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केतन अग्रवाल हत्याकांड: सिया गोयल की वायरल वीडियो ने बढ़ाई मुश्किलें, पॉलीग्राफ टेस्ट से खुलेगा सच

केतन अग्रवाल हत्याकांड: सिया गोयल की वायरल वीडियो ने बढ़ाई मुश्किलें, पॉलीग्राफ टेस्ट से खुलेगा सच

Delight News
📅 02 Jul2026

केतन अग्रवाल हत्याकांड की गुत्थी उलझती जा रही है। मुख्य आरोपी सिया गोयल के साथ केतन के नए वीडियो सामने आने के बाद जांच की दिशा पूरी तरह बदल गई है। पिता प्रवीण गोयल के कड़े रुख और पुलिस द्वारा लोहगढ़ किले में किए गए क्राइम सीन रीक्रिएशन ने इस मामले को सनसनीखेज मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। अब पूरे देश की निगाहें पॉलीग्राफ टेस्ट के नतीजों पर टिकी हैं।

केतन अग्रवाल हत्याकांड: सिया गोयल की वायरल वीडियो ने बढ़ाई मुश्किलें, पॉलीग्राफ टेस्ट से खुलेगा सच
केतन अग्रवाल मर्डर मिस्ट्री: वायरल वीडियो और पिता का चौंकाने वाला बयान, क्या सिया गोयल है असली गुनहगार?
केतन अग्रवाल हत्याकांड की गुत्थी उलझती जा रही है। मुख्य आरोपी सिया गोयल के साथ केतन के नए वीडियो सामने आने के बाद जांच की दिशा पूरी तरह बदल गई है। पिता प्रवीण गोयल के कड़े रुख और पुलिस द्वारा लोहगढ़ किले में किए गए क्राइम सीन रीक्रिएशन ने इस मामले को सनसनीखेज मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है। अब पूरे देश की निगाहें पॉलीग्राफ टेस्ट के नतीजों पर टिकी हैं।
वायरल वीडियो ने खोला नया राज
केतन अग्रवाल की हत्या के मामले में मुख्य आरोपी सिया गोयल अब पूरी तरह से घिर चुकी है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ नए वीडियो में सिया और केतन को एक साथ देखा जा सकता है, जिसमें दोनों शराब के नशे में नजर आ रहे हैं। ये फुटेज उस रात की घटनाओं को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं, जिन्हें अब तक छिपाए जाने की आशंका जताई जा रही थी। इन वीडियो के सामने आते ही पुलिस की थ्योरी को एक नया आधार मिल गया है।
पिता का सख्त स्टैंड
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू सिया के पिता प्रवीण गोयल का बयान है। एक तरफ जहां आरोपी के परिजन अक्सर बचाव की मुद्रा में नजर आते हैं, वहीं प्रवीण गोयल ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि यदि उनकी बेटी दोषी पाई जाती है, तो कानून उसे बख्शे नहीं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि न्याय से बढ़कर कुछ भी नहीं है और उनकी बेटी को उसके किए की सजा मिलनी ही चाहिए। उनका यह बयान सिया के लिए मुश्किलें और बढ़ा सकता है।
लोहगढ़ किले में क्राइम सीन का रिक्रिएशन
पुलिस ने सबूतों को पुख्ता करने के लिए लोहगढ़ किले में घटनाक्रम को फिर से दोहराया। क्राइम सीन रीक्रिएशन के दौरान पुलिस ने बारीकी से यह समझने की कोशिश की कि उस रात वहां वास्तव में क्या हुआ था और सिया की भूमिका किस हद तक सीमित या व्यापक थी। इस कवायद के जरिए पुलिस उन कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही है जो अब तक अनसुलझी थीं।
अब पॉलीग्राफ टेस्ट ही अंतिम उम्मीद
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अब किसी भी तरह की चूक नहीं करना चाहती। जल्द ही सिया और केतन के मामले से जुड़े अन्य पक्षों का पॉलीग्राफ टेस्ट किया जाएगा। यह वैज्ञानिक परीक्षण हत्याकांड के पीछे की असली साजिश और मकसद को बेनकाब करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब सबकी नजरें इस टेस्ट पर टिकी हैं कि क्या सिया के दावे सच हैं या ये वीडियो किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हैं।
तमिलनाडु की सियासत गरमाई: सीएम विजय की मुश्किलें और 'सिग्मा' का शोर

तमिलनाडु की सियासत गरमाई: सीएम विजय की मुश्किलें और 'सिग्मा' का शोर

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📅 02 Jul2026

तमिलनाडु की राजनीति में उबाल है। मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की सरकार भ्रष्टाचार के आरोपों और केंद्रीय योजनाओं के विरोध के चलते घिरी हुई है। वहीं, दूसरी ओर उनके बेटे जेसन विजय अपनी पहली निर्देशित फिल्म 'सिग्मा' को लेकर चर्चा में हैं। राज्य में कानूनी पेचीदगियों और राजनीतिक ड्रामे का दौर जारी है।

तमिलनाडु की सियासत गरमाई: सीएम विजय की मुश्किलें और 'सिग्मा' का शोर
खबरों का सार
तमिलनाडु की राजनीति में उबाल है। मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की सरकार भ्रष्टाचार के आरोपों और केंद्रीय योजनाओं के विरोध के चलते घिरी हुई है। वहीं, दूसरी ओर उनके बेटे जेसन विजय अपनी पहली निर्देशित फिल्म 'सिग्मा' को लेकर चर्चा में हैं। राज्य में कानूनी पेचीदगियों और राजनीतिक ड्रामे का दौर जारी है।
सत्ता के गलियारों में घमासान
तमिलनाडु के सियासी मंच पर इन दिनों तनाव का माहौल है। मुख्यमंत्री जोसेफ विजय की सरकार चहुंओर से विपक्ष के तीखे हमलों का सामना कर रही है। सरकार पर कैबिनेट बैठकों की गोपनीयता भंग करने और उनमें बाहरी व करीबी लोगों की दखलंदाजी के गंभीर आरोप लगे हैं। स्थिति तब और बिगड़ गई जब विधायकों को रिश्वत देने की एक कथित साजिश का खुलासा हुआ, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। विपक्ष इन गिरफ्तारियों को सरकार की विफलता और भ्रष्टाचार का प्रमाण बताकर मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहा है।
केंद्र बनाम राज्य का वित्तीय टकराव
सियासी आरोप-प्रत्यारोप के बीच मुख्यमंत्री विजय ने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'विकसित भारत गारंटी' योजना के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मुख्यमंत्री का स्पष्ट मानना है कि यह योजना राज्य के खजाने पर अनावश्यक वित्तीय बोझ डालेगी, जिसे तमिलनाडु बर्दाश्त करने की स्थिति में नहीं है। इस विरोध ने केंद्र और राज्य के बीच की खाई को और गहरा कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह टकराव आने वाले समय में राज्य के बजट और विकास कार्यों पर सीधा असर डालेगा, जिससे आम जनता के बीच भी सरकार की छवि पर प्रभाव पड़ना तय है।
जेसन विजय की नई पारी
राजनीति के इस शोर-शराबे के बीच मुख्यमंत्री के बेटे जेसन विजय सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। उनका एक पुराना वीडियो अचानक वायरल हो गया है, जिससे लोग तरह-तरह के कयास लगा रहे हैं। हालांकि, जेसन इस राजनीतिक तूफान से दूर अपनी रचनात्मक दुनिया में व्यस्त हैं। वे अपनी पहली निर्देशित फिल्म 'सिग्मा' के जरिए निर्देशन के क्षेत्र में बड़े कदम रखने जा रहे हैं। फिल्म जगत में उनके प्रवेश को एक बड़ी घटना के रूप में देखा जा रहा है। एक तरफ पिता सत्ता की जटिलताओं और विवादों से जूझ रहे हैं, तो दूसरी तरफ बेटा अपनी कलात्मक यात्रा को लेकर सुर्खियों में है। तमिलनाडु में फिलहाल राजनीति और सिनेमा का यह मेल एक दिलचस्प मोड़ पर खड़ा है, जिस पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
भरत तिवारी एनकाउंटर: आरोपी डीएसपी को नई पोस्टिंग, न्यायिक जांच शुरू

भरत तिवारी एनकाउंटर: आरोपी डीएसपी को नई पोस्टिंग, न्यायिक जांच शुरू

Delight News
📅 01 Jul2026

बिहार के भोजपुर में चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में नया मोड़ आया है। आरोपी डीएसपी राजेश कुमार शर्मा को नारकोटिक्स विभाग में जिम्मेदारी सौंपी गई है। एक ओर पुलिस जांच की गति बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति विनोद कुमार सिन्हा न्यायिक जांच कर रहे हैं। नागमणि कुशवाहा के आरोपों ने सियासी पारा बढ़ा दिया है।

भरत तिवारी एनकाउंटर: आरोपी डीएसपी को नई पोस्टिंग, न्यायिक जांच शुरू
सारांश
बिहार के भोजपुर में चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में नया मोड़ आया है। आरोपी डीएसपी राजेश कुमार शर्मा को नारकोटिक्स विभाग में जिम्मेदारी सौंपी गई है। एक ओर पुलिस जांच की गति बढ़ा रही है, वहीं दूसरी ओर सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति विनोद कुमार सिन्हा न्यायिक जांच कर रहे हैं। नागमणि कुशवाहा के आरोपों ने सियासी पारा बढ़ा दिया है।
डीएसपी की नई तैनाती ने खड़े किए सवाल
भोजपुर का भरत तिवारी एनकाउंटर मामला लगातार सुर्खियों में है। इस प्रकरण में आरोपी बनाए गए डीएसपी राजेश कुमार शर्मा को लेकर प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं गर्म हैं। उन्हें हाल ही में नारकोटिक्स विभाग में तैनात किया गया है। एक ऐसे समय में जब उनके खिलाफ गंभीर आरोप हैं और मामले की जांच जारी है, इस नियुक्ति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोग और मृतक के परिजन इस निर्णय को पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह मान रहे हैं।
जांच की दिशा और पुलिस की सक्रियता
पुलिस मुख्यालय इस मामले को लेकर फूंक-फूंक कर कदम रख रहा है। भरत तिवारी के श्राद्धकर्म के संपन्न होते ही पुलिस ने अपनी जांच की रफ्तार तेज कर दी है। सबूतों को जुटाने और एनकाउंटर से जुड़ी कड़ियों को जोड़ने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे हर उस पहलू की पड़ताल कर रहे हैं जो इस घटनाक्रम से जुड़ा है। पुलिस पर जल्द से जल्द चार्जशीट दाखिल करने का दबाव है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
नागमणि कुशवाहा का बड़ा बयान
मामले में बीजेपी नेता नागमणि कुशवाहा के बयान ने इसे एक नया और विवादित मोड़ दे दिया है। उन्होंने भरत तिवारी को एक सामान्य नागरिक मानने के बजाय उसे एक बड़े अपराधी के रूप में पेश किया है। कुशवाहा ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए दावा किया कि तिवारी के तार सीधे पाकिस्तान से जुड़े थे और वहां उसने भारी मात्रा में हथियार छुपा रखे थे। उन्होंने साफ कहा है कि इस पूरे मामले की परतें खोलने के लिए केवल न्यायिक जांच ही एकमात्र रास्ता है।
न्यायिक जांच से बढ़ी उम्मीदें
इस एनकाउंटर की सच्चाई का पता लगाने के लिए राज्य सरकार ने न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। पटना उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति विनोद कुमार सिन्हा इस मामले की निष्पक्ष जांच कर रहे हैं। न्याय की कुर्सी पर बैठे न्यायमूर्ति सिन्हा के सामने अब यह साबित करने की चुनौती है कि क्या यह एनकाउंटर वास्तव में कानून के दायरे में था या फिर पुलिस ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया। लोगों की निगाहें इस जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, क्योंकि इसी से स्पष्ट होगा कि पर्दे के पीछे छिपी असल सच्चाई क्या है।
आमिर के भाई फैसल के बदले सुर, परिवार से सार्वजनिक रूप से मांगी माफी

आमिर के भाई फैसल के बदले सुर, परिवार से सार्वजनिक रूप से मांगी माफी

Delight News
📅 01 Jul2026

फैसल खान ने आमिर खान और अपने परिवार से सार्वजनिक तौर पर माफी मांग ली है। कभी आमिर पर एक साल तक नजरबंद रखने और नाजायज बच्चा होने जैसे गंभीर आरोप लगाने वाले फैसल ने अब माना है कि उन्हें घरेलू मामलों को सरेआम उछालने के बजाय बैठकर बात करनी चाहिए थी।

आमिर के भाई फैसल के बदले सुर, परिवार से सार्वजनिक रूप से मांगी माफी
फैसल खान ने आमिर खान और अपने परिवार से सार्वजनिक तौर पर माफी मांग ली है। कभी आमिर पर एक साल तक नजरबंद रखने और नाजायज बच्चा होने जैसे गंभीर आरोप लगाने वाले फैसल ने अब माना है कि उन्हें घरेलू मामलों को सरेआम उछालने के बजाय बैठकर बात करनी चाहिए थी।
सरेआम आरोपों के बाद अब पछतावा
बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान का पारिवारिक विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह कोई नया आरोप नहीं, बल्कि सुलह की एक गंभीर कोशिश है। आमिर खान के भाई फैसल खान ने सोशल मीडिया और मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपने परिवार के खिलाफ दिए गए बयानों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली है। फैसल ने एक भावुक संदेश जारी करते हुए अपनी अम्मी, भाई आमिर खान, बहन निखत और जीजा संतोष से अपने किए की क्षमा मांगी है।
"मुझे बैठकर बात करनी चाहिए थी"
फैसल खान ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा कि पारिवारिक मुद्दों को इस तरह दुनिया के सामने लाना सही नहीं था। उन्होंने साफ तौर पर कहा, "मैं अपनी अम्मी, आमिर, निखत और संतोष जीजा से माफी चाहता हूं। मुझे इन सब बातों को सार्वजनिक रूप से नहीं बोलना चाहिए था। ये हमारे घर के मामले थे, जिन्हें परिवार के साथ बैठकर बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए था।" फैसल ने आगे यह भी जोड़ा कि इस समय वह अपने परिवार से दूर नहीं रहना चाहते और उन्हें अपने परिवार के साथ और समर्थन की सख्त जरूरत है।
पुराने आरोपों से हिला दिया था बॉलीवुड
यह माफीनामा इसलिए बेहद चौंकाने वाला और बड़ा माना जा रहा है क्योंकि इससे पहले फैसल खान ने आमिर खान पर जो आरोप लगाए थे, उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में हलचल मचा दी थी। फैसल ने आमिर खान पर आरोप लगाया था कि अभिनेता ने उन्हें लगभग एक साल तक घर में कैद या नजरबंद करके रखा था और उन्हें मानसिक रूप से बीमार साबित करने की कोशिश की थी। इतना ही नहीं, फैसल ने आमिर के निजी जीवन को लेकर भी कई बेहद निजी और तीखे दावे किए थे, जिसमें उनके एक नाजायज बच्चे होने की बात भी शामिल थी। इन बयानों के बाद दोनों भाइयों के बीच की खाई काफी गहरी हो गई थी।
बिखरे रिश्तों को समेटने की कोशिश
लंबे समय तक चले इस मनमुटाव और कानूनी व मानसिक बहसों के बाद अब फैसल खान के रुख में आया यह बदलाव बेहद महत्वपूर्ण है। फैसल के इस कदम को उनके परिवार के करीब आने और पुराने जख्मों को भरने की एक गंभीर कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। आमिर खान की तरफ से फिलहाल इस माफीनामे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन फैसल के इन बदले सुरों ने यह साफ कर दिया है कि वह अब विवादों को पीछे छोड़कर अपने अपनों का साथ चाहते हैं।
पहली नज़र का प्यार और अमर सिंह की एंट्री: अखिलेश-डिंपल की फिल्मी लव स्टोरी

पहली नज़र का प्यार और अमर सिंह की एंट्री: अखिलेश-डिंपल की फिल्मी लव स्टोरी

Delight News
📅 01 Jul2026

अखिलेश यादव और डिंपल की प्रेम कहानी किसी बॉलीवुड ब्लॉकबस्टर से कम नहीं है। एक पार्टी में शुरू हुई पहली मुलाकात, फिर ऑस्ट्रेलिया की दूरी और दोनों परिवारों के अलग बैकग्राउंड के कारण आया शादी में मोड़। आखिरकार, राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले अमर सिंह की एंट्री ने इस कहानी को मुकाम तक पहुंचाया।

पहली नज़र का प्यार और अमर सिंह की एंट्री: अखिलेश-डिंपल की फिल्मी लव स्टोरी
अखिलेश यादव और डिंपल की प्रेम कहानी किसी बॉलीवुड ब्लॉकबस्टर से कम नहीं है। एक पार्टी में शुरू हुई पहली मुलाकात, फिर ऑस्ट्रेलिया की दूरी और दोनों परिवारों के अलग बैकग्राउंड के कारण आया शादी में मोड़। आखिरकार, राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले अमर सिंह की एंट्री ने इस कहानी को मुकाम तक पहुंचाया।
17 की डिंपल, फुटबॉल के शौकीन अखिलेश और वो पहली मुलाकात
यह उस दौर की बात है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुलायम सिंह यादव का कद लगातार बढ़ रहा था। इसी बीच, एक बेहद आम छात्र की तरह अखिलेश यादव अपनी पढ़ाई और फुटबॉल में व्यस्त रहा करते थे। तभी उनकी जिंदगी में डिंपल की एंट्री हुई। डिंपल उस वक्त महज 17 साल की थीं और स्कूली पढ़ाई कर रही थीं। दोनों की मुलाकात एक कॉमन फ्रेंड की पार्टी में हुई थी। अखिलेश को डिंपल की सादगी भा गई, तो डिंपल को अखिलेश का शांत स्वभाव पसंद आया। यहीं से दोनों के बीच मुलाकातों और बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ, जो धीरे-धीरे गहरे प्यार में बदल गया।
ऑस्ट्रेलिया की दूरी और खतों का वो दौर
प्यार अभी परवान चढ़ ही रहा था कि अखिलेश यादव को उच्च शिक्षा के लिए ऑस्ट्रेलिया जाना पड़ा। आज के दौर की तरह तब सोशल मीडिया या वीडियो कॉलिंग की सुविधा नहीं थी। दोनों के बीच लंबी दूरी आ चुकी थी, लेकिन दूरियों ने उनके रिश्ते को और मजबूत करने का काम किया। ऑस्ट्रेलिया में रहते हुए भी अखिलेश का दिल भारत में ही धड़कता था। दोनों ने खतों और फोन कॉल्स के जरिए एक-दूसरे का साथ बनाए रखा। पढ़ाई पूरी करने के बाद जब अखिलेश भारत लौटे, तो उनके दिमाग में बिल्कुल साफ था कि अगर वह शादी करेंगे, तो सिर्फ डिंपल से।
मिलिट्री वर्सेज पॉलिटिक्स: जब आड़े आया परिवारों का बैकग्राउंड
भारत लौटने के बाद असली परीक्षा शुरू होनी बाकी थी। अखिलेश यादव एक कद्दावर राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखते थे, जहां हर फैसला राजनीति के नफा-नुकसान को देखकर लिया जाता था। वहीं दूसरी तरफ, डिंपल के पिता थल सेना में कर्नल थे। एक अनुशासित मिलिट्री बैकग्राउंड वाले परिवार के लिए अपनी बेटी की शादी एक बड़े राजनीतिक घराने में करना आसान फैसला नहीं था। अखिलेश के पिता मुलायम सिंह यादव भी इस रिश्ते के लिए शुरुआत में पूरी तरह तैयार नहीं थे। दोनों परिवारों की अलग जीवनशैली और सोच के कारण शादी की राह में बड़ी मुश्किलें खड़ी हो गईं।
संकटमोचक बने अमर सिंह और पूरी हुई अधूरी दास्तान
जब दोनों परिवारों को मनाना लगभग नामुमकिन लग रहा था, तब इस लव स्टोरी में एंट्री हुई मुलायम सिंह यादव के सबसे करीबी दोस्त और समाजवादी पार्टी के संकटमोचक अमर सिंह की। अखिलेश ने अपनी बात अमर सिंह के सामने रखी। अमर सिंह ने दोनों के प्यार की गहराई को समझा और मध्यस्थ की भूमिका निभाई। उन्होंने मुलायम सिंह यादव को इस शादी के लिए न सिर्फ राजी किया, बल्कि डिंपल के परिवार के सामने भी इस रिश्ते की खूबियां रखीं। अमर सिंह के दखल के बाद दोनों परिवार झुक गए और आखिरकार इस खूबसूरत प्रेम कहानी को शादी का मुकाम मिला।

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