
राहुल द्रविड़ इंग्लैंड टेस्ट टीम के नए कोच बन सकते हैं।
इंग्लैंड की टेस्ट टीम में लगातार खराब प्रदर्शन के बाद बड़ा फैसला लेते हुए ब्रैंडन मैक्कलम को टेस्ट कोच के पद से हटा दिया गया है। अब इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ECB) राहुल द्रविड़, रविचंद्रन अश्विन और एंडी फ्लावर जैसे दिग्गजों में से एक को नया कोच बनाने की तैयारी में है।
खबर का निचोड़
इंग्लैंड की टेस्ट टीम में लगातार खराब प्रदर्शन के बाद बड़ा फैसला लेते हुए ब्रैंडन मैक्कलम को टेस्ट कोच के पद से हटा दिया गया है। अब इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ECB) राहुल द्रविड़, रविचंद्रन अश्विन और एंडी फ्लावर जैसे दिग्गजों में से एक को नया कोच बनाने की तैयारी में है।
मैक्कलम का टेस्ट कोचिंग से इस्तीफा
पिछले कुछ समय से इंग्लैंड की टेस्ट टीम का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है। इसी खराब दौर को देखते हुए इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड ने ब्रैंडन मैक्कलम को टेस्ट टीम की कोचिंग से हटाने का कड़ा फैसला लिया है। हालांकि, मैक्कलम का सफर इंग्लैंड क्रिकेट के साथ पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। वह सीमित ओवरों के क्रिकेट, यानी वनडे और टी20 टीमों के मुख्य कोच के रूप में अपनी सेवाएं देना जारी रखेंगे। यह स्पष्ट है कि बोर्ड ने टेस्ट फॉर्मेट में नई दिशा देने के लिए कोचिंग भूमिकाओं को विभाजित करने का मन बना लिया है।
राहुल द्रविड़ सबसे बड़े दावेदार
इस बड़े बदलाव के बाद अब क्रिकेट गलियारों में इंग्लैंड के अगले टेस्ट कोच को लेकर चर्चा तेज हो गई है। बोर्ड के सामने कई अनुभवी नाम हैं, लेकिन फिलहाल भारत के पूर्व मुख्य कोच राहुल द्रविड़ का नाम सबसे आगे चल रहा है। क्रिकेट जगत में उनकी रणनीतिक सूझबूझ और शांत स्वभाव के कारण उन्हें इंग्लैंड की टेस्ट टीम को फिर से पटरी पर लाने के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार माना जा रहा है। बोर्ड के अधिकारी द्रविड़ के साथ बातचीत में काफी रुचि ले रहे हैं और जल्द ही इस पर आधिकारिक मुहर लग सकती है।
दौड़ में अश्विन और फ्लावर भी शामिल
राहुल द्रविड़ के अलावा, इस रेस में दो और बड़े नाम चर्चा में हैं। अनुभवी भारतीय स्पिनर रविचंद्रन अश्विन का नाम सामने आना सभी को हैरान करने वाला है, लेकिन उनकी क्रिकेटिंग समझ और खेल की बारीकियों को पकड़ने की क्षमता उन्हें एक मजबूत विकल्प बनाती है। वहीं, एंडी फ्लावर का नाम भी लिस्ट में बना हुआ है। फ्लावर का इंग्लैंड क्रिकेट के साथ पुराना नाता रहा है और उनकी कोचिंग शैली के प्रति बोर्ड का भरोसा हमेशा से ही काफी अधिक रहा है।
इंग्लैंड का आगे का सफर
इंग्लैंड की टेस्ट टीम इस समय एक नाजुक मोड़ पर खड़ी है। लगातार हार का सामना करने के बाद टीम के पास अब सुधार की काफी गुंजाइश है। बोर्ड जानता है कि सही कोच का चुनाव ही टीम को पुरानी लय में वापस ला सकता है। अब सभी की निगाहें ईसीबी के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या वे राहुल द्रविड़ के अनुभव पर भरोसा जताते हैं या फिर किसी अन्य विकल्प को तरजीह दी जाती है। आने वाले कुछ दिनों में यह तस्वीर पूरी तरह साफ हो जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट में वकील की बदसलूकी, जज पर टिप्पणी और कार्यवाही पर बवाल
देश की सर्वोच्च अदालत में उस वक्त हड़कंप मच गया जब एक वकील ने सुनवाई के दौरान आपा खो दिया। वकील प्रबल प्रताप ने न केवल जजों के सामने फाइलें फेंकीं, बल्कि मुख्य न्यायाधीश के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग किया। फिलहाल, कोर्ट ने अवमानना की कार्रवाई से राहत दी है, लेकिन बार काउंसिल की कार्रवाई की तलवार लटकी है।
मुख्य अंश
देश की सर्वोच्च अदालत में उस वक्त हड़कंप मच गया जब एक वकील ने सुनवाई के दौरान आपा खो दिया। वकील प्रबल प्रताप ने न केवल जजों के सामने फाइलें फेंकीं, बल्कि मुख्य न्यायाधीश के लिए अभद्र भाषा का प्रयोग किया। फिलहाल, कोर्ट ने अवमानना की कार्रवाई से राहत दी है, लेकिन बार काउंसिल की कार्रवाई की तलवार लटकी है।
मर्यादा तार-तार: सर्वोच्च अदालत में वकील का हंगामा
कानून के मंदिर कहे जाने वाले सुप्रीम कोर्ट की गरिमा उस समय तार-तार हो गई, जब एक वकील ने अदालत के भीतर बेहद अमर्यादित आचरण किया। वकील प्रबल प्रताप ने सुनवाई के दौरान अपना आपा खोया और जजों के सामने केस की फाइलें उछाल दीं। यह सब यहीं नहीं रुका; उन्होंने मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ आपत्तिजनक और असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया, जिससे पूरे कोर्ट रूम में सन्नाटा पसर गया।
सुरक्षा का कड़ा पहरा और बाहर का रास्ता
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत मोर्चा संभाला। वकील प्रबल प्रताप को बलपूर्वक अदालत कक्ष से बाहर निकाला गया। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया और मामले के संबंध में लंबी पूछताछ की। अदालत की कार्यवाही में इस तरह का व्यवधान डालना न केवल कानून की अवहेलना है, बल्कि यह न्यायिक प्रक्रिया के प्रति गंभीर अनादर को भी दर्शाता है।
जजों की उदारता और याचिका पर फैसला
मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस केवी विश्वनाथन ने वकील की हताशा को भांपते हुए एक बड़ा रुख अपनाया। हालांकि वकील का व्यवहार अक्षम्य था, लेकिन जस्टिस विश्वनाथन ने उनके खिलाफ अवमानना की सख्त कार्रवाई न करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही, उनकी संबंधित याचिका को अदालत ने पूरी तरह खारिज कर दिया। अदालत का यह फैसला कानूनी गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि इसे मानवीय दृष्टिकोण के तौर पर देखा जा रहा है।
बार एसोसिएशन की नाराजगी और नए नियम की मांग
इस घटना से सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन बेहद खफा है। एसोसिएशन ने सार्वजनिक रूप से इस कृत्य की कड़ी निंदा की है और इसे कानूनी पेशे के लिए एक काला धब्बा बताया है। बार एसोसिएशन ने मांग उठाई है कि अदालत की कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग को लेकर अब नई और सख्त गाइडलाइन्स लागू की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
एडवोकेट्स एक्ट के तहत लटकी कार्रवाई
वकील प्रबल प्रताप की मुश्किलें अभी कम नहीं हुई हैं। बार काउंसिल ऑफ इंडिया अब एडवोकेट्स एक्ट के प्रावधानों के तहत उनके खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की तैयारी में है। कानून के जानकार मानते हैं कि अदालत की मर्यादा भंग करने वाले किसी भी व्यक्ति को उसके पेशेवर आचरण के लिए जवाबदेह ठहराया जाना अनिवार्य है। बार काउंसिल की जांच अब यह तय करेगी कि क्या उनके खिलाफ लाइसेंस रद्द करने या निलंबन जैसी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

ऑकलैंड में गूंजा 'भारत-न्यूजीलैंड' का जयघोष, ऐतिहासिक बनी मोदी की यात्रा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा ने भारत और न्यूजीलैंड के रिश्तों में एक नया अध्याय लिख दिया है। ऑकलैंड में हुए भव्य स्वागत से लेकर रणनीतिक साझेदारी के ऐलान तक, यह दौरा दोनों देशों के बीच भविष्य के सहयोग की मजबूत नींव रखने वाला साबित हुआ है। 18 अहम समझौतों के साथ, यह यात्रा मील का पत्थर बन गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा ने भारत और न्यूजीलैंड के रिश्तों में एक नया अध्याय लिख दिया है। ऑकलैंड में हुए भव्य स्वागत से लेकर रणनीतिक साझेदारी के ऐलान तक, यह दौरा दोनों देशों के बीच भविष्य के सहयोग की मजबूत नींव रखने वाला साबित हुआ है। 18 अहम समझौतों के साथ, यह यात्रा मील का पत्थर बन गई है।
माओरी परंपरा और तिरंगे की रोशनी में भव्य स्वागत
प्रधानमंत्री मोदी का ऑकलैंड आगमन किसी उत्सव से कम नहीं था। हवाई अड्डे पर उतरते ही उनका स्वागत माओरी समुदाय ने पारंपरिक 'पोविरी' समारोह के साथ किया। यह एक ऐसा दृश्य था जिसने दोनों देशों की सांस्कृतिक निकटता को बखूबी दर्शाया। वहीं, शहर की पहचान बन चुके स्काई टावर को तिरंगे के रंगों से रोशन कर भारत के प्रति न्यूजीलैंड के सम्मान को बयां किया गया। इन दृश्यों ने पूरे शहर में भारत के साथ दोस्ती का एक गहरा संदेश दिया।
'वाका' के जरिए रिश्तों को मिली नई उड़ान
पीएम मोदी ने भारत और न्यूजीलैंड के संबंधों को बेहद खूबसूरती के साथ 'वाका' (न्यूजीलैंड की पारंपरिक नाव) का उदाहरण देकर समझाया। उन्होंने कहा कि जिस तरह वाका को आगे बढ़ाने के लिए सही दिशा और सामंजस्य की जरूरत होती है, वैसे ही भारत और न्यूजीलैंड के रिश्ते भी आपसी विश्वास और साझा लक्ष्यों के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने पुरानी यादों और उपहारों का जिक्र कर दोनों देशों के बीच सदियों से चले आ रहे मानवीय जुड़ाव को ताजा कर दिया।
18 समझौते और रणनीतिक साझेदारी का उदय
इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू दोनों देशों के बीच हुए 18 ऐतिहासिक समझौते रहे। पर्यटन, खेल और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में सहयोग की नई संभावनाएं तलाशी गई हैं। इन समझौतों का असर जल्द ही जमीनी स्तर पर दिखाई देगा, जिससे दोनों देशों के नागरिकों के बीच आदान-प्रदान बढ़ेगा। सबसे बड़ी उपलब्धि इन संबंधों को 'रणनीतिक साझेदारी' का दर्जा मिलना है, जो यह स्पष्ट करता है कि अब भारत और न्यूजीलैंड अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक-दूसरे के मजबूत सहयोगी के रूप में खड़े होंगे।
न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री ने इस यात्रा को दोनों देशों के संबंधों में एक 'ऐतिहासिक मील का पत्थर' करार दिया। यह दौरा केवल कूटनीतिक नहीं था, बल्कि यह दो देशों के बीच भरोसे और सम्मान की उस नई डोर को मजबूत करने वाला कदम था, जो आने वाले समय में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और समृद्धि के नए द्वार खोलेगा।

बॉबी देओल संग टीनेज लव स्टोरी पर फराह का बड़ा खुलासा
बॉलीवुड की गलियों में पुराने रिश्तों और अनसुने किस्सों का सामने आना कोई नई बात नहीं है। हाल ही में मशहूर ज्वैलरी डिजाइनर फराह अली खान ने अपने एक पुराने रिश्ते से पर्दा उठाकर हर किसी को हैरान कर दिया है। अभिनेता ऋतिक रोशन की पूर्व पत्नी सुजैन खान की बहन फराह ने खुलासा किया है कि वह अपने टीनेज के दिनों में अभिनेता बॉबी देओल के साथ एक बेहद गंभीर और मासूम रिश्ते में थीं।
बॉलीवुड की गलियों में पुराने रिश्तों और अनसुने किस्सों का सामने आना कोई नई बात नहीं है। हाल ही में मशहूर ज्वैलरी डिजाइनर फराह अली खान ने अपने एक पुराने रिश्ते से पर्दा उठाकर हर किसी को हैरान कर दिया है। अभिनेता ऋतिक रोशन की पूर्व पत्नी सुजैन खान की बहन फराह ने खुलासा किया है कि वह अपने टीनेज के दिनों में अभिनेता बॉबी देओल के साथ एक बेहद गंभीर और मासूम रिश्ते में थीं।
बचपन का प्यार और मासूमियत के वो दिन
फराह अली खान और बॉबी देओल का यह रिश्ता उस दौर का था जब दोनों ने बॉलीवुड की चकाचौंध को ठीक से देखा भी नहीं था। अपने इस रिश्ते को याद करते हुए फराह ने बेहद भावुक और खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि वे दोनों एक-दूसरे के 'चाइल्डहुड स्वीटहार्ट' यानी बचपन के प्यार थे। यह रिश्ता आज के दौर के रिश्तों जैसा नहीं था, बल्कि इसमें एक पुरानी दुनिया की मासूमियत और ठहराव था।
16 की फराह और 17 के बॉबी: जब खतों में बयां होता था प्यार
इस टीनेज लव स्टोरी के खूबसूरत पलों को साझा करते हुए फराह ने बताया कि जब वे दोनों रिश्ते में थे, तब उनकी उम्र महज 16 साल थी और बॉबी देओल 17 साल के थे। आज के डिजिटल युग से उलट, उस समय उनके प्यार का इजहार करने का तरीका बेहद पारंपरिक और रोमांटिक था। वे दोनों एक-दूसरे का हाथ थामकर वॉक पर निकलते थे और अपने दिल की बातें कागजों पर उतारकर एक-दूसरे को प्रेम-पत्र (लेटर) लिखा करते थे। यह उस उम्र का सच्चा और बेबाक लगाव था, जिसकी यादें आज भी उनके जेहन में ताजा हैं।
समय के साथ बदला सफर और नीलम की एंट्री
हर टीनेज लव स्टोरी की तरह, फराह और बॉबी का यह खूबसूरत सफर भी ताउम्र नहीं चल सका। समय के साथ दोनों की राहें जुदा हो गईं और यह रिश्ता खत्म हो गया। इस अलगाव के बाद दोनों अपनी-अपनी जिंदगी में आगे बढ़ गए। फराह ने इस बात का भी जिक्र किया कि उनके साथ रिश्ता खत्म होने के बाद बॉबी देओल की जिंदगी में मशहूर अभिनेत्री नीलम कोठारी की एंट्री हुई थी।
भले ही आज फराह और बॉबी अपनी-अपनी जिंदगियों में काफी आगे निकल चुके हैं और अपने करियर व परिवार में व्यस्त हैं, लेकिन फराह का यह हालिया बयान सोशल मीडिया और सिनेमाई गलियारों में खूब सुर्खियां बटोर रहा है। फैंस को अपने चहेते सितारों के गुजरे जमाने की यह अनसुनी प्रेम कहानी बेहद दिलचस्प लग रही है।

सेलिना जेटली का चौंकाने वाला खुलासा: जुड़वां बच्चों ने पढ़कर सुनाया मां का तलाक नोटिस
बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री सेलिना जेटली और उनके पति पीटर हाग के बीच चल रहा विवाद एक नए और हैरान करने वाले मोड़ पर आ गया है। सेलिना ने खुलासा किया है कि उनके मासूम जुड़वां बच्चों को जर्मन भाषा में लिखा उनका तलाक का नोटिस पढ़कर सुनाना पड़ा था। इस कानूनी दस्तावेज में अभिनेत्री पर कई अजीबोगरीब और बेबुनियाद आरोप लगाए गए हैं। पीटर ने बच्चों से मिलने के लिए सेलिना के सामने नौकरी ढूंढने की अजीब शर्त भी रख दी है।
बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री सेलिना जेटली और उनके पति पीटर हाग के बीच चल रहा विवाद एक नए और हैरान करने वाले मोड़ पर आ गया है। सेलिना ने खुलासा किया है कि उनके मासूम जुड़वां बच्चों को जर्मन भाषा में लिखा उनका तलाक का नोटिस पढ़कर सुनाना पड़ा था। इस कानूनी दस्तावेज में अभिनेत्री पर कई अजीबोगरीब और बेबुनियाद आरोप लगाए गए हैं। पीटर ने बच्चों से मिलने के लिए सेलिना के सामने नौकरी ढूंढने की अजीब शर्त भी रख दी है।
मासूम बच्चों के कंधों पर कानूनी तनाव का बोझ
पारिवारिक विवाद जब अदालतों और कानूनी दस्तावेजों तक पहुंचते हैं, तो सबसे ज्यादा नुकसान मासूम बच्चों का होता है। अभिनेत्री सेलिना जेटली के मामले में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। सेलिना ने हाल ही में अपने व्यक्तिगत जीवन की एक ऐसी दर्दनाक सच्चाई साझा की है, जिसने सबको झकझोर कर रख दिया है। सेलिना के मुताबिक, उनके जुड़वां बेटों को अपनी ही मां के खिलाफ आया तलाक का कानूनी नोटिस पढ़ना पड़ा। यह नोटिस जर्मन भाषा में था, जिसे बच्चों ने पढ़कर अपनी मां को सुनाया। किसी भी बच्चे के लिए अपने माता-पिता के अलगाव और विवाद के दस्तावेजों को इस तरह देखना बेहद तनावपूर्ण और दुर्भाग्यपूर्ण है।
अजीबोगरीब और बेबुनियाद आरोपों की बौछार
सेलिना जेटली ने इस पूरे मामले पर खुलकर बात करते हुए बताया कि उनके अलग हो चुके पति पीटर द्वारा भेजे गए इस नोटिस में उन पर कई तरह के अजीब और मनगढ़ंत आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों का सच्चाई से कोई वास्ता नहीं है और यह केवल उन्हें मानसिक रूप से परेशान करने के उद्देश्य से किया गया है। अभिनेत्री ने इन सभी दावों को पूरी तरह से खारिज करते हुए इन्हें बेबुनियाद बताया है। कानूनी लड़ाई के बीच इस तरह के व्यक्तिगत हमलों ने दोनों के बीच की कड़वाहट को और ज्यादा बढ़ा दिया है।
बच्चों से मिलने के लिए रख दी अनोखी शर्त
इस पूरे विवाद में सबसे हैरान करने वाली बात जो सामने आई है, वह बच्चों से मुलाकात को लेकर है। सेलिना ने दावा किया है कि पीटर ने उनके सामने एक बेहद अजीबोगरीब शर्त रखी है। शर्त के मुताबिक, अगर सेलिना अपने बच्चों से मिलना चाहती हैं या उनके साथ समय बिताना चाहती हैं, तो उन्हें सबसे पहले एक नौकरी ढूंढनी होगी। पीटर का कहना है कि जब तक सेलिना के पास एक स्थिर नौकरी नहीं होगी, तब तक उन्हें बच्चों से मिलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। एक मां के लिए अपने ही बच्चों से मिलने के लिए इस तरह की शर्तों का सामना करना बेहद दर्दनाक और अनुचित है।
सेलिना का संघर्ष और भविष्य की राह
ग्लेमर की चकाचौंध से दूर सेलिना जेटली इस समय अपने जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजर रही हैं। एक तरफ जहां उन्हें अपने वैवाहिक जीवन के बिखरने का दुख है, वहीं दूसरी तरफ अपने बच्चों के हक और उनके मानसिक स्वास्थ्य को बचाए रखने की बड़ी चुनौती है। पीटर की इन शर्तों और कानूनी दांव-पेंचों के बीच सेलिना मजबूती से खड़ी हैं और अपने स्तर पर इस पूरी परिस्थिति का सामना कर रही हैं। फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसक भी इस मुश्किल समय में उनके प्रति सहानुभूति जता रहे हैं। खेल और सिनेमा की दुनिया से दूर, यह एक मां के अपने अस्तित्व और ममता की लड़ाई बन चुकी है।
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