
ओम शांति ओम: इस वजह से 'दीवानगी' गाने में नहीं दिखे अमिताभ बच्चन
बॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'ओम शांति ओम' के आइकॉनिक गाने 'दीवानगी दीवानगी' में सुपरस्टार अमिताभ बच्चन क्यों नजर नहीं आए, इस राज से पर्दा उठ गया है। फिल्म की डायरेक्टर फराह खान ने खुलासा किया है कि गाने की शूटिंग के दौरान अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय की शादी का जश्न चल रहा था, जिसके चलते बिग बी चाहकर भी शूटिंग का हिस्सा नहीं बन सके।
खबर का निचोड़
बॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'ओम शांति ओम' के आइकॉनिक गाने 'दीवानगी दीवानगी' में सुपरस्टार अमिताभ बच्चन क्यों नजर नहीं आए, इस राज से पर्दा उठ गया है। फिल्म की डायरेक्टर फराह खान ने खुलासा किया है कि गाने की शूटिंग के दौरान अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय की शादी का जश्न चल रहा था, जिसके चलते बिग बी चाहकर भी शूटिंग का हिस्सा नहीं बन सके।
सितारों से सजे गाने में आखिर क्यों छूटे महानायक?
साल 2007 में आई फराह खान की फिल्म 'ओम शांति ओम' ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के नए कीर्तिमान रचे थे। इस फिल्म का गाना 'दीवानगी दीवानगी' आज भी हिंदी सिनेमा के सबसे भव्य गानों में से एक गिना जाता है। इस एक अकेले गाने में बॉलीवुड के 31 दिग्गज कलाकारों ने एक साथ स्क्रीन शेयर की थी। शाहरुख खान के साथ सलमान खान, सैफ अली खान, संजय दत्त, रेखा, और श्रीदेवी जैसे बड़े सितारों ने महफिल लूटी थी। लेकिन इस मेगा-स्टारर गाने में हिंदी सिनेमा के 'शहंशाह' यानी अमिताभ बच्चन की कमी हर दर्शक को खली थी। अब सालों बाद खुद फराह खान ने इस सस्पेंस से पर्दा उठा दिया है कि आखिर महानायक इस ऐतिहासिक गाने का हिस्सा क्यों नहीं बन पाए थे।
ऐश्वर्या-अभिषेक की शादी बनी वजह
फराह खान ने एक बातचीत के दौरान उस वक्त के घटनाक्रम को याद करते हुए बताया कि जब 'दीवानगी दीवानगी' गाने की शूटिंग का शेड्यूल तय किया गया, ठीक उसी हफ्ते बच्चन परिवार में एक बहुत बड़ा उत्सव चल रहा था। दरअसल, उसी दौरान अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय की शादी की रस्में निभाई जा रही थीं। घर में शादी का माहौल होने और तमाम पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण अमिताभ बच्चन बेहद व्यस्त थे। उनके लिए शादी के जश्न और रस्मों को छोड़कर शूटिंग के लिए समय निकालना मुमकिन नहीं था। यही वजह थी कि वे इस गाने की शूटिंग पर नहीं पहुंच सके।
किंग खान और बच्चन परिवार का खास कनेक्शन
इंडस्ट्री में शाहरुख खान और अमिताभ बच्चन के बीच बेहद करीबी और सम्मानजनक रिश्ते रहे हैं। फराह खान भी बच्चन परिवार के काफी करीब मानी जाती हैं। फराह ने साफ किया कि अमिताभ बच्चन खुद इस गाने का हिस्सा बनना चाहते थे, लेकिन घर की शादी के चलते तारीखों का ऐसा टकराव हुआ कि वे चाहकर भी सेट पर नहीं आ पाए। हालांकि, बच्चन परिवार की गैर-मौजूदगी के बावजूद यह गाना बॉलीवुड के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ, जिसे आज भी जब पर्दे पर देखा जाता है, तो दर्शकों का रोमांच सातवें आसमान पर होता है।

योगराज सिंह के आरोपों पर भड़के कपिल देव, दिया करारा जवाब
पूर्व भारतीय कप्तान कपिल देव और दिग्गज ऑलराउंडर युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह के बीच का पुराना विवाद एक बार फिर गरमा गया है। योगराज सिंह द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों पर आखिरकार कपिल देव ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। कपिल देव ने साफ शब्दों में कहा कि वह आज भी योगराज को अपना दोस्त मानते हैं, लेकिन उन्हें कटु स्वभाव के लोग बिल्कुल पसंद नहीं हैं। उन्होंने मर्यादा बनाए रखने पर जोर दिया है।
पूर्व भारतीय कप्तान कपिल देव और दिग्गज ऑलराउंडर युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह के बीच का पुराना विवाद एक बार फिर गरमा गया है। योगराज सिंह द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों पर आखिरकार कपिल देव ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। कपिल देव ने साफ शब्दों में कहा कि वह आज भी योगराज को अपना दोस्त मानते हैं, लेकिन उन्हें कटु स्वभाव के लोग बिल्कुल पसंद नहीं हैं। उन्होंने मर्यादा बनाए रखने पर जोर दिया है।
दोस्ती बनाम कड़वाहट: कपिल देव का बेबाक अंदाज
भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे सफल कप्तानों में शुमार कपिल देव अपनी सादगी और बेबाकी के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में जब योगराज सिंह ने उन पर यह आरोप लगाया कि कप्तान बनते ही कपिल ने उन्हें भारतीय टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया था, तो क्रिकेट गलियारों में हलचल मच गई। इस पर पलटवार करते हुए कपिल देव ने बेहद परिपक्व लेकिन सख्त रुख अपनाया। उन्होंने साफ किया कि खेल के मैदान के फैसले और निजी संबंध दो अलग बातें हैं।
'मैं गाली दे दूं, थप्पड़ मार दूं तो क्या होगा?'
कपिल देव ने योगराज सिंह के कटु बयानों पर गहरी असहमति जताई। उन्होंने कहा कि इंसान का रिएक्शन ही यह तय करता है कि वह असल में कौन है। कपिल देव ने आत्म-नियंत्रण और गरिमा की बात करते हुए कहा, "मैं अब भी योगराज का दोस्त हूं... लेकिन मुझे कटु स्वभाव वाले लोग पसंद नहीं हैं। आपका रिएक्शन तय करता है आप कौन हैं... मैं उठकर गाली दे दूं... थप्पड़ मार दूं तो क्या होगा?" कपिल देव का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे योगराज सिंह के गुस्से और कड़वाहट भरे रवैये पर एक सीधा जवाब माना जा रहा है।
योगराज सिंह के पुराने जख्म और आरोप
यह पहली बार नहीं है जब योगराज सिंह ने कपिल देव पर निशाना साधा हो। योगराज सिंह का मानना रहा है कि उनका अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर कपिल देव की वजह से लंबा नहीं चल सका। उन्होंने कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया है कि कपिल देव ने उनके साथ भेदभाव किया। हालांकि, कपिल देव ने हमेशा इन बातों को नजरअंदाज किया है, लेकिन इस बार उन्होंने मर्यादा की सीमा रेखा खींचते हुए साफ कर दिया कि कड़वाहट फैलाने वाले लोगों के लिए उनके पास कोई जगह नहीं है।
खेल भावना और निजी मर्यादा का सवाल
कपिल देव के इस जवाब ने क्रिकेट प्रशंसकों का दिल जीत लिया है। उनका मानना है कि किसी भी विवाद में अपनी भाषा की मर्यादा नहीं खोनी चाहिए। जहां एक तरफ योगराज सिंह लगातार अपने बयानों में गुस्सा जाहिर करते रहे हैं, वहीं कपिल देव ने यह साबित कर दिया कि एक महान खिलाड़ी न केवल मैदान पर बल्कि मैदान के बाहर भी अपने आचरण से बड़ा बनता है। खेल जगत अब यह देखने के लिए उत्सुक है कि कपिल देव के इस तीखे और तार्किक जवाब पर योगराज सिंह की क्या प्रतिक्रिया आती है।

नेपोटिज़्म के ताने से 60 फिल्मों के सफर तक: रितेश देशमुख का करारा जवाब
बॉलीवुड अभिनेता रितेश देशमुख ने फिल्म इंडस्ट्री में अपने 23 साल पूरे होने पर नेपोटिज़्म और स्टार किड्स को लेकर होने वाली चर्चाओं पर खुलकर बात की है। महाराष्ट्र के दिवंगत मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के बेटे रितेश ने साझा किया कि करियर की शुरुआत में उनकी सफलता को उनके पिता के राजनीतिक रसूख से जोड़कर देखा जाता था। हालांकि, 60 फिल्मों के लंबे अनुभव और कड़ी मेहनत के दम पर आज उन्होंने इन रूढ़िवादी धारणाओं को पूरी तरह से तोड़ दिया है।
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बॉलीवुड अभिनेता रितेश देशमुख ने फिल्म इंडस्ट्री में अपने 23 साल पूरे होने पर नेपोटिज़्म और स्टार किड्स को लेकर होने वाली चर्चाओं पर खुलकर बात की है। महाराष्ट्र के दिवंगत मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के बेटे रितेश ने साझा किया कि करियर की शुरुआत में उनकी सफलता को उनके पिता के राजनीतिक रसूख से जोड़कर देखा जाता था। हालांकि, 60 फिल्मों के लंबे अनुभव और कड़ी मेहनत के दम पर आज उन्होंने इन रूढ़िवादी धारणाओं को पूरी तरह से तोड़ दिया है।
शुरुआती दौर की चुनौतियां और नेपोटिज़्म का टैग
जब कोई स्टार किड या किसी बड़े राजनीतिक घराने का लड़का फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखता है, तो उसके लिए रास्ते भले ही आसान दिखते हों, लेकिन अंदरूनी राह उतनी ही कांटों भरी होती है। रितेश देशमुख के साथ भी ऐसा ही हुआ। साल 2003 में फिल्म 'तुझे मेरी कसम' से अपने अभिनय करियर की शुरुआत करने वाले रितेश को शुरुआती दिनों में भारी आलोचनाओं और पूर्वग्रहों का सामना करना पड़ा।
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख का बेटा होने के कारण, उनकी हर सफलता को उनके पिता के पद और प्रतिष्ठा की परछाई के रूप में देखा गया। लोगों का मानना था कि रितेश को फिल्में सिर्फ इसलिए मिल रही हैं और उनकी फिल्में इसलिए चल रही हैं क्योंकि उनके पीछे एक बेहद मजबूत राजनीतिक हाथ है। इस तरह के तानों और धारणाओं ने उनके शुरुआती संघर्ष को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया।
मेहनत और प्रतिभा से बदली रूढ़िवादी सोच
किसी भी इंसान के लिए खुद पर लगे टैग को हटाना आसान नहीं होता, खासकर तब जब वह टैग आपके परिवार के रसूख से जुड़ा हो। रितेश देशमुख ने इस चुनौती को स्वीकार किया और अपने काम को ही अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। उन्होंने केवल मुख्यधारा के हीरो की भूमिकाओं तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि कॉमेडी, थ्रिलर और विलेन के किरदारों में भी अपनी अभिनय क्षमता का लोहा मनवाया।
'मस्ती', 'धमाल', 'हाउसफुल' जैसी कल्ट कॉमेडी फिल्मों से लेकर 'एक विलेन' जैसी फिल्म में खूंखार खलनायक की भूमिका निभाकर उन्होंने साबित कर दिया कि वे सिर्फ एक मुख्यमंत्री के बेटे नहीं, बल्कि एक बेहद वर्सेटाइल और कुशल अभिनेता हैं। उनकी कॉमिक टाइमिंग और स्क्रीन प्रेजेंस ने दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बनाई, जिसे किसी भी राजनीतिक प्रभाव से हासिल नहीं किया जा सकता था।
23 साल, 60 फिल्में और धारणाओं का टूटना
आज रितेश देशमुख को फिल्म इंडस्ट्री में काम करते हुए 23 साल से ज्यादा का समय हो चुका है और वे 60 से अधिक फिल्मों में अपने अभिनय का हुनर दिखा चुके हैं। इतने लंबे और सफल करियर के बाद अब वे गर्व और आत्मविश्वास के साथ उन पुरानी धारणाओं के सामने डटकर खड़े हैं।
रितेश का मानना है कि कुछ रूढ़ियों और लोगों की बनी-बनाई सोच को तोड़ने में वक्त लगता है और इसके लिए लगातार कड़ी मेहनत की जरूरत होती है। आज वे बिना किसी बाहरी सहारे के, सिर्फ और सिर्फ अपनी काबिलियत और दर्शकों के प्यार के दम पर मनोरंजन जगत में एक मजबूत स्तंभ बनकर स्थापित हैं। उनका यह सफर दिखाता है कि विरासत में शुरुआत मिल सकती है, लेकिन टिके रहने के लिए खुद को तपाना ही पड़ता है।

15 साल के वैभव का जलवा: इंग्लैंड के जैकब बेथेल ने बताया 'जीनियस'
इंग्लैंड के 22 वर्षीय बल्लेबाज जैकब बेथेल ने भारतीय युवा क्रिकेट सनसनी वैभव सूर्यवंशी की जमकर तारीफ की है। बेथेल ने वैभव को 'जीनियस' बताते हुए उनके खेल की सराहना की। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अपने से सात साल छोटे खिलाड़ी के खिलाफ मैदान पर उतरना थोड़ा अजीब अहसास कराता है।
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इंग्लैंड के 22 वर्षीय बल्लेबाज जैकब बेथेल ने भारतीय युवा क्रिकेट सनसनी वैभव सूर्यवंशी की जमकर तारीफ की है। बेथेल ने वैभव को 'जीनियस' बताते हुए उनके खेल की सराहना की। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अपने से सात साल छोटे खिलाड़ी के खिलाफ मैदान पर उतरना थोड़ा अजीब अहसास कराता है।
खेल जगत में वैभव सूर्यवंशी की नई गूंज
क्रिकेट की दुनिया में जब कोई युवा खिलाड़ी अपनी चमक बिखेरता है, तो दिग्गजों का ध्यान उसकी ओर जाना लाजमी है। इन दिनों भारतीय क्रिकेट के गलियारों से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक सिर्फ एक ही नाम की चर्चा जोरों पर है—वैभव सूर्यवंशी। महज 15 साल की उम्र में अपने असाधारण खेल से सबको हैरान करने वाले वैभव की फैन लिस्ट में अब इंग्लैंड के युवा बल्लेबाज जैकब बेथेल का नाम भी जुड़ गया है। बेथेल ने वैभव के टैलेंट का लोहा मानते हुए उनकी बल्लेबाजी और तकनीक की खुलकर प्रशंसा की है।
'जीनियस' के खिलाफ खेलना थोड़ा अजीब: बेथेल
इंग्लैंड के उभरते हुए खिलाड़ी जैकब बेथेल ने हाल ही में वैभव सूर्यवंशी के खेल पर अपनी प्रतिक्रिया दी। 22 साल के बेथेल ने बड़ी बेबाकी से माना कि जब वह मैदान पर खुद से सात साल छोटे किसी खिलाड़ी का सामना करते हैं, तो वह स्थिति थोड़ी अनोखी और अजीब लगती है। आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय या उच्च स्तरीय क्रिकेट में इतने कम उम्र के खिलाड़ियों का दिखना दुर्लभ होता है, लेकिन वैभव ने अपनी काबिलियत के दम पर इस दूरी को मिटा दिया है। बेथेल ने वैभव को 'जीनियस' करार देते हुए यह साफ कर दिया कि उम्र सिर्फ एक नंबर है और असली पहचान प्रदर्शन से होती है।
स्विंग और टाइमिंग के मुरीद हुए अंग्रेज बल्लेबाज
वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी की सबसे खास बात उनकी परिपक्वता है, जो इस उम्र के खिलाड़ियों में अमूमन देखने को नहीं मिलती। जैकब बेथेल ने विशेष रूप से वैभव के खेलने के अंदाज, उनकी टाइमिंग और स्विंग गेंदों को खेलने की क्षमता की तारीफ की। तेज पिचों और स्विंग होती गेंदों के सामने जहां अनुभवी बल्लेबाज भी संघर्ष करते नजर आते हैं, वहां वैभव बेहद सहजता और आत्मविश्वास के साथ शॉट लगाते हैं। यही वजह है कि विरोधी टीम के खिलाड़ी भी उनकी इस कला की सराहना करने से खुद को रोक नहीं पा रहे हैं।
भविष्य के सुपरस्टार पर टिकी सबकी नजरें
वैभव सूर्यवंशी ने बहुत ही कम समय में क्रिकेट पंडितों और प्रशंसकों के बीच अपनी एक अलग पहचान बना ली है। जैकब बेथेल जैसे विदेशी खिलाड़ियों से मिल रही यह सराहना दर्शाती है कि वैभव का खेल किस स्तर का है। इतनी कम उम्र में इस तरह का दबाव झेलना और मैदान पर लगातार बेहतर प्रदर्शन करना उनकी मानसिक मजबूती को दिखाता है। क्रिकेट जगत अब इस युवा खिलाड़ी के सफर को बेहद करीब से देख रहा है, क्योंकि उनमें भारतीय क्रिकेट का अगला बड़ा सितारा बनने की पूरी क्षमता नजर आती है।

400 करोड़ की एलिमनी का सच: सुजैन खान की बहन ने तोड़ी चुप्पी
ऋतिक रोशन और सुजैन खान के तलाक के वर्षों बाद, 400 करोड़ रुपये की एलिमनी की खबरों ने फिर तूल पकड़ा है। सुजैन की बहन फराह खान अली ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे सरासर झूठ करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुजैन ने ऐसी कोई मोटी रकम नहीं ली और न ही वह इस तरह की इंसान हैं।
400 करोड़ की एलिमनी का सच: सुजैन खान की बहन ने तोड़ी चुप्पी
सारांश
ऋतिक रोशन और सुजैन खान के तलाक के वर्षों बाद, 400 करोड़ रुपये की एलिमनी की खबरों ने फिर तूल पकड़ा है। सुजैन की बहन फराह खान अली ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे सरासर झूठ करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुजैन ने ऐसी कोई मोटी रकम नहीं ली और न ही वह इस तरह की इंसान हैं।
अफवाहों के बाजार में सच की तलाश
बॉलीवुड के सबसे चर्चित जोड़ों में शुमार रहे ऋतिक रोशन और सुजैन खान का रिश्ता हमेशा से ही मीडिया की सुर्खियों में रहा है। साल 2014 में जब दोनों ने अलग होने का फैसला किया, तो प्रशंसकों के लिए यह किसी बड़े झटके से कम नहीं था। तलाक के बाद से ही उनके अलगाव के कारणों और वित्तीय लेनदेन को लेकर तरह-तरह की बातें होती रही हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा जिस बात की रही, वह थी सुजैन द्वारा ली गई कथित 400 करोड़ रुपये की भारी-भरकम एलिमनी।
फराह खान अली का कड़ा रुख
सालों से चल रही इन चर्चाओं पर अब सुजैन की बहन और जानी-मानी डिजाइनर फराह खान अली ने कड़ा रुख अपनाया है। फराह ने इन आरोपों को न केवल निराधार बताया है, बल्कि कड़े शब्दों में इनका खंडन भी किया है। उनका मानना है कि इस तरह की खबरें फैलाना न केवल गलत है, बल्कि यह किसी की छवि धूमिल करने की एक सोची-समझी साजिश भी हो सकती है।
फराह ने स्पष्ट किया कि तलाक के दौरान सुजैन ने ऋतिक से एक पैसा भी नहीं लिया था। उन्होंने 'गोल्ड डिगर' जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने वालों को खरी-खरी सुनाते हुए कहा कि उनकी बहन एक आत्मनिर्भर और स्वाभिमानी महिला हैं, जो अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर अपना जीवन जीती हैं।
क्यों नहीं थमतीं ऐसी अफवाहें?
स्टार्स की निजी जिंदगी अक्सर आम लोगों की जिज्ञासा का केंद्र बनी रहती है। जब भी कोई हाई-प्रोफाइल तलाक होता है, तो अक्सर एलिमनी की बड़ी रकम को लेकर कयास लगाए जाते हैं। ऋतिक और सुजैन के मामले में भी यही हुआ। एक तरफ ऋतिक का स्टारडम और दूसरी तरफ सुजैन का रसूख, लोगों के लिए यह मान लेना आसान था कि अलग होने की कीमत करोड़ों में होगी। हालांकि, हकीकत इन अटकलों से बिल्कुल जुदा है।
तलाक के इतने साल बीत जाने के बाद भी दोनों ही सितारे आज एक-दूसरे के प्रति सम्मान रखते हैं और अपने बच्चों की परवरिश के लिए एक मजबूत टीम की तरह साथ खड़े नजर आते हैं। फराह के इस बयान ने उन तमाम अफवाहों पर विराम लगा दिया है, जो लंबे समय से सुजैन की गरिमा पर सवाल उठा रही थीं। यह पूरा वाकया दिखाता है कि कैसे सोशल मीडिया और गॉसिप कॉलम अक्सर बिना किसी ठोस प्रमाण के रिश्तों को सनसनीखेज बनाने की कोशिश करते हैं।
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