 17 Jul2026

लद्दाख के अधिकारों के लिए सोनम वांगचुक का दिल्ली में आमरण अनशन 19वें दिन में पहुंच गया है। गिरते स्वास्थ्य पर दिल्ली हाई कोर्ट ने चिंता जताते हुए मेडिकल निगरानी के निर्देश दिए हैं। विपक्षी दलों का समर्थन और 20 जुलाई के प्रस्तावित संसद मार्च ने इस आंदोलन को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक का सत्याग्रह: स्वास्थ्य बिगड़ा, समर्थन बढ़ा
खबर का सार
लद्दाख के अधिकारों के लिए सोनम वांगचुक का दिल्ली में आमरण अनशन 19वें दिन में पहुंच गया है। गिरते स्वास्थ्य पर दिल्ली हाई कोर्ट ने चिंता जताते हुए मेडिकल निगरानी के निर्देश दिए हैं। विपक्षी दलों का समर्थन और 20 जुलाई के प्रस्तावित संसद मार्च ने इस आंदोलन को राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
लद्दाख की पुकार और वांगचुक का दृढ़ संकल्प
देश की राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर इन दिनों एक ऐतिहासिक संघर्ष का गवाह बना हुआ है। प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक लद्दाख की मांगों को लेकर अनवरत अनशन पर डटे हैं। उनके अनशन का आज 19वां दिन है। यह केवल एक व्यक्ति का उपवास नहीं, बल्कि लद्दाख की भौगोलिक और सांस्कृतिक पहचान को बचाने के लिए छेड़ी गई एक वैचारिक जंग है। पिछले 19 दिनों से चल रहे इस संघर्ष ने सरकार और प्रशासन की नींद उड़ा दी है।
स्वास्थ्य पर चिंता और अदालती दखल
लंबे समय से जारी इस उपवास का सीधा असर वांगचुक के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। शरीर की घटती ऊर्जा और स्वास्थ्य की बिगड़ती स्थिति को देखते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि उनकी नियमित क्लिनिकल निगरानी सुनिश्चित की जाए ताकि स्थिति को और बिगड़ने से रोका जा सके। हालांकि, स्वास्थ्य संबंधी इन खतरों के बावजूद, वांगचुक अपने रुख पर अडिग हैं और अपने संकल्प को पूरा करने की जिद पाले हुए हैं।
बड़े चेहरों का समर्थन और बढ़ता दबाव
इस आंदोलन को हर दिन नया बल मिल रहा है। अभिनेता आमिर खान और कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने सार्वजनिक रूप से वांगचुक से अनशन समाप्त करने का आग्रह किया है। वहीं, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस समेत कई प्रमुख विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर लामबंदी शुरू कर दी है। विपक्षी दलों का समर्थन इस बात का संकेत है कि लद्दाख का यह मामला संसद के गलियारों में जोरदार तरीके से गूंजने वाला है। इसी कड़ी में 20 जुलाई को एक बड़ा 'संसद मार्च' आयोजित किया जा रहा है, जिससे आंदोलन का पारा और चढ़ना तय है।
राष्ट्रीय से अंतरराष्ट्रीय स्तर तक गूंज
सोनम वांगचुक की यह लड़ाई अब सीमाओं को लांघ गई है। बिहार के सुपौल में राष्ट्रीय युवा महासंघ द्वारा किए गए सांकेतिक अनशन ने इस आंदोलन की आंच को देश के अन्य कोनों तक पहुंचा दिया है। इतना ही नहीं, वैश्विक मीडिया भी अब इस घटनाक्रम पर बारीक नजर रखे हुए है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस सत्याग्रह की चर्चा इस बात को प्रमाणित करती है कि लद्दाख की मांगें केवल स्थानीय नहीं, बल्कि मानवाधिकार और संवैधानिक अधिकारों का एक बड़ा प्रश्न बन चुकी हैं।
क्या लॉर्ड्स में होगा रोहित शर्मा के वनडे करियर का अंत?

क्या लॉर्ड्स में होगा रोहित शर्मा के वनडे करियर का अंत?

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📅 17 Jul2026

भारतीय क्रिकेट के 'हिटमैन' रोहित शर्मा के वनडे करियर को लेकर चर्चाएं अपने चरम पर हैं। खबरों के मुताबिक, 19 जुलाई को इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में होने वाला मुकाबला उनके करियर का आखिरी वनडे हो सकता है। चयनकर्ताओं की भविष्य की योजनाओं से उपजी तल्खी और परिवार की उपस्थिति ने इन अटकलों को और अधिक हवा दे दी है।

क्या रोहित शर्मा का आखिरी वनडे मैच है लॉर्ड्स की चुनौती?
भारतीय क्रिकेट के 'हिटमैन' रोहित शर्मा के वनडे करियर को लेकर चर्चाएं अपने चरम पर हैं। खबरों के मुताबिक, 19 जुलाई को इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स में होने वाला मुकाबला उनके करियर का आखिरी वनडे हो सकता है। चयनकर्ताओं की भविष्य की योजनाओं से उपजी तल्खी और परिवार की उपस्थिति ने इन अटकलों को और अधिक हवा दे दी है।
अनिश्चितता के भंवर में 'हिटमैन'
रोहित शर्मा का वनडे क्रिकेट में योगदान अतुलनीय रहा है। उन्होंने हाल ही में दिग्गज इंजमाम-उल-हक को पीछे छोड़ते हुए अपने वनडे करियर में 11757 रन पूरे किए हैं। इसके बावजूद, बीसीसीआई और चयनकर्ताओं की भविष्य की नीतियों ने उन्हें मुश्किल स्थिति में खड़ा कर दिया है। चर्चा है कि चयनकर्ता 2027 के विश्व कप को ध्यान में रखते हुए टीम में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहे हैं, जिससे रोहित शर्मा काफी नाखुश हैं।
लंदन में परिवार का जमावड़ा
इस खबर की पुष्टि तब और भी बलवती हो गई जब रोहित शर्मा के माता-पिता के लंदन पहुंचने की जानकारी सामने आई। किसी भी खिलाड़ी के लिए उनके परिवार का इतने महत्वपूर्ण मैच के समय वहां पहुंचना महज इत्तेफाक नहीं माना जा रहा है। क्रिकेट गलियारों में इसे इस बात के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है कि यह उनके शानदार वनडे करियर का आखिरी पड़ाव हो सकता है।
अश्विन की कोहली को चेतावनी
इस पूरे घटनाक्रम के बीच रविचंद्रन अश्विन की विराट कोहली को दी गई सलाह ने भी काफी सुर्खियां बटोरी हैं। अश्विन ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर प्रदर्शन में निरंतरता नहीं रहती है, तो कोहली को भी इसी तरह के कड़े फैसलों का सामना करना पड़ सकता है। यह बयान स्पष्ट करता है कि टीम इंडिया में अब वरिष्ठ खिलाड़ियों के लिए कोई भी रियायत नहीं है और हर फैसला सिर्फ और सिर्फ भविष्य की चुनौतियों को देखकर लिया जा रहा है।
बदलाव की बयार
भारतीय क्रिकेट इस समय एक बड़े संक्रमण काल से गुजर रहा है। 2027 के विश्व कप को देखते हुए बीसीसीआई की नई नीति के तहत युवा खिलाड़ियों को अधिक मौका देने की कवायद शुरू हो चुकी है। रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे दिग्गजों के लिए यह समय बेहद चुनौतीपूर्ण है, जहां एक ओर उनके आंकड़े महानता की गवाही देते हैं, वहीं दूसरी ओर चयनकर्ताओं की बदलती प्राथमिकताएं उनके करियर पर सवालिया निशान लगा रही हैं। 19 जुलाई का दिन केवल एक मैच नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट के एक युग के अंत की संभावना का गवाह बनने वाला है।
लद्दाख की आग, अमेरिका से गुहार: पीएम मोदी से क्यों की गई बड़ी अपील?

लद्दाख की आग, अमेरिका से गुहार: पीएम मोदी से क्यों की गई बड़ी अपील?

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📅 17 Jul2026

लद्दाख के पर्यावरण और संवैधानिक अधिकारों को लेकर सोनम वांगचुक का आमरण अनशन 19वें दिन भी जारी है। बिगड़ते स्वास्थ्य के बीच, अमेरिका के भारतीय प्रवासियों के संगठन 'हिंदूज़ फॉर ह्यूमन राइट्स' ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर तुरंत हस्तक्षेप करने और प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर समाधान निकालने की मांग की है।

लद्दाख की आग, अमेरिका से गुहार: पीएम मोदी से क्यों की गई बड़ी अपील?
खबर का निचोड़:
लद्दाख के पर्यावरण और संवैधानिक अधिकारों को लेकर सोनम वांगचुक का आमरण अनशन 19वें दिन भी जारी है। बिगड़ते स्वास्थ्य के बीच, अमेरिका के भारतीय प्रवासियों के संगठन 'हिंदूज़ फॉर ह्यूमन राइट्स' ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर तुरंत हस्तक्षेप करने और प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर समाधान निकालने की मांग की है।
सात समंदर पार पहुंची लद्दाख की आवाज
लद्दाख के ठंडे मरुस्थल से उठी अधिकारों की गूंज अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुनाई देने लगी है। प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक पिछले 19 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। शून्य से नीचे के तापमान में उनके बिगड़ते स्वास्थ्य ने न केवल देश, बल्कि विदेशों में रह रहे भारतीय समुदाय को भी झकझोर कर रख दिया है। इसी कड़ी में, अमेरिका स्थित प्रवासी भारतीयों के एक प्रमुख संगठन 'हिंदूज़ फॉर ह्यूमन राइट्स' ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक पत्र जारी किया है। संगठन ने भारत सरकार से अपील की है कि वह इस गतिरोध को खत्म करने के लिए तुरंत सोनम वांगचुक और लद्दाख के प्रतिनिधियों से संपर्क साधे।
क्यों बढ़ रही है वांगचुक के स्वास्थ्य पर चिंता?
सोनम वांगचुक की मांगें लद्दाख के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को बचाने और इसे भारतीय संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा प्रदान करने से जुड़ी हैं। 19 दिनों का लंबा अनशन किसी भी मानव शरीर के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। अमेरिका से लिखे गए इस पत्र में संगठन ने वांगचुक की गिरती सेहत पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि लद्दाख जैसे संवेदनशील क्षेत्र के एक सम्मानित नागरिक को अपनी बात मनवाने के लिए इस तरह का आत्मघाती कदम उठाना पड़ रहा है, जो किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए विचारणीय विषय है।
सरकार की चुप्पी पर उठे सवाल
प्रवासी भारतीयों के संगठन ने अपने पत्र में सरकार के रुख पर भी सवाल उठाए हैं। पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सरकार को उन प्रशासनिक या नीतिगत कमियों का जवाब देना चाहिए, जिनकी वजह से बात इस हद तक बिगड़ गई। संगठन का मानना है कि लद्दाख के लोगों की चिंताओं को नजरअंदाज करने के बजाय केंद्र सरकार को टेबल पर आकर बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए। वांगचुक की इस मुहिम को मिल रहा वैश्विक समर्थन यह दिखाता है कि लद्दाख का मुद्दा अब सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि एक बड़ा मानवीय और पर्यावरणीय मुद्दा बन चुका है।
क्या हैं लद्दाख की मुख्य मांगें?
लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद से ही वहां के स्थानीय लोग अपनी पहचान, जमीन और नौकरियों को लेकर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। सोनम वांगचुक और उनके समर्थक चाहते हैं कि लद्दाख को छठी अनुसूची में शामिल किया जाए, ताकि वहां के आदिवासियों और पर्यावरण को कानूनी संरक्षण मिल सके। इसके साथ ही, वे लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। अब देखना यह है कि सात समंदर पार से आई इस अपील और वांगचुक की गिरती सेहत के बीच केंद्र सरकार इस दिशा में क्या कदम उठाती है।

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